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झूठ और धर्मांधता की संस्कृति- मोदी सरकार के चार साल

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मोदी सरकार के दौर में झूठ नई सरकारी संस्कृति है.

हर सरकार के दौर में एक राजनीतिक संस्कृति पनपती है. मोदी सरकार के दौर में झूठ नई सरकारी संस्कृति है. जब प्रधानमंत्री ही झूठ बोलते हैं तो दूसरे की क्या कहें. दूसरी संस्कृति है धर्मांधता की. मोदी सरकार के चार साल पूरे होने के दिन भी पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़े हैं. 13 मई से 26 मई के बीच पेट्रोल के दाम में 3.86 रुपये और डीज़ल के दाम में 3.26 रुपये की वृद्धि हो गई है. कर्नाटक चुनाव ख़त्म होते ही अख़बारों ने लिख दिया था कि चार रुपये प्रति लीटर दाम बढ़ेंगे, करीब-करीब यही हुआ है. यानी दाम बढ़ाने की तैयारी थी लेकिन अमित शाह ने बोल दिया कि सरकार घटाने पर प्लान बना रही है. एक दो दिन से ज़्यादा बीत गए मगर कोई प्लान सामने नहीं आया. बिजनेस स्टैंडर्ड के शाइन जेकब की रिपोर्ट पढ़िए 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि 2022 तक हम तेल का आयात 10 फीसदी कम कर देंगे. इस वक्त तेल का आयात 16.4 फीसदी बढ़ चुका है. कहते कुछ है हो कुछ जाता है या फिर इन्हें पता नहीं होता कि करना क्या है और कहना क्या है. सरकार आई तो खूब दावे किए गए कि कोयले के खदान के लाइसेंस दिए गए हैं. उनमें पारदर्शिता आई है. क्या आपको पता है कि कितने खदान चालू हुए और कितने चालू ही नहीं हुए. इसका कारण जानेंगे तो और दुख पहुंचेगा कि सरकार के कितने झूठ का पर्दाफाश होते देखें, इससे अच्छा है कि चलो भक्त ही बन जाया जाए, कम से कम सोचना तो नहीं पड़ेगा. हालत यह है कि दो हफ्ते में दो बार सरकार कोल इंडिया को लिख चुकी है कि कोयलेे का उत्पादन बढ़ाइये और बिजली कंपनियों को दीजिए क्योंकि गर्मी में मांग बढ़ गई है. क्या सरकार को पता नहीं था कि जब बिजली पहुंची है तो गर्मी हो या सर्दी, मांग भी बढ़ेगी. गर्मी का बहाना कर रही है मगर सितंबर से दिसंबर के बीच भी कोयले की आपूर्ति कम थी. कोयले की कमी से 2017 में भी बिजली के उत्पादन पर असर पड़ा था उत्पादन घटा था.

रिटायर हो चुके लोगों को अब न्यू पेंशन स्कीम का झांसा समझ आ रहा है. 14-15 साल से चले आ रहे इस स्कीम के तहत जो रिटायर हो रहे हैं उन्हें पेंशन के नाम पर 1200-1300 रुपये मिल रहे हैं. इसके लिए यह लोग भी खुद ज़िम्मेदार हैं. मुद्दों को लेकर नहीं समझना, झांसे में आना, आलस्य करना, और अपना देखो दूसरे का छोड़ो करते करते समय काट लेना. नतीजा यह है कि आज जब हाथ में 1300 रुपये देख रहे हैं तो समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें. मोदी मोदी करें या राम राम करें. ईपीएफओ प्रोविडेंट फंड की ब्याज़ दर पांच साल में सबसे कम हो गई है. 5 करोड़ लोगों को 2017-18 के लिए 8.55 प्रतिशत ब्याज़ ही मिलेगा. 2012-13 के बाद यह सबसे कम है.

पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ बड़ौदा इन सब का घाटा देखिए. इनका घाटा इतिहास बना रहा है. आईडीबीआई का सकल एनपीए 28 फीसदी हो गया है. एक बैंकर ने कहा कि सरकार जब दावा करती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है. निवेश हो रहा है तो फिर वही बता दे कि स्टील उद्योग क्यों संकट में हैं. क्यों स्टील उद्योग से एनपीए हो रहा है. हम सामान्य लोग सरकार के फर्ज़ीवाड़े को नहीं समझ पाते मगर बैंकर की एक लाइन से तस्वीर खींच जाती है. एक लक्ष्मी विलास बैंक है उसे भी 600 करोड़ का घाटा हुआ है. बैंक का पूरा सिस्टम ध्वस्त है. बैंक कर्मी इतनी कम सैलरी में काम कर रहे हैं कि पूछिए मत. 17500 रुपये की सैलरी में कोई बैंक क्लर्क दिल्ली शहर में कैसे रह सकता है. कहीं भी इस सैलरी में कैसे रहता होगा. अब बैंकरों को ट्रांसफर का भय दिखा कर उनसे दूसरे काम कराए जा रहे हैं. सरकार को पता है कि बैंक समाप्त होने की स्थिति में है.

इसलिए उन्हें कभी मुद्रा लोन के फर्ज़ीवाड़े का टारगेट दो तो कभी अटल पेंशन योजना का. यही नहीं बैंक अब आधार कार्ड भी बनवा रहे हैं. इन सबके बाद भी बैंकरों की सैलरी नहीं बढ़ रही है. बैंकर रोज शाम को काम ख़त्म होने के बाद ब्रांचों के बाहर प्रदर्शन करते हैं. लाखों बैंकरों की ज़िंदगी तबाह हो चुकी है. उनके ये पांच साल कभी नहीं लौटेंगे. नौटबंदी जैसे फ्राड को वे पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ बड़ौदा समझ रहे थे. इसलिए ज़रूरी है कि नागरिक अपनी समझ का विस्तार करें. भक्ति तो कभी भी की जा सकती है.

वही हाल दो लाख ग्रामीण डाक सेवकों का है. इनकी सैलरी नहीं बढ़ी है. ये लोग 5000 रुपये में कैसे जीते होंगे. सरकार इन्हें हिंदू ही समझ कर सैलरी दे दे या भक्त सरकार से कहें कि ये हिंदू हैं और इन्हें तकलीफ है. 12 दिनों से हड़ताल पर हैं मगर कोई इनसे बात करने को तैयार नहीं. ग्रामीण डाक सेवकों के साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है.

मगर ऐसा कौन सा सेक्टर है जिसके लिए सरकार जश्न मना सकती है? मेरे हिसाब से दो सेक्टर हैं. एक झूठ और दूसरा धर्मांधता. हर सरकार के दौर में एक राजनीतिक संस्कृति पनपती है. मोदी सरकार के दौर में झूठ नई सरकारी संस्कृति है. जब प्रधानमंत्री ही झूठ बोलते हैं तो दूसरे की क्या कहें.

मोदी जी प्रत्येक साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने का झांसा देकर सरकार में आए थे, लेकिन साढ़े चार साल गुजर जाने के बाद भी युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। राज्य में बेरोजगारों की फौज बढ़ गई।”

मोदी जी झूठ क्यों बोलते हैं?
राज बरकरार रखने के साथ साथ और भी कई-सारे कारण हैं जैसे कि :

(1) विदेश घूमने में ज्यादा वक्त की खपत के कारण उन्हें खुद भी कई सारी बातें ध्यान में नहीं रहतीं और इस लिए कई बार झूठ बोल बैठते हैं ।

(2) दूसरों को नीचा दिखाने में इतने मशगूल हो जाते हैं कि वो ये भी भूल जाते हैं कि वो अब भारत के प्रधानमन्त्री हैं ना कि महज़ एक प्रवक्ता हैं और झूठ बोल बैठते हैं ।

(3) वो अपने दायित्वों का निर्वहन बेहतर कर सकते हैं मगर उनकी सोच 2019 को फतेह करने के लिए 2014 से ही रही है जिस के चलते अक्सर कई जगहों पर झूठ बोल बैठते हैं ।

(4) उन्हे इस बात से ज्यादा परेशानी नहीं होती है कि उनकी छवि उनके ही देश की जनता में बतौर एक झूठे प्रधानमन्त्री की हो चली है बल्कि उन्हे इस बात से ज्यादा फर्क पड़ता है कि पूरे देश में उनकी पार्टी का व पार्टी के एक विधायक के लिए भी प्रचार का मौका मिल सके और जिसे वो बखुबी निभाते भी हैं और उन के प्रचार के चक्कर में बहुत झूठ बोलना पड़ता है ।

(5) दूसरी सरकारों की ही तरह इन्होंने भी घोषणाएं तो तमाम कर दी मगर ये कन्ट्रोल नहीं है कि वो खाली घोषणाएं ही हैं या उन पर अमलीजामा पहनाया गया है या नहीं । इस से भी कई सारी बातें झूठ साबित हो गई हैं । वगैरह वगैरह वगैरह ।

(6) महज़ सत्ता हासिल करने के लिए और फिर सत्ता पर काबिज रहें इस के चलते दुनिया भर के वादे कर दिये गए थे इन के द्वारा जो अब झूठे साबित हुए हैं ।

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देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 06/10/2019

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  1. कलई खुलने के डर से भाजपा ने टीवी चैनलों की परिचर्चा का बहिष्कार किया – कांग्रेस

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आखिर क्यों दरक रही है काँग्रेस की दीवारें ?

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आखिर क्यों दरक रही है काँग्रेस की दीवारें ?

क्या कांग्रेस (Congress) में सत्ता को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी (Sonia Gandhi and Rahul Gandhi) में संघर्ष चल रहा है ? कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) का बयान तो कुछ यही इशारा कर रहा है. संजय निरुपम ने सोनिया गांधी के समर्थकों पर राहुल गांधी के खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया है और वो भी खुलकर. सूत्रों की मानें तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बीच आपसी मनमुटाव की खबरें राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के साथ ही आने लगी थी. राहुल गांधी और सोनिया गांधी का विवाद भले ही सामने ना आया हो लेकिन गाहे-बगाहे दोनों के समर्थक नेता एक दूसरे पर आरोप लगाने से बाज नहीं आए. अब संजय निरुपम के बयान के बाद ये बात खुलकर सामने आ गई है, पिछले एक साल में कांग्रेस के जिन दिग्गज नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़ा है अगर उनके नामों पर नजर डाले तो उसमें ज्यादातार वही नाम हैं, जो एक दौर में या तो राहुल गांधी की टीम में थे या राहुल गांधी खेमे के माने जाते थे. इन नेताओं में अल्पेश ठाकोर, प्रियंका चतुर्वेदी, कृपाशंकर सिंह, उर्मिला मातोंडकर जैसे कई नाम हैं,,,,,, अब उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की करीबी समझी जाने वाली रायबरेली की विधायक अदिति सिंह का भी झुकाव बीजेपी की तरफ दिख रहा है, महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के बीच राहुल गांधी के करीबी समझे जाने वाले संजय निरुपम और अशोक तंवर बगावत का झंडा उठा चुके हैं. अशोक तंवर ने जहां पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, वहीं कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम् ने भी राहुल गांधी की टीम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, उनका यह इकलौता ट्वीट इस बात की तस्दीक भी कर रहा  है,,,,,,

थोड़ा ध्यान से सोचिये कि क्या कांग्रेस में शुरु हुई ये दो पीढ़ियों की लड़ाई सिर्फ हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव को लेकर है? जवाब है नहीं. बल्कि ये लड़ाई आने वाले दिनों में पूरे देश के अंदर दिखाई दे सकती है, आज दोनों खेमे से खिलाड़ी खुलकर मैदान में आ गए हैं और एक दूसरे पर शब्दबाण भी चला रहे हैं. लेकिन इन खिलाड़ियों को ठीक से देखें तो भले ही ये दिख अकेले रहे हों लेकिन इनके पीछे एक टीम है. बात करते हैं हरियाणा विधानसभा चुनाव की. ऐन चुनाव से पहले कांग्रेस को तब बड़ा झटका लगा है, जब अशोक तंवर ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दिया, टिकट बंटवारे को लेकर अशोक तंवर कुछ समय से पार्टी आलाकमान से नाराज चल रहे थे. अशोक तंवर ने पांच करोड़ रुपये में टिकट बेचे जाने का आरोप भी लगाया था, इधर महाराष्ट्र कांग्रेस में पार्टी के दिग्गज नेता संजय निरूपम ने अपने द्वारा सुझाए गए नाम को खारिज किए जाने के बाद घोषणा की कि वह कांग्रेस के प्रचार अभियान में शामिल नहीं होंगे. साथ ही उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके करीबी राहुल गांधी के लोगों को टारगेट कर रहे हैं. लोगों का मानना है कि निरूपम और तंवर के बागी तेवर एक सोची-समझी स्क्रिप्ट का हिस्सा हैं. जिसके तहत एक बार फिर राहुल गांधी के नेतृत्व को दोबारा से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है. तंवर और निरूपम के बेबाक इल्ज़ामों के बावजूद जिस तरह से इन दोनों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की जा रही है, उससे ये स्पष्ट है कि पार्टी नेतृत्व का कहीं न कहीं इन दोनों नेताओं को संरक्षण भी मिला हुआ है.

अपुष्ट सूत्रों की माने तो राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से पहले अपनी मां सोनिया गांधी को विश्वास में नहीं लिया था. इसको लेकर सोनिया गांधी ने राहुल से नाराजगी भी जताई थी. कांग्रेस के कुछ करीबी नेताओं का दावा है कि सोनिया गांधी ने राहुल गांधी पर इस्तीफा वापस लेने का दबाव भी बनाया था, लेकिन राहुल टस से मस नहीं हुए. खबरें यह भी हैं कि उसके बाद सोनिया गांधी प्रियंका को अध्यक्ष की कुर्सी देना चाहती थीं, लेकिन राहुल गांधी ने  गांधी परिवार के बाहर का कांग्रेस अध्यक्ष होने का बयान देकर सोनिया गांधी और उनकी टीम के सामने मुश्किल खड़ी कर दी. अंत में सोनिया गांधी को कार्यकारी अध्यक्ष के रुप में सामने आकर कांग्रेस की डूबती नैया को सहारा देना पड़ा,,,,,

अब अंतिम में प्रश्न खड़ा होता है कि आखिर में ऐसी क्या वजह है कि कांग्रेस में इस तरह की परिस्थितियां पैदा हुई? जवाब सोनिया गाँधी के बयान से साफ़ है कि जनहित के मुद्दों की लड़ाई सोशल मीडिया के साथ ही जमीन पर भी लड़नी होगी। मतलब काँग्रेसी नेता ट्विटर और फेस बुक में जनहित के मुद्दों पर कुछ थोड़ा लिख़कर अपने कर्तव्य की इतिश्री भर ना करें वरन धरातल पर भी गऱीबों और मजलूमों के साथ खड़े हों ,,,,, साथ ही नेतागण गाँधी जी के राजनैतिक दर्शन को पढ़ें उनके सत्याग्रह आंदोलनों की बारीकियों को समझे और उनकी तरह ही समाज सुधार के कार्यक्रम करते रहें ताकि जनता से नियमित जुड़ाव रहे. शायद दोनों ही वजहों से कांग्रेस धीरे धीरे जनता के बीच अपनी पैठ खो रही है, बतौर सोनिया गाँधी जी के, काँग्रेस अपने पुरखों की दी हुई विचारों की विरासत से दूर, व्यक्ति केंद्रित हो गयी है, महात्मा और पटेल को भूल, भाजपा के द्वारा तैयार मुद्दों में ही उलझ क़र रह गयी है. इधर मोदी और अमित शाह ने काँग्रेस की इस कमजोरी को समझते हुए काँग्रेस से एक एक करके उनके सारे नेताओं की विरासत छीननी शुरू क़र दी. आज जब भाजपा शासित सरकार ने देश में महात्मा की 150 जयंती पूरे जोर शोर से मनाने का ऐलान किया तब काँग्रेस नेताओं को होश आया, जब पटेल की मूर्ति लग गयी और उस मूर्ति के साथ केवल मोदी ने फोटो खिचवा क़र देश में पटेल के एक मात्र उत्तराधिकारी होने का दावा भी ठोक दिया तब काँग्रेस के नेताओं ने हल्ला करना शुरू किया।

अब विचार करने की बात है कि लम्बे समय सत्ता में रहने के कारण काँग्रेस में क्या वास्तविक लड़ाकों, सत्याग्रहियों जन आन्दोलनकारियों की कमी हो गयी है? क्या नेता सुविधा भोगी हो गए? क्या सचमुच काँग्रेस नेतृत्व ने निर्णय लेने में ज्यादा विलम्ब किया? क्या पार्टी के कम आक्रामकता ने भी पूरे देश में कांग्रेस को समय से पूर्व बूढ़ा बना दिया? क्या कांग्रेस की रीढ़ की हड्डी समझा जाने वाला संगठन सेवादल अब अपना महत्व खो बैठा है? क्या कांग्रेस के बाकि सभी अनुषांगिक संगठनों को पुनः सक्रिय करने की जरुरत है? क्या कांग्रेस को विपक्ष में रहकर अपने नेताओं को ज्यादा आक्रामक और त्वरित निर्णय लेने की बाकायदा ट्रेनिंग देनी होगी? क्या कांग्रेस को “हाई कमान” जैसे शब्दावली के प्रचलन को खत्म करना होगा ? और क्या अपने क्षेत्रीय क्षत्रपों को ज्यादा अधिकार संपन्न बनाना होगा ? और क्या इन्हें अपने सभी नेताओं को जन आंदोलनों के लिए प्रेरित करते रहना होगा?

आज कांग्रेस को इन सभी प्रश्नों पर अपना राजनैतिक दर्शन स्पष्ट रखना होगा,,,, वैसे उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस सदी के “एक मात्र राजनेता महात्मा गाँधी” के वो उत्तराधिकारी हैं, यदि सिर्फ गाँधी और उनका चिंतन भी अपना लें तो कांग्रेस को कोई कभी भी परास्त नहीं क़र सकता। आज जब देश में पूंजीवाद हावी है ऐसे में कांग्रेस को गरीबों के साथ खड़ा रह क़र एक बेहतर नेतृत्व देना चाहिए, कांग्रेस को गाँधी की तरह गरीब, मजूर, शोषित और वंचित तबकों के वास्तविक कल्याण के लिए गंभीर प्रयास और नीतियां बनानी चाहिए, चिंता की बात है कि इस पूरी हिंदी पट्टी में बीजेपी शासन में शराब के कारण गरीब, किसान, मजूर, बर्बाद हुआ मगर सरकार को गाँधी के आदर्श के अनुकूल शराब बंदी करने में अभी भी खासी झिझक है आखिर क्यों ? अभी भी कांग्रेस के पास हिंदी पट्टी में सरकारें हैं जो देश में क्रांति का प्रतीक बन सकती हैं, इस महंगाई और पूंजीवादी वक्त में महात्मा बहुत सामयिक हैं मगर इसके लिए जरुरी है कि महात्मा, नेताओं के दीवारों पर भर टंगे ना रहें वो और उनका सत्याग्रह नेताओं के जीवनदर्शन का आदर्श भी हों, उनका परिवेश गणवेश और व्यवहार भी महात्मा के आदर्शो के अनुरूप हों, आज काँग्रेस को गाँधी के दो ही मन्त्रों को याद रखना चाहिए ,,,,रघुपति राघव राजा राम ,,,,,और वैष्णव जन तो तेणें कहिये जी ,,,,,पीर परायी जानी रे ,,,,,,,,जय गाँधी बाबा। .

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देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 05 /10/2019

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देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 05 /10/2019

  1. पटना में जल जमाव से परेशान हैं लोग JDU और BJP के नेता एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
  2. ‘पल पल दिल के पास’ ने पर्दे पर मचाया धमाल, दो हफ्तों में किया शानदार कलेक्शन
  3. आखिर कहाँ अबू उस्मान ने पांच दिन पहले दिल्ली में तबाही की साजिश रची थी
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  5. किस ट्रेन में 250 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा ? आखिर इस ट्रेन को लेकर लोग क्यों बेसब्र हैं ?
  6. भारतीय जनता पार्टी ने की चौथी लिस्ट जारी खडसे की जगह उनकी बेटी को मिला टिकट
  7. एक तरफा प्यार में नाकाम एक आशिक ने किया ट्रिपल मर्डर
  8. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल शुक्रवार आज नहर सत्याग्रह स्मृति वन में रोपेंगे पौधे
  9. CM योगी ने हरी झंडी दिखाकर किया तेजस को दिल्ली रवाना
  10. इंडियन रेलवे ने आज 4 अक्टूबर को चलने वाली 304 ट्रेनों को रद्द किया
  11. पत्नी ने अपने दो बच्चों के साथ मिलकर 35 वर्षीय पति की हत्या कर दी
  12. अमेरिका में भारतीय मूल का आईटी विशेषज्ञ अपनी प्रेमिका की कार में मृत पाया गया
  13. महिला आरक्षक ने लकवाग्रस्त महिला को कंधे पर उठाकर कराएं माता के दर्शन
  14. गांधी का अस्थिकलश चोरी
  15. क्यों फूट-फूटकर रोए सपा नेता ? बापू की प्रतिमा के सामने
  16. नदी में नहाने गई महिला का पैर फिसला, फिर….
  17. हनी ट्रैप में आरोपी बरखा के पति ने लगाए पुलिस पर गंभीर
  18. एक जमीन को 4 लोगों को बेंचने के मामले में पटवारी से पूछताछ
  19. देश-दुनिया‘सांप’ को देखकर चीख पड़ी महिला, पास जाकर देखा तो…
  20. 50 लोगों से भरी नाव पलटन से 7 लोगों की मौत
  21. इस देश में ई-सिगरेट के कारण 18 लोगों की मौत, 1000 बीमार
  22. समाजसेवी ने बनाया 80 घंटे लगातार बोलने का अनोखा रिकॉर्ड,
  23. कैबिनेट मंत्री के विवादित बोल
  24. खुले में पेशाब करने से दो पक्षों में हुई मारपीट, बीच में आए मासूम की हुई मौत
  25. बेरोजगारी एक बड़ी समस्या किन्तु सरकार खाली पद भरने की नहीं दिखती इच्छुक !!!
  26. पूर्व सांसद प्रिया दत्त पर विधानसभा चुनाव में टिकट बेचने का आरोप
  27. BOX OFFICE पर दूसरे दिन भी कायम रहा ‘WAR’ का असर कामाये इतने करोड़
  28. पति ने पकड़ा प्रेमी संग रंगेहाथों तो पत्नी ने कर ली आत्महत्या
  29. चिरंजीवी की फिल्म ने ‘वॉर’ को छोड़ा पीछे, धमाकेदार ओपनिंग से दी फिल्म को टक्कर
  30. कांग्रेस के वरिष्ठ मंत्री ने दिया बड़ा बयान कहा भाजपा के राम और हमारे राम में अंतर
  31. बाइक सवार ने पेशी पर जा रहे युवक को तहसील परिसर में मारी गोली, भोपाल रेफर
  32. अमिताभ बच्चन ने केबीसी 11 पर फ्लॉप फिल्म को लेकर की बात, बातों में छलका दर्द
  33. थाना अध्यक्ष छापेमारी करने पहुंचे तो, अवैध शराब बनाने वालों ने हमला बोल दिया
  34. दुष्‍कर्म के प्रयास में विफल होने के बाद 4 साल की बच्‍ची की कर दी बेहरमी से हत्‍या
  35. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर कंडेल में खुलेगा महाविद्यालय :भूपेश बघेल
  36. प्रेमी ने प्रेमिका की गला दबाकर कर दी हत्या जानिए क्या है कारण
  37. आरक्षण विरोधी रही है कांग्रेस जानबूझ कर हारी है हाईकोर्ट में मुकदमा: भाजपा
  38. देश-दुनियाछात्रा ने कुएं में लगाई छलांग, मौके पर ही मौत, कारणों का नहीं हुआ खुलासा
  39. जाति मामले में फंसे अजीत जोगी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है
  40. भैस चोरी कर भाग रहे बदमाशों ने पुलिस को देख पुलिस पर फायरिंग कर दी, भैंस को छोड़ फरार
  41. अमित जोगी ने हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर कहा कि “एक बार फिर न्याय की जीत हुई
  42. पाकिस्तान: स्टाइलिश दाड़ी बनाना 4 दुकानदारों को पड़ा महंगा, जाना पड़ा हवालात,
  43. कांग्रेस के साथ भाजपा किसी भी टी.वी. डिबेट एवं अन्य संवाद में शामिल नही होगी।
  44. पत्नी ने पति की हत्या कर , गटर में फेंका शव, लिखवा दी गुमशुदगी की रिपोर्ट
  45. चाकू की नोक पर अपहरण कर, होटल में ले जाकर किया रेप
  46. सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई के लिए तय समय सीमा में कटौती की
  47. 05 /10/2019 का पंचांग एवं राशिफल
  48. सत्ता का उन्माद कांग्रेस के सर चढ़कर बोल रहा : भाजपा
  49. आरक्षण के फैसले का अध्ययन करके हर संभव कानूनी लड़ाई लड़ी जायेगी : शैलेश
  50. अन्य खबरेकलई खुलने के डर से भाजपा ने टीवी चैनलों की परिचर्चा का बहिष्कार किया – कांग्रेस
  51. जाकी रही भावना जैसी प्रभुसूरत देखी तीन तैसी : शैलेश
  52. भगवान राम, महात्मा गांधी और सावरकर विचारधारा का अंतर बहुत स्पष्ट है : कांग्रेस

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