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मजदूरों के पलायन पर केंद्र सरकार सख्त,राज्यों से कहा- सीमा सील कर दो

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कोरोना लॉकडाउन के बाद मजूरों के पलायन से हलकान सरकार,राज्यों से कहा अपनी सीमायें सील कर दो 

इसके पहले मन की बात में बोले मोदी- लॉकडाउन से परेशानी पर माफी, लेकिन ये जरूरी था
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ फैसलों की वजह से आपकी जिंदगी में परेशानी आ गई है. गरीबों को खास दिक्कत हुई है. पीएम मोदी ने कहा कि मुझे मालूम है कि आपमें से कुछ हमें नाराज भी होंगे. लेकिन कोरोना से लड़ने के लिए ये कदम जरूरी थे. पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस इंसान को मारने की जिद ले बैठा है. उन्होंने कहा कि लॉक डाउन आपको बचाने के लिए लगाया गया है.और थोड़ी ही देर बाद केंद्र सरकार की ओर से राजीव गाबा और अजय भल्ला ने मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान यह आदेश दिए 

मजदूरों के पलायन पर केंद्र सरकार सख्त, राज्यों से कहा- सीमा सील कर दो और आवाजाही रोको,केंद्र ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनों से लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों की आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी तरीके से राज्य और जिलों की सीमा सील करने को कहा है। मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने उनसे सुनिश्चित करने को कहा कि शहरों में या राजमार्गों पर आवाजाही नहीं हो क्योंकि लॉकडाउन जारी है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ”देश के कुछ हिस्सों में प्रवासी कामगारों की आवाजाही हो रही है। निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्यों और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील करना चाहिए।” राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि शहरों में या राजमार्गों पर लोगों की आवाजाही नहीं हो। केवल सामान को लाने-ले जाने की अनुमति होनी चाहिए। राज्यों को उनलोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है, जो छात्रों अथवा मजदूरों से जगह खाली करने को कहता है।अधिकारी ने बताया कि इन निर्देशों का पालन करवाने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की निजी तौर पर जिम्मेदारी बनती है। अधिकारी ने बताया कि प्रवासी कामगारों सहित जरूरतमंद और गरीब लोगों को खाना और आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया भर में महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ से निर्णायक लड़ाई के लिए 24 मार्च की आधी रात से समूचे देश में 21 दिन के लॉकडाउन और 15 हज़ार करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की थी। पीएम मोदी ने देशवासियों से हाथ जोड़कर विनती की कि वे अपने घर से बाहर बिल्कुल न निकलें क्योंकि इस जानलेवा वायरस के संक्रमण की श्रंखला को तोड़ने का यही एक मात्र रास्ता है। केंद्र का राज्यों को निर्देश * प्रवासी मजदूरों की आवाजाही को रोकने के लिए राज्य और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील की जाएं। * गरीब, जरूरतमंद लोगों, दिहाड़ी मजदूरों को भोजन, आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएं।राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि लॉकडाउन के दौरान राजमार्गों या शहरों में लोगों की आवाजाही नहीं हो। * इन निर्देशों का पालन कराने के लिए डीएम, एसपी को निजी तौर पर जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए। वहीं, प्रवासी मजदूरों के लिए शनिवार (28 मार्च) को सीमित संख्या में बस चलाने के उत्तर प्रदेश प्रशासन के फैसले के बाद अपने घर पहुंचने की जल्दी में बसों में सीट के लिए झगड़ा करते मजदूरों से दिल्ली-गाजियाबाद सीमा पूरी तरह पटी नजर आई जहां अफरातफरी और भगदड़ जैसे हालात बने हुए थे।दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के हजारों दिहाड़ी मजदूर कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद बस पकड़ने के लिए आनंद विहार, गाजीपुर और गाजियाबाद के लाल कुआँ क्षेत्र पहुंचे। लोगों की संख्या अत्यधिक होने और बस में जगह न होने के कारण कई मजदूर बसों की छत पर बैठ गए। संक्रमण फैलने के खतरे के बीच सामाजिक दूरी के सारे नियम धरे रह गए और लोग बसों में जहां पांव टिकाने की जगह मिली वहीं खड़े नजर आए। इनमें से कुछ ने मास्क पहने थे, लेकिन ज्यादातर लोगों ने संक्रमण से बचने के लिए मुंह पर रुमाल बांधा था

देशभर में लागू 21 दिनों के लॉकडाउन के कारण कई प्रवासी मजदूर अपने-अपने गांवों को वापस लौट रहे हैं। जिसमें से कुछ हादसों का भी शिकार हो चुके हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे शहरों में लोगों की आवाजाही को बंद करें। सरकार ने सख्ती बरतते हुए कहा कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों को 14 दिन के लिए पृथक केंद्र में भेजा जाएगा।केंद्र ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनों से लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों की आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी तरीके से राज्य और जिलों की सीमा सील करने को कहा है। मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने उनसे सुनिश्चित करने को कहा कि शहरों में या राजमार्गों पर आवाजाही नहीं हो क्योंकि लॉकडाउन जारी है।

सरकार ने विज्ञप्ति में कहा, ‘यह नोट किया गया है कि बड़े और सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दिशानिर्देशों का प्रभावी कार्यान्वयन हुआ है। आवश्यक आपूर्ति भी बनाए रखी गई है। स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार उपाय किए जा रहे हैं।’ एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘देश के कुछ हिस्सों में प्रवासी कामगारों की आवाजाही हो रही है। निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्यों और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील करना चाहिए।’

राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि शहरों में या राजमार्गों पर लोगों की आवाजाही नहीं हो। केवल सामान को लाने-ले जाने की अनुमति होनी चाहिए। अधिकारी ने बताया कि इन निर्देशों का पालन करवाने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की निजी तौर पर जिम्मेदारी बनती है।

अधिकारी ने बताया कि प्रवासी कामगारों सहित जरूरतमंद और गरीब लोगों को खाना और आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएंगे। सरकार ने सख्ती बरतते हुए कहा कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों को 14 दिन के लिए पृथक केंद्र में भेजा जाएगा।

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थायरॉयड की वजह से बढ़ता है वजन ,जानें क्या है सच ?

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आपने कई बार ये बात नोटिस की होगी कि स्वस्थ और संतुलित भोजन करने और रोजाना व्यायाम करने के बावजूद अचानक से आपका वजन तेजी से बढ़ने लगता है. खासकर अगर आप महिला हैं तो इस तरह के मामले में आपको अपने शरीर में थायरॉयड के लेवल को चेक करवाना चाहिए. क्योंकि अगर शरीर में थायरॉयड का लेवल कम हो जाए अचानक से वजन बढ़ने लगता है. हर साल 25 मई को वर्ल्ड थायरॉयड डे मनाया जाता है. दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग थायरॉयड बीमारी से पीड़ित हैं. डॉक्टरों की मानें तो हर 10 में से 1 महिला को हाइपोथायरॉयडिज्म यानी थायरॉयड हार्मोन की कमी की समस्या है.

सबसे पहले आखिर थायरॉयड है क्या इसकी बात करते हैं. शरीर में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि, तितली के आकार की ग्रंथि है जो हमारे गले में कंठ के ठीक नीचे स्थित होती है. यह ग्रंथि शरीर में दो तरह के हार्मोन का निर्माण करती है- टी3 (थाइरॉक्सिन) और टी4 (ट्रायोडोथाइरोनिन) और टीएसएच यानी थायरॉयड स्टिमुलेटिंग हार्मोन मेंनटेन करके रखता है.

थायरॉयड ग्रंथि शरीर के कई तरह के कार्यों को नियमित बनाए रखने में मदद करती है. लिहाजा अगर शरीर के इस अंगों में किसी तरह की गड़बड़ी हो जाए तो शरीर का सिस्टम सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाता. थायरॉयड बीमारी आमतौर पर 2 तरह से होती है- हाइपोथायरॉयडिज्म जहां थायरॉयड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है और हाइपरथायरॉयडिज्म जहां थायरॉयड हार्मोन का अत्यधिक उत्पादन होने लगता है. रिपोर्ट्स की मानें तो वैसे लोग जो हाइपोथायरॉयडिज्म बीमारी से पीड़ित होते हैं, उनमें अचानक वजन बढ़ने की समस्या दिखने लगती है. आगे पढ़ें कि कैसे, थायरॉयड आपके वजन को प्रभावित करता है.

थायरॉयड और वजन के बीच क्या है कनेक्शन?

थायरॉयड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार माना जाता है. शरीर के मेटाबॉलिज्म को मेटाबॉलिक रेट के तौर पर काउंट किया जाता है. यह वह दर है, जिसमें आपका शरीर कितनी ऊर्जा खर्च करता है या कितनी कैलोरी बर्न करता है. आराम करते वक्त भी हमारा शरीर कैलोरीज बर्न करता है, क्योंकि आराम करते वक्त भी शरीर के फंक्शन को जारी रखने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है.इसे बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) कहते हैं.

इस बारे में अब तक हो चुके अध्ययनों की मानें तो जब भी शरीर में थायरॉयड हार्मोन का लेवल कम होने लगता है शरीर में बीएमआर कम हो जाता है और जब थायरॉयड हार्मोन का लेवल बढ़ता है तो बीएमआर अधिक हो जाता है. जब भी शरीर में बीएमआर अधिक हो जाता है तो यह शरीर की जमा करके रखी हुई कैलोरीज का, सेवन की गई कैलोरीज की तुलना में ज्यादा तेजी से इस्तेमाल करने लगता है, जिस कारण व्यक्ति की चर्बी समाप्त होने लगती है और वह एकदम दुबला-पतला हो जाता है.

हाइपोथायरॉयडिज्म के कारण बढ़ता है वजन

हाइपोथायरॉयडिज्म के मामले में शरीर में सामान्य मात्रा में थायरॉयड हार्मोन की कमी होने लगती है. यह हार्मोन शरीर की विभिन्न क्रियाओं को करने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. साथ ही जब बीएमआर कम होने लगता है तो शरीर में कैलोरीज के बर्न होने की क्रिया भी धीमी हो जाती है, जिससे व्यक्ति का वजन तेजी से बढ़ने लगता है.

साथ ही कई रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आयी है कि हाइपोथायरॉयडिज्म के मरीजों में अतिरिक्त वजन बढ़ने की समस्या इसलिए भी होती है, क्योंकि शरीर में नमक और पानी का अतिरिक्त संग्रहण होने लगता है. हाइपोथायरॉयडिज्म से पीड़ित मरीज में कई और लक्षण भी नजर आते हैं. जैसे- हद से ज्यादा ठंड लगना, जोड़ों में लगातार दर्द रहना, आलस और सुस्ती महसूस होना आदि. हालांकि, वजन अचानक से जरूर बढ़ने लगता है लेकिन बहुत ज्यादा नहीं बढ़ता.

हाइपोथायरॉयडिज्म के इलाज से वजन घटाने में मिलेगी मदद

रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आयी है कि हाइपोथायरॉयडिज्म से पीड़ित मरीज जब एक बार अपनी थायरॉयड की दवाइयां लेना शुरू कर देता है और डॉक्टर द्वारा बताए गए डाइट और एक्सरसाइज के रूटीन को फॉलो करने लगता है तो कम समय के अंदर ही वह व्यक्ति अपने पहले वाले शेप में वापस आ जाता है. अगर दवाइयों का सेवन करने के बाद भी वजन लगातार बढ़ता रहे तो इसका मतलब है कि वजन बढ़ने का कारण सिर्फ थायरॉयड बीमारी नहीं बल्कि कुछ और भी है.

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करोना के कहर ने बच्चो के परीक्षा से नतीजे तक हो रहे है ,प्रभवित जाने कैसे

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    करोना के कहर ने बच्चो के परीक्षा से नतीजे तक हो रही है ,प्रभवित जाने कैसे

 छात्र-छात्राएं दसवीं क्लास के नतीजे बिहार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in पर चेक कर सकते हैं.

गुजरात सरकार  ने कहा कि अगर कोविड-19  के कारण हालात में कोई सुधार नहीं हुआ तो सभी स्टूडेंट्स को इंटर्नल एग्जाम  और पिछले सेमेस्टर में प्रदर्शन के आधार पर पास  किया जाएगा.

: बिहार बोर्ड की दसवीं क्लास के नतीजे का इंतजार हर बीतते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है. छात्र रिजल्ट की डेट और वक्त को लेकर असमंजस में हैं तो बिहार बोर्ड कोई भी बात आधिकारिक रूप से नहीं बता रहा है. ऐसे में जबकि करीब एक हफ्ते से दसवीं का रिजल्ट जारी करने की कवायद चल रही है.  इंडियन एस्प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच हम आपको वो संभावित कारण बताते हैं जिनकी वजह से नतीजे आने में इतनी देर हो रही है. बिहार बोर्ड की दसवीं क्लास की परीक्षा में इस साल 15 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया है.

1. वेरिफिकेशन : 2016 के टॉपर्स घोटाले के बाद से बिहार बोर्ड काफी सतर्क और सजग हो गया है. उसके बाद से बोर्ड ने टॉपर्स का फिजिकल वेरिफिकेशन करना शुरू किया था, लेकिन कोरोना वायरस के चलते इस बार ये प्रक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरी की गई. इस प्रक्रिया में टॉपर्स की हैंडराइटिंग का मिलान किया जाता है. साथ ही टॉपर्स की नॉलेज का भी आकलन किया जाता है.

2. एग्जाम पैटर्न : इस साल बिहार बोर्ड  की दसवीं कक्षा की परीक्षा में 15 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया. ये संख्या भले ही पिछले साल के मुकाबले कम रही हो, लेकिन इस बार एग्जाम पैटर्न के चलते थोड़ी मुश्किल पेश आई. इस साल मूल्यांनकर्ताओं को न केवल सब्जे​क्टिव आंसर स्क्रिप्ट एमसीक्यू पार्ट भी चेक करना पड़ा, जिससे आंसर शीट की संख्या 1 करोड़ से अधिक पहुंच गई.

ऐसी स्थिति में बिहार बोर्ड भी नतीजों को लेकर कोई कोताही नहीं बरतना चाहता. बोर्ड का दावा है कि वो एरर फ्री रिजल्ट घोषित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है. हालांकि इस बीच खबरें आ रहीं हैं कि रिजल्ट जारी करने की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गईं हैं. ऐसे में उम्मीद तो यही है कि 2-3 दिन में बिहार बोर्ड की  दसवीं क्लास का रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा.   हाल ही में बोर्ड ने करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से एक नया डाटा सेंटर भी बनाया था. इसमें 200 टीबी की क्षमता तक आनलाइन रिकॉर्ड रखे जा सकते हैं

गुजरात सरकार ने परीक्षा कराने के साथ ही दूसरी व्यवस्था भी दी है. सरकार ने कहा कि अगर कोविड-19 के कारण हालात में कोई सुधार नहीं हुआ तो सभी स्टूडेंट्स को इंटर्नल एग्जाम और पिछले सेमेस्टर में प्रदर्शन के आधार पर पास किया जाएगा. गुजरात सरकार ने नोटिस में कहा कि अगर कोई स्टूडेंट अपने नंबरों को बढ़ाना चाहता है, तो अगले सत्र में संबंधित विषय की परीक्षा दे सकता है. जो भी नंबर उसको मिलेंगे उनको रिजल्ट में जोड़ दिया जाएगा. इसके पहले एक्सटर्नल एग्जाम के आधार पर दिए गए नंबरों को हटा लिया जाएगा.

सरकारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि दो घंटे के इस एग्जाम को जरूरत पड़ने पर तीन घंटे का भी किया जा सकता है. इस परीक्षा को कई शिफ्ट में आयोजित किया जा सकता है. सरकार की ओर से कहा गया है कि यह फैसला यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जिनको आयोग ने 28 अप्रैल को तैयार किया था.

 

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इस एक्ट्रेस से प्यार करते थे करण जौहर ,उसके कहने पर पहाड़ से लगा दी थी छलांग

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करण जौहर आज अपना 48वां जन्मदिन मना रहे हैं. वह इंडस्ट्री के उन स्टार्स में से हैं, जो बिना किसी झिझक के बेबाकी से हर मुद्दे पर अपनी बात कैमरे के सामने कह देते हैं.

आज बॉलीवुड के जाने-माने निर्माता निर्देशक करण जौहर अपना 48वां जन्मदिन मना रहे हैं. करण जौहर इंडस्ट्री के उन स्टार्स में से हैं, जो बिना किसी झिझक के बेबाकी से हर मुद्दे पर अपनी बात कैमरे के सामने कह देते हैं. ऐसे ही उन्होंने न जाने कितने खुलासे किए. करण जौहर का चैट शो ‘कॉफी विद करण’ भी उनके इसी अंदाज से प्रभावित है. वहीं इसी शो पर करण जौहर ने अपने पहले प्यार के बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया था. उन्होंने बताया था कि वो एक लड़की से बेहद प्यार करते थे, जो मशहूर बॉलीवुड एक्ट्रेस हैं. करण ने ये भी बताया कि इस लड़की के कहने पर उन्होंने पहाड़ से छलांग तक लगा दी थी.

करण जौहर का पहला प्यार कोई और नहीं बल्कि एक्ट्रेस ट्विंकल खन्ना थीं. इस बारे में ये दोनों कॉफी विद करण में भी बात करते दिखाई दिए थे. वहीं ट्विंकल खन्ना ने भी अपनी किताब मिस फनी बोन्स में बताया था कि करण उनसे एकतरफा प्यार करते थे. ट्विंकल ने बताया था कि वो और करण जौहर एक ही बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे. उन्होंने ये खुलासा भी किया था कि करण को हमेशा भूख लगती थी और वो ट्विंकल से कैंटीन से खाना चुराने के लिए कहते थे.

ट्विकल ने बताया, ‘एक बार हम पहाड़ियों के किनारे पर थे. मैंने करण से कहा कि लुढ़कते हुए पहाड़ से नीचे जाओ और नांव लेकर भाग जाओ. वो लुढ़कते हुए नीचे गया लेकिन, पकड़ा गया. इसके बाद दो घंटे तक वापस चढ़ाई की थी. वहीं इस हरकत पर करण को सबके सामने सजा भी मिली.’

करण ने ये बताया था कि ट्विंकल ऐसी लड़की थी जिसके प्यार में वह पागल थे. करण ने ट्विंकल को उनका दिल तोड़ने का दोषी भी ठहराया था. उन्होंने बताया, ‘जाहिर सी बात है उन्होंने मेरी पहली फिल्म ‘कुछ-कुछ होता है’ में काम करने से इनकार किया और मेरा दिल तोड़ दिया.’

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