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हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने किया अनुच्छेद 370 हटाने का जिक्र तो भड़कीं महबूबा मुफ्ती कहा

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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीप अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में पीएम मोदी के भाषण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि इस फैसले को इसलिए लिया गया ताकि जम्मू और कश्मीर के “विशेष हितों” को सुरक्षित किया जा सके, यह इस देश की विडंबना है. इस फैसले को लेकर अन्य जगहों पर खुशी मनाई जा रही है लेकिन राज्य (जम्मू-कश्मीर) के लोग ही इससे खुश नहीं हैं, जहां इसका फायदा होना सबसे ज्यादा होने की उम्मीद की जा रही है.  इन सब के बीच बड़े उन्माद की मदद से इस पूरे निर्णय को सही साबित करने की कोशिश की जा रही है.

गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है कि जब महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 हटाने पर पीएम मोदी की आलोचना की हो. उन्होंने अनुच्छेद 370 हाटने से पहले कहा था कि जब बात जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे की हो तो भाजपा को आग से नहीं खेलना चाहिए. उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अनुच्छेद 370 खत्म करना, राज्य की भारत से आजादी होगी. महबूबा मुफ्ती  ने कहा था कि यदि आप जम्मू कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्त करते हैं तो आप राज्य को देश से भी मुक्त करेंगे. मैंने कई बार कहा था कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को देश से जोड़ता है. जब आप इस सेतु को तोड़ते हैं, भारत राज्य पर अपनी वैधता भी खो देगा. वह कब्जा करने वाली ताकत बन जाएगा.’ जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा के घोषणा पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थीं, जिसमें पार्टी ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.उन्होंने ट्विटर पर लिखा था कि न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिंदुस्तान वालों, तुम्हारी दास्तान तक भी न होगी दास्तानों में.

महबूबा मुफ्ती  ने कहा था कि यदि आप जम्मू कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्त करते हैं तो आप राज्य को देश से भी मुक्त करेंगे. मैंने कई बार कहा था कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को देश से जोड़ता है. जब आप इस सेतु को तोड़ते हैं, भारत राज्य पर अपनी वैधता भी खो देगा. वह कब्जा करने वाली ताकत बन जाएगा.’ जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा के घोषणा पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थीं, जिसमें पार्टी ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.

महबूबा मुफ्ती  ने कहा था कि भाजपा मोर्चों पर असफल हुई है, चाहे वह बेरोजगारी हो, किसानों का मुद्दा हो या महंगाई हो. अब वे मुद्दे तलाश रहे हैं, जिनका इस्तेमाल वे वोट जुटाने के लिए कर सकें.’ पीडीपी नेता ने चेतावनी दी कि भाजपा को आग से खेलने से परहेज करना चाहिए. उन्होंने कहा था कि राज्य के विशेष दर्जे में कोई भी बदलाव पूरे दक्षिण एशिया को खतरे में डाल सकता है. उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर पहले ही विस्फोटक के ढेर पर है और हमने उसकी झलक पुलवामा में देखी. यदि भाजपा ऐसे बयान देना बंद नहीं करती है और ऐसे इरादे (अनुच्छेद 370 के बारे में) नहीं छोड़ती है तो इससे न केवल जम्मू कश्मीर बल्कि पूरा क्षेत्र जलेगा.

 

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आज के ही दिन पंचतत्व में विलीन हुए थे चाचा नेहरू सुबह अटैक पड़ा

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        आज के ही दिन पंचतत्व में विलीन हुए थे चाचा नेहरू सुबह अटैक पड़ा

नेहरू निधन के कुछ दिनों पहले से अस्वस्थ चल रहे थे. वो स्वास्थ्य लाभ के लिए देहरादून गए थे लेकिन वहां भी उन्हें आराम तरीके से नसीब नहीं हुआ. 26 मई 1964 की शाम वो देहरादून से दिल्ली लौटे. इसके बाद सुबह उन्हें तगड़ा अटैक पड़ा. डॉक्टरों की भरपूर कोशिश भी उन्हें बचा नहीं सकी

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू 26 मई की शाम देहरादून से थके-मांदे लौटे थे. रातभर वो बेचैन रहे. दर्द की शिकायत करते रहे. सुबह 06.30 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा. जिसके बाद उन्हें बचाा नहीं जा सका. हालांकि नेहरू के निधन की खबर सरकारी तौर पर दोपहर बाद ही रिलीज की गई.

26 मई 1964 को देहरादून के पोलो ग्राउंड पर एक हेलिकॉप्टर खड़ा था. वो नेहरू को दिल्ली ले जाने वाला था. शाम 04.00 से 05.00 बजे के बीच हेलिकॉप्टर ने दिल्ली के लिए उड़ान भरी. देहरादून में एक छोटी सी भीड़ उन्हें विदा करने आई थी.

स्वास्थ्य लाभ करने देहरादून गए थे नेहरू

नेहरू दरअसल देहरादून में चार दिनों के अल्प अवकाश पर आए थे. उनकी सेहत जनवरी में भुवनेश्वर में हुए हार्ट अटैक के बाद सुधर नहीं पाई थी. उनका रूटीन प्रभावित हो चुका था. उनका ज्यादातर काम बिना विभाग के मंत्री लाल बहादुर शास्त्री को दे दिया गया था. नेहरू जब चलते थे तो उनका बायां पैर दिक्कत में लगता था.देहरादून की 26 मई की वो शाम उनके जीवन की आखिरी शाम थी, जिसके बाद नेहरू कभी सार्वजनिक जीवन में नजर नहीं आए. वो बेटी इंदिरा गांधी के साथ थे.

नेहरू ने जब हेलिकॉप्टर के दरवाजे पर खड़े होकर हाथ हिलाया. तब राज कंवर ने महसूस किया कि बायां हाथ ऊपर उठाते समय नेहरू के चेहरे पर कुछ दर्द उभर आया था. उनकी बेटी इंदिरा उन्हें सहारा देने के लिए खड़ी थी. नेहरू के बाएं पैर के मूवमेंट में भी दिक्कत महसूस हो रही थी. उन्होंने चेहरे पर भरपूर मुस्कुराहट लाने की कोशिश की लेकिन वो ऐसा कर नहीं पाए.

रात में उन्हें अच्छे से नींद नहीं आई, दर्द था
नेहरू करीब आठ बजे के आसपास दिल्ली पहुंचे. सीधे प्रधानमंत्री हाउस चले गए. रिपोर्ट्स की मानें तो वो थके हुए थे. पिछले कुछ समय से अस्वस्थ रहने का असर उनके रूटीन पर पड़ा था. वो रातभर करवटें बदलते रहे. पीठ के साथ कंधे में दर्द की शिकायत करते रहे. विश्वस्त सेवक नाथूराम उन्हें दवाएं देकर सुलाने की कोशिश करते रहे.

 सुबह अटैक पड़ा और  कोमा में  चले गए   (जो 28 मई 1964 के अंक में प्रकाशित हुई) कहती है कि सुबह 06.30 बजे उन्हें पहले पैरालिटिक अटैक हुआ और फिर हार्ट अटैक. इसके बाद वो अचेत हुो गए. इंदिरा गांधी ने उनके डॉक्टरों को फोन किया. तीन डॉक्टर तुरंत पीएम हाउस पहुंच गए. उन्होंने अपनी ओर से भरपूर कोशिश की लेकिन नेहरू का शरीर कोमा में जा चुका था. शरीर से कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा था, जिससे पता लगे कि इलाज का कोई असर हो भी रहा है या नहीं. कई घंटे की कोशिश के बाद डॉक्टरों ने जवाब दे दिया.

27 मई से लोकसभा का सात दिनों का विशेष सत्र बुलाया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नेहरू खासतौर पर कश्मीर और शेख अब्दुल्ला के बारे में कुछ सवालों का जवाब देने वाले थे. जब वो संसद में नहीं पहुंचे तो बताया गया कि अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई है

दोपहर दो बजे राज्यसभा में बताया-नेहरू नहीं रहे

दोपहर 02.00 बजे स्टील मंत्री कोयम्बटूर सुब्रह्मणयम राज्यसभा में दाखिल हुए. उनके चेहरे की हवाइयां उड़ी हुईं थीं. उन्होंने बुझे हुए स्वर में केवल इतना कहा, “रोशनी खत्म हो गई है.” लोकसभा तुरंत स्थगित कर दी गई. कुछ घंटों बाद गुलजारी लाल नंदा को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा की गई.

आठ घंटे कोमा में रहे
दोपहर 02.05 बजे तक संसद में हर सांसद के पास ये खबर पहुंच चुकी थी. “द न्यूयार्क टाइम्स” ने तुरंत नेहरू के निधन पर एक अतिरिक्त संस्करण प्रकाशित किया, देश में भी समाचार पत्रों में दिन में विशेष संस्करण प्रकाशित  हुई ” नेहरू आठ घंटे तक कोमा में रहे, उन्हें बचाया नहीं जा सका.” “द गार्जियन” ने घर के अंदरूनी सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी कि उन्हें आतंरिक हैमरेज हुआ था. इसमें पहले पैरालिटिक स्ट्रोक और फिर हार्ट अटैक हुआ.

शाम 04.00 बजे भीड़ तीनमूर्ति भवन पर इकट्ठी होने लगी 
शाम 04.00 बजे भीड़ तीनमूर्ति भवन स्थित प्रधानमंत्री हाउस के सामने इकट्ठा होने लगी. इसमें नेता, राजनयिक, आम जनता शामिल थी. अगले दिन नेहरू का पार्थिव शरीर जनता के आखिरी दर्शन के लिए रखा गया. 29 मई को उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीतिरि्वाजों से हुआ.

‘मैं लंबे समय तक जिंदा रहूंगा’
हालांकि निधन के मुश्किल से एक सप्ताह पहले नेहरू ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था, “चिंता ना करें, मैं अभी लंबे समय तक जिंदा रहूंगा.”

उस दिन शादियों का बड़ा साया था
27 मई को देशभर में शादियों का बड़ा साया था. जैसे ही नेहरू के निधन की खबर फैली. तुरंत सदमे की शोक की स्थिति हो गई. शादियां तो हुईं लेकिन कहीं कोई बाजा-गाजा नहीं बजा.

 

 

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बीमा सुरक्षा में प्रीमियर बढ़ सकती है , टर्म इश्योरेंस में तेजी से झटका

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बीमा सुरक्षा में प्रीमियर बढ़ सकती है , टर्म इश्योरेंस में तेजी से झटका

पिछले कुछ महीनों में बीमा का क्लेम बढ़ गया है जिसको देखते हुए बीमा कंपनियां टर्म इश्योरेंस के प्रीमियम बढ़ा सकती हैं. जीवन बीमा कंपनियों द्वारा 20 से 40 प्रतिशत प्रीमियम बढ़ोत्तरी होने की संभावना है.

नई दिल्ली. पिछले कुछ महीनों में बीमा का क्लेम बढ़ गया है जिसको देखते हुए बीमा कंपनियांटर्म इश्योरेंस के प्रीमियम  बढ़ा सकती हैं. इंश्योरेंस कंपनियों के द्वारा प्रीमियम बढ़ाने की वजह से जीवन बीमा कंपनियों द्वारा 20 से 40 प्रतिशत प्रीमियम बढ़ोत्तरी होने की संभावना है. अप्रैल महीने में जीवन बीमा कंपनियों ने टर्म लाइफ प्लान के प्रीमियम में 20 प्रतिशत का इजाफा किया है. पॉलिसी डॉटकॉम के सीईओ और संस्थापक नवल गोयल ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में इंश्योरेंस के क्लेम में इजाफा हुआ था. जिसकी वजह से क्लेम सेटलमेंट की संख्या भी बढ़ी थी परंतु क्लेम की संख्या में इतना इजाफा होगा इसका कंपनियों को अंदाजा नहीं था.

विवश होकर प्रीमियम बढ़ाना पड़ सकता है
महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक इसके बाद रिइंश्योरेंस कंपनियों ने अपने प्रीमियम बढ़ाने का निर्णय लिया है. जिसकी वजह से इंश्योरेंस कंपनियों को भी विवश होकर प्रीमियम बढ़ाना पड़ा. हालांकि अभी भी कुछ कंपनियों ने प्रीमियम बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया है क्योंकि ये कंपनियां अपने ग्राहकों की संख्या का अध्ययन कर रही हैं

बता दें कि इंश्योरेंस कंपनियों का प्रीमियम मृत्यू दर, कितने क्लेम का दावा किया जा सकता है, संबंधित क्लेम के एवज में कंपनी कितना प्रीमियम वसूल कर रही है इन बातों पर निर्भर करता है. जिसकी वजह से आने वाले समय में इसमें और तेजी होने की संभावना है. यदि ऐसा हुआ तो इंश्योरेंस कंपनियों को फिर से प्रीमियम बढ़ाने का कदम उठाना पड़ सकता है.

20 से 25 प्रतिशत कीमतों में बढ़ोत्तरी होने की संभावना
पॉलिसी बाजार डॉट कॉम के चीफ बिजनेस ऑफिसर संतोष अगरवाल ने कहा है कि टर्म इंश्योरेंस की कीमतें 40 प्रतिशत बढ़ गई हैं. पिछले महीने में कुछ बीमा कंपनियों ने टर्म इश्योरेंस के प्रीमियम में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है. जिन कंपनियों ने अभी तक कीमतें नहीं बढ़ाई हैं उनकी तरफ से आने वाले 3 से 6 महीनों में 20 से 25 प्रतिशत कीमतों में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है.

 

 

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खरबों की कीमत वाले मंदिरो की विक्री पर बावल , जाने क्यू

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       खरबों की कीमत वाले मंदिरो की विक्री पर मचा बावल , जाने क्यू

देश के सबसे अमीर मंदिरों  में शुमार तिरुपति तिरुमला मंदिर  में रोज लगभग सवा 2 करोड़ का चढ़ावा आता है.

हाल ही में आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर की संपत्तियां बेचने के नाम पर बड़ा विवाद हुआ. मंदिर की देखरेख कर रहे तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट ने मंदिर को दान में मिली 23 संपत्तियां नीलाम करने का फैसला लिया. ये फैसला मंदिर की देखरेख के नाम पर ही लिया गया. हालांकि इसके बाद से पूरे प्रदेश में बवाल मचा हुआ है. विपक्षी दलों का मानना है कि सीएम वाई एस जगनमोहन रेड्डी  का इसमें कहीं न कहीं हाथ है. बड़े फसाद के बाद संपत्तियां बेचने पर फिलहाल के लिए रोक लग गई. इस बीच ये जानना दिलचस्प रहेगा कि जिस मंदिर को लेकर इतना घमासान मचा हुआ है, उसके पास आखिर कितनी दौलत है.

मंदिर की संपत्ति का ब्यौरा
देश के सबसे प्रतिष्ठित और अमीर मंदिरों में  तिरुमला  का नाम आता है. आंध्रप्रदेश में तिरुमला के पहाड़ों पर स्थित इस मंदिर को व्यंकटेश्वर स्वामी मंदिर भी कहते हैं. इसमें हर दिन और पूरे साल चढ़ावा आने के पीछे एक कहानी है. कहा जाता है कि बालाजी ने पद्मावती से अपनी शादी के लिए कुबेर देवता से 11.4 अरब कीमत के सोने के सिक्के और भारी रकम उधार ली. भगवान बालाजी के इसी कर्ज को उतारने के लिए दुनियाभर से आस्तिक यहां आकर चल और अचल संपत्ति चढ़ाते हैं. इंडिया.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक यहां सवा 2 करोड़ चढ़ावा हर दिन आता है. हर दिन यहां लगभग 1 लाख से ज्यादा आस्तिक आते हैं और त्यौहारों पर संख्या और बढ़ जाती है. संपत्ति के चढ़ावे की बात छोड़ दें तो भी यहां श्रद्धालु केश (बाल) दान करते हैं, इन्हें बेचने पर हर साल करोड़ों की कमाई होती है.

कितना सोना आता है चढ़ावे में

माना जाता है कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के पास 9,000 किलोग्राम शुद्ध सोना जमा है. खुद ट्रस्ट ने बताया था कि उसके पास दान में आया 7,235 किलो सोना देश के दो बैंकों में जमा रखा है. इसके अलावा 1,934 किलो सोना खजाने में रखा हुआ है. रोज आने वाले भक्त यहां सोना, चांदी, कैश, जमीन के कागजों के अलावा डी मैट शेयर भी चढ़ावे में रखते हैं. मंदिर को हुंडी यानी दान पात्र में ही हर साल 1,000 से लेकर 1200 करोड़ तक का चढ़ावा आता है. द न्यूज मिनट की एक रिपोर्ट के अनुसार तिरुपति मंदिर ने अलग-अलग बैंकों में 12,000 से ज्यादा रुपए फिक्स डिपॉजिट में रखे हुए हैं. इसके अलावा बैंकों में रखे सोने से भी मंदिर को ब्याज में 100 किलो से ज्यादा सोना हर साल मिलता है.

इतना अमीर मंदिर क्यों प्रॉपर्टी बेचना चाहता है?
कोरोना संक्रमण को देखते हुए लगाए गए लॉकडाउन के असर से मंदिर भी अछूता नहीं. अपने सदियों पुराने इतिहास में मंदिर पहली बार बंद हुआ और पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है. मंदिर के आसपास के मंदिर जिन्हें इसकी शाखाएं कहा जा सकता है, वे भी पूरी तरह से बंद हैं. रोज मिलने वाला चढ़ावा बंद होने की वजह से पिछले महीने के आखिर में वहां के 1,300 कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया गया. माना जा रहा है कि पैसों की कमी के कारण मंदिर की व्यवस्था बदहाल हो रही है. इसी व्यवस्था को सुधारने के लिए मंदिर की 23 संपत्तियां बेचने की बात आई. विपक्षी पार्टी से विवाद में ट्रस्ट के चेयरमैन वाई वी सुब्बारेड्डी ने कहा कि मंदिर के पास दूर-दराज और दूसरे राज्यों में भी दान में मिली जमीनें हैं. दूर से उनकी देखभाल नहीं हो पाती और ऐसे में कोई भी उनपर कब्जा कर सकता है. इसी वजह से उन्हें बेचने की बात आई. ट्रस्ट का कहना है कि इससे 100 करोड़ रुपये की आमदनी हो सकती है जो इस मुश्किल वक्त में मंदिर के काम आएगी.

वैसे तिरुपति के अलावा और भी कई मंदिर हैं, जिनकी चल-अचल संपत्ति काफी मानी जाती है:

 

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