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एक ऐसी वारदात हुई जो सुलझ तो गई, लेकिन उसका मास्‍टरमाइंड आरोपी आजतक पुलिस की गिरफ्त से बाहर

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साल 1984 को केरल में एक ऐसी वारदात हुई जो सुलझ तो गई लेकिन उसका मास्‍टरमाइंड सुकुमार कुरूप आजतक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इस अपराधी को पकड़ने के लिए मामले से जुड़े पुलिस अफसर देश के तमाम शहरों यहां तक कि अंडमान निकोबार और देश के बाहर भूटान और खाड़ी देशों तक खाक छान चुके हैं। केरल में कुरूप एक किंवदती बन चुका है, उस पर कई फिल्‍में भी बनी हैं।

22 जनवरी 1984 को सुबह 4 बजे केरल के मावलिकारा पुलिस स्‍टेशन में किसी ने खबर दी कि एक खेत में KLQ-7831 नंबर प्‍लेट वाली ऐम्‍बेसेडर कार में आग लग गई है। हादसे में ड्राइविंग सीट पर बैठा शख्‍स जिंदा जल गया। पुलिस पहुंची तो पहली नजर में यह सड़क हादसा लगा। जब आग बुझी तो दिखाई दिया कि मृतक के हाथ बंधे हुए हैं। पोस्‍टमॉर्टम में पता चला मृतक की सांस की नली में धुआं नहीं था मतलब उसकी हत्‍याकर बाद में यह ड्रामा रचा गया। मृतक के पेट से मिले शराब और एथिल एल्‍कोहल के अंश ने रहस्‍य और गहरा दिया।

लेकिन सबूत कुछ और कह रहे थे मौके पर मौजूद कुछ चश्‍मदीदों ने बताया कि घटना के बाद कुछ लोगों को एक दूसरी कार में बैठकर जाते देखा गया। जली हुई कार के आसपास पेट्रोल की गंध फैली थी और खेत में मौजूद थे पैरों के निशान, माचिस, एक जोड़ी चप्‍पल, रबर के दस्‍ताने जिसमें इंसानी बाल लगे थे।

भाई ने किया शव पर दावा थोड़ी देर में खबर फैली कि मृतक चेरियानाद का लगभग 30 साल का सुकुमार कुरूप था जो कुछ सप्‍ताह पहले ही खाड़ी देश से आया था। घटनास्‍थल पर उसके रिश्‍तेदार आ गए, उसके भाई भास्‍कर पिल्‍लई ने शव के हुलिए के आधार पर दावा किया कि यह उसी का भाई है जो एक दिन पहले कार से पास के कस्‍बे अंबालापुझा के लिए निकला था।

बीमे की रकम के लिए रची साजिश पुलिस ने इस एहतियात के साथ शव रिश्‍तेदारों को सौंपा कि उसका दाह संस्‍कार न कर कब्र में दफनाया जाएगा। बाद की जांच में पुलिस को पता चला कि उस समय भी सुकुमार जिंदा था और मरने वाला एक फिल्‍म रिप्रेजेंटेटिव चाको था। यह पूरी साजिश सकुमार, उसके भाई भास्‍कर और दो और लोगों ने रची थी ताकि बीमा से मिले पैसे से रातोंरात अमीर हुआ जा सके।

अखबार इंडियन एक्‍सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार, इस मामले में अहम भूमिका निभाने वाले डेप्‍युटी एसपी हरिदास कहते हैं, ‘जांच के बाद मामले में सुकुमार के भाई भास्‍कर पिल्‍लई, उसके ड्राइवर पोनप्‍पन को हत्‍या के आरोप में उम्रकैद हुई। एक सह आरोपी साहू पुलिस गवाह बन गया। भास्‍कर और सुकुमार की पत्‍नियां सबूतों के अभाव में छोड़ दी गईं।

एयरफोर्स से हुई थी शुरुआत मुख्‍य आरोपी और मास्‍टर माइंड सुकुमार पिल्‍लई उर्फ सुकुमार कुरूप शुरू से ही शातिर दिमाग था। बारहवीं पास करने के बाद वह एयरफोर्स में एयरमैन के तौर पर भर्ती हुआ लेकिन जल्‍द ही बिना बताए नौकरी छोड़ दी, उसे एयरफोर्स ने भगोड़ा घोषित कर दिया। इसके बाद उसने पुलिस की स्‍पेशल ब्रांच के एक हेड कॉन्‍स्‍टेबल को रिश्‍वत देकर अपनी मौत का झूठा सर्टिफिकेट बनवाया और एयरफोर्स को भेजा ताकि उसके खिलाफ ‘भगोडे’ होने की जांच बंद हो सके। उसके बाद उसने अपना नाम सुकमार कुरूप से बदल कर सुकुमार पिल्‍लई कर लिया।

देश छोड़ पहुंचा आबू धाबी इसी तरह से सुकुमार ने सरासम्‍मा नाम की महिला से उसके और अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ एक मंदिर में शादी की। जब सुकुमार एयरफोर्स में भर्ती हुआ था उस समय सरासम्‍मा ने मुंबई में नर्सिंग कोर्स जॉइन कर लिया। अब एयरफोर्स छोड़ने के बाद सुकुमार खाड़ी देश आबू धाबी में जाकर एक कंपनी में नौकरी करने लगा वहीं उसकी पत्‍नी भी एक प्राइवेट अस्‍पताल में आकर नर्स बन गई।

दिल खोलकर दोस्‍तों की मदद करता था पुलिस के मुताबिक, इस दौरान सुकुमार की जिंदगी खुशहाल थी। वह दोस्‍तों को खिलाने-पिलाने पर खूब पैसा खर्च करता था। उनकी दिल खोलकर मदद भी करता था। इसी दौरान उसके ऑफिस में काम करने वाला साहू उसका अहसानमंद बन गया। अबू धाबी से लौटने पर सुकुमार भारत में रहने वाले अपने दोस्‍तों, रिश्‍तेदारों के लिए खूब उपहार लाता। यहां दोस्‍तों को भरपेट शराब पिलाता।

शाहखर्ची पड़ी भारी तो रची साजिश धीरे-धीरे उसकी शाहखर्ची उस पर भारी पड़ने लगी। उसे पैसों की तंगी होने लगी, वह गांव में घर बनवा रहा था उसके लिए पैसों की जरूरत पड़ने लगी। इस बीच ऐसी खबरें उड़ने लगीं कि आबू धाबी में उसकी कंपनी पुराने कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर कम सैलरी पर नए लोगों की भर्ती करने वाली है। ऐसे में उसके दोस्‍तों ने सलाह दी कि वह केरल में अपना बिजनेस शुरू करे।

अंग्रेजी जासूसी कहानी से मिला आइडिया पर इस सब के लिए पैसों की जरूरत थी, वह भी जल्‍द से जल्‍द। ऐसे में सुकुमार ने एक अंग्रेजी जासूसी मैगजीन में एक कहानी पढ़ी। बाद में उसने इसी कहानी को असल जिंदगी का ब्‍लूप्रिंट बनाने का फैसला किया। यह आइडिया था- अपने हुलिया से मिलते-जुलते किसी शख्‍स के शव को पेश करके प्रचारित किया जाए कि उसकी मौत हो चुकी है। इसके बाद बीमा से मिले पैसे से ऐश किया जाए। उसने यह ख्‍याल साहू के साथ शेयर किया तो उसने भी हामी भर दी। इसके बाद सुकुमार ने अपने भाई भास्‍कर और ड्राइवर पोनप्‍पन को भी इसमें शामिल कर लिया।

सुकुमार की हमशक्‍ल लाश की तलाश अब समस्‍या थी कि सुकुमार जैसी दिखने वाली डेड बॉडी कहां से मिले? पहले तो सोचा या कि मेडिकल कॉलेज से लावारिस लाश मिल जाए। लेकिन बाद में जब इसमें नाकामी मिली तो ये कोई ऐसा शख्‍स खोजने लगे जो कद-काठी में सुकुमार जैसा हो फिर उसकी हत्‍या कर उसका इस्‍तेमाल किया जाए।

लिफ्ट लेकर खुद इनके फंदे में फंसा चाको प्‍लान को अंजाम देने के लिए 8000 रुपये में एक सेकेंड हैंड ऐम्‍बेसेडर कार खरीदी गई। कई दिन की तलाश के बाद 21-22 जनवरी 1984 की रात को खुद चाको इनके पास आया और अलपुझा जाने के लिए लिफ्ट मांगी। चाको सिनेमा हॉल में टिकट बिक्री का मूल्‍यांकन घर वापस लौट रहा था। सुकुमार और उसके दोस्‍तों की इसी की तलाश थी।

जबरन शराब पिलाकर की हत्‍या रास्‍ते में इन लोगों ने जबरन चाको को एथिल एल्‍कोहल मिली शराब पिलाकर बेहोश किया फिर गला घोंटकर उसे मार डाला। उसके बाद उसका चेहरा और सिर आग से जला दिया ताकि कोई पहचान न सके। इसके बाद उसकी अंगूठी, घड़ी और कपड़े उतारकर उसे सुकुमार के कपड़े पहना दिए गए। इस शव को KLY-5959 नंबर की कार की डिग्‍गी में रखकर साथ में दूसरी कार लेकर वे थन्‍नीमुक्‍कम इलाके में धान के खेत में पहुंचे। यहां चाको के शव को दूसरी कार की ड्राइविंग सीट पर बैठाकर उसे खेत में धकेल दिया और उस पर पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी। इसके बाद चारों वहां से भाग गए।

अभी जिंदा हुआ तो 74 का होगा सुकुमार इसके बाद जो कुछ हुआ वह केरल के इतिहास की सबसे लंबी फरारी की घटना साबित हुई। पुलिस कई बार मुखबिरी पर सुकुमार को पकड़ते-पकड़ते रह गई। वह कुछ घंटों पहले ही मौके से फरार हो जाता। इस दौरान उसका इलाज करने वाली एक नर्स का कहना है, ‘बहुत कम उम्‍मीद है कि सुकुमार अब जिंदा होगा, उसे गंभीर बीमारी थी। अगर जिंदा भी हुआ तो आज वह 74 साल का होगा।’

लगातार बनती रही हैं फिल्में सुकुमार के ऊपर फिल्‍में सन 1984 से ही बन रही हैं। हाल ही में एक और फिल्‍म इस घटना पर बनी है जिस पर रोक लगाने के लिए चाको के बेटे ने अदालत में अर्जी दी थी। चाको के परिवार का कहना था कि उनके पिता के हत्‍यारे का महिमा मंडन ठीक नहीं।

 

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ग्राम पंचायत चुनाव : पति जीता तो कंधे पर उठा पूरे गांव में घूमी पत्नी

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ग्राम पंचायत चुनाव : पति जीता तो कंधे पर उठा पूरे गांव में घूमी पत्नी

महाराष्ट्र में बीते सप्ताह 15 जनवरी को हुए हुए ग्राम पंचायत चुनाव के नतीजे सोमवार को आए, जिसमें 1.25 लाख उम्मीदवारों को जीत मिली है। इसी बीच जीत का जश्न मनाते हुए पुणे के एक गांव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में एक महिला अपने पति की जीत पर इतनी खुश दिख रही है कि उसने खुद पति को कंधों पर बिठा लिया। इतना ही नहीं, महिला ने पति को कंधे पर बिठाकर गांव भर में जूलूस निकाला।

पति ने जीत का श्रेय पत्नी को दिया
महिला की खुशी देखकर गांव वाले भी उसके साथ हो लिए और पति को उठाए रखने के लिए बीच-बीच में उसे सहारा देते रहे। इस दौरान गांव वाले भी महिला के साथ पूरे गांव में घूमे। यह अनोखा वीडियो पुणे के खेड़ तहसील के पालू ग्राम से सामने आया है। यहां के रहने वाले संतोष शंकर गुरव को मंगलवार को सरपंच के चुनाव में जीत मिली। उन्होंने जीत का सारा श्रेय अपनी पत्नी को दिया।

 

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मुस्लिम युवती ने राम मंदिर के निर्माण में दान कर धार्मिक समरसता का संदेश दिया

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मुस्लिम युवती ने राम मंदिर के निर्माण में दान कर धार्मिक समरसता का संदेश दिया

राम मंदिर निर्माण के लिए हर वर्ग के लोग बढ़चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक मुस्लिम युवती ने भी राम मंदिर के निर्माण में दान कर धार्मिक समरसता का संदेश दिया है, जिसकी लोग मिसाल दे रहे हैं। मुस्लिम युवती और लॉ की छात्रा इकरा अनवर खान ने भी 11 हजार रुपये का चेक दान में दिया है। लेकिन इससे पहले वो भूमि पूजन के दौरान भी एक और मिसाल पेश कर चुकी हैं।मंगलवार को अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती को उनके आवास पर इकरा खान ने चेक सौंपा। इकरा ने कहा कि भगवान राम उनके पूर्वज हैं। अयोध्या में मंदिर बनने के लिए मैंने छोटा सा सहयोग दिया है। मैंने सियासत करने वालों को जवाब दिया है कि धर्म अलग-अलग नहीं होते हैं। धर्म एक है और वह है इंसान का धर्म। मैं एक इंसान के रूप में राम मंदिर निर्माण में भागी बन रही हूं, जिसकी मुझे खुशी है। मंदिर बनने के बाद मैं श्री राम के दर्शन के लिए भी जाऊंगी।

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सरकार PM आवास योजना के तहत लाखों लोगों को आज देगी पैसा

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सरकार PM आवास योजना के तहत लाखों लोगों को आज देगी पैसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 2022 तक सबको पक्का घर दिलाने के मकसद से प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की शुरुआत की है. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मोदी सरकार आज यानी बुधवार को उत्तर प्रदेश को बड़ा तोहफा देने जा रही है. इस योजना में करीब 6 लाख लाभार्थियों को आर्थिक मदद दी जाएगी. यह आर्थिक मदद 2691 करोड़ रुपये की है. सरकार की इस स्कीम से सबका अपने घर का सपना पूरा हो सकेगा. जिन 6 लाख लाभार्थियों को आर्थिक मदद दी जा रही है, उनमें से 5.30 लाख को पहली किस्त, जबकि बाकी लोगों को दूसरी किस्त मिल रही है.PMAY को बेहतर रेस्पॉन्स मिल रहा है. ये स्कीम शहरी और ग्रामीण लोगों के लिए बनाई गई है. ये कम इनकम वाले लोगों के लिए EWS और LIG वाले ग्रुप को मिलने वाली क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम है. इसमें होम लोन पर ब्याज दरों में सब्सिडी मिलती है. यह योजना पूरे देश में लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है. योजना की सबसे खास बात सरकार की ओर से दी जाने वाली ढाई लाख रुपये की सब्सिडी है जो कि प्रोत्‍साहन का काम करती है.

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