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आज है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस, अपने आस पास मत जाया होने दें किसी की जिंदगी।

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‘वर्किंग टूगेदर टू प्रिवेंट सुसाइड’ का नारा ‘वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे’पर 
10 सितंबर को ‘वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे’ है और इसकी थीम है ‘वर्किंग टूगेदर टू प्रिवेंट सुसाइड’। वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगों को आत्महत्या से जुड़े प्रश्नों और उनके उत्तर के बारे में जागरूक करना है. आत्महत्या के आंकड़े साल दर साल बढ़ते ही जा रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि 8 लाख लोग हर साल आत्महत्या से मर जाते हैं। यानि हर 40 सेकेंड में एक इंसान आत्महत्या कर रहा है. इसके 25 गुना लोग आत्महत्या का प्रयास भी करते हैं। इसका दंश वे झेलते हैं वे जिनका कोई अपना आत्महत्या कर चला जाता है। विश्वभर में 15 से 29 वर्ष के लोगों की मौत का दूसरा सबसे प्रमुख कारण आत्महत्या ही है. भारत में हर घंटे एक छात्र सुसाइड करता है. आत्महत्या की वजह से होने वाली इतनी मौतों के बाद भी हमारे समाज में इसके प्रति जागरूकता की कमी है. डिप्रेशन, तनाव और आर्थिक तंगी के अलावा गरीबी और पढ़ाई सुसाइड की मुख्य वजह मानी जाती हैं.
 
आत्महत्या की समस्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। इधर तीन दशकों में विज्ञान की प्रगति के साथ जहां बीमारियों से होने वाली मृत्यु संख्या में कमी हुई है, वहीं इस वैज्ञानिक प्रगति के बीच आत्महत्याओं की संख्या पहले से अधिक हो गई है। यह समाज के हर एक व्यक्ति के लिए चिंता का विषय है। इसलिए 10 सितंबर ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
 
भारत में आत्महत्या के प्रमुख कारण
 
भारत में आत्महत्या के प्रमुख कारणों में भयानक बीमारी का होना, पारिवारिक कलह, दांपत्य जीवन में संघर्ष, गरीबी, मानसिक विकार, परीक्षा में असफलता, प्रेम में असफलता, आर्थिक विवाद, राजनैतिक परिस्थितियां होती हैं। स्त्रियों की अपेक्षा पुरुष अधिक आत्महत्या करते हैं। आत्महत्या करने वाली स्त्रियों में सर्वाधिक संख्या उन महिलाओं की है जो विवाहित थीं तथा उम्र 20 से लेकर 29 वर्ष के बीच थीं। इसके अतिरिक्त ऐसी महिलाओं का प्रतिशत सबसे अधिक पाया गया जिन्होंने ससुराल वालों के साथ झगड़ा हो जाने के कारण आग से जलकर आत्महत्या की।
 

आत्महत्या वैयक्तिक विघटन का चरम रूप होते हुए भी सामाजिक विघटन के घनिष्ठ रूप से संबंधित है। भारत में व्यक्तिगत कारणों में-व्याक्ति शारीरिक व्याधियों कोई असाध्य बीमारी, अत्यंत पीड़ादायी रोग आदि के कारण आत्महत्या कर लेता है। इसी प्रकार मानसिक विकार के कारण उन्माद, अत्यधिक चिंता, मानसिक अस्थिरता, स्नायुविकार, सदैव हीनता की भावना से ग्रसित रहने, निराशा से घिरे रहने, अत्यधिक भावुक, क्रोधी होना अथवा इच्छाओं का दास होना आदि प्रमुख मानसिक विकार हैं, जिनके अधीन होकर व्याक्ति आत्महत्या कर लेता है। कोई व्यसन शराब, जुआ यौन लिप्सा अथवा अपराधी कार्यो, जैसे व्यक्तिगत दोषों की अधिकता के कारण सामाजिक जीवन से अपना तालमेल करने में असमर्थ रहने पर भी आत्महत्या कर लेता है।

छात्रों के सिर पर परीक्षा का तनाव रहता है प्रतिस्पर्धा के दौर में और भी बढ़ जाता है। कुछ अभिवावक व अन्य लोग सर्वाधिक अंको को ही महत्व देते हैं जिससे छात्र पर मानसिक दबाव और बढ़ा देते हैं जबकि उसकी अपनी कुछ विषयों को लेकर रुचि व कठिनाइयां होती हैं। उसको उचित मनोवैज्ञानिक निर्देशन दिलाने की जरूरत होती है। व्यक्ति के जीवन को सुसंगठित रखने में परिवार का स्थान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। परिवार का संगठन नष्ट होने से व्यक्ति की मानसिक शांति, सुरक्षा और व्यक्तित्व में बाधा उत्पन्न होने लगती है तो अपनेजीवन को समाप्त करनेकी भावना प्रबल हो सकती है। जो परिवार तलाक, अलगाव, कलह के कारण टूटी हुयी स्थिति में होते हैं उनमें भी आत्महत्या की घटनाएं अधिक पायी जाती हैं।
दांपत्य जीवन में आपसी सामंजस्य न होने से और परिवार में दुर्व्यवहार तथा अविश्वास भी कभी-कभी आत्महत्या का कारण बनते हैं । सौतेले रिश्ते के व्यवहार, युवा सन्तानों द्वारा माता-पिता के प्रति तथा सास-ससुर द्वारा नवविवाहिता बहू के साथ गंभीर दुर्व्यवहार से शोषित व्याक्ति द्वारा आत्महत्या करने के परिणाम देखने को मिलते हैं।
दहेज प्रथा के कारण कितनी ही अविवाहित लड़कियां तथा नवविवाहित स्त्रियों के द्वारा आत्महत्या की घटनाएं सामने आती हैं। कभी लोग सामाजिक प्रतिष्ठा के पद की हानि के क्षोभ में आत्महत्या कर लेते हैं। राजनैतिक उथल-पुथल और व्यापार बैठ जाने से यह ज्यादा देखने को मिलता है।
आर्थिक तंगी भी आत्महत्या का कारण बनती है जब निर्धनता के कारण व्यक्ति अपने आश्रितों की अनिवार्य जरूरते पूरी नहीं कर पाता अपने ही बच्चों के सामने तिरस्कृत जीवन व्यतीत करता है। वर्तमान समय में बेकारी की समस्या के चलते युवा बेरोजगार अधिक आत्महत्या करते पाये जाते हैं। साधन सम्पन्न व्यक्ति अचानक व्यापारिक असफलता के कारण से आत्महत्या के लिए विविश हो जाते हैं।
किसानों की फसल की तबाही और कर्ज की अदायगी की चिंता से हो रही आत्महत्या भी गंभीर समस्या बन गई है। उन्हें केवल कृषि पर निर्भरता के बजाय कोई कृषि आधारित या अन्य उद्योगों से जोड़ना होगा।
 भारत में औद्योगीकरण तथा नगरीकरण में वृद्धि होने के कारण आत्महत्या की घटनाओं में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। आज गांवों से शहरों की ओर जाने वाले लाखों श्रमिक एकाकी जीवन व्यतीत करते हैं। मशीनों के शोर में काम करने वाले लाखों लोग जल्दी ही मानसिक विकारो तथा तनाव का शिकार हो जाते हैं।
 हजारों दांपत्य बंधन शिथिल पड़ गए हैं, औपचारिक तथा स्वार्थपूर्ण संबंधों के चलते एक औसत आदमी की मानसिक शांति को समाप्त कर देते हैं, भौतिक मूल्यों के बढ़ते हुए प्रभाव ने सामाजिक सामंजस्य की नई समस्याओं को जन्म दिया है।
पांच सर्वाधिक आत्महत्याओं वाले प्रदेशों में छत्तीसगढ़ भी
 
देश में पांच सर्वाधिक आत्महत्याओं वाले प्रदेशों में छत्तीसगढ़ भी शामिल है । प्रदेश में 27.7 प्रति 100,000 लोग आत्महत्या करते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन सी आर बी) 2015 के आंकड़ों के अनुसार यह देश में अधिकतम आत्महत्याओं वाले प्रदेशों में से एक है और देश की औसत से भी ज्यादा है। दुर्ग-भिलाई नगर में यह आंकड़ा 34.9/100,000 जबकि भारत का यह आंकड़ा केवल 10.6 है ।
आत्महत्या या आत्महत्या की कोशिश विभिन्न कारणों से की जाती है – घरेलू समस्याओं से लेकर नशा करने तक या परीक्षाओं में असफलता और प्रेम प्रसंग।
 
इस तरह किया जा सकता है समाधान
 
अन्य समस्याओं की तरह आत्महत्या की समस्या का समाधान करना भी आवश्यक है। इसके लिए अवसाद या आत्महत्या की प्रवृत्ति से ग्रसित व्यक्ति से संपर्क करना होगा। उनके साथ खुलकर संवाद करना होगा, उनके विचार और दृष्टिकोण सहानुभूति पूर्वक जानना होगा, इसके बाद उनकी उचित देखभाल भी करना जरूरी होगा। उनकी मन:स्थिति बदलेगी तो परिस्थितियां भी बदलेंगी। आत्महत्या की ओर झुके व्यक्ति से सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करके उसकी मन:स्थिति को समझना होगा, उसके भावावेश को कम किया जाय तथा उसे किसी मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।
 
रोकथाम
आत्महत्या को रोका जा सकता है। इस वर्ष की विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की विषय है- संपर्क, संवाद और देखभाल। यह तीन शब्द आत्महत्या की रोकथाम में मूल मंत्र साबित हो सकते हैं। आत्महत्या के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, व्यक्तिगत, सांस्कृतिक एवं पारिस्थकीय कारण होते हैं।
 
आत्महत्या वैयक्तिक विघटन की चरम अभिव्यक्ति है। व्यक्ति का आत्म जब विभिन्न सामाजिक दबावों के इतना अधीन हो जाता है कि वह अपना जीवन समाप्त कर लेता है, इसी स्थिति को हम आत्महत्या कहते हैं। आत्महत्या व्यक्ति की मानसिक दुर्बलता का परिणाम है, इसलिए इस घटना को एक मानसिक विकार के रूप में देखा जाना चाहिए।
 
मनोचिकित्सक से ले सलाह
 
मनोचिकित्सक उसका समाधान बातचीत से सुझाएंगे और आवश्यक दवाएं भी देंगे। ऐसी समितियों का गठन करना चाहिए जो जीवन में निराश लोगों की समस्याओं का सहानुभूतिपूर्वक विश्लेषण करके उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा का कुछ प्रबंध कर सके। आत्महत्या कम करने के लिए आवश्यक है कि समाज में विभिन्न वर्गों के बीच तथा परिवार में सदस्यों के बीच स्वस्थ संबंधों का विकास हो।
 
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर रात को 8 बजे लोग अपने घर की खिड़की पर मोमबत्ती जलाकर आत्महत्या के रोकथाम को समर्थन व्यक्त करेंगे। आत्महत्या से बिछड़े प्रियजन को याद करेंगे और आत्महत्या की प्रवृत्ति ग्रसित लोगों के उबरने व उनके खुशहाल जीवन लिए रोशनी का एक दीप रखेंगे।
 
छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में   “नवजीवन’’ कार्यक्रम – 
छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में आत्महत्याओं को कम करने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। महासमुंद जिले में जिला अधिकारी की पहल पर “नवजीवन’’ कार्यक्रम की शुरुआत की है जिसके तहत आत्महत्या के बारे में जागरूकता बढ़ाना, तनाव को कम करना, समुदाय में मानसिक विकारों की पहचान और उपचार करवाना, और युवाओं में तनाव प्रबंधन के कार्यक्रम स्कूलों और कालेजों में करवाए जा रहे हैं।
इसके अलावा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग मीडिया के साथ भी आत्महत्या की दर में कमी लाने के लिए काम कर रहा है । इस दौरान रेडियो जिंगल, सामुदायिक बैठकें, माइकिंग, वाल पेंटिंग और लोकल सिनेमा में प्रचार प्रसार भी शामिल है।
वर्किंग टूगेदर टू प्रिवेंट सुसाइड –
 
आत्महत्याएं रोकने के लिए मिलकर काम करना आवश्यक है अन्यथा लगातार बढ़ते आंकड़ों को हम देखते ही रह जाएंगे। सृष्टि भी कहती हैं कि यह काम एक आदमी या सरकार नहीं कर सकती। सभी को मिल कर काम करना होगा। जब हम मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना शुरू कर देंगे तो समस्या काफी कम हो जाएगी। जब आप किसी से कहते हैं कि आपको बुखार है तो वे आगे बढ़ कर आपको दवाई बताएंगे और देंगे भी लेकिन जब आप किसी को बताते हैं कि आप मानसिक तौर पर स्वस्थ नहीं हैं तो उनकी प्रतिक्रिया बहुत ही अजीब होती है। मीडिया को कहना चाहती हूं कि आत्महत्या की खबरों को बहुत ही सतर्कता से प्रसारित करें। वे जब कहते हैं कि पबजी की वजह से आत्महत्या की गई या ब्लूव्हील चैलेंज की वजह से आत्महत्या की, तो वे कारण को बहुत ही सरल कर देते हैं। जबकि व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने के कई गंभीर कारण होते हैं। कारणों को सरल कर देना या फिर मामले को सनसनीखेज बना देना सही नहीं है बल्कि इसे सकारात्मक रूप में लोगों के सामने लाया जाना चाहिए। मीडिया कहे कि इसके लिए आपके पास समाधान है।
 
हैप्पीनेस मनाएं – 
सरकारी स्कूलों में मेंटल हेल्थ लिटरेसी कार्यक्रम नहीं है। शिक्षक प्रशिक्षित नहीं हैं । मॉड्यूल्स प्रभावी नहीं। सोलह साल से कम उम्र के बच्चों को भी तनाव होता है। बच्चों को स्कूल लेवल पर ही ट्रेनिंग मिलनी चाहिए कि वे इन स्थितियों का कैसे सामना करें। इससे आत्महत्याएं सौ प्रतिशत तो नहीं रुकेंगी लेकिन यदि बच्चों को बचपन से ही प्रशिक्षित किया जाए तो इन्हें पचास प्रतिशत तक रोका जा सकेगा। यह सब कोर्स में होना होगा। जब केमिस्ट्री और ज्योग्रॉफी पढ़ाई जा सकती है तो मेंटल हेल्थ क्यों नहीं? स्कूलों में ईयर ऑफ टॉलरेंस या ईयर ऑफ हैप्पीनेस मनाएं। बच्चे निबंध लिखेंगे, वाद-विवाद करेंगे तब जानेंगे कि टॉलरेंस क्या है, हैप्पीनेस क्या है? हमें बच्चों को सशक्त बनाना होगा। हमें बच्चों को सिखाना होगा कि अगर परेशान हैं तो अपनी जिंदगी ही नहीं दे देना है। कभी-कभी बच्चों पर पियर प्रेशर भी बहुत हो सकता है। 
 
गुजरात सुसाइड प्रिवेंशन की ब्रांड एंबेसडर होंगी पीवी सिंधु
वल्र्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी और यूथ आइकॉन पुसरला वेंकट सिंधु गुजरात सुसाइड प्रिवेंशन की ब्रांड एंबेसडर होंगी। 10 सितंबर को टोल फ्री 108 हेल्पलाइन नंबर की शुरुआत करेंगी।
 
आप कर सकते हैं मदद – 
 
यदि आपको कुछ अलग लगता है तो बातचीत करें। अगर परिवार या दोस्तों में कोई अवसाद में दिखता है तो उसकी काउंसलिंग करवाएं।
परिवार में मानसिक स्वास्थ्य को अहम जगह दें। एक ब्रेक लें, लाइफस्टाइल बदलें, योग और ध्यान करें।
 
हम करे रहे तनाव से उबरने में मदद – 
हम लोगो को तनाव से उबरने में मदद कर रहे हैं, अगर आपके आस पास ये लगे की कोई परेशान है या तनाव में दिखाई दे या व्यवहार में बदलाव महसूस करें या लगे की कोई अपना अकेले रहना चाहता है, अपने दिल की बात किसी से शेयर नहीं कर रहा या रात जाग रहा हो या चुप चाप रहने लगे तो हमारे हेल्प लाईन पर कॉन्टेक्ट करें, पर्सनली मुलाकात करें। हम काउंसिलिंग और अन्य तरीके जो भी जरुरी लगेंगे उससे तनाव से उबरने के लिए वो सम्भव मदद जरूर करेंगे। आप हमारे ग्रुप से जुड़े और लोगो को हैपीनेस देने और बाटने के हमारे मुहीम में शामिल हो. 

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टिक टॉक स्टार ने छत पर चढ़कर दी आत्महत्या की धमकी, जानिए क्या है कारण

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दिल्ली में टिकटॉक स्टार अरमान मलिक उर्फ संदीप आत्महत्या करने के लिए रविवार को हरि नगर के होटल सिग्नेचर  की छत पर चढ़ गया. वो अभी भी छत पर आत्महत्या करने के लिए चढ़ा हुआ है. तमाम एजेंसिया उसे समझाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वो सुनने को तैयार नहीं है. अरमान दोपहर 2 बजे से छत पर चढ़ा हुआ है. बता दें, अरमान मलिक  के टिकटॉक पर 5 मिलियन से ज्यादा फैन्स हैं. उसका लगभग हर वीडियो टिकटॉक पर वायरल हो जाता है. दमकल पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर मौजूद हैं और उसे नीचे उतारने की कोशिश की जा रही है.

अरमान मलिक ने छत पर चढ़ने के बाद से टिकटॉक पर कई वीडियो शेयर किए हैं, जिसमें उसने पत्नी पायल और उसके घरवालों पर संगीन आरोप लगाएं हैं. वो वीडियो में कह रहा है- ‘मेरी पत्नी पायल और उसके घरवालों ने मिलकर मेरे ऊपर रेप केस लगवाया.’ दो वीडियो पोस्ट करने के बाद उसने सुसाइड नोट भी टिकटॉक पर शेयर किया है.

अरमान मलिक ने टिकटॉक पर सुसाइड नोट शेयर किया है. उसने लिखा, “मैं संदीप उर्फ अरमान मलिक अपने पूरे होश में ये खत लिख रहा हूं. मैं दुनिया छोड़कर जा रहा हूं. पायल की दो बहन है. जिनका नाम निशा और संगीता है. उनका एक दोस्त राहुल और नीरज, जो पायल को बहन बोलता है. ये लोग मेरी मौत के जिम्मेदार हैं. इन चारों ने मेरी लाइफ बरबाद कर दी है. “

मौके पर मौजूद दिल्ली दमकल सेवा के एक अधिकारी ने बताया, “संदीप रविवार शाम से छत पर चढ़ा हुआ है. पूरी रात उसे समझाकर नीचे उतारने की कोशिशों में दमकल विभाग और दिल्ली पुलिस विभाग जुटा रहा. संदीप जिद कर रहा है कि उसकी पत्नी और सालियों ने नौकरानी से उसके ऊपर जो झूठा मुकदमा दर्ज कराया है, उसे जब तक वापिस नहीं लिया जाएगा, वो नीचे नहीं उतरेगा

हैरत की बात यह है कि जिसे 10वीं मंजिल से नीचे उतारने के लिए पूरी रात (रविवार-सोमवार की रात) सैकड़ों दमकल और दिल्ली पुलिसकर्मी सकुशल बचाने के लिए सड़क पर रात भर जागकर हलकान हुए हैं, वो शख्स आराम से सबको धमका रहा है और इत्मीनान से अपने मोबाइल से टिकटॉक वीडियो अपलोड करके अपनी बातें/शर्तें/मांगें सब कुछ बता रहा है. उसकी जिद ने दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग के पसीने छुड़ा दिए हैं

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चालान की जगह बाइक में लगा ली आग, न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी

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चालान देने के बजाय अपनी गाड़ी को ही खत्‍म करना बेहतर समझ इंदौर के एक शख्‍स ने अपनी बाइक में आग लगा दी और वहां से भाग गया। दरअसल, यह चालान का मामला है। घटना के प्रत्‍यक्षदर्शियों का ने आने जाने वाले लोगों को परेशान करने और उनसे पैसे लेने के लिए ट्रैफिक पुलिस को जिम्‍मेवाद ठहराया है। इनमें से एक प्रत्‍यक्षदर्शी ने बताया, ‘ट्रैफिक पुलिस ने शख्‍स को रोककर 500 रुपये मांगे थे। घंटे भर उसने ट्रैफिक पुलिस से माफी मांगी लेकिन ट्रैफिक पुलिस ने कठोरता दिखाई। इससे परेशान होकर उसने अपनी बाइक में आग लगा ली और वहां से भाग गया।’

प्रत्‍यक्षदर्शी ने यह भी बताया कि ट्रैफिक पुलिस अपनी पहचान छिपाकर गाड़ियों को रोकते हैं और उनसे पैसे लेते हैं।

एक अन्‍य स्‍थानीय ने बताया, ‘वे हमें रोकते हैं और कहते हैं कि हमपर 1000 रुपये का जुर्माना हो गया है और घूस के तौर पर 500 रुपये लेते हैं और फिर हमें जाने की अनुमति मिलती है। जबकि मध्‍यप्रदेश में नया मोटर व्‍हीकल एक्‍ट लागू भी नहीं हुआ है।’

मौके पर पहुंची पुलिस ने आग बुझाकर बाइक को निकाला और मामले की जांच कर रही है।

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शराबी को पकडऩे गई पुलिस पर ही लोगों ने हमला कर दिया, फिर….

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बबरगंज के कुतुबगंज पासी टोला में रविवार की देर रात शराबी को पकडऩे गई पुलिस पर स्थानीय शराब तस्करों ने हमला बोल दिया। इसमें बबरगंज चौकी के दारोगा सुरेंद्र चौधरी समेत अन्य सिपाहियों को चोटें आई हैं। आरोपितों ने सिपाहियों की राइफल छीनने का भी प्रयास किया। पुलिस ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। इस मामले में बबरगंज पुलिस ने दारोगा के बयान पर 25 नामजद और 50 अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है।

बबरगंज इंचार्ज पवन कुमार सिंह को सूचना मिली कि जमीन का कारोबार करने वाला रतन चौधरी शराब पीकर हंगामा कर रहा है। उन्होंने दारोगा सुरेंद्र को दलबल के साथ मौके पर भेजा। हंगामा करते हुए रतन को पुलिस ने नशे में गिरफ्तार कर अपनी गाड़ी में बैठा लिया। यह देख उसके समर्थन में आसपास शराब का कारोबार करने वाले कई लोग पहुंच गए। वे लोग पुलिस पर रतन को छोडऩे का दबाव बनाने लगे। जब पुलिस ने उसे छोडऩे से इंकार किया तो कुछ लोग पुलिस गाड़ी को घेरकर खड़े हो गए।

जब सिपाहियों ने गाड़ी के सामने से लोगों का हटाना चाहा तो उन्होंने सिपाही के साथ मारपीट शुरू कर दी। यह देख दारोगा ने जब सख्ती की तो कुछ शराब तस्करों ने भीड़ का फायदा उठाकर उन्हें पीट दिया। बीच बचाव में आए अन्य सिपाहियों की भी राइफल छीनने का प्रयास करते हुए आरोपितों ने उनकी भी पिटाई कर दी। बवाल के बीच ही रतन के कुछ साथी व शराब तस्कर उसे पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाकर भाग निकले।

दारोगा किसी तरह जान बचाकर पुलिस चौकी पहुंचे। उन्होंने इंचार्ज को घटना की सारी जानकारी दी। उन्होंने मामले की जानकारी एसएसपी आशीष भारती, सिटी एसपी सुशांत कुमार सरोज, सिटी डीएसपी राजवंश सिंह समेत अन्य को दी। मामले की जांच के लिए सिटी डीएसपी मौके पर पहुंचे। जानकारी होने पर जब पुलिस भारी संख्या में फोर्स के साथ रतन समेत अन्य आरोपितों को ढूंढने निकली तो सभी घर से फरार मिले। पुलिस ने कई आरोपितों को चिन्हित कर लिया है। साथ ही अन्य की पहचान की जा रही है

एसएसपी आशीष भारती ने कहा कि बबरगंज में पुलिस टीम पर हमला करने वाले आरोपितों के विरूद्ध नामजद और अज्ञात पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले में जो भी आरोपित हैं, उनके विरद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। शराब तस्करों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जाएगा।

 

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