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ज्योतिष - वास्तु

मासिक राशिफल – जुलाई, 2019

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मासिक राशिफल – जुलाई, 2019

 

मासिक राशिफल – जुलाई, 2019

मेष –

यह माह आपके लिए बहुत सारे शुभ परिणाम वाला साबित होगा। यदि आपकी योजना अपने परिजनों के लिए कुछ विशेष करने की है तो आपका प्रयास रंग लाएगा। इस माह आपके लिए गए प्रयास से आपको परिवार एवं दोस्तों की बीच यश और धन दोनो दिलायेंगा.. यदि कोई पुरानी बीमारी है तो उसमें भी आपको कमी होती नज़र आएगी। लेकिन प्रेम-प्रसंगों के लिए यह माह अच्छा नही रहेगा क्योंकि समय की कमी से पार्टनर नाराज चलेगा। यदि आप नौकरी-पेशा हैं और कुछ बदलाव करने की सोच रहे हैं, तो बेहतरी के योग बन रहे हैं। हाँ, व्यवसायियों को कुछ एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ सकती है, यह माह विद्यार्थियों को भी शुभ परिणाम मिलते रहेंगे।

उपायः कन्याओं की सेवा करना आपके एवं दुर्गा कवच का पाठ करना आपके लिए शुभ रहेगा।

वृष –

इस माह का प्रथम भाग आपके लिए काफ़ी अच्छा रहेगा। आपकी बेहतरीन योजनाएँ आपको सफलता दिलाती रहेंगी। घर परिवार में भी शुभ सूचना प्राप्त होगी। काम धंधे में अनुकूलता बनी रहेगी। आर्थिक स्थिति भी संतोषप्रद रहने वाली है। पहला भाग इस मामले में मददगार सिद्ध हो सकता है। विद्यार्थी भी अपनी सफलता पर खुश होंगें लेकिन दूसरे भाग में भागदौड़ करना जीवन की डगर कुछ कठिन हो सकती है। एडमिशन लेने अथवा उसके कारण यात्राओं के कारण आर्थिक कठिनाइयों के कारण तनाव और उसके कारण स्वास्थ्य दोनों का ख्याल रखना होगा। वैसे हर मामले में सावधानी से काम लेना होगा, साथ ही निवेशादि सावधानी पूर्वक करना उचित रहेगा..

उपायः गरीबों को जरूरत के अनुसार दवाईयों का दान करना एवं शिवजी के मंत्रों का जाप करना शुभ होगा।

मिथुन –

इस माह पारिवारिक जीवन की बात करें, तो शनि प्रभाव के कारण कुछ छोटी-मोटी विसंगतियाँ सम्भव हैं। लेकिन कुल मिलाकर पारिवारिक शांति बनी रहेगी। यह माह स्वास्थ्य के लिहाज़ से भी अच्छा रहने वाला है। यदि घर या गाड़ी ख़रीदने के मूड में हैं तो कश्मकश की स्थिति से बाहर निकलिए और इस माह निर्णय लेकर उसे कर डालें.. आप अपने काम-धंधें में कुछ विशेष करने वाले हैं, जोकि आपके लिए अगले माह के प्रथमभाग में दिखाई देगा… पदोन्नति की भी सम्भावना है। लाभ के अवसर भी मज़बूत होंगे। सप्तम भाव में स्थित शनि के कारण ख़र्चे भी ज़बरदस्त होंगे। विद्यार्थियों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे।

उपायः मसूर की दाल और नारियल हनुमान में चढ़ाना आपके लिए शुभ रहेगा। साथ ही मंगलमंत्र का जाप करें…

कर्क-

कई मामलों में यह माह आपके लिए कमाल का रह सकता है। यदि आपकी उम्र विवाह की हो चली है, तो इस माह कहीं बात पक्की होने की स्थिति में पहुच सकती हैं। नौकरी में प्रमोशन की भी सम्भावनाएँ हैं। इस माह के अनुसार काम धंधे के सिलसिले में यात्राएँ होंगी, हालांकि कुछ यात्राएँ व्यर्थ की भी रह सकती हैं। इस माह धन की स्थिति बेहतर नज़र आ रही है, लेकिन आँख मूंद कर निवेश करना ठीक नहीं रहेगा। स्वास्थ में थोड़े बहुत उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए भी यह माह शुभ रहने वाला है।

उपायः सूर्य को अध्र्य देकर दिन की शुरूआत करें…आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें…

सिंह –

यह माह आपके लिए मिला-जुला रहेगा। माह के प्रथम भाग में आपको कुछ परेशानियों से रू-ब-रू होना पड़ सकता है। इस समय आप अपने परिजनों के किसी व्यवहार के चलते दुखी हो सकते हैं, बढ़ती जिम्मेदारी और कार्य का दबाव तनाव दे सकता है. सामाजिक क्षेत्र से अथवा राजनीति से जुड़े लोगों के लिए अनुकूल वातावरण का लाभ मिलेगा. अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधानी अपेक्षित है. छोटी-छोटी बातों पर क्रोध न करें. माह के प्रारंभ में यात्रा के कारण कार्य प्रभावित रहेगा. शिक्षार्थियों को ग्रहों की अनुकूलता का लाभ मिलेगा. भौतिक सुख में वृद्धि होगी. व्यवहार कुशलता से संबंधों को प्रगाढ़ बनाएंगे. कार्यक्षेत्र में अनुकूल स्थिति मन को प्रसन्न रखेगी. कार्य का दबाव और लगातार यात्रा से थकान और पेट की तकलीफ संभव.  लेकिन दूसरा भाग अपेक्षाकृत अच्छे परिणाम देगा। आपकी परेशानियाँ धीरे-धीरे कम होने लगेंगी और आप अपने कुछ विशेष योजनाओं के चलते परिस्थितियों पर नियंत्रण पा लेंगे। इस माह आप धर्म-कर्म में संलग्न होकर काफ़ी बेहतर अनुभव करेंगे।

उपायः गेहू को भिगाकर किसी गाय को खिलाना और मंगल के मंत्रों का जाप करना आपके लिए शुभ रहेगा।

कन्या –

इस माह आपके घर-परिवार के लोग भी ख़ुशहाल होंगे, लेकिन शनि की दृष्टि को देखते हुए स्वास्थ्य का ख़्याल रखना बहुत ज़रूरी होगा। माह के दृष्टिकोण से प्रेम या शादी और संतान सभी के लिए माह का पहला भाग काफी बेहतर रहने वाला है। काम धंधे व शिक्षा के लिए भी माह का पहला भाग शुभ है, लेकिन दूसरे भाग में हर मामले में सावधानी ज़रूरी होगी। आपके ख़र्चे बढ़ सकते हैं और स्वास्थ्य भी बीच-बीच में ढीला रह सकता है। अतः संयम और समझदारी से काम लेना ज़रूरी होगा।

उपायः नियमित रूप से पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना शुभ रहेगा। साथ ही शनि के मंत्रों का जाप करें..

तुला –

इस माह आप सही दिशा में कार्य करते हुए, न केवल अपने कामों को सही अंजाम तक पहुँचा पाएंगे, बल्कि मान-सम्मान और प्रशंसा भी प्राप्त करेंगे। कभी-कभार आपकी पार्टनरशीप जिसमें जीवनसाथी एवं आजीविका के भी साथी व्यवधान ड़ालने का कार्य कर सकते हैं, साथ ही निजी जीवन में भी समरसता की कमी देखने को मिल सकती है। लेकिन आप व्यवधानों को पार कर पाने में सफल रहेंगे। यह माह प्यार में सच्चाई और वफ़ा बहुत अच्छी होगी। यदि रुपया-पैसा, धन-दौलत आदि के बारे में बात की जाय तो यह सप्ताह बढ़िया रहने वाला है। हाँलाकि इस माह जो ग्रहों का संकेत है कि कुछ घरेलू उपकरण जैसे कि वॉशिंग मशीन और फ्रीज इत्यादि की मरम्मत पर कुछ ख़र्चे करने पड़ सकते हैं। अगर विद्यार्थियों की बात करें तो इस माह उन्हें भी कुछ अप्रत्याशित परिणाम देखेने को मिल सकते हैं।

उपायः गुरू मंत्रों का जाप करें, बड़ों का आर्शीवाद लेकर दिन की शुरूआत करें..

वृश्चिक-

यह माह काफ़ी बेहतर रहने वाला है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी प्रेम-प्रसंगों के लिए भी अनुकूल है, लेकिन प्रथम भाव में कुछ स्वास्थ्य सम्बंधी परेशानियाँ हो सकती है। कार्यक्षेत्र के लिए भी समय अच्छा है। आर्थिक मामलों में भी बेहतरी आने के योग हैं। जबकि विद्यार्थियों को मेहनत के बाद अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं। व्यावसायिक शिक्षार्थियों के लिए और अच्छा रहेगा। रोजगार क्षेत्र में कुछ विशेष सफलताओं के आसार बनेंगे. पुरानी सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त होगी. क्रोध पर नियंत्रण रखें क्योंकि यह आपके निकट संबंधों में कटुता ला सकता है. भावनात्मक रिश्तों एवं प्रयासरत् क्षेत्रों में मन उसके परिणाम के प्रति चिंतित होगा. जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें. माह के मध्य में शासन-सत्ता में आपकी पकड़ मजबूत होगी. कार्यक्षेत्र में अपनी बौद्धिक क्षमता का पूर्ण लाभ उठाएंगे. किसी महत्वपूर्ण उद्देश्य से की गई यात्रा में कठिनाइयां संभव. गलत एवं चापलूस प्रवृत्ति के लोगों से निकटता हानिकर हो सकती है. आवेश में कोई निर्णय न लें. आय में वृद्धि होगी.

उपायः राहु के मंत्रों का जाप करें और मांस मदिरा से परहेज करें तो व्यवधान दूर होंगे।

धनु –

यह माह अधिक अनुकूल नहीं है। आर्थिक मामलों कुछ अनावश्यक खर्च के कारण कठिनाई रह सकती है। आपको तो पता ही है कि अर्थव्यवस्था के बिगड़ने से कई चीज़ें प्रभावित होती हैं, अतः अनुकूल परिणाम पाने के लिए कठिन प्रयास करना पड़ेगा। आप ऐसा भी महसूस कर सकते हैं कि घर परिवार के लोग पहले जैसे नहीं रहे। इस अनुसार यह माह भी मन में असुरक्षा की भावना जाग सकती है जिससे स्वास्थ्य पर भी फ़र्क पड़ेगा। प्रेम संबंधों में भी असंतोष रह सकता है। लेकिन दूसरे भाग में आपकी मन की स्थिति बेहतर होने लगेंगी। आमदनी में सुधार होगा और विद्यार्थियों को भी अच्छे परिणाम मिलेंगे।

उपायः मूंग का दान गणेशजी के मंदिर में करना आपके लिए शुभ रहेगा। गणपति अर्थव शीर्ष का पाठ करना चाहिए।

मकर –

इस माह आपके द्वादश स्थान में स्थित शनि है, जिसमें भी षष्ठम में शनि दृष्ट राहु होने के कारण संतान, परिवार जिसमें विशेषकर के एजूकेशन से संबंधित कष्ट एवं सप्ताहांत में स्वास्थ्य कष्ट कार्य से संबंधित बाधाए और परिवार में विवाद की स्थिति बनी रह सकती है। रहेगा। शादी से संबंधित कार्य पूरी होने वाली है। व्यापारीगण अपने व्यापार-व्यवसाय को बढ़ाने के लिए धन ख़र्च करेंगे। कोई बेहतर योजना बनाकर आप कुछ नया कर सकते हैं। वरिष्ठ लोगों का सहयोग मिलेगा। यश लाभ के योग बन रहे हैं। बड़ो की सलाह पर अमल कर लेना चाहिए। इस माह राशिफल के अनुसार विद्य़ार्थियों को उनकी मेहनत के अनुसार फल मिलेगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से पेट विकार के कारण सिरदर्द, अपच अथवा नींद की तकलीफ हो सकती है…

उपायः तिल का दान करें एवं शनि के मंत्रों के जाप के साथ व्यवहार में नियंत्रित रखकर कार्य करें…

कुम्भ –

यह माह आपके लिए मिले जुले परिणाम देने वाला रहेगा। पहले भाग में परिजनों से कुछ मनमुटाव रह सकता है, इसके पीछे की वजह आपकी कटुभाषा भी हो सकती है, अतः जहाँ तक सम्भव हो मृदुभाषी बनने का प्रयास करें। ग्रहों के मुताबिक़ किसी पारिवारिक व्यक्ति के स्वास्थ्य को लेकर आप चिंतित रह सकते हैं। वैसे आपका स्वास्थ्य ठीक-ठाक रहने की उम्मीद है। कोर्ट-कचहरी से सम्बंधित कुछ मामलों में उलझाव रह सकता है। लेकिन दूसरे भाग में बेहतरी आएगी। वैवाहिक जीवन में ख़ुशहाली रहेगी। कार्यक्षेत्र में तरक़्क़ी होगी। आमदनी और विद्या में भी सुधार आएगा।

उपायः गाय को रोटी खिलाना और केतु मंत्र का जाप करना आपके लिए शुभ होगा।

मीन –

माह की शुरुआत काफ़ी बेहतर ढंग से होने वाली है। घर-परिवार में किसी का जन्म या जन्मदिन मनाने जैसे कोई शुभ कृत्य हो सकता है। कुछ सदस्यों का बरताव आपके मन को ठेस दे सकता है। साथ ही अपने आपको चोट मोच से बचाने का प्रयास रखना भी ज़रूरी होगा, साथ ही वाहन इत्यादि को भी मरम्मत से बचाने के लिए सावधानी से उपयोग करना होगा। वाहन आदि सावधानी से चलाएँ। प्रेम संबध के मामले में तो समय को अच्छा कहा जाएगा, लेकिन दाम्पत्य जीवन के लिए कम ठीक कही गई है; अतः इस समय भी प्यार और विश्वास की ज़रूरत बनी रहेगी। इस समय प्रयास करें तो बेहतर नौकरी मिल सकती है, लेकिन मेहनत और ज़िम्मेदारियाँ बढ़ सकती हैं। लाभ के बढ़ने के भी योग हैं। शिक्षा के लिए समय अनुकूल रहेगा, लेकिन दूसरे भाग में कुछ समस्याएँ सामने आ सकती हैं।

उपायः चावल, गुड़ या चने की दाल भेंट करें। दत्तात्रेय मंत्र का जाप करें…

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भगवान शिव के इन 5 मंदिरों में दर्शन के साथ, सावन महीने की करें शुरुआत

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”शि’ का अर्थ है ‘मंगल’ और ‘व’ कहते हैं दाता को, इसलिए जो मंगलदाता है, वही शिव है। शिव ब्रह्म रूप में शांत हैं, तो रुद्र रूप में रौद्र हैं। शिव हमारी प्रार्थनाएं सहजता से स्वीकार करते हैं पर शिव का मूल उद्देश्य हमें अपनी तरह सहज, सरस और सरल बनाना है। श्रावण में शिव अभिषेक कामनाओं की पूर्ति हेतु संपन्न किया जाता है, लेकिन वह शुष्क मन-प्राण को भी सरस कर देता है। मन को चंद्रमा नियंत्रित करता है, जो सोमवार के दिन का स्वामी है। इसलिए शिवलिंग अभिषेक सोमवार को अवश्य किया जाता है, क्योंकि मन को उत्फुल्लित करने का यह एक कारगर उपाय है। तो 17 जुलाई से सावन महीने की हो रही है शुरुआत। भारत में बने इन मंदिरों का दर्शन इस पावन महीने में होगा खास, जानेंगे इसके बारे में….

तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड

समुद्र तल से 3680मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर है। जो बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर के बीच में स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही अद्भुत है। हिमालय पर्वत की बर्फ से ढकी ऊंची चोटियां इसकी खूबसूरती में लगाती हैं चार चांद। तीर्थयात्रियों के साथ ही सैलानियों को भी ये जगह बहुत लुभाती है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर भगवान शिव के प्रिय ‘नंदी’ की मूर्ति विराजमान है। द्वार के दाईं ओर भगवान गणेश की मूर्ति है। मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी हुई है और आसपास कई छोटे मंदिर हैं।

जूनागढ़, भावनाथ तालेटी

जूनागढ़ सिर्फ गिर नेशनल पार्क के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि ये साधुओं का भी घर है जो सावन महीने और महाशिवरात्रि के मौके पर दर्शन के लिए भारी तादाद में आते हैं। इनके अलावा दुनिया के अलग-अलग कोनों से भी लोग मंदिर में जल चढ़ाने और पूजा-अर्चना करने आते हैं। शिवरात्रि में तो जूनागढ़ आकर यहां के कल्चर और साधुत्व से भी रुबरू होने का मौका मिलता है।

पशुपतिनाथ मंदिर, मंदसौर

मध्यप्रदेश के मंदसौर में बना ये मंदिर भारत का इकलौता पशुपतिनाथ का मंदिर है। जो नेपाल के पशुपतिनाथ से काफी मिलता-जुलता हुआ है और इसलिए ही इसका नाम पशुपतिनाथ पड़ा। चिकने चमकदार पत्थर से बनी हुई पशुपतिनाथ की प्रतिमा सवा सात फीट ऊंची है। शिवना नदी के तट पर बसे इस मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है। कहते हैं सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूरी पूरी होती है।

मुरुदेश्वर मंदिर, कर्नाटक 

भगवान शिव का एक नाम मुरुदेश्वर भी है। कंडुका पहाड़ी पर बना ये मंदिर तीनों तरफ से अरब सागर से घिरा हुआ है। मंजिल में 20 मंजिला गोपुरा बना हुआ है। 249 फुट लंबा दुनिया का सबसे बड़ा गोपुरा है। समुद्र तट के पास स्थित भगवान शिव का यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है और मंदिर परिसर में बने भगवान शिव की विशाल मूर्ति तकरीबन 123 फीट है।

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

भुवनेश्र्वर के सबसे बड़े मंदिरों से में एक है। जो कलिंग की वास्तुकला और मध्यकालीन ऐतिहासिक परंपरा का बेजोड़ नमूना है। मंदिर के अंदर भगवान विष्णु की भी प्रतिमा है। शिव से जुड़े हर एक त्यौहार में आप यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देख सकते हैं। लिंगराज मंदिर से होकर एक नदी गुजरती है जो कई तरह की शारीरिक बीमारियों को दूर करता है। सावन महीने में सुबह से ही भक्तगण महानदी से पानी भरकर पैदल चलकर मंदिर तक आते हैं।

 

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जानें गुरु पूर्णिमा का महत्व और उपासना का तरीका….

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आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, अतः इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है अतः इस दिन वायु की परीक्षा करके आने वाली फसलों का अनुमान भी किया जाता है. इस दिन शिष्य अपने गुरु की विशेष पूजा करता है और उसे यथाशक्ति दक्षिणा,पुष्प,वस्त्र आदि भेंट करता है.शिष्य इस दिन अपनी सारे अवगुणों को गुरु को अर्पित कर देता है, तथा अपना सारा भार गुरु को दे देता है. इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा.

कौन हो सकता है आपका गुरु :-मान्यतः हम लोग शिक्षा प्रदान करने वाले को ही गुरु समझते हैं परन्तु वास्तव में ज्ञान देने वाला शिक्षक बहुत आंशिक अर्थों में गुरु होता है. जन्म जन्मान्तर के संस्कारों से मुक्त कराके जो व्यक्ति या सत्ता ईश्वर तक पहुंचा सकती हो,ऐसी सत्ता ही गुरु हो सकती है. हिंदू धर्म में गुरु होने की तमाम शर्तें बताई गई हैं, जिसमें से प्रमुख 13 शर्तें निम्न प्रकार से हैं.

शांत,दान्त,कुलीन,विनीत,शुद्धवेषवाह,शुद्धाचारी,सुप्रतिष्ठित,शुचिर्दक्ष,सुबुद्धि,आश्रमी,ध्याननिष्ठ,तंत्र-मंत्र विशारद,निग्रह-अनुग्रह गुरु की प्राप्ति हो जाने के बाद प्रयास करना चाहिए कि उसके दिशा निर्देशों का यथा शक्ति पालन किया जाए.

  • कैसे करें गुरु की उपासना
  • इसके बाद उन्हें श्वेत या पीले वस्त्र दें.
  • यथाशक्ति फल,मिष्ठान्न दक्षिणा अर्पित करें.
  • गुरु से अपना दायित्व स्वीकार करने की प्रार्थना करें.
  • गुरु को उच्च आसन पर बैठाएं.
  • उनके चरण जल से धुलाएं और पोंछे.
  • फिर उनके चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित करें .
  • अगर आपके गुरु नहीं हैं तो क्या करें?
  • श्रीकृष्ण या शिव जी का ध्यान कमल के पुष्प पर बैठे हुए करें.
  • मानसिक रूप से उनको पुष्प,मिष्ठान्न, तथा दक्षिणा अर्पित करें.
  • स्वयं को शिष्य के रूप में स्वीकार करने की प्रार्थना करें.
  • हर गुरु के पीछे गुरु सत्ता के रूप में शिव जी ही हैं.
  • अतः अगर गुरु न हों तो शिव जी को ही गुरु मानकर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाना चाहिए.
  • श्रीकृष्ण को भी गुरु मान सकते हैं.

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आज गुरु पूर्णिमा के दिन हुआ था महर्षि वेदव्यास का जन्म , जानें उनसे जुड़ी ये खास बातें….

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”आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाए जाने के कई ऐतिहासिक पौराणिक कारण हैं। स्कन्द पुराण के अनुसार हजारों वर्ष पहले इसी तिथि पर आदि गुरु शिव ने सप्तऋषियों को ब्रह्म के बारे में ज्ञानोपदेश देना आरंभ किया था तबसे आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाने लगा। इसी तिथि को गौतम बुद्ध तथा जैन तीर्थंकर महावीर ने अपने प्रथम शिष्य बनाए और गुरु के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की। यह दिन बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी पवित्र है।

  • मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के दिन ही ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और 18 पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इस पर्व को गुरु व व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। हमें अपने गुरुओं को व्यास जी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित राजनाथ झा के मुताबिक सदियों से चली आ रही गुरु शिष्य की परंपरा का निवर्हन गुरु पूर्णिमा पर देखने को मिलता है। शिष्य देश-विदेश में कहीं भी हो इस मौके पर गुरु पूजन के लिए अवश्य पहुंचते हैं। राजधानी पटना के गुरु बलराम के शिष्य देशभर में हैं। पर गुरु पूर्णिमा पर उनके शिष्य गुरु पूजन को पटना स्थित मातृउदबोधन आश्रम जरूर पहुंचते हैं। हालांकि गुरु बलराम ब्रह्मलीन हो चुके हैं।  चार भागों में वेदों को विभक्त किया  महर्षि वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे।
  • हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास तीनों कालों के ज्ञाता थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर यह जान लिया था कि कलियुग में धर्म के प्रति लोगों की रुचि कम हो जाएगी। मनुष्य ईश्वर में विश्वास न रखने वाला, कर्तव्य से विमुख और कम आयु वाला हो जाएगा। एक बड़े और सम्पूर्ण वेद का अध्ययन करना उसके बस की बात नहीं होगी। इसलिये महर्षि व्यास ने वेद को चार भागों में बांट दिया। व्यास ने वेदों को अलग-अलग खण्डों में बांटने के बाद उनका नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद रखा। वेदों का इस प्रकार विभाजन करने के कारण ही वह वेद व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद का ज्ञान अपने प्रिय शिष्यों वैशम्पायन, सुमन्तुमुनि, पैल और जैमिन को दिया।

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