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‘लोलिता’ नॉवेल को भारत में क्यों बैन नहीं किया गया, किस्सा रोचक है, पढिये खबर

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दुनिया की 06 सबसे ज्यादा विवादास्पद किताबों में एक “लोलिता” उपन्यास को लेकर 65 साल बाद भी बहुत से लोग असहजता महसूस करते हैं लेकिन बड़ा सवाल है कि जब पूरी दुनिया में ये किताब प्रतिबंधित हो रही थी तो भला भारत में ये बैन क्यों नहीं हुई जबकि कई बड़े नेता और मंत्री भी इस पर रोक लगाना चाहते थे।

जब ये किताब प्रकाशित हुई तब भारत में “लेडी चटर्लीज लवर” नॉवेल पर बैन लगा हुआ था. इसके प्रकाशन के बाद दुनियाभर में जिस तरह इसकी कथावस्तु को लेकर तीखी आलोचनाएं होनीं शुरू हुईं तो उसकी जानकारी भारत तक भी पहुंची. भारत के समाचार माध्यमों ने भी उसके बारे में छापना शुरू किया था।

ये किताब फ्रांस में सितंबर 1955 में प्रकाशित हुई थी. इसके छपते ही मानो दुनियाभर में इसको लेकर तूफान सा आ गया. हर कोई इस उपन्यास को प्रतिबंधित देखना चाहता था. हालांकि इस उपन्यास पर लोगों का ध्यान तब गया था जबकि रूस और फ्रांस ने छपने के कुछ दिनों बाद ही इस पर बैन लगा दिया. फिर इसकी चर्चाएं दुनियाभर में फैलने लगीं।

इसके लेखक व्लादीमीर नोबाकोव का बचपन रूस में बीता लेकिन बाद रूसी क्रांति के कारण उनके परिवार को वहां से निकल गया. बाद में उनका परिवार बर्लिन में जाकर रहने लगा. जहां उनके पिता ने एक अखबार भी निकाला. नोबोकोव की कुछ पढ़ाई इंग्लैंड में भी हुई।

भारत में कई नेता इसे प्रतिबंधित कराना चाहते थे

हालांकि अब अगर माडर्न लाइब्रेरी के 100 बेस्ट नॉवेल्स की बात करें तो नोबोकोव की लोलिता को लेखन शैली के हिसाब ने चौथे नंबर पर रखा जाता है. उनकी कई और किताबें भी काफी बेहतर मानी गईं. लेकिन “लोलिता” के कंटेट को आज भी तमाम लोग अलग नजरिए से देखते हैं. भारत में जब ये किताब आई तो सरकार के कई बड़े मंत्री और नेता इसको प्रतिबंधित कराना चाहते थे।

मुंबई कस्टम ने किताबों के पैकेट को रोक लिया 

अभिनव चंद्रचूड़ की किताब Republic of Rhetoric: Free Speech and the Constitution of India में इस बारे में लिखा है कि 1959 में मुंबई के जयको पब्लिशिंग हाउस ने विदेश से इसकी कई कापियां आयात कीं. इस सामान को बांबे के कस्टम कलेक्टर ने इस आधार पर जांच के लिए रोक लिया कि इसकी सामग्री अश्लील हो सकती है।

इसके बाद बांबे से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक “करंट” के संपादक डीएफ कराका ने वित्त मंत्री मोरारजी देसाई को एक पत्र लिखा, ” ये नॉवेल बहुत आपत्तिजनक है. इसमें एक वयस्क पुरुष और 12-13 साल की नाबालिग लड़की के बीच संबंधों को ग्लोरीफाई किया गया है. ये वाकई बहुत गंदा है।

मोरारजी चाहते थे ये प्रतिबंधित हो 

देसाई ने इस पत्र की फाइल पर नोटिंग लिखी, “मैं नहीं समझता कि अगर ये किताब अश्लील नहीं है, तो किसे अश्लील कहना चाहिए. ये तो सेक्स विकृति है. गृह मंत्रालय को इस पर सलाह लेना चाहिए.” इसके बाद उन्होंने ये फाइल लालबहादुर शास्त्री के पास भेज दी. तब नेहरू ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और किताब को भारतीय बाजार में बिकने की अनुमति मिल गई।

शास्त्री भी चाहते थे बैन, तब नेहरू ने हस्तक्षेप किया

इसके बारे में पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी किताब “बियांड द लाइंस – एन आटोबायोग्राफी” में लिखा है. उन्होंने लिखा, “कांग्रेस के किसी नेता ने लालबहादुर शास्त्री को लिखा कि पुस्तक भंडारों में अभी अभी पहुंची लोलिता इतनी अश्लील है कि इसे बैन कर देना चाहिए. शास्त्री ने इसी संबंध में नेहरू को लिखा।

अगली सुबह नेहरू का जवाब आ पहुंचा. (वो सभी पत्रों का जवाब 24 घंटे के अंदर दे देते थे). उन्होंने इस विषय पर विस्तार से बहस करते हुए लिखा कि लोलिता को क्यों बैन नहीं किया जाना चाहिए और लेडी चटर्लीज लवर पर आगे भी बैन क्यों जारी रहना चाहिए.” लोलिता को बैन नहीं किया गया।

अमेरिका को छोड़ दुनियाभर में बैन हुई 

हालांकि ये किताब दुनिया के तमाम देशों में बैन हुई. जिसमें फ्रांस, सोवियत संघ, इंग्लैंड, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड, आदि शामिल थे लेकिन अमेरिका में ये बैन नहीं हुई थी. किताब के आने के बाद उस पर ब्रिटेन और फ्रांस में प्रतिबंध लगा दिया गया. ब्रिटेन में यह रोक 1959 तक रही।

अब तक 05 करोड़ कापियां बिक चुकी हैं 

हकीकत ये भी थी कि जैसे ही ये किताब छपी. तीसरे दिन ही ये सारी की सारी बिक गई.  इसे फिर छापना पड़ा. इसके बाद इसका प्रिंट आर्डर बढ़ता ही गया. इसकी अब तक पांच करोड़ प्रतियां छप चुकी हैं, इस पर दो फिल्में भी बन चुकी हैं।

क्या है किताब में 

व्लादीमीर नबोकोव द्वारा लिखी यह किताब एक अधेड़ आदमी हम्बर्ट और 12 साल की लड़की डोलोरस हेज़ के रिश्ते पर आधारित है. इसमें लेखक ने एक बच्ची के प्रति अपने प्यार के बारे में विस्तार से बताया है. इसलिए कोई प्रकाशक इसे छापने को तैयार नहीं था. आख़िरकार, पेरिस की एक ऐसी कंपनी ने इसे छापा, जो पोर्नोग्राफ़ी छापा करती थी। यौन विषय की वजह से जो किताबें विवादों में इसी तरह घिरीं, उनमें प्रमुख हैं, गुस्ताव फ़्लॉबर्ट की ‘मैडम बॉवरी’, जेम्स जॉयस की ‘यूलीसिस’, डीएच लॉरेन्स की ‘लेडी चैटरलीज़ लवर’ और मार्किव्स डी साद की ‘जस्टिन’।

 

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सरकार PM आवास योजना के तहत लाखों लोगों को आज देगी पैसा

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सरकार PM आवास योजना के तहत लाखों लोगों को आज देगी पैसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 2022 तक सबको पक्का घर दिलाने के मकसद से प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की शुरुआत की है. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मोदी सरकार आज यानी बुधवार को उत्तर प्रदेश को बड़ा तोहफा देने जा रही है. इस योजना में करीब 6 लाख लाभार्थियों को आर्थिक मदद दी जाएगी. यह आर्थिक मदद 2691 करोड़ रुपये की है. सरकार की इस स्कीम से सबका अपने घर का सपना पूरा हो सकेगा. जिन 6 लाख लाभार्थियों को आर्थिक मदद दी जा रही है, उनमें से 5.30 लाख को पहली किस्त, जबकि बाकी लोगों को दूसरी किस्त मिल रही है.PMAY को बेहतर रेस्पॉन्स मिल रहा है. ये स्कीम शहरी और ग्रामीण लोगों के लिए बनाई गई है. ये कम इनकम वाले लोगों के लिए EWS और LIG वाले ग्रुप को मिलने वाली क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम है. इसमें होम लोन पर ब्याज दरों में सब्सिडी मिलती है. यह योजना पूरे देश में लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है. योजना की सबसे खास बात सरकार की ओर से दी जाने वाली ढाई लाख रुपये की सब्सिडी है जो कि प्रोत्‍साहन का काम करती है.

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एक ट्रिप से मिला आईडिया और 3 दोस्तों ने खड़ी कर दी 7.5 करोड़ की बाइक रेंटल कंपनी

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एक ट्रिप से मिला आईडिया और 3 दोस्तों ने खड़ी कर दी 7.5 करोड़ की बाइक रेंटल कंपनी

सर्दी-गर्मी हो या फिर बरसात का मौसम, हर साल एडवेंचर के शौकीन बाइक के जरिए रोड ट्रिप पर निकल जाते हैं। एडवेंचर ट्रिप पर अक्सर लोग पहाड़, जंगल या किसी ऐसी जगह जाना पसंद करते है जहाँ पहुँचना सभी के बस की बात नहीं होती। ऐसे में आपके पास एक बेहतर बाइक होनी चाहिए, जो लंबे सफर पर बिना किसी दिक्कत के आपको मंजिल तक पहुँचा सके। लेकिन क्या आपको पता है कि रोड ट्रिप के लिए बाइक रेंट पर भी मिलती है ? आज हम आपको तीन दोस्तों की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिन्होंने एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया है, जिसके जरिए आप बाइक रेंट पर ले सकते हैं।

यह कहानी दक्षिण भारत की पहली लाइसेंस्ड बाइक रेंटल कंपनियों में से एक, ‘रॉयल ब्रदर्स’ की है। यह कंपनी आज देश के 7 राज्यों के अलग-अलग टूरिस्ट प्लेसेस पर रॉयल एनफील्ड, बजाज, बेनेल्ली, KTMs और अलग-अलग स्कूटी जैसे हौंडा एक्टिवा, यामाहा आदि रेंट पर उपलब्ध करा रही है। उनकी पूरी प्रक्रिया बहुत ही औपचारिक और स्टेप बाय -स्टेप होती है। आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे इस कंपनी की शुरुआत हुई।

कैसे हुई शुरुआत:

बेंगलुरू स्थित इस कंपनी को साल 2015 में तीन इंजीनियर ने शुरू किया था। इन तीन फाउंडर्स में दो, अभिषेक चंद्रशेखर और आकाश एस. साल 2014 में अपने कॉलेज के दौरान ही पांडिचेरी घूमने गए थे। तब वह बेंगलुरू के आरवी कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग में तीसरे साल के छात्र थे। वह दोनों बस से पांडिचेरी पहुँचे। उन्होंने इस शहर के बारे में काफी सुना था तो खुद बाइक रेंट पर लेकर इसे घूमने की ठानी।

अभिषेक बताते हैं, “हमने ऑनलाइन एक बाइक रेंट पर लेने के लिए सर्च किया। हमें सिर्फ जस्टडायल पर एक लिस्टिंग मिली। वहाँ से हमने फ़ोन किया और पूछा कि क्या हम बाइक रेंट पर ले सकते हैं। सामने से जवाब हाँ में आया और उस व्यक्ति ने हमें पहुँचकर उसे इन्फॉर्म करने के लिए कहा। लेकिन हमारी सिर्फ बात ही हुई थी और हमने न कोई पेमेंट की और न ही उस व्यक्ति ने हमें कोई ईमेल या मैसेज पर बाइक बुकिंग की कन्फर्मेशन दी।”

हालाँकि, वह एक आशा के साथ पांडिचेरी पहुँच गए और वहाँ सुबह साढ़े पाँच बजे एक प्रसिद्ध बीच लोकेशन पर उस वेंडर का इंतज़ार करने लगे। आगे आकाश कहते हैं कि वह वेंडर उन्हें बाइक दे गया जो बहुत अच्छी हालत में नहीं थी। उन्होंने उसे कैश में पेमेंट की तो उनके पास कोई साक्ष्य भी नहीं था इस पेमेंट का। जाते वक़्त उस वेंडर ने सिर्फ इतना कहा कि अगर कहीं पुलिस रोके तो वह उसे कॉल कर लें। बहरहाल, आकाश और अभिषेक की वह ट्रिप अच्छी रही।

लॉन्च की अपनी कंपनी:

ट्रिप से लौटने के बाद, दोनों दोस्तों ने इस पर विचार किया और सोचा कि वह इस काम में अच्छा कमा सकते हैं। उन्होंने अपने इस आईडिया पर काम करना शुरू कर दिया और उन्होंने तय किया कि वह ऐसी रेंटल कंपनी शुरू करेंगे जहाँ लोग अपनी पसंद की बाइक चुनें, ऑनलाइन या ऑफलाइन पेमेंट की स्लिप हो और उनकी बुकिंग की कन्फर्मेशन भी उन्हें मिले। साथ ही, बाइक या स्कूटी के पिक अप और ड्राप का समय भी फिक्स हो।

2015 की शुरुआत में, उन्होंने कॉलेज से डिग्री पास की, लेकिन अपने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए, क्योंकि वह अपने आईडिया को और आगे बढ़ाना चाहते थे। उस साल जुलाई तक, उन्होंने कुलदीप पुरोहित को भी शामिल कर लिया। कुलदीप भी ऑटोमोबाइल में काम करना चाहते थे और उन्होंने इन दोनों के साथ यह कंपनी पंजीकृत की। तीनों ने अभिषेक के एक रिश्तेदार के अपार्टमेंट में एक छोटा सा ऑफिस किराये पर लिया और यहाँ अपना रिसर्च शुरू किया कि वे कैसे व्यावसायिक उपयोग के लिए मोटरसाइकिलों का पंजीकरण कर सकते हैं।

अभिषेक कहते हैं, ”जबकि कमर्शियल नंबर प्लेट के लिए कारों को पंजीकृत करना आसान था, पर बाइक के लिए यह एक असामान्य बात थी। कुछ महीनों के लिए, हम इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए हर दिन बेंगलुरु के केंद्रीय आरटीओ से मिलने जाते रहे। हालांकि, कोई भी हमारी मदद नहीं कर पाया। अंत में, हम कर्नाटक परिवहन के सचिव, पी. रविकुमार के पास पहुँचे। वह हमारे प्रस्ताव से प्रभावित हुए। चूंकि अब इस मॉडल में वैट टैक्स (अब जीएसटी) जोड़ा गया है, इसलिए इससे रेवेन्यू भी होगा।” उन्होंने आगे कहा कि मंत्री ने आरटीओ अधिकारियों को सूचित किया, जिससे कंपनी के लिए पंजीकरण प्रक्रिया में आसानी हुई।

तीनों दोस्तों ने अपने परिवार और रिश्तेदारों से उधार लेकर फंडिंग के 20 लाख रुपये इकट्ठे किए और पाँच रॉयल एनफील्ड बाइक खरीदीं। उनके पास आवश्यक बीमा के साथ व्यावसायिक रूप से पंजीकृत वाहन थे।

“ऑर्डर्स और बुकिंग के लिए, हमने मार्केटिंग और अन्य तकनीक से संबंधित गतिविधियों को एक तीसरी पार्टी को आउटसोर्स किया। हालाँकि, यह ठीक नहीं था। इसलिए फिर हमने वेब और ऐप डेवलपर्स, और मार्किट विशेषज्ञों को हायर किया और आज, हमारे पास सात राज्यों में काम करने वाले 60 लोगों की एक टीम है,” आकाश कहते हैं।

आज, कंपनी के पास 2,000 से अधिक बाइक और भारत के सात राज्यों में 15 फ्रेंचाइजी हैं, जिनमें केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं। कंपनी उपयोगकर्ताओं को अपने प्लेटफॉर्म पर बाइक में निवेश करने का विकल्प भी प्रदान करती है। संचालन के पहले वर्ष में, कंपनी ने 30 लाख रुपये की कमाई की, और वित्तीय वर्ष 2019-20 में, उन्होंने 7.5 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया है।

बाइक कैसे बुक करें?

प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से बाइक किराए पर लेने के लिए, किसी को भी रॉयल ब्रदर्स की वेबसाइट या एप्लिकेशन पर खुद का रजिस्ट्रेशन करना होगा, और अपना आईडी प्रूफ और ड्राइविंग लाइसेंस अपलोड करना होगा। इसके बाद वह शहर चुन सकते हैं जहाँ वह घूमने जा रहे हैं, तारीख डालें और फिर अपनी पसंद की बाइक चुनें।उनका किराया न्यूनतम चार घंटे से शुरू होता है, और अधिकतम नौ महीने तक चलता है।

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मध्य प्रदेश : लव जिहाद मामले में पहली गिरफ्तारी

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मध्य प्रदेश में लव जिहाद कानून के तहत पहली गिरफ्तारी हुई है. यह मामला प्रदेश के बड़वानी जिले में दर्ज की गई है. यहां एक 22 वर्षीय युवती ने 25 साल के एक युवक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है. मामला दर्ज होने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी कर ली गई है.आरोपी सोहेल मंसूरी उर्फ सन्नी एक ट्रक ड्राइवर है और पार्ट टाइम डीजे प्लेयर भी है. पुलिस ने प्रदेश में ‘धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश-2020’ के तहत इस व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया है.बड़वानी कोतवाली पुलिस स्टेशन में युवक के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) 294, 323 (हमला), 506 (आपराधिक धमकी) और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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