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today weather update: असम-मेघालय में भारी बारिश से 43 लोगो की हुई मौत, दिल्ली में तेज बारिश की सम्भावना…

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देश में बारिश के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं बाढ़ है, कहीं हल्की बारिश है तो कई राज्य अभी भी बारिश के इंतजार में हैं। असम और मेघालय में बाढ़ से अब तक 43 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, राजस्थान में प्री-मानसून की बारिश से नदियां-नाले उफान पर हैं। दिल्ली की बात करें तो आज मौसम विभाग ने तेज बारिश की संभावना जताई है। आइए जानते हैं अलग-अलग राज्यों में बारिश की स्थिति…

असम-मेघालय में भारी बारिश से हालात खराब
असम और मेघालय में भारी बारिश से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बाढ़ और लैंडस्लाइड से असम में अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, मेघालय में 19 लोगों की मौत हो गई है। दोनों राज्यों में कम से कम 40 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। असम के 28 जिलों में स्थिति बेहद ही खराब है। हालांकि, सेना राहत और बचाव अभियान चला रही है।

4 करीब हजार गांव बाढ़ से प्रभावित
असम में 32 जिलों में 31 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि लगभग 1.56 लाख लोग 514 राहत शिविरों में हैं। बाढ़ के कारण कई हजार हेक्टेयर खेत बर्बाद हो गए हैं। कई सड़कें टूट गई हैं। ब्रह्मपुत्र, गौरांग, कोपिली, मानस और पगलाड़िया नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर है।

पड़ोसी राज्यों में भी बाढ़ का खतरा
राज्य सरकार ने बाढ़ और भूस्खलन में फंसे लोगों के लिए गुवाहाटी और सिलचर के बीच उड़ानों की भी व्यवस्था की है। दक्षिण असम त्रिपुरा और मिजोरम को जोड़ने वाली सड़क का एक हिस्सा लैंडस्लाइड से बह गया। इसलिए सड़क का एक किनारा परिवहन के लिए बंद कर दिया गया है। उधर, पड़ोसी अरुणाचल प्रदेश में सुबनसिरी नदी के पानी ने एक बांध को जलमग्न कर दिया है। मणिपुर के कई जिलों में भी बाढ़ जैसे हालात हैं, यहां अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।

दिल्ली में रविवार को तेज बारिश का अनुमान
दिल्ली में बीते दिनों हुई झमाझम बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी में 21 जून तक बादल छाए रहने और तेज बारिश होगी। इसके अलावा दिल्ली में मानसून के 27 जून या एक-दो दिन पहले पहुंचने की उम्मीद है।

MP में भी बारिश ने जोर पकड़ा
मध्यप्रदेश में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। भोपाल, जबलपुर, सागर संभागों के अधिकांश इलाकों में बीते 3 दिन से बारिश हो रही है। अब अगले 48 घंटों में इन इलाकों में मानसून की भी बारिश शुरू हो जाएगी। भोपाल में तो रविवार सुबह भी रुक-रुककर बौछारें पड़ने लगी। इंदौर के भी अधिकांश इलाकों में बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, पूरे राज्य में 28 जून तक मानसून की रंगत दिखने लगेगी। पढ़ें पूरी खबर…

बिहार में आज इन जिलों में अलर्ट
बिहार के कई जिलों में आज मौसम विभाग ने तेज बारिश की संभावना जताई है। इसमें बक्सर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, बेगूसराय, लखीसराय, जहानाबाद, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर और खगड़िया शामिल है।

यूपी में देरी से आएगा मानसून
यूपी में मानसून इस साल एक हफ्ते की देरी से आएगा। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि 21 से 22 जून तक मानसून आएगा। हालांकि, बीते दिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बारिश भी हुई। इससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत भी मिली। मौसम विभाग ने आज मेरठ, सहारनपुर सहित कई इलाकों में बारिश की संभावना जताई है। पढ़ें पूरी खबर…

छत्तीसगढ़ में अब तक दुर्ग में ही अटका मानसून
छत्तीसगढ़ पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून दुर्ग में ही अटका पड़ा है। वहीं घने काले बादलों ने पूरे प्रदेश में डेरा जमा लिया है। चांपा, जांजगीर और मरवाही में शनिवार को भारी बरसात दर्ज हुई। वहीं, बस्तर से लेकर दुर्ग तक के इलाके करीब-करीब सूखे ही रहे। मौसम विभाग के अनुसार आज कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है। पढ़ें पूरी खबर…

इस बार सामान्य रहेगा मानसून
मौसम विभाग और वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार मानसून सामान्य रहेगा। बारिश के बीच अगर बड़ा अंतर नहीं आता है तो जुलाई-अगस्त में अच्छी बरसात होगी। देश में पूर्वी महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ ऐसे प्रदेश हैं जहां बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों मानसून सक्रिय होते हैं।

21 साल में 14 बार सामान्य रहा मानसून
2001 से अब तक 21 सालों में मानसून 14 बार सामान्य रहा है। वहीं 2 बार 2002 और 2009 में सामान्य से कम रहा। 2002 में राजस्थान में महज 233 MM और 2009 में 378 MM बरसात हुई थी। वहीं पांच बार सामान्य से ज्यादा मानसून रहा। इनमें 2006 में 670 MM, 2011 में 736 MM, 2013 में 691 MM, 2016 में 678 और 2019 में 747 MM बरसात हुई है।

प्रदेश

चित्तूर : बस की घाटी में गिरने से मौके पर 7 लोगों की मौत,करीब घायल

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आंध्र प्रदेश के चित्तूर में एक बस के घाटी में गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई और 54 घायल हो गए। ये हादसा शनिवार देर रात हुआ। तिरुपति से करीब 30 किलोमीटर दूर बकरपेटा के पास चालक के वाहन से नियंत्रण खोने के बाद एक निजी बस घाटी में गिर गई। बस पर अनंतपुर जिले के धर्मावरम के राजेंद्र नगर से दूल्हे के परिवार के 63 सदस्य सवार थे।

ये लोग तिरुचनूर में सगाई में शामिल होने के लिए जा रहे थे।पुलिस के अनुसार, जब बस बकरपेटा घाट पर पहुंची तो चालक ने लापरवाही के कारण वाहन से नियंत्रण खो दिया और इस कारण बस 60 फीट गहरी घाटी में गिर गई। बस के गिरने पर सड़क पर कोई चश्मदीद नहीं था। बाद में कुछ वाहन चालकों ने घायलों की चीख पुकार सुनी और पुलिस को सूचना दी।

अंधेरे के कारण बचाव कार्य में लगे बचावकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। तिरुपति के शहरी पुलिस अधीक्षक वेंकटप्पला नायडू, कलेक्टर एम. हरिनारायण और अन्य लोग मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान की निगरानी की।

सभी 54 घायलों को तिरुपति के रुइया अस्पताल ले जाया गया, जहां 4 की हालत गंभीर है। मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने घटना पर दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को दुर्घटना और बचाव कार्य की जानकारी दी। चंद्रगिरी के विधायक चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी ने बचाव कार्य में भाग लिया। जगन मोहन रेड्डी ने अधिकारियों को घायलों को सर्वोत्तम संभव इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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छत्तीसगढ़

Weathar update: यहां आज फिर हो सकती है बरसात, इन प्रदेशो में हल्की बारिश की संभावना…

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छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हवा की दिशा बदली है। पूर्व की ओर से आ रही हवाएं बंगाल की खाड़ी से अच्छी-खासी नमी ला रही हैं। इसकी वजह से बुधवार को प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की बरसात की संभावना बन रही है। वर्षा का क्षेत्र सरगुजा और बिलासपुर संभाग होगा।मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त, गर्म हवा आने के कारण बुधवार को न्यूनतम तापमान में वृद्धि संभावित है। नमी युक्त हवा आने के कारण से आंशिक रूप से बादल छाने की भी संभावना है। प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा होने अथवा गरज चमक के साथ छींटे पढ़े की सम्भावना बन रही है। प्रदेश में वर्षा का क्षेत्र मुख्यतः उत्तर छत्तीसगढ़ ही रहने की संभावना है।मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को रायपुर में पूरवी हवा 1.3 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से बह रही थी। जबकि दुर्ग में हवा की दिशा उत्तर-पूर्वी थी। वहीं रफ्तार 3.6 किमी प्रति घंटा दर्ज हुई। अंबिकापुर, बिलासपुर, पेण्ड्रा रोड, जगदलपुर और राजनांदगांव जैसे केंद्रों में हवा शांत है। हवा में नमी की मात्रा 62 से 78% तक मापी गई है। एक सप्ताह पहले भी इन क्षेत्रों में बरसात हुई थी। उसके बाद शीतलहर की स्थिति वापस लौटी। हालांकि मौसम में इस बदलाव के बाद तापमान में अधिक गिरावट की संभावना कम बताई जा रही है। मौसम का यह बदलाव एक-दो दिन ही असर दिखाएगा। उसके बाद स्थिति सामान्य होती जाएगी।

एक-दो डिग्री तक गर्म हुआ न्यूनतम तापमान

हवा की दिशा बदलने के साथ मौसम गर्म हो गया है। एक दिन के भीतर न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री की बढ़त देखी जा रही है। मंगलवार-बुधवार की रात का न्यूनतम तापमान 10.7 डिग्री सेल्सियस रहा जाे बलरामपुर में दर्ज हुआ। एक दिन पहले यह 8 डिग्री के आसपास था। रायपुर में न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस मापा गया जो सबसे अधिक था। बिलासपुर, पेण्ड्रा रोड, अंबिकापुर, जगदलपुर और दुर्ग में न्यूनतम तापमान अभी भी सामान्य से कम है।

रायपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में सर्द-गर्म रही रात

रायपुर में दिन का तापमान तेजी से बढ़ा है। मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों अधिकतम तापमान 29.2 से 29.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। लेकिन रात के तापमान में मामूली बढ़त देखी गई। रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र पर न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस मापा गया। एक दिन पहले यह 15.8 डिग्री था। माना हवाई अड्‌डे के पास न्यूनतम तापमान 15.9 डिग्री रहा। एक दिन पहले यहां तापमान 14.6 डिग्री मापा गया था। कृषि विश्वविद्यालय के पास लाभांडी में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि एक दिन पहले यहीं पर 12.5 डिग्री तापमान दर्ज हुआ था।

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छत्तीसगढ़

यहां वैज्ञानिको ने किया चौकाने वाला खुलासा, जाने क्या है यहां वजह… 

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क्या चांद को उसकी जगह से हटाया जा सकता है? अगर चांद अपने स्थान से हटकर धरती के पास आ जाए या उससे दूर चला जाए, तो इसका क्या असर होगा? आइए जानते हैं। चांद पथरीला है और इसके चारों तरफ बेहद पतली गैसों (एक्सोस्फेयर) की परते हैं। चांद का निर्माण धरती के साथ ही हुआ था। इस परिभाषा को पूरी दुनिया मानती है। नासा ने बताया है कि जब धरती बन रही थी, तो उससे एक थीया नामक प्रोटोप्लैनेट की टक्कर हुई थी जिसके बाद चांद अलग हो गया और धरती के पास ही अपना बसेरा बना लिया।

एक दूसरी थ्योरी के मुताबिक, दो अन्य अंतरिक्षीय वस्तुओं की टक्कर से धरती और चांद का निर्माण हुआ है। आपस में टकराने वालीं दोनों वस्तुएं मंगल ग्रह से आकार में पांच गुना ज्यादा बड़ी थीं। इस बात को भी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा मानती है। धरती से लगभग 3.85 लाख किमी की दूरी पर चांद स्थित है। धरती के आकार का एक चौथाई चांद है। चांद की सतह पर चारों तरफ गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं। चांद पर इनका निर्माण एस्टेरॉयड्स और उल्कपिंड़ों की टक्कर के बाद हुआ है। इनमें से अधिकतर गड्ढों का निर्माण करोड़ों साल पहले हुआ था। हालांकि पृथ्वी और चांद पर एस्टेरॉयड्स और उल्कापिंडों में टकराव कम होता है।

कैलिफोर्निया में नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में सेंटर फॉर नीयर अर्थ ऑबजेक्ट स्टडीज धरती के आसपास घूमने और गुजरने वाले एस्टेरॉयड्स और धूमकेतुओं पर नजर रखता है। इस संस्था के द्वारा तय किया जाता है कि पृथ्वी के लिए कौन सा एस्टेरॉयड या धूमकेतु खतरनाक है। इस संस्था ने धरती के 19.45 करोड़ किमी की रेंज में घूमने वाले 28 हजार नीयर अर्थ ऑबजेक्ट्स का पता लगाया है। इस संस्था के मैनेजर पॉल चोडस का कहना है कि नीयर अर्थ ऑब्जेक्टस की टक्कर होगी या नहीं इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने अुनमान जताया है कि चांद और धरती की टक्कर कभी भी नहीं होगी।

पॉल ने धरती और चांद की टक्कर न होने की वजह भी बताई है। उनका कहना है कि धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति काफी ज्यादा है इसलिए धरती और चांद की टक्कर नहीं हो सकती है। गुरुत्वाकर्षण शक्ति कई बार धक्का भी दे सकती है। इसमें सिर्फ खिंचाव हीं नही होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ खींचने की शक्ति होती तो बहुत पहले चांद धरती से टकरा गया होता। उन्होंने कहा कि चांद के आकार का एस्टेरॉयड अगर चांद से टकराता है, तभी वह अपनी जगह से हिलेगा।

उन्होंने बताया है कि चांद को एक जगह से दूसरी जगह खिसकाना और धरती की तरफ लाना बहुत कठिन है। सिर्फ किसी तेज गति से एस्टेरॉयड की टक्कर के बाद ही ऐसा हो सकता है। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि इतनी खतरनाक टक्कर के बाद चांद टुकड़ों में बंट जाएगा। इसके बाद भी यह नहीं कहा जा सकता है कि चांद की टक्कर धरती से होगी। उसका कुछ हिस्सा धरती की तरफ आ सकता है। कुछ हजारों साल तो ऐसा नहीं होने वाला है।

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