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ज्योतिष - वास्तु

दिनांक 10/07/2019 का पंचांग एवं राशिफल

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  • रायपुर (etoi news) 10.07.2019
  • दिनांक 10.07.2019 का पंचाग शुभ संवत 2076 शक 1941 ..सूर्य उत्तरायणयन का …आषाढ़ शुक्ल पक्ष…. अष्टमी तिथि… दिन में 03 बजकर 31 मिनट तक उपरांत दशमी तिथि… बुधवार… चित्रा नक्षत्र.. रात्रि को 07 बजकर 55 मिनट तक … आज चन्द्रमा …तुला राशि में… आज का राहुकाल दोपहर को 12 बजकर 09 मिनट से 01 बजकर 49 मिनट तक होगा …

महा अष्टमी व्रत से पायें शारीरिक कष्ट से राहत-

गुप्त नवरात्र मनाने और इनकी साधना का विधान देवी भागवत व अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। श्रृंगी ऋषि ने गुप्त नवरात्रों के महत्व बतलाते हुए कहा है कि जिस प्रकार वासंतिक नवरात्र में भगवान विष्णु की पूजा और शारदीय नवरात्र में देवी शक्ति की नौ देवियों की पूजा की प्रधानता रहती है, उसी प्रकार गुप्त नवरात्र दस महाविद्याओं के होते हैं। यदि कोई इन महाविद्याओं के रूप में शक्ति की उपासना करें, तो जीवन धन-धान्य, राज्य सत्ता और ऐश्वर्य से भर जाता है।

 गुप्त नवरात्र अष्टमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पूजा का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद माँ अष्टभुजी दुर्गा की पूजा करने के लिए आसन पर बैठें और हाथ में चावल लेकर भगवती दुर्गा का ध्यान करें। ध्यान करके माँ दुर्गा के चरणों में चावल समर्पित करें। आसन के लिए फूल चढ़ाएँ। यदि मिट्टी से निर्मित दुर्गा प्रतिमा का पूजन करना हो तो पूजन पात्र का प्रयोग करना चाहिए। इसके बाद माँ दुर्गा की मूर्ति को दूध से स्नान कराएँ और पुनरू शुद्ध जल से स्नान कराएँ। इसके बाद क्रमश: दही, शुद्ध घी, शहद व शक्कर से दुर्गा प्रतिमा को स्नान करवाएँ और हर बार शुद्ध जल से भी स्नान करवाएँ। पंचामृत से स्नान कराकर शुद्ध जल से स्नान कराएँ। इसके बाद दुर्गा प्रतिमा पर क्रमश: गंध, वस्त्र, यज्ञोपवीत समर्पित करें। इसके बाद चंदन व अन्य सुगंधित द्रव्य समर्पित करें। तत्पश्चात् पुष्पमाला, बिल्व पत्र व धूप अर्पित करना चाहिए। दीप दिखलाएँ और हाथ धो लें। माँ को नैवेद्य (भोग) लगाएँ और इसके बाद फल, पान और सुपारी चढ़ाएँ। दक्षिणा के रूप में कुछ धन अर्पित करें। कपूर से माँ भगवती की आरती करें व पुष्पांजलि अर्पित कर क्षमा प्रार्थना करें।

आषाढ़ शुक्ल अष्टमी को त्रिपुरा में खरसी-पूजा उत्सव मनाया जाता है। जिसमें अधिकतर संन्यासी ही भाग लेते हैं। तमिलनाडु में आषाढ़ मास की अष्टमी को मनाए जाने वाले महोत्सव को अदिपुरम कहा जाता है। इस दिन लोग अपने परिवार की सुख-शांति हेतु शक्ति-देवी की पूजा करते हैं। आषाढ़ शुक्ल नवमी गुप्त नवरात्र का अंतिम दिन होता है। उस दिन भारत के कश्मीर के भवानी मंदिर में विशाल मेला लगता है। उसी दिन हरि जयंती के कारण वैष्णव भक्त व्रत भी रखते हैं और वैष्णव मंदिरों में मनोकामनाओं की पूर्ति और दर्शनार्थ जाते हैं। इस दिन व्रत कर माता की पूजा करने से परिवार में शारीरिक से पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है.. परिवार में शरीर कष्ट पर होने वाले व्यय से राहत मिलती है ..

आज के राशियों का हाल तथा ग्रहों की चाल-

मेष राशि –

आपको मानसिक असंतोष हो सकता है…

भौतिक वस्तु की खरीदी कर सकते हैं…

अवसाद से बचकर रहना होगा नहीं तो कार्य बिगड सकता है…

  1. 1. दूध, चावल का दान करें…
  2. 2. श्री सूक्त का पाठ करें धूप तथा दीप जलायें…

वृषभ राशि –

   

यात्रा करने तथा उस यात्रा से धनहानि तथा विवाद के कारण तनाव संभव…

वाणी तथा आहार का संयम रखें…

उपाय –

  1. ऊॅ बुं बुधाय नमः का एक माला जाप कर गणपति की आराधना करें
  2. दूबी गणपति में चढ़ाकर मनन करें,
  3. एक मुठ्ठी मूंग का दान करें।

मिथुन राशि –

व्यवसायिक संबंधों में खटास….

कोर्ट में धन संबंधित विवाद…..

व्यर्थ की यात्रा…..

उपाय –

  1. ऊॅ रां राहवे नमः का जाप कर दिन की शुरूआत करें,
  2. धतूरे की माला शिवजी में चढ़ायें…

कर्क राशि –

ऊर्जा तथा उत्साह में वृद्धि…..

काम में एकाग्रता….

वातरोग से कष्ट….

उपाय –

  1. गणपति की उपासना करें, धूप, दीप तथा नैवेद्य चढ़ायें,
  2. गुरूजन को मीठी चीजों का दान करें,

सिंह राशि –

आर्ट फिल्ड में यष की प्राप्ति….

नई योजनाओं में अच्छी सफलता….

संबंधों में निकटता…

     शुक्र के लिए-

  1. ऊॅ शुं शुक्राय नमः का जाप करें तथा माॅ महामाया के दर्शन कर दिन की शुरूआत करें,
  2. चावल, धी, दूध, दही का दान करें साथ ही सौभाग्यवती स्त्री को सुहाग का सामान दान करें,

कन्या राशि –

सामाजिक उत्थान के महत्वपूर्ण कार्य के लिए छोटी यात्रा तथा उससे यश तथा प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे…

पत्नी के स्वास्थ्य एवं खान पान की अनियमितता के कारण…

छोटे-मोटे रोगों से मानसिक परेशानी हो सकती हैं

उपाय आजमायें –

  1. ऊॅ गुरूवे नमः का जाप करें…
  2. पीली वस्तुओं का दान करें…

तुला राशि –

परीक्षा के समय यात्रा के योग होने से… अध्ययन में बाधा….

तनाव हो सकता है…

भावुकता तथा अव्यवहारिक निर्णय लेने से बचें

उपाय करें-

  1. ऊॅ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः का जाप करें…
  2. दूध, चावल, का दान करें…

वृश्चिक राशि –

आज आपको मानसिक परेशानी का अनुभव हो सकता है.

आप अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें

व्यवसाय के संबंध में यात्रा भी कर सकते हैं.

उपाय

1.हनुमान मंदिर में नारियल चढ़ायें

2.बड़ों का आर्शीवाद लेकर घर से निकलें।

धनु राशि –

आज आपको अपने साथी की सहायता से लाभ प्राप्त हो सकता है.

नये अवसर की प्राप्ति….

वाहन चलाने में सावधानी बरतें

उपाय

     1.श्री सूक्त का पाठ करें धूप तथा दीप जलायें…

     2.रूद्राभिषेक करें…

मकर राशि –

थकान और कष्ट के कारण आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं

अपनी मानसिक स्थिति नियंत्रण में रखनी होगी ….

अपने आहार और योग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी ….

उपाय

1.चीनी या चावल का दान करें….

2.स्वेत वस्त्र धारण करें…

कुंभ राशि –

आज आपको कुछ बाधाओं के साथ सफलता प्राप्त होगी

वाहन की रफ्तार नियंत्रित रखें.

बाधाओं के कारण आपको सफलता की खुशी अधिक नहीं होगीं.

उपाय

     1.राहु के मंत्र का जाप करें…

     2.तिल का दान करना चाहिए।

मीन राशि –

व्यवसायिक दृष्टिकोण से भी आज का दिन अनुकूल रहेगा….

आप अपने कार्यों की सफलता के लिए प्रयास और मेहनत अधिक करेगें….

आज का दिन पारिवारिक दृष्टि से आपके अनुकूल रहने की संभावनाएं बनती है….

उपाय

      1.सूर्य के मंत्र का जाप

      2.गेहूं का दान करें।

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देश दुनिया की पढ़ें ख़ास ख़बरें,,,, सुबह की सुर्खियाँ 15/10/2019

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ज्योतिष - वास्तु

15/10/2019 का पंचांग एवं राशिफल(सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना)

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  • रायपुर (etoi news) 14.10.2019
  • दिनांक 15. 10.2019 का पंचाग
  • शुभ संवत 2076 शक 1941 …
  •  सूर्य दक्षिणायन का …कार्तिक मास कृष्ण पक्ष…. द्वितीया… रात्रि को 04 बजकर 40 मिनट तक … मंगलवार…. अश्विनी नक्षत्र.. दोपहर को 12 बजकर 49 मिनट तक … आज चन्द्रमा … मेष राशि में… आज का राहुकाल दोपहर को 02 बजकर 44 मिनट से  04 बजकर 11 मिनट तक होगा …

सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना –

हिन्दू धर्म के सबसे जाग्रत और सर्वशक्तिशाली देवताओं में एकमत्र हनुमानजी की कृपा जिस पर बरसरना शुरू होती है उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। दस दिशाओं और चारों युग में उनका प्रताप है। जो कोई भी व्यक्ति उनसे जुड़ा समझों उसका संकट कटा। प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए। हनुमानजी इस कलियुग में सबसे ज्यादा जाग्रत और साक्षात हैं। कलियुग में हनुमानजी की भक्ति ही लोगों को दुख और संकट से बचाने में सक्षम हैं। हनुमानजी की भक्ति और हनुमान चालीसा पढ़ने से व्यक्ति खुद को कई तरह की बाधाओं से बचा सकता है। आज मंगल का पूर्व दिशा में उदय हो रहा है साथ ही आज कार्तिक मास का प्रथम मंगलवार है। आज के दिन आप अपने जीवन के कुछ कष्ट के सामान्य उपाय करें तो जरूर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आईये जानते हैं कि क्या परेशानी के लिए मंगल के क्या उपाय आपके लिए शुभ होगा।

यदि आपके बच्चे अंधेरे, भूत-प्रेत से डरते हैं या किसी भी प्रकार का भय है तो आप हं हनुमंते नमः का रात को सोने से पूर्व हाथ-पैर और कान-नाक धोकर पूर्वाभिमुख होकर 108 बार जप करके सो जाएं। कुछ ही दिनों में धीरे-धीरे आपमें निर्भीकता का संचार होने लगेगा।

साढ़े साती, अढ़ाय्या या राहु की महादशा चल रहा है तो प्रति मंगलवार हनुमान मंदिर जाएं और शराब व मांस के सेवन से दूर रहें। इसके अलावा शनिवार को सुंदरकांड या हनुमान चालीसा पाठ करने से शनि भगवान आपको लाभ देने लगेंगे। शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर हनुमानजी को आटे के दीपक लगाएं।

यदि आप गठिया, वात, सिरदर्द, कंठ रोग, जोड़ों का दर्द आदि तरह के दर्द से परेशान हैं, तो जल का एक पात्र सामने रखकर हनुमान बाहुक का 26 या 21 दिनों तक मुहूर्त देखकर पाठ करें। प्रतिदिन उस जल को पीकर दूसरे दिन दूसरा जल रखें। हनुमानजी की कृपा से शरीर की समस्त पीड़ाओं से आपको मुक्ति मिल जाएगी।

यदि आपका कोई केस कोर्ट में चल रहा है तो भी आप जीत जाएंगे। प्रति मंगलवार एवं शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर गुड़ और चना अर्पित करें और घर में सुबह-शाम हनुमान चालीसा का पाठ करें। पाठ करने के पहले और बाद में आधे घंटे तक किसी से बात न करें। जब 21 दिन पूरे हो जाएं तो हनुमानजी को चोला चढ़ाएं। हनुमान जी की कृपा हुई तो आप निश्चिजत ही कोर्ट से बरी हो जाएंगे।

आज के राशियों का हाल तथा ग्रहों की चाल-

मेष –

विद्यार्थियों के लिए आज का दिन अच्छा नहीं होगा…

आपके कोटेषन का गलत उपयोग हो सकता है, बोलने में सावधानी रखें…

पारिवारिक सदस्य को चिकित्सा की आवष्यकता हो सकती है….

उपाय

1.माँ महामाया के दर्शन करें…

2.चावल, दूध, दही का दान करें…

 

वृषभ –

आज सुबह से ही सुस्ती और थकान होगी….

नाकारात्मक विचारों से बचें…उचित प्रयास करें…

आवास से संबंधित समस्या पर कार्य करेंगे….

उपाय

1.भगवान आशुतोष का रूद्धाभिषेक करें,

2.उड़द या तिल दान करें,

 

मिथुन –

किसी कागजात पर हस्ताक्षर से पूर्व सावधानी बरतें…

कानूनी विवाद से बचें…

बहुत भरोस पर कार्य ना करें….

उपाय

1.पीली वस्तुओं का दान करें…

2.गुरूजनों का आर्शीवाद लें..

 

कर्क –

आर्थिक स्थिति सुधरने के योग….

पारिवारिक जीवन में शांति रहेगी…

पक्षपात ना करें…

उपाय

1.हनुमानजी की उपासना करें..

2.मसूर की दाल, गुड दान करें..

 

सिंह –

व्यवसाय के नये स्त्रोंत खुलेंगे…

भागीदारों का अच्छा सहयोग….

नवीन क्षेत्र या नये अवसर की प्राप्ति…

उपाय

1.दूबी गणपति में चढ़ाकर मनन करें,

2.एक मुठ्ठी मूंग का दान करें।

कन्या –

आज आपको नए कामों में लाभ….

संपत्ति संबंधी विवाद की समाप्ति….

अध्ययन संबंधी यात्रा…..

पितातुल्य व्यक्तियों से वैचारिक मतभेद से तनाव…

उपाय करें तो लाभ होगा-

  1. ऊॅ बृं बृहस्पतयै नमः का एक माला जाप करें….
  2. पुरोहित को केला, नारियल का दान करें….

 

तुला –

आज आपके किसी राजनैतिक सर्पोट से लाभ…

पारिवारिक शुभकाम में सहभागिता….

पदोन्नति या नौकरी में परिवर्तन….

उपाय

2.मूली का दान करें..

3.सूक्ष्म जीवों को आहार दें..

 

वृश्चिक –

संतान पक्ष की ओर से कोई शुभ सूचना प्राप्त….

उत्सव में सम्मिलित होंगे….

आलस्य के कारण कार्य में विलंब…

इमोशनल होंगे….

उपाय करें –

1.उॅ नमः शिवाय का जाप करें…

2.दूध, चावल का दान करें…

 

धनु-

बौद्धिक चातुर्य से विवाद का निपटारा…

अध्ययन संबंधी की तैयारी करेंगे…

विरोध तथा हानि की संभावना…

उपाय –

  1. भगवान आशुतोष का रूद्धा भिषेक करें,
  2. उड़दया तिल दान करें,

 

मकर-

बुद्धिमानी से नए कार्य में आरंभ से ही सफलता….

आपके उत्साह एवं लगन में वृद्धि…..

किसी भागीदार से व्यवहारिक द्धंद से कष्ट संभव….

उपाय –

1.गणेष की आराधना करें …

2.इलायची खायें एवं खिलायें…

 

 

कुंभ-

पैतृक रिष्तों में नजदीकी बढ़ेगी….

उत्साह एवं सुख में वृद्धि…

काम में अचानक व्यवधान…

उपाय –

1.श्री सूक्त का पाठ करें धूप तथा दीप जलायें…

2.रूद्राभिषेक करें…

 

मीन-

मातृपक्ष के सदस्यों से मुलाकात…

पूरा दिन पूजा में बितेगा…

मानसिक शांति देगा…

उपाय –

  1. ‘‘ऊॅ शं शनैश्चराय नमः’’ का जाप करें.
  2. माता दुर्गा को वायलेट रंग का वस्त्र चढ़ायें….

 

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चौघड़िया मुहूर्त क्या है ?

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चौघड़िया के विषय में, क्या है चौघड़िया ?

चौघड़िया का उपयोग किसी नये कार्य को प्रारम्भ करने के लिए शुभ समय देखने हेतु किया जाता है। परम्परागत रूप से चौघड़िया का उपयोग यात्रा के मुहूर्त के लिए किया जाता है लेकिन इसकी सरलता के कारण इसे अन्य मुहूर्त देखने के लिए भी उपयोग किया जाता है।

किसी शुभ कार्य को प्रारम्भ करने के लिए अमृत शुभ लाभ और चर इन चार चौघड़ियाओं को उत्तम माना गया है और शेष तीन चौघड़ियाओं, रोग,काल और उद्वेग को अनुपयुक्त माना गया है जिन्हें त्याग देना चाहिये।

सूर्योदय और सूर्यास्त के मध्य के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है तथा सूर्यास्त और अगले दिन सूर्योदय के मध्य के समय को रात्रि का चौघड़िया कहा जाता है।

वार वेला, काल वेला एवं काल रात्रि क्या है ?

यह माना जाता है कि वार वेला, काल वेला और काल रात्रि के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाने चाहिये। वार वेला एवं काल वेला दिन के समय प्रचलित रहते हैं जबकि काल रात्रि, रात के समय प्रचलित रहती है। ऐसा माना जाता है कि इस समय कोई भी मंगल कार्य करना फलदायी नहीं होता है।

चौघड़िया नाम कैसे पड़ा?

हिन्दु धर्मं में, सूर्योदय से सूर्यास्त तथा सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच के समय को ३०-३० घटी में बाँटा गया है। चौघड़िया मुहूर्त के लिए, उसी ३० घटी की समय अवधि को ८ भागों में विभाजित किया गया है। जिसके परिणामस्वरूप दिन और रात के दौरान ८-८ चौघड़िया मुहूर्त होते है। चूँकि प्रत्येक चौघड़िया मुहूर्त लगभग ४ घटी का होता है, इसलिए इसे चौघड़िया = चौ (चार) + घड़िया (घटी) के रूप में जाना जाता है। चौघड़िया मुहूर्त को चतुर्श्तिका मुहूर्त भी कहा जाता है।

शुभ चौघड़िया तथा राहु काल साथ हो तो क्या करें ?

यह बिल्कुल सम्भव है कि शुभ चौघड़िया तथा राहु काल साथ हों। राहु काल को अनिष्टकारी माना जाता है। दक्षिण भारत में, मुहूर्त का चयन करते समय इसे अत्यधिक महत्व दिया जाता है। हालाँकि मुहूर्त के लिए राहु काल का कोई प्रामाणिक संदर्भ नहीं है, लेकिन उस शुभ चौघड़िया मुहूर्त को त्यागना ही बेहतर है जो राहु काल के साथ ओवरलैप करता हो।

क्या करें यदि वार वेला, काल वेला और रात्रि वेला शुभ चौघड़िया के साथ आते हैं ?

यह बिल्कुल सम्भव है कि शुभ चौघड़िया वार वेला, काल वेला या काल रात्रि के साथ व्याप्त हो। चौघड़िया मुहूर्त का चयन करते समय, वार वेला, काल वेला और काल रात्रि के समय को त्याग दिया जाना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि वार वेला, काल वेला और काल रात्रि के दौरान किए गए सभी मांगलिक कार्य फलदायी नहीं होते हैं और वान्छित परिणाम नहीं देते हैं।

अच्छे या बुरे चौघड़िया को कैसे चिह्नित करें ?

प्रत्येक दिन का पहला मुहूर्त उस दिन के ग्रह स्वामी द्वारा शासित होता है। उदाहरण के लिए, रविवार का, पहला चौघड़िया मुहूर्त सूर्य द्वारा शासित होता है। इसके बाद के मुहूर्त क्रमशः शुक्र, बुध, चन्द्रमा, शनि, बृहस्पति तथा मंगल द्वारा शासित होते हैं। दिन का अन्तिम मुहूर्त भी उस दिन के ग्रह स्वामी द्वारा शासित होता है।

इसलिए प्रत्येक चौघड़िया मुहूर्त का शुभ या अशुभ प्रभाव, स्वामी ग्रह की प्रकृति के आधार पर चिह्नित किया जाता है। वैदिक ज्योतिष में, शुक्र, बुध, चन्द्रमा और बृहस्पति के प्रभाव की समय अवधि को आमतौर पर शुभ माना जाता है। जबकि सूर्य, मंगल और शनि के प्रभाव की समय अवधि को आमतौर पर अशुभ माना जाता है। उपयुक्त जानकारी के आधार पर, हम प्रत्येक चौघड़िया मुहूर्त को शुभ या अशुभ के रूप में चिह्नित कर सकते हैं। यह ध्यान दिए जानें योग्य है कि अशुभ चौघड़िया मुहूर्त भी कुछेक कार्यों के लिए उचित हो सकते हैं।

उद्वेग चौघड़िया ?

वैदिक ज्योतिष में, सूर्य को एक अनिष्टकारी ग्रह माना गया है। इसलिए इसका प्रभाव आमतौर पर अशुभ माना जाता है और उद्वेग के रूप में चिह्नित किया जाता है। हालाँकि, सरकारी कार्यों के लिए, उद्वेग चौघड़िया को अच्छा माना जाता है।

चर चौघड़िया ?

वैदिक ज्योतिष में, शुक्र को एक लाभकारी ग्रह माना गया है। इसलिए इसका प्रभाव आमतौर पर शुभ माना जाता है और चर या चन्चल के रूप में चिह्नित किया जाता है। शुक्र की चर प्रकृति के कारण, चर चौघड़िया को यात्रा उद्देश्य के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

लाभ चौघड़िया ?

वैदिक ज्योतिष में, बुध को एक लाभकारी ग्रह माना गया है। इसलिए इसका प्रभाव आमतौर पर शुभ माना जाता है और लाभ के रूप में चिह्नित किया जाता है। लाभ चौघड़िया को शिक्षा शुरू करने हेतु तथा नया कौशल प्राप्त करने हेतु सबसे उपयुक्त माना जाता है।

अमृत चौघड़िया ?

वैदिक ज्योतिष में, चन्द्रमा को एक लाभकारी ग्रह माना गया है। इसलिए इसका प्रभाव आमतौर पर शुभ माना जाता है और अमृत के रूप में चिह्नित किया जाता है। अमृत चौघड़िया को सभी प्रकार के कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है।

काल चौघड़िया ?

वैदिक ज्योतिष में शनि को एक अनिष्टकारी ग्रह माना गया है। इसलिए इसका प्रभाव आमतौर पर अशुभ माना जाता है और काल के रूप में चिह्नित किया जाता है। काल चौघड़िया के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। हालाँकि, धन अर्जन हेतु की जाने वाली गतिविधियों के लिए काल चौघड़िया उपयुक्त है।

शुभ चौघड़िया ?

वैदिक ज्योतिष में, बृहस्पति को एक लाभकारी ग्रह माना गया है। इसलिए इसका प्रभाव आमतौर पर शुभ माना जाता है और शुभ के रूप में चिह्नित किया जाता है। शुभ चौघड़िया को विशेष रूप से विवाह समारोह आयोजित करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

रोग चौघड़िया ?

वैदिक ज्योतिष में, मंगल को एक अनिष्टकारी ग्रह माना गया है। इसलिए इसका प्रभाव आमतौर पर अशुभ माना जाता है और रोग के रूप में चिह्नित किया जाता है। रोग चौघड़िया के दौरान कोई शुभ काम नहीं किया जाता है। हालाँकि, युद्ध और दुश्मन को हराने के लिए रोग चौघड़िया की अनुशंसा की जाती है।

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