Lifestyle
किडनी में इंफेक्शन हो तो न हो परेसान,ये रही इंफेक्शन दूर करने की बेहतरीन उपाय…

किडनी का इंफेक्शन हमें बहुत तकलीफ पहुंचाता है। लेकिन अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो किडनी स्वस्थ रहेगी और किडनी स्टोन, इंफेक्शन आदि समस्याओं से आप कोसों दूर रहेंगे।लाइफस्टाइल डिजीज और तमाम गंभीर बीमारियों का इलाज कई सौ साल पुरानी नेचुरोपैथी में छिपा है।
वक्त वक्त पर मॉडर्न साइंस ने भी योग की ताकत को माना है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने करीब 20 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से किडनी की एलोपैथिक मेडिसिन तैयार की है, यानि मॉर्डन साइंस और उनसे जुड़े रिसर्चर भी आयुर्वेदिक नोलेज को एकनोलेज कर रहे हैं।
इतना ही नहीं वैज्ञानिक ये भी दावा कर रहे हैं, कि कुछ जड़ी-बूटियां किडनी के लिए संजीवनी हैं। वैसे किडनी 24 घंटे-सातो दिन पूरे शरीर की जहरीली चीजों को बाहर निकालने का काम करती है, डिटॉक्स करती है। ब्लड में जमा हो रहे वेस्ट मटेरियल को निकालकर बॉडी को हेल्दी बनाती है। लेकिन बीमारियों को दूर करने के लिए हम जो मेडिसिन लेते हैं वो कहीं ना कहीं किडनी पर ही असर डालती हैं।
किडनी को बीमार करती हैं। जिसका कई बार वक्त रहते हमें पता भी नहीं चलता, क्योंकि 60% से ज्यादा बीमार होने के बाद भी किडनी अपना काम करते रहती है। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आता है.जब किडनी हार मान लेती है और तब डायलिसिस -ट्रांसप्लांट की नौबत आ जाती है।
किडनी का कैसे ख्याल रखना है, बीमार होने पर कैसे दुरुस्त करना है, कौन सा योग करना फायदेमंद होगा? तमाम बातें आज योगगुरु स्वामी रामदेव ने हमें बताई हैं।
शरीर के अंदर सबसे बड़ा ऑर्गन है किडनी, जिसका काम भी बहुत बड़ा है।
ब्लड से टॉक्सिन निकालना
टॉक्सिन ब्लैडर में डालना
ब्लड में पानी मेंटेन करना
जरूरी हार्मोन्स बनाना
बॉडी में फिल्टर का काम करती है किडनी
खून से वेस्ट को छानती है किडनी
देश में मौत की 5 वीं बड़ी वजह है किडनी। भारत में 1 करोड़ से ज्यादा क्रॉनिक किडनी पेशेंट हैं। हर साल 2 लाख किडनी की जरूरत पड़ती है। भारत में 12 फीसदी पुरुष किडनी की बीमारियों से परेशान हैं। वहीं भारत की 14 फीसदी महिलाएं किडनी की बीमारियों से जूझ रही हैं।
किडनी की बीमारियां
किडनी इंफेक्शन
यूरिन में प्रोटीन की अधिकता
किडनी सिकुड़ना
किडनी स्टोन
यूटीआई
कैसे मिलेगी किडनी को लॉन्ग लाइफ
वर्कआउट करें
वजन कंट्रोल करें
स्मोकिंग से बचें
खूब पानी पिएं
जंकफूड ना लें
ज्यादा पेनकिलर ना लें
किडनी प्रॉब्लम की वजह
कम पानी पीना
यूरिन रोकना
ज्यादा नमक खाना
ज्यादा चीनी खाना
शुगर
हाई बीपी
मोटापा
किडनी की बीमारी के लक्षण
यूरिन में खून
यूरिन ब्लॉकेज
यूरिन में दर्द-जलन
पीठ में दर्द
हाथ-पैर में सूजन
इन चीजों से करें परहेज
पैक्ड पॉपकॉर्न
पैक्ड फूड
चीज़
अचार
टमाटर सॉस
इंस्टेंट सूप
मेयोनीज़
ज्यादा चीनी वाला खाना भी करता है नुकसान
फ्रूट जूस
फ्लेवर्ड दूध
कोल्ड ड्रिंक
बेकरी प्रोडक्ट्स
कैचप
किडनी में पथरी की वजह
पानी कम पीना
नमक-मीठा ज्यादा खाना
नॉन वेज ज्यादा खाना
कैल्शियम-प्रोटीन का लेवल बिगड़ना
जेनेटिक फैक्टर्स
किडनी स्टोन में फायदेमंद हैं ये चीजें
खट्टी छाछ
कुलथ की दाल
कुलथ दाल का पानी
जौ का आटा
पत्थरचट्टा के पत्ते
किडनी रहेगी हेल्दी
गोखरु को पानी में उबालकर ठंडा कर लें। महीने में एक बार गोखरु का पानी पिएं। इससे आप किडनी स्टोन और किडनी इंफेक्शन से बचेंगे।

Lifestyle
पेट की समस्या है परेसान?तो जानें वजह,ये रही छुटकारा पाने का उपाय..

पेट में गैस यानी एसिडिटी होना आजकल लोगों के लिए आम समस्या बन गई है. आज हम आपको इस समस्या की वजह और इससे छुटकारा पाने का उपाय बताते हैं.खराब लाइफ स्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी की वजह से पेट में गैस यानी एसिडिटी होना आजकल लोगों के लिए आम समस्या बन गई है. इससे निपटने के लिए लोग कई तरह की दवा खाते और परहेज करते हैं. फिर भी उन्हें आराम नहीं मिल पाता. आज हम इस समस्या की वजह और उपाय दोनों बताते हैं.
पेट में गैस बनने की वजह
जब भी आप कोई खाना या पानी का सेवन करते हैं तो कुछ मात्रा में हवा भी आपके शरीर में प्रवेश कर जाती है. जब पाचन तंत्र आपकी ओर से खाए हुए खाने को पचाता है तो गैस बनती हैं. यह हवा आपके पेट के आसपास प्रेशर डालती है, जिससे आपको गैस और डकार आती हैं. एक सामान्य व्यक्ति के पेट में रोजाना 2 गिलास जितनी गैस बनना सामान्य बात है. हालांकि अगर आपके पेट में इससे ज्यादा गैस बनने लगे तो यह चिंता की बात होती है. यह पेट के कैंसर का एक संकेत भी हो सकता है.
गुनगुना पानी पीने से राहत
अगर आपको एसिडिटी की ज्यादा समस्या हो रही है तो गुनगुना पानी या हर्बल टी पीने से भी आपको इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है. अदरक और पुदीने का पानी काफी काम आ सकता है. सौंफ और सेब का सिरका भी एसिडिटी से राहत दिलाने में मददगार माना जाता है.
एसिडिटी से ऐसे पाएं राहत
पेट की गैस या एसिडिटी की समस्या से राहत पाने के लिए चाय और दूध से बनी चीजों के सेवन, कोल्ड ड्रिंक्स को पीने से बचें. प्याज, आलू, पालक या ऐसी दूसरी चीजें भी न खाएं, जिससे पेट में ज्यादा गैस बनती है. खाना खाते समय बातें करने से बचें, जिससे शरीर में हवा को जाने से रोका जा सके. जंक फूड और तेज मसाले से बनी चीजें एसिडिटी का बड़ा कारण बनती हैं. इसलिए इन्हें खाने से भी परहेज करना चाहिए.
सुस्त हो जाता है इंसान
जब पेट में गैस बनती है और वह पास नहीं हो पाती तो पेट में दर्द और ऐंठन होने लगती है. इसके चलते इंसान सुस्त हो जाता है और वह नॉर्मल नहीं रह पाता. उसे अपना पेट फूला हुआ लगता है. जिसके चलते वह सहज नहीं रह पाता और परेशान हो जाता है. ऐसे में जितना जल्दी हो सके, एसिडिटी से निजात पा लेना जरूरी हो जाता है.
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White Hair Causes : इन 5 कारणों से पकते है कम उम्र में बाल,जानें छुटकारा पाने का तरीका..

White Hair Causes: आजकल की बदलती लाइफस्टाइल और अनहेल्दी फूड हैबिट्स की वजह से कम उम्र में ही बाल सफेद हो रहे हैं, आखिर इस परेशानी से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है. बढ़ती उम्र के साथ बालों में सफेदी आना आम बात है. लेकिन परेशानी तब होती है, जब आपके बाल कम उम्र में ही सफेद होने लगते हैं. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. जिनमें से कुछ को रोका जा सकता है. आइए जानते हैं कि ऐसी परेशानी को कैसे दूर किया जा सकता है.
कम उम्र में बाल क्यों होते हैं सफेद?
जब बालों का पिग्मेंटेशन कम होने लगता है, तो उनका रंग काले से सफेद होने लगता है. कम उम्र या बच्चों के बाल सफेद होने के पीछे 5 कारण हो सकते हैं.
1. जेनेटिक्स
कम उम्र में बाल सफेद होने का कारण जेनेटिक्स हो सकता है. इस व्हाइट हेयर प्रॉब्लम का कोई स्थाई इलाज नहीं है. क्योंकि, यह आपके जीन्स से जुड़ी होती है. अगर आपके माता-पिता या परिवार में किसी को यह परेशानी बचपन में हुई है, तो आपको भी कम उम्र में ही सफेद बाल देखने को मिल सकते हैं.
2. टेंशन
जिंदगी में हर किसी को टेंशन का सामना करना पड़ सकता है. जब ये तनाव जरूरत से ज्यादा हो जाता है तो नींद न आने, चिंता, भूख में बदलाव, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. वहीं एक रिसर्च बताती है कि तनाव बालों की जड़ों में मौजूद स्टेम सेल्स को कमजोर बनाने लगता है, जिससे बाल सफेद होने लगते हैं.
3. ऑटोइम्यून डिजीज
कम उम्र में बाल सफेद होने की वजह ऑटोइम्यून डिजीज भी हो सकती है. बाल सफेद होने का कारण बनने वाली ऑटोइम्यून डिजीज के नाम एलोपेसिया या विटिलिगो हैं. इन बीमारियों में इम्यून सिस्टम अपनी ही सेल्स को नुकसान पहुंचाने लगता है और प्रीमैच्योर व्हाइट हेयर हो जाते हैं.
4. विटामिन बी-12 की कमी
कम उम्र में सफेद बाल होने का कारण विटामिन की कमी भी हो सकती है. जब शरीर में विटामिन बी-12 की कमी हो जाती है, तो बाल पकने लगते हैं. यह विटामिन एनर्जी देने, हेयर ग्रोथ और बालों के रंग को कंट्रोल करता है.
5. धूम्रपान
कई रिसर्च बताती हैं कि धूम्रपान करने के कारण भी आपके बाल उम्र से पहले सफेद हो सकते हैं. क्योंकि, धूम्रपान करने से नसें सिकुड़ जाती हैं और उनमें ब्लड फ्लो कम हो जाता है. जिससे बालों की जड़ों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता और वो सफेद होने लगते हैं.अगर आपके बाल कम उम्र में ही पक गए हैं, तो आप उसका जल्द ही उपाय करें. क्योंकि, सफेद बाल होने के ज्यादातर कारणों को रोका जा सकता है. डॉक्टर सफेद बालों के पीछे की वजह को जानकर उसका इलाज कर सकते हैं, जिससे बालों का पिग्मेंटेशन वापिस लौट आएगा और वो काले हो जाएंगे. अगर आपके शरीर में विटामिन बी-12 की कमी है, तो आप इसके सप्लीमेंट्स ले सकते हैं. वहीं बाल सफेद होने से रोकने के लिए धूम्रपान छोड़ना जरूरी है.
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Health Tips : दुनिया की ये है सबसे 5 ख़तरनाक बीमारी,ये रही बचाव के तरीके…

आज वर्ल्ड हेल्थ डे और आज के दिन आपको बताते हैं कैसे आप अपने आपको स्वस्थ और खुश रख सकते हैं। बेहतर स्वास्थ्य के प्रति दुनियाभर के लोगों को जागरूक करने के मकसद से WHO की तरफ से वर्ल्ड हेल्थ डे मनाया जाता है।
आपको बता दें कि 1948 में, WHO ने प्रथम विश्व स्वास्थ्य सभा का आयोजन किया। 1950 से सभा ने प्रत्येक साल के 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
सेहत के प्रति जागरूक होने के लिए जरूरी है कि हम उन बीमारियों के बारे में जानें जिससे दुनियाभर में सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं। WHO के मुताबिक ये हैं दुनिया की 5 सबसे घातक बीमारियां जिसकी चपेट में आकर हर साल सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती है।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज
इस वक्त दुनिया की सबसे घातक बीमारी कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) है जिसकी वजह से साल 2015 में दुनियाभर में 88 लाख लोगों की मौत हुई थी। दुनियाभर के 15.5 प्रतिशत लोगों की मौत के पीछे यह बीमारी जिम्मेदार है। साल 2000 में जहां इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 60 लाख थी वहीं 2015 में यह बढ़कर 88 लाख हो गई। CAD उस परिस्थिति को कहते हैं जब हृदय तक खून पहुंचाने वाली रक्त नलिकाएं संकुचित हो जाती हैं जिस वजह से चेस्ट पेन और हार्ट फेल जैसी समस्याएं हो सकती हैं।CAD से जुड़े रिस्क फैक्टर्स
बचाव के तरीके
नियमित व्यायाम, संतुलित वजन, बैलेंस्ड डाइट का सेवन, फल और सब्जियां ज्यादा खाएं, स्मोकिंग करने से बचें, संतुलित मात्रा में शराब का सेवन
ब्रेन स्ट्रोक
सबसे घातक बीमारियों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर है स्ट्रोक जिसकी वजह से साल 2015 में 62 लाख लोगों की मौत हुई थी और दुनियाभर में हुई मौतों में 11.1 प्रतिशत मौतें इसी बीमारी की वजह से हुई। स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क की कोई धमनी या तो ब्लॉक हो जाती है या फिर लीक होने लगती है। ऐसे में ब्रेन सेल्स को ऑक्सिजन नहीं मिलता और महज कुछ मिनटों में मरीज ब्रेन डेड हो जाता है। स्ट्रोक के दौरान मरीज अचानक संवेदनशून्य हो जाता है, उसे देखने और चलने में दिक्कत होने लगती है।
रिस्क फैक्टर्स
हाई बीपी, स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री, धूम्रपान (साथ में गर्भनिरोधक गोलियां ले रहीं हों तो खतरा ज्यादा), महिलाओं में खतरा ज्यादा
बचाव के तरीके
लाइफस्टाइल में करें बदलाव, बीपी को रखें कंट्रोल में, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, हेल्दी डाइट का सेवन करें।
लोअर रेस्पिरेट्री इंफेक्शन
श्वास संबंधी इंफेक्शन की वजह से साल 2015 में 32 लाख लोगों की मौत हो गई थी और दुनियाभर में हुई कुल मौतों में इस बीमारी से होने वाली मौत का प्रतिशत 5.7 है। हालांकि साल 200 से तुलना करें तो इस बीमारी में कमी आयी है। साल 2000 में जहां रेस्पिरेट्री इंफेक्शन से 34 लाख लोगों की मौत हुई थी वहीं 2015 में यह संख्या घटकर 32 लाख हो गई। लोअर रेस्पिरेट्री इंफेक्शन हमारे शरीर के वायु-मार्ग और फेफड़ों को प्रभावित करता है जिसकी वजह से फ्लू, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और टीबी तक हो सकता है।
रिस्क फैक्टर्स
फ्लू, हवा की खराब क्वालिटी, धूम्रपान, कमजोर इम्यून सिस्टम, अस्थमा, एचआईवी
बचाव के तरीके
हर साल फ्लू वैक्सीन लें, नियमित रूप से हाथों को साबुन-पानी से धोएं (खासकर खाने से पहले), अगर इंफेक्शन हो जाए तो घर पर रहकर आराम करें।
क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज (COPD)
यह फेफड़ों से जुड़ी लॉन्ग टर्म बीमारी है जिसमें सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और इम्फीसेमा COPD के 2 प्रकार हैं। साल 2004 में दुनियाभर में 6 करोड़ 41 लाख लोग COPD बीमारी के साथ रह रहे थे जबकि 2015 में करीब 31 लाख लोगों की इस बीमारी की वजह से मौत हो गई। 2015 में दुनियाभर में 5.6 प्रतिशत लोगों की मौत इस बीमारी की वजह से हुई थी।
रिस्क फैक्टर्स
एक्टिव और पैसिव दोनों तरह की स्मोकिंग, केमिकल के धुएं की वजह से फेफड़ों में जलन, फैमिली हिस्ट्री, बचपन में श्वास संबंधी इंफेक्शन रहा हो तो।
बचाव के तरीके
COPD को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता, सिर्फ दवाओं से कम कर सकते हैं, एक्टिव और पैसिव स्मोकिंग से बचें, अगर फेफड़ों में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
रेस्पिरेट्री कैंसर
रेस्पिरेट्री यानी श्वास संबंधी कैंसर में श्वास नली, कंठ, ब्रॉन्कोस और फेफड़ों का कैंसर शामिल है के होने की 2 मुख्य वजह है। पहला- धूम्रपान या दूसरों के धूम्रपान की वजह से निकलने वाले धुएं में सांस लेना और दूसरा- वातावरण में मौजूद जहरीले कण। साल 2015 की एक स्टडी के मुताबिक श्वास संबंधी कैंसर की वजह से दुनियाभर में 40 लाख लोगों की हर साल मौत होती है। विकासशील देशों में तो पॉल्यूशन और स्मोकिंग की वजह से इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है।
रिस्क फैक्टर्स
वैसे तो श्वास संबंधी कैंसर किसी को भी हो सकता है लेकिन धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने वालों में खतरा अधिक होता है, फैमिली हिस्ट्री और वातावरण के कारण भी इसमें शामिल हैं।
बचाव के तरीके
फेफड़ों के कैंसर से बचने के लिए धूल-धुआं और तंबाकू से बचें।
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