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किसानों से अपील : फसल अवशेष न जलाए, भूमि को उपजाऊ बनाए

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गरियाबंद,(etoi news) 10 नवम्बर 2019

फसल कटाई के बाद खेत में पड़े अवशेष को जलाने की प्रवृति को लेकर कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से अपील करते हुए फसल अवशेष प्रबंधन के लाभ एवं उसे जलाने के दुष्प्रभाव से किसानों को अवगत कराया है। कृषि अधिकारियों ने बताया कि फसल कटाई के उपरांत खेत में पड़े हुए अवशेष के साथ ही जुताई कर हल्की सिंचाई-पानी का छिड़काव करने के पश्चात ट्राइकोडर्मा एवं जैविक वेस्ट डिकम्पोजर का छिड़काव करने से फसल अवशेष 15 से 20 दिन पश्चात कम्पोस्ट में परिवर्तन हो जायेगें जिससे अगली फसल के लिए मुख्य एवं सूक्ष्म तत्व प्राप्त होगें। फसल अवशेष को कम्पोस्ट में परिवर्तन होने की गति बढ़ाने के लिये सिंचाई उपरांत यूरिया का छिड़काव भी किया जा सकता हैं। फसल अवशेष के कम्पोस्ट में परिवर्तन होने से जीवांश की मात्रा मृदा मंे बढ़ जाती है जिससे मृदा की जलधारणा क्षमता तथा लाभदायक सूक्ष्म जीवों – सूक्ष्म तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है जो रासायनिक उर्वरकों के उपयोग क्षमता को बढ़ा देती है, ऐसा करने से कम रासायनिक उर्वरक डालकर अधिक पैदावार ली जा सकती हैं। फसल कटाई उपरांत खेत में बचे हुए फसल अवशेष को इकðा कर गड्ढे में डालकर गोबर का छिड़काव करें तत्पश्चात ट्राइकोडर्मा या वेेस्ट डिकम्पोजर डालकर कम्पोस्ट तैयार करें। धान के पैरे को यूरिया से उपचार कर पशुओं के सुपाच्य एवं पौष्टीक चारे के रूप में उपयोग किया जा सकता हैं। फसल अवशेष जलाने के दुष्प्रभाव फसल अवशिष्ट जलाने से निकलने वाले धुएं में मौजूद जहरीली गैसों से न सिर्फ मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा हैं। फसल अवशिष्ट जलाने से मृदा का तापमान बढ़ने के कारण मृदा की संरचना बिगड़ जाती है तथा लाभदायक सूक्ष्म जीवियों (मित्र कीटों) की संख्या भी कम हो जाती है। जीवांशा पदार्थ की मात्रा कम हो जाने से मृदा की उत्पादकता कम हो जाती हैं। फसल अवशिष्ट जलाने से केचुएं, मकड़ी जैसे मित्र कीटों की संख्या कम हो जाने से हानिकारक कीटों का प्राकृतिक नियंत्रण नही हो पाने के फलस्वरूप मजबूरन मंहगे तथा जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल करना आवश्यक हो जाता हैं। एन.जी.टी. के प्रावधानों के तहत फसल अवशेष जलाना एक दंडनीय अपराध है, फसल अवशेष जलाने पर 2500 रूपये से 15000 रूपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

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देश - दुनिया

जब कार के पहिए में फंसा 10 फिट लंबा अजगर…वीडियो में देखें आगे क्या हुआ

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सोमवार को मुंबई में बचावकर्मियों ने एक कार के पहिए में लिपट गए एक 10 फिट लंबे अजगर का रेस्क्यू किया है. इस दौरान रेस्क्यू का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

दरअसल, वायरल भवानी ने इसे अपने इंस्टाग्राम पेज पर इस वीडियो को पोस्ट किया है. वीडियो में दिख रहा है कि एक लंबा अजगर एक कार के नीचे पहुंच गया और गलती से कार के पहियों में फंस गया. यह मामला मुंबई के इस्टर्न एक्सप्रेस वे का है.

घटना की सूचना मिलते ही बचावकर्मियों का एक दल मौके पर पहुंचा और कार के पहिए में फंसे अजगर का रेस्क्यू किया. कार को राजमार्ग के एक किनारे पार्क किया गया था. इस दौरान ट्रैफिक पूरी तरह से थम गया था. लोग अजगर को देखने के लिए बेताब थे.

जानकारी के मुताबिक, यह अजगर जब इस्टर्न एक्सप्रेसवे पर सोमैया मैदान की तरफ से आया और सड़क पर खड़ी एक कार के पहिए में घुस गया. कार चालक को इसका जैसे ही पता चला वह बीच सड़क कार खड़ी कर उससे बाहर निकल गया.

अजगर को पकड़ने में बचावकर्मियों को तकरीबन आधे घंटे का समय लगा. फिलहाल अजगर को एक बोरे में रखकर वन विभाग के दफ्तर में ले जाया गया है.

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मनोरंजन

सुशांत सिंह राजपूत केस: CBI, ED, NCB के बाद अब होगी NIA की एंट्री?…जानिए वजह

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फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत केस में अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए की एंट्री हो सकती है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है. क्योंकि ड्रग से संबंधित मामलों की जांच के लिए केंद्र सरकार द्वारा अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी को मंजूरी दे दी गई है। सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े केस की एनआईए जांच का यह बड़ा कारण हो सकता है। आपको बता दें कि इस एजेंसी का गठन मूल रूप से आतंकवाद से संबंधित मामलों की जांच के लिए किया जाता है।

अगर इस केस की जांच एनआईए को सौंपी जती है तो तो केंद्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के बाद एनआईए इस मामले में शामिल होने वाली चौथी एजेंसी बन जाएगी।

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि धारा 53 द नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के अनुसार, केंद्र राज्यों के साथ परामर्श करने के बाद ”एनआईए में निरीक्षकों के रैंक से ऊपर के अधिकारियों को शक्तियों का प्रयोग करने और कर्तव्यों का पालन करने के लिए आमंत्रित करता है।”

यह धारा सरकार को किसी भी अधिकारी को इस अधिनियम के तहत अपराधों की जांच के लिए एक पुलिस स्टेशन की शक्तियां प्रदान करने की अनुमति देती है। एनआईए की स्थापना 2008 के मुंबई सीरियल धमाकों के बाद एक साल के लिए की गई थी। खासतौर से देश भर में आतंकी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए। पिछले साल एनआईए अधिनियम में संशोधन में, एजेंसी को मानव तस्करी, जाली नोट और साइबर आतंकवाद से संबंधित मामलों की जांच करने का अधिकार क्षेत्र भी दिया गया था, लेकिन मादक पदार्थों के मामले अभी भी इसके दायरे में नहीं थे। मंगलवार को इसका भी आदेश दे दिया गया।

इस मामले के जानकार एक सरकारी अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि यह आदेश सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में चल रही जांच के दायरे का विस्तार कर सकता है, जहां ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे उभरे हैं।

एक दूसरे सरकारी अधिकारी ने कहा कि अधिसूचना का महत्व यह था कि ऐसे मामले जो पहले केवल एनसीबी के डोमेन थे, अब एनआईए द्वारा नियंत्रित किए जा सकते हैं। महाराष्ट्र के एक मंत्री से इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे फिलहहाल इसकी कोई जानकारी नहीं है।

आपको बता दें कि 14 जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत केस की जांच के लिए बिहार सरकार ने जैसे ही सीबीआई जांच की मांग की वैसे ही यह एक राजनीतिक मुद्दा बन गई है। बिहार सरकार की इस मांग की महाराष्ट्र सरकार ने आलोचना की।  मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सर्वोच्च न्यायालय ने भी सीबीआई जांच की मंजूरी दे दी। इस केस में  मौत के आसपास की परिस्थितियों की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है और ड्रग्स की एगल पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा जांच की जा रही है। अभिनेत्री और सुशांत की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती एक कथित “ड्रग सिंडिकेट” में उनकी भूमिका और अभिनेता के लिए कथित रूप से ड्रग्स की खरीद के लिए हिरासत में हैं। ईडी जांच के मनी लॉन्ड्रिंग पहलुओं पर गौर कर रहा है।

एडीजी (कानून व्यवस्था), जीपी सिंह ने कहा, “यह विशेष रूप से आतंकी मॉड्यूल और ड्रग डीलरों के बीच बढ़ती संबंधों के प्रकाश में एक अच्छा कदम है। एनआईए अधिकारी नार्को-आतंकवाद अपराधों की प्रभावी जांच कर सकते हैं। राज्य पुलिस अधिकारियों की शक्तियों पर इसका कोई असर नहीं होगा।”

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देश - दुनिया

कोरोना अपडेट : 83,347 नए मामले…1,085 मौतें

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देश में 21वें दिन लगातार हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. अबतक कोरोना से संक्रमित 90 हजार लोगों की जान जा चुकी है. हालांकि भारत दुनियाभर में रिकवर केसों के मामलों में सबसे टॉप स्थान पर बना हुआ है. देश में पिछले 24 घंटों में 83,347 नए कोरोना मामले दर्ज किए गए हैं और 1085 लोगों की जान भी चली गई है. दो सितंबर से लगातार देश में एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. अच्छी खबर ये है कि 24 घंटे में अबतक 89,746 मरीज ठीक भी हुए हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में अब कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 56 लाख 46 हजार हो गई है. इनमें से 90,020 लोगों की मौत हो चुकी है. एक्टिव केस की संख्या घटकर 9 लाख 68 हजार हो गई और 45 लाख 87 हजार लोग ठीक हो चुके हैं. संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या की तुलना में स्वस्थ हुए लोगों की संख्या करीब चार गुना अधिक है.

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