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पेरेंटिंग टिप्स : बच्चा बनेगा बेहतर इंसान

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एक अच्छा अभिभावक वह होता है जो बच्चे के हित में कोई भी फैसला लेने की कोशिश करता है. एक अच्छे पेरेंट्स को परफेक्ट होने की जरूरत नहीं होती है. कोई भी परफेक्ट नहीं होता है. कोई भी बच्चा परफेक्ट नहीं है. इस बात को ध्यान में रखना बेहद महत्वपूर्ण है जब हम अपनी अपेक्षाओं को निर्धारित करते हैं.

सफल पेरेंटिंग परफेक्शन हासिल करने के बारे में नहीं है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें उस लक्ष्य के लिए काम नहीं करना चाहिए. पहले अपने लिए उच्च मानक सेट करें और फिर बच्चों के लिए दूसरा. बच्चो के लिए रोल मॉडल की तरह काम करें. पेरेंटिंग वेबसाइट parentingforbrain ने कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से अच्छे पेरेंटिंग स्किल सीखने के 10 टिप्स दिए हैं. उनमें से कई जल्दी और न ही आसान नहीं हैं. लेकिन फिर भी आप इन्हें आजमा सकते हैं ताकि बच्चों को अच्छी परवरिश मिल सके…

1. एक अच्छे रोल मॉडल बनें:
बच्चों के लिए खुद ही एक अच्छा रोल मॉडल सेट करें. उन्हें केवल ये ना बताएं कि आप उनसे क्या कराना चाहते हैं बल्कि उन्हें खुद करके दिखाएं.
नक़ल द्वारा सीखने के मामले में मानव एक विशेष प्रजाति है. हमारी प्रोग्रामिंग कुछ इस तरह से है कि हम दूसरों को समझकर उनकी क्रियाओं का अनुसरण करते हैं और यह आदत में भी शामिल हो जाता है. बच्चे खासकर अपने माता पिता द्वारा किए गए हम काम को बहुत ही गहराई से देखते हैं.

इसलिए, आप अपने बच्चे को जैसा ढालना चाहते हैं या उसे जैसा इंसान बनाना चाहते हैं वैसा ही खुद भी बनें- अपने बच्चे का सम्मान करें, उन्हें सकारात्मक व्यवहार और रवैया दिखाएं, आपके बच्चे की भावनाओं के प्रति सहानुभूति रखें – और आपका बच्चा भी बिलकुल यही पैटर्न फॉलो करेगा.

2: बच्चों को प्यार करें और उनपर जाहिर भी करें:
बच्चों के प्रति अपना प्यार जताइए. आपके बच्चे से बहुत प्यार करने जैसी कोई बात नहीं है. बच्चों से प्यार करना उन्हें बिगाड़ना नहीं है. कई पेरेंट्स प्यार के नाम पर बच्चों को- भौतिक चीजें, उदारता, कम उम्मीदें और बहुत अधिक सुरक्षात्मकता देते हैं. जब आप बच्चों को प्यार की जगह ये चीजें देते हैं तो वास्तविकता में आपका बच्चा बिगड़ रहा होता है.

बच्चे को प्यार देना उतना ही आसान है जितना कि उसे गले लगाना, बच्चों के साथ समय बिताना और हर दिन उनकी बातों को पूरी गंभीरता के साथ सुनना.

जब आप इस तरह से प्यार जताते हैं तो बच्चों में अच्छा महसूस कराने वाले हर्मोन ऑक्सीटोसिन का स्त्राव होता है. ये न्यूरोकेमिकल्स हमें शांत, भावनाओं की गर्माहट और संतोष प्रदान करते हैं, इनसे बच्चे में लचीलापन विकसित होगा और आप साथ बच्चे का रिश्ता भी मजबूत होगा.

3. उदार और सकारात्मक पेरेंटिंग का अभ्यास करें:
शिशुओं का जन्म लगभग 100 अरब मस्तिष्क कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) के साथ अपेक्षाकृत कम कनेक्शन के साथ होता है. ये कनेक्शन हमारे विचारों को बनाते हैं, हमारे कार्यों को चलाते हैं, हमारे व्यक्तित्व को आकार देते हैं और मूल रूप से निर्धारित करते हैं कि हम वास्तविकता में कौन हैं. वे हमारे जीवन भर के अनुभवों के माध्यम से निर्मित, मजबूत और मूर्त हैं.

बच्चे के सामने सकारात्मक अनुभव पेश करें. ऐसे में उनके पास खुद को सकारात्मक अनुभव प्राप्त करने और उन्हें दूसरों को पेश करने की क्षमता होगी. अगर आप अपने बच्चे को नकारात्मक अनुभव देंगे तब वो उस तरह से विकसित नहीं होंगे जैसा कि होना चाहिए.

बच्चे के लिए लोरी गाइए. उनके साथ दौड़ लगाइए और उन्हें पार्क लेकर जाइए. अपने बच्चे के साथ खिलखिलाइए. भावनाओं के उतार-चढ़ाव में बच्चों के साथ रहिए. सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ किसी भी समस्या का साथ में ही समाधान भी करें.

ये सकारात्मक अनुभव न केवल आपके बच्चे के मस्तिष्क में अच्छे कनेक्शन का निर्माण करते हैं, बल्कि वे बच्चे के मन में आपकी यादों को भी बनाते हैं जो आपका बच्चा जीवन भर अपने मन में लिए रहता है.

जब अनुशासन की बात आती है, तो सकारात्मक रहना कठिन लगता है. लेकिन सकारात्मक अनुशासन का अभ्यास करना और सजा से बचना संभव है.

एक अच्छे माता-पिता होने का मतलब है कि आपको अपने बच्चे को नैतिकता सिखाने की ज़रूरत है कि क्या सही है और क्या गलत है. हर चीज की सीमा तय करना और अच्छी संगती होना अच्छे अनुशासन की कुंजी है. उन नियमों को लागू करते समय दयालु और दृढ़ रहें. बच्चे के हर व्यवहार के पीछे के कारण पर ध्यान दें. और बच्चे को पिछली गलतियों के लिए सजा देने की बजाय भविष्य के लिए सीखने का मौका दें.

4. बच्चे के लिए एक सुरक्षित जगह बनें:

अपने बच्चे को बताएं कि आप उनके लिए हमेशा हैं और उनके संकेतों एवं आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील हैं. अपने बच्चे को एक व्यक्ति के रूप में समर्थन और स्वीकृति दें. अपने बच्चे के लिए एक गर्मजोशी से भरा और सुरक्षित इंसान बनें ताकि वो आपसे अपना मन साझा कर सके.

जो माता-पिता बच्चे का इस प्रकार लालन पालन करते हैं, उन बच्चों में बेहतर विनियमन विकास, सामाजिक कौशल विकास और मानसिक विकास भी अच्छा होता है.

5. बच्चे के साथ बात करें और उनकी मदद करें:

हम में से अधिकांश पहले से ही बातचीत के महत्व को जानते हैं. अपने बच्चे से बात करें और उन्हें भी ध्यान से सुनें. बच्चों के साथ खुली बातचीत करने से, आपके बच्चे के साथ बेहतर संबंध होंगे और समस्या होने पर आपका बच्चा समाधान के लिए आपके पास आएगा.

लेकिन संचार का एक और कारण है – आप अपने बच्चे को उसके मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों को एक साथ काम करने में मदद करते हैं.

इंटीग्रेशन यानी कि एकीकरण हमारे शरीर के समान है जिसमें स्वस्थ शरीर को बनाए रखने के लिए विभिन्न अंगों को एक साथ समन्वय और काम करने की आवश्यकता होती है. जब मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों को एकीकृत किया जाता है, तो वे एक पूरे के रूप में सामंजस्यपूर्ण रूप से कार्य कर सकते हैं, जिसका अर्थ है बिना परेशानी के काम करना, अधिक समन्वय भरा व्यवहार, अधिक सहानुभूति और बेहतर मेंटल हेल्थ.

ऐसा करने के लिए, बच्चों के उन अनुभवों पर बात करें जिसने उन्हें परेशान किया हो. अपने बच्चे को चीजों को विस्तार से बताने मसलन कैसे हुआ, क्या हुआ और उसने कैसा महसूस किया बताने को कहें ऐसा करने से आप दोनों के बीच कम्युनिकेशन पैदा होगा. आपको इसका समाधान सुझाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आपको एक अच्छे माता-पिता होने के लिए सभी सवालों के जवाब देने कीआवश्यकता नहीं है. बस उनकी बात सुनने और स्पष्ट सवाल पूछने से उन्हें अपने अनुभवों की समझ बनाने और यादों को एकीकृत करने में मदद मिलेगी.

6: अपने खुद के बच्चे पर प्रभाव

हम में से कई लोग बच्चों के लिए अपने माता-पिता से अलग पैरेंट बनना चाहते हैं. यहां तक ​​कि जिन लोगों की अच्छी परवरिश और एक खुशहाल बचपन था, वे भी बच्चे की परवरिश करते वक्त कुछ पहलुओं को बदलना चाहते हैं.

लेकिन बहुत बार, जब हम अपना मुंह खोलते हैं, हम उसी तरह बोलते हैं जैसे हमारे माता-पिता ने किया था.

कई बार हम जैसा बचपन खुद जी चुके हैं ठीक वैसा ही बच्चे के लिए भी चाहते हैं, यह समझने की दिशा में एक कदम है कि हम जिस तरह से करते हैं, हम उसका पालन करते हैं.उन चीजों पर ध्यान दें, जिन्हें आप बदलना चाहते हैं और सोचते हैं कि आप इसे वास्तविक परिदृश्य में अलग तरीके से कैसे करते हैं. अगली बार उन मुद्दों को ध्यान में रखने और अपने व्यवहार को बदलने की कोशिश करें.

अगर आप पहली बार में सफल नहीं होते हैं तो हार मत मानिए. एक बच्चे के पालन-पोषण के तरीकों को जागरूकता के साथ से बदलने के लिए यह अभ्यास, बहुत अभ्यास की मांग करता है.

7. अपनी सेहत का भी रखें ख्याल:

पेरेंट्स को भी राहत की जरूरत होती है. ऐसे में खुद की सेहत का भी ख्याल रखें.

अक्सर कई बार शिशु के पैदा होने पर आपकी खुद की सेहत या आपकी शादी जैसे सेकंड प्रायोरिटी बन जाते हैं और उनपर ध्यान ही नहीं जाता. अगर लगातार ऐसा होता ही रहेगा तो यह समस्या बड़ा रूप ले सकती है. जीवनसाथी के साथ अपने संबंध मजबूत करने के लिए समय निकालें.

बच्चे की परवरिश में मदद मांगने से हिचकिचाएं नहीं. खुद की देखभाल के लिए कुछ “मी- टाइम “निकालना भी जरूरी है ताकि मन-मष्तिष्क जीवंत महसूस करे.
माता-पिता शारीरिक और मानसिक रूप से खुद की देखभाल कैसे कर सकते हैं, इससे उनके पालन-पोषण और पारिवारिक जीवन में बहुत फर्क पड़ेता है. अगर आप दोनों इसमें फेल हो जाते हैं, तो इससे आपका बच्चा भी प्रभावित होगा.

8. हाथापाई न करें, चाहे कुछ भी हो:
कोई संदेह नहीं, कुछ माता-पिता कभी-कभी बच्चे से बात मनवाने के लिए उसकी पिटाई भी कर देते हैं और ऐसा करने से उन्हें राहत भी महसूस होती है.

हालांकि, इस गलत तरीके से आप बच्चे को सही चीजें नहीं सिखा पाएंगे. इससे बच्चे केवल बाहरी चीजों से डरना सीखेंगे. ऐसे में बच्चा सजा से बचने के लिए पकड़े जाने से बच्चे की कोशिश करने वाले व्यवहार की तरफ प्रेरित होगा.

बच्चे के साथ मारपीट करने से उनके मन में यह बात स्थापित हो जाएगी कि वो वो हिंसात्मक तरीकों से समस्या को हल कर सकते हैं. जो बच्चे मारपीट और पिटाई का शिकार होते हैं उनमे दूसरे बच्चों के साथ लड़ाई की संभावना अधिक होती है. वे विवादों को सुलझाने के लिए बदमाशी, गाली-गलौज, शारीरिक आक्रामकता का उपयोग करने की अधिक संभावना रखते हैं. बाद में जीवन में, वे भी काफी नाज़ुक, असामाजिक व्यवहार, माता-पिता के साथ खराब रिश्ते, मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों और घरेलू हिंसा पीड़ितों या दुर्व्यवहारियों के परिणामस्वरूप होने की अधिक संभावना रखते हैं.

अनुशासन के लिए कई बेहतर विकल्प हैं जो से अधिक प्रभावी साबित हुए हैं, जैसे कि सकारात्मक अनुशासन और सकारात्मक सुदृढीकरण.

9: पेरेंटिंग के परिपेक्ष्य में लक्ष्यों को याद रखें:

व्यक्तिगत रूप से कीप थिंग्स और अपने स्थायी लक्ष्य को याद रखता है

बच्चा की परवरिश करने का आपका लक्ष्य क्या है?

यदि आप अधिकांश माता-पिता की तरह हैं, तो आप चाहते हैं कि आपका बच्चा स्कूल में अच्छा करे, प्रोडक्टिव हो, जिम्मेदार हो और स्वतंत्र हो, सम्मानजनक हो, देखभाल करे और दयालु हो, और एक खुशहाल, स्वस्थ और संपन्न जीवन जिए. .लेकिन आप उन लक्ष्यों की दिशा में काम करने में कितना समय देते हैं?

अगर आप ज्यादातर माता-पिता की तरह हैं, तो आप शायद एक दिन में ही बच्चे को अपने मन मुताबिक़ बनाने की सोच रहे हैं. लेखक के रूप में, साइगेल और ब्रायसन, अपनी पुस्तक द होल-ब्रेन चाइल्ड में बताते हैं,

उत्तरजीविता मोड को अपने जीवन पर हावी न होने दें, ऐसे में अगली बार जब आप गुस्सा या निराशा महसूस करें, तो कदम पीछे खींच लें. इस बारे में सोचें कि आपके या आपके बच्चे के लिए गुस्सा और निराशा का क्या परिणाम हो सकता है. इसके बजाय, हर नकारात्मक अनुभव को उसके लिए सीखने के अवसर में बदलने के तरीके खोजें.

ऐसा करने से न केवल आपको एक स्वस्थ दृष्टिकोण रखने में मदद मिलेगी, बल्कि आप अपने बच्चे के साथ एक अच्छे संबंध बनाने में अपने प्राथमिक लक्ष्यों में से एक पर भी काम कर रहे हैं.

10: नवीनतम मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस रिसर्च का लें लाभ:

मनोविज्ञान में पेरेंटिंग को लेकर काफी कुछ रिसर्च की गई है. ऐसे में क्योंकि जो ज्ञान वैज्ञानिकों द्वारा पहले से ही खोजा जा चुका है आप उसका लाभ उठाएं. विज्ञान द्वारा स्वीकृत अच्छी पेरेंटिंग सलाह और जानकारी के लिए कुछ पेरेंटिंग की पुस्तकें पढ़ें इससे आपको बच्चे की सही परवरिश का तरीका पता चलेगा.

वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग निश्चित रूप से सभी बच्ची पर फिट बठने वाली रणनीति नहीं है. हर बच्चा अलग होता है. सर्वश्रेष्ठ पेरेंटिंग शैली के भीतर भी, कई अलग-अलग प्रभावी पेरेंटिंग अभ्यास हो सकते हैं, जिन्हें आप अपने बच्चे के स्वभाव के अनुसार चुन सकते हैं.उदाहरण के लिए, बच्चे के साथ मारपीट के अलावा, कई बेहतर विकल्प हैं, जैसे कि, उन्हें दोबारा निर्देश देना, तर्क, विशेषाधिकारों को हटाना , आप गैर-दंडात्मक अनुशासन पद्धति चुन सकते हैं जो आपके बच्चे के लिए सबसे अच्छा काम करती है.

डायथेसिस-स्ट्रेस मॉडल के अनुसार, जो लोग मनोवैज्ञानिक विकार से पीड़ित हैं, उनमें तनाव का अनुभव होने पर उनमें से एक के विकसित होने की संभावना अधिक होती है. डायथेसिस, यानी कमजोरियां, जैविक या पर्यावरणीय हो सकती है.

पेरेंटिंग पर अंतिम विचार:
अच्छी बात यह है, हालांकि परवरिश काफी कठिन काम है, यह बहुत फायदेमंद भी है. बुरा हिस्सा है कि बहुत कड़ी और लंबी मेहनत के बार अच्छी परवरिश रंग लाती है जोकि किसी पुरस्कार की तरह होती है. लेकिन अगर हम शुरू से ही अपनी पूरी मेहनत से इसमें लगें तो हम अंततः पुरस्कार वापस पा लेंगे और अफसोस करने के लिए कुछ भी नहीं होगा.

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रोजाना 2 से 3 बार 5 मिनट तक भाप लेने से फेफड़ों पर नहीं होगा कोरोना का असर

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कोरोना महामारी के कारण देश त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहा है। महामारी का स्वरूप इतना बड़ा हो गया है कि सरकारों के सारे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। हर इन्सान खुद को बचाना चाहता है। हर तरीका अपनाने को तैयार है। ताजा खबर यह है कि रोज भांप लेकर फेफड़ों को इतना मजबूत बनाया जा सकता है कि वे कोरोना महामारी का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं। कोरोना से बचने के लिए वैज्ञानिक शुरू से भांप लेने की वकालत कर रहे हैं। ताजा रिपोर्ट में एक बार फिर इसका पुष्टि हुई है। थर्मल इनएक्टीवेशन आफ सोर्स कोविड वायरस पर किया गया शोध मरीजों के लिए उम्मीद जगाने वाला है। इसमें भाप को कोरोना वायरस को निष्क्रिय करने का कारगर उपचार माना गया है। यह शोध “जर्नल आफ लाइफ साइंस” में प्रकाशित है। पढ़िए इस बारे में लखनऊ से धर्मेंद्र मिश्रा की रिपोर्ट

इस शोध और अपने अनुभव के आधार पर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) व संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विंज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) के विशेषज्ञों ने भाप को फेफड़ों का सैनिटाइजर करार दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना दो से तीन बार पांच मिनट तक भाप लेने से वायरस मात खा सकता है।

खांसी व बंद नाक में भी राहत : एसीजीपीजीआइ में माइक्रोबायोलॉजी की विभागाध्यक्ष डा. उज्ज्वला घोषाल कहती हैं कि भाप के इस्तेमाल से खांसी, बंद नाक में भी राहत मिलती है। यह जमा बलगम को पिघला देती है। भाप श्वांस नलियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। साथ ही नाक व गले में जमा म्यूकस को पतला कर देता है। इससे सांस लेने में आसानी महसूस होती है। पर्याप्त आक्सीजन फेफड़ों तक पहुंचने से वह स्वस्थ रहते हैं।

ऐसे ले सकते हैं भाप: सादे पानी के साथ या उसमें विक्स, संतरे व नींबू के छिलके, लहसुन, टी ट्री आयल, अदरक, नीम की पत्तियां इत्यादि में से कुछ भी मिलाकर, क्योंकि यह एंटीमाइक्रोबियल होते हैं जो वायरस को कमजोर करने में मदद करते हैं।

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SAI में कोच की 300 से अधिक वैकेंसी, 1.5 लाख तक है वेतन

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स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी साई (SAI) ने कोच और असिस्टेंट कोच पदों पर 320 भर्तियां निकाली हैं. इसमें से 100 पद कोच और 220 पद असिस्टेंट कोच के लिए हैं. इसके लिए अभ्यर्थी साई की वेबसाइट sportsauthorityofindia.nic.in पर जाकर 20 अप्रैल से 20 मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इन पदों पर नियुक्ति कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर होगी.

पदों का विवरण

कोच- 100 पद . तीरंदाजी- 07, एथेलेटिक्स्- 10, बॉक्सिंग- 07, हॉकी- 07, शूटिंग- 07, वेटलिफ्टिंग- 07, रेसलिंग- 07, साइक्लिंग- 07, तलवारबाजी- 07, जूडो- 07, रोविंग- 07, स्विमिंग- 02, टेबल टेनिस- 02, बॉस्केटबाल- 02, फुटबाल- 02, जिमनास्टिक- 02, कबड्‌डी और खो-खो- 02, केयाकिंग- 02, ताइक्वांडो- 02, वालीबॉल- 02, वुशु- 02

असिस्टेंट कोच- 220 पद . तीरंदाजी- 13, एथेलेटिक्स्- 20, बॉक्सिंग- 13, हॉकी- 13, शूटिंग- 03, वेटलिफ्टिंग- 13, रेसलिंग- 13, साइक्लिंग- 13, तलवारबाजी- 13, जूडो- 13, रोविंग- 13, स्विमिंग- 07, टेबल टेनिस- 07, बॉस्केटबाल- 06, फुटबाल- 10, जिमनास्टिक- 06, कबड्‌डी और खो-खो- 07, केयाकिंग- 06, ताइक्वांडो- 06, वालीबॉल- 06, वुशु- 06, हैंडबॉल – 03, कराटे- 04,

आवश्यक योग्यता

कोच और असिस्टेंट कोच- साई, एनएस एनआईएस या अन्य विवि ने कोचिंग में डिप्लोमा और पांच साल का अनुभव. या ओलंपिक/वर्ल्ड चैंपियनशिप या ओलंपिक में दो बार प्रतिभाग या द्रोणाचार्य अवार्ड.

कोच का वेतनमान- 105,000-150,000 तक
असिस्टेंट कोच का वेतनमान- 41,420 -112,400 तक

आयु सीमा-

-कोच के लिए अधिकम आयु सीमा 45 वर्ष
-असिस्टेंट कोच के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष

चयन प्रक्रिया- अभ्यर्थियों का चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा.

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डाक विभाग में 1421 ग्रामीण डाक सेवक पदों पर भर्ती

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भारतीय डाक विभाग में सरकारी नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका है। इंडिया पोस्ट केरल सर्किल में ग्रामीण डाक सेवक के कुल 1421 पदों पर भर्ती निकली है। इस भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए योग्य व इच्छुक उम्मीदवार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट appost.in पर विजिट कर आवेदन कर सकते हैं। इंडिया पोस्ट भर्ती 2021 में इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया को फिर से खोल दिया गया है। उम्मीदवार 21 अप्रैल 2021 तक आवेदन कर सकते हैं।

आपको बता दें कि इसके पहले आवेदन प्रक्रिया को 8 मार्च से शुरू किया गया था। जिसमें आवेदन की अंतिम तिथि 7 अप्रैल निर्धारित की गई थी। लेकिन उम्मीदवारों के लिए 15 अप्रैल को एक बार फिर आवेदन प्रक्रिया खोल दी गई है। इन पदों के लिए 10वीं पास अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को सलाह है कि पूरा भर्ती नोटिफिकेशन पढ़ने के बाद ही ऑनलाइन आवेदन करें।

भर्ती की महत्वपूर्ण तिथियां-

ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ होने की तिथि – 15 अप्रैल-2021
ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि -21 अप्रैल-2021

कुल पदों की संख्या – 1421
पद – ग्रामीण डाक सेवक (GDS)।

शैक्षिक योग्यता :
अभ्यर्थी को कम से कम 10वीं पास होना जरूरी है।

आयु सीमा – 18 से 40 वर्ष।

आवेदन शुल्क– 100 रुपए निर्धारित किया गया है। आवेदन शुल्क संबंधित ज्यादा जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन पढ़ने की सलाह दी जाती है।

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