इंडोनेशिया में लॉकडाउन तोड़ने को मिल रही है अनोखी सजा, सुनकर हैरान हो जाओगे
इंडोनेशिया में भूत-प्रेत और सुपरनेचुरल शक्तियों की काफी मान्यता है और लोग न सिर्फ इनसे जुड़ी कहानियों पर भरोसा करते हैं बल्कि इनसे डरते भी हैं. ऐसे ही घरों को जेल में तब्दील किया गया है और लॉकडाउन तोड़ने वाले 5 लोगों को इनमें रखा गया है.
इंडोनेशिया में भी कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र लॉकडाउन लागू है साथ ही संक्रमित लोगों के साथ पाए गए लोगों को सेल्फ आइसोलेशन या क्वारंटीन में रहने के लिए कहा गया है. हालांकि लोग लगातार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं जिससे अन्य लोगों को भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे लोगों से परेशान होकर स्थानीय नेताओं ने एक निराली सजा का ऐलान कर दिया है जो इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.
द जकार्ता पोस्ट के मुताबिक इंडोनेशिया के स्राजेन इलाके के रीजेंसी हेड कुश्दीनार उतुंग यूनी सुकोवाती ने बताया कि लॉकडाउन तोड़ने वालों के लिए उन्होंने इस अनोखी सजा का ऐलान किया है. सुकोवती के मुताबिक लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों में अधिकतर युवा हैं जो नियमों का पालन न करने को फैशन मानते हैं. उन्होंने बताया कि जावा आइलैंड में काफी ज्यादा जनसंख्या घनत्व है और यहां कोरोना मरीजों में आए लोगों से कम से कम 14 दिन तक आइसोलेशन में रहने के लिए कहा गया है.
नहीं मान रहे युवा!
सुकोवाती के मुताबिक कई चेतावनी देने के बावजूद भी लोग लॉकडाउन को गंभीरता से नहीं ले रहे थे ऐसे में हमने तय किया कि इलाके में खाली पड़े घर जिन्हें ‘भुतहा’ मन जाता है उन्हें इस्तेमाल किया जाएगा. इंडोनेशिया में भूत-प्रेत और सुपरनेचुरल शक्तियों की काफी मान्यता है और लोग न सिर्फ इनसे जुड़ी कहानियों पर भरोसा करते हैं बल्कि इनसे डरते भी हैं. ऐसे ही घरों को जेल में तब्दील किया गया है और लॉकडाउन तोड़ने वाले 5 लोगों को इनमें रखा गया है.
सुकोवाती ने न्यूज़ एजेंसी AFP को बताया कि इलाके के सभी गांवों को कहा गया है कि नियम नहीं मानने वालों को ऐसे घरों में बंद कर दिया जाए. इलाके के सेपट गांव के लोगों ने ऐसे ही एक घर को चारों तरफ परदे और पलंग लगाकर जेल में तब्दील कर दिया है.
इस जेल में तीन लोगों को रखा गया है. इन तीनों को 14 दिन तक आइसोलेशन में रहने के लिए कहा गया था लेकिन ये बार-बार नियमों का उल्लंघन कर रहे थे. इन्हीं में से एक सुमात्रा आइलैंड से आए हेरी सुसंतो कहते हैं- अब जो हुआ सो हुआ. शुक्र है अभी तक किसी भूत से तो सामना नहीं हुआ है. मैं जानता हूं कि ये सभी की सुरक्षा के लिए है. मुझे अपना सबक मिल गया है.


क्राइम न्यूज़
न्यूयॉर्क के सुपरमार्केट में हुई फायरिंग, 10 लोगों की हुई मौत…
न्यूयॉर्क के बफेलो में फायरिंग हुई, जिसमें 10 एक सिक्योरिटी गार्ड समेत 10 लोगों की मौत हो गई। इधर, भारत के प्रधानमंत्री बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर नेपाल के लुंबिनी पहुंचे। वहीं, अमेरिका ने दावा किया कि मार्च में हादसे का शिकार हुए चाइना ईस्टर्न जेट को जानबूझकर क्रैश कराया गया था।
1. न्यूयॉर्क के सुपरमार्केट में फायरिंग
न्यूयॉर्क के बफेलो इलाके के एक सुपर मार्केट में शनिवार को फायरिंग हुई, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। गोलीबारी में 3 लोग घायल हुए। मरने वालों में एक सिक्योरिटी गार्ड भी शामिल है। जिस इलाके में यह घटना हुई, वह भी एक अश्वेत बहुल इलाका है।
2. मोदी का नेपाल दौरा
PM मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर नेपाल पहुंचे। उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा के साथ माया देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर के अंदर मार्कर स्टोन पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की, जिसके बाद उन्होंने पुष्कर्णी तलाब की परिक्रमा की। साथ-साथ उन्होंने पवित्र बोधि वृक्ष की पूजा की और जल चढ़ाया। उन्होंने अशोक स्तंभ के पास दीप भी जलाए। पढ़ें पूरी खबर…
3. जानबूझकर क्रैश कराया गया था चीनी विमान
चीन के गुआंग्शी में इसी साल मार्च में हुए विमान हादसे को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अमेरिकी मीडिया वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया है कि चाइना ईस्टर्न जेट को जानबूझकर क्रैश कराया गया था। इस हादसे में प्लेन में सवार सभी 123 यात्रियों समेत 9 क्रू मेंबर की मौत हो गई थी। पढ़ें पूरी खबर…
4. भारत कर रहा PAK-चीन से निपटने की तैयारी
पाकिस्तान और चीन के बीच तनाव और बढ़ते हमलों को देखते हुए भारत ने बॉर्डर पर S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात करने का फैसला किया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा कि जून 2022 तक भारत अपने बॉर्डर पर रूस निर्मित S-400 मिसाइल तैनात कर देगा। पढ़ें पूरी खबर…
5. मंकीपॉक्स हुआ खतरनाक
अमेरिका में बुधवार को मंकीपॉक्स का पहला केस मिलने के बाद अब बेल्जियम, फ्रांस, इटली और ऑस्ट्रेलिया में भी इसके मामले सामने आए हैं। यानी, अब तक यह बीमारी कुल 11 देशों में फैल चुकी है, जिसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीम भी एक्शन में आ गई है। पढ़ें पूरी खबर…
देश - दुनिया
जानिए कैसे दिखते है ताजमहल के वो 22 कमरे, जिन्हें सरकार ने खुलवाने की याचिका की दायर.. जो पर्यटकों के लिए 1972 से है बंद…

ताजमहल के तहखाने में बने 20 कमरों को खोलने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में याचिका दायर की गई है। तहखाने के जिन कमरों को खोलने के लिए याचिका दायर की गई है, वह पर्यटकों के लिए 1972 में ही बंद किए जा चुके हैं।
आखिरी बार 16 साल पहले वर्ष 2006 में तत्कालीन संरक्षण सहायक मुनज्जर अली ने तहखाने के कमरों का संरक्षण सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की सिफारिश पर किया था। तब यहां दीवारों में सीलन, दरारें भरने के लिए प्वाइंटिंग और प्लास्टर का काम कराया गया। तहखाने के कमरों के लिए रास्ता चमेली फर्श पर मेहमानखाने की ओर और दूसरा मस्जिद की ओर है, जिस पर अब लोहे का जाल डालकर बंद कर दिया गया है। इन्हीं कमरों में यमुना किनारे की ओर से पहुंचा जा सकता था, जो उत्तर पश्चिमी और उत्तर पूर्वी बुर्ज के पास बने हुए थे। लकड़ी के दरवाजे हटाकर ईंटों की दीवार लगा दी गई है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. डी दयालन की पुस्तक ताजमहल एंड इट्स कन्जरवेशन में बताया गया है कि 1976-77 में मुख्य गुंबद के नीचे तहखाने में दीवारों पर आई दरारों को भरा गया था। कई जगह सीलन आ गई थी। भूमिगत कक्षों में तथा रास्ते की मरम्मत की गई, जिसमें पुराना क्षतिग्रस्त प्लास्टर हटाकर नया प्लास्टर किया गया। गहरी दरारों को मोर्टार से भरा गया था।
गैलरी की छत पर है पेंटिंग
वर्ष 1652 में औरंगजेब ने ताजमहल के तहखाना ए कुर्सी हफ्तादार यानी सात आर्च का तहखाना का जिक्र किया था। यह तहखाना ब्रिटिश सरकार के रिकॉर्ड में सबसे पहले 1874 में जे डब्ल्यू एलेक्जेंडर की रिपोर्ट में आया, जिन्होंने इसे देखने के बाद सबसे पहले नक्शा बनाया। यह ब्यौरा आस्ट्रियाई इतिहासकार ईवा कोच ने अपनी पुस्तक रिवरफ्रंट गार्डन ऑफ आगरा में दिया है। उन्होंने ताजमहल के तहखाने के लिए लिखा है कि चमेली फर्श से यमुना किनारे की दो मीनारों के पास से इनका रास्ता है।
लोहे की जालियों से इस रास्ते को बंद किया गया है। नीचे अंधेरा है। पर्यटकों में इस रास्ते को लेकर यह चर्चा है कि इनका रास्ता आगरा किला तक पहुंचता है, लेकिन इन सीढ़ियों का उपयोग शाहजहां नदी के रास्ते ताजमहल में आने के लिए करते थे। नीचे जाने पर गैलरी है, जिसकी छत पर पेंटिंग है। तीन साइड में यहां गैलरी है, जिसमें सात बड़े चैंबर है, इसके साथ ही छह चौकोर कमरे हैं, जबकि चार अष्टकोणीय कमरे हैं। एक आयताकार चैंबर आपस में इनसे जुड़ा है।
तहखाने से भी है मीनारों का रास्ता
ताजमहल के तहखाने में कई रहस्य भी दफन हैं। ताजमहल की मुख्य गुम्मद के चारों ओर बनी मीनारों का रास्ता तहखाने से भी है। वर्तमान में तहखाने में स्थित मीनार का दरवाजा बंद है। 20 कमरों के आगे मुख्य गुंबद के ठीक नीचे का हिस्सा ईंटों से बंद किया गया है। लाल पत्थर की चौखट कभी यहां थी, जिन्हें ईटों से बंद कर दिया गया। इसके अंदर कमरे हैं या कुछ और, इसका ब्यौरा एएसआई अधिकारियों के पास भी नहीं है।पूर्व संरक्षण सहायक ताजमहल डॉ. आरके दीक्षित ने बताया कि ताजमहल ही नहीं, बल्कि एत्माद्दौला, रामबाग समेत यमुना किनारे के जो स्मारक मुगलिया दौर में बने हैं, उन सभी में ऐसे तहखाने और कमरे बने हैं। यह लोड शेयरिंग करने के काम आते थे ताकि स्मारक का भारी वजन आर्च और डाट के खोखले चैंबर के जरिए आपस में बंट सके।
एएसआई के रिटायर्ड इंजीनियर डॉ. एमसी शर्मा ने कहा कि ताज की मीनारों से आत्महत्या करने और चमेली फर्श के नीचे जाने में घटनाओं के कारण सुरक्षा कारणों से इन्हें बंद कर दिया गया। तहखाने का संरक्षण करने में सैकड़ों मजदूर लगे हैं। समय-समय पर सफाई और मरम्मत की गई है। एक-एक हिस्से की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई थी।
Tech & Auto
दुनिया की सबसे महंगी कार, कीमत इतनी की जानकार आपके भी उड़ जायेगे होश…

मर्सिडीज कारों का जलवा हमेशा रहा है। वर्ष 1955 में बनी मर्सिडीज बेंज-300 एसएलआर कार अब 1105 करोड़ रुपये में बिक दुनिया की सबसे महंगी कार बन गई। इसने वर्ष 2018 में नीलाम 1962 में निर्मित और करीब 375 करोड़ रुपये में बिकी फरारी-जीटीओ को पीछे छोड़ दिया है।
जर्मनी में गुप्त नीलामी के जरिए यह कार बिकी। दुनिया की सबसे महंगी विंटेज मर्सिडीज खरीदने वाले का नाम गुप्त रखा गया है। कार के नए मालिक को इतनी रकम चुकाने के बावजूद न तो इसे घर ले जाने की इजाजत होगी, न ही वह हर रोज सड़कों पर इससे फर्राटा भर पाएंगे। सौदे के मुताबिक इस बेशकीमती कार को जर्मनी के स्टटगार्ट स्थित मर्सिडीज के म्यूजियम में रखा जाएगा।
नए मालिक को कभी-कभार इसे चलाने का मौका मिलेगा। यह मर्सिडीज 300 एसएलआर उहलेनहॉट कूप कार, आठ सिलिंडर वाली मर्सिडीज बेंज डब्ल्यू 196 फॉर्मूला वन कार के डिजाइन पर आधारित है। उससे अर्जेंटीना के स्टार कार रेसर जॉन मैनुअल ने 1954-55 में विश्व चैंपियनशिप जीती थी।
कंपनी ने बनाईं केवल नौ कारें
मर्सिडीज कंपनी ने 300 एसएलआर श्रेणी में अब तक केवल नौ कारों का उत्पादन किया है। इनमें से दो विशेष उलेनॉ कूप प्रोटोटाइप कारें थीं। चेकिंग विभाग के मुखिया ने इनमें से एक कार को कंपनी की कार के तौर पर चलाया।
कारों की मोनालिसा नाम से पहचान
इस 300 एसएलआर कार को उन ‘चांदी की तीर’ जैसी कारों का वंशज माना जाता है, जिनका 1930 के दशक में रेसिंग में दबदबा था। यह कारों की मोनालिसा नाम से पहचानी जाती है। मर्सिडीज बेंज चेयरमैन ओला क्लेनियस ने कहा, ‘इससे हम मर्सिडीज की ताकत को दिखाना चाहते थे, जो कर दिखाया।’
नीलामी से मिली रकम से देंगे स्कॉलरशिप
नीलामी से मिली 1105 करोड़ रुपये की राशि को कंपनी इंजीनियरिंग, गणित, विज्ञान के विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप देने के लिए उपयोग करेगी।
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