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चांद पर बना सकेंगे घर, 2024 में चंद्रमा पर जमीन देखने जाएगी नासा की टीम

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चांद पर बसने और वहां पर एक घर हो, ऐसा सोचते ही किसी का भी मन रोमांचित हो सकता है। चंद्रमा की यात्रा से लेकर चांद पर जमीन खरीदने की खबरें तो आती ही रहती हैं। जाहिर है जब इंसान चांद पर जमीन खरीदेगा तो वहां बसने की भी सोचेगा। बसने के लिए मकान की जरूरत होगी। साथ ही गुणा-भाग भी करना होगी की चांद पर पहुंचने से लेकर एक घर बनाकर वहां रहन-बसर करने में कितना खर्च आएगा। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए मनी नाम की एक क्रेडिट ब्रोकर फर्म ने एक गाइड जारी कर चांद पर रहने के खर्चों का ब्यौरा पेश किया है।

दरअसल, नासा के वैज्ञानिकों की टीम साल 2024 में आर्टेमिस नामक मिशन के तहत चांद की सतह पर स्थाई निर्माण के लिए जगह तलाशने की तैयार में है। इसे देखते हुए ग्राहकों को उनके पसंदीदा उत्पाद खरीदने के लिए कर्ज की व्यवस्था करवाने वाली अमेरिका का मनी फर्म ने अध्ययन के बाद अनुमान लगाया है कि चांद की सतह पर बनने वाले घरों में रहने के लिए लोगों को 325,067 डॉलर (करीब दो करोड़ 35 लाख रुपये) से ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे।
पहला घर बनाने में अधिक होगा खर्च
क्रेडिट ब्रोकर फर्म के अनुसार चांद पर एक अनुकूल घर बनाने व इसमें रहने के लिए जरूरी संसाधन जैसे एयर सील, एयर-कॉन और हीटर, उल्का प्रूफ खिड़कियां, इन्सुलेशन और ऊर्जा के जैविक स्रोतों पर भारी खर्च बैठेगा। चंद्रमा पर बनने वाले घरों के लिए सामग्री धरती से ही भेजी जाएगी। यहां घर की मजबूती उस स्तर पर बनाने की जरूरत है, जिस स्तर पर भारी उद्योग की फैक्ट्रियां लगाई जाती हैं। घर के खिड़की-दरवाजे ऐसे होने चाहिए, जो अंतरिक्ष में तैरते उल्कापिंड की मार झेल सकें। साथ ही चौबीसों घंटे बिजली-पानी की व्यवस्था भी करनी होगी। इस सब खर्चे को मिलाकर अनुमान लगाया गया है कि चांद पर पहला घर बनाने की कीमत में करीब 360 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। हालांकि, दूसरा घर बनाने में 300 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है क्योंकि मजदूर व सामग्री पहले से ही चंद्रमा पर मौजूद होगी।

इस गाइड में चांद पर सबसे अधिक मांग वाले स्थानों को संकलित किया गया है। इसमें सी ऑफ रेंस को सही पारिवारिक उपनगर माना जाता है। यह क्षेत्र उत्तर में बैठता है और सौर मंडल में सबसे बड़े प्रभाव वाले गड्ढों में से एक है। यह इलाका यहां का सबसे अच्छा मोहल्ला बन सकता है। इसे मेयर इंब्रीयम भी कहा जाता है। यह क्षेत्र 300 करोड़ साल पहले चंद्रमा के किसी ग्रह के टकराने से बना था। इसकी परिधि गोलाकार है। इसके इर्द-गिर्द पहाड़ हैं, जो इसे हिल स्टेशन की शक्ल देता हैं। हालांकि, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी केवल अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने पर केंद्रित है, जबकि अन्य कंपनियां भविष्य के लिए आगे देख रही हैं जब मनुष्य प्राकृतिक उपग्रह का उपनिवेश करेंगे।

बिजली पैदा करने में लगेगी 1.3 बिलियन डॉलर की लागत
टीम ने चंद्रमा पर एक घर की लागत की गणना करने के लिए विभिन्न कारकों का उपयोग किया। इसमें एक घर बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल, चंद्रमा के वातावरण पर निर्माण करने के लिए आवश्यक विशेष सामग्री, यात्रा करने के लिए आवश्यक अंतरिक्ष यात्री और परिवहन सामग्री की औसत लागत को शामिल किया गया है। इस अध्ययन के बाद तैयार की गई गाइड में बताया गया है कि चांद पर बिजली पैदा करने का सबसे कारगर तरीका एक छोटा परमाणु रिएक्टर है जिसकी लागत 1.3 बिलियन डॉलर है। वहीं वैकल्पिक रूप से 34 सौर पैनलों में निवेश करने से एक घर चलाने के लिए पर्याप्त बिजली पैदा होगी और इसकी तुलना में केवल 23,616 डॉलर की लागत आएगी।

 

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दिल्ली के एम्स में डॉक्टर्स की 400 से अधिक वैकेंसी, अंतिम तारीख 28 मई

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एम्स अस्पताल दिल्ली में सीनियर रेजिडेंट्स/सीनियर डेमोन्स्ट्रेटर की 416 वैकेंसी है. नोटिफिकेशन के अनुसार यह भर्तियां जुलाई 2021 सेशन के लिए हो रही हैं. अभ्यर्थी सीनियर रेजिडेंट्स/सीनियर डेमोंस्ट्रेटर पदों के लिए 28 मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन एम्स की वेबसाइट www.aiimsexams.ac.in पर जाकर करना है. नोटिफिकेशन में कहा गया है कि रेजिडेंट्स/सीनियर डेमोंस्ट्रेटर की नियुक्तियां तीन साल के लिए होंगी. योग्य अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर होगा.

जरूरी तारीखें

आवेदन की शुरुआत- 11 मई 2021

आवेदन की लास्ट डेट -28 मई 2021
परीक्षा तिथि- बाद में जारी की जारी

परीक्षा का स्थान- परीक्षा देश के चार मेट्रो शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में आयोजित की जाएगी.

आवेदन शुल्क-

सामान्य और ओबीसी वर्ग- 1500 रुपये

एससी/एसटी/इडब्लूएस- 1200 रुपये

दिव्याग अभ्यर्थी- आवेदन नि:शुल्क है

आयु सीमा- अधिकतम 45 वर्ष है. अधिकतम आयु सीमा में एससी, एसटी को 05 साल, ओबीसी को 03 साल, सामान्य वर्ग के दिव्यांग को 10 साल, ओबीसी वर्ग के दिव्यांग को 13 और एससी व एसटी वर्ग के दिव्यांग को 15 साल की छूट मिलेगी.

चयन प्रक्रिया

अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर बेस्ट टेस्ट और इंटरव्यू के बाद मेरिट के आधार पर होगा. रेजिडेंट्स/सीनियर डेमोंस्ट्रेटर पद के लिए होने वाला कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट 90 मिनट का होगा. इसमें 80 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे. टेस्ट में कोई निगेटिव मार्किंग नहीं होगी.

इतना मिलेगा वेतन- 18750+6600 (ग्रेड पे)+एनपीए और अन्य भत्ते या सातवें वेतन आयोग के अनुसार रिवाइज पे स्केल. पे लेवल 11, एंट्री पे- 67700/-

शैक्षिक योग्यता- अभ्यर्थी के पास संबंधित डिसिप्लिन में एमडी/एमएस/एमडीएस की डिग्री होनी चाहिए.

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देश - दुनिया

शिक्षा मंत्रालय के इस विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कई नौकरियां, 49000 तक है सैलरी

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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (NEIPA) में 12वीं पास, एमए, एमएससी, एमटेक के लिए सरकारी नौकरियां हैं. एनईआईपीए की ओर से जारी विज्ञापन के अनुसार ये भर्तियां प्रोजेक्ट के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर/क्लर्क, प्रोजेक्ट कंसल्टटेंट और जूनियर कंसल्टेंट पदों पर हो रही हैं. इन पदों के लिए आवेदन एनईआईपीए की आधिकारिक वेबसाइट niepa.ac.in पर जाकर करना है. इसकी लास्ट डेट 16 मई 2021 है.

प्रोजेक्ट कंसल्टेंट-

सैलरी – 40000 से 49000 प्रति महीने

आयु सीमा- अधिकतम आयु- 65 वर्ष
शैक्षिक योग्यता – अभ्यर्थी के पास एजुकेशन, सोशल साइंस या अलाइड सब्जेक्ट्स में एमफिल/पीएचडी की डिग्री और मास्टर्स में कम कम 55 फीसदी अंक होने चाहिए. या फिर एमटेक/एमसीए/एमएससी होना चाहिए.

प्रोजेक्ट जूनियर कंसल्टेंट

सैलरी- 30000 से 39000 प्रति माह

अधिकतम आयु- 30 वर्ष

शैक्षिक योग्यता और अनुभव- अभ्यर्थी के पास सोशल साइंस, एजुकेशन या अलाइड सब्जेक्ट्स में मास्टर्स की डिग्री होनी चाहिए. साथ ही कम से कम दो साल का कंप्यूटेशन या सेक्रेटेरियल कार्य का अनुभव भी होना चाहिए. या फिर एमएससी/एमसीए/बीटेक की डिग्री होनी चाहिए. या फिर एमकॉम/एमबीए की डिग्री होने के साथ अकाउंट एंड एडमिनिस्ट्रेशन का बैकग्राउंड होना चाहिए.

प्रोजेक्ट कंप्यूटर ऑपरेटर/क्लर्क

सैलरी- 17000 रुपये प्रति माह

अधिकतम आयु – 27 वर्ष

शैक्षिक योग्यता और अनुभव- अभ्यर्थी के 12वीं पास होने के साथ कंप्यूटर की नॉलेज होनी चाहिए. ग्रेजुएट डिग्री वाले अभ्यर्थियों को वरीयता दी जाएगी.

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देश - दुनिया

महिला का आधा चेहरा निकालकर ब्लैक फंगस से बचाई गई जान

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कोरोना की दूसरी लहर में पैदा हुई नई समस्या ब्लैक फंगस यानी मयूकरमाइकोसिस का प्रकोप अब वाराणसी समेत पूरे पूर्वांचल पर दिखने लगा है. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय  के ईएनटी विभाग में इस इंफेक्शन से पीड़ित 52 वर्षीय महिला की सर्जरी की गई. 6 घंटे तक चली इस सर्जरी में महिला का आधा चेहरा निकाल कर उसे बचाया गया. यह पहला मामला है, जब किसी मरीज का आधा चेहरा डॉक्टरों को निकालना पड़ा हो. इससे पहले बीएचयू में तीन और मरीजों को भी ब्लैक फंगस की शिकायत मिली थी लेकिन उन्हें सिर्फ नाक के ऑपरेशन के जरिए ही बचाया जा सका. यह पहला मामला है जब जबड़े समेत आधे चेहरे को निकालकर महिला की जान बचाई गई.

अब चारों मरीज बीएचयू के आईसीयू में एडमिट हैं और उनको एंटीफंगल ड्रग्स दी जा रही है. इस सफल ऑपरेशन को ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुशील कुमार अग्रवाल ने अपनी टीम डॉक्टर शिलकी, डॉक्टर रामराज, डॉक्टर अक्षत, डाक्टर अर्पित के साथ अंजाम दिया. अब महिला को नली लगाई गई है, जिसके जरिए उसे दवा दी जा रही है और सांस लेने के लिए गले में ट्यूब डाली गई है. बताया जा रहा है कि महिला क़ोविड से रिकवर कर गयी थी लेकिन कई दिनों से चेहरे में सूजन की शिकायत की जिसके बाद परिजनों ने बीएचयू में महिला को दिखाया.

पीड़ित महिला को डायबिटीज, थायराइड, हार्ट समेत कई दूसरी समस्याएं भी थीं. ऑपरेशन के दौरान सभी डॉक्टर पीपीई किट में थे. एसोसिएट प्रोफ़ेसर डाक्टर सुशील कुमार अग्रवाल ने बताया कि पहली बार किसी मरीज में आधा चेहरा निकालकर सर्जरी की गई. उन्होंने बताया कि अब तक उन्हें ब्लैक फंगस से जुड़ी हुई 15 से 20 शिकायतें मिली हैं, जिसमें तीन का पहले ऑपरेशन किया गया और अब चौथे मरीज के तौर पर इस महिला का ऑपरेशन किया गया.

डॉ सुशील कुमार अग्रवाल ने उम्मीद जतायी कि छह महीने बाद अगर संक्रमण पूरी तरीके से खत्म होगा तब महिला के सिलिकान का आर्टिफिसियल चेहरा, जबड़ा के साथ पत्थर की आंख लगायी जा सकती है. उन्होंने बताया कि अगर फ़ौरन ऑपरेशन नहीं किया जाता तो संक्रमण दिमाग में जा सकता था और जिंदगी के लिए खतरा पैदा हो जाता. डॉ अग्रवाल ने बताया कि दूसरी लहर में वायरस बहुत तेजी से प्रतिरोधक क्षमता को कम कर रहा है. अब तक बनारस समेत पूर्वांचल से करीब 25 फंगल इंफेक्शन के मरीज आ चुके हैं जबकि यूपी में यह आंकड़ा 100 के क़रीब पहुंच गया है.

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