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स्वास्थ्य

चेयर वर्क में तनाव कम करने के लिए जरुरी फिजिकल एक्टिविटी

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अक्सर आपने सुना या पढ़ा होगा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए फिजिकली एक्टिव बने रहना आवश्यक है। वहीं समय-समय पर फिट रहने के लिए विशेषज्ञ व्यायाम को रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की बात भी करते रहते हैं।एक स्टडी के परिणामों से पता चलता है कि दफ्तर में फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाकर आप अपने तनाव को काफी कम कर सकते हैं। अमेरिका के एरिजोना यूनिवर्सिटी ने ऑफिस में काम करने वाले लोगों पर यह अध्ययन किया है। इस अध्ययन में पाया गया है कि दफ्तर में अधिक शारीरिक गतिविधि करने वाले एंप्लॉई दूसरों की तुलना में कम तनाव झेलते हैं…अमेरिका के एरिजोना यूनिवर्सिटी के अध्ययन में फेडरल ऑफिस की बिल्डिंग में बैठे 231 एंप्लॉईज पर जांच की गई। स्टडी में पता लगा कि ओपन बेंच वाली व्यवस्था में काम कर रहे एंप्लॉई प्राइवेट ऑफिस में काम करने वाले दूसरे लोगों की तुलना में 32 फीसद ज्यादा एक्टिव थे। जो लोग शारीरिक रूप से ज्यादा एक्टिव थे, उनमें काम खत्म होने के बाद तनाव का स्तर दूसरे एंप्लॉई की तुलना में 14 फीसद तक कम था।दफ्तर में शारीरिक गतिविधियां कम होने की वजह से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे पहले आई एक स्टडी में भी कहा गया था कि कुर्सी पर लंबा वक्त बिताना कई बीमारियों को दावत दे सकता है और एंप्लॉई के जीवन अवधि को कम कर सकता है। तो फिर ऐसे में क्या करना चाहिए।

  1. कुर्सी से मत चिपकें: दफ्तर से आकर कुर्सी पर बैठ जाना और फिर लगातार बैठे रहना आपकी कमर को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। अत: काम के समय में कुछ इंटरवल्स निकालें और अपने कमरे में टहलें या फिर अपने डिपार्टमेंट के हॉल में थोड़ी देर के लिए टहलें।
  2. अन्य कर्मचारियों से इंटरैक्शन करें: कई बातें आप अपने सबऑर्डिनेट्स को मेल पर लिख कर बताते हैं। उन्हें मेल पर निर्देश देते हैं। आप यह कर सकते हैं कि जो बात आप दूसरे कर्मचारी से कहना चाहते हैं, मेल लिखने से पहले उठकर उसके पास जाएं, उसके बारे में उसे मौखिक बताएं या उस पर डिस्कस करें। तब वापस अपनी सीट पर लौटकर मेल करें।
  3. सीट पर चाय न मंगाएं: यदि चाय या पानी आपके टेबल पर ही पहुंच जाती है, तो इसे बंद कर दें। चाय पीने बाकायदा कैंटीन में जाएं। पानी स्वयं अपने हाथ से लेकर पिएं। इस तरह आपकी शारीरिक गतिविधियां बनी रहेंगी।
  4. मिलने वालों से गेस्ट रूम में मिलें: यदि आपसे मिलने क्लाइंट या गेस्ट आता है, तो उसे अपने कमरे में आमंत्रित न करें। उसे गेस्ट रूम में बुलाएं और वहां जाकर बात करें। वहां सोफे पर बैठेंगे, तो आप रिलेक्स फील करेंगे।

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देश-दुनिया

मेडिसिन के 2019 के नोबेल प्राइज की घोषणा शरीर में मॉलिक्यूलर स्विच की खोज के लिए मिला दो अमेरिकियों और एक ब्रिटिश चिकित्सा वैज्ञानिक को

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चिकित्सा विज्ञान के नोबेल विजेताओं की घोषणा हो गई है। इस वर्ष मेडिसिन में नोबेल प्राइज दो अमेरिकियों और एक ब्रिटिश चिकित्सा वैज्ञानिक को मिलने जा रहा है। जिन्होंने शरीर में मॉलिक्यूलर स्विच की खोज की है। यह स्विच मानव शरीर की कोशिकाओं में होने वाले ऑक्सीजन के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करता है। तीनों वैज्ञानिकों की इस खोज ने चिकित्सा विज्ञान के लिए हार्ट फेल होने, अनीमिया व कैंसर जैसे रोगों के इलाज की दिशा में और आगे बढ़ने के लिए नई राह दिखाई है।

किसे मिला 2019 का मेडिसिन में नोबेल प्राइज 

अमेरिका के डाना-फ़ार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के विलियम केलिन उस समय अवाक रह गए थे जब उन्हें बताया गया कि दो अन्य चिकित्सकों, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के ग्रीग सेमेनिया और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी ब्रिटेन के पीटर रैटक्लिफ, को संयुक्त रूप से 9 मिलियन स्वीडिश क्राउन ($ 913,000) का नोबेल पुरस्कार मिलेगा। नोबेल असेंबली के सदस्य थॉमस पेरलमन ने कहा, ‘घोषणा के बाद वे एक-दूसरे के साथ पुरस्कार साझा करते हुए बेहद खुश थे।’

किसलिए मिला नोबेल पुरस्कार

तीनों चिकित्सा वैज्ञानिकों के काम ने यह समझने का आधार दिया है कि कोशिकाएं ऑक्सीजन के स्तर को कैसे महसूस करती हैं-एक खोज जिस पर मेडिसिन रिसर्चर विभिन्न रोगों के उपचारों को विकसित करने के लिए आगे काम कर रहे हैं, उपचार जो शरीर के ऑक्सीजन-संवेदी तंत्र को सक्रिय या अवरुद्ध करके काम करते हैं। ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के एक विशेषज्ञ एंड्रयू मुर्रे ने तीनों को बधाई देते हुए कहा कि उनके काम का केंद्र बिंदु हाइपॉक्सिक रिस्पांस है-शरीर ऑक्सीजन के प्रवाह पर किस तरह की प्रतिक्रिया देता है और इससे उस प्रक्रिया को समझा जा सका जिसके जरिए हमारी कोशिकाएं ऑक्सीजन के स्तर को समझती व प्रतिक्रिया देती हैं।

कितनी महत्वपूर्ण है यह खोज

रान्डेल जॉनसन, करोलिंस्का इंस्टीट्यूट, स्वीडन के एक प्रोफेसर ने कहा कि चूंकि ‘ऑक्सीजन जीवन के लिए आवश्यक है और वस्तुतः जानवरों की सभी कोशिकाओं इसका उपयोग करती हैं, यह खोज शरीर के क्रियाकलापों के समझने के केंद्र में है। ‘यह एक पुरस्कार इसलिए है कि जो वास्तव में हमें मौलिक सत्य बताता है कि कोशिकाएं कैसे काम करती हैं,’ उन्होंने कहा। ‘उदाहरण के लिए, जब आप व्यायाम कर रहे होते हैं, तो आप बहुत अधिक तीव्र गति से ऑक्सीजन का उपयोग कर रहे होते हैं … और एक ऐसा स्विच होता है जो सेल को यह पता लगाने में मदद करता है कि उसे कितनी ऑक्सीजन मिल रही है और उसे कैसे व्यवहार करना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अगर किसी को ह्दयाघात होता है, तो मस्तिष्क में अचानक ऑक्सीजन नहीं जा रही होती है … उन कोशिकाओं, यदि वे जीवित रहना चाहती हैं, तो ऑक्सीजन का स्तर अनुकूल होने के लिए रास्ता खोजने की जरूरत होगी।

नोबेल पुरस्कार का इतिहास

प्रत्येक वर्ष दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कारों में से मेडिसिन पहला होता है। विज्ञान, शांति और साहित्य में उपलब्धियों के लिए पुरस्कार 1901 से दिए गए हैं और यह डायनामाइट आविष्कारक और व्यवसायी अल्फ्रेड नोबेल की इच्छा में बनाया गया है। मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार विजेताओं में पेंसिलिन के आविष्कारक महान वैज्ञानिक अलेक्जेंडर फ्लेमिंग और कार्ल लैंडस्टीनर का नाम शामिल हैं, जिन्होंने अलग-अलग रक्त प्रकारों की पहचान की और इसलिए सुरक्षित रूप रक्त चढ़ाना संभव हो सका।

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शिक्षा - तकनीक

घर पर बनायें हल्दी एलोविरा जैल और पाएं बेदाग त्वचा

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ज्यादातार महिलाओं को चेहरे पर दाग पिम्पल की समस्या सबसे ज्यादा परेशान करती है। चेहरा हमेशा दाग-धब्बों से भरा ही लगता है जो आपकी सुंदरता को छीन लेता है। बहुत सी महिलाएं पिंपल्स से छुटकारा पाने के लिए और चेहरे की स्किन को खूबसूरत बनाने के लिए बाहर के प्रोडक्ट भी इस्तेमाल करती हैं।

दरअसल, महिलाओं की शरीर में उम्र के हर पड़ाव पर शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे चेहरे पर पिंपल्स आ जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी चाहती हैं कि आपका चेहरा ग्लो करें और चेहरे पर किसी भी तरह के पिंपल्स और दाग-धब्बे ना हो तो आपके लिए 1 घरेलू नुस्खा बताने जा रहे है। इसके इस्तेमाल से आपको किसी तरह की परेशानी नहीं होगी और आपका चेहरा भी चमकने लगेगा। इसके लिए आपको क्या-क्या चीजें चाहिए वो सबसे पहले जान लेते है।

हल्दी जैल के लिए सामग्री…
एलोवेरा जैल : 3 बड़े चम्मच।
ऑर्गेनिक हल्दी पाउडर : 1 चम्मच।
टी ट्री ऑयल।

बनाने और लगाने का तरीका…
एक बाउल में एलोवेरा और ऑर्गेनिक हल्दी पाउडर डालें। इसे अच्छी तरह से मिलाएं और टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें मिलाएं। आप चाहे तो अपनी त्वचा के टाइप के अनुसार आवश्यक तेल का इस्तेमाल कर सकती है। इसे अच्छी तरह मिक्स होने तक मिलाएं। इसे किसी जार में रख लें और इसे अपने चेहरे, बॉडी और आई क्रीम के रूप में इस्तेमाल करें।

हल्दी और एलोवेरा के लाभ…
एलोवेरा में अद्भुत स्किन सूदिंग और हाइड्रेटिंग गुण होते हैं। यह एक सुरक्षात्मक परत प्रदान करता है जो त्वचा को नमी बनाए रखने में हेल्प करता है। एलोवेरा में हीलिंग गुण होते हैं, यह त्वचा को भीतर से नमी प्रदान करते हुए यूवी किरणों और गर्मी से क्षतिग्रस्त त्वचा को शांत करने में हेल्प करता है। त्वचा को कोमल बनाने और टाइट करने में भी हेल्प करता है। यह क्रीम जैल-बेस है जो प्रकार की त्वचा के लिए उपयुक्त होता है और हर मौसम में आप इसका इस्तेमाल कर सकती है।

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शिक्षा - तकनीक

फल व सब्जियां पका कर खाएं या कच्चा आइये जाने।

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माना जाता है कि कच्चे फल व सब्जियां, पकी हुई सब्जियों या फलों के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद होती हैं। इसी चक्कर में हम कई बार उन चीजों को कच्चा खा लेते हैं, जिन्हें पकाकर खाना चाहिए। वहीं हम ऐसी बहुत सी सब्जियों को पकाकर खाते हैं, जिसे कच्चा खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। खाने के तरीके में अक्सर हम गलती कर जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक ताजा अध्ययन में बताया गया है कि खाना पकाने का सही तरीका फल व सब्जी में पोषक तत्वों को कई गुना बढ़ा देता है। आइये जानते हैं किन चीजों को पकाकर खाना चाहिए और किन्हें कच्चा। साथ ही ये भी जानते हैं कि इन चीजों में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं।

कच्ची खायी जाने वाली चीजें

1. चुकंदर (Beetroot) – चुकंदर को लाभकारी तत्वों और विटामिन की वजह से गुणों की खान माना जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनसे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। साथ ही शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और मोटापे से लड़ने में मदद मिलती है। डायटीशियन के अनुसार चुकंदर को कच्चा खाना सबसे अच्छा होता है। पकाने से इसके पोषक तत्व, विशेष तौर पर विटामिन बी फोलेट की मात्रा 25 फीसद तक कम हो सकती है।

फोलेट (Folate) क्या होता है?

फोलेट विटामिन बी में से ही एक है, ये शरीर में स्वेत रक्त कणिका (White Blood Cells) और लाल रक्त कणिका (Red Blood Cells) का निर्माण करता है। ये कार्बोहाइड्रेड को ऊर्जा में परिवर्तित करता है। गर्भावस्था, बाल अवस्था और किशोरावस्था जैसी तीव्र विकास अवधि के दौरान इसका पर्याप्त सेवन करना अति आवश्यक होता है।

2. ब्रोकली (Broccoli) – पकी हुई या उबाली हुई ब्रोकली आपको स्वाद में अच्छी लग सकती है, लेकिन इसे कच्चा खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम, प्रोटीन, कैंसर कोशिकाओं और बढ़ती उम्र के लिए जिम्मेदार कोशिकाओं से लड़ने वाले पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

3. रसभरी, ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी (Raspberries, blueberries and blackberries) – दुनियाभर के डायटीशियन के अनुसार बेरी की तमाम किस्में एन्थोकायनिन (Anthocyanins), एलेजिक एसिड (Ellagic Acid), रेसवेराट्रोल (Resveratrol) जैसे एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants) तत्वों से भरपूर होती हैं। अगर इन्हें सुखाकर या पकाकर खाया जाए तो इसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं सूखी बेरी में प्राकृतिक बेरी के मुकाबले तीन गुना तक सुगर की मात्रा बढ़ जाती है। साथ ही सूखने या पकाने पर इनमें कैलोरी भी काफी बढ़ जाती है।

4. लाल मिर्च (Red pepper) – यदि आप लाल मिर्च के पोषक तत्वों का लाभ उठाना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि इसे कच्चा ही खाएं। लाल मिर्च में विटामिन सी की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। साथ ही इसमें विटामिन B6, विटामिन ई और मैग्नेशियम भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। लाल मिर्च को पकाते ही इसमें मौजूद विटामिन सी की मात्रा बहुत कम हो जाती है। अगर आपको लाल मिर्च पकाकर ही खानी है तो बेहतर होगा कि इसे भुनकर या तलकर इस्तेमाल में लाएं। इससे इसके पोषक तत्व कम नष्ट होते हैं।

5. लहसुन (Garlic) – लहसुन में दो बेहद महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं। पहला सल्फर युक्त अमीनो एसिड (sulphur-rich amino acid) जिसे एलिन (Alliin) भी कहा जाता है। दूसरा प्रोटीन आधारित एंजाइम (protein-based enzyme) जिसे एलिनास (allinase) भी कहा जाता है। इसमें एक दमदार एंटीबॉयोटिक, एंटी फंगल और एंटी वायरल तत्व पाया जाता है। लहसुन में कुल 10 तरह के प्राकृतिक शर्करा (Natural Sugars) जैसे- फ्रुक्टोज, ग्लूकोज और इंसुलिन आदि पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें काफी मात्रा में तांबा, लोहा, जस्ता, टिन, कैल्शियम, मैंगनीज, एल्यूमीनियम, जर्मेनियम और सेलेनियम जैसे ट्रेस खनिज पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद आवश्यक होते हैं। लहसुन में सेलेनियम का स्तर किसी भी अन्य पौथे के मुकाबले काफी ज्यादा होता है। ये सभी पोषक तत्व केवल कच्चे लहसुन में ही उपलब्ध रहते हैं।

पकाकर खायी जाने वाली चीजें

1. टमाटर (Tomato) – आमतौर पर हम सलाद में या ऐसे भी टमाटर को कच्चा ही खा लेते हैं। ऐसा माना जाता है कच्चा टमाटर बहुत लाभदायक होता है। हालांकि एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि कच्चे टमाटम के मुकाबले पकाकर खाया जाने वाला टमाटर ज्यादा लाभकारी होता है। कच्चा टमाटर आपको नुकसान कर सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि टमाटर, अन्य चमकदार फल व सब्जियों के साथ लाइकोपीन (Lycopene) नामक एक प्राकृतिक रूप से मिलने वाले यौगिक के साथ पैक किया जाता है। लाइकोपीन एक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो हृदय संबंधी बीमारियों से बचाता है। टमाटर के साथ लाइकोपीन भी अच्छी तरह से पक जाता है और खाने पर शरीर में अच्छे से मिल जाता है।

2. शतावरी (Asparagus) – इसमें विटामिन ए, सी, ई, फोलेट और पोटैशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसे पकाने से इसकी मोटी कोशिकाएं टूट जाती हैं। पकाने के बाद इसके पोषक तत्व शरीर में आसानी से मिल जाते हैं।

3. बैंगन (Brinjal or Eggplant) – बैंगन विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। पकाने से इसमें मौजूद फाइटोन्यूट्रिएंट एंथोसायनिन की शक्ति बढ़ जाती हैं, जो त्वचा के लिए काफी लाभदायक होता है।

4. गाजर (Carrot) – गाजर को सामान्यतः हम सलाद में या ऐसे भी कच्चा खाते हैं। ऐसा माना जाता है कि कच्चा गाजर काफी फायदेमंद होता है। हालांकि डायटिशियन का मानना है कि कच्चे गाजर के मुकाबले पका हुआ गाजर ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। गाजर में बीटा-कैरोटीन, फाइबर, विटामिन K1, पोटेशियम और एंटी ऑक्सीडेंट काफी मात्रा में मौजूद होता है। पके हुए गाजर में बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए में तब्दील हो सकने वाले एंटी ऑक्सीटेंड की मात्रा बढ़ जाती है। ये हमारों आंखों और रोग-प्रतिरोधक प्रणाली के लिए काफी फायदेमंद हो जाता है।

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