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ज्योतिष - वास्तु

शनि जयंती पर इन नौ राशियों पर बरसेगी शनि की कृपा हो जाएंगे मालामाल

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  • शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या पर 3 जून सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन पूरे दिन और रात में सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा। साथ ही वटसावित्री व्रत, भावुका अमावस्या और सोमवती अमावस्या का संयोग भी है। इस दिन बुध, मंगल और राहु का त्रिग्रही योग भी बन रहा है।इस दिन बुध, मंगल और राहु का त्रिग्रही योग भी बन रहा है। साथ ही केतु के साथ शनि की उपस्थिति होने के कारण इसका व्यापक असर प्रत्येक जातक पर पड़ने वाला है।
  • धनु राशि पर विराज मान शनि क्रमशःकुम्भ मिथुन और कन्या पर तीसरी सातवीं और दशम दृष्टी डाल रहें हैं इसलिए इन राशियों के जातकों को शनि जयंती पर जरुर “जीव सेवा और शनि मंत्र का जाप दान” आदि करना चाहिए
  • मंगल-बुध-राहु का त्रिग्रही योग ग्रह गोचर की गणना के अनुसार अमावस्या पर इस बार बुध, मंगल और राहु मिथुन राशि में त्रिग्रही युति बना रहे हैं। अमावस्या के दिन सात्विक ग्रह बुध के साथ मंगल और राहु की उपस्थिति होने के कारण लोगों में आपसी मतभेद, दुष्ट प्रवृत्तियों के लोगों का प्रभाव बढ़ने जैसी घटनाएं होंगी। योग के प्रभाव से भीषण गर्मी, बारिश, आंधी-तूफान की आशंका भी रहेगी। राजनेताओं के लिए यह समय कष्टप्रद रहेगा। प्रत्येक राशि वाले जातकों पर किसी न किसी प्रकार का कष्ट आ सकता है। इस दिन शनिदेव के साथ हनुमानजी की आराधना श्रेष्ठ फल प्रदान करेगी। जो लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं उन्हें इस दिन हनुमान जी को बेसन के लड्डू या हलवे का भोग अवश्य लगाना चाहिए इससे आर्थिक सम्पन्नता आती है।शनि जयंती व सोमवती अमावस्या 3 को, सर्वार्थ सिद्धि योग में रखें व्रत और करें शनि पूजन पाएं जीवन में कल्याण
  • शनि जयंती हिंदू पंचांग के ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन शनिदेव की पूजा की जाती है। विशेषकर शनि की साढ़े साती, शनि की ढ़ैय्या आदि शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिये इस दिन का महत्व बहुत अधिक माना जाता है। शनि काल पुरुष  की दसवीं व ग्यारहवी राशि मकर और कुंभ के अधिपति हैं। एक राशि में शनि लगभग 30 महीने यानि लगभग अढ़ाई वर्ष तक रहते हैं। शनि का महादशा का काल भी 19 साल का होता है। प्रचलित धारणाओं के अनुसार शनि को क्रूर एवं पाप ग्रहों में गिना जाता है और अशुभ फल देने वाला माना जाता है लेकिन असल में ऐसा है नहीं। क्योंकि शनि न्याय करने वाले देवता हैं और कर्म के अनुसार फल देने वाले कर्मफलदाता हैं इसलिये वे बुरे कर्म की बूरी सजा देते हैं अच्छे कर्म करने वालों को अच्छे परिणाम देते हैं।

शनि की अशुभ छाया के लक्षण :

1. पैरों से संबंधित कोई बीमारी हो सकती है।
2. कोई ऐसा व्यक्ति मिलता है जो आपसे आपकी क्षमता से अधिक काम करवाता है और आपको उस काम का श्रेय भी नहीं मिलता।
3. लगातार पैसों का नुकसान होता रहता है।
4. आपके घर के पालतू काले जानवर (जैसे- काला कुत्ता या भैंस) की मृत्यु हो सकती है।
5. बनते काम बिगड़ सकते हैं। बहुत मेहनत करने के बाद भी उसका थोड़ा ही फल मिलता है।
6. कोई झूठा आरोप लग सकता है, कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
7. नौकरीपेशा लोगों को ऑफिस में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
8. कोई महंगी चीज खो सकती है या चोरी हो सकती है।
9. घर की दीवारों पर पीपल के पौधे उगने शुरू हो जाते हैं।
10. बार-बार मकड़ियां घर के कोनों में अपना जाल बनने लगे तो समझिए भगवान शनि देव की आपके ऊपर काली छाया पड़ने वाली है।
11. चींटियों का आना भी शनि के अशुभ प्रभाव के बारे में हमें संकेत देता है
12. काली बिल्लियों का आपके घर के आस-पास रहना भी शनि के अशुभ छाया का संकेत होता है।

इन कारणों से पड़ता है शनि का अशुभ प्रभाव :

1- शनि की साढ़े साती या ढ़ैय्या  का असर होने पर शनि की छाया व्यक्ति पर पड़ने लगती है।
 
2- जब किसी जातक पर शनि की महादशा या अन्तर्दशा हो और कुंडली में शनि अशुभस्थ  हो ।
 
3-  कुंडली में शनि तीसरी सातवीं और दसवीं दृष्टी पूर्ण होती है,यानि कुंडली के जिन जिन भावों पर शनि की पूर्ण दृष्टी पड़ती है उन स्थानों पर हानि या कष्ट की सम्भावना होती है धनु राशि पर विराज मान शनि क्रमशःकुम्भ मिथुन और कन्या पर तीसरी सातवीं और दशम दृष्टी डाल रहें हैं इसलिए इन राशियों के जातकों को शनि जयंती पर जरुर “जीव सेवा और शनि मंत्र का जाप दान” आदि करना चाहिए

शनिदेव हैं दंडाधिकारी:

शनि जिन्हें कर्मफलदाता माना जाता है। दंडाधिकारी कहा जाता है, न्यायप्रिय माना जाता है। जो अपनी दृष्टि से राजा को भी रंक बना सकते हैं। हिंदू धर्म में शनि देवता भी हैं और नवग्रहों में प्रमुख ग्रह भी जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में बहुत अधिक महत्व मिला है। शनिदेव को सूर्य का पुत्र माना जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को ही सूर्यदेव एवं छाया (संवर्णा) की संतान के रूप में शनि का जन्म हुआ।शनिदेव की पूजा करने के लिये कुछ अलग नहीं करना होता। इनकी पूजा भी अन्य देवी-देवताओं की तरह ही होती है। शनि जयंती के दिन उपवास भी रखा जाता है। व्रती को प्रात:काल उठने के पश्चात नित्यकर्म से निबटने के पश्चात स्नानादि से स्वच्छ होना चाहिये। इसके पश्चात लकड़ी के एक पाट पर साफ-सुथरे काले रंग के कपड़े को बिछाना चाहिये। कपड़ा नया हो तो बहुत अच्छा अन्यथा साफ अवश्य होना चाहिये। फिर इस पर शनिदेव की प्रतिमा स्थापित करें। यदि प्रतिमा या तस्वीर न भी हो तो एक सुपारी के दोनों और शुद्ध घी व तेल का दीपक जलाये। इसके पश्चात धूप जलाएं। फिर इस स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवायें। सिंदूर, कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल आदि के साथ-साथ नीले या काले फूल शनिदेव को अर्पित करें। इमरती व तेल से बने पदार्थ अर्पित करें। श्री फल के साथ-साथ अन्य फल भी अर्पित कर सकते हैं। पंचोपचार व पूजन की इस प्रक्रिया के बाद शनि मंत्र की एक माला का जाप करें। माला जाप के बाद शनि चालीसा का पाठ करें। फिर शनिदेव की आरती उतार कर पूजा संपन्न करें।

शनिदोष को दूर करने के कुछ विशेष उपाय :

– दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें।
– अपने माता-पिता की सेवा करें। बुजुर्गों का अपमान नहीं करें।
– शनिवार को तिल के तेल का दीपक जलाएं।
– तिल के तेल से भगवान शनि का अभिषेक करें।
– काले उड़द, काले तिल या काले चने सामर्थ्य अनुसार दान करें।
– शनिवार का व्रत करके शनि व्रत कथा का पाठ करें।
 – शनिदेव के दस नाम प्रतिदिन लेने से होती है सभी मनोकामना पूरी होती है। इसे श्लोक के रूप में जप सकते हैं। यदि ऐसा नहीं कर सकें, तो हर नाम के साथ ओम और नम: का उच्चारण जरूर करें।

ये दस नाम सभी प्रकार से शनि के प्रकोप से रक्षा करते हैं :

ॐ कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।
अर्थात: 1- कोणस्थ, 2- पिंगल, 3- बभ्रु, 4- कृष्ण, 5- रौद्रान्तक, 6- यम, 7, सौरि, 8- शनैश्चर, 9- मंद व 10- पिप्पलाद। इन 10 नामों से शनिदेव का स्मरण करने से सभी शनि दोष दूर हो जाते हैं।ये दस नाम सभी प्रकार से शनि के प्रकोप से रक्षा करते हैं

शनिदेव की पूजा करते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान :

1- शनिदेव की पूजा करते समय कभी भी उनकी प्रतिमा या तस्वीर को देखते समय उनकी आंखो में नहीं देखना चाहिए।
2- शनिदेव की पूजा करते समय मंदिर में हनुमानजी के दर्शन और पूजा भी करनी चाहिए।
3- शनि जयंती, शनि अमावस्या या शनिवार के दिन पूजा में ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूर चाहिए।
4- शनि जयंती पर काले तिल और लोहे से बनी चीजों का दान करना चाहिए।
5- शनि देव की पूजा करने से पहले शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करना चाहिए।
6- गाय और कुत्तों को भी तेल में बने खाने की चीजें खिलानी चाहिए।
7- शनि जयंती या अमावस्या के दिन सूर्यदेव की पूजा करें तो अच्छा है।यद्यपि कुछ आचार्य जन इससे सहमत नहीं होंगे पर सूर्य की पूजा से भी शनि प्रसन्न होते हैं,इस दिन सूर्य को अर्घ्य दें और पंजीरी का प्रसाद चढ़ाएं
8- शनि जयंती या शनि अमावस्या पर यात्रा को भी स्थगित कर देना चाहिए।
9- शनि जयंती या अमावस्या पर भूलकर भी बाल और नाखून नहीं काटना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति की आर्थिक तरक्की में रुकावटें पैदा होने लगती है।
10- शनि अमावस्या पर किसी भी महिला  बच्चे या कमजोर व्यक्ति  का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से शनि क्रोधित होते हैं।

ज्येष्ठ अमावस्या पर 3 जून सोमवार को शनि जयंती के विशेष अवसर:

ज्येष्ठ अमावस्या पर 3 जून सोमवार को शनि जयंती के विशेष अवसर पर आप सभी प्रकार के पाप श्राप और तापों का निदान कर सकते हैं  इस दिन पूरे दिन और रात में सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा। साथ ही वटसावित्री व्रत, भावुका अमावस्या और सोमवती अमावस्या का संयोग भी है। इस दिन बुध, मंगल और राहु का त्रिग्रही योग भी बन रहा है।ये विशेष कर उन लोगों के लिए यह विशेष होगा जो शनि की साढ़ेसाती, शनि के ढैया या जन्मकुंडली में शनि की महादशा, अंतर्दशा या शनि की खराब स्थिति चल रही हो ,वे लोग इस खास योग में आ रही शनि जयंती पर शनि की पीड़ा शांत करने का मौका  ना चूकें ,शनि जयंती पर सर्वार्थसिद्धि योग,अमावस्या,सोमवार के दिन,रोहिणी नक्षत्र तथा वृषभ राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में आ रही है। इस दिन सूर्यादय के समय से सर्वार्थसिद्धि योग भी प्रारंभ हो जाएगा। जिसका प्रभाव संपूर्ण दिन और रात में भी रहेगा। इस दिव्य योग में शनिदेव की आराधना जातक को विशेष फल प्रदान करेगी।

शारीरिक कष्टों से मुक्ति के लिए शनि वज्रपिंजर कवच का पाठ करें:

जो लोग शनि के कारण शारीरिक कष्टों से परेशान हों  वे शनि वज्रपिंजर कवच का पाठ करें,
श्रीब्रह्मोवाच – Shribrahmovach
श्रृणुध्वमृषय:सर्वे शनि पीडाहरं महत्।
कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम्।
कवचं देवतावासं वज्रपंजर संज्ञकम्।
शनैश्चर प्रीतिकरं सर्वसौभाग्य दायकम्।
विनियोग : ऊँ अस्य श्रीशनैश्चर वज्रपंजर कवचस्य कश्यप ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, श्रीशनैश्चर: देवता, श्रीशनैश्चर प्रीत्यर्थे पाठे विनियोग:।
ऋष्यादिन्यास : शिरसि कश्यप ऋषये नम: । मुखे अनुष्टुप् छन्दसे नम: । हृदि श्रीशनैश्चर: देवतायै नम: । सर्वांगे श्रीशनैश्चर प्रीत्यर्थे पाठे विनियोगाय नम: ।
ध्यानम्
नीलाम्बरो नीलवपु: कीरीटी गृघ्रस्थित: त्रासक: धनुष्करो ।
चतुर्भुज: सूर्यसुत: प्रसन्न: सदा ममस्यात् वरद: प्रशान्त: ।।
श्रीब्रह्मोवाच –
श्रृणुध्वम्ऋषय सर्वे शनिपीड़ाहरं महत्
कवचं शनिराजस्य सौरेरिद मनुत्तमम
कवचं देवतावासं वज्रपंजर अंशकम्
शनैश्चर प्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम्
शिर: शनैश्चर: पातु भालं मे सूर्य नन्दन: ।
नेत्रे छायात्मज: पातु पातु कर्णौ यमानुज:।।3।।
नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा ।
स्निग्ध कण्ठश्च मे कण्ठं भुजौ पातु महाभुज: ।।4।।
स्कन्धौ पातु शनिश्चैव करौ पातु शुभप्रद: ।
वक्ष: पातु यमभ्राता कुक्षिं पात्वसितस्तथा ।।5।।
नाभिं ग्रह पति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा ।
ऊरू ममान्तक: पातु यमो जानु युगं तथा ।।6।।
पादौ मन्द गति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: ।
अंगोपांगानि सर्वाणि रक्षेत् मे सूर्यनन्दन: ।।7।।
फलश्रुति 
इत्येतत् कवचं दिव्यं पठेत् सूर्यसुतस्य य: ।
न तस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्यज: ।।1।।
व्यय जन्म द्वितीयस्थो मृत्युस्थान गतोSपि वा
कालस्थ गतो वाSपि सुप्रीतस्तु सदा शनि: ।।2।।
अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे ।
कवचं पठतो नित्यं न पीडा जायते क्वचित् ।।3।।
इत्येतत् कवचं दिव्यं सौरेर्यन्निर्मितं पुरा ।
द्वादशाष्टम जन्मस्थ दोषान्नाशयते सदा ।
जन्मलग्नस्थितान् दोषान् सर्वान् नाशयते प्रभु ।।4।।
फलश्रुति का अर्थ है– श्रीशनि वज्रपंजर कवच का नित्य नियमित रुप से पाठ करने पर शनि ग्रह द्वारा पीड़ा नहीं होती है. यदि जन्म कुंडली में शनि ग्रह मारकेश हो, द्वितीय या सप्तम या आठवें भाव से संबंधित होकर मृत्यु देने वाला भी हो तब भी श्रीशनि वज्रपंजर कवच का पाठ करने से शनि का मारक प्रभाव खतम हो जाता है.
इस तरह से श्रीशनि वज्रपंजर कवच का नित्य पाठ करने वाला साधक सभी प्रकार के कष्टों, पीड़ाओं, दुखो और बाधाओं से मुक्ति पाता है.
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि जयंती के दिन शनि के वैदिक तथा बीज मंत्र :
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:
मंत्र- ॐ ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:।
कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।
ऊं खां खीं खूं सः मंदाय स्वाहाः के 21 माला जाप करें। शनि स्तवराज, महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ तथा मंदिर में शनिदेव का तेलाभिषेक करने से भी शारीरिक कष्टों से मुक्ति प्राप्ति होती है। जिन जातकों को निरंतर शारीरिक पीड़ा रहती है, वे शनि जयंती पर शनिवज्रपिंजर कवच के 11 पाठ करें और उसके बाद हर दिन एक पाठ नियमित करते जाएं। इससे समस्त प्रकार के शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

शनि देव का ग्रहों पर प्रभाव और राशिवार शनि के उपाय :

शनि देव को सभी ग्रहों में सबसे ताकतवर और प्रमुख ग्रह का दर्जा प्राप्त हैं। ऐसी मान्यता है कि अपनी दशा में वह जातक को उसके कर्मों का ही दंड या पुरस्कार देते हैं। इन्हें न्याय का देवता कहा जाता है, इसलिए इनके कोप से सभी लोग घबराते हैं। शनि जयंती के दिन सभी 12 राशियों पर शनि का कैसा और क्या प्रभाव रहेगा ?और क्या करें उपाय ? 

मेष राशि

यह समय इच्छाओं को दबाकर रखने का है, अपनी भावनाओं पर नियंट्रण रखें अन्यथा निजी स्तर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर कहीं धन का निवेश करने का प्लान है तो बहुत अच्छी तरह सोच-विचार करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचें। आने वाला समय में लाभ प्राप्ति की उम्मीद कर सकते हैं। शनि जयंती के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को नमक या तेल का दान करें।

वृषभ राशि

वृषभ राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है, इस समय शनि वक्री है इसलिए आपके ऊपर परेशानियों का प्रभाव थोड़ा कम रहेगा। वृषभ राशि के जातकों को समस्य आवश्यक वस्तुओं का लाभ होने के योग बने हुए हैं। किसी गरीब व्यक्ति को गुड़ चने का दान करें।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों को शनि की वजह से कोई बुरा प्रभाव नहीं झेलना पड़ेगा। यह समय आपके लिए पूरी तरह सामान्य है आपको किसी गरीब व्यक्ति को वस्त्र या अन्य जरूरी चीजों का दान करना चाहिए।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के आर्थिक जीवन में सुधार आएगा, साथ ही अगर कोई पुराना विवाद चल रहा है तो उसमें भी आपको विजय मिलेगी। शनि की सामान्य दृष्टि होने की वजह से आपके व्यापार में भी वृद्धि की संभावना है। कुत्ते को रोटी और गाय को हरा चारा खिलाना आपके लिए अच्छा रहेगा।

सिंह राशि

शनि के वक्री होने से आपके कार्यों में देरी हो और व्यापार वर्ग के लोगों की आय में थोड़ी गिरावट आ सकती है। कोई जरूरी काम इस दौरान शुरू ना लें, सरकारी कार्य लटक सकता है। परिवार के साथ सौहार्द और सामंजस्य  बैठाकर चलने का प्रयत्न करें। आपको किसी गरीब और बुजुर्ग व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के ऊपर शनि की ढैय्या चल रही है, अभी शनि वक्री है इसलिए लाभ मिलने का उत्तम योग है। नया कार्य शुरू हो सकता है और मौजूदा काम समय पर पूर्ण होंगे। किसी को पैसे उधार ना ही दें तो बेहतर है। इस समय कोई जोखिम ना लेना आपके लिए हितकर है। गरीब व्यक्ति को चावल का दान अवश्य करें।

तुला राशि

आपको शांति बनाए रखनी चाहिए, शनि के वक्री रहते आपको सावधान रहने की सलाह दी जाती है। विवादों से पूरी तरह दूर रहें, व्यापारी वर्ग को संभलकर रहना चाहिए। किसी गरीब व्यक्ति को खाने-पीने की वस्तु का दान करें।

वृश्चिक राशि

इस राशि के जातकों के लिए शनि की स्थिति थोड़ी कमजोर है। ऐसा कोई काम ना करें जिससे आपकी परेशानी बढ़ जाए, सावधानी की पूर्ण आवश्यकता है। निर्धन को अन्न और पक्षियों के लिए जल की आवश्यकता करें।

धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए गोचर और साढ़ेसाती चलती रहेगी, आपको धन-लाभ की भी पूर्ण संभावना है। इस दौरान आपकी आय अच्छी रहने वाली है और व्यवसाय में लाभ की स्थिति भी निर्मित होगी। बुजुर्गों को अन्न या फल का दान करें।

मकर राशि

शनि आपकी राशि के स्वामी है, साढ़ेसाती के चलते आपके लिए शनि के अनुकूलता बनी रहेगी। समझदारी और थोड़ी मुश्किल से आपके सभी कार्य समय पर पूर्ण होंगे। फिर भी संभलने की आवश्यकता है, विवादों में पड़ने के लिए सही समय नहीं है। पक्षियों के लिए जल, अन्न और हरी घास का प्रबंध करें।

कुम्भ राशि

शनि आपकी राशि के स्वामी है,शनि इन दिनों  गोचर में एकादश भाव में हैं इसके चलते आपके लिए शनि के अनुकूलता बनी रहेगी। समझदारी और थोड़ी मुश्किल से आपके सभी कार्य समय पर पूर्ण होंगे। वाणी पर संयम रखें क्रोधन करें और अहंकार ना रखें,विवादों से बचें,गाय को चारा खिलाएं,बीमार को दवा का दान करें,अपने सह कर्मियों को सहयोग करें

मीन राशि

आपके कार्य क्षेत्र का विस्तार होगा, शनि के अनुकूल प्रभाव की वजह से आपकी आय में लगातार वृद्धि होगी और कारोबार में भी वृद्धि होगी। गरीब व्यक्ति को फल और दवाई का दान करें। समय पर सभी काम पूरे हो जाएंगे, चिंता ना करें। अविवाहितों को विवाह का प्रस्ताव भी मिल सकता है।

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  66. 9/09/2019 का पंचांग एवं राशिफल(भरणी श्राद्ध से पायें पुष्कर तीर्थ का लाभ)

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ज्योतिष - वास्तु

19/09/2019 का पंचांग एवं राशिफल(भरणी श्राद्ध से पायें पुष्कर तीर्थ का लाभ)

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  • रायपुर (etoi news) 18.09.2019
  • दिनांक 19.09.2019 का पंचाग
  • शुभ संवत 2076 शक 1941 …
  •  सूर्य दक्षिणायन का …आश्विन मास कृष्ण पक्ष…. पंचमी … शाम को 07 बजकर 27 मिनट तक… गुरूवार… भरणी नक्षत्र.. प्रातः को 08 बजकर 45 मिनट तक … आज चन्द्रमा …मेष राशि में… आज का राहुकाल दोपहर को 01 बजकर 28 मिनट से 02 बजकर 59 मिनट तक होगा …

भरणी श्राद्ध से पायें पुष्कर तीर्थ का लाभ –

     हिन्दूधर्म की मान्यता अनुसार, वर्ष में एक पक्ष को पितृपक्ष का नाम दिया, जिस पक्ष में हम अपने पितरों का श्राद्ध, तर्पण, मुक्ति हेतु विशेष क्रिया संपन्न कर उन्हें अर्ध्य समर्पित करते हैं। यदि किसी कारण से उनकी आत्मा को मुक्ति प्रदान नहीं हुई है तो हम उनकी शांति के लिए विशिष्ट कर्म करते है इसीलिए आवश्यक है – श्राद्ध और साथ ही जीवन में किसी प्रकार के वृद्धिकार्य जैसे विवाहादि संस्कार, पुत्र जन्म, वास्तु प्रवेश इत्यादि प्रत्येक मांगलिक प्रसंग में भी पितरों की प्रसन्नता हेतु श्राद्ध होता है। अपने जीवन में कोई भी तीर्थ यात्रा नहीं कर पाते, ऐसे लोगों की मृत्यु होने पर उन्हें मातृगया, पितृगया, पुष्कर तीर्थ और बद्री-केदार आदि तीर्थों पर किए गए श्राद्ध का फल मिले, इसके लिए भरणी श्राद्ध किया जाता है। तीर्थ से प्राप्त पूण्य और उससे जीवन में जो समृद्धि प्राप्त होती है वह पीढियों में चिरस्थायी बनी रहे और निरंतर वृद्धि प्राप्त होती रहे इस हेतु भरणी श्राद्ध किये जाने का विधान है। आज भरणी श्राद्ध है। व्यक्ति के निधन के पहले वर्ष में भरणी श्राद्ध नहीं किया जाता है।

     प्रात: काल जल्दी उठ कर स्नान आदि से निवर्त हो कर, पितरो के निम्मित भगवन सूर्य देव को जल अर्पण करे और अपने रसोई घर की शुद्ध जल से साफ़ सफाई करे, पितरो की सुरुचि का स्वादिष्ट भोजन बनाये | भोजन को एक थाली मे रख ले और पञ्च बलि के लिए पांच जगह 2 – 2  पुड़ी, उस पर थोड़ी सी खीर रख कर पञ्च पत्तलों पर रख ले| एक उपला यानि गाय के गोबर का कंडे को गरम करके किसी पात्र मे रख दे| अब आप अपने घर की दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके बैठ जाये चावल की खीर को गोबर के जलते कंडे पर अपने पितरों का स्मरण करते हुए तीन आहुति दे दे। साथ ही बनाए गए भोजन में से एक ग्रास गाय के लिए, एक श्वान के लिए, एक कौए के लिए और चौथा चींटी के लिए निकालें और उन्हें खिलाएं। इससे गया तीर्थ में पिंड दान या श्राद्ध करने जितना विशेष फल मिलता है और पितरों को सुख की प्राप्ति हो जाती है और पुत्र-पौत्रों को दीर्घायु-आरोग्य, धन और ऐश्वर्य जैसी अक्षय संपदा की प्राप्ति होती है।

आज के राशियों का हाल तथा ग्रहों की चाल-

मेष राशि –

     आप लगातार किसी के धोखे से प्रभावित रहेंगे ….

     गलत निर्णय अथवा निर्णय में विलम्ब के कारण कार्य खराब हो सकता है…

     भरोसे पर पूरा कार्य छोड़ने से हानि….

     रक्त विकार संभव….

शुक्र से उपाय –

  1. दुर्गा कवच का जाप करें…
  2. मा महामाया के दर्शन करें…
  3. चावल, दूध दही का दान करें…

 

वृषभ –

     कुछ कार्य बीच में ही बंद हो सकता है….

     आपके यहां कुछ अनचाहे मेहमान आ सकते हैं…..

     स्कीन एलर्जी संबंधित कष्ट….

शनि के उपाय –

  1. ऊॅ शं शनैश्चराय नमः की एक माला जाप कर दिन की शुरूआत करें…..
  2. भगवान आशुतोष का रूद्धाभिषेक करें….
  3. उड़द या तिल दान करें….

 

मिथुन –

    

     कार्य में तेजी दिखाई देगी….

     सर्तकता ना बरतने पर चोटिल हो सकते हैं…..

     कार्यो में लाभ की संभावना….

     आज लाभ की स्थिति को बनाये रखने के लिए…..

  1. ऊॅ गं गणेशाय नमः का एक माला जाप करें….
  2. पौधे का दान करें…..
  3. इलायची खायें एवं खिलायें….

 

कर्क –

     शेयर या लाटरी में अचानक हानि की संभावना…

     प्रतिद्वंतिदयों से विवाद की संभावना….

     भाईयों का साथ दिन को बेहतर बना सकता है….

     छुट्टियों का आनन्द लेंगे…

राहु से संबंधित कष्टों से बचाव के लिए –

  1. ऊॅ रां राहवे नमः का एक माला जाप कर दिन की शुरूआत करें..
  2. दवाईयों का दान करें..
  3. सूक्ष्म जीवों को आहार दें..

 

सिंह –

     नई कला सीखने की शुरूआत या…..

     नये योजना से कार्य करने से लाभ…

     नये लोगों से व्यवहारिक दूरी बनाये रखना उचित होगा….

असंभावित हानि से बचने के लिए के निम्न उपाय करने चाहिए –

  1. ऊॅ कें केतवें नमः का जाप कर दिन की शुरूआत करें…
  2. सूक्ष्म जीवों की सेवा करें…
  3. गाय या कुत्ते को आहार दें…

 

कन्या –

     आज तनाव, सर दर्द, अनिंद्रा के कारण …

     भागीदारों दोस्तों से विवाद…..

     यकृत रोग से कष्ट….

मंगल जनित दोषों को दूर करने के लिए –

  1. ऊॅ अं अंगारकाय नमः का एक माला जाप करें..
  2. हनुमानजी की उपासना करें..
  3. मसूर की दाल गुड दान करें…

 

तुला –

     पारिवारिक विवाद…

     जिम्मेदारी में वृद्धि किंतु लाभ में कमी से तनाव….

     व्यसन से अपयष…

राहु कृत दोषों की निवृत्ति के लिए –

  1. ऊॅ रां राहवे नमः का जाप कर दिन की शुरूआत करें…
  2. काली चीजों का दान करें….

 

वृश्चिक –

     मोबाईल में लगातार खराबी….

     वित्तीय तौर पर परेषानी का समय…

     उदर विकार…

सूर्य के निम्न उपाय आजमायें-

  1. ऊ धृणि सूर्याय नमः का जाप कर, अर्ध्य देकर दिन की शुरूआत करें
  2. लाल पुष्प गुड गेहू का दान करें
  3. आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करें

धनु –

     आत्मविष्वास से कार्य में लाभ…

     घरेलू सुख में वृद्धि….

     फूड पाइजनिंग….

शनि से उत्पन्न कष्टों की निवृत्ति के लिए –

  1. ऊॅ शं शनिश्चराय नमः का जाप कर दिन की शुरूआत करें
  2. दीपदान करें
  3. काले वस्त्र का दान करें

मकर

     जॉब से संबंधित बात के बिगड़ने से तनाव…

     वाहन से कष्ट …

     विवाद अथवा धन हानि से कष्ट…

मंगल के दोषों की निवृत्ति के लिए –

  1. ऊॅ अं अंगारकाय नमः का एक माला जाप करें..
  2. हनुमानजी की उपासना करें..
  3. मसूर की दाल गुड दान करें…

 

कुंभ –

     अपयष की संभावना….

     प्रेमसंबंधों में प्रगाढ़ता….

     दोस्तो का साथ मिलेगा…

चंद्रमा के निम्न उपाय करें –

  1. ऊॅ श्रां श्रीं श्रीं एः चंद्रमसे नमः का जाप करें…
  2. दूध, चावल का दान करें…

मीन –

     परिवार में किसी को शारीरिक कष्ट …

     आकस्मिक हानि या चोरी…

     पेट सम्बंधित बीमारी …

गुरू के लिए निम्न उपाय करें-

  1. ऊॅ गुं गुरूवे नमः का जाप करें…
  2. कुल पुरोहित ब्राह्ण्य को यथासंभव दान दें…

 

 

 

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ज्योतिष - वास्तु

18 /09/2019 का पंचांग एवं राशिफल.

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रायपुर (etoi news)

आज का पंचांग-

दिनांक 18.09.2019

शुभ संवत 2076 शक 1941 …

सूर्य दक्षिणायन का …

आश्विन मास कृष्ण पक्ष…. चतुर्थी … शाम को 06 बजकर 12 मिनट तक… बुधवार… अश्विनी नक्षत्र.. प्रातः को 06 बजकर 44 मिनट तक … आज चन्द्रमा …मेष राशि में… आज का राहुकाल दिन को 11 बजकर 58 मिनट से 01 बजकर 29 मिनट तक होगा …

धनु राशि में आज हो रहे मार्गी शनि से खुलेगा धनु राशि वाले का बंद दरवाजा – और किस राशि वाले के लिए होगा क्या जाने हमारे साथ

शनि धनु राशि पर 30 अप्रैल 2019 से वक्री थे यानी उल्टा चल रहे थे। अब आज 18 तारीख के बाद मार्गी हो जाएंगे यानी सीधा चलने लगेंगे। 18 सितंबर 2019 को, 14:08 मिनट दिन गुरुवार को शनि ग्रह वक्री से मार्गी हो रहे हैं। वक्री अवस्था में शनि अधिकांश राशियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे थे। इस प्रभाव के कारण, कामों में अडचनें और बाधायें बराबर इनकी तरफ से प्राप्त हो रही थी। लेकिन 18 सितंबर से ‘धनु राशि’ में बने रहेंगे तथा पूर्वा-आषाढ़ नक्षत्र में ‘गोचर’ करेंगे, और इस शनि की चाल बदलने व उनके वक्री से मार्गी हो जाने से कई राशियों के लिये बंद रास्ते खुलते नजर आयेंगें। धनु राशि में शनि 31 जनवरी 2020 तक रहेंगे। वर्ष 2019 में वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती चलती रहेगी। इसमें वृश्चिक पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण, धनु पर द्वितीय चरण और मकर पर पहला चरण रहेगा। वहीं साल के अंत में 27 दिसंबर को शनि पुनः अस्त होंगे और 31 जनवरी 2020 तक इसी स्थिति में रहेंगे। आईये जानते हैं साल 2019 में शनि की स्थिति आपके जीवन को किस तरह प्रभावित करेगी, साथ ही आपके करियर, नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा और पारिवारिक जीवन पर इसका क्या असर होगा।

शनि के मार्गी होने से बाजार में छाई हुई मंदी समाप्त होने के योग बनेंगे। वर्षा से राहत प्राप्त होगी और प्रकृति आपदाओं में भी कम आएगी। बाजार में ग्राहकी बढ़ने के योग हैं। किसानों की फसलें अच्छी आएंगी। कीमती धातुओं के दामों में भी कमी आएगी। खासतौर पर मेष और सिंह राशि के लिए ये स्थिति अच्छी रहेगी।

इन राशियों के लिए रहेगा फायदेमंद

धनु राशि में शनि मार्गी होने से मेष, सिंह, तुला, धनु, कुंभ और मीन राशि के लोगों को लाभ मिलेगा। पुराने समय में किए गए कामों में सफलता और मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। घर-परिवार में सुखद वातावरण रहेगा।

इन राशियों को रहना होगा सावधान

शनि की चाल बदलने से वृष, मिथुन, कन्या, वृश्चिक एवं मकर राशि के लोगों को सावधान रहना होगा। इन राशियों के लिए परेशानियां बढ़ सकती हैं। कड़ी मेहनत करनी होगी, लेकिन आशा के अनुरूप फल नहीं मिल पाएगा। घर-परिवार में अशांति बढ़ सकती है। इन लोगों को शनि के अशुभ असर से बचने के लिए हर शनिवार तेल का दान करना चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ करें।

आज के राशियों का हाल तथा ग्रहों की चाल-

मेष राशि –

       

मेष राशि वालों के लिये शनि अटके हुए कार्यों को नये सिरे से पूरा करा सकते हैं। कामकाजी जीवन में तेजी की उम्मीद इस समय कर सकते हैं। भाग्य का भी आपको पूरा साथ मिलेगा। दरअसल कर्मफलदाता शनि आपकी राशि से भाग्य स्थान में वक्री से मार्गी हो रहे हैं। इस समय आपको अपनी क्षमता के अनुसार लाभ मिल सकता है। अपने प्रतिस्पर्धियों, प्रतिद्वंदियों, विपक्षी विरोधियों पर भी हावि रह सकते हैं। राजनीति से जुड़े जातकों के लिये समय शानदार कहा जा सकता है।

उपाय:-

शनि के मंत्र का जाप करें।

गेहू का दान करें।

वृषभ –

         

आपकी राशि से अष्टम भाव में शनि मार्गी हो रहे हैं जो कि आपके लिये यात्राओं के योग बना रहे हैं। धन वृद्धि के संकेत भी अष्टम शनि आपके लिये कर रहे हैं। यदि कहीं पर आपका पैसा फंसा हुआ है तो प्रयासरत रहें इस समय वह निकल सकता है। कार्यस्थल पर आपको अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं। विवाद या अथक प्रयास के बाद हर कार्य में सफलता मिलेगी। राजसत्ता या राजा से मान प्राप्त होगा किंतु परिवार और अपनो से दूर रहने का कारण भी यहीं शनि होगा।

उपाय:-

सफेद तिल का दान करें।

काली माता के मंदिर में शनिमंत्र का जाप करें।

मिथुन –

       

मिथुन राशि वालों के लिये शनि की चाल सप्तम भाव में बदल रही है। वक्री शनि के कारण दांपत्य जीवन में पारिवारिक अवरोध के कारण तनाव हो सकता है। आपस में इगो और पजेशन के कारण भी दूरी तथा तनाव संभव। किंतु कार्यक्षेत्र में भाग्य का आपको पूरा सहयोग मिलने के संकेत शनिदेव कर रहे हैं। आपके लिये यह समय पिछले समय से चली आ रही किसी बड़ी परेशानी से निजात पाने का भी है।

उपाय:-

शनि की शांति के लिए काले तिल का दान करें।

शिवजी की पूजा करें और तिल के तेल का अभिषेक करें।

कर्क –

         

कर्क राशि वालों के लिये शनि की चाल छठे स्थान में बदल रही है जो कि आपके लिये रोग व शत्रु का घर कहा जाता है। प्रतिस्पर्धियों की ओर से आपको तनाव मिल सकता है। स्वास्थ्य के स्तर पर  भी आपको एलर्जी या इंफेक्शन हो सकता है। छोटी मोटी यात्राएं भी आपको करनी पड़ सकती हैं। कामकाज के लिये होने वाली यात्राएं जरूर लाभकारी रह सकती हैं। किंतु आपके अपने अधिनस्थ ही आपके लिए हानि का कारण हो सकते हैं। उनके उपर भरोसा करने की अपेक्षा अपनी नजर खुली रखें और लगातार अपडेट लेते रहें।

उपाय

शिवजी की पूजा करें, दूध से अभिषेक करें।

नारियल के लड्डू का भोग लगायें और कन्याओं को प्रसाद बांटे।

सिंह –

         

आपकी राशि से पंचम भाव में शनि मार्गी हो रहे हैं। शनि की बदली चाल से आपके जीवन में एक नई ताजगी, रिश्तों में एक नई महक आयेगी। हाल ही में अपने पार्टनर के साथ किसी बात को लेकर मनमुटाव हुआ है तो इस समय तनाव औा दूरी को कम कर सकते हैं। संतान पक्ष की ओर से भी आपको खुशखबरी मिल सकती है। जो जातक संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं उनकी मुराद इस समय पूरी हो सकती है। विद्यार्थियों के लिये भी यह समय अनुकूल परिणाम लेकर आने वाला रह सकता है। लाभ प्राप्ति के नये साधन भी आप इस समय तलाश सकते हैं। हाल ही यदि भविष्य के लिये कुछ धन बचत करने में आपको परेशानी हुई है तो इस समय आप आसानी से बचत कर सकते हैं।

उपाय –

शनि मंत्र का जाप करें।

तिल गुड के मीठे का प्रसाद वितरित करें।

कन्या –

         

शनि की चाल कन्या राशि से सुख भाव में बदल रही है। चैथे स्थान में शनि के मार्गी होने से आपके लिये यह समय पारिवारिक अशांति और बीमारियों का हो सकता है, जैसे परिवार में कोई स्वास्थ्यगत परेशान हो अथवा किसी बात पर मतभेद की स्थिति बनी रहे। माता के स्वास्थ्य को लेकर भी आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नौकरी व व्यवसाय करने वाले जातकों के लिये भी बाँस या बड़ो से मतभेद के आसार हैं। स्वयं का स्वास्थ्य भी खासकर पेट से संबंधित कष्ट बने रहने के आसार मार्गी शनि कर बना रहे हैं।

उपाय –

शनि मंत्र का जाप सूर्यास्त के बाद करें।

तिल के तेल से शिवजी का अभिषेक करें।

तुला –

         

तुला राशि वालों के लिये शनि तृतीय स्थान में मार्गी हो रहे हैं। आपका पराक्रम काफी मजबूत रहेगा जिससे परिणामस्वरूप कार्यस्थल पर आपके प्रदर्शन में भी आश्चर्यजनक परिवर्तन देखा जा सकता है। इस समय आप अपने वरिष्ठ अधिकारियों की नजर में आ सकते हैं जिससे कि आपकी तरक्की के रास्ते खुलने के आसार बनेंगें। जो विवाहित जातक लंबे समय से संतान प्राप्ति को लेकर प्रयासरत हैं लेकिन अभी तक मायूसी हाथ लगी है तो इस समय शनिदेव उनकी मुराद पूरी होने के योग बना रहे हैं। हालांकि अविवाहित जातकों के रोमांटिक जीवन में हो सकता है उन्हें उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़े। कठिन परिश्रम का फल आपको मिल सकता है भाग्य का पूरा साथ आपको मिलेगा।

उपाय –

सफेद तिल के गजक या पेड़ा शिवजी के मंदिर में अर्पित करें।

शनि मंत्र का जाप करें।

वृश्चिक –

       

वृश्चिक राशि वालों के लिये शनि दूसरे भाव में मार्गी हो रहे हैं। धन भाव में शनि की बदली चाल आपके लिये धन प्राप्ति के नये रास्ते खोल सकती है। पैतृक संपत्ति से मिलने लाभ में किसी तरह के विलंब का सामना करना पड़ा है तो शनि आपके इंतजार को खत्म कर सकते हैं। भौतिक सुख संसाधनों में वृद्धि के योग शनि बना रहे हैं। यात्राएं भी आपके लिये लाभकारी रहने के आसार हैं।

उपाय –

शनि मंत्र का जाप करें।

भगवान दत्तात्रेय की पूजा करें।

धनु –

         

शनि आपकी ही राशि में मार्गी हो रहे हैं। गत दिनों से स्वास्थ्य को लेकर किसी परेशानी से दो चार होना पड़ा है तो इस समय उसमें लाभ मिल सकता है। भाई बहनों का पूरा साथ आपको मिलेगा। कार्यक्षेत्र में विशेष तौर पर उन्नति या सहयोग प्राप्त होगा। इस समय शारीरिक कष्ट के अलावा बाकि सभी क्षेत्र में आपके लिए अनुकूल समाचार प्राप्त करने का है। पार्टनर के आपके रिश्ते मधुर हो सकते हैं। विवाहित जातकों का भी अपने साथी पर विश्वास बढ़ेगा। कामकाज की दृष्टि से देखा जाये तो मार्गी शनि आपके लिये उन्नति के योग बना रहे हैं।

उपाय –

शनि के मंत्र का जाप करें।

भूरे तिल का दान करें।

मकर –

         

शनि आपकी राशि के स्वामी भी हैं जो कि आपकी राशि से 12वें स्थान में वक्री से मार्गी हो रहे हैं। इस समय अतीत में किये किसी निवेश से अचानक आपको धन लाभ मिल सकता है। जो जातक अपनी फाइनेंशियल कंडीशन को बेहतर बनाने व भविष्य के लिये कुछ राशि बचाने की सोच रहे थे जिसमें उनको चाहने पर भी सफलता नहीं मिल रही थी उनके लिये बहुत अच्छी बात यह है कि शनि आपकी जमा पूंजी में वृद्धि के संकेत कर रहे हैं। बचत की योजना को सिरे चढ़ा सकते हैं। विरोधियों द्वारा आपके रास्ते में जो बाधाएं खड़ी की जा रही थी आप देखेंगे कि उनसे भी आप आसानी से पार पा रहे हैं। अपने प्रतिद्वंदियों पर आप इस समय हावि रह सकते हैं। भाग्य का साथ आपको मिलने के आसार हैं।

उपाय –

काली मंदिर में बैठकर शनि मंत्र का जाप करें।

काले तिल और निंबू की माला काली माता में अर्पित करें।

कुंभ –

कर्मफलदाता शनि कुंभ राशि का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। लाभ घर में शनि के वक्री रहने से हो सकता है आपको अभी तक अपेक्षित लाभ से वंचित रहना पड़ा हो, लेकिन मार्गी शनि से इस स्थिति में परिवर्तन होगा व आपको लंबे समय से जिस लाभ के मिलने की अपेक्षा थी वह मिल सकता है। जो जातक किसी नये व्यवसाय या फिर कोई नई नौकरी करने की इच्छा रखते हैं उनके लिये भी शनि की मार्गी चाल लाभकारी रह सकती है। स्वास्थ्य का लाभ भी आपको मिलेगा। रोमांटिक लाइफ में भी रिश्ते मधुर रहेंगें। यात्राओं के योग भी आपके लिये बनेंगें जिनके लाभकारी रहने की उम्मीद कर सकते हैं।

उपाय –

भूरे तिल और गुड़ के बने लड्डू का भोग शिवजी में लगायें।

शनि मंत्र का जाप करें।

मीन –

       

मीन राशि वालों के लिये शनि कर्मभाव में मार्गी हो रहे हैं। कामकाजी जीवन में पेश आ रही परेशानियों से निजात मिल सकती है। लंबित कार्यों के बनने के योग भी मार्गी शनि प्रशस्त करेंगें। वक्री शनि के कारण हो सकता है आप पर काम का दबाव कुछ ज्यादा ही रहा हो तो उससे भी आपको इस समय राहत मिल सकती है। जोखिम वाले क्षेत्र में धन निवेश करने का जोखिम भी उठा सकते हैं। माता से भी आपको अनुकूल सहयोग मिलेगा। विवाहित जातकों के दांपत्य जीवन में भी रिश्ते मधुर होने के आसार हैं।

उपाय –

शनि शांति के लिए बटुक भैरव मंत्र का जाप करें।

सूक्ष्म जीवों की सेवा करें।

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