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मोदी हैं तो मुमकिन है:पाम्पियो :अमेरिकी विदेश मंत्री

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सम्पादकीय ,,,,,

मोदी हैं तो मुमकिन है

           
                भारत दौरे से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो बोले- मोदी हैं तो मुमकिन है,हालाँकि अमेरिकियों पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता है मगर फिर भी जो कहा उसके कुछ मायने लगाए जा सकते हैं अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा कि कुछ हफ्ते पहले 600 मिलियन भारतीयों ने नरेंद्र मोदी को विशाल जनादेश दिया था. 1971 के बाद से कोई भी भारतीय पीएम बहुमत के साथ दोबारा पीएमओ में नहीं लौटा लेकिन नरेंद्र मोदी ने ‘शानदार’ जीत हासिल की.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू अमेरिका पर भी चल गया. इसी महीने भारत के दौरे से पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने दोनों देशों में और भी अच्छे रिश्ते की उम्मीद जताते हुए कहा कि मोदी है तो मुमकिन है. कुछ हफ्ते पहले 600 मिलियन भारतीयों ने मोदी को विशाल जनादेश दिया था. 1971 के बाद से कोई भी भारतीय पी एम बहुमत के साथ दोबारा पीएमओ में नहीं लौटा, लेकिन मोदी ने ‘शानदार’ जीत हासिल की.
               इसके बाद पोम्पियो इस महीने के आखिर में कोरिया में परमाणु निरस्त्रीकरण पर चर्चा करने के लिए जापान और दक्षिण कोरिया का दौरा करेंगे. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, विभाग के प्रवक्ता मॉर्गन ओर्टागस ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पोम्पियो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से जी-20 शिखर सम्मलेन से इतर मिलेंगे. यह सम्मेलन जापान के ओसाका में 28-29 जून को होगा. माइक पॉम्पियो ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी कैंपेनिंग में कहा था- मोदी है तो मुमकिन है और उन्होंने इसे सच कर दिखाया. अब भारत और अमेरिका के बीच संभावनाओं के विस्तार की तरफ हम देख रहे हैं. माइक पॉम्पियो ने ये बातें बुधवार को यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल समिट में कही.
 

             अमेरिकी विदेश मंत्री पॉम्पियो की इस महीने भारत यात्रा प्रस्तावित है. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से उनकी मुलाकात होनी है. पोम्पियो का मानना है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच बड़े मुद्दों और विचारों पर चर्चा होगी. जिससे द्विपक्षीय रिश्तों को नया आयाम मिलेगा. बीते दिनों में भारत और अमेरिका के सम्बन्ध लगातार घनिष्ट होते जा रहे हैं। अमेरिका ने भारत को द्विपक्षीय व्यापार के मामले में नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के सदस्य देशों के बराबर का दर्ज़ा दिया था ।अमेरिका के इस फैसले का भारत को सबसे बड़ा फ़ायदा ये होन था कि उच्च तकनीकी वाले अमेरिकी रक्षा उपकरण और हथियार आदि आसानी से हासिल हो सकेंगे। जिन देशों को अमेरिका ने एसटीए-1 (पहले स्तर का स्ट्रैटजिक ट्रेड ऑथोराइज़ेशन) का दर्ज़ा दिया हुआ है, उन्हें इस नियंत्रण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया से छूट मिल जाती है। भारत को भी यह दर्ज़ा मिल चुका था इसलिए वह भी इस छूट का हक़दार हो गया था । सख़्त नियंत्रण वाले उत्पाद भी मिल सकते थे – कई ऐसे ग़ैर-रक्षा उत्पाद भी अमेरिका से सहज तौर पर मिल सकते थें जिनके निर्यात पर वहां सख़्त नियंत्रण रखा जाता है। सिर्फ कड़ी लाइसेंसिंग प्रक्रिया के तहत इन उत्पादों का निर्यात किया जाता है। इंडो-पैसिफिक (भारत-प्रशांत क्षेत्र) बिज़नेस फोरम की बैठक में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने भारत को मिले एसटीए-1 दर्ज़े की पुष्टि की थी और इसकी अहमियत भी बताई थी । अमेरिका ने भारत को एसटीए- 1 का दर्जा देकर चीन को दिया था  बड़ा झटका ,अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का भारत को अपने सहयोगी देशों के बराबर एसटीए- 1 ट्रेडिंग स्टेटस का दर्जा दे दिया था । यह चीन के लिए करारा तमाचा था जो परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की एंट्री की राह में बार-बार रोड़े अटकाता रहा है।मगर भारत और रूस के बढ़ते सामरिक रिश्तों के वजह से अमेरिकी प्रशासन नाराज है और भारत का GSP दर्जा ख़त्म करने पर अड़ गया है,अमेरिका की ट्रंप सरकार भारत से जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस यानी जी एस पी का दर्जा ख़त्म करने के फैसले को वापस नहीं लेगी.अमेरिका की ट्रंप की सरकार ने कहा है कि वह भारत को मिले जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (जीएसपी) दर्जे को समाप्त करने के अपने निर्णय से पीछे हटने वाली नहीं है.

“राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने बीते 4 मार्च को इस बात की घोषणा थी कि जल्द ही भारत को जीएसपी कार्यक्रम से बाहर कर दिया जाएगा. इसके लिए भारत को 60 दिनों का नोटिस दिया गया था. नोटिस की अवधि 3 मई को समाप्त हो गई. अब इस संबंध में किसी भी समय औपचारिक अधिसूचना जारी की जा सकती है”

 
अमेरिका के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछले एक साल से भारतीय समकक्षों के साथ जारी बातचीत के बाद अंततः मार्च में हमें यह घोषणा करनी पड़ी कि भारत को अब जीएसपी के तहत मिलने वाले लाभ से वंचित रखा जाए.’’ अधिकारी के मुताबिक निलंबन अब तय है. उन्‍होंने कहा, ”अब काम यह है कि हम आगे कैसे बढ़ते हैं. आगे की राह तलाशने के लिये हम नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार के साथ किस तरह से काम कर पाते हैं?’’अगर इस बात को सही मानें तो साफ़तौर पर अमेरिका भारत से कुछ ज्यादा  चाहता है वह क्या चाहता है ?ये सारी चीजें अब धीरे धीरे साफ़ होंगी,,,,,,
 
जीएसपी खत्‍म होने का मतलब क्या हैं ?
 
जीएसपी खत्म होने का मतलब यह हुआ कि भारत अब जिन प्रोडक्ट को अमेरिका में बेचेगा उस पर वहां की सरकार टैक्स लगाएगी. अब तक भारत बिना टैक्स के कुछ प्रोडक्ट का निर्यात करता है. अमेरिका के इस कदम को द्विपक्षीय रिश्तों के लिहाज से बड़ा झटका माना जा रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के केमिकल्स और इंजिनियरिंग जैसे सेक्टरों के करीब 1800 से ज्यादा छोटे-बड़े प्रोडक्ट पर जीएसपी का फायदा मिलता है. मतलब यह है कि भारतीय बाजार से ये प्रोडक्ट अमेरिकी बाजार में बिना किसी टैक्स या मामूली ड्यूटी चार्ज के पहुंचते हैं. जाहिर सी बात है कि इन प्रोडक्ट पर अब टैक्स लगाना भारत के लिए एक झटका है. जानकारी हो कि भारत जीएसपी के तहत अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर (करीब 40 हजार करोड़ रुपये) के सामानों का निर्यात करता है.इधर मोदी के जबरदस्त विजय के बाद अमेरिकी प्रशासन थोड़ा जरूर पड़ा है शायद इसीलिए पंपियों ने कहा है की मोदी है तो मुमकिन है,क्यों कि देर सबेर अमेरिका को भारत की जरूरत पड़ने ही वाली  हैदक्षिण एशिया में जिस तरह की भौगोलिक स्थिति है और जो दुनिया में व्यापार की स्थिति है और जिस तरह सेअमेरिका चीन से ट्रेड वार लड़ रहा है वो भारत के बिना संभव नहीं,वैसे भारतीय कूटनीतिज्ञों ने भी अमेरिका के नाक में है क्युकी रूस से रक्षा सौदों के पश्चात अमेरिका खासा नाराज था बहरहाल मोदी है तो कुछ भी मुमकिन है

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मोदी का गांधीवाद ?

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मोदी का गांधीवाद ? 

आइये जाने मोदी का गाँधीवाद  ?

भारतीय जनता पार्टी और आर एस एस के इतिहास पर गौर करें तो पाते हैं कि उसकी विचार धरा को स्थापित करने में वीरसावरकर  और दीन दयाल उपाध्याय सर्व प्रमुख रहे हैं  ,,,,,

सावरकर ने भारत के एक सार के रूप में एक सामूहिक “हिंदू” पहचान बनाने के लिए हिंदुत्व का शब्द गढ़ा ,,,,भाजपा लगातार इसी मार्ग पर चल भी रही है,मगर भारत में गैर हिन्दू भी बडी मात्रा में हैं, ऐसे में इस लाइन पर चलकर मोदी जी थोड़े असहज भी हो सकते हैं,हालाँकि मोदी जी की छवि तीसरे पंक्ति के हिंदुत्व वादी बड़े नेता की रही है,यानि वीर सावरकर (पहले वीर सावरकर फिर आडवाणी जी और उनके बिरसा के रूप में मोदी हुए ,इसकी अगली पंक्ति में योगी आदित्य नाथ हुए) के वे सीधे उत्तराधिकारी हैं ,,,,,

इसी तरह मोदी जी को दीनदयाल का एकात्मवादी राजनीतिक दर्शन भी विरासत में मिला जिस पर वे और पूरी भाजपा चलती आयी है,,,दीनदयाल  उपाध्याय जनसंघ के पितृ पुरुष हैं,,,, जिन्होनें भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद नामक विचारधारा दी।वे एक समावेशित विचारधारा के समर्थक थे,जो एक मजबूत व सशक्त भारत चाहते थे,उनका विचार था कि आर्थिक विकास का मुख्य उद्देश्य सामान्य मानव का सुख है।“ भारत में रहने वाला और इसके प्रति ममत्व की भावना रखने वाला मानव समूह एक जन हैं। उनकी जीवन प्रणाली, कला, साहित्य, दर्शन सब भारतीय संस्कृति है। इसलिए भारतीय राष्ट्रवाद का आधार यह संस्कृति है। इस संस्कृति में निष्ठा रहे तभी भारत एकात्म रहेगा .”मोदी ने इस लाइन पर भी चलकर लगातार पहले  गुजरात में फिर देश में नारा दिया “सबका साथ सबका विकास” ये एक समावेशी विकास की कोशिश थी हालाँकि 2014 की  इसी राजनैतिक नारे से शुरुआत हुई फिर राजनीति में गाय,गोबर, गौरक्षक, नोट बंदी और आधे अधूरे तैयारी से शुरू किये जी एस टी के मारे रास्ता राजनीति अपना रास्ता भटक गयी,फिर आखिर में मोदी सावरकर के मूल “राष्ट्रवाद और कट्टर हिंदुत्व” की ओर लौटे,जीत भी हासिल की,पर मोदी को मालूम हैं कि वीर सावरकर और दीन दयाल उपाध्याय का प्रभाव भारत में तो था मग़र उन्हें भारत को विश्व गौरव और खुद को वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना है तो कुछ बड़ा करना होगा ये बड़ा नाम पटेल और गाँधी हो सकते हैं ,,, उन्होंने देश के उन नामों का बिरसा बनने की कोशिश जारी रखी जिन्हें देश के अंदर और बाहर बहुत सम्मान प्राप्त है, इनमें सरदार पटेल और फिर महात्मा गाँधी थे ,हालाँकि कभी कभी भाजपा नेता गाँधी नेहरू विरासत को कोस भी लेते हैं,मगर मोदी जी ने यह नहीं किया ,,,पिछले चुनाव के दौरान ही उन्होंने गांधी जी के 150 जन्म दिवस को बड़े वैश्विक मंच पर जोर शोर से मनाने की घोषणा की,,, और दूसरी तरफ पटेल की शानदार विशाल मूर्ति गुजरात में स्थापित की ,बहुतायत में राजनेता इसे मोदी जी की राजनीतिक बुद्धिमत्ता मान सकते हैं, मगर ये इसमें वृहद  दूरदर्शिता भी है,,,,,

महात्मा गांधी का राजनीतिक दर्शन,तब से लेकर अब तक बड़ा सामयिक रहा परिणामतः मोदी जी को शांति और अहिंसा के मार्ग पर ही चलना सहज होगा ,,,मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में मोदी महात्मा गांधी केउत्तराधिकारी  के रूप में स्थापित होना चाहेंगे, जिसकी दो वजह है, पहली देश के अंदर महात्मा गांधी सर्व स्वीकार्य हैं, दूसरा देश के बाहर पूरी दुनिया में सत्य अहिंसा के पुजारी के रूप में महात्मा गांधी एक वैश्विक राजनीतिक और सामाजिक दार्शनिक के रूप में एक सदी से ज्यादा स्थापित हैं, ऐसे में मोदी के लिए गांधीजी सचमुच एक राजनैतिक आदर्श के रूप में साबित हो सकते हैं, इसके मायने बहुत साफ हैं कि आने वाले दिनों में मोदी के अंदर उसी तरह के  परिवर्तन भी देखने को मिल सकते हैं असल में यही है,,,, मोदी का गांधीवाद है ,,,,,उल्लेखनीय है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा के साथ उन्होंने अपने आप को भी लौह पुरुष के रूप में स्थापित कर दिया है, बालाकोट से लेकर, अनुच्छेद 370 पर दिलेरी से कार्यवाही कर मोदी जी ने उसी चरित्र का अनुगमन किया ,अब मोदी 2 अक्टूबर से साल भर तक चलने वाले गाँधी जी की 150 वीं जयंती मना रहें हैं, ये भी बड़ी दूर दर्शिता होगी,इस रूप में वे दुनिया भर में गाँधी के प्रति कृतग्यता और अपना विनयी व्यक्तित्व बना सकेंगे, ध्यान रहे इसी दूर दृष्टी के कारण मोदी जी आज पुरे भारत के सबसे बड़े नेता के रूप में खुद को स्थापित करने में सफल और भाजपा को सत्ता दिलाने में कामयाब रहे ,,,,,वंदे मातरम

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हरतालिका तीज कब है ? एक या दो सितंबर को ?

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हरतालिका तीज का व्रत कब करें, इसे लेकर उलझन है। दरअसल 1 सितंबर को सुबह में द्वितीय तिथि की भी मौजूदगी के कारण उलझन की स्थिति बन गई है।जन्माष्टमी के बाद अब हरतालिका तीज का व्रत कब करें, इसे लेकर उलझन की स्थिति बन गई है। बिहार सहित झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में किये जाने वाला यह व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। यह व्रत मुख्यतौर पर शादीशुदा महिलाएं करती हैं और अपने पति के लिए लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं।
महिलाएं इस दिन नये वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और श्रृंगार आदि कर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। हालांकि, इस बार यानी साल 2019 में इसे मनाने की तिथि को लेकर उलझन जैसी स्थिति पैदा हो गई है। हरतालिका तीज-2019 व्रत की तारीख इस बार 1 सितंबर है या फिर 2 सितंबर, इसे लेकर जानकारों और आम लोगों में मतभेद है।

हरतालिका तीज कब है, एक या दो सितंबर?

हरतालिका तीज को लेकर उलझन दरअसल 1 सितंबर को सुबह में द्वितीय तिथि की भी मौजूदगी के कारण शुरू हुई है। चित्रा पक्षीय पंचांग के अनुसार द्वितीय तिथि 1 सितंबर को सुबह 8.27 बजे तक है। इसके बाद तृतीय तिथि शुरू हो रही है और यह अगले दिन यानी 2 सितंबर को सुबह 8.58 में खत्म होगी। ऐसे में इसे 1 सितंबर को मनाया जाना चाहिए। वहीं, ग्रहलाघवी पद्धति से निर्मित पंचांग के अनुसार हरतालिका तीज 2 सितंबर को मनाया जाना चाहिए।
कुछ पंडित 1 सितंबर को तीज के लिए शुभ मान रहे हैं क्योंकि अगर 2 सितंबर को तीज की पूजा की जाएगी, तब चतुर्थी तिथि होगी। कुछ जानकारों का यह भी मत है कि तीज का व्रत 2 सितंबर को ही किया जाए लेकिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा सुबह-सुबह की कर ली जाए। ऐसी उलझन में बेहतर है कि आप भी अपने पुरोहित से इस बारे में स्थिति स्पष्ट कर लें। वैसे अगर आप 1 सितंबर को हरतालीका तीज कर रही हैं तो इसके लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6.05 बजे से रात 8.23 बजे तक का होगा।
गौरतलब है कि हरतालिका तीज व्रत के दौरान महिलाएं करीब 24 घंटे और कई मुहूर्त और तिथि के मुताबिक उससे भी ज्यादा वक्त के लिए निर्जला रहती हैं। यही नहीं, किसी भी प्रकार का अन्न भी ग्रहण नहीं करती हैं। मान्यताओं के मुताबिक माता पार्वती ने सबसे पहले हरतालिका तीज का व्रत किया था। इसके फलस्वरूप उन्हें भगवान शंकर पति के रूप में प्राप्त हुए।

1 सितम्बर रविवार को ही क्यों है?

1 सितंबर रविवार को सुबह 8.27 बजे से तृतीया तिथि शुरू हो जाएगी और 2 सितंबर सोमवार को ब्रह्ममुहूर्त में 4.57 बजे खत्म होगा।

अर्थात

2 तारीख को सूर्योदय से लगभग 1 घण्टा पहले ही तृतीया तिथि समाप्त होकर चतुर्थी लग जायेगा।

1 तारीख को तृतीया तिथि के साथ हस्त नक्षत्र भी है। हस्त नक्षत्र की तीजा शुभ मानी जाती है।

इसलिये हरतालिका तीजा का व्रत 1 तारीख को ही रखना है

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निर्मला सीतारमण ने कीं आर्थिक सुधारों से जुड़ी घोषणाएँ

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कीं आर्थिक सुधारों से जुड़ी  घोषणाएँ

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सुधारों का एलान करते हुए कहा कि यह सतत प्रक्रिया है और जारी रहेगी। उन्होंने कई नए कदमों का एलान करते हुए कहा कि व्यापार को और सुगम बनाने के लिए कई स्तर पर कदम उठाए जाएँगे। उन्होंने जीएसटी को और आसाना बनाने और कर प्रणाली को दुरुस्त करने पर भी ज़ोर दिया। 
  • वित्त मंत्री ने आर्थिक मंदी की बात कबूल करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में हर अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है। विकासशील देश ही नहीं, विकिसत देश भी इसकी चपेट में हैं। पूरी दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद बढ़ने की दर अब 3.2 प्रतिशत कर दी गई है। हमने ही नहीं, कई संगठनों और संस्थानों ने कहा है कि पूरी दुनिया में माँग कम हो रही है। 
  • निर्मला सीतारमण ने एक और घोषणा करते हुए कहा कि कॉरपोरेट घरानों को सामाजिक दायित्वों का पालन करना चाहिए, पर इसे अपराध नहीं माना जाएगा। जो लोग इसका उल्लंघन करेंगे, उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामला नहीं चलेगा, पर उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 
  • वित्त मंत्री ने कहा कि श्रम क़ानूनों को और उदार बनाया जाएगा। उन्होंने इसका एलान करते हुए कहा कि तय समय के लिए लोगों को नौकरियों पर रखने की छूट दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि कंपनियों को यह छूट मिलेगी कि वे चाहें तो पूरे समय के लिए नौकरी पर न रख कर तय समय के लिए ही लोगों को रखें। इससे कंपनियों को ‘हायर और फ़ायर’ यानी मन मुताबिक नौकरी पर रखने और नौकरी से निकालने की छूट मिल जाएगी।
  • सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों से कैपिटल गेन्स टैक्स वापस लेने की घोषणा कर दी है। इसकी घोषणा बजट में की गई थी, जिसके बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि हम प्री-फिल्ड आईटी रिटर्न की तरफ बढ़ रहें  है। हमारी अर्थव्यवस्था का मोमेंटम खत्म नहीं हुआ है। हमारे लिए ग्रोथ का एजेंडा सबसे ऊपर है। इसके साथ ही ESIC मे भी राहत का एलान किया है। अधिग्रहण-विलय के लिए आसानी से अनुमति मिल रही है। इसके साथ ही डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स में भी संशोधन किया गया है।
  • सभी टैक्स असेसमेंट का काम तीन महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। स्टार्टअप रजिस्टर्ड कराने के दौरान इनकम टैक्स का सेक्शन 56 2(b) लागू नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने स्टार्टअप्स के लिए एंजेल टैक्स खत्म कर दिया है।
  • बैंकिंग सेक्टर के लिए राहत का एलान करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों के लिए 70,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इससे बैंक पांच लाख करोड़ रुपये के लोन बांट पाएंगे। उन्होंने कहा बैंक अपने एमसीएलआर में कटौती करेंगे ताकि रेपो रेट में कमी का फायदा ग्राहकों को मिल सके। बैंकों ने फैसला किया है कि वे रेपो-रेट से लिंक्ड प्रोडक्ट्स लॉन्च करेंगे। सीतारमण ने कहा कि सरकार बैंक लोन बंद होने के 15 दिनों के भीतर डॉक्यूमेंट ग्राहकों को वापस करेंगे।
2014 से सरकार आर्थिक सुधार पर काम कर रही है। सरकार के एजेंडे में अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार करने पर काम हो रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि चीन और अमेरिका में व्यापार युद्ध का असर देखने को मिल रहा है। विश्व भर की सभी जीडीपी की ग्रोथ इस साल 3.2 फीसदी रहने की संभावना है, और इसमें भी गिरावट हो सकती है,,,,

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