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ज्योतिष

19/10/2020 का पंचांग एवं राशिफल (माता चंद्रघंटा की पूजा से पायें संतान के जीवन में वीरता के साथ सौम्यता का मिश्रण)

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19/10/2020 का पंचांग एवं राशिफल (माता चंद्रघंटा की पूजा से पायें संतान के जीवन में वीरता के साथ सौम्यता का मिश्रण)

  • रायपुर (etoi news)  18.10.2020
  • दिनांक 19.10.2020 का पंचाग
  • शुभ संवत 2077 शक 1942 सूर्य दक्षिणायन का… द्वितीय (शुद्ध) आश्विन मास शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि … दोपहर को 02 बजकर 08 मिनट तक … दिन … सोमवार … विशाखा नक्षत्र …  दिन को 06 बजकर 08 मिनट तक … आज चंद्रमा … वृश्चिक राशि में … आज का राहुकाल दिन 07 बजकर 28 मिनट से 08 बजकर 55 मिनट तक होगा …

माता चंद्रघंटा की पूजा से पायें संतान के जीवन में वीरता के साथ सौम्यता का मिश्रण –

माता चन्द्र घंटा स्वरुप में माँ के मस्तक पर घंटे के आकार का चंद्रमा सुशोभित है इसीलिए इनका नाम चन्द्र घंटा पड़ा. माँ चंद्रघंटा की आराधना करने वालों का अहंकार नष्ट होता है एवं उनको असीम शांति और वैभवता की प्राप्ति होती है. इस देवी की आराधना से वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। माता के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा से संतान के शिक्षा के साथ ही आत्मविश्वास और जीवन के अन्य क्षेत्रों में सफलता के साथ डटे रहने की कुशलता और वीरता प्राप्त होती है, जिससे उसे आने वाले जीवन की कठिनाईयों को सामना करने में आसानी रहे और अपने युवावस्था में विनम्र तथा अनुशासित बना रहे तथा समाज हित में कार्य कर सके। इसके लिए माता चंद्र घंटा का विधि अनुकूल पूजा करनी चाहिए।

पूजा विधि –

नवरात्रि के तीसरे दिन माता की पूजा के लिए सबसे पहले कलश की पूजा करके सभी देवी-देवताओं की पूजा करें. माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद गंगा जल से शुद्धिकरण करें. चौकी पर घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें. इसके बाद पूजन का संकल्प लें. इसके बाद माता को वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, फल, पान, अर्पित करें. श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और इसके बाद प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें.

मां चंद्रघंटा का उपासना मंत्र-

या देवी सर्वभूतेषु चन्द्रघंटा रूपेण संस्थिता.

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

 

राशि अनुसार माता चंद्रघंटा के उपाय से पायें संतान के जीवन में वीरता के साथ सौम्यता का मिश्रण –

मेष राशि –

            मेष राशि के जातक आज के दिन घर के बड़े-बुजुर्ग और माता की सेवा करें।। उसके उपरांत माता को चीनी अर्पित करें तथा वाणी में भी मिठास रखें।

वृषभ राशि –

वृषभ राशि के जातक अपने सभी कार्य बिना किसी की सहायता के स्वयं करें। किसी के सामने कठोर वाणी ना बोले और देवी के मंदिर में जाकर विधि-विधान के साथ पूजा करें और नारियल से बनी मिठाई का भोग लगायें। इससे माता प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना पूर्ण करेंगीं।

मिथुन राशि –

मिथुन राशि के जातकों को माता लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजा आराधना करे और लड़कियों को मीटा खिलाकर अपने सामथ्र्य अनुसार कुछ उपहार दें। इसके साथ ही माता के चरणों में पीले पुष्प अर्पित करें।

कर्क राशि –

इस राशि के जातक माता दुर्गा को दुर्गा कवच का पाठ सुनायें। किसी धार्मिक स्थान पर लोगों को पानी पिलाएं और सेवा करें। माता के चरणों में चांदी और चावल चढ़ाकर अपने पास रखें। माता-पिता की सेवा करें।

सिंह राशि –

इस राशि वाले जातक माता के मंदिर में मंूग से बनी मिठाई का प्रसाद चढ़ायें सदाचार के नियमों का पालन करें। धार्मिक कार्यों में मन लगाएं।

कन्या राशि –

इन जातकों को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। दुर्गा सप्तशती का पाठ कर छोटी कन्याओं से आशीर्वाद लें। इस राशि के लोगों को चांदी का छल्ला माता को अर्पित करना चाहिए।

तुला राशि –

इस राशि के जातक माता के मंदिर में दर्शन उपरांत माथे पर टीका लगवाएं। माता गायत्री की आराधना करने से माता जल्दी प्रसन्न होंगीं।। गायों को हरी घास खिलाएं।

वृश्चिक राशि –

यह जातक माता को प्रसन्न करने के लिए मीठी रोटी बनाकर गरीबों को खिलाएं। माता की मूर्ति को सिंदूर और चोला चढ़ाएं।

धनु राशि –

इस राशि के जातकों को सुबह माता के मंदिर में जाकर सफेद कमल के फूल और सफेद मिठाई अर्पित करनी चाहिए। शाम के समय पंचमुखी दीपक प्रज्वलित करके देवी सरस्वती के मंत्रो का जाप करना चाहिए।

मकर राशि –

माता के मंदिर में अखरोट चढ़ाएं और प्रसाद के रूप में कुछ घर लेकर आएं। घर के किसी भी हिस्से में अधेरा न रखें। किसी भी कन्या का अपमान ना करें और माता गायत्री की पूजा कर बड़ो का आर्शीवाद प्राप्त करें।

कुंभ राशि –

इस राशि के जातक देवी चंद्रघंटा का पूजन करें, चांदी का टुकड़ा माता के चरणों में अर्पित करें तथा चावल आटे तथा चीनी से लड्डू बनाकर कुंवारी कन्याओं को खिलायें।

मीन राशि –

इन जातकों को मां चंद्रघंटा की पूजा करने तथा उनके मंत्र का जाप कर माता के चरणों में तिल तथा गुड़ से बनी मिठाईयां अर्पित करें तथा कुछ मिठाई छोटे बच्चों में वितरित करें।

 

 

 

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ज्योतिष

दिनांक 24.10.2020 का पंचांग एवं राशिफल

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शुभ संवत 2077 शक 1942 सूर्य दक्षिणायन का… द्वितीय (शुद्ध) आश्विन मास शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि … दिन को 07 बजकर 00 मिनट तक … दिन … शनिवार … श्रवण़ नक्षत्र …  रात्रि को 02 बजकर 38 मिनट तक … आज चंद्रमा … मकर राशि में … आज का राहुकाल दिन 08 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 22 मिनट तक होगा …

अक्षय पुण्य प्राप्ति हेतु करें मां महागौरी की पूजा

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

नवरात्रों के आठवें दिन महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है. माँ महागौरी की पूजा से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्य प्राप्त होता है.

महागौरी आदी शक्ति हैं इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाश-मान होता है, इनकी शक्ति अमोघ फल प्रदान करने वाली हैं, देवी गौरी ने देवों की प्रार्थना व भक्तों के उद्धार हेतु शुम्भ निशुम्भ का अंत किया व सृष्टि को दैत्यों के प्रकोप से मुक्त कराया. यही शिवा और शाम्भवी के नाम से भी पूजित होती हैं. इनका पूजन सौभाग्य में वृद्धि करने वाला होता है.

महागौरी का पौराणिक महत्व

भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए देवी ने बचपन से ही कठोर तपस्या की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया. देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वीकार करते हैं और इनके शरीर को गंगा-जल से धोते हैं तब देवी का रंग विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान, अत्यंत ओजपूर्ण होता जाता है, उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत और कुन्द के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती है, उनके वस्त्र और आभूषण से प्रसन्न होकर देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं. गौर वर्ण की होने के कारण इन्हें गौरी नाम प्राप्त हुआ. महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं.

जो देवी गौरी की पूजा करते हैं उनका जीवन सुखमय रहता है देवी उनके पापों को जला देती हैं और शुद्ध अंतःकरण देती हैं. मां अपने भक्तों को अक्षय आनंद और तेज प्रदान करती हैं.

महागौरी पूजा विधि

नवरात्रि में इस दिन का विशेष महत्व होता है. कुछ लोग इस दिन व्रत का समापन करते हैं तो कुछ लोग नवमी के दिन. जो लोग अष्टमी पूजन करते हैं उनके लिए गौरी पूजा बहुत महत्वपूर्ण होती है. इस दिन देवी गौरी की पूजा का विधान पूर्ण रुप से भक्ति भाव से भरा होता है. अष्टमी के दिन भी देवी की पंचोपचार सहित पूजा करें. देवी का ध्यान करने के लिए ॐ देवी महागौर्यै नमः”. मंत्र का उच्चारण करना चाहिए.

महागौरी की मूर्ति को लाल रंग के कपडे से लिपेट कर उन्हें चैकी पर रखा जाता है. सबसे पहले श्री गणेश जी का पूजन किया जाता है. पूजन में श्री गणेश पर जल, रोली, मौली, चन्दन, सिन्दूर, सुपारी, लोंग, पान,चावल, फूल, इलायची, बेलपत्र, फल, मेवा और दक्षिणा चढाते हैं. इसके पश्चात कलश का पूजन भी किया जाता है.

माता को हलवा और चने के प्रसाद का भोग लगाना चाहिए। कन्या पूजन में सामर्थ्य के अनुसार इन कन्याओं को भोजन के लिए आमंत्रित करना चाहिए। कन्या पूजन में सर्वप्रथम कन्याओं के पैर धुलाकर उन्हें आसन पर एक पंक्ति में बिठाकर, मंत्र द्वारा कन्याओं का पंचोपचार पूजन करना चाहिए। रोली से तिलक लगाने के बाद उनकी कलाईयों पर कलावा बांधना चाहिए। इसके बाद उन्हें हलवा, पूरी और चने का प्रसाद परोसते हैं। कन्याओं के भोजन ग्रहण करने के बाद उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। अपनी सामर्थ्यनुसार, कोई भी भेंट तथा दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए। इस प्रकार श्रद्धा पूर्वक अष्टमी पूजन करने से भक्तों समस्त इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

– नवरात्रि के आठवें दिन मां से शीघ्र विवाह का वरदान मिल सकता है. साथ ही वैवाहिक जीवन भी सुखमय हो सकता है.

– माना जाता है कि माता सीता ने श्री राम की प्राप्ति के लिए इन्हीं की पूजा की थी.

– विवाह संबंधी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक होती है.

– ज्योतिष में इनका संबंध शुक्र नामक ग्रह से माना जाता है.

परिणाम ज्यादा शुभ के लिए क्या है मां गौरी की पूजा विधि?

– पीले वस्त्र धारण करके पूजा आरंभ करें.

– मां के समक्ष दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें.

– पूजा में मां को श्वेत या पीले फूल अर्पित करें.

– उसके बाद इनके मन्त्रों का जाप करें.

– अगर पूजा मध्य रात्रि में की जाय तो इसके परिणाम ज्यादा शुभ होंगे.

विवाह की बाधा दूर करने के लिए ऐसे करें देवी महागौरी की पूजा अर्चना

– लकड़ी के पटरे पर स्वच्छ पीला वस्त्र बिछाकर देवी महागौरी की प्रतिमा को स्थापित करें.

– स्वयं भी पीले वस्त्र धारण करके पूरे पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें.

– देवी महागौरी के सामने गाय के घी का दिया जलाएं और उनका ध्यान करें.

– देवी मां को सफेद या पीले फूल दोनों हाथों से अर्पण करें तथा मंत्र का जाप करें.

– प्रसाद के रूप में देवी महागौरी को नारियल अर्पण करें.

– ऐसा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी और कन्याओं को सुयोग्य वर मिलता है.

देवी महागौरी पूजा से कैसे शुक्र को करें मजबूत ?

– मां की उपासना सफेद वस्त्र धारण करके करें.

– मां को सफेद फूल, और सफेद मिठाई अर्पित करें.

– फिर शुक्र के मूल मंत्र ॐ शुं शुक्राय नमः का जाप करें.

– शुक्र की समस्याओं के समाप्ति की प्रार्थना करें.

– नवरात्रि के आठवें दिन मां को सफेद फूल अर्पित करें.

– इससे मां की विशेष कृपा प्राप्त होगी.

नवदुर्गा का विशेष प्रसाद

– आज मां को नारियल का भोग लगाएं.

– इसे सर पर से फिरा कर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें.

-आपकी कोई एक खास मनोकामना पूर्ण होगी.

संपूर्ण मनोरथ पूर्ति हेतु किस राशि वाले कैसे करें मां महागौरी की पूजा और क्या करें उपाय

मेष राशि

मेष राशि वाले जातक मां महागौरी की पूजा करने के लिए एकादश स्थान के स्वामी शनि की शांति करें इसके लिए मां महागौरी को लाल फूल और एकाक्षी नारियल तथा नारियल से बने मिष्ठान अर्पण करें। मनोकामना पूरी करने के लिए माता महागौरी की पूजा करें साथ ही मंत्र ऊँ गौरये नमः का पाठ करके मां की पूजा करें।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातक मां दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा करें और उनको पंचमेवा, सुपारी, सफेद चंदन और फूल चढ़ाएं। साथ ही ऊँ सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का पाठ करें। माता को मिश्री का भोग लगा सकते हैं।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातक मां महागौरी की पूजा करें और उनको फूल, केला, धूप, कपूर से पूजा करें। साथ ही ऊँ शिव शक्त्यै नम: मंत्र का 108 बार जप करें और कवच का हर रोज पाठ करें।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातक को मां महागौरी स्वरूप की पूजा में बताशा, चावल और दही का अर्पण करें। साथ ही मंत्र श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: का पाठ करें। दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। ऐसे करने से आरोग्य की प्राप्ति होगी।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातक को माता महागौरी देवी स्वरूप की उपासना में तांबे के पात्र में रोली, चंदन, केसर और कपूर से आरती उतारें। जीवन में सफलता पाने के लिए ऊँ साम्ब शिवाय नमः का पाठ जरूर करें।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातक को मां महागौरी की पूजा करनी चाहिए। उनको फल, पान पत्ता, गंगाजल अर्पित करें। नवरात्र में आज के दिन एक माला श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: मंत्र का जप करें और मां को खीर का भोग लगाएं।

तुला राशि

तुला राशि के जातक मां दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा करें और उनको दूध, चावल और लाल चुनरी चढ़ाएं। इसके बाद कपूर और देसी घी से आरती करें। साथ ही ऊँ गौरये नमः का पाठ करें। गुलाबी रत्न से बनी माला का प्रयोग व नैवेद्य में सफेद बर्फी या मिश्री का भोग लगा सकते हैं।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातक को महागौरी की उपासना में लाल फूल, चावल, गुड़ और चंदन के साथ पूजा करें। कपूर से माता की आरती उतारें और मंत्र श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: जाप करें तथा कलाकंद का भोग लगायें एवं शहद अर्पित करें।

धनु राशि

धनु राशि के जातक को माता महागौरी स्वरूप की पूजा में हल्दी, केसर, पीले फूल और तिल का तेल अर्पित करें। ब्रह्म मुहूर्त में ऊँ गौरये नमः पाठ करें। माता को बेसन की मिठाई व केले चढ़ाएं।

मकर राशि

मकर राशि के जातक मां महागौरी की पूजा में सरसों तेल का दिया, फूल, कुमकुम अर्पित करें। नर्वाण मंत्र का जप करें। भोग में मां को उड़द से बनी मिठाई या हलवा चढ़ाएं।

कुंभ राशि 

कुंभ राशि के जातक को मां महागौरी की पूजा में फूल, कुमकुम और तेल का दीपक और फल अर्पित करें। देवी कवच का पाठ करें। भोग में मां को आटे का हलवा और सूखे मेवे चढ़ाएं।

मीन राशि 

मीन राशि के जातक को मां महागौरी की पूजा में हल्दी, चावल, पीले फूल और केले के साथ पूजन करें। नवरात्र में आज के दिन श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: मंत्र का एक माला जप करें और मां को भोग में रसीले फल तथा खीर का भोग लगाकर बड़ो को प्रसाद वितरित करें।

 

 

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दिनांक 23.10.2020 का पंचांग एवं राशिफल

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शुभ संवत 2077 शक 1942 सूर्य दक्षिणायन का…द्वितीय (शुद्ध) आश्विन मास शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि … दिन को 06 बजकर 58 मिनट तक … दिन … शुक्रवार … उत्तरा आषाढ़ नक्षत्र …  रात्रि को 01 बजकर 28 मिनट तक … आज चंद्रमा … मकर राशि में … आज का राहुकाल दिन 10 बजकर 22 मिनट से 11 बजकर 48 मिनट तक होगा …

 

काल का नाश करने वाली  मां कालरात्रि दूर करती हैं भय, निराशा व चिंता

मां कालरात्रि नाम से ही अभिव्यक्त होता है कि दुर्गा की यह सातवीं शक्ति घने अंधकार की तरह एकदम काली हैं। इनका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि। काल से भी रक्षा करने वाली यह शक्ति है। माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम शुभंकारी भी है। अतः इनसे भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुलने लगते हैं और तमाम असुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती हैं। इसलिए दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत उनके स्मरण से ही भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। इनके उपासकों को अग्नि-भय, जल-भय, जंतु-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते। इनकी कृपा से वह सर्वथा भय-मुक्त हो जाता है।

मां को गुड़ का भोग प्रिय है

सप्तमी तिथि के दिन भगवती की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करके ब्राह्मण को दे देना चाहिए. ऐसा करने से शोकमुक्त हो सकते हैं।

मां कालरात्रि की पूजा करने से शनि ग्रह संबंधी दोष दूर हो जाते हैं। इतना ही नहीं मृत्यु तुल्य कष्टों से भी मुक्ति मिलती है। मां की आराधना करने से सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है। यह माना जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा से हड्डी संबंधी रोगों, श्वांस, फालिस आदि में लाभ होता है। इतना ही नहीं निराशा, चिंता व भय भी दूर होता है।

कथा

शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि के पूजन में बेला का फूल मां को अर्पित करें। कथा है कि जब देवी पार्वती ने शुंभ व निशुंभ नामक दैत्यों के नाश के लिए अपनी वाह्य त्वचा को हटाया, तब उन्हें कालरात्रि नाम मिला। देवी पार्वती का यह सबसे भयंकर रूप है, वह अपने भक्तों को अभय व वरद मुद्रा में आशीर्वाद देती हैं। अपनी शुभाशुभ शक्तियों के कारण देवी कालरात्रि को देवी शुंभकरी कहकर भी बुलाया जाता है।

पूजा विधि, भोग

माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा विधि

नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए, फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। सर्वप्रथम कलश और उसमें उपस्थित देवी देवता की पूजा करें, इसके पश्चात माता कालरात्रि जी की पूजा कि जाती है। पूजा की विधि शुरू करने पर हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर देवी के मंत्र का ध्यान किया जाता है। सप्तमी की पूजा अन्य दिनों की तरह ही होती परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है। इस दिन कहीं कहीं तांत्रिक विधि से पूजा होने पर मदिरा भी देवी को अर्पित कि जाती है। सप्तमी की रात्रि ‘सिद्धियों’ की रात भी कही जाती है। लाल चम्पा के फूलों से माँ प्रसन्न होती हैं। दूध , खीर या अन्य मीठे प्रसाद का भोग लगाना चाहिए। लाल चन्दन , केसर , कुमकुम आदि से माँ को तिलक लगाएँ। अक्षत चढ़ाएं और माँ के सामने सुगंधित धूप आदि भी लगाएँ। मंत्र पढ़ें

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 

सावधानी

मां काली की उपासना का सबसे उपयुक्त समय मध्य रात्रि का होता है.

इनकी उपासना में लाल और काली वस्तुओं का विशेष महत्व होता है.

शत्रु और विरोधियों को शांत करने के लिए मां काली की उपासना अमोघ है.

किसी गलत उद्देश्य से मां काली की उपासना कतई नहीं करनी चाहिए.

मंत्र जाप से ज्यादा प्रभावी होता है मां काली का ध्यान करना.

ज्यादा बुराई से दूर होते जाएंगे, मां काली के उतने ही करीब होते जाएंगे. फिर संसार की हर विपत्ति से आपकी सुरक्षा करेंगी मां काली.

कालरात्रि की क्या पूजा करें और किस उपाय से करें अपने ग्रहो को शांत

मेष राशि

मेष राशि वाले जातक सभी प्रकार के कष्टो और भय से मुक्त होने के लिए मां कालरात्रि की पूजा ॐ कालरात्र्यै नम: मंत्र से करें, साथ ही माता को ग्यारह नींबू की माला अर्पित करें एवं गुड़ का भोग लगायें।

वृषभ राशि

इस राशि वाले जातक सभी प्रकार से सुख प्राप्ति एवं हानि से बचने के लिए मां कालरात्रि की मध्यरात्रि की पूजा ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा मंत्र से करें साथ ही माता को तिल से बनी मिठाईयां और नीली साड़ी अर्पित करें।

मिथुन राशि

इस राशि वाले जातक माता को काई हरी साड़ी तथा महावर चरणों में अर्पित करें एवं उड़द दाल की खिचड़ी का भोग लगाकर गरीबों में प्रसाद के रूप में वितरित करें साथ ही या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ मंत्र का 108 जाप करें।

कर्क राशि

इस राशि वाले जातक माता को चरण पादुका अर्पित करें एवं चांदी की गाय और बछिया की जोड़ी मां के चरणों में रखें तथा ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र से माता की पूजा करें, और केले का भोग लगायें।

सिंह राशि

इस राशि वाले जातक मां कालरात्रि की पूजा में पंजीरी का भोग लगाकर माता को रक्तलाल चुनरी चरणों में अर्पित करें एवं ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ मंत्र का 108 माला जाप करें।

कन्या राशि

कन्या राशि वाले जातक सभी प्रकार के शत्रुबाधा को दूर करने के लिए माता के मंत्र ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा का जाप करें तथा माता को गुड़ और तिल से बनी मिठाई का भोग लगायें।

तुला राशि

तुला राशि वाले जातक मां कालरात्रि की पूजा में सिंघाड़े का भोग लगायें और मिश्री का प्रसाद वितरित करें साथ ही मंत्र ॐ कालरात्र्यै नम: का जाप करते हुए किसी अपंग को तिल का तेल दें।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वाले जातक मां कालरात्रि की पूजा में मंत्र का जाप करते हुए अनार का दान करें एवं मां को जामुनिया रंग का वस्त्र अर्पित करें एवं ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ मंत्र का जाप करें, इससे उनके जीवन में कटुता दूर होकर रिश्तों में मधुरता आयेगी।

धनु राशि

धनु राशि वाले जातक अपने जीवन में अपयश दूर करने के लिए माता के मंत्र ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे का 11 हजार बार जाप करें साथ ही किसी बुजूर्ग या गुरू तुल्य व्यक्ति को छाता तथा काला शाल अर्पित करें एवं पीठे का प्रसाद दें।

मकर राशि

मकर राशि वाले जातक मां कालरात्रि की पूजा से अपने कर्मक्षेत्र के विरोध को दूर कर सकते हैं इसके लिए उन्हें नारंगी रंग का वस्त्र मां को अर्पित करते हुए खट्टे फल मां के चरणों में अर्पित करना चाहिए और ॐ कालरात्र्यै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

कुंभ राशि

कुंभ राशि वाले जातक आटे का दीपक बनाकर घी से प्रज्जवलित कर मां के निम्न मंत्र ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ का एक माला जाप करते हुए शहद का दान करें और माता को आरेंज रंग की चुड़िया अर्पित करें।

मीन राशि

मीन राशि वाले लोग अपने जीवन में सभी सुख प्राप्ति हेतु मां को चीनी एवं चावल से बने लड्डू का भोग लगाते हुए मां को ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा मंत्र अर्पित करें एवं सुहाग की सामग्री मां के चरणों मे रखें।

 

 

 

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22.10.2020 का पंचांग एवं राशिफल

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दिनांक 22.10.2020 का पंचांग

शुभ संवत 2077 शक 1942

सूर्य दक्षिणायन का…द्वितीय (शुद्ध) आश्विन मास शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि … दिन को 07 बजकर 40 मिनट तक … दिन … गुरूवार … पूर्वा आषाढ़ नक्षत्र …  रात्रि को 12 बजकर 59 मिनट तक … आज चंद्रमा … धनु राशि में … आज का राहुकाल दोपहर 01 बजकर 14 मिनट से 02 बजकर 40 मिनट तक होगा …

 

देवी कात्यायनी की पूजा और करें मनचाही मुराद पूरी

देवी कात्यायनी देवी दुर्गा के छठे रूप का प्रतीक हैं। ऐसा माना जाता है कि महिषासुर नामक राक्षस को मारने के लिए, मां पार्वती ने देवी कात्यायनी का रूप धारण किया। देवी पार्वती के इस रूप को सभी रूपों में सबसे प्रचंड कहा जाता है और उनके इस रूप को योद्धा देवी के रूप में भी जाना जाता है। नवरात्रि के छठे दिन, देवी कात्यायनी की पूजा करते हैं। देवी कात्यायनी बच्चे के जन्म के छठे दिन उसका भाग्य लिखने आती हैं अतः कात्यायनी देवी को भाग्य की देवी माना जाता है। बृहस्पति ग्रह कात्यायनी द्वारा शासित है।

माता कात्यायनी अपने भक्तों को सब कुछ दे सकती है। समृद्धि और अच्छे भाग्य की प्राप्ति के लिए देवी कात्यायनी की पूजा करती हैं। देवी कात्यायनी की पूजा भक्तों के जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मकता को समाप्त करती है। ऐसा कहा जाता है कि जो युवती कात्यायनी व्रत रखती हैं वह अपनी पसंद का पति पाती हैं। माँ भक्ति से आसानी से संतुष्ट हो जाती है और अपनेभक्तों के सभी पापों को ध्वस्त कर देती है उन्हें धन, सुख और मुक्ति के साथ आशीर्वाद देती हैं। अतः भाग्य का साथ चाहिए, चाहे वह बेहतर कैरियर के लिए भाग्य का साथ हो अथवा एक अच्छा जीवनसाथी चाहिए अथवा उत्तम स्वास्थ्य सभी प्रकार के बेहतरी के लिए भाग्य की देवी कात्यायनी का व्रत, मंत्रजाप तथा पूजा करने से जीवन में सुख की प्राप्ति होती है।

कात्यायनी पूजा के लिए पूजा विधि

कात्यायनी पूजा साहस, ज्ञान और ताकत प्राप्त करने के लिए की जाती है। देवी के सामने हाथों में पानी लेकर भक्तों द्वारा एक संकल्प किया जाता है। फिर, कपूर मिश्रित पानी, फूल, शहद, घी, गाय का दूध, पंचामृत, चीनी और कपड़े देवी कात्यायनी को अर्पित करते हैं और उनका आशीर्वाद पाने के लिए आग्रहपूर्वक पूजा करते हैं।

कात्यायनी पूजा के लिए मंत्र

देवी कात्यायनी की पूजा करने के लिए, भक्त नवरात्रि त्योहार के दूसरे दिन कई मंत्र, स्तोत्र और श्लोकों का जप करते हैं:

ओम देवी कात्यायनी नमः (लगातार 108 बार)

पूजा से पूरी होती है मनोकामना –

– कन्याओं के शीघ्र विवाह के लिए इनकी पूजा अद्भुत मानी जाती है।

– मनचाहे विवाह और प्रेम विवाह के लिए भी इनकी उपासना की जाती है।

– वैवाहिक जीवन के लिए भी इनकी पूजा फलदायी होती है।

– अगर कुंडली में विवाह के योग क्षीण हों तो भी विवाह हो जाता है।

 

किस राशि वाले लोग देवी कत्यायनी की कैसे करें पूजा और क्या करें उपाय

मेष राशि

मेष राशि वाले जातक गोधूली वेला के समय देवी कत्यायनी की पूजा पीले पुष्प से करें साथ ही पीले वस्त्र तथा बेसन से बने प्रसाद माता को अर्पित करें तो उनके जीवन में विवाह से संबंधित भाग्य का साथ प्राप्त होगा।

वृषभ राशि

इस राशि वाले लोग माता कात्यायनी की पूजा में उनके मंत्र का 108 जाप करें और लाल वस्त्र माता को धारण कराके इनकी पूजा करनी चाहिए। साथ ही शहद और गुलकंद को माता के चरणों में अर्पित करें।

मिथुन राशि

इस राशि वाले लोग मां को सुगन्धित द्रव्य अर्पित करें और नीले वस्त्र तथा विष्णुकांता के पुष्प साथ ही तिल से बने मिष्ठान का भोग लगायें तो शीघ्र विवाह के योग बनेंगे साथ ही प्रेम सम्बन्धी बाधाएं भी दूर होंगी.

कर्क राशि

कर्क राशि वाले लोग मां के समक्ष उनके मन्त्रों का जाप करें, और इनको पीले फूल और पीला नैवेद्य अर्पित करें. शहद अर्पित करना विशेष शुभ होता है, यश तथा भाग्योदय के लिए ये उपाय बेहद शुभकर है।

सिंह राशि

सिंह राशि वाले जातक शीघ्र नौकरी वह मनपसंद विवाह के लिए मां कात्यायनी की पूजा, मंत्रजाप तथा लाल गुडहल के पुष्प एवं गेहूं से बनी पंजीरी का भोग लगायें।

कन्या राशि

कन्या राशि वाले लोग शुक्र तारा उदित होने के समय रंगीन रेशमी वस्त्र,  घी, चीनी, कपूर एक पात्र में रखकर माता के चरणों में अर्पित करें तथा मंत्रजाप से मां के कानो में अपनी चाहत कहें तो आपकी मनोकामना जरूर पूरी होगी।

तुला राशि

तुला राशि वाले जातक लोग कात्यायनी मंत्र जाप के बाद हरा वस्त्र, हरी सब्जी, मूंग की दाल,  हल्दी की गांठ माता को चढ़ाएं तो मनपसंद स्थान में नौकरी लगेगी और सफलता निरंतर बनी रहेगी।

वृश्चिक राशि

इस राशि वाले आज के दिन प्रातःकाल स्नान से निवृत्त होकर माता के मंदिर में समक्ष घी का दीपक जलाएं और उन्हें पीले फूल अर्पित करें, चांदी, चावल से भरा पात्र अर्पित करते हुए मंत्रजाप करें तो निश्चित मन की चाह पूरी होगी।

धनु राशि

इस राशि वाले लोग मां कात्यायनी के मन्त्रों का जाप करें, गुड़ और गेहूं, तांबा तथा शहद माता को अर्पित करें। इससे उनका भाग्य प्रबल होगा तथा जीवन में यश और समृद्धि प्राप्त होगी।

मकर राशि

इस राशि वाले लोगो द्वारा शहद, चांदी या मिटटी के पात्र में अर्पित किया जाए तो उत्तम होगा, इसके साथ ही सिंदूरी वस्त्र तथा पकवान का भोग लगायें।

कुंभ राशि 

कुंभ राशि वाले जातक इच्छित जीवनसाथी पाने के लिए लाल रंग का वस्त्र, सोना, तांबा, मसूर दाल, बताशा, मीठी रोटी का भोग लगाकर प्रसाद का वितरण करें।

मीन राशि

इस राशि वाले लोग अपने मनोकुल लाभ प्राप्त करने के लिए केला, पीला वस्त्र, केशर, नमक, मिठाईयां, हल्दी, पीला फूल लेकर माता के कात्यायनी रूप की पूजा करते हुए मंत्र जाप के साथ व्रत रखें तो मुराद जरूर पूरी होगी।

 

 

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