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क्या आपने कभी ‘कृष्णा फल’ के बारे में सुना है? ढेरों बीमारियों से बचाता है…

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क्या आपने कभी पैशन फ्रूट के बारे में सुना है? ​इस फल को ‘कृष्णा फल’ के नाम से भी जाना जाता है। कृष्णा फल एक ब्राजीलियन फल है, लेकिन आज तमाम देशों में इसकी खेती होने लगी है। भारत की बात करें तो नागालैंड, केरल, कर्नाटक, मिजोरम और मेघालय जैसे राज्यों में इसका काफी उत्पादन किया जाता है। कृष्णा फल बैंगनी रंग से लेकर पीला और सुनहरे रंग का भी होता है। स्वाद में ये मीठा-खट्टा और बीजयुक्त होता है। इस फल में फाइबर, कार्ब्स, पोटेशियम, सोडियम, विटामिन सी, ए, डी, के, ई, आयरन, फास्फोरस, एंटीऑक्सीडेंट आदि ढेरों पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो इंसान की शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए काफी उपयोगी हैं। हालांकि ये फल किसी बीमारी की औषधि तो नहीं है, लेकिन इसके सेवन से आपके शरीर को वो पोषक तत्व जरूर मिल जाएंगे जो काफी बीमारियों से आपको बचाने में मददगार साबित होंगे। यहां जानिए कृष्णा फल के ढेरों फायदे।

हार्ट

पैशन फ्रूट को हार्ट के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें पोटैशियम होता है, साथ ही इलेक्ट्रोलाइट होता है, जो दिल को दुरुस्त रखने का काम करता है। इसे खाने से हार्ट अपना काम बेहतर तरीके से करता है और हृदय रोग का ​जोखिम कम होता है।

ऑस्टियोपोरोसिस

इस फल में मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, पोटैशियम आदि ऐसे तमाम तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों की डेन्‍सिटी को बनाए रखते हैं। इसके सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी परेशानी का रिस्क कम होता है।

डायबिटीज

कृष्णा फल के सेवन से व्यक्ति का डायबिटीज से बचाव होता है। वहीं जो लोग डायबिटीज के रोगी हैं, उनके लिए भी ये फल काफी लाभकारी माना जाता है। इस फ्रूट में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और उच्च मात्रा में फाइबर होता है। ये इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार माना जाता है। इसे खाने से मधुमेह रोगियों को काफी देर तक भूख का अहसास नहीं होता और उनका वजन भी नहीं बढ़ता।

अस्थमा

कहा जाता है कि यदि इसके छिलके के अर्क का सेवन किया जाए तो अस्थमा की समस्या और सांस फूलने की समस्या में काफी राहत मिलती है। इसका फल भी सांस के रोगियों के लिए लाभकारी होता है। लेकिन कृष्णा फल को ठंडी तासीर का माना जाता है, इसलिए किसी विशेषज्ञ के परामर्श के बाद ही इसका सेवन करें।

इम्यून सिस्टम

पैशन फ्रूट में पैशन फ्रूट में विटामिन सी, बीटा-क्रिप्टोक्सांथिन और अल्फा-कैरोटीन होता है, जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का काम करते हैं। इम्युनिटी मजबूत होने से शरीर का कई बीमारियों से बचाव होता है। वहीं आयरन से समृद्ध होने के कारण ये शरीर में खून की कमी नहीं होने देता। इसके नियमित सेवन से एनीमिया से बचाव होता है।

 

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बढ़ते वजन और मोटापा से हैं परेशान,अपनाएं ये सरल उपाय…

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अक्सर लोग लगातार बढ़ते वजन और मोटापा को लेकर चिंतित रहते हैं।जिसका मुख्य वजह है खान-पान। ज्यादातर लोगों का वजन वेट लॉस के कुछ दिन बाद फिर से बढ़ने लगता है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कुछ लोग वजन कम करने के बाद सोचते हैं कि यह हमेशा के लिए है और वे लापरवाही बरतने लगते हैं। जिससे उनका वजन फिर से बढ़ने लगता है।

  • लोगों के साथ एक दिक्कत यह है कि वह जैसी ही अपने वजन घटाने के लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं वे वापस से अपनी पुरानी आदतों को अपना लेते हैं। इसलिए यह सबसे जरुरी बात है कि आप अपनी पुरानी आदतों पर वापस ना जाएं।
  • जब आप अपना वजन कम करते हैं तो लंबे समय तक डाइटिंग करने के कारण आपकी भूख बढ़ सकती है। इसलिए अपनी डाइट पर कंट्रोल रखें। आपने वजन कम कर लिया है इसका मतलब यह नहीं है कि आप कुछ भी और जितना मर्जी खा सकते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपका वजन फिर से बढ़ने लगेगा।
  • वजन मेंटेन रखने के लिए शारीरिक गतिविधियां करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं है आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने तक ही व्यायाम को सीमित रखें।गतिहीन जीवनशैली वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार एक बड़ा कारण है। इसलिए एक्सरसाइज करना ना छोड़े।
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क्या आप भी बीयर पीने के शौकीन है तो जान लीजिये, इसके हैरान कर देने वाले side Effects…

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सिंगापुर में यूरिन से बनी बीयर … नाली के पानी से बनाई जा रही शराब, क्या आप  इसे पीना पसंद करेंगे? – Agrit Patrika

 

सिंगापुर सरकार ने गंदे पानी को रिसाइकल करने का एक अनोखा तरीका ढूंढ निकाला है। यहां की नेशनल वॉटर एजेंसी एक लोकल बीयर कंपनी के साथ मिलकर नाली के पानी और यूरिन से बीयर बना रही है। इसका नाम ‘न्यूब्रू’ रखा गया है। फिलहाल इसे दुनिया की सबसे इको फ्रेंडली बीयर के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

न्यूब्रू को निवॉटर से बनाया गया है। यह एक तरह का पानी है, जिसे नाली के पानी को रिसाइकल और फिल्टर कर सिंगापुर वॉटर सप्लाई में पंप किया जाता है। सिंगापुर सरकार पिछले 20 सालों से यह काम कर रही है। इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, गंदे पानी को इस प्रकार से फिल्टर किया जाता है कि वह पीने लायक साफ पानी बन जाए। बीयर कंपनी की मानें तो न्यूब्रू ​​​​​​ में 95% निवॉटर ही मिला हुआ है।

द स्ट्रेट टाइम्स के अनुसार, न्यूब्रू 8 अप्रैल को लॉन्च की गई है। इसे सिंगापुर वॉटर एजेंसी PUB और लोकल क्राफ्ट बीयर कंपनी Brewerkz ने मिलकर बनाया है। इस प्रोजेक्ट को सिंगापुर इंटरनेशनल वॉटर वीक (SIWW) का सहयोग भी मिला है। न्यूब्रू देश की सभी शराब की दुकानों और बार में उपलब्ध है।

यूरिन और नाली का पानी ही क्यों?

सिंगापुर वॉटर एजेंसी का कहना है कि अगले कुछ सालों में पूरी दुनिया वॉटर क्राइसिस से जूझ सकती है। ऐसे में हमें पानी को बचाने और रिसाइकल करने की हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए। बीयर को बनाने में बहुत सारे पानी की जरूरत होती है, क्योंकि यह 90% H2O ही होता है। इसलिए न्यूब्रू इसके प्रति लोगों को जागरूक करने की एक पहल है।

कंपनी का कहना है कि रिसाइकल किया गया गंदा पानी बीयर के स्वाद में कोई बदलाव नहीं करता है। बीयर के विज्ञापन के मुताबिक, इस बीयर का आफ्टर टेस्ट हल्का भुना हुआ और शहद की तरह है। यह शराब गर्मियों में सिंगापुर के लोगों की प्यास बुझाएगी।

सिंगापुर में पानी की कमी बहुत बड़ी समस्या

दरअसल, चारों ओर समुद्री पानी से घिरे सिंगापुर में लोग पीने के पानी की कमी से जूझते हैं। ऐसे में सरकार इस कमी को पूरा करने के लिए कई सालों से नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर को मजबूरन मलेशिया से पीने का पानी खरीदना पड़ता है। देश में बारिश के पानी को भी इकट्ठा किया जाता है। इस सबके बावजूद यहां केवल 50% पानी की जरूरत ही पूरी होती है।

2060 तक सिंगापुर की आबादी बढ़ जाएगी, जिससे यहां पानी की मांग दोगुनी हो जाएगी। ऐसे में लोगों के पास निवॉटर और समुद्री पानी को साफ पानी में बदलने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचेगा।

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Lifestyle

क्या आप भी माइग्रेन-सिरदर्द से परेशान है तो, अपनाये ये आसान से टिप्स…

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माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसके मामले पिछले कुछ समय से काफी बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। माइग्रेन की स्थिति में सिर और आंखों में तेज दर्द होता है, कुछ स्थितियों में इसके कारण सामान्य रूप से कामकाज करने तक में भी दिक्कत हो सकती है। आमतौर पर यह सिर के केवल आधे हिस्से में ही होता है।

माइग्रेन अटैक की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति प्रकाश या शोर के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो सकता है। इसके अलावा व्यक्ति को उल्टी, मतली और घबराहट की समस्या हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या होती है, उन्हें इसको ट्रिगर करने वाली स्थितियों की पहचान कर उससे बचाव करते रहना चाहिए।

माइग्रेन और इसके कारण होने वाली सिरदर्द की समस्या के लिए आपको लंबे समय तक उपचार और बचाव की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा दिनचर्या में कुछ प्रकार के योगासनों को शामिल करके भी इससे लाभ पाया जा सकता है। आइए जानते हैं कि जिन लोगों को माइग्रेन की दिक्कत होती है, उनके लिए कौन से योगासन फायदेमंद हो सकते हैं?

सेतुबंधासन योग का अभ्यास

सेतुबंधासन योग या ब्रिज पोज के नियमित अभ्यास को कमर-पीठ की समस्याओं के साथ माइग्रेन की दिक्कतों को दूर करने वाला भी माना जाता है। यह योग मस्तिष्क को शांत करने के साथ  चिंता-तनाव को कम करने और माइग्रेन को बढ़ावा देने वाली स्थितियों को नियंत्रित करने में विशेष लाभकारी हो सकता है। माइग्रेन की समस्या को कम करने के साथ पेट, फेफड़े और थायरॉयड अंगों को उत्तेजित करने और रीढ़ की समस्याओं को कम करने में भी इस योग के लाभ देखे गए हैं।

चाइल्ड पोज

चाइल्ड पोज या बालासन को तंत्रिका तंत्र को शांत करने वाला अभ्यास माना जाता है। माइग्रेन के दर्द को प्रभावी ढंग से कम करने में इसे काफी लाभदायक माना जाता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि चाइल्ड पोज मुद्रा आपके मन को शांत करके चिंता और थकान को कम करने में मदद करती है, जिससे माइग्रेन और इसके कारण होने वाले सिरदर्द में काफी लाभ मिल सकता है।

पश्चिमोत्तानासन योग के फायदे

माइग्रेन की समस्या को कम करने में पश्चिमोत्तानासन योग या सिटेड फॉरवर्ड बेंड योग काफी लाभकारी हो सकता है। मस्तिष्क को शांत करने और तनाव से राहत दिलाने में इस योग का नियमित अभ्यास आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। सिरदर्द की समस्या से छुटकारा दिलाने और माइग्रेन को ट्रिगर करने वाली समस्याओं को कम करने में पश्चिमोत्तानासन योग के नियमित अभ्यास की आदत आपके लिए फायदेमंद हो सकती है।

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