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कैसे पहचाने खुदखुशी के मनोभाव को

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो वैश्विक स्तर पर हर साल करीब 8,00,000 लोग खुदखुशी कर लेते हैं. वहीं टीनएज में आत्महत्या की दर लगातार बढ़ रही है. 2007 से 2017 के बीच की गई एक अध्ययन से पता चला है कि 15 से 19 साल की उम्र वालों में यह दर 8 प्रति लाख से बढ़कर 12 प्रति एक लाख हो गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे युवा होते लड़के-लड़कियों के माता-पिता कुछ बातों पर ध्यान दें, तो समय रहते उन्हें बचा सकते हैं. इस अध्ययन के मुख्य लेखक और हार्व्रड मेडिकल स्कूल में रिसर्च एसोसिएट ओरेन मिरॉन कहते हैं, “यह एक असली खतरा है जिसे लेकर हम सोचते हैं कि ऐसा हमारे साथ कभी नहीं हो सकता.

ध्यान देने वाली बात यह है कि आत्महत्या के विचारों से घिरे रहने वाले लोग भी असल में मरना नहीं चाहते. एक्सपर्ट बताते हैं कि ऐसे लोग केवल वैसा जीवन नहीं जीना चाहते जैसा वे जी रहे होते हैं. अगर आप बच्चों के अभिभावक हैं, शिक्षक हैं, दोस्त हैं या किसी और तरह से किशोरों से साथ होते हैं, तो उनमें दिखने वाली ऐसी बातों को चेतावनी समझें और उन्हें सुसाइडल स्थिति से बाहर निकलने में मदद दें.

बाते या व्यवहार के संकेत को समझें – 

कोई ऐसा कहे, “मैं अब ज्यादा दिनों तक तुम्हारे लिए परेशानी नहीं बनूंगा” या “मैं खुद को ही खत्म कर लूंगा” तो उसे गंभीरता से लें, भले ही कहने वाले ने ऐसा मजाक में कहा हो. हो सकता है कि कोई ऐसा कहे ना लेकिन अपने सोशल मीडिया पेज पर कोई ऐसा पोस्ट शेयर करे या किसी और तरह से ऐसा लिखे. विशेषज्ञ बताते हैं कि कई लोग अपने परिवार से छुपाने के लिए ऐसी बातें बेनाम लिखते हैं या सोशल मीडिया पर पोस्ट के रूप में डालते हैं. इसलिए डिजिटल दुनिया पर भी नजर रखनी चाहिए.

खुद को नुकसान पहुंचाना

ऐसे किशेर जो खुद को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतें करते हैं उन पर खास ध्यान देना चाहिए. लंदन की क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की असिस्टेंट प्रफेसर किर्स्टिन हैडफील्ड बताती हैं, “खुद को चोट पहुंचाने वाले ऐसे किशोंरों में आत्महत्या की कोशिश करने की काफी संभावना है.” ज्यादा मात्रा में शराब पीना या ड्रग्स लेने लगना भी ऐसा व्यवहार होता है.

समाज से खुद को अलग करना  –

किसी का खुद को सबसे काट लेना एक चिंता का मामला होना चाहिए. जब भी कोई ऐसा करे तो उसे खुदखुशी के विचारों से ग्रस्त समझा जाना चाहिए. हैडफील्ड कहती हैं, “अगर किसी का सामाजिक संबंल मजबूत हो तो उसके मानसिक रोगों से ग्रस्त होने की संभावना काफी कम होती है.” वे सलाह देती हैं कि परिवारजन देखें कि उनके घर के बच्चे दूसरों से खुद को काट तो नहीं रहे हैं और उन्हें बार बार बताएं कि वे हर हाल में उन्हें प्यार और मदद देना बंद नहीं करेंगे. अगर माता पिता को बातचीत में मुश्किलें आएं तो उन्हें थेरेपिस्ट की मदद लेने से भी नहीं चूकना चाहिए.

हताश महसूस करना  –

जब भी ऐसी भावनाएं दिखें कि किशोर किसी स्थिति में फंसे हुए या हताश महसूस कर रहे हैं तो आत्महत्या के विचारों के आने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे हालात में सावधानी बरतें और मदद करें, ज्यादातर लोग जिन्हें खुदखुशी का ख्याल आता है वे भी असल में मरना नहीं चाहते हैं. टीनएजर्स में अकसर ऐसी झल्लाहट देखने को मिलती है जब वे कहते हैं कि “मुझे अपनी जिंदगी से नफरत है.” उन्हें बात करने और अपनी मन:स्थिति के बारे में विस्तार से बताने के लिए प्रेरित करें.

दिनचर्या में बदलाव –

अगर अचानक उनके रूटीन में बदलाव आने लगे तो उससे ये भी संकेत मिलता है कि वे अवसादग्रस्त हो सकते हैं. सबसे आसानी से दिखने वाला बदलाव नींद में दिखता है. विशेषज्ञ हैडफील्ड बताती हैं, “नींद और आत्महत्या के विचारों का बहुत गहरा संबंध पाया गया है.” वे बताती है कि अगर कोई टीनएजर केवल 4-5 घंटे ही सो रहा है तो उसमें खुदखुशी के विचारों के लिए नजर रखें. अगर कोई बहुत ज्यादा सोने लगा हो और बिस्तर ही नहीं छोड़ना चाहता हो तो वह अवसाद यानि डिप्रेशन से ग्रस्त हो सकता है.

अपनी चीजें त्यागना –

अगर कोई किशोर अपनी पसंदीदा चीजें तक लोगों को बांट आए और उसकी कोई तार्किक वजह तक ना बता सके, तो समझिए कि कुछ गड़बड़ चल रही है. उससे बात करें और तुरंत मदद लें. एक्सपर्ट कहते हैं कि कई बार इसका मतलब होता है कि उन्होंने जान देने की योजना बना ली है.

व्यक्तित्व में बदलाव, मूड बदलना, गुस्सा या घबराहट –

हालांकि टीनएज के बच्चों में ये सारी ही चीजें आम होती हैं लेकिन इन पर सावधानी से नजर रखनी चाहिए. अगर परिवार में मूड डिसऑर्डर का इतिहास रहा हो या किसी और ने भी पहले आत्महत्या या उसकी कोशिश की हो तो खास ध्यान देने की जरूरत है. ऐसे किसी भी बदलाव के बारे में उनसे बात करना बहुत जरूरी है. हैडफील्ड कहती हैं, “एक मददगार अभिभावक या निःस्वार्थ प्रेम करने वाला कोई व्यक्ति बहुत अहम भूमिका निभा सकता है.”

हाल पूछना, परेशानी समझना और जरूरत हो तो मदद मुहैया कराना अहम है क्योंकि किशोर अकसर खुद से मदद मांगने नहीं आते हैं. उनके आपके पास आने का इंतजार ना करें.

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हमारे वेबसाइट www.etoinews.com पोर्टल की सामग्री केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और किसी भी जानकारी की सटीकता, पर्याप्तता या पूर्णता की गारंटी नहीं देता है साथ ही किसी भी त्रुटि या चूक के लिए या किसी भी टिप्पणी, प्रतिक्रिया और विज्ञापनों के लिए जिम्मेदार नहीं है। आपको केवल एक सुविधा के रूप में ये न्यूज या लिंक प्रदान कर रहा है और किसी भी समाचार अथवा लिंक को हमारा वेबसाइट समर्थन नहीं करता है।

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ज्योतिष - वास्तु

भगवान शिव के इन 5 मंदिरों में दर्शन के साथ, सावन महीने की करें शुरुआत

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”शि’ का अर्थ है ‘मंगल’ और ‘व’ कहते हैं दाता को, इसलिए जो मंगलदाता है, वही शिव है। शिव ब्रह्म रूप में शांत हैं, तो रुद्र रूप में रौद्र हैं। शिव हमारी प्रार्थनाएं सहजता से स्वीकार करते हैं पर शिव का मूल उद्देश्य हमें अपनी तरह सहज, सरस और सरल बनाना है। श्रावण में शिव अभिषेक कामनाओं की पूर्ति हेतु संपन्न किया जाता है, लेकिन वह शुष्क मन-प्राण को भी सरस कर देता है। मन को चंद्रमा नियंत्रित करता है, जो सोमवार के दिन का स्वामी है। इसलिए शिवलिंग अभिषेक सोमवार को अवश्य किया जाता है, क्योंकि मन को उत्फुल्लित करने का यह एक कारगर उपाय है। तो 17 जुलाई से सावन महीने की हो रही है शुरुआत। भारत में बने इन मंदिरों का दर्शन इस पावन महीने में होगा खास, जानेंगे इसके बारे में….

तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड

समुद्र तल से 3680मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर है। जो बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर के बीच में स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही अद्भुत है। हिमालय पर्वत की बर्फ से ढकी ऊंची चोटियां इसकी खूबसूरती में लगाती हैं चार चांद। तीर्थयात्रियों के साथ ही सैलानियों को भी ये जगह बहुत लुभाती है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर भगवान शिव के प्रिय ‘नंदी’ की मूर्ति विराजमान है। द्वार के दाईं ओर भगवान गणेश की मूर्ति है। मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी हुई है और आसपास कई छोटे मंदिर हैं।

जूनागढ़, भावनाथ तालेटी

जूनागढ़ सिर्फ गिर नेशनल पार्क के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि ये साधुओं का भी घर है जो सावन महीने और महाशिवरात्रि के मौके पर दर्शन के लिए भारी तादाद में आते हैं। इनके अलावा दुनिया के अलग-अलग कोनों से भी लोग मंदिर में जल चढ़ाने और पूजा-अर्चना करने आते हैं। शिवरात्रि में तो जूनागढ़ आकर यहां के कल्चर और साधुत्व से भी रुबरू होने का मौका मिलता है।

पशुपतिनाथ मंदिर, मंदसौर

मध्यप्रदेश के मंदसौर में बना ये मंदिर भारत का इकलौता पशुपतिनाथ का मंदिर है। जो नेपाल के पशुपतिनाथ से काफी मिलता-जुलता हुआ है और इसलिए ही इसका नाम पशुपतिनाथ पड़ा। चिकने चमकदार पत्थर से बनी हुई पशुपतिनाथ की प्रतिमा सवा सात फीट ऊंची है। शिवना नदी के तट पर बसे इस मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है। कहते हैं सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूरी पूरी होती है।

मुरुदेश्वर मंदिर, कर्नाटक 

भगवान शिव का एक नाम मुरुदेश्वर भी है। कंडुका पहाड़ी पर बना ये मंदिर तीनों तरफ से अरब सागर से घिरा हुआ है। मंजिल में 20 मंजिला गोपुरा बना हुआ है। 249 फुट लंबा दुनिया का सबसे बड़ा गोपुरा है। समुद्र तट के पास स्थित भगवान शिव का यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है और मंदिर परिसर में बने भगवान शिव की विशाल मूर्ति तकरीबन 123 फीट है।

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

भुवनेश्र्वर के सबसे बड़े मंदिरों से में एक है। जो कलिंग की वास्तुकला और मध्यकालीन ऐतिहासिक परंपरा का बेजोड़ नमूना है। मंदिर के अंदर भगवान विष्णु की भी प्रतिमा है। शिव से जुड़े हर एक त्यौहार में आप यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देख सकते हैं। लिंगराज मंदिर से होकर एक नदी गुजरती है जो कई तरह की शारीरिक बीमारियों को दूर करता है। सावन महीने में सुबह से ही भक्तगण महानदी से पानी भरकर पैदल चलकर मंदिर तक आते हैं।

 

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‘अमीरों से लो, गरीबों को दो’ इस विकास मॉडल पर काम कर रही है सरकार

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  • केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार में सड़क, पोत परिवहन और जल संसाधन के क्षेत्रों में 17 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को पूरा किया गया, लेकिन एक रुपये का भ्रष्टाचार नहीं हुआ। लोकसभा में ‘वर्ष 2019-20 के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों’ पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि ‘भारत माला’ परियोजना के पहले चरण में 24800 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो रहा है। ‘पिछले पांच सालों में मंत्रालय ने 40,000 किलोमीटर की सड़कें बनाई हैं। यह पिछले पांच सालों में बने पांच राजमार्गों की तुलना में 60 प्रतिशत ज्यादा है। इसके अलावा यह पिछले पांच सालों की तुलना में भी 60 प्रतिशत ज्यादा है।’ उन्होंने आगे कहा कि फंड की कोई कमी नहीं है।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार को बजट में सबसे ज्यादा फंड मिले हैं। गडकरी ने कहा, ‘17 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी हुईं। एक रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा। कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ। लेकिन अगर कहीं काम सही नहीं हुआ तो हमने जिम्मेदारी तय की।’ उन्होंने कहा कि राजमार्ग और भवन निर्माण क्षेत्र में प्रगति दोगुनी हो चुकी है। यह बहुत बड़ी प्रगति है। हर परियोजना हमारे लिए प्राथमिकता है। हम उसे पूरा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘मैं सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जो प्राथमिकता तय की थी उसके बहुत अच्छे नतीजे आए हैं।’
  • मंत्री ने कहा कि पांच साल में 17 लाख करोड़ रुपये के काम हुए। इनमें से 11 लाख करोड़ रुपये के काम सड़क क्षेत्र में, छह लाख करोड़ रुपये के काम पोत परिवहन और एक लाख करोड़ रुपये जल संसाधन क्षेत्र में हुए। गडकरी ने कहा, ‘जो दे सकते हैं, उनसे लो और जो गरीब हैं, उन्हें दो … हमारी सरकार विकास के इसी मॉडल पर काम कर रही है ताकि प्रधानमंत्री के नये भारत के विकास के सपने को साकार किया जा सके। सड़क परिवहन मंत्री ने कहा कि हम 22 ग्रीन एक्सप्रेसवे बना रहे हैं। इनमें से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे एक है। मंत्री ने कहा कि भूमि अधिग्रहण थोड़ी समस्या है। ‘कई सांसदों ने कुछ मुद्दे उठाए हैं, लेकिन मैं उनसे कहना चाहता हूं कि 80 फीसदी भूमि का अधिग्रहण होने तक हम सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं करते हैं।’ उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि सरकार ने पहले से रुकी हुई परियोजनाओं से संबंधित 95 फीसदी समस्याएं खत्म की हैं। इससे बैंकों का तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक एनपीए (गैर निष्पादक संपत्तियां) होने से बचा।
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ड्यूटी पर न पहुंचने वाले मंत्रियों पर मोदी का सख्त नजर, मांगे सबके नाम

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                 ड्यूटी पर न पहुंचने वाले मंत्रियों पर मोदी का सख्त नजर, मांगे सबके नाम

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा संसदीय दल की बैठक में मंत्रियों पर सख्त नजर आए। प्रधानमंत्री ने संसद में रोस्टर ड्यूटी में अनुपस्थित रहने वाले मंत्रियों की शाम तक जानकारी मांगी है। उन्होंने जोर दिया कि सांसदों और मंत्रियों को संसद में रहना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि मोदी ने बैठक में कहा कि जो मंत्री रोस्टर ड्यूटी में उपस्थित नहीं रहते, उनके बारे में उन्हें बताया जाए। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे सरकारी काम और योजनाओं में बढ़ चढ़ कर भाग लें, सामाजिक कार्यों में हिस्सा लें और जब संसद सत्र चल रहा हो तो सदन में उपस्थित रहें।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि पहली बार जो प्रभाव पड़ता है, उसका असर अंत तक बना रहता है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सामने जल संकट है और इसके हल के लिए सांसदों को काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सांसदों को अपने इलाके के अधिकारियों के साथ बैठक कर जनता की समस्याओं के बारे में बात करनी चाहिए। सांसदों को अपने-अपने क्षेत्र में जाकर सरकार की योजनाओं के बारे में जनता को बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहली बार जो प्रभाव पड़ता है, उसका असर अंत तक बना रहता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति से हटकर भी सांसदों को काम करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के लिए कोई एक नया काम करें।
  • जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम करें और राजनीति के साथ साथ सामाजिक काम करें।
    उन्होंने कहा कि सांसद अपने क्षेत्र में जानवरों की बीमारियों पर भी काम करें। टीबी, कुष्ठ रोग जैसे बीमारियों पर मिशन मोड में काम करें। यह बैठक मंगलवार को संसद के पुस्तकालय भवन में हुई। जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने की। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी आदि मौजूद थे। पिछले मंगलवार को हुई संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों को 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से लेकर 31 अक्तूबर (सरदार पटेल जयंती) तक अपने-अपने क्षेत्र में 150 किलो मीटर पदयात्रा निकालने का निर्देश दिया था।
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