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इस पेंटिंग की कीमत जानकर हैरान रह जायेंगे आप

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https://www.artvault.co.in/harinarayan-vishwakarma/

इस पेंटिंग की कीमत जानकर हैरान रह जायेंगे आप
स्वामी विवेकानंद अंतराराष्ट्रीय हवाई अड्डा, में प्रदर्शित अंतराष्ट्रीय स्तर के पेंटिंग प्रदर्शनी में लगी पेंटिंग की कीमत जानकर आप हैरान रह जायेंगे। इसमें प्रदर्शित पेंटिंग जो कि विश्वविख्यात पेंटिंग स्टाइल की हैं, जिसकी खासियत है कि इस पेंटिंग को अतियथार्थवादी पेंटिंग कहा जाता है, जोकि 1920 से अस्तित्व में आई, जिसकी शुरूआत स्पेनिश पेंटर ने की थी। हमारे भारत में इस विद्या के बहुत कम जानकारी हैं, जिनमें से एक विश्वविख्यात पेंटर श्री हरिनारायण जी की पेंटिंग इस समय स्वामी विवेकानंद अंतराराष्ट्रीय हवाई अड्डा में प्रदर्शन हेतु लगी है। आर्ट के जानकार या शौकिन इस पेंटिंग तथा इसके साथ प्रदर्शित अन्य पेंटिंग की कला से परिचित हो सकते हैं तथा शौकिन इस प्रकार की पेंटिंग का कलेक्शन अपने लिए खरीद सकते हैं जो कि आने वाले सिर्फ तीन दिनों के लिए कम कीमत पर उपलब्ध है। यहाॅ उपलब्ध पेंटिंग को देखने के लिए स्वामी विवेकानंद अंतराराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यह प्रदर्शनी दिनांक 31 मार्च, 2019 तक सुबह 09 बजे से रात्रि 08 बजे तक है।
पेंटिंग ‘‘औरत’’ है बेमिसाल
इस पेंटिंग की खासियत है कि यह किसी महिला की सामाजिक और नैतिक हैसियत चाहें वह भारत जैसे सांसारिक समाज हो या अमेरिका या ब्रिटेन जैसी आधुनिक समाज में हो। किसी भी महिला की स्थिति एक ऐप्पल जैसी ही है, जो एक खाये हुए सेब जैसा ही हैं, अगर उसके साथ उसका साथी अच्छा मिल जाये तो उसके जीवन में उत्थान ला देगा अन्यथा सांप जैसे उसके जीवन को डस डालेगा। इस विद्या की पेंटिंग का अंतराष्ट्रीय बाजार में बहुत ही मांग है। अब इस विद्या की पेंटिंग रायपुर जैसे छोटे शहर में बेहद मांग के कारण रखी गई है, जो कि बहुत ही कम कीमत पर उपलब्ध है। लगातार अच्छी डिमांड के कारण इसे सात दिवस के लिए और बढ़ाया गया है। शेष पेंटिंग की खासियत और कीमत जानने के लिए एक बार शौकिनों को स्वामी विवेकानंद अंतराराष्ट्रीय हवाई अड्डा में जरूर जाना चाहिए। यह पेंटिंग Surrealism पेंटिंग की एक नायाब कालाकारी है। जिसकी इस वक्त कीमत छःलाख है किंतु इस वक्त प्रदर्शनी में मात्र 60 हजार में उपलब्ध है, जिसका भी तीस प्रतिशत कमाई जरूरत मंद महिलाओं के उत्थान हेतु खर्च किया जाएगा। सामाजिक तौर पर सक्रिय संस्था अथवा शौकिन इस प्रर्दशनी में जरूर जाना चाहिए।

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लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा फेक न्यूज – सोशल मीडिया पर हो सर्तक निगाहें

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नहीं, 2000 रुपये के नए नोटों में कोई जीपीएस चिप नहीं लगी है।

नहीं, यूनेस्को ने हमारे राष्ट्रगान को दुनिया का सबसे अच्छा राष्ट्रगान घोषित नहीं किया है।

यूनेस्को एक संस्था के रूप में ऐसा करती भी नहीं है!

नहीं, भारत में 2016 में नमक की कोई किल्लत भी नहीं थी।
अगर आपको ऐसा लगता है कि इन बेतुकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता,

तो आपको बता दें कि जब अंतिम अफवाह फैली थी तो इस अफरा-तफरी में कानपुर में एक महिला की मौत हो गई थी।

ये सभी झूठी खबरें (फेक न्यूज) थीं जो फेसबुक, ट्विटर और व्हॉट्सऐप पर वायरल हुए, ऐसी अफवाहों की फेहरिस्त बहुत लंबी है।

बीते कुछ साल में फेक न्यूज इतनी बड़ी मुसीबत बनकर उभरी है कि इनकी वजह से लोगों की हत्याएं, हिंसा, दंगे और आगजनी हो चुकी है। फेक न्यूज के कारण भीड़ की हिंसा और लिंचिंग के मामलों में लोगों की मौत हुई है। इसी प्रकार के कई न्यूज हैं जो कि हमारे जीवन का हिस्सा बन गए हैं और अच्छे पढ़े लिखे लोग भी इन फर्जी समाचार से भम्रित हो रहे हैं या कहना चाहिए कि पढ़े लिखे लोग ही ज्यादा भरोसा करते देखे गए हैं। फेक न्यूज के फैलने में व्हाट्स ऐप को जिम्मेदार माना जाता है जिसके सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की जुलाई 2018 में जारी रिपोर्ट के अनुसार प्राइवेट टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स का कुल मोबाइल सब्सक्राइबर्स बेस 100.408 करोड़ हो गया है। इसके अलावा फेसबुक, ट्वीटर, लिंकडिन जैसी साईटस भी हैं, पर सबसे ज्यादा व्हाट्सअप और फेसबुक इसका जरिया है।
“अपनी इमेज चमकाने के लिए, कभी अपने विरोधी की इमेज खराब करने के लिए, कभी नफरत फैलाने के लिए तो कभी भ्रम पैदा करने के लिए ऐसे मैसेज फैलाए जाते हैं।”
इन मैसेजों के झांसे में आने वाले न सिर्फ बेवकूफ बनते हैं बल्कि अनजाने में शातिर लोगों के हाथों इस्तेमाल भी होते हैं, कई बार लोग किसी खास सोच से प्रभावित होकर जानते हुए भी झूठ फैलाते हैं। फर्जी खबरें थोक इस समय बेतहाशा आने लगी हैं। इन खबरों में एक खास अजेंडा होता है, कुछ खास तरह के लोगों को लपेटे में लेने के लिए इन्हें गढ़ा जाता है। कुछ खास तरह के लोगों का यकीन हासिल करने की कोशिश होती है। कुछ खास तरह के लोगों को निशाना बनाया जाता है। ये सिलसिला और आगे बढ़ निकला है। अब फेक न्यूज एक विशाल बरगद बन गया है, विराट, बहुत दूर तक फैल गया है।

“सोशल मीडिया पर सही खबरों से ज्यादा फर्जी खबरें तैर रही हैं। खबर झूठी, घटना झूठी, तस्वीरें झूठी, जगहों के नाम झूठे, लोगों के नाम झूठे, उत्तरी अफ्रीका की खबर छत्तीसगढ़ की बनाकर शेयर हो जाती है। इराक में कुछ होता है, लोग मुजफ्फरनगर का कहकर चला देते हैं। पाकिस्तान का वीडियो जयपुर का बना दिया जाता है। कश्मीर की घटना उत्तराखंड की बताकर फैला दी जाती है।”

‘फेक न्यूज’ सिर के ऊपर का नीला आसमान हो गया है, अनंत. हर जगह मौजूद है। इसीलिए कॉलिन्स डिक्शनरी ने ‘फेक न्यूज’ को साल 2017 का सबसे बड़ा शब्द चुना था। भारत में ज्यादातर लोगों के लिए इंटरनेट का जरिया उनका मोबाइल फोन ही है और बहुत से लोगों को खबरें चैट ऐप्स से मिलती हैं और वहीं से वे उसे शेयर करते हैं। ये लोगों से जुड़ने का एक अच्छा तरीका है लेकिन ये एक ऐसी जगह है जहां गलत या फर्जी खबरें बिना किसी रोक-टोक के जल्दी फैलती हैं। लोगों के पास जानकारी और खबरों की बाढ़ आ जाती है और वे सच और झूठ में अंतर नहीं कर पाते। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ विजय मुखी कहते हैं, लोग झूठी या परेशान करने वाली जानकारी पोस्ट करते रहते हैं। उन्हें पता है कि उनके खिलाफ कोई कंपनी या संस्था कार्रवाई नहीं करेगी। आज अगर आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ फेसबुक पर कुछ लिखेंगे, तो आप गिरफ्तार हो सकते हैं, लेकिन अगर आप राहुल गांधी के खिलाफ कुछ लिखें, तो शायद कुछ न हो।
बहुत बड़ा है ‘फेक न्यूज’ का बाजार –
बीते सालो के मुकाबले इस ‘फेक न्यूज’ शब्द का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है. करीब 365 फीसदी। अमेरिका में, भारत में, डॉनल्ड ट्रंप तो राष्ट्रपति बनने के पहले से ही इस शब्द का खूब इस्तेमाल करते आए हैं. उनके ट्विटर हैंडल पर जाकर देखिए। कितने सारे ट्वीट्स में ये शब्द मिलेगा। मुझे नहीं लगता कि आप में से कोई ऐसा होगा, जिसने फेक न्यूज का जिक्र न सुना हो। फिर भी, इसका मतलब बता रही हूं. फेक न्यूज वो फर्जी जानकारियां होती हैं, जिन्हें न्यूज की शक्ल में चलाया जाता है. होती हैं सनसनीखेज, झूठी. मगर पेश ऐसे किया जाता है, मानो एकदम सच्ची हो, पुख्ता हों। ये जान-बूझकर बनाई जाती हैं, चलाई जाती हैं। बहुत सारे लोग दिन-रात फर्जी खबरें बनाने और फैलाने में जुटे हैं। जितनी बड़ी मीडिया इंडस्ट्री है, उससे कहीं ज्यादा बड़ा कारखाना इस ‘फेक न्यूज’ का है। ये यूं ही नहीं है कि पिछले 2-3 सालों में ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है, पहले लगता था, लोगों से बात करने का प्लेटफॉर्म है। अब बस फॉरवर्ड की गई फर्जी खबरें ठेलने का अड्डा बन गया है। सोशल मीडिया पर जो चीजें हमारी आंखों के आगे से गुजरती हैं, उनमें आधी से ज्यादा शायद फर्जी होती हैं.
“यह जाहिर हो गया कि सोशल मीडिया किसी भी लोकतांत्रिक देश के चुनाव में एक अहम भूमिका निभाएगा। आज अमेरिका जैसे देश में ही लगभग दो तिहाई लोग सोशल मीडिया पर खबरें प्राप्त करते हैं जहां पर सच्चाई और अफवाहों के बीच की रेखा को चिन्हित करना मुश्किल होता है। यह प्रवृत्ति दुनिया में हर जगह बढ़ती जा रही है। वैसे ही देखा जाए तो भारत में भी जहां डाटा रेट दुनिया में सबसे कम है और सस्ते स्मार्टफोन विभिन्न भाषाओं में काम कर सकते हैं, एक सोशल मीडिया संचालित समाज बनता जा रहा है।”

वॉट्सएप और अन्य सूत्रों द्वारा साझा किए गए समाचारों पर लोगों का विश्वास काफी ज्यादा है, लेकिन इन समाचारों की पुष्टि के संसाधन कम हैं। 2016 के अमेरिकी चुनावों के बाद अमेरिकी सीनेट ने लगभग सभी सोशल मीडिया और सूचना-प्रौद्योगिकी कंपनियों के सीईओ को अपनी सफाई पेश करने के लिए बुलाया। इसमें फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भी शामिल थे।
अमेरिकी सीनेट की जांच से फेसबुक का शेयर कुछ ही दिनों में बीस प्रतिशत गिर गया, जो फेसबुक के लिए साढ़े आठ लाख करोड़ का नुकसान था। 2017 की सीनेट सुनवाई के बाद टेक्नालॉजी दिग्गजों ने चुनावों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नियंत्रण शुरू किया। अपने यहां हो रहे लोकसभा चुनाव के लिए फेसबुक और ट्विटर, दोनों ने ही राजनीतिक प्रचार के लिए नई नीतियां बनाई हैं। यहां यह कहना भी जरूरी है कि ये नीतियां अभी परीक्षण के दौर में ही हैं और उनके दूरगामी परिणामों का अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है। बीते दिनों इन नीतियों का पहला परिणाम देखने को मिला जब फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म से 700 पेज और खाते बंद कर दिए। इन खातों के जरिये राजनीतिक प्रेरित गलत सूचनाएं फैलाने का आरोप है। फेसबुक ने 2018 में पूरे भारत में 521 करोड़ रुपये की आय विज्ञापनों द्वारा अर्जित की, जिसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा राजनीतिक प्रेरित विज्ञापन थे। हालांकि यह भी ध्यान रहे कि फेसबुक सटीक राशि का खुलासा नहीं करता। राजनीतिक सूचनाओं के साथ अफवाह फैलाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पहले से ही होता आ रहा है। यह लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि 700 पेजों पर एक साथ प्रतिबंध लगा जिससे 28 लाख लोग जुड़े हुए थे तो हमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सूचनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की आवश्यकता है। अधिकांश चुटकुले, मीम्स, डेटा, चित्र और यहां तक कि खबरों पर हम आसानी से विश्वास कर लेते हैं और इसी कारण उन्हें आगे फॉरवर्ड कर देते हैं, लेकिन संभव है कि उनके पीछे एक कंपनी द्वारा संचालित एक मार्केटिंग अभियान हो, जिसके आप केवल एक उपभोक्ता भर हों।

“आखिर यह किससे छिपा है कि तमाम ऐसे ट्विटर एकाउंट मौजूद हैं जो नाम से किसी एक व्यक्ति के लगते हैं, लेकिन उनको बढ़ावा देने के लिए उनके पीछे एक पूरी टीम, एक पूरी इंडस्ट्री लगी है। एक मुद्दा फेसबुक की पारदर्शिता का है। दिलचस्प बात यह है कि किसी एकाउंट को राजनीतिक घोषित करने या किसी पोस्ट को राजनीतिक सामग्री बताने का एकाधिकार फेसबुक ने अमेरिका स्थित अपनी टीम को दिया है। इसका अर्थ यह है कि सात समंदर पार स्थित ऑफिस में भारत जनित कंटेंट के राजनीतिक होने या नहीं होने की सच्चाई पर फैसला लिया जा रहा है। इस तरह के फैसले लेने की क्या प्रणाली है और फैसला लेने के खिलाफ अपील करने की क्या पद्धति है, इस पर फेसबुक ने चुप्पी ही साध रखी है।”

आखिर यह क्यों नहीं संभव है कि यह जांच और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई भारतीय पद्धति को समझने वाले लोग करें? सच तो यह है कि फेसबुक और साथ ही सभी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत में सिर्फ एक ब्रांच ऑफिस चलाते हैं। इन कंपनियों के सभी नीतिगत फैसले अमेरिका में बैठे उनके अधिकारियों द्वारा लिए जाते हैं। ऐसे परिदृश्य में यह जानना आवश्यक है कि फेसबुक पेज के जरिये करोड़ों रुपये राजनीतिक विज्ञापनों में तो नहीं बहाए जा रहे हैं? महज 700 खाते जिनका कुल व्यय चार साल में 80 लाख रुपये था, हटा देने से ये बड़ा सवाल दरकिनार नहीं किया जा सकता।

फेसबुक के साथ अन्य सभी सोशल मीडिया कंपनियों को इस प्रकार की राजनीतिक गलतफहमियों और अफवाहों को फैलाने वाले खातों के ऊपर और पारदर्शी कार्रवाई करने की दरकार है। 700 फेसबुक एकाउंट पर कार्रवाई एक छोटी सी शुरुआत है। यह कार्रवाई हमारी बड़ी चुनौती के ऊपर पर्दा नहीं बननी चाहिए। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां बहुत बड़ी हो चुकी हैं, लेकिन उनका तंत्र पारदर्शी नहीं है। एप्पल कंपनी की संपत्ति लगभग 75 लाख करोड़ रुपये की है, जबकि फेसबुक जो महज एक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग है, 45 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। यानी फेसबुक की संपत्ति लगभग पाकिस्तान और बांग्लादेश के संयुक्त जीडीपी के बराबर है। फेसबुक ने इतनी संपत्ति बनाने के लिए 36,000 कर्मचारियों का उपयोग किया है जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश को अपनी पूरी 36 करोड़ की आबादी से यह जीडीपी मिलता है। साफ है कि ऐसे में कोई भी सरकार या उसकी एजेंसियां इन कंपनियों के ऊपर अपना नियंत्रण नहीं कर सकतीं।

आज आवश्यकता इस बात की है कि फेसबुक के उपभोक्ता जिनकी संख्या एक अरब के ऊपर है, फेसबुक से अधिक पारदर्शिता की मांग करें। यह मांग अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से भी करनी चाहिए। इसी के साथ यह भी जरूरी है कि आम लोग राजनीतिक अफवाहों से निपटने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों की ओर से उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी हासिल करने के लिए एक साथ आवाज उठाएं और स्व-नियमन की मांग करें। इस मांग का पूरा होना आसान नहीं होगा, मगर यह तय है कि 2019 के आम चुनावों में सोशल मीडिया का उपयोग-दुरुपयोग वैश्विक लोकतांत्रिक संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कड़ी अवश्य बना।
बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें ये फेक न्यूज का झूठ बहुत रास आ रहा है. वो शॉर्ट कट पसंद कर रहे हैं. किताबें पढ़ने की आदत घट गई है। न इतिहास जानने में दिलचस्पी होती है, न विज्ञान. जैसा सोचते हैं, वैसा ही पढ़ना पसंद कर रहे हैं. माने, अगर मेरी सोच कट्टर है तो मैं एक खास तरह की चीजें पढूंगी या पढूंगा। अगर मैं किसी खास विचारधारा की विरोधी हूं, तो उसके खिलाफ लिखी चीजें ही पढूंगी. जान-बूझकर फेक न्यूज का शिकार होने वालों की कोई मदद नहीं की जा सकती। मगर, गलती से इसके झांसे में आने वालों को बचाने की कोशिश हो सकती है। अगर आपको भी कहीं कोई फर्जी खबर दिखती है, ऐसी कोई खबर जिसपर आपको शुबहा हो, तो उसका सच सामने लाने की जरूर मजबूत कोशिश करें।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी मांगा है जवाब –
भारत में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आईटी मंत्रालय से सोशल मीडिया पर आई फर्जी खबरों के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है। सूत्र बताते हैं कि आईटी मंत्रालय ने इस मामले में प्रभावी कदम उठाए जाने और लोगों को जागरूक करने का सुझाव प्रसारण मंत्रालय को दिया है। साथ ही कहा है कि फेसबुक को प्लेटफार्म के दुरुपयोग के लिए हाल ही में चेतावनी दी गई है, जबकि ट्विटर के सीईओ ने केंद्रीय मंत्री को प्लेटफार्म के दुरुपयोग की छानबीन का आश्वासन दिया है।
जो लोग मीडिया को समझते हैं, शिक्षित हैं और उन तक पहुंच रही खबरों की विश्वसनीयता का आकलन करते हैं, वे फर्जी खबरों को कम फैलाते हैं. फेक न्यूज को खत्म करना है, तो इसके लिए आपको किसी को तो जिम्मेदार ठहराना होगा, ये कहना है साइबर लॉ विशेषज्ञ पवन दुग्गल का। वो बताते हैं, भारतीय कानून फेक न्यूज शब्द का इस्तेमाल नहीं करता। वो न इसे परिभाषित करता है, न ही इसकी पहचान के लिए कोई प्रावधान है।
सोशल मीडिया पर झूठी जानकारी पोस्ट करना इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) एक्ट के तहत अपराध है. अगर आप फेसबुक पोस्ट में फर्जी जानकारी देते हैं या अपनी पहचान गलत दिखाते हैं, तो ये धोखाधड़ी का भी मामला बनता है।

पवन दुग्गल के अनुसार, सोशल मीडिया पर झूठी खबरों को रोकने के कारगर तरीके मौजूद नहीं हैं। सोशल मीडिया पर फर्जी पोस्ट के तीन पक्ष होते हैं- एक पोस्ट करने वाला, दूसरा सर्विस प्रोवाइडर और तीसरा पोस्ट को लाइक या शेयर करने वाले। फर्जी खबरें और नफरत भरे कंटेंट पूरी दुनिया के लिए, और खास तौर पर भारत के लोकतंत्र के लिए खतरा हैं जिनसे लड़ने के लिए मीडिया और पाठकों को एकजुट होना चाहिए। लोकतंत्र को बचाये रखने और मजबूत रखने के लिए किसी भी अपवाह और फर्जी समाचार से दूर रखने के लिए जरूरी है।

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गोडसे को देशभक्त बताने पर भड़के पीएम मोदी , कहा- मैं दिल से उन्हें कभी माफ नहीं कर पाऊंगा

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आखिरी चरण के चुनाव से पहले नाथूराम गोडसे और महात्मा गांधी पर राजनीति तेज हो गई है।महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान पर भोपाल संसदीय सीट से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पूरी तरह से घिर गई हैं। उनके इस बयान के बाद से बीजेपी का हाई कमान डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ है। न सिर्फ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़े शब्दों में प्रज्ञा के बयान की निंदा की है।पीएम नरेंद्र मोदी ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रज्ञा के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘गांधी और गोडसे के संबंध भयंकर खराब है,हर प्रकार घृणा के लायक है, आलोचना के लायक है, सभ्य समाज में ऐसी बातें नहीं कही जा सकती हैं। ऐसा कहने वालों को आगे से 100 बार सोचना पड़ेगा।’ पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘उन्होंने भले ही माफी मांग ली हो, लेकिन मैं दिल से कभी उन्हें माफ नहीं कर पाऊंगा।’ दूसरी ओर विपक्ष भी लगातार निशाना साध रहा है। विपक्ष का कहना है कि भोपाल सीट पर चुनाव हो जाने के बाद पीएम मोदी प्रज्ञा का विरोध कर रहे हैं। यह उन्हें पहले करना चाहिए था।
 
गोडसे को लेकर नेताओं के बयान पर बीजेपी की सफाई
इससे पहले नाथूराम गोडसे पर बीजेपी नेताओं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कटील के बयानों पर सियासी बवाल के बाद बीजेपी ने सफाई जारी की। बीजेपी नेताओं के बयानों से भड़के पार्टी चीफ अमित शाह ने कहा कि इन नेताओं के ये बयान उनके निजी बयान हैं और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। शाह ने तीनों बयानों को अनुशासन समिति को भेजने की बात कही है। अनुशासन कमिटी सभी नेताओं से जवाब मांगेगी और 10 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी।बता दें कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे पर साध्वी प्रज्ञा और अनंत कुमार हेगड़े के बाद अब बीजेपी के सांसद नलीन कटील ने भी विवादित बयान दिया था। कर्नाटक की दक्षिण कन्नड़ सीट से सांसद नलीन कटील ने 1984 के सिख दंगों का हवाला देते हुए ट्विटर पर लिखा कि नाथूराम गोडसे ने तो एक व्यक्ति को ही मारा, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने तो 17 हजार लोगों को मारा। हालांकि विवाद बढ़ता देख नलिन ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। इससे पहले साध्वी प्रज्ञा ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था, जबकि हेगड़े ने गोडसे के प्रति नजरिया बदलने की बात कही थी।
नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान पर भोपाल सीट से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पूरी तरह से घिर गई हैं
पीएम मोदी ने सख्त लहजे में कहा कि प्रज्ञा और बाकी लोग जो गोडसे और बापू के बारे में बयानबाजी कर रहे हैं वह भयकंर खराब है
नरेंद्र मोदी ने कहा कि भले ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बयान पर माफी मान ली हो लेकिन मैं दिल से उन्हें कभी माफ नहीं कर पाऊंगा
 
शाह का कड़ा रुख: सभी बयान निजी, पार्टी से संबंध नहीं
अमित शाह ने गोडसे को लेकर दिए बयानों पर कड़ा रुख दिखाते हुए कहा, ‘पिछले 2 दिनों में अनंतकुमार हेगड़े, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और नलीन कटील के जो बयान आए हैं वो उनके निजी बयान हैं, उन बयानों से बीजेपी का कोई संबंध नहीं है। इन लोगों ने अपने बयान वापस लिए हैं और माफी भी मांगी है। फिर भी सार्वजनिक जीवन और बीजेपी की गरिमा और विचारधारा के विपरीत इन बयानों को पार्टी ने गंभीरता से लेकर तीनों बयानों को अनुशासन समिति को भेजने का निर्णय किया है। अनुशासन समिति तीनों नेताओं से जवाब मांगकर उसकी एक रिपोर्ट 10 दिन के अंदर पार्टी को दे, इस तरह की सूचना दी गई है।’

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BJP नेताओं के बयानों पर भड़के अमित शाह

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अनिल सौमित्र ने तो अपने फेसबुक पेज पर महात्मा गांधी को पाकिस्तानियों का राष्ट्रपिता बता दिया. 

गोडसे पर BJP नेताओं के बयानों पर भड़के अमित शाह, कहा- पार्टी का लेना-देना नहीं
अमित शाह ने एक अन्य ट्वीट में बीजेपी नेता के विवादित बयान को लेकर कहा इन लोगों ने अपने बयान वापस लिए हैं और माफी भी मांगी है. लेकिन फिर भी पार्टी की गरिमा और विचारधारा के खिलाफ उनके इन बयानों को पार्टी ने गंभीरता से लिया है.महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे पर बीजेपी नेताओं के बयान से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह नाराज नजर आ रहे हैं. उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट कर इसकी जानकारी देते हुए कहा है कि बीते दो दिनों में अनंत कुमार हेगड़े, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और नलीन कटील के जो बयान आये हैं वह उनके निजी बयान हैं. इन बयानों का भारतीय जनता पार्टी से कोई संबंध नहीं है.
इतना ही नहीं इन नेताओं पर कार्रवाई के संकेत देते हुए अमित शाह ने ट्वीट कर बताया है कि”अनुशासन समिति इन तीनों नेताओं से जवाब मांगेगी और 10 दिन के भीतर उसकी रिपोर्ट देने को कहा गया है”.अमित शाह ने एक अन्य ट्वीट में बीजेपी नेताओं के विवादित बयान को लेकर कहा इन लोगों ने अपने बयान वापस लिए हैं और माफी भी मांगी है. लेकिन फिर भी पार्टी की गरिमा और विचारधारा के खिलाफ उनके इन बयानों को पार्टी ने गंभीरता से लिया है.इन लोगों ने अपने बयान वापिस लिए हैं और माफ़ी भी मांगी है। फिर भी सार्वजनिक जीवन तथा भारतीय जनता पार्टी की गरिमा और विचारधारा के विपरीत इन बयानों को पार्टी ने गंभीरता से लेकर तीनों बयानों को अनुशासन समिति को भेजने का निर्णय किया है।
बीजेपी नेताओं  केबयानों से भड़के हुए हैं अमित शाह
 
गौरतलब है कि भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ने महात्मा गांधी के हत्यारे के लिए नाथूराम गोडसे को देशभक्त बता दिया था जिसके बाद पूरे देश में हंगामा मच गया था.
 
विपक्षी पार्टियों ने इसे चुनावी मुद्दा बना दिया था और साध्वी प्रज्ञा से इस पर तुरंत माफी मांगने की मांग की थी. बढ़ते दबाव के बाद बीजेपी की तरफ से उन्हें माफी मांगने के लिए कहा गया था तब जाकर साध्वी प्रज्ञा ने इस पर माफी मांगी.नाथूराम गोडसे की तारीफ का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ और इसके बाद बीजेपी के दूसरे नेता और केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े ने साध्वी प्रज्ञा के बयान को सही ठहराते हुए कहा कि मैं खुश हूं कि करीब 7 दशक बाद आज की नई पीढ़ी इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है और साध्वी प्रज्ञा को इस पर माफी मांगने की जरूरत नहीं है.
 
हेगड़े ने अपने ट्विटर पर लिखा था कि “अब समय है कि आप मुखर हों और माफी मांगने से आगे बढ़ें, अब नहीं तो कब.”उनके इस बयान पर बवाल होने के बाद हेगड़े ने कहा था कि उनका ट्विटर अकाउंट हैक हो गया था और ट्वीट के लिए खेद जताया था.
 
गोडसे को लेकर कर्नाटक से बीजेपी सांसद नलिन कुमार कटील ने भी विवादित दिया था. उन्होंने गोडसे की तुलना राजीव गांधी से करते हए कहा था कि”गोडसे ने एक को मारा, कसाब ने 72 को मारा, राजीव गांधी ने 17 हजार को मारा अब तय कर लो कि ज्यादा क्रूर कौन है.” कटील दक्षिण कन्नड़ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.
 
गोडसे पर बयान से एक कदम आगे बढ़कर मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता अनिल सौमित्र ने तो अपने फेसबुक पेज पर महात्मा गांधी को पाकिस्तानियों का राष्ट्रपिता बता दिया.
 
अपने फेसबुक पर उन्होंने लिखा राष्ट्रपिता थे लेकिन पाकिस्तान राष्ट्र के. भारत राष्ट्र में तो उनके जैसे करोड़ों पुत्र हुए कुछ लायक तो कुछ नालायक. हालांकि उन्होंने अपने पोस्ट में सीधे तौर पर महात्मा गांधी का नाम नहीं लिया है. अनिल सौमित्र के इस बयान पर विवाद और बढ़ने की आशंका है.
 

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बाल-बाल बचे RSS प्रमुख मोहन भागवत,गाय को बचाने के चक्कर में पलट गई कार

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Etoi Exclusive2 weeks ago

जिंदल स्टील को मिला 89042 टन रेल आपूर्ति करने का आर्डर

जिंदल स्टील को मिला 89042 टन रेल आपूर्ति करने का आर्डर जे.एस.पी.एल. को रेलवे को दिए गए पहले रेलवे के...

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निधन !!!

Uncategoried2 months ago

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर आज होगा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर का सोमवार को अंतिम संस्कार होगा। पैंक्रियाटिक कैंसर से पिछले एक...

निधन4 months ago

पैसों की तंगी झेल रहे बॉलीवुड के खलनायक की मौत, घर में मिली लाश

शक्ति कपूर बोले- काम न मिलने से डिप्रेशन में थे महेश आनंद, सेट पर भी पीते थे शराब Click Here...

निधन4 months ago

निधन – फत्तेचंद अग्रवाल सक्ती

सक्ति (कन्हैया गोयल) 31/01/2019 शक्ति शहर की प्रतिष्ठित फर्म काशीराम फत्तेचंद के संचालक सजन अग्रवाल, पवन अग्रवाल एवं नवलकिशोर अग्रवाल...

दिल्ली4 months ago

पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 89 साल की उम्र में निधन

Click Here To Read Astrological Articles & Contact Astrologer नई दिल्ली 29 जनवरी 2019 भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज...

निधन4 months ago

श्रीमती कमला सिंह का निधन

जांजगीर-चाम्पा (हरीश राठौर) 28/01/2029 भैंसदा के प्रतिष्ठित ठाकुर परिवार के स्व. पलटन सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती कमला सिंह का 28 जनवरी...

निधन4 months ago

जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता विजय श्रीवास्तव पंचतत्व में विलीन

27 जनवरी को आयोजित जेष्ठ पुत्रमयंक का वैवाहिक कार्यक्रम स्थगित बिलासपुर (अमित मिश्रा) 27/01/2019 हसदेव कछार जल संसाधन विभाग बिलासपुर...

निधन4 months ago

रायपुर : श्रीमती माणक बाई ललवाणी (जैन) का निधन

रायपुर,14/01/2019 रायपुर निवासी श्रीमती माणक बाई ललवाणी  (जैन) 95 वर्ष, घर्मपत्नी स्व.पन्नालाल ललवाणी का स्वर्गवास आज हो गया हैं जिनकी...

निधन4 months ago

रायपुर : श्रीमती बिदामी बाई बुरड़ का निधन

Click Here To Read Astrological Articles & Contact Astrologer रायपुर,14/01/2019 आनन्द नगर विनायक इनक्लेव, रायपुर निवासी श्रीमती बिदामी बाई पत्नी...

निधन5 months ago

छोटेलाल कौशिक का निधन

जांजगीर-चाम्पा (हरीश राठौर) 09/01/2019 ग्राम डोंगाकोहरौद के मालगुजार छोटेलाल कौशिक का गत् 4 जनवरी को हो गया। अचानक वे 3...

छत्तीसगढ़5 months ago

लक्ष्मण प्रसाद साहू नगरदा का निधन : दशकर्म एवं चंदनपान 8 जनवरी को

Click Here To Read Astrological Articles & Contact Astrologer सक्ती (कन्हैया गोयल) 05/01/2019 शक्ति विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक,भाजपा नेता...

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