नई दिल्ली: रोटी, ब्रेड, पास्ता, पिज्जा, बर्गर… जैसी खाने की कई चीजें गेहूं से बनती है. गेहूं दुनिया के लोगों की खाने की थाली में कोई न कोई रूप में मौजूद रहता ही रहता है. लेकिन गेहूं की उपज दुनिया के हर हिस्से में नहीं होती है. इसलिए गेहूं की सप्लाई का बैलेंस कायम रखने के लिए इसका आयात-निर्यात होता रहता है. लेकिन पिछले ढाई महीनों से चल रहे रूस-यूक्रेन की लड़ाई ने गेहूं के सप्लाई चेन को डगमगा दिया है. यूक्रेन और रूस दोनों ही दुनिया के बड़े गेहूं उत्पादक देश हैं और दोनों ही युद्ध की विभीषिका झेल रहे हैं.
रूस ने ब्लैक सी में यूक्रेन के बंदरगाहों की नाकेबंदी और घेराबंदी कर रखी है. लिहाजा यहां से कई हफ्तों से यूरोप को गेहूं की सप्लाई नहीं हो पा रही है. इससे विश्व बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ने लगी है. ऐसी ही परिस्थिति में गेहूं का एक और बड़ा उत्पादक देश भारत ने भी गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दिया है. इससे पहले से ही डवांडोल स्थिति के और भी चरमराने का अंदेशा पैदा हो गया है. रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक देश है. यूक्रेन और रूस मिलकर दुनिया के एक चौथाई गेहूं का निर्यात करते हैं और यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के करोड़ों लोगों का पेट भरते हैं. इन दोनों देशों से सूरजमुखी का बीज, बार्ली और मक्के की सप्लाई भी दुनिया को होती है.
अब इसे राष्ट्रपति पुतिन की प्लानिंग कहें या संयोग लेकिन रूस ने यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने से पहले ही साल 2021 में गेहूं के निर्यात को सीमित कर दिया है. रूस ने गेहूं के निर्यात को कम करने के लिए निर्यात टैक्स लगा दिया है. रूस का तर्क है कि घरेलू बाजार में खाद्यान्न कीमतों पर नियंत्रण के लिए उसने ऐसा कदम उठाया है. रूस के इस कदम से दुनिया के खाद्य बाजार में गेहूं की किल्लत पहले से ही चली आ रही थी. बता दें कि कृषि से संबंधित उत्पादों का बाजार वैश्विक हैं, इसलिए गेहूं की आपूर्ति में कोई भी कमी ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और अमेरिका सहित दुनिया के अन्य हिस्सों में पैदा होने वाले गेहूं की मांग और दाम को बढ़ा सकती है. रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू होने से पहले ही दुनिया कोरोना के मार से जूझ रही थी. समु्द्री मार्ग कई महीनों से बंद थे. गेहूं की खरीद बिक्री या तो कम हो रही थी या फिर हो ही नहीं रही थी. इसकी वजह से दुनिया में खाद्यान्नों की कीमतें पहले से ही बढ़ रही थीं
. गेहूं की कीमतें भी इससे बच नहीं पाई थी. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार अप्रैल 2020 से दिसंबर 2021 के बीच गेहूं की कीमतें 80 फीसदी बढ़ चुकी थी. इन विपरित परिस्थितियों के बीच फरवरी में पुतिन 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी. इसका नतीजा ये रहा कि रूसी बमबारी के बीच यूक्रेन के बंदरगाह ठप हो गए, निर्यात रुक गया. यूक्रेन से गेहूं का निर्यात रुकने से यूरोपियन यूनियन देशों को खासी परेशानी हुई है. बता दें कि ओडेशा और मारियुपोल जैसे बंदरगाह ब्लैक सी के तट पर ही स्थित हैं. रूसी बमबारी की वजह से यहां से निर्यात लगभग ठप है. यहां से पिछले तीन महीनों में 20 मिलियन टन गेहूं का निर्यात होना था. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है. अब EU यूक्रेन से गेहूं निर्यात के लिए समुद्री रूट के अलावा अन्य विकल्पों जैसे रेल, रोड और नदी का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है.
ओडेशा पोर्ट पहुंचे यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष माइकल ने कहा कि यहां पर गेहूं, मकई और दूसरे अनाज से भरे हैं. इस पोर्ट को तुरंत खोले जाने की जरूरत है. यूरोपियन निवेश बैंक के प्रमुख का कहना है कि यूक्रेन के पास 8 बिलियन यूरो का गेहूं है लेकिन युद्ध की वजह से वो इसे निर्यात नहीं कर सकता है. यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी कहा है कि अगर यूक्रेन के बंदरगाह नहीं खोले गए तो अफ्रीका, यूरोप और एशिया के कई देशों को खाद्यान्न संकट का सामना करना पड़ सकता है. वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने कहा है कि 24 फरवरी को यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद गेहूं की निर्यात कीमतें 22 फीसदी बढ़ गई हैं, जबकि मक्के की कीमत 20 फीसदी बढ़ी है.
संकट की इस घड़ी में दुनिया की नजर भारत के स्टोरेज पर है. दुनिया भर में फैलते जा रहे इस खाद्य संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र की संस्था वर्ल्ड फूड प्रोग्राम भारत से गेहूं खरीदने पर विचार कर रहा है. वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के अनुसार भारत से इस बारे में बात चल रही है. वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के मुख्य अर्थशास्त्री आरिफ हुसैन ने कहा कि भारत सरकार से इस बारे में बात चल रही है. बता दें कि एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2020-21 में भारत में 109.59 मिलियन टन गेहूं की पैदावार हुई थी. हालांकि दुनिया भर में गेहूं की बढ़ती कीमतें, घरेलू बाजार में खाद्यान्न की बढ़ती कीमतें और मुद्रा स्फीति से निपटने के लिए शनिवार को ही भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है. अब देखना होगा कि वर्ल्ड फूड प्रोग्राम इस रोक के बीच भारत से गेहूं खरीदने का रास्ता कैसे निकालता है. हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी जब जर्मनी की यात्रा पर गए थे तब उन्होंने कहा था कि आज भारत का किसान दुनिया का पेट भरने के लिए तैयार है. पीएम मोदी ने कहा था कि जब विश्व गेहूं की कमी से जूझ रहा है.
उस समय हमारे देश का मेहनती किसान दुनिया का पेट भरने के लिए आगे आ रहा है. हालांकि घरेलू मजबूरियों की वजह से भारत ने फिलहाल गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है. कुछ ही महीने पहले भारत ने खाद्यान्न संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान को गेहूं सप्लाई करने का निर्णय लिया है. भारत सरकार अफगानिस्तान को 50 हजार टन गेहूं पाकिस्तान के जरिए भेज रहा है.
हीटवेव, बारिश, बाढ़ और बिजली देश के कुछ हिस्सों में कहर बरपा रही है। कुछ हिस्से जहां चिलचिलाती गर्मी से जूझ रहे हैं, वहीं कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। बिहार में शुक्रवार को आंधी तूफान और बिजली गिरने से 16 जिलों में कम से कम 33 लोगों की मौत हो गई। इस बीच, असम में चार जिलों- नागांव, होजई, कछार और दरांग में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। अब तक यहां बाढ़ और बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
असम: 29 जिलों के 7.12 लोग बेघर
असम राज्य आपदा प्रबंधन के मुताबिक, राज्य के 29 जिलों में करीब 7.12 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। जमुनामुख जिले के दो गांवों के 500 से ज्यादा परिवारों ने रेलवे ट्रैक पर अपना अस्थायी आशियाना बना रखा है। अकेले नागांव जिले में 3.36 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं, जबकि कछार जिले में 1.66 लाख, होजई में 1.11 लाख और दरांग जिले में 52709 लोग प्रभावित हुए हैं।
बिहार: 16 जिलों में 33 की मौत
बिहार में शुक्रवार को आंधी तूफान और बिजली गिरने से 16 जिलों में कम से कम 33 लोगों की मौत हो गई। सीएम नीतीश कुमार ने घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 4 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया। राज्य मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार और रविवार को कुछ हिस्सों में आंधी तूफान के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इसकी वजह है कि यहां प्री-मानसून गतिविधियां अब सक्रिय हो गई हैं।
कर्नाटक: 9 की मौत, स्कूल-कॉलेज बंद
कर्नाटक में प्री-मानसून की दस्तक से हालात बदतर हैं। जलभराव से हुए हादसों के कारण नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हैं। एहतियातन सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया है। राहत और बचाव कार्य के लिए NDRF की चार टीमें तैनात की गई हैं।
बारिश के कारण 23 घर क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिली है। राजस्व मंत्री आर. अशोक ने बताया कि चिकमंगलूर, दक्षिण कन्नड़, उडुपी, शिवमोग्गा, दावणगेरे, हसन और उत्तर कन्नड़ जिले में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी कर दिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस बोम्मई ने बेंगलुरु के बारिश प्रभावित कई इलाकों का दौरा किया।
भूस्खलन का खतरा बढ़ा
कर्नाटक में जारी भारी बारिश के कारण राज्य के तटीय जिलों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने राज्य में दो और दिनों के लिए भारी बारिश का अनुमान जताया है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने उत्तर कन्नड़ जिले में भूस्खलन की चेतावनी दी है। बारिश के कारण 204 हेक्टेयर कृषि और 431 हेक्टेयर बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचा। आने वाले दिनों में भी बारिश का अलर्ट होने के कारण खेतों में खड़ी फसलों को और नुकसान पहुंचने का खतरा है।
जम्मू-कश्मीर टनल हादसा: 9 मजदूरों की तलाश अभी भी जारी
जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में टनल हादसे को आज तीन दिन हो गए है। अभी भी 9 मजदूर टनल के मलबे में फंसे हुए हैं। उन्हें बचाने लिए शनिवार सुबह फिर रेस्क्यू का काम शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मलबे को जल्द से जल्द हटाने के लिए मशीनरी और तकनीकी कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें
Palm Oil Import इंडोनेशिया से पाम आयल का आयात फिर से शुरू होने से खाद्य तेल के साथ साबुन शैंपू बिस्कुट टूथपेस्ट जैसी एफएमसीजी सेक्टर की वस्तुओं की कीमतों में भी राहत मिल सकती है। इन सभी के उत्पादन में पाम आयल का इस्तेमाल होता है
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। खुदरा महंगाई में अगले माह से थोड़ी राहत मिल सकती है। इसकी मुख्य वजह है कि इंडोनेशिया सोमवार से फिर से पाम आयल का निर्यात शुरू करने जा रहा है। 28 अप्रैल से इंडोनेशिया ने पाम आयल के निर्यात पर रोक लगा रखी है। इससे भारत में पाम आयल की कीमत में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया था और उसका असर सभी खाद्य तेलों के दाम पर दिख रहा था। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से सूरजमुखी के तेल का आयात पहले से ही प्रभावित है, इसलिए इंडोनेशिया की तरफ से पाम आयल के निर्यात पर रोक लगाने के फैसले से खाद्य तेल की कीमतों में तेजी को समर्थन मिल रहा था। अब इंडोनेशिया के इस फैसले से बड़ी राहत मिलने वाली है। मार्च की खुदरा महंगाई दर में खाद्य तेल के दाम में 18 प्रतिशत और अप्रैल में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
भारत में खाद्य तेल की खपत 225 लाख टन की है। इसमें 80 लाख टन पाम आयल शामिल है। भारत सालाना 40 लाख टन आयात इंडोनेशिया से करता है। इंडोनेशिया 62 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ विश्व का सबसे बड़ा पाम आयल उत्पादक देश है। दूसरे नंबर पर मलेशिया है, लेकिन मलेशिया पाम आयल में दुनिया की जरूरत को पूरा करने में सक्षम नहीं है।
इंडोनेशिया से पाम आयल का आयात फिर से शुरू होने से खाद्य तेल के साथ साबुन, शैंपू, बिस्कुट, टूथपेस्ट जैसी एफएमसीजी सेक्टर की वस्तुओं की कीमतों में भी राहत मिल सकती है। इन सभी के उत्पादन में पाम आयल का इस्तेमाल होता है। इंडोनेशिया ने अपने देश में खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए पाम आयल के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया था, लेकिन किसानों को हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए अब फिर से निर्यात खोलने का फैसला किया है।
वैश्विक स्तर पर खाद्य तेल के महंगे होने से भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में 1.4 लाख करोड़ रुपये के खाद्य तेल का आयात किया, जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में यह आयात 82,123 करोड़ रुपये का था।
छत्तीसगढ़ के बस्तर में बुधवार की शाम अचानक मौसम का मिजाज बदला। जगदलपुर, दंतेवाड़ा समेत आस-पास के इलाकों में पहले तेज आंधी चली, फिर बारिश हुई हैं। जिससे मौसम सुहावना हो गया है। इधर, वैज्ञानिकों ने भी अगले 4 घंटों में संभाग के कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर और दंतेवाड़ा जिले में तेज अंधड़ चलने की संभावना जताई है।
मौसम वैज्ञानिक एपी चंद्रा ने कहा कि, एक उत्तर-दक्षिण द्रोणिका मध्य प्रदेश से अंदरूनी तमिलनाडु तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। वहीं एक पूरब-पश्चिम द्रोणिका उत्तर-पश्चिम राजस्थान से पश्चिम असम तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। प्रदेश के कई स्थानों में बारिश होने की संभावना है। साथ ही कल 19 मई को भी प्रदेश में अधिकतम तापमान में गिरावट का दौर जारी रहेगा।
किसानों के लिए जारी की गई एडवाइजरी
मौसम के बदलते स्वरूप को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सिंचाई नहीं करने की सलाह दी है।
खरीफ में जिन फसलों की बुवाई करनी हो उनकी उन्नतशील जातियों के बीज की व्यवस्था करने कहा है।
रबी फसलों की कटाई के बाद जहां संभव हो पर्याप्त मात्रा में नमी होने की अवस्था में गहरी जुताई करें।
अदरक, हल्दी, एवं जिमीकंद फसल को लगाने कि तैयारी कर कंदों का रोपण करें।
केला, पपीता एवं अन्य फसलों में वाष्पोत्सर्जन की दर को देखते हुए ड्रिप में पानी की मात्रा को बढ़ा दें।
गर्मी की फसल एवं साग सब्जी की फसलों की सतत निगरानी रखें एवं आवश्यकतानुसार उपयुक्त सिंचाई करें।
पालतू पशुओं को लू लगने पर छायादार जगह ले जाकर गिले कपड़े से पुरे शरीर को बार-बार पोछें।
आम, नींबू एवं अन्य फसलों में सिंचाई प्रबंधन करें। फलदार वृक्षों के लिए निर्धारित दूरी पर गड्ढें खोदकर छोड़ दें।
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