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ज्योतिष - वास्तु

दिनांक 18/06/2019 का पंचांग एवं राशिफल

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दिनांक 18.06.2019

शुभ संवत 2076 शक 1941 सूर्य उत्तरायणयन का आषाढ़ कृष्ण पक्ष…. प्रतिपदा तिथि… दोपहर 01 बजकर 36 मिनट तक .. मंगलवार … मूल नक्षत्र..  दिन 11 बजकर 45 मिनट तक … आज चन्द्रमा … धनु राशि में… आज का राहुकाल दोपहर को 03 बजकर 25 मिनट से 05 बजकर 06 मिनट तक होगा …

क्या आपका बच्चा भी स्पीड बाईक की जिद कर रहा है, देने से पहले जाने उसके ग्रह का हाल

समय बदल रहा है लाइफ स्टाइल बदल रही है और समय के हिसाब से आज कल के बच्चों की डिमांड भी बदल रही है। पैरेंट्स पहले अपने बच्चों को अच्छे माक्र्स लाने पर रिस्ट वाच ए साइकिल या कोई छोटे मिठे गिफ्ट दिलाने का प्रॉमिस करते थे लेकिन अब इलेक्ट्रानिक आइटम्स मोबाइल, टैब, लैपटाप। लेकिन चलिए ये इलेक्ट्रॉनिक सामान दिलाना वैसे भी उचित नहीं था लेकिन जब बात हो बच्चों की जिंदगी की तो मां बाप उनकी विश पूरी करने के लिए उन्हें मौत के मुंह में क्यों ढकेल देते हैं। आज बच्चे ने 10वीं में अच्छे माक्र्स लाये नहीं कि उसे उसकी मनपसंद बाइक दिला दी जाती है ये जानते हुए भी कि 18 साल से कम उम्र के लोग वाहन नहीं चला सकते। उसके बावजूद लोग ऐसे कदम उठाते हैं। पैरेंट्स के प्यार का उनके लाडले नाजायज फायदा उठा रहे हैं। कम उम्र में बच्चों के हाथ में बाइक आ गयी। नतीजा आये दिन एक्सीडेंट के रूप में सामने आ रहा है। कभी वो उस बाइक से स्टंट करके खुद को खतरे में डाल रहे तो कभी राह चलते लोग उसका शिकार हो जाते हैं। शहर में ट्रैफिक लोड काफी बढ़ता जा रहा है। जिस उम्र में बच्चों के हाथ में साइकिल होनी चाहिए उस उम्र में उनके हाथ में बाइक है। जोश और स्पीड दोनों पर काबू करना इनके लिए मुश्किल होता है। ना तो ट्रैफिक नियमों की जानकारी और ना ही गाड़ी और उसकी स्पीड़ पर कंट्रोल। यह उन बच्चों के साथ.साथ रोड पर निकलने वाले दूसरे लोगो के लिए भी मुसीबत पैदा करते हैं।

बाइकर्स ने हर स्टंट को नाम दे रखे हैं। पहिया हवा में उठाकर बाइक दौड़ाने को व्हीली कहते हैं। अचानक ब्रेक मारकर बाइक का पिछला पहिया हवा में उठाने को स्टंट स्टॉपी कहते हैं। बाइक को सीधा कर उसकी टेल को जमीन के पास लाने को टेल ग्राफ कहा जाता है। दोनों पैर एक तरफ करके बाइक चलाने के स्टंट को नैक-नैक कहा जाता है। व्हीली में ही सिट डाउन और स्टैंड अप स्टंट होते हैं। और ये सब वो अपने आप को स्मार्ट और निडर दिखाने के लिए करते हैं किंतु नतीजा किसी बच्चे की दर्दनाम मौत तो कोई गंभीर रूप से घायल।

अभिभावक ध्यान दें

-18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों को बाइक न दिलाएं

– रेसिंग बाइक की जिद किसी भी कीमत पर पूरी न करें

– हेलमेट पहनने के साथ-साथ ट्रैफिक नियमों का पालन सिखाएं

– तेज रफ्तार वाहन चलाने के खतरे समझाएं

– टीवी पर स्टंट वाले शो के दुष्परिणाम बताएं।

इसके अलावा अगर आपका बच्चा भी स्पीड बाईक की जिद कर रहा है तो उम्र से पहले उसकी इस नाजायज जिद हरगिज पूरी ना करें। साथ ही उसकी कुंडली में देखें कि अगर उसके मंगल की स्थिति क्या है। अगर उसका मंगल लग्न, तीसरे, एकादश या द्ववादश स्थान पर हो अथवा इन स्थानों का स्वामी होकर छठवे आठवे या बारहवे हो अथवा राहु से पापाक्रांत हो तो ऐसे बच्चो को स्पीड बाईक हरगिज ना दिलायें। क्योंकि आपके बच्चे की स्पीड का शौक आपके लिए दुखदायी हो सकता हैं अगर वो आपकी बात मानने को तैयार ना हो और अपनी जिद को गलत तरीके से मनवाने पर तुला हुआ हो तो उसकी मंगल की शांति करायें, उसे किसी अच्छे एस्ट्रो काॅसलर के पास लेकर उसकी कांउसलिंग जरूर करायें साथ ही उसे नियमित हनुमान चालीसा पाठ करने की आदत डाले और मूंगा का लाॅकेट धारण करायें। गाय को बच्चे के हाथ से रोटी और गुड खिलाने की आदत जरूर डाले।

आज के राशियों का हाल तथा ग्रहों की चाल-

मेष राशि –

आज के दिन आप कार्यक्षेत्र की योजनाओं के अलावा आर्थिक लेन-देन में लगे रहेंगे…

व्यावहारिक जीवन में आपकी काम करने की तरकीब सभी को पसंद आती है… आपका दिन आज खुशनुमा रहेगा….

कार्य की अधिकता से थकान संभव…

उपाय – काला वस्त्र या तिल का तेल दान करें…शनि के बीज मंत्र का जाप करें…

वृषभ –

आज के दिन कार्यक्षेत्र के बहुत से महत्वपूर्ण कार्य अधूरा रह सकता है….

तनाव संभव…. सहयोगियों से विवाद की स्थिति निर्मित होगी…

उपाय -मूली का दान करें… राहु मंत्र का जाप कर सूक्ष्म जीवों को आहार दें….

मिथुन –

आज के दिन आप किसी के भरोसे में धोखा खा सकते हैं…

अपने सहयोगियों से सावधान रहें….

यात्रा में रहने से खानपान की असवाधानी हानि दे सकती है…

उपाय -गाय को रोटी खिलायें…मंगल के यत्र की पूजा के साथ मंगल के मंत्र का जाप करें…  

 

कर्क –

अपने सीनियर अधिकारियों के बीच आपके कार्य प्रणाली से प्रशंशा प्राप्त होगी…

पारिवारिक सदस्य के स्वास्थ्य से उलझन…

दिनभर व्यस्तता रहेगी…

उपाय करें….

उपाय -सूर्य को जल दें….गुड या खीर खिलायें…

सिंह –

व्यावसायिक मामलों को पूरी मेहनत के साथ हैंडल करेंगे…

विज्ञापन और प्रचार के जरिए भी आपको लाभ मिल सकता है…

अपने संपर्क सूत्र मजबूत करें…

उपाय -जल में कच्चा दूध डालकर अभिषेक करें… दुर्गा चालीसा का पाठ करें…

कन्या –

आज के दिन आप किसी मनोरंजन वाली जगह की यात्रा कर सकते हैं…

किसी के साथ कोई डील या व्यापारिक संबंध बनाने हों, तो अपने अहम को आड़े मत आने दें…

किसी पुराने विवाद का भी हल निकल सकता है…

उपाय -लहसुनिया को धारण करें… केतु की शांति हेतु मंत्र जाप करें…

तुला –

आपका सामाजिक दायरा बढने के योग…

यदि आप समय पर अपने कार्यस्थल पर लापरवाही करेंगे तो सहकर्मी की चालाकी से कार्य बिगड सकता है….

थोड़ी सावधानी की आवष्यकता होगी…वाहन का उपयोग संभल कर करें…

उपाय – तांबे की अंगूठी दान करें…मंगल के मंत्रों का जाप करें…

वृश्चिक –

यात्रा, प्रवास में लाभ मिलने की संभावना बनती है..

राजकार्य अथवा शासन सत्ता से मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी..

आलस्य न करें..

उपाय-गाय को हरा चारा खिलायें…गणेष मंत्र का जाप करें….

 

धनु –

आज मनोरंजन व खेल-कूद से जुड़ी गतिविधियां आपके जीवन का हिस्सा बन सकते हैं…

व्यस्त होकर आप एक अच्छे सामाजिक कार्यकर्ता कहलाएंगे…

पूजापाठ में सम्मिलित होंगे…

उपाय -लाल वस्तु का दान एवं गायत्री मंत्र का जाप करें…

मकर –

आज आप शक्तिशाली और अनुकूल ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे…

पारिवारिक स्थितियों और व्यक्तिगत संबंधों में सुधार होगा…

दिन भर लोगों से घिरे रहेंगे…

उपाय – चंद्रमा को अध्र्य देकर आहार ग्रहण करें… सुहाग सामग्री का दान करें….

कुंभ

अपने करियर और व्यवसाय से जुड़े मामलों पर सावधानी बरतें और दूरदर्शिता से काम लें…

इधर-उधर की झूठी अफवाहों पर ध्यान ना दें…

अपने काम को सही समय पर पूरा करने का प्रयास करें…

उपाय – छायापात्र का दान करें…दत्तात्रेय मंत्र का जाप करें…

मीन

कोई कीमती वस्तु खो सकती है…

धन सुख में कमी कर सकता है…

स्वास्थ्य में वातरोग तथा बुखार से कार्य में रूकावट संभव…

उपाय – भोजन की थाली से भोजन निकालकर कुत्ते को दें….दूध या चावल का दान करें..

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भगवान शिव के इन 5 मंदिरों में दर्शन के साथ, सावन महीने की करें शुरुआत

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”शि’ का अर्थ है ‘मंगल’ और ‘व’ कहते हैं दाता को, इसलिए जो मंगलदाता है, वही शिव है। शिव ब्रह्म रूप में शांत हैं, तो रुद्र रूप में रौद्र हैं। शिव हमारी प्रार्थनाएं सहजता से स्वीकार करते हैं पर शिव का मूल उद्देश्य हमें अपनी तरह सहज, सरस और सरल बनाना है। श्रावण में शिव अभिषेक कामनाओं की पूर्ति हेतु संपन्न किया जाता है, लेकिन वह शुष्क मन-प्राण को भी सरस कर देता है। मन को चंद्रमा नियंत्रित करता है, जो सोमवार के दिन का स्वामी है। इसलिए शिवलिंग अभिषेक सोमवार को अवश्य किया जाता है, क्योंकि मन को उत्फुल्लित करने का यह एक कारगर उपाय है। तो 17 जुलाई से सावन महीने की हो रही है शुरुआत। भारत में बने इन मंदिरों का दर्शन इस पावन महीने में होगा खास, जानेंगे इसके बारे में….

तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड

समुद्र तल से 3680मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर है। जो बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर के बीच में स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही अद्भुत है। हिमालय पर्वत की बर्फ से ढकी ऊंची चोटियां इसकी खूबसूरती में लगाती हैं चार चांद। तीर्थयात्रियों के साथ ही सैलानियों को भी ये जगह बहुत लुभाती है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर भगवान शिव के प्रिय ‘नंदी’ की मूर्ति विराजमान है। द्वार के दाईं ओर भगवान गणेश की मूर्ति है। मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी हुई है और आसपास कई छोटे मंदिर हैं।

जूनागढ़, भावनाथ तालेटी

जूनागढ़ सिर्फ गिर नेशनल पार्क के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि ये साधुओं का भी घर है जो सावन महीने और महाशिवरात्रि के मौके पर दर्शन के लिए भारी तादाद में आते हैं। इनके अलावा दुनिया के अलग-अलग कोनों से भी लोग मंदिर में जल चढ़ाने और पूजा-अर्चना करने आते हैं। शिवरात्रि में तो जूनागढ़ आकर यहां के कल्चर और साधुत्व से भी रुबरू होने का मौका मिलता है।

पशुपतिनाथ मंदिर, मंदसौर

मध्यप्रदेश के मंदसौर में बना ये मंदिर भारत का इकलौता पशुपतिनाथ का मंदिर है। जो नेपाल के पशुपतिनाथ से काफी मिलता-जुलता हुआ है और इसलिए ही इसका नाम पशुपतिनाथ पड़ा। चिकने चमकदार पत्थर से बनी हुई पशुपतिनाथ की प्रतिमा सवा सात फीट ऊंची है। शिवना नदी के तट पर बसे इस मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है। कहते हैं सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूरी पूरी होती है।

मुरुदेश्वर मंदिर, कर्नाटक 

भगवान शिव का एक नाम मुरुदेश्वर भी है। कंडुका पहाड़ी पर बना ये मंदिर तीनों तरफ से अरब सागर से घिरा हुआ है। मंजिल में 20 मंजिला गोपुरा बना हुआ है। 249 फुट लंबा दुनिया का सबसे बड़ा गोपुरा है। समुद्र तट के पास स्थित भगवान शिव का यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है और मंदिर परिसर में बने भगवान शिव की विशाल मूर्ति तकरीबन 123 फीट है।

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

भुवनेश्र्वर के सबसे बड़े मंदिरों से में एक है। जो कलिंग की वास्तुकला और मध्यकालीन ऐतिहासिक परंपरा का बेजोड़ नमूना है। मंदिर के अंदर भगवान विष्णु की भी प्रतिमा है। शिव से जुड़े हर एक त्यौहार में आप यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देख सकते हैं। लिंगराज मंदिर से होकर एक नदी गुजरती है जो कई तरह की शारीरिक बीमारियों को दूर करता है। सावन महीने में सुबह से ही भक्तगण महानदी से पानी भरकर पैदल चलकर मंदिर तक आते हैं।

 

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जानें गुरु पूर्णिमा का महत्व और उपासना का तरीका….

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आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, अतः इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है अतः इस दिन वायु की परीक्षा करके आने वाली फसलों का अनुमान भी किया जाता है. इस दिन शिष्य अपने गुरु की विशेष पूजा करता है और उसे यथाशक्ति दक्षिणा,पुष्प,वस्त्र आदि भेंट करता है.शिष्य इस दिन अपनी सारे अवगुणों को गुरु को अर्पित कर देता है, तथा अपना सारा भार गुरु को दे देता है. इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा.

कौन हो सकता है आपका गुरु :-मान्यतः हम लोग शिक्षा प्रदान करने वाले को ही गुरु समझते हैं परन्तु वास्तव में ज्ञान देने वाला शिक्षक बहुत आंशिक अर्थों में गुरु होता है. जन्म जन्मान्तर के संस्कारों से मुक्त कराके जो व्यक्ति या सत्ता ईश्वर तक पहुंचा सकती हो,ऐसी सत्ता ही गुरु हो सकती है. हिंदू धर्म में गुरु होने की तमाम शर्तें बताई गई हैं, जिसमें से प्रमुख 13 शर्तें निम्न प्रकार से हैं.

शांत,दान्त,कुलीन,विनीत,शुद्धवेषवाह,शुद्धाचारी,सुप्रतिष्ठित,शुचिर्दक्ष,सुबुद्धि,आश्रमी,ध्याननिष्ठ,तंत्र-मंत्र विशारद,निग्रह-अनुग्रह गुरु की प्राप्ति हो जाने के बाद प्रयास करना चाहिए कि उसके दिशा निर्देशों का यथा शक्ति पालन किया जाए.

  • कैसे करें गुरु की उपासना
  • इसके बाद उन्हें श्वेत या पीले वस्त्र दें.
  • यथाशक्ति फल,मिष्ठान्न दक्षिणा अर्पित करें.
  • गुरु से अपना दायित्व स्वीकार करने की प्रार्थना करें.
  • गुरु को उच्च आसन पर बैठाएं.
  • उनके चरण जल से धुलाएं और पोंछे.
  • फिर उनके चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित करें .
  • अगर आपके गुरु नहीं हैं तो क्या करें?
  • श्रीकृष्ण या शिव जी का ध्यान कमल के पुष्प पर बैठे हुए करें.
  • मानसिक रूप से उनको पुष्प,मिष्ठान्न, तथा दक्षिणा अर्पित करें.
  • स्वयं को शिष्य के रूप में स्वीकार करने की प्रार्थना करें.
  • हर गुरु के पीछे गुरु सत्ता के रूप में शिव जी ही हैं.
  • अतः अगर गुरु न हों तो शिव जी को ही गुरु मानकर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाना चाहिए.
  • श्रीकृष्ण को भी गुरु मान सकते हैं.

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आज गुरु पूर्णिमा के दिन हुआ था महर्षि वेदव्यास का जन्म , जानें उनसे जुड़ी ये खास बातें….

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”आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाए जाने के कई ऐतिहासिक पौराणिक कारण हैं। स्कन्द पुराण के अनुसार हजारों वर्ष पहले इसी तिथि पर आदि गुरु शिव ने सप्तऋषियों को ब्रह्म के बारे में ज्ञानोपदेश देना आरंभ किया था तबसे आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाने लगा। इसी तिथि को गौतम बुद्ध तथा जैन तीर्थंकर महावीर ने अपने प्रथम शिष्य बनाए और गुरु के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की। यह दिन बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी पवित्र है।

  • मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के दिन ही ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और 18 पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इस पर्व को गुरु व व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। हमें अपने गुरुओं को व्यास जी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित राजनाथ झा के मुताबिक सदियों से चली आ रही गुरु शिष्य की परंपरा का निवर्हन गुरु पूर्णिमा पर देखने को मिलता है। शिष्य देश-विदेश में कहीं भी हो इस मौके पर गुरु पूजन के लिए अवश्य पहुंचते हैं। राजधानी पटना के गुरु बलराम के शिष्य देशभर में हैं। पर गुरु पूर्णिमा पर उनके शिष्य गुरु पूजन को पटना स्थित मातृउदबोधन आश्रम जरूर पहुंचते हैं। हालांकि गुरु बलराम ब्रह्मलीन हो चुके हैं।  चार भागों में वेदों को विभक्त किया  महर्षि वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे।
  • हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास तीनों कालों के ज्ञाता थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर यह जान लिया था कि कलियुग में धर्म के प्रति लोगों की रुचि कम हो जाएगी। मनुष्य ईश्वर में विश्वास न रखने वाला, कर्तव्य से विमुख और कम आयु वाला हो जाएगा। एक बड़े और सम्पूर्ण वेद का अध्ययन करना उसके बस की बात नहीं होगी। इसलिये महर्षि व्यास ने वेद को चार भागों में बांट दिया। व्यास ने वेदों को अलग-अलग खण्डों में बांटने के बाद उनका नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद रखा। वेदों का इस प्रकार विभाजन करने के कारण ही वह वेद व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद का ज्ञान अपने प्रिय शिष्यों वैशम्पायन, सुमन्तुमुनि, पैल और जैमिन को दिया।

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