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दिल्ली

कांग्रेस-बसपा के रिश्तों की सियासी इबारत

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जेडीएस नेता एचडी कुमार स्वामी के शपथग्रहण समारोह में 23 मई 2018 को मायावती और सोनिया गांधी मिल रही थीं. तब राजनीतिक विश्लेषकों ने अनुमान लगाया कि इसी पर कांग्रेस-बसपा के रिश्तों की सियासी इबारत लिखी जाएगी. दोनों नेत्रियों के मिलने की यह तस्वीर न सिर्फ बीजेपी की बेचैनी बढ़ा रही थी बल्कि शपथग्रहण समारोह के पारंपरिक फोटो पर भारी भी पड़ी थी. लेकिन यह सियासत है जिसमें रिश्तों के बनते-बिगड़ते देर नहीं लगती.

लोकसभा चुनाव में पहले से अच्छे प्रदर्शन के लिए दोनों पार्टियों अपना-अपना दांव चल रही हैं. जिसमें से कुछ दांव सपा-बसपा गठबंधन को परेशान करते नजर आ रहे हैं. बताया जाता है कि इसलिए बसपा प्रमुख मायावती कांग्रेस से खासी नाराज हैं. उन्होंने किसी भी राज्य में कांग्रेस से गठबंधन न करने का एलान कर दिया है.

सपा-बसपा ने कांग्रेस की पारंपरिक अमेठी और रायबरेली सीटों पर अपने प्रत्याशी न उतारने का फैसला कर दरियादिली दिखाने की कोशिश की थी. दोनों पार्टियों को उम्मीद थी कि कांग्रेस भी इसके बदले में बड़ा दिल दिखाएगी. सपा-बसपा को लग रहा था कि बीजेपी को आउट करने के लिए कांग्रेस गठबंधन की शर्तों पर राजी हो जाएगी. लेकिन कांग्रेस ने 11 प्रत्याशियों के नामों का एलान भी कर दिया. ऊपर से बुधवार को प्रियंका गांधी ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर से हॉस्पिटल में मुलाकात की. दोनों घटनाक्रमों के बाद कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के बीच तल्खी बढ़ गई है. यह भी आशंका पैदा हो रही है कि गठबंधन अमेठी और रायबरेली में भी अपने प्रत्याशी उतार सकता है.

दोनों में नाराजगी की पुरानी वजहें भी हैं. बसपा राष्ट्रीय पार्टी है, लेकिन यूपी को छोड़कर कहीं उसका ज्यादा आधार नहीं है. पार्टी ने कभी रीजनल लीडर नहीं स्थापित होने दिए. बसपा को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सहारे वो छत्तीसगढ़, राजस्थान और एमपी में अपनी जमीन मजबूत कर लेगी. लेकिन कांग्रेस ने बसपा से गठबंधन नहीं किया. मायावती के सपोर्ट के बिना भी कांग्रेस ने इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया. छत्तीसगढ़ में तो उसने बसपा को बड़ा झटका दिया. कांग्रेस ने गुजरात, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के चुनाव में भी मायावती को नाराज किया. कर्नाटक में मायावती ने जेडीएस के साथ गठबंधन किया.

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दिल्ली

लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद लालू प्रसाद यादव ने छोड़ा खाना -पीना तबीयत और बिगड़ी

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  • नईदिल्ली 26 मई 2019
  • लोकसभा चुनावों के परिणाम के बाद से ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने खाना-पीना छोड़ दिया है। रांची के RIMS हॉस्पिटल में भर्ती लालू यादव का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि खाना छोड़ने की वजह से लालू की तबीयत बिगड़ती जा रही है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में आरजेडी एक भी सीट नहीं जीत सकी।

रिजल्ट के बाद लालू ने छोड़ा लंच, तबीयत खराब

  • RIMS के डॉक्टर उमेश प्रसाद ने बताया, ‘उनकी दिनचर्या काफी बेतरतीब हो गई है। बीते 2-3 दिनों से लालू सुबह में नाश्ता तो किसी तरह कर लेते हैं, लेकिन दोपहर का खाना नहीं खा रहे हैं। इस तरह वह सुबह में नाश्ता करने के बाद सीधा रात को खाना खाते हैं, जिसके कारण उन्हें इंसुलिन देने में परेशानी हो रही है।’ बता दें कि बिहार की 40 सीटों में से एनडीए ने 39 पर कब्जा जमा लिया, जबकि लालू की पार्टी आरजेडी का खाता भी नहीं खुल सका।

ब्लड, शुगर लेवल पर पड़ सकता है असर

  • डॉक्टर ने बताया, ‘हम अपनी तरफ से लालू को काफी समझा रहे हैं। इस तरफ से खाना छोड़ना उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। अगर वह समय से खाना नहीं खाएंगे तो उन्हें दवा और इंसुलिन देने में मुश्किल होगी। इससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ेगा। अगर उनकी दिनचर्या में सुधार नहीं हुआ तो फिर ब्लड और शुगर लेवल पर काफी असर पड़ सकता है।’
  • यह पूछे जाने पर कि लालू की यह स्थिति चुनाव में उनकी पार्टी के बुरे प्रदर्शन की वजह से हुई है, डॉक्टर ने कहा, ‘हम उनसे इस तरह के सवाल नहीं पूछ रहे हैं। आप निष्कर्ष निकाल सकते हैं। लेकिन उनकी हालत देखकर यह तनाव की स्थिति ही लग रही है।’ गौरतलब है कि लालू यादव चारा घोटाला मामले में जेल में बंद हैं और रांची के हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है।
  • वहीं लालू से मुलाकात करने आए उनकी पार्टी के एक विधायक ने तनाव की खबरों को खारिज करते हुए बताया कि यह लालूजी के लिए कोई पहला चुनाव नहीं है। एक अन्य नेता ने बताया कि लालूजी की तरफ से उन्हें विधानसभा चुनावों में बीजेपी को कड़ी चुनौती देने का निर्देश मिला है।

चुनाव में RJD का नहीं खुल सका खाता, 0 पर आउट

  • इस बार के लोकसभा चुनावों में बीजेपी नीत एनडीए ने 40 में से 39 सीटों पर जीत दर्ज की। लालू प्रसाद की आरजेडी का खाता भी नहीं खुल सका। आरजेडी ने कांग्रेस, RLSP, हम (एस) और वीआईपी पार्टियों के साथ महागठबंधन कर चुनाव लड़ा था। एकमात्र सीट कांग्रेस ही जीत सकी।

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नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाली साध्वी प्रज्ञा को पीएम मोदी कभी दिल से माफ़ नहीं कर पाएंगे

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  • नईदिल्ली 26 मई 2019
  • संसद के सेंट्रल हाल में शनिवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का नेता चुने जाने के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां मौजूद सभी सांसदों ने बधाई दी. लेकिन एक खास तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा. भोपाल से बीजेपी के टिकट पर चुनी गईं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की मोदी ने अनदेखी की.
  • असल में, लोकसभा चुनाव खत्म होने के 2 दिन पहले नाथूराम गोडसे को राष्ट्रभक्त बताकर साध्वी प्रज्ञा ने पार्टी को मुश्किल में डाल दिया था और इसकी वजह से बीजेपी को चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.
  • भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान जारी किया गया. उन्होंने कहा है कि महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे को लेकर जो भी बातें की गईं हैं, वो भयंकर खराब हैं. ये बातें पूरी तरह से घृणा के लायक हैं, सभ्य समाज के अंदर इस प्रकार की बातें नहीं चलती हैं. पीएम मोदी ने कहा कि भले ही इस मामले में उन्होंने (साध्वी प्रज्ञा) माफी मांग ली हो, लेकिन मैं अपने मन से उन्हें कभी भी माफ नहीं कर पाऊंगा.
  • मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे. जिसपर भारतीय जनता पार्टी की किरकिरी हुई थी और पूरे विपक्ष ने बीजेपी को आड़े हाथों ले लिया था. किरकिरी के बाद साध्वी प्रज्ञा ने माफी मांग ली थी, लेकिन तबतक विवाद गहरा चुका था. पहले अमित शाह का बयान आया और फिर उसके बाद नरेंद्र मोदी ने बयान दिया.
  • हरहाल, साध्वी पहले ही मुसीबत में फंस चुकी हैं, जिसके बाद मोदी को कहना पड़ा था कि वो उन्हें दिल से माफ नहीं करेंगे. अभी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर बीजेपी के अनुशासन समिति की कार्रवाई की तलवार भी लटकी हुआ है, ऐसे में साध्वी को मोदी की अनदेखी महत्वपूर्ण है.

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वित्त मंत्री पी चिदंबरम की राहुल गांधी से भावनात्मक अपील की वह अपने पद से इस्तीफा न दें

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  • नईदिल्ली 26 मई 2019
  • पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से अपील की है कि वह पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफा न दें, ऐसा करने से दक्षिण भारत के कांग्रेस कार्यकर्ता आत्महत्या कर लेंगे. शनिवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग के दौरान पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसा जताया और राहुल गांधी से पद पर बने रहने की अपील की. वहीं सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी अपने पद से इस्तीफा देने पर अड़े हुए हैं.
  • कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद राहुल गांधी पार्टी में किसी तरह का बदलाव लाने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन अपनी भूमिका से वह न हटें.

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संभालें राहुल

  • वर्किंग कमेटी ने कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यसमिति के सम्मुख अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे की पेशकश की, मगर कार्यसमिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति व एक स्वर से इसे खारिज करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष से अनुरोध किया कि प्रतिकूल व चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पार्टी को राहुल गांधी के नेतृत्व व मार्गदर्शन की आवश्यकता है.’
  • बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘राहुल गांधी जी ने इस्तीफे की पेशकश की. सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से उनकी पेशकश को खारिज किया और आग्रह किया कि आपके नेतृत्व की जरूरत है और आगे भी रहेगी.’ उन्होंने कहा, ‘अगर कोई नेता राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की भूमिका निभा सकता है तो वह राहुल गांधी हैं.’

हार की वजह तत्काल जानना मुश्किल

  • पार्टी के वरिष्ठ नेता ए के एंटनी ने कहा, ‘पार्टी का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा. पार्टी इस पर विचार करेगी. हम तत्काल किसी निष्कर्ष नहीं पहुंच सकते कि क्यों हारे. इस पर विस्तृत चर्चा होगी.’
  • सूत्रों के हवाले से यह भी खबर है कि इस मामले में जब यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपील की गई कि राहुल गांधी को इस्तीफा देने से रोका जाए तो उन्होंने कहा कि यह राहुल गांधी की इच्छा पर है कि वह अपने पद पर बने रहते हैं या इस्तीफा देते हैं.

सकारात्मक होगी विपक्ष की भूमिका

  • सीडब्ल्यूसी की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है, ‘कांग्रेस कार्यसमिति 12.13 करोड़ साहसी व सजग मतदाताओं को धन्यवाद देती है, जिन्होंने कांग्रेस पार्टी में अपना विश्वास व्यक्त किया. कांग्रेस पार्टी एक जिम्मेदार व सकारात्मक विपक्ष के रूप में अपना कर्तव्य निभाएगी और देशवासियों की समस्याओं को सामने रख, उनके प्रति सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करेगी.’
  • प्रस्ताव में कहा गया है, “ कांग्रेस कार्यसमिति ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश के युवाओं, किसानों, महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ों, गरीबों, शोषितों और वंचितों की समस्याओं के लिए आगे बढ़कर जूझने का आग्रह किया.’

कांग्रेस को मूलभूत सुधार की जरूरत

  • सीडब्ल्यूसी ने कहा, ‘कांग्रेस कार्यसमिति उन चुनौतियों, विफलताओं और कमियों को स्वीकार करती है, जिनकी वजह से ऐसा जनादेश आया. कांग्रेस कार्यसमिति पार्टी के हर स्तर पर संपूर्ण आत्मचिंतन के साथ साथ कांग्रेस अध्यक्ष को अधिकृत करती है कि वह पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन एवं विस्तृत पुनर्संरचना करें. इसके लिए योजना जल्द से जल्द लागू की जाए.’ प्रस्ताव में यह भी कहा गया है, ‘कांग्रेस पार्टी ने चुनाव हारा है, लेकिन हमारा अदम्य साहस, हमारी संघर्ष की भावना और हमारे सिद्धांतों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पहले से ज्यादा मजबूत है. कांग्रेस पार्टी नफरत और विभाजन की ताकतों से लोहा लेने के लिए सदैव कटिबद्ध है.’
  • सीडब्ल्यूसी की बैठक में राहुल गांधी के अलावा संप्रग (यूपीए) प्रमुख सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और कार्यसमिति के अन्य सदस्य शामिल हुए. गौरतलब है कि इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. कांग्रेस पार्टी महज 52 सीटों पर सिमट गई है. 2014 के चुनाव में 44 सीटें जीतने वाली पार्टी को इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन नरेंद्र मोदी की सुनामी में ऐसा मुमकिन न हो सका.

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