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ज्योतिष - वास्तु

छोटा बच्चा समझ के ना बहलाना रे

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  • भारतीय वैदिक ज्योतिष में मंगल को मुख्य तौर पर ताकत और आक्रमण का कारक माना जाता है। मंगल के प्रबल प्रभाव वाले जातक आमतौर पर दबाव से ना डरने वाले तथा अपनी बात हर प्रकार से मनवाने में सफल रहते हैं। मंगल से मानसिक क्षमता, शारीरिक बल और साहस वाले कार्यक्षेत्र होते हैं। मंगल शुष्क और आग्नेय ग्रह है तथा मानव के शरीर में अग्नि तत्व का प्रतिनिधि करता है तथा रक्त एवं अस्थि का प्रतीक होता है। मंगल पुरूष राषि को प्रदर्षित करता है। मकर राषि में सर्वाधिक बलशाली तथा उच्च का होता है। मंगल के निम्न प्रकार से उच्च या अनुकूल होने पर बालक पर मंगल की आक्रामकता का पूर्ण प्रभाव दिखाई देता है।
  • जिसके कारण बालक उर्जा से भरपूर तथा तेज होता है, जिससे तर्कशक्ति, विवाद तथा खेल में विशेष रूचि होती है। जिसके कारण उसमें आक्रामकता का ज्यादा प्रभाव होने से नियंत्रित तथा अनुशासित रख पाना कठिन होता है। यदि बच्चा अपने को बच्चा ना समझ बहकाव की दिशा में अग्रसर हो तो किसी विद्धान ज्योतिष से कुंडली में मंगल की स्थिति का विश्लेषण कराकर मंगलस्तोत्र का पाठ, तुला दान तथा मंगल की शांति कराना लाभकारी होता है। स्वअनुशासन में रखने हेतु बचपन से अपने बच्चे को हनुमान चालीसा का जाप करने की आदत डालना भी अच्छा होगा।

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ज्योतिष - वास्तु

दिनांक 18/08/2019 का पंचांग एवं राशिफल

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  • रायपुर (etoi news) 17.08.2019
  • दिनांक 18.08.2019 का पंचाग
  • शुभ संवत 2076 शक 1941 ..
  • सूर्य दक्षिणायन का …भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष…. तृतीया तिथि… रात्रि को 10 बजकर 19 मिनट तक … रविवार… पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र.. दोपहर को 03 बजकर 38 मिनट तक … आज चन्द्रमा …कुंभ राशि में… आज का राहुकाल दोपहर को 04 बजकर 55 मिनट से 06 बजकर 31 मिनट तक होगा …

आज के राशियों का हाल तथा ग्रहों की चाल –

मेष राशि –

परिवार के लोगों का व्यवहार दुखी कर सकता है….

अनिंद्रा और तनाव संभव….

खर्च बढ़ सकता है….

सूर्य के उपाय –

  1. ऊॅ धृणि सूर्याय नमः का पाठ करें, सूर्य नमस्कार करें,
  2. केशर, इलायची, गुड, गेहू का सामान दान करें,
  3. आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करें,

वृषभ –

बॉस और सहयोगियों का साथ मिलेगा ….

घरेलू उत्सव में सभी शामिल होंगे..

दिनभर व्यस्तता रहेगी….

चंद्रमा से उत्पन्न कष्ट के लिए –

  1. ऊॅ श्रां श्रीं श्रीं एः चंद्रमसे नमः का जाप करें,
  2. दूध, चावल, शंख, स्वेत वस्त्र, मोती का दान करें,
  3. श्री सूक्त का पाठ करें धूप तथा दीप जलायें..

 

मिथुन –

     किसी सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर चिंता …

डाक्टरों के चक्कर लगेंगे..

     खर्च की अधिकता रहेगी…

राहु जनित दोषों की निवृत्ति के लिए –

  1. ऊॅ रां राहवे नमः का एक माला जाप कर दिन की शुरूआत करें,
  2. किसी मरीज को दवाई का दान करें,
  3. पक्षियों को अन्न खिलायें..

 

कर्क –

लगातार रूटिन से बाहर रह सकते हैं…

स्वयं के कार्य में विलंब…

बड़ो से व्यवहारिक मतभेद संभव….

गुरू के उपाय –

  1. ऊॅ गुरूवे नमः का जाप करें,
  2. मीठे पीले खाद्य पदार्थ का सेवन करें तथा दान करें,
  3. साईजी के दर्षन करें….

 

सिंह –

    

नये वाहन की खरीदी….

अध्ययन हेतु लंबी यात्रा….

फूडपायजनिंग…..

मंगल के उपाय –

  1. ऊॅ अं अंगारकाय नमः का जाप करें,
  2. हनुमानजी की उपासना करें,
  3. मसूर की दाल, गुड या तांबा दान करें,

 

कन्या – 

  

एलर्जी या धूप में रहने से स्वास्थगत कष्ट संभव….

प्रेम संबंध में पंगा….

उदररोग…

शनि के उपाय –

  1. ‘‘ऊॅ शं शनिश्चराय नमः’’ का जाप कर दिन की शुरूआत करें,
  2. भगवान आशुतोष का रूद्धाभिषेक करें,
  3. काली वस्तु का दान करें..

 

तुला –

दोस्तो के साथ झगड़ा हो सकता है…

वाणी पर संयम रखें….

अपनों से धोखा…

  1. ऊॅ कें केतवें नमः का जाप कर दिन की शुरूआत करें,
  2. शक्कर पेड के जड़ में रखें।
  3. गणपति की उपासना करें, धूप, दीप तथा नैवेद्य चढ़ायें..

 

वृश्चिक –

तर्क शक्ति उत्तम…

वर्कलोड होने से रिलेक्स नहीं हो पायेंगे…

अनिद्रा तथा तनाव….

बुध के उपाय –

  1. ऊॅ बुधाय नमः का जाप करें,
  2. गणपतिजी की आराधना करें तथा हरिभजन करें,
  3. गरीबों को नित्य एक कप मूंग का दान करें।

 

धनु –

कपड़ो जेवरों पर खर्च होगा…

कई सालों बाद रिष्तोदारों से मुलाकात

आहार में संयमितता बरतें…

शुक्र के उपाय –

  1. ऊॅ शुं शुक्राय नमः का जाप करें तथा माॅ महामाया के दर्शन कर दिन की शुरूआत करें,
  2. चावल, दूध, दही का दान करें साथ ही सौभाग्यवती स्त्री को सुहाग का सामान दान करें,
  3. गायत्री मंत्र का जाप करें, स्वेत वस्त्र दान करें।

 

मकर –

 

     रिजल्ट अपेक्षाकृत ना आने से परिवारवाले नाराज होंगे…

     एकाग्रता की लगातार कमी…

अनुषासनहीन ना बनें….

बृहस्पतिजनित दोषों की निवृत्ति के लिए –

  1. ऊॅ गुरूवे नमः का जाप करें,
  2. मीठे पीले खाद्य पदार्थ का सेवन करें तथा दान करें,
  3. केशर या चंदन का तिलक करें..

 

कुंभ –

     विवाह संबंधी कार्य हो सकता है….

     किसी प्रकार की एलर्जी के कारण कष्ट…

शनिजनित दोषों से निवारण के लिए –

  1. ‘‘ऊॅ शं शनिश्चराय नमः’’ का जाप कर दिन की शुरूआत करें,
  2. भगवान आशुतोष का रूद्धाभिषेक करें,
  3. उड़द या तिल या सरसों का तेल दान करें..

 

मीन –

संतान तथा उसके शिक्षा की चिंता…

वाहन से चोट की आषंका…

मंगल की शांति के लिए –

  1. ऊॅ अं अंगारकाय नमः या ऊॅ भौं भीमाय नमः का जाप करें,
  2. हनुमानजी की उपासना करें,
  3. मसूर की दाल, गुड या तांबा दान करें,

 

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ज्योतिष - वास्तु

रत्न (अंगूठी) पहनते समय इन बातो का रखे ध्यान

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह और रत्न दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। रत्नों की आकर्षण शक्ति सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रही हैं। इनमें सम्माहित मैगनेटिक शक्ति व्यक्ति के दुर्भाग्य को अपनी ओर खींचती हैं और शुभता को स्थापित करती हैं। किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व जन्म कुंडली की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। जिससे शुभ रत्न ही धारण किए जाएं और अशुभ रत्नों के विपरीत प्रभाव से बचा जा सकें। रत्न सामान्यत: जन्मराशि, जन्मलग्न, महादशा एवं अंतर्दशा के अनुसार पहने जाते हैं। रत्नों के वजन, मात्रा और क्वालिटी भी अपना महत्व रखती हैं। ज्योतिष शास्त्र यह कहता है कि जो ग्रह जन्मपत्री में योगकारक हो, त्रिकोणेश हों उन ग्रहों का रत्न सदैव शुभ फल प्रदान करता हैं। इसके विपरीत जो ग्रह मारक, अष्टमेश, निर्बल और त्रिकेश हों उन ग्रहों का रत्न धारण करना अशुभता प्रदान करता हैं। आईये जाने कि आपकी लग्न राशि के अनुसार कौन सा रत्न आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

रत्नों को लेकर समाज में अनेक प्रकार के विरोधाभास देखने में आते है, जैसे यदि विवाह न हो रहा हो पुखराज रत्न धारण करना चाहिए। मांगलिक है तो मूंगा पहनने से लाभ मिलता है, क्रोध अधिक है तो मोती पहनना चाहिए। इस विचारधारा से रत्न पहनना लाभ कम और हानि की वजह अधिक बनता है। इसलिए कोई भी रत्न कभी भी योग्य ज्योतिषी की सलाह लिए बिना धारण नहीं करना चाहिए। जिस प्रकार बिना चिकित्सक की सलाह के दवा लेना नुकसानदेह हो सकता है ठीक उसी प्रकार बिना कुंड्ली की जांच कराये, रत्न धारण करना भी नुकसानहदेह हो सकता है।

कई बार व्यक्ति अपनी समस्या को ध्यान में रखते हुए रत्न धारण कर लेता है जो बाद में जाकर उसके लिए कष्ट का कारण बनता है। इसलिए रत्नों का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए, यह आवश्यक है कि अच्छे से जानने समझने के बाद ही रत्न धारण किए जाए। कुंडली का दूसरा और सातवां भाव मारक भाव है, इन दोनों भावों के स्वामियों का रत्न धारण करने से बचना चाहिए। तीसरा भाव भी अशुभ भावों की श्रेणी में आता है, इसी प्रकार 6, 8 और 12वें भाव के स्वामियों का रत्न भी धारण नहीं किया जाता। एकादश भाव वैसे तो लाभ भाव है, फिर भी लाभ पाने के लिए एकादशेश का रत्न धारण नहीं किया जाता है। इस प्रकार बताये गए भावेशों का रत्न लाभ ना देकर हानि की वजह बनता है।

जानिए रत्न (अंगूठी) पहनते समय क्या करें और क्या ना करें –

किसी भी रत्न को दूध में ना डालें. अंगूठी को जल से एक बार धोकर पहनें. रत्न को दूध में डालकर अपने ईष्ट देवी की मूर्ति से स्पर्श करा कर रत्न धारण कर सकते हैं.

कब रत्न धारण ना करें –

रत्न धारण करने से पहले यह देख लें कि कहीं 4, 9 और 14 तिथि तो नहीं है. इन तिथियों (तारीखों) को रत्न धारण नहीं करना चाहिए. यह भी ध्यान रखें कि जिस दिन रत्न धारण करें उस दिन गोचर का चंद्रमा आपकी राशि से 4,8,12 में ना हो. अमावस्या, ग्रहण और संक्रान्ति के दिन भी रत्न धारण ना करें.

जानिए किस नक्षत्र में रत्न धारण करें –

मोति, मूंगा जो समुद्र से उत्पन्न रत्न हैं, यदि रेवती, अश्विनी, रोहिणी, चित्रा, स्वाति और विशाखा नक्षत्र में धारण करें तो विशेष शुभ माना जाता है. सुहागिन महिलाएं रोहिणी, पुनर्वसु, पुष्य नक्षत्र में रत्न धारण ना करें. ये रेवती, अश्विनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा नक्षत्र में रत्न धारण करें, तो विशेष लाभ होता है।

 

जानिए कब (अंगूठी) रत्न को बदलें –

ग्रहों के 9 रत्नों में से मूंगा और मोति को छोड़कर बाकी बहुमूल्य रत्न कभी बूढ़े नहीं होते हैं. मोती की चमक कम होने पर और मूंगा में खरोंच पड़ जाए तो उसे बदल देना चाहिए. माणिक्य, पन्ना, पुखराज, नीलम और हीरा सदा के लिए होते हैं. इनमें रगड़, खरोच का विशेष असर नहीं होता है. इन्हें बदलने की जरूरत नहीं होती है।

रत्न पहनने के लिए दशा-महादशाओं का अध्ययन भी जरूरी है। केंद्र या त्रिकोण के स्वामी की ग्रह महादशा में उस ग्रह का रत्न पहनने से अधिक लाभ मिलता है।

 

रत्नों का चुनाव कैसे करें –

अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव को कम करने के लिए या जिस ग्रह का प्रभाव कम पड़ रहा हो उसमें वृद्धि करने के लिए उस ग्रह के रत्न को धारण करने का परामर्श ज्योतिषी देते हैं। एक साथ कौन-कौन से रत्न पहनने चाहिए, इस बारे में ज्योतिषियों की राय है कि –

– माणिक्य के साथ- नीलम, गोमेद, लहसुनिया वर्जित है।

– मोती के साथ- हीरा, पन्ना, नीलम, गोमेद, लहसुनिया वर्जित है।

– मूंगा के साथ- पन्ना, हीरा, गोमेद, लहसुनिया वर्जित है।

– पन्ना के साथ- मूंगा, मोती वर्जित है।

– पुखराज के साथ- हीरा, नीलम, गोमेद वर्जित है।

– हीरे के साथ- माणिक्य, मोती, मूंगा, पुखराज वर्जित है।

– नीलम के साथ- माणिक्य, मोती, पुखराज वर्जित है।

– गोमेद के साथ- माणिक्य, मूंगा, पुखराज वर्जित है।

– लहसुनिया के साथ- माणिक्य, मूंगा, पुखराज, मोती वर्जित है।

इस प्रकार शुभ ग्रह स्थिति और दशाओं को जानकर रत्न धारण करना और शुभ तिथि और नक्षत्र में धारण करने से सुख और शांति पाई जा सकती है।

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जन्माष्टमी पर रंग-बिरंगी रोशनी से नहाएंगे ब्रज के आठ हजार मंदिर, शुभ घड़ी में एक साथ होगा शंखनाद

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  • अयोध्या के दीपोत्सव, बरसाना के रंगोत्सव के बाद अब मथुरा में दिव्य और भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस बार भगवान के जन्मोत्सव की घड़ी पर पूरे ब्रज में एक साथ शंखनाद होगा। सभी आठ हजार मंदिरों को रंग-बिरेगी रोशनी से सजाया जाएगा। कान्हा के शहर में हर प्रवेश द्वार पर दूर-दराज से आने वाले भक्तों का स्वागत होगा। पुष्प वर्षा कराने की तैयारी भी सरकार कर रही है। सभी तीर्थों पर राधे-राधे की धूम रहेगी। ब्रज तीर्थ विकास परिषद और प्रशासन का अनुमान है कि 20 लाख से भी ज्यादा श्रद्धालु श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचेंगे। उत्तर प्रदेश के साथ ही हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब, बिहार, उत्तराखंड समेत सभी प्रांतों से भक्त आएंगे। इनके पहुंचने का सिलसिला 22 अगस्त से ही शुरू हो जाएगा।
  • ब्रज तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग और संस्कृति विभाग मिलकर कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। जिला पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने बताया कि भगवान की लीलाओं का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इस बार श्रीकृष्म के जन्मोत्सव की घड़ी पर सभी मंदिरों में एक साथ शंखनाद होगा। इसके लिए लोगों से अपील भी की जा रही है। मंदिरों में भी घंटे घड़ियाल एक साथ बजाए जाएंगे। मंदिर प्रशासन के साथ भी अफसर लगातार बात कर रहे हैं। कुछ संस्कृत विद्यालय और गुरूकुल का भी सहयोग लिया जा रहा है। मथुरा के हर प्रवेश द्वार को रंग बिरंगी रोशनी से सजाया जाएगा। इसके लिए भी मार्गों का चिन्हीकरण कर लिया गया है। लाइटों को लगाया जा रहा है। मथुरा के सभी प्रमुख मार्ग भी सजाए जाएंगे। कुछ स्थानों पर तो अभी से लाइटिंग शुरू भी कर दी गई है। हाईवे और एक्सप्रेसवे को टच करने वाले रास्ते भी सुंदर बनाए जाएंगे।
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। कहां किस तरह से आयोजन हो रहा है उसकी पूरी जानकारी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों अफसरों की मीटिंग लेकर साफ कहा था कि आयोजन में किसी प्रकार की कमी रहनी नहीं चाहिए। जन्मोत्सव पर इस तरह के आयोजन हों कि मथुरा में आने वाले लोग याद रखें। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर जन्माष्टमी 24 अगस्त को मनाई जाएगी। जन्मस्थान संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि 24 की सुबह से ही आयोजन शुरू हो जाएंगे। रात को भगवान के प्राकट्य की लीला होगी। वहीं द्वारिकाधीश मंदिर में भी जन्माष्टमी 24 को ही मनाई जा रही है। सुबह से ही आयोजन शुरू हो जाएंगे।। मंदिर प्रशासन ने इसे लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

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