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कक्षा पहली से 8वीं तथा कक्षा 9वीं व 11वीं के छात्रों को मिला जनरल प्रमोशन

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने स्कूल शिक्षा विभाग को प्रदान की अनुमति 

रायपुर, 31 मार्च 2020/ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण से बचाव के उपायों के तहत एक बड़ा निर्णय लेते हुए शिक्षा सत्र 2019-20 में कक्षा पहली से 8वीं स्तर तक तथा कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों को सामान्य कक्षोन्नति (जनरल प्रमोशन) दिए जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने संचालक लोक शिक्षण को इसकी अनुमति प्रदान कर दी है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए राज्य शासन द्वारा 19 मार्च से सभी स्कूलों को बंद करते हुए हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल की परीक्षाओं को भी स्थगित किया गया। इसके बाद 20 मार्च से संपूर्ण छत्तीसगढ़ को लॉकडाउन किया गया। केन्द्र सरकार द्वारा 24 मार्च से संपूर्ण भारत को 14 अप्रैल तक लॉकडाउन किया गया है। इतने लंबे समय तक स्कूल बंद होने के कारण शालाओं में स्थानीय स्तर पर आयोजित की जाने वाली परीक्षाएं कक्षा पहली से 8वीं एवं कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं की संपन्न नहीं कराई जा सकी। निकट भविष्य में परीक्षा आयोजित कर पाना संभव भी प्रतीत नहीं होता। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने कक्षा पहली से 8वीं तक तथा कक्षा 9वीं और 11वीं के अध्ययनरत विद्यार्थियों को सामान्य कक्षोन्नति (जनरल प्रमोशन) देने का निर्णय लिया है।
असल में अंदर खाने खबर है कि मौजदा स्थिति में परीक्षाएं होना मुश्किल, इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग ने तैयार किया था इस तरह का प्रस्ताव कोरोना वायरस के चलते स्कूलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। मौजूदा हालात को देखते हुए स्कूलों में परीक्षाएं होना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। स्थिति को भांपते हुए अफसरों ने 10वीं-12वीं को छोड़कर बाकी कक्षाओं की परीक्षा न कराकर सीधे जनरल प्रमोशन देने की तैयारी शुरू कर दी। सूत्रों की मानें तो इसके लिए विभाग ने नोटशीट तैयारी पहले कर ली थी और जल्द ही मंत्री और मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद जनरल प्रमोशन का आदेश जारी होने की संभावना भी  थी । कोराना वायरस के चलते अब तक कई राज्यों में जनरल प्रमोशन देने का आदेश जारी कर दिया है। छत्तीसगढ़ में भी लगभग यही स्थिति बनी हुई थी । शासकीय स्कूलों में अभी बोर्ड की परीक्षाएं भी पूरी नहीं हो सकी है। वहीं पहली से आठवीं और नौवीं से 11वीं की परीक्षाएं भी होना बाकी है। रायपुर में कोरोना वायरस से एक लड़की के इलाज की खबर आने के बाद स्कूलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं बोर्ड की परीक्षाओं को भी रदद कर दिया गया। ऐसे में बच्चों को मासिक परीक्षा के आधार पर मुख्य परीक्षा में नम्बर देकर पास करने की तैयारी है।पहले भी हुआ है जनरल प्रमोशन ऐसा नहीं है कि जनरल प्रमोशन स्कूलों में पहली बार दिया जाएगा। करीब 36 साल पहले 1984 में सभी बच्चो  को जरनल प्रमोशन दिया गया था। दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में अशांति का माहौल पैदा हो गया था। इससे बचने के लिए स्कूलों में जनरल प्रमोशन दिया गया था। नतीजों पर असर कोराना का असर बोर्ड परीक्षा के नतीजों पर भी पडऩे की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर 12वीं के बाद व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में काउंसिलिंग के जरिए होने वाले प्रवेश पर भी पड़ेगा। इससे नए शैक्षणिक सत्र में इंजीनियरिंग, मेडिकल और पाठ्यक्रमों की पढ़ाई देरी से शुरू होगी। भारत सरकार को उम्मीद थी कि 31 मार्च तक स्थिति बहुत हद सामान्य हो सकती है। अफसर भी इसी का इंतजार कर रहे थे ।मगर 21 के लॉक डाउन के बाद भी पुरे देश में जिस तरह से वायरस फ़ैल रहा है उसको देखकर छत्तीसगढ़ शासन ने भी यह निर्णय लिया पर वहीं अब विभाग के अफसरों को इस बात का डर सता रहा है कि यदि अभी जनरल प्रमोशन की घोषणा कर दी गई, तो स्कूली बच्चे पढ़ाई करना बंद कर देंगे। स्कूलों में छुट्टी होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग गैर शिक्षकीय कार्यों को निपटाने में जोर दे रहा है। यही वजह है कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पेंशन सहित अन्य प्रकरणों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं।
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मां से नाराज होकर घर से भाग रहे बच्चे, वजह कर देंगी हैरान

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मध्य प्रदेश के भोपाल में ऐसे ही 30 से ज्यादा मामले सामने आये हैं. चाइल्ड लाइन ने काउंसलिंग के बाद बच्चों को उनके घर तक पहुंचाया है.

लॉकडाउन के दौरान घर में कैद बच्चों को बाहर खेलने से मां ने इनकार किया तो नाराज होकर कई बच्चे घर छोड़कर भाग रहे हैं. बच्चे अपने पैरंट्स से ऐसी डिमांड कर रहे हैं, जिन्हें लॉकडाउन के दौरान पूरा नहीं किया जा सकता. मध्य प्रदेश के भोपाल में ऐसे ही 30 से ज्यादा मामले सामने आये हैं. चाइल्ड लाइन ने काउंसलिंग के बाद बच्चों को उनके घर तक पहुंचाया है. अमूमन दिनों में बच्चे घरों के अंदर और घर के बाहर खेलते हुए नजर आते हैं. वह हर एक एक्टिविटीज में सक्रिय रहते हैं.

स्कूल से लेकर घर तक उनकी सक्रियता देखी जा सकती है, लेकिन लॉक डाउन की वजह से यह बच्चे अपने घरों में कैद हैं. उन्हें खेलने का मौका अब नहीं मिल रहा है. स्कूल की पढ़ाई भी स्कूल में नहीं बल्कि बंद कमरे में करना पड़ रही है. ऐसे में जब बच्चे घर से बाहर निकलने के लिए परिवार से बोलते हैं तो जवाब न में मिलता है. इसी न से नाराज होकर बच्चे घर छोड़कर भाग रहे हैं. माता पिता की डांट उन्हें अच्छी नहीं लग रही है.

30 से ज्यादा बच्चे घर से भागे

भोपाल चाइल्ड लाइन प्रभारी अर्चना सहाय ने बताया कि लॉक डाउन के चलते बच्चे घर से बाहर अमूमन दिनों की तुलना में कम निकल पा रहे हैं. ऐसे में जब बच्चों को माता-पिता की डांट मिलती है तो वह नाराज होकर घर छोड़कर भाग जाते हैं। बच्चों की इच्छा घर के बाहर खेलने की होती है और उन्हें अलग-अलग सामान भी चाहिए रहता है। ऐसे बच्चे जब घर छोड़ कर भागते हैं और वह इधर उधर घूमते हुए नजर आते हैं तो पुलिस उन्हें पकड़कर कर चाइल्ड लाइन को सौंप देते हैं.

काउंसलिंग के दौरान हुए खुलासे

पुलिस को मिले 30 से ज्यादा बच्चों चाइल्ड लाइन ने काउंसलिंग कराई है. काउंसलिंग में इस बात का पता चला है कि माता पिता की डांट की वजह से बच्चे घर छोड़कर भाग जाते हैं. बच्चों को पहले जैसा खेलने को नहीं मिलता है. बंद कमरे में उनकी पढ़ाई हो रही है. ऐसे में बच्चे घर छोड़कर भाग रहे हैं. काउंसलिंग के बाद चाइल्ड लाइन ने बच्चों को उनके परिजन को सौंप दिया. काउंसलिंग के दौरान माता-पिता ने बताया कि बच्चे ऐसी चीजों की डिमांड कर रहे हैं, जो लाकर नहीं दे सकते हैं. लॉक डाउन की वजह से तमाम दुकानें बंद है. ऐसे में बच्चों की डिमांड पूरी नहीं की जा सकती है.

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परिवार के साथ समय बिताना आनंद की अनुभूति देता है स्टार्स जीतेंद्र कपूर

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   परिवार के साथ समय बिताना आनंद की अनुभूति देता है स्टार्स जीतेंद्र कपूर

मुंबई. इन दिनों मुश्किल हालातों में सभी अपनी सुरक्षा के लिए अपने-अपने घरों पर ही समय बिता रहे हैं. बात करें बॉलीवुड सेलेब्रिटीज की तो हमेशा बिजी रहने वाले स्टार्स को अब फैमिली के साथ लंबा टाइम बिताने का मौका मिला है. हाल ही में इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता जीतेंद्र  ने इसी पर बात की है. जीतेंद्र ने इस बातचीत के दौरान अपने बेटे तुषार कपूर  की तारीफों के पुल बांध दिए हैं. उन्होंने ये भी कहा कि वो तुषार पर गर्व करते हैं. जीतेंद्र अपने बेटे की एक बात से इतने इंप्रेस हैं कि तारीफें करते नहीं थकते. यहां तक कि उन्होंने तुषार की तुलना खुद भी कर दी है.

जीतेन्द्र  लॉकडाउन के दिनों में अपना पूरा समय अपने परिवार को दे रहे हैं. वो अपने नाती-पोती के साथ टाइम स्पेंड करते दिखाई दे रहे हैं. तुषार कपूर के सोशल एकउंट पर नाती-पोती के साथ उनकी तस्वीरें अक्सर देखने को मिल जाती हैं. हाल ही में आईएएनएस से बात करते हुए जीतेंद्र ने पुराने वक्त को याद करते हुए बताया कि जब वो बिजी रहते थे तो अपने बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाते थे. उन्होंने ये भी कहा कि ‘मेरे लिए यूं तो ज्यादा बदलाव नहीं आए हैं. मैं काम के लिए ज्यादा घर से बाहर नहीं जाता था. ऐसे में मेरे लिए सब पहले जैसे ही है‘.

उन्होंने कहा- ‘इस लॉकडाउन में मैंने ये महसूस किया है कि जब मैं एक्टर था तो अपने बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाया लेकिन मैंने देखा कि मेरा बेटा तुषार बिल्कुल भी मेरे जैसा नहीं है. वो अपने बेटे को पूरा समय देता है. जब मैं तुषार को देखता हूं तो गर्व महसूस करता हूं. वो कितना अच्छा पिता है. मैं उसका एक प्रतिशत भी नहीं था. ये आभास मुझे उम्र और लॉकडाउन के साथ-साथ हुआ है. जाहिर तौर पर आप मरते दम तक कुछ न कुछ सीखते ही रहते हो’.

इसके अलावा उन्होंने अपने फिल्मों के दौर को याद करते हुए कहा- ‘हम सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे तक एक जगह पर काम करते थे. इसके बाज फिर से 1 बजे से शाम के 5 बजे तक दूसरी जगह पर काम करते थे. यही नहीं शाम 6 बजे से रात के 10 बजे तक अलग जगह पर काम करते थे’. उन्होंने कहा ‘आज लोग 1 साल में एक ही फिल्म करते हैं लेकिन उस दौर में अगर दो फिल्में होती थीं तो हम खुद को जॉबलेस महसूस करते थे

 

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42 डिग्री के ऊपर जाने लगे तो क्या होने लगता है आपके शरीर, आइये जानते हैं

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गरमी अब बढ़ने लगी है. बढ़ता तापमान शरीर को नुकसान पहुंचाने वाला है. तापमान जब 40 डिग्री के ऊपर पहुंचता है तो शरीर पर उसका असर भी अलग तरह से होने लगता है. और ज्यादा बढ़ता तापमान शरीर के लिए बहुत घातक भी साबित हो सकता है. जानें बढ़ते तापमान का शरीर पर क्या असर होता है

तापमान फिर बढ़ने लगा है. देश के कई हिस्सों तापमान 45 डिग्री के ऊपर पहुंच गया है. यानि आप कह सकते हैं कि प्रचंड गर्मी पड़ने लगी है. अभी ये तापमान और ऊपर भी जा सकता है. महाराष्ट्र के नागपुर में तापमान 46.5 डिग्री पहुंच चुका है तो अकोला में ये 46 डिग्री है. राजस्थान समेत उत्तर भारत के कई इलाके भी बहुत गर्म हो रहे हैं.

आखिर प्रचंड गर्मी की वो कौन सी हद है, जिसे हम बर्दाश्त कर सकते हैं? कई बार गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि शरीर इसे बर्दाश्त नहीं कर पाता. बढ़ती गरमी के साथ शरीर की हालत बदलने और बिगड़ने लगती है. इस समय शरीर का ध्यान देने की बहुत जरूरत होती है. इसी संबंध में जानते हैं कि भीषण गर्मी में हमारा शरीर किस तरह रिएक्ट करने लगता है.

सवाल – हीट स्ट्रेस कब होता है?

इंसानी शरीर पर बढ़ते तापमान के असर के बारे में बात करते हुए डॉक्टर और शोधकर्ता अक्सर ‘हीट स्ट्रेस’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं. हीट स्ट्रेस को समझाते हुए आईआईटी दिल्ली में एसोसिएट प्रोफेसर डे कहते हैं, ‘जब हमारा शरीर बेहद गर्मी में होता है, तो वो अपने कोर तापमान को बनाए रखने की कोशिश करता है. वातावरण और शारीरिक स्थितियों पर निर्भर करता है कि शरीर अपने कोर तापमान को बनाए रखने की कोशिश किस कदर कर पाता है, ऐसे में हमें थकान भी महसूस करने लगते हैं.

सवाल- क्या होते हैं हीट स्ट्रेस के लक्षण?

– हीट स्ट्रेस के लक्षणों के बारे में नेफ्रॉन क्लीनिक के डॉ. संजीव बागई कहते हैं कि पारा अगर 40 डिग्री के पार हो जाए, तो शरीर के लिए मुश्किल पैदा हो ही जाती है. हालांकि अलग स्थितियों में असर अलग होता है, लेकिन सामान्य रूप से दिखने वाले लक्षण बताते हुए डॉ. बागई कहते हैं, ‘पारा 40 से 42 डिग्री तक हो तो सिरदर्द, उल्टी और शरीर में पानी की कमी जैसी शिकायतें होती हैं. अगर पारा 45 डिग्री हो तो बेहोशी, चक्कर या घबराहट जैसी शिकायतों के चलते ब्लड प्रेशर का कम होना आम शिकायतें हैं’.

सवाल – अगर हम 48 से 50 डिग्री तापमान में ज्यादा देर रहें तो क्या होता है?

अगर आप 48 से 50 डिग्री या उससे ज़्यादा तापमान में ज़्यादा देर रहते हैं तो मांसपेशियां पूरी तरह जवाब दे सकती हैं और मौत भी हो सकती है. जैसा पिछले साल झांसी के पास केरल एक्सप्रेस के यात्रियों के साथ हुआ. ये बताने की ज़रूरत है नहीं कि इस तरह की स्थितियों में बच्चे, बूढ़े, गर्भवती महिलाएं या बीमार लोग जल्दी शिकार हो सकते हैं.

सवाल – शरीर और गर्मी की केमिस्ट्री

– मानव शरीर का सामान्य तापमान 98.4 डिग्री फारेनहाइट या 37.5 से 38.3 डिग्री सेल्सियस होता है. इसका मतलब ये नहीं है कि 38 या 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर आपको गर्मी नहीं लगनी चाहिए. वास्तव में ये शरीर का कोर तापमान होता है. यानी त्वचा के स्तर पर इससे कम तापमान भी महसूस हो सकता है.

सवाल – हवा में ज्यादा गरमी क्यों महसूस होने लगती है?

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हवा ऊष्मा की सुचालक नहीं है. आसान भाषा में ऐसे समझिए कि तापमान की तुलना आप अपने शरीर के संपर्क में आने वाले वातावरण के साथ करते हैं. आपका शरीर जब हवा के संपर्क में आता है तो हवा का तापमान आपके शरीर में ट्रांसफर होता है, लेकिन आपके शरीर का तापमान हवा में उतना ट्रांसफर नहीं होता क्योंकि हवा ऊष्मा की अच्छी चालक नहीं है. लेकिन पानी है. जब आप पानी के संपर्क में आते हैं तो आपके शरीर का तापमान पानी में ट्रांसफर होता है. यही वजह है कि 45 या 50 डिग्री सेल्सियस के ताप वाला पानी आपको उतना गर्म नहीं महसूस होता, जितनी इसी ताप वाली हवा.

सवाल- तापमान बढ़ने पर कैसे रिएक्ट करता है शरीर?

– क्लिनिकल शोधों के मुताबिक तापमान बढ़ने पर शरीर एक खास पैटर्न में रिएक्ट करता है. शरीर का 70 फीसदी से ज़्यादा अंश पानी निर्मित है. यानी हमारे शरीर का पानी बढ़ते तापमान में शरीर का तापमान स्थिर बनाए रखने के लिए गर्मी के साथ जूझता है. पसीना आना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है. लेकिन ज़्यादा देर अगर शरीर इस प्रक्रिया में रहता है तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है.

सवाल – इस समय शरीर में किस तरह के लक्षण होने शुरू होते हैं?

– पानी की कमी होते ही हर शरीर अपनी तासीर के हिसाब से रिएक्ट करता है. किसी को चक्कर आ सकते हैं, तो किसी को सिरदर्द हो सकता है और किसी को बेहोशी भी. असल में, पानी की कमी से सांस की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है. इस वजह से खून का फ्लो बनाए रखने के लिए दिल और फेफड़ों पर ज़्यादा दबाव पड़ता है. इससे रक्तचाप पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है.

खून के फ्लो से सबसे जल्दी मस्तिष्क यानी दिमाग पर असर पड़ता है. इसलिए सिरदर्द की समस्या अमूमन सबसे पहला लक्षण होती है. माइग्रेन के रोगियों को तो डॉक्टर ज़्यादा गर्मी से पूरी तरह बचने की सलाह देते ही हैं. इन नतीजों के बाद सबसे खराब हो सकता है हीट स्ट्रोक. एक स्टडी में पाया गया कि जो लोग हीट स्ट्रोक के बुरी तरह शिकार हुए थे, उनमें से 28 फीसदी की मौत इलाज के बावजूद एक साल के भीतर हो गई.

अगर आपकी त्वचा सूखती है, जीभ और होंठ सूखते हैं, त्वचा पर लाल निशान उभरते हैं, मांसपेशियों में कमज़ोरी महसूस होती है तो आपको समझना चाहिए कि बढ़ता तापमान आपके शरीर को खासा प्रभावित कर रहा है.

सवाल – वॉटर लॉस क्यों बर्दाश्त नहीं कर सकता शरीर?

– पानी हमारे शरीर का जीवन स्रोत है इसलिए हमारे शरीर में सबसे ज़्यादा पानी ही है. गर्मी में पसीना बहने से न केवल पानी बल्कि सॉल्ट यानी नमक की भी कमी होती है. पानी हर अंग के लिए ज़रूरी है. 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के चलते अगर शरीर में पानी की कमी होती है और देर तक बनी रहती है तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं जैसे हीट स्ट्रोक, हार्ट स्ट्रोक या ब्रेन हैमरेज तक.

सवाल – कितने अधिकतम तापमान तक मनुष्य जिंदा रह सकता है?

– कोई मनुष्य अधिकतम कितने तापमान में ज़िंदा रह सकता है? ये एक ऐसा सवाल है, जिसका कोई ठीक-ठीक जवाब नहीं दिया जा सकता. क्योंकि हमारी धरती पर अलग-अलग तरह के क्लाइमेट यानी वातावरण हैं और अलग-अलग क्षमताओं वाले शरीर भी. अब तक ऐसी कोई स्टडी नहीं है जो इस सवाल का ठीक ठीक जवाब दे सके. लेकिन हां, 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बाद सामान्य परिस्थिति वाले हर व्यक्ति को सतर्कता और सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है.

ऐसा ही एक सवाल है कि गर्मी ज़्यादा घातक होती है या आर्द्रता? वास्तव में, दोनों का एक तालमेल होता है. अगर बढ़ते तापमान और आर्द्रता यानी ह्यूमिडिटी का तालमेल सही है तो आपका शरीर ज़्यादा देर तक बर्दाश्त कर पाएगा, वरना नहीं.

सवाल – हीट वेव और हीट स्ट्रोक क्या है?

हीट वेव को भारतीय संदर्भ में समझा जाए तो इसका मतलब लू है. जैसे सर्दियों के मौसम में शीतलहर होती है, वैसे ही गर्मियों में लू. यानी बेहद गर्म हवा. हीट वेव किस तापमान की होती है? इसका जवाब ये है कि स्थान के हिसाब से एक सामान्य तापमान तय होता है. अगर उस सामान्य तापमान से करीब 5 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा तापमान होता है, तब हीट वेव होती है.

पहले बताए जा चुके कारणों से जब हीट वेव या बेहद गर्मी के चलते शरीर बर्दाश्त नहीं कर पाता और शरीर का तापमान बढ़ने से पैदा होने वाली गंभीर समस्याओं को हीट स्ट्रोक कहा जाता है. बेहोशी, चक्कर और तेज़ सिरदर्द इसके साफ लक्षण हैं.

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