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मकर के मंगल शनि गुरु क्या मचाएंगे धमाल ?

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59 वर्ष बाद तीन बड़े ग्रह मकर राशि में

 नीच का गुरू दे सकता परेशानियां और शनि मंगल भी देंगे साथ 

 

आज से  तीन बड़े ग्रह मकर राशि में रहेंगें। स्वग्रही शनि, उच्च के मंगल और नीच के गुरू। चूंकि इस बार गुरु अतिचारी हो गए हैं आईये जानते हैं कि गुरू के इस नीचत्व राशि परिवर्तन का क्या होगा देश दुनिया पर असर। पंचांग के अनुसार 22 मार्च को मकर में प्रवेश कर चुके हैं। गुरु यानी बृहस्पति भी 30 मार्च को राशि बदलकर मकर में प्रवेश करेंगे। इस तरह तीन बड़े ग्रह मकर राशि में रहने वाले हैं। ज्योतिषों के अनुसार इसका व्यापक असर देश-दुनिया और सभी लोगों पर नजर आएगा।मोटे तौर पर ये तीन ग्रहों की युति दुनिया में बीमारी और युद्ध और आर्थिक परेशानियों को पैदा करने और बढ़ाने वाले होंगे कुछ पर इसका असर कम और कुछ पर इसका असर ज्यादा दिखेगा मगर परेशानी सभी को उठानी पड़ सकती है

हालाँकि ज्योतिष में गुरु सबसे शुभ ग्रह माना गया है और यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है साथ ही ये देवताओं के गुरु भी हैं। जिस प्रकार सभी ग्रह ब्रह्माण्ड में गोचर करते रहते है उसी प्रकार  गुरु भी विभिन राशियों तथा भाव में गोचर करते है. ज्ञान, विवेक, संयम, उत्तम शिक्षण, सदाचार, सात्विक प्रवृत्ति, विवाह योग, कॅरियर, अर्थव्यवस्था का कारक ग्रह बृहस्पति को ही माना गया है.  29 /30 मार्च, 2020, सोमवार को गुरु प्रातः मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. ये गोचर तीन महीने तक ही रहेगा, फिर 30 जून, मंगलवार को गुरु पुनः धनु में वापस चले जायेंगे जहाँ से ये दुबारा 20 नवम्बर को मकर में आयेंगे. इस दौरान गुरु महाराज लगभग 122 दिन वक्री गति करेंगे. यानि 14 मई 2020 गुरुवार को रात्रि में मकर राशि में रहते हुए ही ये वक्री हो जायेंगे और धनु राशि में पहुँच जायेंगे जहाँ से ये 13 सितंबर 2020 रविवार को सुबह मार्गी हो जायेंगे और पुनः 20 नवम्बर को मकर में पहुँच जायेंगे. अभी मंगल भी उच्च का होकर 4 मई तक विराजमान रहेंगे. साथ ही शुक्र स्वराशि वृषभ में 1 अगस्त तक रहेंगे और 13 अप्रैल को सूर्य उच्च का होकर मेष राशि में जायेंगे और 14 मई को वृषभ में चले जायेंगे. मकर राशि में गुरु हो तो जातक बहुत श्रम करने वाला और क्लेश करने वाला होता है। ऐसा जातक मुर्ख, निर्धन तथा दूसरों का नौकर होता है। वह मंगल कार्यो में विशवास नहीं करता तथा अपने भाई बन्धुओ के प्रेम और धर्म से हीन होता है। उसका शरीर कमजोर होता है। वह अपने घर से दूर अपना आसियाना बसाता है या नौकरी करने के लिए प्रवास करता है।

वास्तव में गुरु शुभ है या अशुभ, यह लग्न कुंडली के द्वारा निर्धारित किया जाता है। जिन लग्नों में गुरु लग्न, द्वितीय, पंचम, नवम एवं आय भाव के स्वामी होते हैं, उन्हीं लग्नों के लिए गुरु शुभ माने जाते हैं। अर्थात धनु, मीन, मेष, वृश्चिक, सिंह एवं कुंभ लग्न के लिए गुरु शुभता लिए होते हैं। अत: इन लग्नों के व्यक्तियों को गुरु को मजबूत करना चाहिए। यदि गुरु इन्हीं भावों में मौजूद हो, पाप दृष्टि से रहित हो तो गुरु योगकारक माने जाते हैं। ऐसे व्यक्तियों के सोने के गहने, पुखराज आदि पहनना लाभकारी रहता है।
पीले वस्त्र, पीला भोजन आदि शुभता बढ़ाता है। यदि इन लग्न वाले व्यक्तियों की कुंडली में गुरु 6, 8, 12, या 3, 4, 7 के भावों में हो, नीच का हो तो उन्हें गुरु की मजबूती के‍ उपाय करने चाहिए अन्यथा जीवन में असफलता का मुँह देखना पड़ता है।

मिथुन एवं कन्या लग्न के लिए गुरु दो केंद्रों के स्वामी (7, 10, एवं 4, 7) होकर केंद्राधिपत्य दोष से ग्रस्त हो जाते हैं व अपना कारकत्व खोकर निष्क्रिय हो जाते हैं। अत: ये कुंडली को बल नहीं दे पाते अत: उनका सामान्य स्थिति में रहना ही श्रेयस्कर होता है। यदि नीच के हो, तो इनकी मजबूती का प्रयास करें

तुला, वृषभ, मकर लग्न के लिए गुरु 3, 6, 8, 12 भावों के स्वामी होकर प्रतिकूल हो जाते हैं अत: इनका कमजोर होना या 6, 8, 12 में होना (स्वराशिस्थ) ही हितकर होता है। यदि अशुभ भावों के स्वामी होकर गुरु लग्न, पंचम, नवम, दशम आदि शुभ भावों में बैठते हैं, तो साधारणत: प्रतिकूल फल ही अनुभव में आते हैं। इन लग्नों में इनकी उच्च स्थिति बुरा प्रभाव ही देती है। कर्क लग्न के लिए गुरु मिला- जुला प्रभाव देते हैं। एक ओर ये छठे भाव के स्वामी हैं, दूसरी ओर नवम का भी आधिपत्य रखते हैं।

भारत का जन्म लग्न वृषभ और राशि कर्क है दोनों ही नजरिये से गुरु अष्टम और एकादश फिर षष्ठम और नवम का स्वामी है भारत के लग्न से मकर के गुरु भाग्य स्थान में तथा गोचर में कर्क राशि से गुरु सप्तम स्थान में होंगे ये रोगेश और भाग्येश दोनों ही होंगे इसका मतलब रोगों की प्रबृत्ति बढ़ सकती है खासकर महिलाओं में इसका असर ज्यादा देखने को मिलगा ख़ास इंफेक्शन की परेशानियां ज्यादा दिखाई पड़ेंगी पर जब भाग्येश सप्तम हो तो बहुत से देशों का साथ मिलेगा।

इसी तरह से कर्क राशि से मंगल भी पंचमेश और धर्मेश सप्तम स्थान में है मतलब पंचम स्थान पेट का ,एकाग्रता का और दशम स्थान सत्ता का ,मंगल उच्च के होकर सप्तम स्थान में हों ,तो राजा की कठिन परीक्षा ,मगर प्रजा का साथ मिलता है अब शनि को भी देखे शनि भी मकर राशि यानि सप्तम के स्वामी होकर सप्तम स्थान में हैं मतलब शनि अपने ही स्थान में बैठकर राजा प्रजा के बीच की दूरियों को कम करेंगे मगर मंगल शनि का गुरु के साथ योग भारत में अनिष्ट जरूर पैदा कर सकते हैं

अब इसे काल पुरुष के जन्म कुंडली के हिसाब से देखें तो क्या होगा ?

मतलब दुनिया की नजरिये से दशमेश दशम स्थान में राजा को पुरुषार्थी और और पराक्रमी होना होगा मगर मंगल दशम स्थान में शनि से युत हों तो संसार में उत्पात मचा सकते हैं गुरु का साथ मिले तो ये उत्पात ज्यादा घातक हो सकता है शनि की दिशा पश्चिम यानि पश्चिमी देशों को ज्यादा उत्पात सहना  पड सकता है युद्ध की भी संभावना से इंकार नहीं। वैसे दुनिया से सभी देशों में उत्पात की सम्भावना है

प्रधान मंत्री मोदी के नजरिये गोचर देखें तो वृश्चिक राशि से शनि मंगल और गुरु तीनों ही चिंताएं देते हैं मगर गजब का धैर्य देंगे अन्ततः वे विजयी भी होंगे गुरु के तीसरे आते ही वे बहुत तेजी से काम करेंगे और बड़े निर्णय लेंगे ,मतलब भारत के नजरिये से मकर के शनि मंगल और गुरु का योग कम उत्पात कारी होगा मगर सारे प्रयास 20 जून से पूर्व खत्म करना होगा यदि गुरु पुनः वक्री होकर धनु राशि में प्रवेश करते हैं और कुछ कार्य अधूरे रह जाते हैं तब ये लगभग 20 नवंबर तक ज्यादा परेशानी दे सकते हैं

यदि गुरु अशुभ भावों के स्वामी होकर शुभ भावों में हो, उच्च राशि में हो या शुभ भावों के स्वामी होकर अशुभ भावों में हो तो पेट की समस्या, लिवर की खराबी, मोटापा, ज्ञान की कमी, मतिभ्रम, विवाह व संतान न होना, शिक्षा में रुकावट आदि समस्याएँ उत्पन्न होती है। इनका गुरु के बलाबल के अनुसार निदान आवश्यक है।

शनि और गुरु दोनों ही धीमी गति से गोचर करने वाले ग्रह हैं और 59 वर्ष बाद ये युति बन रही है. गुरु भले ही नीच के हों लेकिन स्वराशि शनि के कारण नीच भंग योग बन रहा है जो गुरु के गुरुत्व में वृद्धि ही करेगा. शनि शश योग और मंगल रुचक योग भी बना रहे हैं जिनकी गिनती पञ्च महापुरुष योग में होती है. मकर राशि में स्थित होने पर बृहस्पति अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलहीन हो जाते हैं। किंतु जब भी गुरु और शनि का संबंध बना है दुनिया में तबाही और विनाश सामने आए हैं। मूसलाधार बारिश के कारण भयंकर बाढ़ की स्थिति बनी और इससे भारी आबादी वाले क्षेत्र और फसलों की भारी बर्बादी हुई। इस युति के कारण भयंकर महामारी और युद्ध ,मंदी ,और प्राकृतिक आपदाएं फैलती हैं।

बृहस्पति की कृपा के लिए क्या करें जिन राशि के जातकों के लिए गुरु नेष्टकारी हो वे गुरु की शांति के लिए बृहस्पति स्तोत्र, बृहस्पति कवच का पाठ करें। गुरु मंत्र ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः या ऊं गुं गुरवे नमः के 19 हजार जाप स्वयं करें या पंडित से करवाएं। गुरुवार का व्रत करें, पीले धान्य का भोजन करें एवं पीले वस्त्र गुरुवार को धारण करें। श्रीहरि का नियमित पूजन करें। पीपल, केले के वृक्ष का पूजन करें। गुरु यंत्र को घर में स्थापित करके पूजन करें। गुरु के बीज मंत्रों से हवन करें। तर्जनी अंगुली में पुखराज रत्न या उपरत्न सुनहला- लाजवर्त मणि धारण करें। पीले वस्त्र, पीले धान जैसे चने की दाल, पीतल, कांसा पात्र, हल्दी, सुवर्ण, धार्मिक ग्रंथ रामायण, गीता आदि दान करें।

गुरु के मकर में तीन माह के भ्रमण का अन्य ग्रहों के परिप्रेक्ष्य में विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हैं:

मेष राशि

देव गुरु बृहस्पति आपकी राशि से दशम भाव में प्रवेश करेंगे। यह आपके नवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं। आपके कार्यक्षेत्र में कुछ उतार-चढ़ाव की स्थितियां बनेंगी। कुछ लोगों को ट्रांसफर मिलने की संभावना रहेगी और यह बृहस्पति आपसे काफी मेहनत करवाएगा। लेकिन कार्यक्षेत्र में आपका अति आत्मविश्वास आपको परेशानियों में डाल सकता है, इसलिए अपने काम से काम रखें और दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप करना बंद करें। इसके प्रभाव से आपको आपके भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और आपके अटके हुए काम भी बनेंगे आपको अपने काम पर पूरा ध्यान देना आवश्यक होगा।

उपाय : गुरुवार के दिन गौ माता को हल्दी व चने की दाल मिलाकर आटे की लोई खिलाएं।

वृषभ राशि –

बृहस्पति का गोचर आपकी राशि से नवें भाव में होने वाला है। यह आपकी राशि के लिए आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। बृहस्पति का यह गोचर मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। इस गोचर के प्रभाव से सामाजिक रुप से आपकी काफी उन्नति होगी और आप का समाज में कद ऊंचा होगा। आर्थिक तौर पर यह गोचर सामान्य रहने वाला है। इस गोचर के प्रभाव से आपके मन में धार्मिक विचार रहेंगे और आप धार्मिक क्रियाकलापों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। आपकी संतान के लिए गोचर बहुत अनुकूल रहेगा और उनकी उन्नति होगी। यदि आप अभी अविवाहित हैं तो इस गोचर का अनुकूल परिणाम मिलेगा। इस गोचर काल में आप किसी लम्बी तीर्थ यात्रा पर भी जा सकते हैं।

उपायः गुरुवार के दिन हल्दी व चना दाल का दान करें और गाय को रोटी खिलाएं।

मिथुन राशि –

आपकी राशि के जातकों के लिए बृहस्पति सातवें और दसवें भाव का स्वामी है। सातवें भाव का स्वामी होने के कारण यह मारक भी है और इस गोचर काल में आपके अष्टम भाव में प्रवेश करेगा। बृहस्पति का यह गोचर ज्यादा अनुकूल नहीं माना जाएगा क्योंकि इसके कुछ प्रतिकूल परिणाम भी सामने दिखाई देंगे। आपके खर्चों में यकायक वृद्धि होगी, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ सकती है और आपको बहुत ज्यादा तनाव का सामना करना पड़ सकता है। आपको स्वास्थ्य संबंधित बड़ी परेशानियां सामने आ सकती हैं, इसलिए स्वास्थ्य संबंधित किसी भी समस्या को नज़रअंदाज़ ना करें और तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। बेवजह की यात्राएं आपके धन और स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती हैं, इसलिए इनसे दूर रहना ही बेहतर होगा। इस गोचर काल में आपके अपने ससुराल पक्ष से संबंधों पर भी थोड़ा असर पड़ सकता है और वे आपके मानसिक तनाव का कारण बन सकते हैं।

उपायः बृहस्पतिवार के दिन शुद्ध घी का दान करें।

कर्क राशि –

आपकी राशि के लिए देव गुरु बृहस्पति का गोचर सदैव ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह आपके नवम भाव अर्थात भाग्य स्थान के स्वामी भी हैं और छठे भाव के स्वामी भी। अपने इस गोचर काल में बृहस्पति देव आपके सातवें भाव में प्रवेश करेंगे। इस समय में आप अपने व्यापार को गति देने में भी सफल होंगे। एक बात का आपको विशेष ध्यान रखना होगा कि इस दौरान आपके अपने बिज़नेस पार्टनर से रिश्ते खराब हो सकते हैं, इसलिए उन्हें संभालने का प्रयास करें। यह गोचर दांपत्य जीवन में मिले जुले परिणाम लेकर आएगा। स्वास्थ्य के लिहाज से बृहस्पति का गोचर थोड़ा कमजोर हो सकता है, इसलिए विशेष रुप से ध्यान दें। छोटी मोटी यात्राएं आपके व्यापार को वृद्धि प्रदान करेंगी। जिन लोगों का विवाह नहीं हुआ है, उन्हें इस गोचर का अनुकूल परिणाम मिलेगा और विवाह होने के योग बनेंगे।

उपायः हर गुरुवार को केले के वृक्ष का पूजन करें।

सिंह राशि –

देव गुरु बृहस्पति का गोचर सिंह राशि के जातकों के छठे भाव में होगा। यह आपके राशि स्वामी के परम मित्र हैं और आपकी कुंडली में पांचवें और आठवें भाव के स्वामी भी हैं। इस गोचर के प्रभाव से आपके खर्चों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यह वह समय होगा, जब आप स्वास्थ्य के क्षेत्र में कमजोर हो सकते हैं और आपका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। कोई बड़ी बीमारी भी शुरू हो सकती है, इसलिए विशेष रुप से ध्यान दें। इस समय काल में आपको वाहन सावधानी से चलाना चाहिए। किसी अन्य के झगड़े में हाथ ना डालें, अन्यथा नुकसान उठाना पड़ सकता है। कठिन मेहनत के उपरांत कार्य क्षेत्र में आंशिक सफलता मिलने की उम्मीद आप कर सकते हैं। आमाशय तथा गुर्दों के रोगों से सावधान रहें। भोजन में वसा की मात्रा अधिक होने से मोटापा भी बढ़ सकता है।

उपायः बृहस्पति बीज मंत्र का जाप करें “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:”

कन्या राशि –

कन्या राशि में जन्मे लोगों के लिए बृहस्पति चौथे और सातवें भाव के स्वामी हैं तथा यह सप्तम भाव के स्वामी होने से मारक भी कहलाते हैं। पंचम भाव में बृहस्पति का गोचर आपके लिए कुछ मामलों में बहुत अच्छे और कुछ मामलों में परेशानी जनक परिणाम लेकर आया है। यदि कुंडली में स्थितियां अनुकूल हों तो इस गोचर के प्रभाव से आप को संतान की प्राप्ति हो सकती है और आपकी बरसों की इच्छा पूरी हो सकती है। इस समय में आपके परिवार में सुख और शांति की बढ़ोतरी होगी और आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। यहां पर बृहस्पति अपनी नीच राशि में है। हालांकि राशि का स्वामी शनि भी साथ होने के कारण आपको शुरुआत में कुछ अनुकूल परिणाम मिलने में देरी हो सकती है, फिर भी आपको अच्छे परिणाम भी मिलेंगे। आप यह निर्णय लेने में परेशान होंगे इस असमंजस से बचने के लिए आपको किसी समझदार और अनुभवी व्यक्ति की सलाह लेनी चाहिए। यदि आप नौकरी करते हैं तो इस समय में आपकी नौकरी जाने की संभावना भी बन सकती है।

उपायः प्रतिदिन अपने घर में कपूर का दीपक जलाएं।

तुला राशि –

बृहस्पति का गोचर आपके चौथे भाव में होगा, इस गोचर का प्रभाव विशेष रूप से पारिवारिक जीवन में देखने को मिल सकता है। बृहस्पति आपके तीसरे और छठे भाव के स्वामी भी हैं। चतुर्थ भाव में बृहस्पति का गोचर परिवार में तनाव को बढ़ा सकता है। लोगों में एक दूसरे को समझने की कमी हो सकती है, जिसकी वजह से परिवार की एकता खतरे में पड़ सकती है इस गोचर काल में आपके परिवार के बुजुर्गों का स्वास्थ्य भी पीड़ित हो सकता है यह गोचर परिवार के प्रति आपको चिंतित बनाएगा और आपके घरेलू खर्च भी बढ़ेंगे। इस समय में आपको किसी भी प्रकार के विवाद से बच कर रहना चाहिए, जो विशेष रूप से आपके परिवार से संबंधित हो।

उपायः प्रत्येक गुरुवार को घी का दान करना आपके लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

वृश्चिक राशि –

वृश्चिक राशि वालों के लिए बृहस्पति दूसरे और पांचवें भाव का स्वामी है इसलिए यह दूसरे भाव का स्वामी होने से मारक भी है। गोचर की इस स्थिति में बृहस्पति आपके तीसरे भाव से गोचर करेगा और इसकी वजह से आपको यात्राओं पर बार-बार जाना पड़ेगा। आपको शारीरिक कष्ट और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। यह गोचर काल आपके दांपत्य जीवन के लिए बेहद अनुकूल और प्रभावशाली रहेगा। यदि आपके रिश्ते में कोई तनाव चला आ रहा था तो वह भी अब दूर हो जाएगा और आपके रिश्ते में मजबूती आएगी। आपकी संतान के लिए भी बृहस्पति का गोचर काफी अनुकूल रहेगा और इस समय में उन्हें अच्छा लाभ मिलेगा। विवाह के प्रस्ताव मिलने की भी अच्छी संभावना होगी।

उपायः भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना आपके लिए फलदायी रहेगा।

धनु राशि –

बृहस्पति का गोचर आपकी राशि के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरु धनु राशि का स्वामी ग्रह है। यह आपकी राशि के चौथे भाव का स्वामी भी है और वर्तमान गोचर में आपके दूसरे भाव में प्रवेश करेगा। बृहस्पति का दूसरे भाव में जाना आपके कुटुंब में वृद्धि की ओर संकेत करता है, जिसकी वजह से परिवार में किसी नए व्यक्ति का आगमन हो सकता है। चाहे आपके परिवार में किसी का विवाह हो अथवा कोई संतान जन्म हो, परिवार में ख़ुशियाँ आएँगी और आप पूजा पाठ तथा शुभ कार्य संपन्न करेंगे। व्यापार तथा प्रॉपर्टी से अच्छा धन लाभ अर्जित करेंगे। यह गोचर आपके कार्यक्षेत्र को भी प्रभावित करेगा और आपकी सोचने समझने की शक्ति और आपका अंतर्ज्ञान आपको अपने कार्यक्षेत्र में मजबूत बनाएगा।

उपायः घर में गुरु बृहस्पति यंत्र की स्थापना करें और रोज़ाना इसकी पूजा करें।

मकर राशि –

मकर राशि के लिए बृहस्पति तीसरे और बारहवें भाव का स्वामी होता है और अपने इस गोचर काल में वह मकर राशि में ही गोचर कर रहा है। अर्थात आप के प्रथम भाव में बृहस्पति का गोचर होगा, मकर राशि में स्थित होने पर बृहस्पति अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलहीन हो जाते हैं। मंगल के साथ गुरु और शनि का संबंध भी है अतः आपके जीवन के साथ ही दुनिया में भी तबाही और विनाश सामने आए हैं। मकर राशि में गुरु हो तो जातक बहुत श्रम करने वाला और क्लेश करने वाला होता है। अतः पारिवारिक विवाद तथा अध्ययन में बाधा दिखाई दे सकता है। लोगो से अपमानित होने की स्थिति निर्मित हो सकती है। भाई बन्धुओ के प्रेम और धर्म से हीन हो सकते हैं। शरीर कमजोर हो सकता है। अपने घर से अलग हो सकते हैं।

उपायः अपनी जेब में सदैव एक पीला रुमाल रखें और माथे पर प्रतिदिन केसर का तिलक लगाएँ।

कुंभ राशि –

कुंभ राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का गोचर बारहवें भाव में होगा। आपकी राशि से दूसरे और ग्यारहवें भाव का स्वामी बृहस्पति आपके लिए मारक भी बनता है। द्वादश भाव में बृहस्पति का यह गोचर आपको शारीरिक तौर पर परेशान कर सकता है आपके खर्चे एकाएक बढ़ने लगेंगे। आप धार्मिक कार्यों पर खूब दिल खोलकर खर्च करेंगे ज्यादा खर्च आपकी आर्थिक स्थिति को बिगाड़ सकता है। इस गोचर काल में आपका पारिवारिक जीवन खुशनुमा रहेगा और परिवार की स्थिति बढ़िया रहेगी। वाद विवाद तथा कोर्ट कचहरी से संबंधित मामलों के लिए यह समय कमजोर रह सकता है।

उपायः गुरुवार को सुबह के समय पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएँ। इस दौरान पीपल के वृक्ष का स्पर्श न करें।

मीन राशि –

बृहस्पति मीन राशि के स्वामी हैं, इसलिए इनका यह गोचर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। इसके अतिरिक्त यह आपके कर्म भाव अर्थात दशम भाव के स्वामी भी हैं और अपने इस गोचर काल में वे आपके एकादश भाव में प्रवेश करेंगे। गुरु के गोचर के प्रभाव से आपकी सोच अनुसार लाभ नहीं दे पायेगा क्यों गुरू नीचत्व का है। किंतु वरिष्ठ व्यक्ति की सलाह आपके बहुत काम आएगी। आपका सामाजिक दायरा बढ़ेगा। आपकी संतान को भी इस गोचर का लाभ इस समय नहीं मिलेगा। दांपत्य जीवन में जरूर यह गोचर अनुकूल परिणाम प्रदान करेगा। रिश्तो में तनाव कम होगा। व्यापार के दृष्टिकोण से ठीक ही रहेगा यदि आप अविवाहित हैं तो यह गोचर आपके विवाह के योग भी बन सकते हैं।

उपायः गुरुवार के दिन पुखराज रत्न को सोने की अंगूठी में जड़वा कर तर्जनी अंगुली में धारण करें।

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बॉडी में इस विटामिन की कमी से कोरोना होने का खतरा !

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कोरोना वायरस का प्रकोप हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। भारत में इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 1  लाख 38  हजार के करीब पहुंच चुकी है, जबकि मरने वालों का आंकड़ा 2 हजार से अधिक हो गया है। अमेरिका, इंग्लैंड, इटली समेत दुनिया के तमाम देश इस बीमारी का इलाज ढूंढ़ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई भी पुख्ता इलाज सामने नहीं आ पाया है। इस बीच एक अध्ययन में ये बात सामने आई है कि जिन देशों में विटामिन डी की कमी थी, वहां कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की संख्या अधिक थी। ऐसे हमारे एक्सपर्ट डॉक्टर सुभाष सी पांडे ने बताया कि कितना जरूरी है हमारे लिए विटामिन डी।

शोध में ये बात आई सामने
इस शोध के अनुसार इटली और स्पेन जैसे देशों में विटामिन डी का औसत स्तर यूरोप के अन्य उत्तरी देशों की तुलना में बहुत कम था। इन दोनों ही देशों में कोविड-19 से हुई मौतों का आंकड़ा काफी अधिक था। शोधकर्ताओं के अनुसार इन देशों में मृत्यु दर इतना अधिक इसलिए था क्योंकि दक्षिणी यूरोप में लोग, खासकर बुजुर्ग सूरज की रोशनी में नहीं बैठते हैं। वहीं, स्किन पिगमेंटेशन भी शरीर में प्राकृतिक रूप से विटामिन डी को बनने से रोकती है। ये शोध यूरोप के 20 देशों में कोरोना वायरस के मामले और मृत्यु दर पर किया गया था। यूनाइटेड किंगडम के एंजलिया रस्किन यूनिवर्सिटी और क्वीन एलिजाबेथ हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों द्वारा इस शोध का नेतृत्व किया गया था।

 

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“बिहार का जिला सिवान जहां लोग सोनू सूद की मूर्ति बनवाने की तैयारी में हैं

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     बिहार का जिला सिवान जहां लोग सोनू सूद की मूर्ति बनवाने की तैयारी में हैं

कोरोना वायरस लगातार देश में पांव पसार रहा है. इसकी दहशत को देखते हुए सरकार  ने 31 मई तक लॉकडाउन लागू कर रखा है. लॉकडाउन  के चलते मजदूरों को सबसे ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं. प्रवासी मजदूर लगातार सरकार से अपने गांव में वापस जाने की गुहार लगा रहे हैं. इसी बीच बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद संकट के इस समय में मसीहा बनकर सामने आए हैं और लोगों की मदद कर रहे हैं. लोग ट्विटर के जरिए भी सोनू सूद से सहायता मांग रहे हैं, जिसका एक्टर पूरा रिस्पांस दे रहे हैं. 

संकट के समय में सोनू सूद  के इस काम की चारों तरफ सराहना हो रही है. हर कोई एक्टर की दरियादिली का कायल हो गया है. लोग लगातार सोशल मीडिया के जरिए उनके तारीफ कर रहे हैं. कोई सोनू के लिए कविता लिख रहा है, तो कोई उन्हें भगवान का दर्जा दे रहा है. अब हाल ही में एक शख्स ने सोनू सूद की नेकदिली से खुश होकर ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने बताया की बिहार के सिवान जिले में उनकी मूर्ति बनवाने की लोग तैयारी कर रहे हैं.

शख्स ने ट्वीट करते हुए सोनू सूद  को टैग किया और लिखा, “बिहार का जिला सिवान जहां लोग आपकी मूर्ति बनवाने की तैयारी में हैं. सलाम सर बहुत-बहुत प्यार आपको.” शख्स के इस ट्वीट का जवाब देते हुए सोनू सूद ने लिखा, “भाई उस पैसे से किसी गरीब की मदद करना.” सोनू सूद की इस स्वार्थहीन सहायता की लोग दिल से तारीफ कर रहे हैं और एक्टर के इस ट्वीट पर खूब रिएक्ट भी कर रहे हैं. 

 

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थायरॉयड की वजह से बढ़ता है वजन ,जानें क्या है सच ?

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आपने कई बार ये बात नोटिस की होगी कि स्वस्थ और संतुलित भोजन करने और रोजाना व्यायाम करने के बावजूद अचानक से आपका वजन तेजी से बढ़ने लगता है. खासकर अगर आप महिला हैं तो इस तरह के मामले में आपको अपने शरीर में थायरॉयड के लेवल को चेक करवाना चाहिए. क्योंकि अगर शरीर में थायरॉयड का लेवल कम हो जाए अचानक से वजन बढ़ने लगता है. हर साल 25 मई को वर्ल्ड थायरॉयड डे मनाया जाता है. दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग थायरॉयड बीमारी से पीड़ित हैं. डॉक्टरों की मानें तो हर 10 में से 1 महिला को हाइपोथायरॉयडिज्म यानी थायरॉयड हार्मोन की कमी की समस्या है.

सबसे पहले आखिर थायरॉयड है क्या इसकी बात करते हैं. शरीर में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि, तितली के आकार की ग्रंथि है जो हमारे गले में कंठ के ठीक नीचे स्थित होती है. यह ग्रंथि शरीर में दो तरह के हार्मोन का निर्माण करती है- टी3 (थाइरॉक्सिन) और टी4 (ट्रायोडोथाइरोनिन) और टीएसएच यानी थायरॉयड स्टिमुलेटिंग हार्मोन मेंनटेन करके रखता है.

थायरॉयड ग्रंथि शरीर के कई तरह के कार्यों को नियमित बनाए रखने में मदद करती है. लिहाजा अगर शरीर के इस अंगों में किसी तरह की गड़बड़ी हो जाए तो शरीर का सिस्टम सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाता. थायरॉयड बीमारी आमतौर पर 2 तरह से होती है- हाइपोथायरॉयडिज्म जहां थायरॉयड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है और हाइपरथायरॉयडिज्म जहां थायरॉयड हार्मोन का अत्यधिक उत्पादन होने लगता है. रिपोर्ट्स की मानें तो वैसे लोग जो हाइपोथायरॉयडिज्म बीमारी से पीड़ित होते हैं, उनमें अचानक वजन बढ़ने की समस्या दिखने लगती है. आगे पढ़ें कि कैसे, थायरॉयड आपके वजन को प्रभावित करता है.

थायरॉयड और वजन के बीच क्या है कनेक्शन?

थायरॉयड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार माना जाता है. शरीर के मेटाबॉलिज्म को मेटाबॉलिक रेट के तौर पर काउंट किया जाता है. यह वह दर है, जिसमें आपका शरीर कितनी ऊर्जा खर्च करता है या कितनी कैलोरी बर्न करता है. आराम करते वक्त भी हमारा शरीर कैलोरीज बर्न करता है, क्योंकि आराम करते वक्त भी शरीर के फंक्शन को जारी रखने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है.इसे बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) कहते हैं.

इस बारे में अब तक हो चुके अध्ययनों की मानें तो जब भी शरीर में थायरॉयड हार्मोन का लेवल कम होने लगता है शरीर में बीएमआर कम हो जाता है और जब थायरॉयड हार्मोन का लेवल बढ़ता है तो बीएमआर अधिक हो जाता है. जब भी शरीर में बीएमआर अधिक हो जाता है तो यह शरीर की जमा करके रखी हुई कैलोरीज का, सेवन की गई कैलोरीज की तुलना में ज्यादा तेजी से इस्तेमाल करने लगता है, जिस कारण व्यक्ति की चर्बी समाप्त होने लगती है और वह एकदम दुबला-पतला हो जाता है.

हाइपोथायरॉयडिज्म के कारण बढ़ता है वजन

हाइपोथायरॉयडिज्म के मामले में शरीर में सामान्य मात्रा में थायरॉयड हार्मोन की कमी होने लगती है. यह हार्मोन शरीर की विभिन्न क्रियाओं को करने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. साथ ही जब बीएमआर कम होने लगता है तो शरीर में कैलोरीज के बर्न होने की क्रिया भी धीमी हो जाती है, जिससे व्यक्ति का वजन तेजी से बढ़ने लगता है.

साथ ही कई रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आयी है कि हाइपोथायरॉयडिज्म के मरीजों में अतिरिक्त वजन बढ़ने की समस्या इसलिए भी होती है, क्योंकि शरीर में नमक और पानी का अतिरिक्त संग्रहण होने लगता है. हाइपोथायरॉयडिज्म से पीड़ित मरीज में कई और लक्षण भी नजर आते हैं. जैसे- हद से ज्यादा ठंड लगना, जोड़ों में लगातार दर्द रहना, आलस और सुस्ती महसूस होना आदि. हालांकि, वजन अचानक से जरूर बढ़ने लगता है लेकिन बहुत ज्यादा नहीं बढ़ता.

हाइपोथायरॉयडिज्म के इलाज से वजन घटाने में मिलेगी मदद

रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आयी है कि हाइपोथायरॉयडिज्म से पीड़ित मरीज जब एक बार अपनी थायरॉयड की दवाइयां लेना शुरू कर देता है और डॉक्टर द्वारा बताए गए डाइट और एक्सरसाइज के रूटीन को फॉलो करने लगता है तो कम समय के अंदर ही वह व्यक्ति अपने पहले वाले शेप में वापस आ जाता है. अगर दवाइयों का सेवन करने के बाद भी वजन लगातार बढ़ता रहे तो इसका मतलब है कि वजन बढ़ने का कारण सिर्फ थायरॉयड बीमारी नहीं बल्कि कुछ और भी है.

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