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अयोध्या में ‘श्री राम मंदिर भूमि पूजन के अवसर पर पूरे अमेरिका में अमेरिका में होगी एक साथ राष्ट्रीय प्रार्थना

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि पूजन के अवसर पर उत्तर अमेरिका के हिंदू मंदिरों में ऑनलाइन राष्ट्रीय प्रार्थना का आयोजन किया जाएगा।धार्मिक समूहों ने यह जानकारी दी। हिंदू मंदिर एग्जिक्यूटिव्ज कॉन्फ्रेंस (एचएमईसी) और हिंदू मंदिर प्रीस्ट्स कॉन्फ्रेंस (एचएमपीसी) ने शुक्रवार को एक वक्तव्य जारी कर अयोध्या में होने वाले ”श्री राम मंदिर भूमि पूजन के अवसर पर पूरे अमेरिका में एक साथ राष्ट्रीय प्रार्थना करने का आह्वान किया। इसमें कहा गया कि इस शुभ अवसर पर अमेरिका

, कनाडा और कैरिबियाई द्वीपों के मंदिर भूमि पूजन की पूर्व संध्या पर भगवान राम के ‘चरणकमल में सेवा देंगे।
कैलिफोर्निया के बे इलाके में शिव दुर्गा मंदिर के संस्थापक, अध्यक्ष एवं आचार्य पंडित कृष्ण कुमार पांडेय ने कहा, ”वैश्विक हिंदू समुदाय के लिए पांच अगस्त 2020 का ऐतिहासिक समारोह नए युग की शुरुआत है। हमें इस दिन को अब से एक त्योहार के रूप में मनाना चाहिए।

अमेरिका में विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि पांच अगस्त को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में मंदिर की आधारशिला रखेंगे तब उस अवसर पर प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाएगा। उत्तर अमेरिका में सामूहिक मंत्रोच्चारण होगा, जिसके बाद अनूप जलोटा और संजीवनी भेलांडे का भजन सुना जाएगा।

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जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा “जनजातीय लोगों का सशक्तिकरण, भारत में बड़ा बदलाव”

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नीति आयोग के सीईओ श्री अमिताभ कांत और नीति आयोग के सदस्य श्री रमेश चंद ने 10 अगस्त, 2020 को जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा विकसित ऑनलाइन कार्यनिष्पादन डैशबोर्ड “जनजातीय लोगों का सशक्तिकरण, भारत में बड़ा बदलाव” का उद्घाटन किया। यह शुभारम्भ न्यू इंडिया और अन्य नीति पहलों के लिए रणनीति, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के राष्ट्रीय विकास एजेंडा के आलोक में जनजातीय कार्य मंत्रालय की सीएसएस/सीएस योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित नीति आयोग की बैठक के दौरान किया गया। यह उल्लेख किया जा सकता है कि एसडीजी को ‘हमारे विश्व का रुपांतर करनाः सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा’ के संकल्प के एक भाग के रूप में सितम्बर, 2015 में अपनाया गया था। केंद्र सरकार के स्तर पर, नीति आयोग को देश में 17 सतत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन की देखरेख करने की भूमिका सौंपी गई है। इस बैठक में श्री दीपक खाण्डेकर्माडे के नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधिकारियों ने पिछले एक वर्ष के दौरान शुरू की गई विभिन्न ई-पहलो के बारे में एक प्रस्तुति दी।

श्री अमिताभ कांत ने मंत्रालय को विभिन्न योजनाओं के डिजिटलीकरण और उनका कार्यनिष्पादन डैशबोर्ड “जनजातीय लोगों का सशक्तिकरण, भारत में बड़ा बदलाव” के साथ समेकन करने के लिए मंत्रालय को बधाई दी। नीति आयोग के सदस्य श्री रमेश चंद ने नीति आयोग द्वारा निर्धारित उत्पादन निष्कर्ष लक्ष्यों को अर्जित करने में किए गए प्रयासों के लिए मंत्रालय की सराहना की।

कार्यनिष्पादन डैशबोर्ड एक परस्पर प्रभावी और गतिशील मंच है जो एसडीजी को अर्जित करने के लिए मंत्रालय की योजनाओं/पहलों के अद्यतन और वास्तविक विवरण को प्रदर्शित करता है। यह डैशबोर्ड मंत्रालय की 5 छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रदर्शन का पता लगाता है जिनमें प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख वंचित अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को 2500 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त होता है। नीति आयोग को यह जानकारी दी गई कि मंत्रालय ने हाल ही में डीबीटी मिशन के मार्गदर्शन में तहत “आईटी सक्षम छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से जनजातीय लोगों के सशक्तिकरण” के लिए 66वाँ स्कोच स्वर्ण पुरस्कार मिला है। नीति आयोग के लिए अपने अधिकार के एक हिस्से के रुप में सामाजिक समावेश के बारे में केंद्र प्रायोजित योजनाओं का राष्ट्रीय मूल्यांकन करते हुए केपीएमजी ने ई-गवर्नेंस में श्रेष्ठ प्रक्रिया के रूप में जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) पोर्टल को मान्यता दी है। इससे जनजातीय छात्रों के लिए सेवा आपूर्ति में अधिक पारदर्शिता जवाबदेही और व्यापक सुधार आया है।  गतिशील डैशबोर्ड विभिन्न राज्यों और विभिन्न देशों से जनजातीय छात्रों के विवरण ग्रहण करता है।

डैशबोर्ड एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) योजना के तहत कार्यरत स्कूलों, निर्माणाधीन स्कूलों और विभिन्न ईएमआरएस स्कूलों में छात्रों के जिलेवार विवरण प्रदर्शित करता है। मंत्रालय शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को भी धन उपलब्ध कराता है। डैशबोर्ड जिलेवार एनजीओ के विवरण, इन्हें दिए गए धन और लाभार्थियों का विवरण का पता लगाता है। सभी योजनाओं और पहलों के लिए प्रत्येक योजना के संबंध में जिला स्तर तक की जानकारी संकलित की गई है। पोस्ट मैट्रिक और प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के संबंध में, डेटा राज्यों द्वारा साझा किया गया है। जनजातीय कार्य मंत्रालय एसटीसी (अनुसूची जनजाति घटक) पर भी नज़र रखता है, जिसमें 41 मंत्रालयों ने अनुसूचित जाति के कल्याण एवं विकास के लिए अपने बजट का एक निश्चित प्रतिशत खर्च किया है। 2019-20 में 275 से अधिक योजनाओं में 41 मंत्रालयों को 51,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इन सभी मंत्रालयों का प्रदर्शन डैशबोर्ड में विभिन्न मापदंडों पर देखा जा सकता है। मंत्रालय की विभिन्न ई-पहलों के लिंक भी डैशबोर्ड में दिए गए हैं। डैशबोर्ड डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है, जो जनजातीय लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगा और प्रणाली में पारदर्शिता लाएगा। गोइंग ऑनलाइन एज लीडर्स (जीओएएल) कार्यक्रम और सिकल सेल सपोर्ट कॉर्नर के तहत फेसबुक के साथ मंत्रालय की संयुक्त पहल को भी देखा जा सकता है। डैशबोर्ड को राष्ट्रीय सूचना केन्द्र (एनआईसी) के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑफ डेटा एनालिटिक्स (सीईडीए), संगठन द्वारा डोमेन नाम (http://dashboard.tribal.gov.in) के साथ विकसित किया गया है।

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‘पारदर्शी कराधान – ईमानदार का सम्मान’ के लिए प्‍लेटफॉर्म लॉन्च

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देश में चल रहा Structural Reforms का सिलसिला आज एक नए पड़ाव पर पहुंचा है। Transparent Taxation – Honouring The Honest, 21वीं सदी के टैक्स सिस्टम की इस नई व्यवस्था का आज लोकार्पण किया गया है।

इस प्लेटफॉर्म में Faceless Assessment, Faceless Appeal और Taxpayers Charter जैसे बड़े रिफॉर्म्स हैं। Faceless Assessment और Taxpayers Charter आज से लागू हो गए हैं। जबकि Faceless appeal की सुविधा 25 सितंबर यानि दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्मदिन से पूरे देशभर में नागरिकों के लिए उपलब्ध हो जाएगी। अब टैक्स सिस्टम भले ही Faceless हो रहा है, लेकिन टैक्सपेयर को ये Fairness और Fearlessness का विश्वास देने वाला है।

मैं सभी टैक्सपेयर्स को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं और इन्‍कम टैक्स विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

साथियों,

बीते 6 वर्षों में हमारा फोकस रहा है, Banking the Unbanked Securing the Unsecured और, Funding the Unfunded. आज एक तरह से एक नई यात्रा शुरू हो रही है। Honoring the Honest- ईमानदार का सम्मान। देश का ईमानदार टैक्सपेयर राष्ट्रनिर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। जब देश के ईमानदार टैक्सपेयर का जीवन आसान बनता है, वो आगे बढ़ता है, तो देश का भी विकास होता है, देश भी आगे बढ़ता है।

साथियों,

आज से शुरू हो रहीं नई व्यवस्थाएं, नई सुविधाएं, Minimum Government, Maximum Governance के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती हैं। ये देशवासियों के जीवन से सरकार को, सरकार के दखल को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

साथियों, आज हर नियम-कानून को, हर पॉलिसी को Process और Power Centric अप्रोच से बाहर निकालकर उसको People Centric और Public Friendly बनाने पर बल दिया जा रहा है। ये नए भारत के नए गवर्नेंस मॉडल का प्रयोग है और इसके सुखद परिणाम भी देश को मिल रहे हैं। आज हर किसी को ये एहसास हुआ है कि शॉर्ट-कट्स ठीक नहीं है, गलत तौर-तरीके अपनाना सही नहीं है।वो दौर अब पीछे चला गया है। अब देश में माहौल बनता जा रहा है कि कर्तव्य भाव को सर्वोपरि रखते हुए ही सारे काम करें।

सवाल ये कि बदलाव आखिर कैसे आ रहा है? क्या ये सिर्फ सख्ती से आया है? क्या ये सिर्फ सज़ा देने से आया है? नहीं, बिल्कुल नहीं। इसके चार बड़े कारण हैं।

पहला, पॉलिसी ड्रिवेन गवर्नेंस। जब पॉलिसी स्पष्ट होती है तो Grey Areas Minimum हो जाते हैं और इस कारण व्यापार में, बिजनेस में डिस्क्रीशन की गुंजाशन कम हो जाती है।

दूसरा- सामान्य जन की ईमानदारी पर विश्वास।

तीसरा, सरकारी सिस्टम में ह्यूमेन इंटरफेस को सीमित करके टेक्नॉलॉजी का

बड़े स्तर पर उपयोग। आज सरकारी खरीद हो, सरकारी टेंडर हो या सरकारी सेवाओं की डिलिवरी, सब जगह Technological Interface सर्विस दे रहे हैं।

और चौथा, हमारी जो सरकारी मशीनरी है, जो ब्यूरोक्रेसी है, उसमें efficiency, Integrity और Sensitivity के गुणों को Reward किया जा रहा है, पुरस्कृत किया जा रहा है।

साथियों,

एक दौर था जब हमारे यहां Reforms की बहुत बातें होती थीं। कभी मजबूरी में कुछ फैसले ले लिए जाते थे, कभी दबाव में कुछ फैसले हो जाते थे, तो उन्हें Reform कह दिया जाता था। इस कारण इच्छित परिणाम नहीं मिलते थे। अब ये सोच और अप्रोच, दोनों बदल गई है।

हमारे लिए Reform का मतलब है, Reform नीति आधारित हो, टुकड़ों में नहीं हो, Holistic हो और एक Reform, दूसरे Reform का आधार बने, नए Reform का मार्ग बनाए। और ऐसा भी नहीं है कि एक बार Reform करके रुक गए। ये निरंतर, सतत चलने वाली प्रक्रिया है। बीते कुछ वर्षो में देश में डेढ़ हजार ज्यादा कानूनों को समाप्त किया गया है।

Ease of Doing Business की रैंकिंग में भारत आज से कुछ साल पहले 134वें नंबर पर था। आज भारत की रैंकिंग 63 है। रैंकिंग में इतने बड़े बदलाव के पीछे अनेकों Reforms हैं, अनेकों नियमों-कानूनों में बड़े परिवर्तन हैं। Reforms के प्रति भारत की इसी प्रतिबद्धता को देखकर, विदेशी निवेशकों का विश्वास भी भारत पर लगातार बढ़ रहा है। कोरोना के इस संकट के समय भी भारत में रिकॉर्ड FDI का आना, इसी का उदाहरण है।

साथियों,

भारत के टैक्स सिस्टम में Fundamental और Structural Reforms की ज़रूरत इसलिए थी क्योंकि हमारा आज का ये सिस्टम गुलामी के कालखंड में बना और फिर धीरे धीरे Evolve हुआ। आज़ादी के बाद इसमें यहां वहां थोड़े बहुत परिवर्तन किए गए, लेकिन Largely सिस्टम का Character वही रहा।

परिणाम ये हुआ कि जो टैक्सपेयर राष्ट्र निर्माण का एक मज़बूत पिलर है, जो देश को गरीबी से बाहर निकालने के लिए योगदान दे रहा है, उसको कठघरे में खड़ा किया जाने लगा। इन्‍कम टैक्स का नोटिस फरमान की तरह बन गया। देश के साथ छल करने वाले कुछ मुट्ठीभर लोगों की पहचान के लिए बहुत से लोगों को अनावश्यक परेशानी से गुज़रना पड़ा। कहां तो टैक्स देने वालों की संख्या में गर्व के साथ विस्तार होना चाहिए था और कहां गठजोड़ की, सांठगांठ की व्यवस्था बन गई।

इस विसंगति के बीच ब्लैक और व्हाइट का उद्योग भी फलता-फूलता गया। इस व्यवस्था ने ईमानदारी से व्यापार-कारोबार करने वालों को, रोज़गार देने वालों को और देश की युवा शक्ति की आकांक्षाओं को प्रोत्साहित करने के बजाय कुचलने का काम किया।

साथियों,

जहां Complexity होती है, वहां Compliance भी मुश्किल होता है। कम से कम कानून हो, जो कानून हो वो बहुत स्पष्ट हो तो टैक्सपेयर भी खुश रहता है और देश भी। बीते कुछ समय से यही काम किया जा रहा है। अब जैसे, दर्जनों taxes की जगह GST आ गया। रिटर्न से लेकर रिफंड की व्यवस्था को पूरी तरह से ऑनलाइन किया गया।

जो नया स्लैब सिस्टम आया है, उससे बेवजह के कागज़ों और दस्तावेज़ों को जुटाने की मजबूरी से मुक्ति मिल गई है। यही नहीं, पहले 10 लाख रुपए से ऊपर के विवादों को लेकर सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाती थी। अब हाईकोर्ट में 1 करोड़ रुपए तक के और सुप्रीम कोर्ट में 2 करोड़ रुपए तक के केस की सीमा तय की गई है। विवाद से विश्वास जैसी योजना से कोशिश ये है कि ज्यादातर मामले कोर्ट से बाहर ही सुलझ जाएं। इसी का नतीजा है कि बहुत कम समय में ही करीब 3 लाख मामलों को सुलझाया जा चुका है।

साथियों,

प्रक्रियाओं की जटिलताओं के साथ-साथ देश में Tax भी कम किया गया है। 5 लाख रुपए की आय पर अब टैक्स जीरो है। बाकी स्लैब में भी टैक्स कम हुआ है। Corporate tax के मामले में हम दुनिया में सबसे कम tax लेने वाले देशों में से एक हैं।

साथियों,

कोशिश ये है कि हमारी टैक्स प्रणाली Seamless हो, Painless हो, Faceless हो। Seamless यानि टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन, हर टैक्सपेयर को उलझाने के बजाय समस्या को सुलझाने के लिए काम करे। Painless यानि टेक्नॉलॉजी से लेकर Rules तक सबकुछ Simple हो। Faceless यानि Taxpayer कौन है और Tax Officer कौन है, इससे मतलब होना ही नहीं चाहिए। आज से लागू होने वाले ये रिफॉर्म्स इसी सोच को आगे बढ़ाने वाले हैं।

साथियों,

अभी तक होता ये है कि जिस शहर में हम रहते हैं, उसी शहर का टैक्स डिपार्टमेंट हमारी टैक्स से जुड़ी सभी बातों को हैंडल करता है। स्क्रूटनी हो, नोटिस हो, सर्वे हो या फिर ज़ब्ती हो, इसमें उसी शहर के इन्‍कम टैक्स डिपार्टमेंट की, आयकर अधिकारी की मुख्य भूमिका रहती है। अब ये भूमिका एक प्रकार से खत्म हो गई है, अब इसको टेक्नोलॉजी की मदद से बदल दिया गया है।

अब स्क्रूटनी के मामलों को देश के किसी भी क्षेत्र में किसी भी अधिकारी के पास रैंडम तरीके से आवंटित किया जाएगा। अब जैसे मुंबई के किसी टैक्सपेयर का Return से जुड़ा कोई मामला सामने आता है, तो अब इसकी छानबीन का जिम्मा मुंबई के अधिकारी के पास नहीं जाएगा, बल्कि संभव है वो चेन्नई की फेसलेस टीम के पास जा सकता है। और वहां से भी जो आदेश निकलेगा उसका review किसी दूसरे शहर, जैसे जयपुर या बेंगलुरु की टीम करेगी। अब फेसलेस टीम कौन सी होगी, इसमें कौन-कौन होगा ये भी randomly किया जाएगा। इसमें हर साल बदलाव भी होता रहेगा।

साथियों,

इस सिस्टम से करदाता और इन्‍कम टैक्स दफ्तर को जान-पहचान बनाने का, प्रभाव और दबाव का मौका ही नहीं मिलेगा। सब अपने-अपने दायित्वों के हिसाब से काम करेंगे। डिपार्टमेंट को इससे लाभ ये होगा कि अनावश्यक मुकदमेबाज़ी नहीं होगी। दूसरा ट्रांस्फर-पोस्टिंग में लगने वाली गैरज़रूरी ऊर्जा से भी अब राहत मिलेगी। इसी तरह, टैक्स से जुड़े मामलों की जांच के साथ-साथ अपील भी अब फेसलेस होगी।

साथियों,

टैक्सपेयर्स चार्टर भी देश की विकास यात्रा में बहुत बड़ा कदम है। भारत के इतिहास में पहली बार करदाताओं के अधिकारों और कर्तव्यों को कोडीफाई किया गया है, उनको मान्यता दी गई है। टैक्सपेयर्स को इस स्तर का सम्मान और सुरक्षा देने वाले गिने चुने देशों में अब भारत भी शामिल हो गया है।

अब टैक्सपेयर को उचित, विनम्र और तर्कसंगत व्यवहार का भरोसा दिया गया है। यानि आयकर विभाग को अब टैक्सपेयर की Dignity का, संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखना होगा। अब टैक्सपेयर की बात पर विश्वास करना होगा, डिपार्टमेंट उसको बिना किसी आधार के ही शक की नज़र से नहीं देख सकता। अगर किसी प्रकार का संदेह है भी, तो टैक्सपेयर को अब अपील और समीक्षा की अधिकार दिया गया है।

साथियों,

अधिकार हमेशा दायित्वों के साथ आते हैं, कर्तव्यों के साथ आते हैं। इस चार्टर में भी टैक्सपेयर्स से कुछ अपेक्षाएं की गई हैं। टैक्सपेयर के लिए टैक्स देना या सरकार के लिए टैक्स लेना, ये कोई हक का अधिकार का विषय नहीं है, बल्कि ये दोनों का दायित्व है। टैक्सपेयर को टैक्स इसलिए देना है क्योंकि उसी से सिस्टम चलता है, देश की एक बड़ी आबादी के प्रति देश अपना फर्ज़ निभा सकता है।

इसी टैक्स से खुद टैक्सपेयर को भी तरक्की के लिए, प्रगति के लिए, बेहतर सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर मिल पाता है। वहीं सरकार का ये दायित्व है कि टैक्सपेयर की पाई-पाई का सदुपयोग करे। ऐसे में आज जब करदाताओं को सुविधा और सुरक्षा मिल रही है, तो देश भी हर टैक्सपेयर से अपने दायित्वों के प्रति ज्यादा जागरूक रहने की अपेक्षा करता है।

साथियों,

देशवासियों पर भरोसा, इस सोच का प्रभाव कैसे जमीन पर नजर आता है, ये समझना भी बहुत जरूरी है। वर्ष 2012-13 में जितने टैक्स रिटर्न्स होते थे, उसमें से 0.94 परसेंट की स्क्रूटनी होती थी। वर्ष 2018-19 में ये आंकड़ा घटकर 0.26 परसेंट पर आ गया है। यानि केस की स्क्रूटनी, करीब-करीब 4 गुना कम हुई है। स्क्रूटनी का 4 गुना कम होना, अपने आप में बता रहा है कि बदलाव कितना व्यापक है।

साथियों,

बीते 6 वर्षों में भारत ने tax administration में governance का एक नया मॉडल विकसित होते देखा है।

We Have, Decreased complexity, Decreased taxes, Decreased litigation, Increased transparency, Increased tax compliance, Increased trust on the tax payer.

साथियों,

इन सारे प्रयासों के बीच बीते 6-7 साल में इन्कम टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या में करीब ढाई करोड़ की वृद्धि हुई है। ये वृद्धि तो बहुत बड़ी है लेकिन इस बात से हम इनकार नहीं कर सकते हैं कि इसके बावजूद भी 130 करोड़ के देश में ये बहुत कम है। इतने बड़े देश में 130 करोड़ में से डेढ़ करोड़ साथी ही इन्कम टैक्स जमा करते हैं। मैं आज देशवासियों से भी आग्रह करूंगा जो सक्षम हैं उनको भी आग्रह करूंगा, भिन्‍न-भिन्‍न करके व्‍यापार उद्योग के संगठन चलाते हैं, उनको भी आग्रह करूंगा। इस पर हम सबको चिंतन करने की जरूरत है, देश को आत्मचिंतन करना होगा। और ये हमारा आत्‍मचिंतन ही आत्मनिर्भर भारत के लिए आवश्यक है, अनिवार्य है। और ये जिम्मेदारी सिर्फ टैक्स डिपार्टमेंट की नहीं है, ये जिम्‍मेदारी हर हिन्‍दुस्‍तानी की है, हर भारतीय की है। जो टैक्स देने में सक्षम हैं, लेकिन अभी वो टैक्स नेट में नहीं है, वो स्वप्रेरणा से अपनी आत्‍मा को पूछें, आगे आएं, और अभी दो दिन के बाद 15 अगस्‍त है, आजादी के लिए मर-मिटने वालों को जरा याद कीजिए; आपको लगेगा हां, मुझे भी कुछ न कुछ देना ही चाहिए।

आइए, विश्वास के, अधिकारों के, दायित्वों के, इस महत्‍वपूर्ण भावना का सम्‍मान करते हुए, इस प्लेटफॉर्म का सम्मान करते हुए, नए भारत, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करें। एक बार फिर देश के वर्तमान और भावी ईमानदार टैक्सपेयर्स को बहुत-बहुत बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं और ये पहल बहुत बड़ा फैसला किया गया है। इन्‍कम टैक्‍स के अधिकारियों को भी जितनी बधाई दें उतनी कम है। हर टैक्‍सपेयर को इन्‍कम टैक्‍स अधिकारियों को भी बधाई देनी चाहिए क्‍योंकि एक प्रकार से उन्‍होंने अपने-आप पर बंधन डाले हैं। अपनी खुद की ताकत को, अपने अधिकारों को उन्‍होंने खुद ने काटा है। अगर इन्‍कम टैक्‍स डिपार्टमेंट के अधिकारी इस प्रकार से आगे आते हैं तो किसको गर्व नहीं होगा। हर देशवासी को गर्व होना चाहिए। और पहले के जमाने में शायद टैक्‍स के कारण कुछ समय से उन्‍हीं लोगों ने टैक्‍स देने के रास्‍ते पर जाना पसंद नहीं किया होगा। अब जो रास्‍ता बना है, वो टैक्‍स देने की तरफ जाने का आकर्षक रास्‍ता बना है। और इसलिए आइए, भव्‍य भारत के निर्माण के लिए इस व्‍यवस्‍था का लाभ भी उठाएं इस व्‍यवस्‍था से जुड़ने के लिए आगे भी आएं। मैं फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं, अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। निर्मला जी और उनकी पूरी टीम को भी मैं बहुत धन्‍यवाद करता हूं कि एक के बाद एक देश के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए लंबे अर्से तक प्रभाव पैदा करने वाले अनेक सकारात्‍मक निर्णयों का नेतृत्‍व कर रहे हैं। मैं फिर एक बार सबको बधाई देता हूं, सबका धन्‍यवाद करता हूं !!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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रेल कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन ई-पास बनाने और टिकट बुकिंग के लिए सीआरआईएस द्वारा एचआरएमएस परियोजना के तहत विकसित किये गये ई-पास मॉड्यूल का शुभारंभ

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रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष ने रेल कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन ई-पास बनाने और टिकट बुकिंग के लिए सीआरआईएस द्वारा मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) परियोजना के तहत विकसित किये गये ई-पास मॉड्यूल का आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्‍यम से शुभारंभ किया। इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के सभी सदस्‍य, आईआरसीटीसी के अध्‍यक्ष सह-प्रबंध निदेशक, सीआरआईएस के प्रबंध निदेशक, सभी महाप्रबंधक, पीसीपीओएस, पीसीसीएमएस, पीएफए ​​और डीआरएम उपस्थि‍त थे।

मानव संसाधन के महानिदेशक ने इस मौके पर ई-पास मॉड्यूल और इसके चरणबद्ध कार्यान्वयन की रणनीति के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी।

कर्मचारियों के लिए पास जारी करने की प्रक्रिया अभी तक मैनुअल  ही जाती रही है। इसके अलावा रेलवे कर्मचारी के लिए पास पर ऑनलाइन टिकट बुक करने की कोई सुविधा भी नहीं थी।

ईआर-पास मॉड्यूल को एचआरएमएस परियोजना के तहत सीआरआईएस द्वारा विकसित किया गया है। इसे चरणबद्ध तरीके से भारतीय रेलवे से जोड़ा जाएगा। इस सुविधा के साथ रेलवे कर्मचारी को न तो पास के लिए आवेदन करने के लिए कार्यालय आना पड़ेगा और न ही पास जारी होने का इंतजार करना पड़ेगा।  कर्मचारी कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और ई-पास ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। ई-पास के लिए आवेदन और इसे प्राप्‍त करने की पूरी प्रक्रिया मोबाइल पर उपलब्‍ध रहेगी। इसके माध्‍यम से पहले की तरह पीआरएस/यूटीएस काउंटर से टिकट बुकिंग की सुविधा के अलावा, पास पर टिकट बुक करने की सुविधा आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर भी उपलब्‍ध होगी।

यह सुविधा रेलवे कर्मचारियों को उन्‍हें रेल पास का आसानी से उपयोग करने में मदद करेगी और साथ ही साथ सभी अधिकारियों को पास जारी करने का काम भी सुगम बनाएगी।

एचआरएमएस परियोजना भारतीय रेलवे की पूर्ण मानव संसाधन प्रक्रिया के डिजिटलीकरण की एक व्यापक योजना है। एचआरएमएस में कुल 21 मॉड्यूल की योजना बनाई गई है। लगभग 97 प्रतिशत रेलवे कर्मचारियों की बेसिक डेटा एंट्री एचआरएमएस के कर्मचारी मास्टर और ई-सर्विस रिकॉर्ड मॉड्यूल में पूरी हो चुकी है, जिसे पिछले साल लॉन्च किया गया था।

सीआरआईएस बहुत जल्द ही एचआरएमएस का ऑफिस ऑर्डर मॉड्यूल और सेटलमेंट मॉड्यूल भी लॉन्च करने जा रहा है।

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देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 13/08/2020

सुधि पाठकों की,आपको जो हेड लाइन पसंद आये,उसे एक बार क्लिक करें और पसंद ना आये, उसे छोड़  आगे बढ़ जाएँ ,देश...

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Etoi Exclusive2 days ago

देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 12/08/2020

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Etoi Exclusive3 days ago

देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 11/08/2020

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Etoi Exclusive4 days ago

देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 10/08/2020

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Etoi Exclusive5 days ago

देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 09/08/2020

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Etoi Exclusive6 days ago

देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 08/08/2020

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