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पानी में घोलकर पिया जा सकने वाला कोरोना का देसी दवा…तेजी से ठीक होते है मरीज़

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एक तरफ देश कोरोना वायरस की दूसरी चपेट का सामना कर रहा है, दूसरी तरफ सरकार ने DRDO की एक ऐसी दवाई के आपातकालीन उपयोग को अनुमति दे दी है जो कोरोना वायरस से लड़ने में काफी सहायक है. इस दवाई का नाम 2-deoxy-D-glucose दिया गया है. जिसे बीते शनिवार ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने अनुमति दे दी है.

इस दवा के बारे में बताते हुए DRDO के एक अधिकारी ने बताया कि ये दवा कोरोना मरीजों को रिकवर होने में और ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता को कम करती है. यानी इसे लेने के बाद मरीज कोरोना वायरस से जीतने में कम समय ले रहे हैं, जल्दी सही हो रहे हैं. दूसरी तरफ उन्हें ऑक्सीजन की भी कम ही जरूरत पड़ रही है. ऑक्सीजन वाली बात इसलिए अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है कि बीते दिनों देश ने देखा है कि किस तरह ऑक्सीजन की कमी के कारणों सैंकड़ों निर्दोष मरीजों ने दम तोड़ा है.

2-DG दवाई को किसने तैयार किया?

2-deoxy-D-glucose (2-DG) दवा को DRDO के परमाणु चिकित्सा और संबद्ध विज्ञान संस्थान (Institute of Nuclear Medicine and Allied Sciences) ने हैदराबाद स्थति डॉ. रेड्डी लेबोरेटरीज के साथ तैयार किया है.

2-DG के क्लिनिकल ट्रायल्स के बारे में हमें क्या पता है?

2-DG के फेज-2 के ट्रायल्स पिछले साल मई और अक्टूबर महीने में किए गए थे, फेज-2(@) के ट्रायल्स में छः अस्पतालों ने भाग लिया था और फेज-2 (b) में 11 अस्पतालों ने इस दवा की डोज की रेंज जानने के लिए भाग लिया था. फेज-2 के ट्रायल्स में कुल 110 पेशेंट ने भाग लिया था. इसमें देखा गया कि इस दवा को लेने वाले मरीज, बाकी मरीजों की तुलना में लगभग 2.5 दिन पहले ही सही हो जा रहे थे.

फेज-3 के ट्रायल्स पिछले साल नवंबर महीने में हुए. इन ट्रायल्स को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के 27 कोविड अस्पतालों में किया गया. इस ट्रायल में देखा गया कि इस दवा को लेने वालों में ऑक्सीजन पर निर्भरता कम देखी गई. खास बात ये कि यही ट्रेंड 65 साल से ऊपर के मरीजों में भी देखने को मिला.

2-DG कैसे काम करती है?

आधिकारिक जानकारी के अनुसार ”क्लिनिकल ट्रायल्स से पता चलता है कि ये दवा मरीजों में इस बीमारी से रिकवर होने की गति को तेज करती है और ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम करती है. जिन मरीजों को 2-DG दवा दी गई उनमें से अधिकतर का RT-PCR टेस्ट जल्दी नेगेटिव आया है. ड्रग कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के लिए काफी सहायक होगी.

कैसे ली जाएगी 2-DG

भारत सरकार द्वारा जारी स्टेटमेंट के अनुसार2-DG दवा एक पाउच में पाउडर की फॉर्म में आती है. जिसे पानी में घोलकर आसानी से पिया जा सकता है. ये वायरस से प्रभावित सेल्स में जाकर जम जाती है और वायरस सिंथेसिस व एनर्जी प्रोडक्शन को रोककर वायरस को बढ़ने से रोकती है.

कितने दिन में आ जाएगी 2-DG?

DRDO ने बताया है कि इसे बेहद आसानी से उत्पादित किया जा सकता है, इसलिए देशभर में जल्दी ही आसानी से उपलब्ध भी हो जाएगी. क्योंकि इसमें बेहद जेनेरिक मॉलिक्यूल हैं और ग्लूकोस जैसा ही है.

 

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अभिषेक बनर्जी को थप्पड़ जड़ने वाले शख्स की मौत,परिवार ने बताया मर्डर

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पश्चिम बंगाल में 2015 में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को जिस शख्स ने थप्पड़ जड़े थे, उसकी मौत हो गई है। अभिषेक बनर्जी को कभी थप्पड़ जड़ने वाले भाजपा से जुड़े देबाशीष आचार्य की गुरुवार को रहस्यमय ढंग से मौत हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया और कुछ देर बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। परिवार ने इसे हत्या करार दिया है।

गुरुवार तड़के देवाशीष आचार्य को गंभीर रूप से घायल हालत में मिदनापुर के तमलुक जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के रिकॉर्ड से पता चलता है कि उन्हें कुछ अज्ञात लोगों द्वारा सुबह 4.10 बजे लाया गया, जो जल्द ही चले गए। उनकी मौत दोपहर में हुई। जब उनके परिवार को अस्पताल पहुंचने पर रहस्यमय मौत के बारे में पता चला और तो उन्होंने दावा किया कि देवाशीष की हत्या कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी नेताओं ने अब देवाशीष आचार्य की मौत पर सवाल उठाए हैं। बता दें कि देवाशीष 2020 में भाजपा में शामिल हुए थे। पुलिस ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि देवाशीष आचार्य 16 जून की शाम अपने दो दोस्तों के साथ बाहर गए थे। वह चाय की दुकान पर भी रुके थे और वहां से अचानक चले गए थे।

बता दें कि देबाशीष आचार्य सबसे पहले 2015 में उस दौरान सुर्खियों में छाए थे जब उन्होंने एक राजनीतिक कार्यक्रम में अभिषेक बनर्जी को भरी जनसभा में थप्पड़ जड़ दिया था। हालांकि, इसके बाद टीएमसी समर्थकों ने उनकी खूब पिटाई की थी। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था, मगर अभिषेक बनर्जी के दखल पर रिहा कर दिया गया था।

 

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जल्द मिलेगी राहत, 19 फीसदी तक सस्ते होंगे खाद्य तेल

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खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों को सरकार ने थोड़ी राहत दी है। सरकार ने पाम तेल सहित विभिन्न खाद्य तेलों के आयात शुल्क मूल्य में 112 डॉलर प्रति टन तक की कमी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतें कम हो सकती हैं।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक अधिसूचना जारी कर कच्चे पाम तेल के आयात शुल्क मूल्य में 86 डॉलर प्रति टन और आरबीडी (रिफाइंड, ब्लीच्ड एंड डियोडराइज्ड) एवं कच्चे पामोलिन के आयात शुल्क मूल्य में 112 डॉलर प्रति टन की कटौती की है।

20 फीसदी तक सस्ते होंगे खाद्य तेल

तेल              पुरानी कीमत       नई कीमत        कमी

पाम                   142                 115         19 फीसदी

सूरजमुखी           188                 157         16 फीसदी

सोया                  162                 138         15 फीसदी

सरसों                 175                  157        10 फीसदी

मूंगफली             190                  174         8 फीसदी

वनस्पति            154                  141         8 फीसदी

(कीमत रुपये प्रति लीटर में)

स्थायी निदान पर काम कर रही सरकार

सरकार खाद्य तेलों की कीमत घटाने के लिए स्थायी निदान पर काम कर रही है। सरकार ने कहा है कि खाद्य तेलों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। अभी जरूरत का 70 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करना पड़ता है, जिस पर वैश्विक कीमतों का सीधा असर पड़ता है।

अगर घरेलू बाजार में तेल के दाम नीचे रखने हैं, तो तिलहन उत्पादन को लगातार बढ़ावा देना होगा। वहीं, अमेरिका और ब्राजील में सूखे की वजह से सोयाबीन की खेती पर काफी असर पड़ा है, जिससे आपूर्ति घटने के कारण कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं।

कम हो सकती हैं खाद्य तेल की कीमतें – विशेषज्ञ

बोर्ड ने कच्चे सोयाबीन तेल के आधार आयात मूल्य में भी 37 डॉलर प्रति टन कटौती की है। खाद्य तेल के आयात शुल्क मूल्य में यह कटौती 17 जून से प्रभाव में आ गई। कर विशेषज्ञों का कहना है कि शुल्क मूल्य में कटौती से घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतें कम हो सकती हैं क्योंकि मूल आयात मूल्य पर देय सीमा शुल्क कम में इससे कमी होगी।

एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के वरिष्ठ पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि खाद्य तेल तिलहन की घरेलू खपत और मांग के बीच देश में बड़ा फासला है जिसकी वजह से इनका बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है। पिछले कुछ माह के दौरान इनके खुदरा मूल्य में तेजी आई है।

उन्होंने कहा कि आधारभूत आयात मूल्य में होने वाले इस बदलाव का खुदरा दाम पर असर पड़ सकता है बशर्ते कि विनिर्माता, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं सहित पूरी आपूर्ति श्रृंखला से इस कटौती का लाभ उपभोक्ता तक पहुंचाया जाए।

देश में दो तिहाई मांग की आयात से होती है पूर्ति  

देश में खाद्य तेलों की दो तिहाई मांग की पूर्ति आयात से होती है। पिछले एक साल में खाद्य तेलों के दाम तेजी से बढ़े हैं। सालवेंट एक्ट्रक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक (खाद्य और अखाद्य तेलों) सहित वनस्पति तेलों का कुल आयात नवंबर 2020 से लेकर मई 2021 के दौरान नौ फीसदी बढ़कर 76,77,998 टन तक पहुंच गया। जो कि इससे पिछले साल इसी अवधि में 70,61,749 टन रहा था। खाद्य तेलों के मामले में नवंबर से लेकर अक्तूबर तक का साल होता है।

 

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देश - दुनिया

चीन के वैज्ञानिकों ने किया दावा, मर्द भी हो सकते हैं प्रेग्नेंट!

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चीन के वैज्ञानिक अजीबोगरीब रिसर्च करते रहते हैं. बीते दिनों चीन के वुहान लैब से निकले एक वैज्ञानिक ने दावा किया था कि चीन अजीबोगरीब रिसर्च करते रहता है. वहां कई ऐसे रिसर्च किये जाते हैं जो आमतौर पर अन्य देशों में बैन है. इसी के बीच अब चीन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने मर्दों प्रेग्नेंट करने का चमत्कार कर दिखाया है. इसके लिए वो कई सालों से रिसर्च कर रहे थे. अब जाकर इस रिसर्च का नतीजा सामने आ गया है.

चीन में वैज्ञानिकों द्वारा किये इस रिसर्च में नर चूहे की बॉडी पर एक्सपेरिमेंट किया गया. इसमें नर की बॉडी में सर्जरी के जरिये मादा की बॉडी से निकाला गया बच्चेदानी फिट किया गया. इसके बाद नर को प्रेग्नेंट कर सिजेरियन के जरिये बच्चे पैदा करवाए गए. इस रिसर्च के बाद अब फ्यूचर में मर्दों के प्रेग्नेंट होने के चांसेस बढ़ गए हैं. इंफोवार्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिसर्च के बाद अब वैसे ट्रांसजेंडर जो बच्चे पैदा करना चाहते हैं, को मदद मिलेगी.

ऐसे हुआ एक्सपेरिमेंट

ये एक्सपेरिमेंट शंघाई (Shanghai) के नेवल मेडिकल यूनिवर्सिटी (Naval Medical University) द्वारा किया गया. इसमें रिसर्चर्स ने मादा चूहों की बॉडी से बच्चेदानी को पहले बाहर निकला. इसके बाद उसे नर चूहे की बॉडी में फिट किया. इस यूट्रस ट्रांसप्लांट के बाद नर को प्रेग्नेंट कर उसकी सिजेरियन के जरिये डिलीवरी करवाई गई. इस रिसर्च को चार स्टेप में पूरा किया गया. इसे रैट मॉडल बताया गया. हालांकि, अभी इसकी सक्सेस रेट मात्र 3.68 परसेंट ही बताई गई है. नर चूहे में एक्सपेरिमेंट कामयाब हो गया और नर ने 10 बच्चे पैदा किये.

अब इंसानों की बारी

चीन के रिसर्चर अब रैट मॉडल (Rat Model) को इंसानों पर अपनाने की फ़िराक में हैं. ऐसा पहली बार हुआ है कि एक्सपेरिमेंट में नर को प्रेग्नेंट किया गया. मैमल में हुए इस एक्सपेरिमेंट से अब इसके इंसानों में कामयाब होने की उम्मीद बढ़ गई है. इससे पहले NYU स्कूल ऑफ़ मेडिसिन ने ट्रांसजेंडर्स के लिए भी ऐसा एक एक्सपेरिमेंट किया था. इसमें वैसे ट्रांसजेंडर्स जो प्रेग्नेंट होना चाहते हैं, अपने यूट्रस की सर्जरी नहीं करवाते. और मेल की बॉडी में ही प्रेग्नेंट हो जाते हैं.

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