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ज्योतिष - वास्तु

दिनांक 12/07/2019 का पंचांग एवं राशिफल

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  • रायपुर (etoi news) 11.07.2019
  • दिनांक 12.07.2019 का पंचाग
  • शुभ संवत 2076 शक 1941 ..
  • सूर्य उत्तरायणयन का …आषाढ़ शुक्ल पक्ष…. एकादशी तिथि..रात्रि को 01 बजकर 55 मिनट तक… शुक्रवार… विशाखा नक्षत्र.. शाम को 06 बजकर 25 मिनट तक … आज चन्द्रमा …तुला राशि में… आज का राहुकाल दिन को 10 बजकर 29 मिनट से 12 बजकर 09 मिनट तक होगा …

देव शयनी एकादशी व्रत –

 चतुर्मास जो कि हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार चार महीने का आत्मसंयम काल है, देवशयनी आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से प्रारम्भ हो जाता है। देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारम्भ हो जाता है इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। देवशयनी एकादशी के चार माह के बाद भगवान् विष्णु प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागतें हैं। देवशयनी एकादशी से चार माह के लिए विवाह संस्कार बंद हो जाएंगे। आज से देव सो जाएंगे।

 पुराणों में कहा गया है कि जो व्यक्ति देव शयनी और देव प्रबोधनी एकादशी का व्रत रखता है वह भगवान विष्णु की परम कृपा से उत्तम लोकों में स्थान प्राप्त करता है। देवशयनी एकादशी व्रतविधि एकादशी को प्रातःकाल उठें। इसके बाद घर की साफ-सफाई तथा नित्य कर्म से निवृत्त हो जाएँ। स्नान कर पवित्र जल का घर में छिड़काव करें। घर के पूजन स्थल अथवा किसी भी पवित्र स्थल पर प्रभु श्री हरि विष्णु की सोने, चाँदी, तांबे अथवा पीतल की मूर्ति की स्थापना करें। तत्पश्चात उसका षोड्शोपचार सहित पूजन करें। इसके बाद भगवान विष्णु को पीतांबर आदि से विभूषित करें। तत्पश्चात व्रत कथा सुननी चाहिए। इसके बाद आरती कर प्रसाद वितरण करें। अंत में सफेद चादर से ढँके गद्दे-तकिए वाले पलंग पर श्री विष्णु को शयन कराना चाहिए। व्यक्ति को इन चार महीनों के लिए अपनी रुचि अथवा अभीष्ट के अनुसार नित्य व्यवहार के पदार्थों का त्याग और ग्रहण करें। इस व्रत से प्राणी की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। व्रती के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यदि व्रती चातुर्मास का पालन विधिपूर्वक करे तो महाफल प्राप्त होता है।

आज के राशियों का हाल तथा ग्रहों की चाल-

मेष राशि –

     मेष राशि वाले जातकों के….

     आपको मानसिक असंतोष हो सकता है…साथ ही….दुर्घटना या चोट से आप आकस्मिक हानि उठा सकते हैं….

अतः राहु के प्रभाव से उत्पन्न कष्ट की शांति के लिए –

  1. ऊॅ रां राहवे नमः का एक माला जाप कर दिन की शुरूआत करें..
  2. मूली का दान करें..
  3. सूक्ष्म जीवों को आहार दें..

 

वृषभ –

     वृषभ राशि वालें जातकों के…

     आप अपनी महत्वाकांक्षा के अनुरूप उत्साहित होकर कार्य करेंगे…जिससे आपकी आज      बहुप्रतीक्षित इच्छा की पूर्ति होगी…भौतिक वस्तु की खरीदी कर सकते हैं…

मंगल  दोषों की निवृत्ति के लिए निम्न उपाय करें तो लाभ होगा-

  1. ऊॅ अं अंगारकाय नमः का जाप करें…
  2. हनुमानजी की उपासना करें..
  3. मसूर की दाल, गुड दान करें..

 

मिथुन –

     मिथुन राशि वाले जातकों के…

 … अवसाद से बचकर रहना होगा नहीं तो कार्य बिगड सकता है… साथ ही सत्यवादी होने के कारण भाई या परिवार के प्रति कठोर होने से मानसिक शांति एवं प्रसन्नता में कमी आ सकती है.

अतः सूर्य से संबंधित उपाय करें

  1. सूर्य की शांति –
  2. प्रातः स्नान के उपरांत सूर्य को जल में लाल पुष्प… शक्कर मिलाकर अध्र्य देते हुए ऊॅ धृणि सूर्याय नमः का पाठ करें… सूर्य नमस्कार करें..
  3. गुड़.. गेहू… दान करें..

 

कर्क –

     कर्क राशि वाले सभी जातकों के…..

आज आप अपनी क्षमता से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी स्वयं की भूल को सुधार लेंगे….जिसे बड़ों की प्रशंसा तथा लोगों का अच्छा साथ मिलेगा वाकचातुर्य होने से अपना काम करवाने में सफल रहेंगे…साथ ही व्यवसाय या सहयोगियों से अच्छे सहयोग से लाभ प्राप्त करेंगे..किंतु स्वास्थ्य खराब हो सकता है..

अतः चंद्रमा के इस दोष की निवृत्ति के लिए –

  1. ऊॅ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः का जाप करें…
  2. दूध, चावल का दान करें…
  3. श्री सूक्त का पाठ करें धूप तथा दीप जलायें…

सिंह –

     सिंह राशि वाले सभी जातकों के……

     नये प्रकार के काम की शुरूआत हो सकती है….. स्वास्थ्य के कारण नित्यचर्या में अव्यवस्थित होने से…. हानि तथा कष्ट संभव…इसके लिए विपरीत परिस्थितियों में भी प्रतिरोध शक्ति का विकास करें एवं

शुक्र के निम्न उपाय आजमायें

  1. ऊॅ शुं शुक्राय नमः का जाप करें…
  2. महामाया के दर्शन करें…
  3. चावल, दूध, दही का दान करें…

 

कन्या –

     कन्या राशि वाले सभी जातकों के…

यात्रा करने तथा उस यात्रा से धनहानि तथा विवाद के कारण तनाव संभव…वाणी तथा आहार का संयम रखें…

अतः बुध जनित दोषों को दूर करने के लिए –

  1. ऊॅ बुं बुधाय नमः का एक माला जाप कर गणपति की आराधना करें
  2. दूबी गणपति में चढ़ाकर मनन करें,
  3. एक मुठ्ठी मूंग का दान करें।

तुला –

     तुला राशि वाले सभी जातकों के….

लेखन तथा सृजनात्मक क्षमता से अच्छी सराहना मिलेगी…आपकी योजनाए फलीभूत होंगी….प्रणय संबंधों में सफलता मिलेगी…किंतु शनि के कारण बेहद कडवा बोलने एवं विवाद से रिष्तों में कटुता….जिससे मानसिक अशांति हो सकती है…

अतः शनि कृत दोषों की निवृत्ति के लिए –

  1. ‘‘ऊॅ शं शनैश्चराय नमः’’ की एक माला जाप कर दिन की शुरूआत करें.
  2. भगवान आशुतोष का रूद्धाभिषेक करें…
  3. उड़द या तिल दान करें…

 

वृश्चिक –

     वृश्चिक राशि वालें सभी जातकों के….

कला एवं साहित्य के प्रेमी होने से….आपको विशेष प्रशंसा तथा राजकीय पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति……माता-पिता का स्वास्थ्य एवं थकाने वाली रूटिन से तनाव…

सूर्य से उत्पन्न कष्ट की निवृत्ति के लिए –

  1. प्रातः स्नान के उपरांत सूर्य को जल में लाल पुष्प… शक्कर मिलाकर अध्र्य देते हुए ऊॅ धृणि सूर्याय नमः का पाठ करें… सूर्य नमस्कार करें..
  2. गुड़.. गेहू… दान करें..

 

धनु –

     धनु राशि वाले सभी जातकों के…

आत्मविश्वासी तथा नियम में अडिग रहकर कार्य करने एवं कार्य में नवीनता से आपको आज संचार माध्यम से शुभ समाचार की प्राप्ति होगी….करीबी रिश्तेदार या छोटे भाई की खुशहाली से प्रसन्न रहेंगे…. काम की गुणवत्ता के साथ समय की भी कीमत समझे तथा मंगल से हाथ या कंधे में खिचाव से परेशान हो सकते हैं…

अतः मंगल के शुभ प्रभाव में वृद्धि एवं कष्टों की निवृत्ति के लिए –

  1. ऊॅ अं अंगारकाय नमः का जाप करें…
  2. हनुमानजी की उपासना करें..
  3. मसूर की दाल, गुड दान करें..

 

मकर –

     मकर राशि वाले सभी जातकों के….

सामाजिक उत्थान के महत्वपूर्ण कार्य के लिए छोटी यात्रा तथा उससे यश तथा प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे…पत्नी के स्वास्थ्य एवं खान पान की अनियमितता के कारण…

छोटे-मोटे रोगों से मानसिक परेषानी हो सकती हैं बृहस्पति के निम्न उपाय आजमायें –

  1. ऊॅ गुरूवे नमः का जाप करें…
  2. पीली वस्तुओं का दान करें…
  3. गुरूजनों का आर्शीवाद लें..

 

कुंभ –

     कुंभ राशि वाले जातकों के…

जीवन में छोटे बदलाव आपको लाभदायक होंगे….अपनी जिम्मेदारी की प्राथमिकता तय करें एवं अपव्ययी होने से बचे…जिससे आर्थिक तंगी हो सकती है…. किसी अफवाह के कारण मानसिक चिंता हो सकती है….

अतः शुक्र जनित तनाव से निवारण के लिए –

  1. ऊॅ शुं शुक्राय नमः का जाप करें…
  2. महामाया के दर्शन करें…
  3. चावल, दूध, दही का दान करें…

मीन –

     मीनराशि वालों सभी जातकों के…

     परीक्षा के समय यात्रा के योग होने से… अध्ययन में बाधा…. तनाव हो सकता है…अतः भावुकता तथा अव्यवहारिक निर्णय लेने से बचें एवं चंद्रमा से संबंधित कष्ट की

निवृत्ति के लिए चंद्रमा के निम्न उपाय करें-

  1. ऊॅ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः का जाप करें…
  2. दूध, चावल, का दान करें…
  3. श्री सूक्त का पाठ करें धूप तथा दीप जलायें…
  4. रूद्राभिषेक करें…

 

 

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भगवान शिव के इन 5 मंदिरों में दर्शन के साथ, सावन महीने की करें शुरुआत

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”शि’ का अर्थ है ‘मंगल’ और ‘व’ कहते हैं दाता को, इसलिए जो मंगलदाता है, वही शिव है। शिव ब्रह्म रूप में शांत हैं, तो रुद्र रूप में रौद्र हैं। शिव हमारी प्रार्थनाएं सहजता से स्वीकार करते हैं पर शिव का मूल उद्देश्य हमें अपनी तरह सहज, सरस और सरल बनाना है। श्रावण में शिव अभिषेक कामनाओं की पूर्ति हेतु संपन्न किया जाता है, लेकिन वह शुष्क मन-प्राण को भी सरस कर देता है। मन को चंद्रमा नियंत्रित करता है, जो सोमवार के दिन का स्वामी है। इसलिए शिवलिंग अभिषेक सोमवार को अवश्य किया जाता है, क्योंकि मन को उत्फुल्लित करने का यह एक कारगर उपाय है। तो 17 जुलाई से सावन महीने की हो रही है शुरुआत। भारत में बने इन मंदिरों का दर्शन इस पावन महीने में होगा खास, जानेंगे इसके बारे में….

तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड

समुद्र तल से 3680मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर है। जो बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर के बीच में स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही अद्भुत है। हिमालय पर्वत की बर्फ से ढकी ऊंची चोटियां इसकी खूबसूरती में लगाती हैं चार चांद। तीर्थयात्रियों के साथ ही सैलानियों को भी ये जगह बहुत लुभाती है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर भगवान शिव के प्रिय ‘नंदी’ की मूर्ति विराजमान है। द्वार के दाईं ओर भगवान गणेश की मूर्ति है। मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी हुई है और आसपास कई छोटे मंदिर हैं।

जूनागढ़, भावनाथ तालेटी

जूनागढ़ सिर्फ गिर नेशनल पार्क के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि ये साधुओं का भी घर है जो सावन महीने और महाशिवरात्रि के मौके पर दर्शन के लिए भारी तादाद में आते हैं। इनके अलावा दुनिया के अलग-अलग कोनों से भी लोग मंदिर में जल चढ़ाने और पूजा-अर्चना करने आते हैं। शिवरात्रि में तो जूनागढ़ आकर यहां के कल्चर और साधुत्व से भी रुबरू होने का मौका मिलता है।

पशुपतिनाथ मंदिर, मंदसौर

मध्यप्रदेश के मंदसौर में बना ये मंदिर भारत का इकलौता पशुपतिनाथ का मंदिर है। जो नेपाल के पशुपतिनाथ से काफी मिलता-जुलता हुआ है और इसलिए ही इसका नाम पशुपतिनाथ पड़ा। चिकने चमकदार पत्थर से बनी हुई पशुपतिनाथ की प्रतिमा सवा सात फीट ऊंची है। शिवना नदी के तट पर बसे इस मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है। कहते हैं सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूरी पूरी होती है।

मुरुदेश्वर मंदिर, कर्नाटक 

भगवान शिव का एक नाम मुरुदेश्वर भी है। कंडुका पहाड़ी पर बना ये मंदिर तीनों तरफ से अरब सागर से घिरा हुआ है। मंजिल में 20 मंजिला गोपुरा बना हुआ है। 249 फुट लंबा दुनिया का सबसे बड़ा गोपुरा है। समुद्र तट के पास स्थित भगवान शिव का यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है और मंदिर परिसर में बने भगवान शिव की विशाल मूर्ति तकरीबन 123 फीट है।

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

भुवनेश्र्वर के सबसे बड़े मंदिरों से में एक है। जो कलिंग की वास्तुकला और मध्यकालीन ऐतिहासिक परंपरा का बेजोड़ नमूना है। मंदिर के अंदर भगवान विष्णु की भी प्रतिमा है। शिव से जुड़े हर एक त्यौहार में आप यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देख सकते हैं। लिंगराज मंदिर से होकर एक नदी गुजरती है जो कई तरह की शारीरिक बीमारियों को दूर करता है। सावन महीने में सुबह से ही भक्तगण महानदी से पानी भरकर पैदल चलकर मंदिर तक आते हैं।

 

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जानें गुरु पूर्णिमा का महत्व और उपासना का तरीका….

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आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, अतः इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है अतः इस दिन वायु की परीक्षा करके आने वाली फसलों का अनुमान भी किया जाता है. इस दिन शिष्य अपने गुरु की विशेष पूजा करता है और उसे यथाशक्ति दक्षिणा,पुष्प,वस्त्र आदि भेंट करता है.शिष्य इस दिन अपनी सारे अवगुणों को गुरु को अर्पित कर देता है, तथा अपना सारा भार गुरु को दे देता है. इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा.

कौन हो सकता है आपका गुरु :-मान्यतः हम लोग शिक्षा प्रदान करने वाले को ही गुरु समझते हैं परन्तु वास्तव में ज्ञान देने वाला शिक्षक बहुत आंशिक अर्थों में गुरु होता है. जन्म जन्मान्तर के संस्कारों से मुक्त कराके जो व्यक्ति या सत्ता ईश्वर तक पहुंचा सकती हो,ऐसी सत्ता ही गुरु हो सकती है. हिंदू धर्म में गुरु होने की तमाम शर्तें बताई गई हैं, जिसमें से प्रमुख 13 शर्तें निम्न प्रकार से हैं.

शांत,दान्त,कुलीन,विनीत,शुद्धवेषवाह,शुद्धाचारी,सुप्रतिष्ठित,शुचिर्दक्ष,सुबुद्धि,आश्रमी,ध्याननिष्ठ,तंत्र-मंत्र विशारद,निग्रह-अनुग्रह गुरु की प्राप्ति हो जाने के बाद प्रयास करना चाहिए कि उसके दिशा निर्देशों का यथा शक्ति पालन किया जाए.

  • कैसे करें गुरु की उपासना
  • इसके बाद उन्हें श्वेत या पीले वस्त्र दें.
  • यथाशक्ति फल,मिष्ठान्न दक्षिणा अर्पित करें.
  • गुरु से अपना दायित्व स्वीकार करने की प्रार्थना करें.
  • गुरु को उच्च आसन पर बैठाएं.
  • उनके चरण जल से धुलाएं और पोंछे.
  • फिर उनके चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित करें .
  • अगर आपके गुरु नहीं हैं तो क्या करें?
  • श्रीकृष्ण या शिव जी का ध्यान कमल के पुष्प पर बैठे हुए करें.
  • मानसिक रूप से उनको पुष्प,मिष्ठान्न, तथा दक्षिणा अर्पित करें.
  • स्वयं को शिष्य के रूप में स्वीकार करने की प्रार्थना करें.
  • हर गुरु के पीछे गुरु सत्ता के रूप में शिव जी ही हैं.
  • अतः अगर गुरु न हों तो शिव जी को ही गुरु मानकर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाना चाहिए.
  • श्रीकृष्ण को भी गुरु मान सकते हैं.

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आज गुरु पूर्णिमा के दिन हुआ था महर्षि वेदव्यास का जन्म , जानें उनसे जुड़ी ये खास बातें….

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”आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाए जाने के कई ऐतिहासिक पौराणिक कारण हैं। स्कन्द पुराण के अनुसार हजारों वर्ष पहले इसी तिथि पर आदि गुरु शिव ने सप्तऋषियों को ब्रह्म के बारे में ज्ञानोपदेश देना आरंभ किया था तबसे आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाने लगा। इसी तिथि को गौतम बुद्ध तथा जैन तीर्थंकर महावीर ने अपने प्रथम शिष्य बनाए और गुरु के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की। यह दिन बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी पवित्र है।

  • मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के दिन ही ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और 18 पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इस पर्व को गुरु व व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। हमें अपने गुरुओं को व्यास जी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित राजनाथ झा के मुताबिक सदियों से चली आ रही गुरु शिष्य की परंपरा का निवर्हन गुरु पूर्णिमा पर देखने को मिलता है। शिष्य देश-विदेश में कहीं भी हो इस मौके पर गुरु पूजन के लिए अवश्य पहुंचते हैं। राजधानी पटना के गुरु बलराम के शिष्य देशभर में हैं। पर गुरु पूर्णिमा पर उनके शिष्य गुरु पूजन को पटना स्थित मातृउदबोधन आश्रम जरूर पहुंचते हैं। हालांकि गुरु बलराम ब्रह्मलीन हो चुके हैं।  चार भागों में वेदों को विभक्त किया  महर्षि वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे।
  • हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास तीनों कालों के ज्ञाता थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर यह जान लिया था कि कलियुग में धर्म के प्रति लोगों की रुचि कम हो जाएगी। मनुष्य ईश्वर में विश्वास न रखने वाला, कर्तव्य से विमुख और कम आयु वाला हो जाएगा। एक बड़े और सम्पूर्ण वेद का अध्ययन करना उसके बस की बात नहीं होगी। इसलिये महर्षि व्यास ने वेद को चार भागों में बांट दिया। व्यास ने वेदों को अलग-अलग खण्डों में बांटने के बाद उनका नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद रखा। वेदों का इस प्रकार विभाजन करने के कारण ही वह वेद व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद का ज्ञान अपने प्रिय शिष्यों वैशम्पायन, सुमन्तुमुनि, पैल और जैमिन को दिया।

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