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अखिलेश यादव ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशान साधा

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हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी हत्याकांड को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशान साधा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी हत्या कैसे रोक पाएंगे, जब सीएम खुद कहते हैं कि अगर आप व्यवस्था ठीक रखना चाहते हैं तो ठोक दो. लेकिन, किसी को पता नहीं है कि किसे ठोकना है.

शनिवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि लखनऊ में हिन्‍दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई. आप देख सकते हैं कि टीवी पर लगातार चल रहा है कि उनकी मां क्या कह रही हैं. उनकी मां का कहना है कि अगर हमें कभी सुरक्षा मिली थी तो वो समाजवादी सरकार में सुरक्षा थी और आजम खां के जमाने में सुरक्षा मिली थी. हमें सुरक्षा मिली थी और गनर भी मिले थे, लेकिन योगी सरकार ने हमें सुरक्षा नहीं दी, जिसके कारण हमारे बेटे की हत्या हो गई.

बता दें कि बीते शुक्रवार को ही हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड में गुजरात से तीन और यूपी से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यूपी के बिजनौर के दो मौलानाओं की भी भूमिका की जांच की जा रही है. वर्ष 2015 में इन दोनों मौलानाओं ने कमलेश तिवारी का सिर कलम करने वालों को डेढ़ करोड़ रुपये इनाम देने की घोषणा की थी.

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देश-दुनिया

इन तरीकों से मालूम करें किचन का मसाला असली है या नकली

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2 दिन पहले ही दिल्ली में मिलावटी जीरे की बड़ी खेप पकड़ी गई है जहां घास से जीरा बनाने की बात सामने आयी। अगर आपके मन में भी हल्दी, धनिया और मिर्च जैसे मसालों की शुद्धता को लेकर शंका है तो घर पर ही ऐसे करें मसालों की जांच।

  • चटक पीली हो तो नकली हो सकती है हल्दी
  • लोकल कंपनी के पैकिंग वाला मसाला भी हो सकता है मिलावटी
  • धनिया पाउडर में खुशबू न हो तो इस्तेमाल करने से बचें
  • गर्म मसाले की मिलावट को घर पर पानी में डाल कर जांच सकते हैं शुद्धता

खेमराज वर्मा, फरीदाबाद

दिल्ली में नकली और मिलावटी जीरा बनाने की फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद अब लोग इस बात को लेकर परेशान हो गए हैं कि कहीं उनके किचन में इस्तेमाल हो रहे मसाले भी मिलावटी तो नहीं हैं। आपने भी अपने शहर में देखा होगा कि बड़ी संख्या में दुकानदार खुले में रखकर हल्दी पाउडर, जीरा, गर्म मसाला, सब्जी मसाला, मिर्च पाउडर आदि मसालों की ब्रिकी करते हैं। अधिक मुनाफा लेने के चक्कर में मसाले और दूसरे खाद्य पदार्थों में भी जमकर मिलावट की जा रही है।

खुले में रखे मसालों में पड़ती रहती है धूल

फूड ऐंड सप्लाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक खुले में रखकर बेचा जा रहा मसाला नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि, खुले में रखे मसालों में मिट्टी के धूल कण पड़ते हैं। धूल मिट्टी के कण मसालों के साथ भोजन में मिश्रण होकर शरीर में जाता है जो कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।

खड़े मसाले का करें इस्तेमाल

जानकारों का कहना है कि बाजार से खड़ा मसाला खरीदकर उसका पाउडर बनाकर सब्जी में इस्तेमाल करना चाहिए। महिलाओं का कहना है कि जब वह बाजार में खुले मसाले या पैकिंग वाले मसाले से सब्जी बनाती हैं तो सब्जी का स्वाद सही नहीं रहता है। बाजार से जब खड़ा मसाला खरीदकर उससे सब्जी बनाती हैं तो उसका स्वाद अच्छा रहता है।

लोकल कंपनी के सस्ते मसाले न खरीदें

खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी एनडी शर्मा कहते हैं, लोगों को खुद ही चाहिए कि वे लोकल कंपनी का मसाला न खरीदें, बेशक दुकानदार सस्ते में ही क्यों न दे रहा हो। लोकल कंपनी के पैकिंग वाले मसाले का बिल्कुल ही प्रयोग न करें। खुले हुए मसाले से खुशबू न मिल रही हो और अगर मसाले गहरे रंग वाले हों तो ऐसे मसालों का प्रयोग कतई न करें। हो सके तो खड़े मसाले का ही इस्तेमाल करें। लोगों को चाहिए कि मिलावट मसाले की बिक्री की सूचना विभाग को देने में मदद करें।

ऐसे करें मिलावट की जांच

हल्दी पाउडर

जो हल्दी पाउडर देखने में गहरा रंग का होता है, उसमें कलर की मिलावट हो सकती है क्योंकि, शुद्ध हल्दी हल्के पीले रंग की होती है। जानकारों के मुताबिक कलर केमिकल से बनाया जाता है, जिसे हल्दी पाउडर के साथ खाने से शरीर में कई बीमारियों का जन्म हो सकता है। हल्दी को पानी में डालने पर अगर उसका कलर जल्दी गायब हो जाए तो समझिए कि वह मिलावटी है।

धनिया पाउडर

पाउडर वाले धनिया में भी खरपतवार को बारीक से पीस कर उसमें मिश्रण कर दिया जाता है जिसे देखने पर उसमें मिलावट की पहचान करना संभव नहीं हो पाता है। धनिया पाउडर से खुशबू नहीं निकलना उसमें मिलावट का एक सबूत है।

दालचीनी

दाल चीनी में कैशिया की मिलावट की जाती है। असली दालचीनी हल्की भूरी व पतली लेयर की होती है और उसकी एक विशिष्ट खुशबू होती है।

नमक
कॉमन साल्ट व आयोडाइज साल्ट की पहचान कैसे करें, इसके लिए एक आलू लें, उसे बीच से काट लें व उस पर एक तरफ कॉमन साल्ट व आयोडाइज साल्ट डालें व कुछ बूंदे नींबू के रस की डालें 7 और 10 मिनट बाद देखें, अगर उसका रंग नीला हो जाए तो वह आयोडाइज साल्ट है। यदि नहीं तो कॉमन साल्ट है।

केसर

असली केसर का रंग गाढ़ा होता है। वह आसानी से टूटती नहीं है। जबकि मिलावटी केसर बहुत आसानी से टूट जाती है और रंग भी हल्का लाल व पीला होता है। यदि केसर पानी की सतह पर बैठ जाए और अपना रंग छोड़े तो वह असली है।

लौंग

लौंग का जब नैचरल ऑइल निकाल लिया जाता है वह पानी के ऊपर तैरने लगती है तो वह असली लौंग नहीं है।

 

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OMG : शून्य पर आउट हुए टीम के सभी बल्लेबाज

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कमाल की बात यह रही कि टीम के सभी बल्लेबाज खाता भी नहीं खोल पाए और उसे 754 रनों के विशाल अंतर से हार का सामना करना पड़ा। कुल 7 रन अतिरिक्त के तौर पर मिले।

  • अंधेरी का स्कूल टूर्नमेंट में बोरीवली के स्वामी विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल के खिलाफ मैच हारा
  • विपक्षी टीम के गेंदबाजों ने 7 अतिरिक्त रन (छह वाइड और एक बाई) रन दे दिया
  • चिल्ड्रन वेलफेयर की पूरी टीम सिर्फ छह ओवरों में ही ऑल आउट हो गई, दो बल्लेबाज रन आउट
  • स्कूल के पूर्व छात्र रहे भारतीय टीम के सुपरस्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा

मुंबई के प्रतिष्ठित स्कूल टूर्नमेंट हैरिस शील्ड के पहले राउंड के नॉक आउट मैच के अजीब घटना हुई। ऐसी घटना जिसे चिल्ड्रन वेलफेयर स्कूल जल्द से जल्द भूलना चाहेगा। अंधेरी का यह स्कूल बोरीवली के स्वामी विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल के खिलाफ मैच तो हारा लेकिन उसके अजब बात यह रही कि उसके सारे बल्लेबाज जीरो पर आउट हुए। जी, उसका कोई भी बैट्समैन खाता भी नहीं खोल पाया।

यह तो शुक्र मनाइए कि विपक्षी टीम के गेंदबाजों ने 7 अतिरिक्त रन (छह वाइड और एक बाई) रन दे दिया, यदि ऐसा नहीं होता तो स्कोरबोर्ड पर कोई रन नहीं टंगा होता। चिल्ड्रन वेलफेयर की पूरी टीम सिर्फ छह ओवरों में ही ऑल आउट हो गई। विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल की ओर से मीडियम पेसर अलोक पाल ने तीन ओवरों में तीन रन देकर छह विकेट लिए। कप्तान वरोद वाजे ने तीन रन देकर दो विकेट लिए। बाकी दो बल्लेबाज रन आउट हुए।

इस शर्मनाक प्रदर्शन के चलते चिल्ड्रन वेल्यफेयर की टीम यह मैच 754 रनों के विशाल अंतर से हार गई। यह परंपरागत इंटरस्कूल टूर्नमेंट मे शायद सबसे बड़ी हार होगी। आजाद मैदान के न्यू एरा ग्राउंड पर पहले बल्लेबाजी करते हुए विवेकानंद स्कूल ने मीत मायेकर के तिहरे शतक (338 रन नाबाद, 134 बॉल, 56 चौके और सात छक्के) की मदद से 39 ओवरों में 761 रन बनाए।

इस स्कोर में 156 रनों की पेनाल्टी भी शामिल है चूंकि चिल्ड्रन वेलफेयर के बोलर निर्धारित 3 घंटे के टाइम में 45 ओवर पूरे नहीं फेंक पाए। उन्होंने छह ओवर कम फेंके। कृष्णा पार्ते (95) और ईशान रॉय (67) रन बनाए।

इस जीत से स्वामी विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल के कोच महेश लोतीकर बहुत खुश नजर आए। कमाल की बात तो यह है कि टीम के कप्तान आयुष जेथवा और दो अन्य खिलाड़ी मुंबई अंडर-16 कैंप में होने के चलते इस मैच में नहीं खेले थे।

स्कूल के पूर्व छात्र रहे भारतीय टीम के सुपरस्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा भी अगर स्कोरकार्ड देखेंगे तो काफी खुश होंगे। बुधवार वाकई स्वामी विवेकानंद स्कूल के लिए परफेक्ट रहा।

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अमेरिका से बंधे हाथ-पैर और फटे कपड़ों में लौटे 145 भारतीय

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अमेरिका से डिपोर्ट किए गए 145 भारतीय बुधवार सुबह दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर उतरे। उनमें 3 महिलाएं भी थीं। उन्हें अवैध रूप से अमेरिका में घुसने के जुर्म में हिरासत में लिया गया था और डिटेंशन कैंपों में कैद किया गया था।

वे पढ़े लिखे थे। उच्च शिक्षित थे। युवा थे। अमेरिका जाना और वहां काम करना उनका सपना था। वे वहां पहुंच भी गए। इसके लिए उन्होंने 25-25 लाख रुपये एजेंटों को अदा किए। कुछ ने काम करना भी शुरू कर दिया लेकिन उन्हें नहीं पता था कि खूबसूरत जिंदगी का उनका सपना एक बुरे ख्वाब में तब्दील हो चुका है। अवैध रूप में अमेरिका में घुसने के आरोप में उन्हें वहां इमिग्रेशन अधिकारियों ने पकड़ लिया। उन्हें अवैध प्रवासियों के लिए बने डिटेंशन सेंटर में कैद कर लिया गया। आखिरकार उन्हें अमेरिका से भारत वापस भेज दिया गया। बुधवार सुबह वे नई दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरे। उनके हाथ और पैर बंधे हुए थे। प्लेन से उतरने से ठीक पहले उनके हाथ-पैर खोले गए। सपनों का पीछा करना उनके लिए जिल्लत का सबब बन गया था लेकिन उनके चेहरे पर राहत के भी मिले-जुले भाव थे कि वे आखिरकार वतन लौट आए हैं। यह कहानी है उन 145 भारतीयों की, जिन्हें अमेरिका में अवैध तौर पर घुसने की वजह से भारत डिपोर्ट किया गया।

21 साल के सुखविंदर सिंह ने करीब एक साल बाद मोबाइल फोन को हाथ से छुआ था। अपने पिता को फोन पर यह बताते हुए कि अगले 6 घंटों में वह घर पहुंच जाएंगे, वह बुरी तरह सिसकने लगे। पिता को यह सुनकर बहुत धक्का लगा। उन्होंने पूछा कि अमेरिका में सबकुछ ठीक तो था न। सुखविंदर को हरियाणा में अपने परिवार को यह बताते हुए शर्मिंदगी का अहसास हो रहा था कि अमेरिका के ऐरिजोना से उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया था और वह दिल्ली आ चुके हैं।

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर बुधवार सुबह एक के बाद एक ये 145 भारतीय भीड़ के बीच फटे कपड़ों और बिना लैस के जूतों में बाहर आ रहे थे। इनमें 3 महिलाएं भी थीं। उन्हें अमेरिका के ऐरिजोना से डिपोर्ट किया गया था। उनके साथ 25 बांग्लादेशियों को भी डिपोर्ट किया गया था, इसलिए उन्हें लेकर आ रहा चार्टर्ड प्लेन ढाका में भी कुछ देर रूका था। करीब 24 घंटे लंबे सफर की वजह से उनके चेहरों पर थकान साफ दिख रही थी। इसके अलावा अमेरिका में डिटेंशन कैंपों में खाने-पीने, उठने-जागने को लेकर यातना जैसी पाबंदियों की वजह से वे बुरी तरह टूट चुके थे। सुखविंदर सिंह ने घरवालों को अपने आने की सूचना देने के बाद फैसला किया कि घर रवाना होने से पहले वह कुछ घंटे दिल्ली में अपने दोस्तों के साथ बिताएंगे।

इनमें से कुछ लोग क्वॉलिफाइड इंजिनियर थे लेकिन उनके पास नौकरी नहीं थी। उन्होंने अमेरिका पहुंचने के लिए एजेंटों को 25-25 लाख रुपये की बड़ी रकम अदा की थी। उन्हें उम्मीद थी कि वहां उन्हें अच्छी नौकरी मिलेगी। लेकिन उन्हें मिली जिल्लत। पिछले 5 महीनों से वे डिटेंशन सेंटरों में कैद थे। रमनदीप सिंह गाडा राहत की सांस लेते हुए कहते हैं, ‘लंबे समय बाद किसी ने मुझे मेरे नाम से पुकारा है। इमिग्रेशन कैंपों में हमें हमारे नामों से नहीं, बल्कि नंबरों से बुलाया जाता था तो हमें दिया गया था।’ गाडा बताते हैं कि वहां उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक होता था। वहां कई दिनों तक उन्हें भूखे भी रहना पड़ा क्योंकि भोजन में उन्हें कभी-कभी बीफ दिया जाता था जिसे वे धार्मिक वजहों से नहीं खा सकते थे।

इन शर्मनाक अनुभवों के बावजूद इनमें से कई अपने सपनों के देश अमेरिका फिर जाना चाहते हैं। जसवीर सिंह कहते हैं, ‘मेरा कजिन करीब एक दशक पहले अमेरिका गया था और अब शानदार जीवन बिता रहा है। फेसबुक पर उसकी तस्वीरों को देखकर मैंने भी तय किया कि मुझे भी अमेरिका जाना है। लेकिन अब मेरे पास हिम्मत नहीं है कि मैं परिवार वालों का सामना करूं। उन्हें कौन सा मुंह दिखलाऊंगा। मैंने अभी अपने माता-पिता को यह नहीं बताया है कि मुझे डिपोर्ट कर दिया गया है। मैंने जीवनभर की उनकी बचत को अमेरिका जाने के लिए खर्च कर दिया।’

पंजाब के गुरप्रीत सिंह मकैनिकल इंजिनयर हैं और उन्होंने साल भर पहले घर छोड़ा था। अमेरिका जाने का उनका सपना दुःस्वप्न साबित हुआ। वह बताते हैं, ‘कई अन्य भारतीयों के साथ मुझे भी डिटेंशन सेंटर में रखा गया। शुरुआती कुछ हफ्तों तक तो हमें यह भी नहीं बताया गया कि हमें वहां क्यों रखा गया है।’ गुरप्रीत आगे बताते हैं, ‘कई हफ्तों बाद हमें बताया गया कि हमारे पास अमेरिका में प्रवेश करने या यहां रूकने के लिए उचित दस्तावेज नहीं हैं।’

एक और युवा परमजीत सिंह ने बताया कि उनके पास जो कपड़े थे वे या तो चोरी हो गए या फिर उन्हें जब्त कर लिया गया। उन्हें पहनने के लिए ट्रैक पैंट दिया गया। उनके जूतों के फीतों तक को ले लिया गया। वह यह भी बताते हैं कि खाना खाने के लिए जब बुलाया जाता था, उस वक्त अगर कोई सोया है और इस वजह से नहीं पहुंच पाया तो उसे पूरे दिन भोजन नहीं दिया जाता था। इतना ही नहीं, दूसरे लोगों को भी सख्त चेतावनी दी जाती थी कि वे ऐसे लोगों के साथ अपना खाना शेयर न करें।

 

 

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