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दीपावली पूजन और मुहूर्त

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दीपावली हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। हिंदू धर्म में दीपावली का विशेष महत्व है। धनतेरस से भाई दूज तक करीब 5 दिनों तक चलने वाला दीपावली का त्यौहार भारत और नेपाल समेत दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है। दीपावली को दीप उत्सव भी कहा जाता है। क्योंकि दीपावली का मतलब होता है दीपों की अवली यानि पंक्ति। दीपावली का त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध, जैन और सिख धर्म के अनुयायी भी दीपावली मनाते हैं। जैन धर्म में दीपावली को भगवान महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं सिख समुदाय में इसे बंदी छोड़ दिवस के तौर पर मनाते हैं।
 
दीपावली कब मनाई जाती है ?
 
1.  कार्तिक मास में अमावस्या के दिन प्रदोष काल होने पर दीपावली (महालक्ष्मी पूजन) मनाने का विधान है। यदि दो दिन तक अमावस्या तिथि प्रदोष काल का स्पर्श न करे तो दूसरे दिन दिवाली मनाने का विधान है। यह मत सबसे ज्यादा प्रचलित और मान्य है।
2.  वहीं, एक अन्य मत के अनुसार, अगर दो दिन तक अमावस्या तिथि, प्रदोष काल में नहीं आती है, तो ऐसी स्थिति में पहले दिन दीपावली मनाई जानी चाहिए।
3.  इसके अलावा यदि अमावस्या तिथि का विलोपन हो जाए, यानी कि अगर अमावस्या तिथि ही न पड़े और चतुर्दशी के बाद सीधे प्रतिपदा आरम्भ हो जाए, तो ऐसे में पहले दिन चतुर्दशी तिथि को ही दीपावली मनाने का विधान है।
दीपावली मुहूर्त 27 october 2019
 
दिन रविवार अमावस्या तिथि आरंभ 12:23 PM से
अभिजित मुहूर्त – 11:24 am – 12:10 pm
राहू काल – 16:04 से 17:30 तक
 
चौघडिया – दिन के मुहूर्त
चर- 07:30 – 08:56
लाभ- 08:56 – 10:22
अमृत- 10:22 – 11:47
 
शुभ- 13:13 – 14:38
 
संध्या- रात्रि के मुहूर्त
 
शुभ- 17:30- 19:04
अमृत- 19:04 -20:39
चर- 20:39 – 22:13
लाभ- 25:22 – 26:56
शुभ- 28:31- 30:05
स्थिर लग्न
वृश्चिक- 07:40 से 09:57
कुम्भ- 13:38 से 15:19
वृषभ- 18:25 से 20:22
सिंह- 24:53 से 27:07
नोट : महालक्ष्मी पूजन 2019 प्रारम्भ दोपहर 12:23 PM से
 
प्रदोष काल ?
27 अक्टूबर 2019, रविवार के दिन तक 18 : 05 से 19 :41 प्रदोष काल रहेगा. मान्यता के अनुसार प्रदोष काल सूर्यास्त के समय से आगे चार घटी अर्थात 96 मिनिटो का होता है. प्रदोष काल समय को दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता है. प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उतम रहता है. इस दिन वृषभ- 18:25 से 20:22 के दौरान वृष लग्न रहेगा. प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों रहने से मुहुर्त शुभ रहेगा.
 
निशीथ काल या  महानिशीथ काल ?
निशीथ काल रात्रि 12 बजे से रात 3 बजे तक का समय होता है। आमजन इसे मध्यरात्रि या अर्ध रात्रि काल कहते हैं। शास्त्रानुसार, यह समय अदृश्य शक्तियों, भूत व पिशाच का समय होता है। इस समय में यह शक्ति अत्यधिक रूप से प्रबल हो जाती हैं।साल के कुछ दिनों को छोड़कर जैसे दीपावली, 4 नवरात्रि, जन्माष्टमी व शिवरात्रि पर निशीथ काल महानिशीथ काल बनकर शुभ प्रभाव देता है, जबकि अन्य समय में दूषित प्रभाव देता है। धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए. इसके अतिरिक्त समय का प्रयोग श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य मंन्त्रों का जपानुष्ठान करना चाहिए.कोई कार्य प्रदोष काल अथवा निशीथ काल में शुरु करके इस महानिशीथ काल में संपन्न हो रहा हो तो भी वह अनुकूल ही माना जाता है. महानिशिथ काल में पूजा समय चर लग्न में कर्क लग्न उसके बाद स्थिर लग्न सिंह लग्न भी हों, तो विशेष शुभ माना जाता है. महानिशीथ काल में कर्क लग्न और सिंह लग्न होने के कारण यह समय शुभ हो गया है. जो शास्त्रों के अनुसार दिपावली पूजन करना चाहते हो, वह इस समयावधि को पूजा के लिये प्रयोग कर सकते हैं.
1.  देवी लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में किया जाना चाहिए। प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हों तब माता लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए। क्योंकि ये चारों राशि स्थिर स्वभाव की होती हैं। मान्यता है कि अगर स्थिर लग्न के समय पूजा की जाये तो माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती है।
2.  महानिशीथ काल के दौरान भी पूजन का महत्व है लेकिन यह समय तांत्रिक, पंडित और साधकों के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है। इस काल में मां काली की पूजा का विधान है। इसके अलावा वे लोग भी इस समय में पूजन कर सकते हैं, जो महानिशीथ काल के बारे में समझ रखते हों।
सामान्यतः दीपावली पूजन का अर्थ लक्ष्मी पूजा से लगाया जाता है, किंतु इसके अंतर्गत गणेश, गौरी, नवग्रह षोडशमातृका, महालक्ष्मी, महाकाली, महासरस्वती, कुबेर, तुला, मान व दीपावली की पूजा भी होती है। दीपावली प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती है।
पूजन के लिए आवश्यक सामग्री :
लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियाँ, लक्ष्मी सूचक सोने अथवा चाँदी का सिक्का, लक्ष्मी स्नान के लिए स्वच्छ कपड़ा, लक्ष्मी सूचक सिक्के को स्नान के बाद पोंछने के लिए एक बड़ी व दो छोटी तौलिया। बहीखाते, सिक्कों की थैली, लेखनी, काली स्याही से भरी दवात, तीन थालियाँ, एक साफ कपड़ा, धूप, अगरबत्ती, मिट्टी के बड़े व छोटे दीपक, रुई, माचिस, सरसों का तेल, शुद्ध घी, दूध, दही, शहद, शुद्ध जल। पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी व शुद्ध जल का मिश्रण) मधुपर्क (दूध, दही, शहद व शुद्ध जल का मिश्रण)
हल्दी व चूने का पावडर, रोली, चन्दन का चूरा, कलावा, आधा किलो साबुत चावल, कलश, दो मीटर सफेद वस्त्र, दो मीटर लाल वस्त्र, हाथ पोंछने के लिए कपड़ा, कपूर, नारियल, गोला, मेवा, फूल, गुलाब अथवा गेंदे की माला, दुर्वा, पान के पत्ते, सुपारी, बताशे, खांड के खिलौने, मिठाई, फल, वस्त्र, साड़ी आदि, सूखा मेवा, खील, लौंग, छोटी इलायची, केसर, सिन्दूर, कुंकुम, गिलास, चम्मच, प्लेट, कड़छुल, कटोरी, तीन गोल प्लेट, द्वार पर टाँगने के लिए वन्दनवार। याद रहे लक्ष्मीजी की पूजा में चावल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। धान की खील (पंचमेवा गतुफल सेब, केला आदि), दो कमल। लक्ष्मीजी के हवन में कमलगट्टों को घी में भिगोकर अवश्य अर्पित करना चाहिए। कमलगट्टों की माला द्वारा किए गए माँ लक्ष्मीजी के जप का विशेष महत्व बताया गया है।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का विशेष विधान है। इस दिन संध्या और रात्रि के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा और आराधना की जाती है। पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं। इस दौरान जो घर हर प्रकार से स्वच्छ और प्रकाशवान हो, वहां वे अंश रूप में ठहर जाती हैं इसलिए दिवाली पर साफ-सफाई करके विधि विधान से पूजन करने से माता महालक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ कुबेर पूजा भी की जाती है। पूजन के दौरान कुछ ख़ास बातों का ध्यान रखना चाहिए
 
लक्ष्मी पूजन विधि :
  • दीपावली (महालक्ष्मी पूजन) के दिन लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई करें और पूरे घर में वातावरण की शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें। साथ ही घर के द्वार पर रंगोली और दीयों की एक शृंखला बनाएं।
  • दीपावली के दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
  • दीपावली की शाम को एक साफ चौकी बिछांए। इसके बाद इस पर गंगा जल छिड़काव करें।
  • भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के साथ कुबेर और श्री यंत्र भी स्थापित करें।
  • पूजा स्थान पर एक जल से भरा तांबे का कलश रखें अगर आपके पास तांबे का कलश नहीं है तो आप साधारण कलश भी रख सकते हैं।
  • इसके बाद कलश पर रोली से सातिया (स्वस्तिक ) बना लें और श्रीं लिखें इसके बाद मोली की 5 गांठे बांध दें।
  • इसके बाद आम के पत्ते बांध दे और पूजा स्थल पर पंच मेवा, गुड़ फूल , मिठाई,घी , कमल का फूल ,खील ,बतासे आदि भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के आगे रखें।
  • मां लक्ष्मी को कमल का फूल अत्याधिक प्रिय है इसलिए मां लक्ष्मी के दोनों और एक- एक कमल का फूल रखें।
  • इसके बाद भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के आगे पांच घी और पांच तेल के दीपक और तेल का बड़ा दीपक जलाएं। और विधिवत पूजन करें ।
  • पूजन स्थल में चार दिए चार कोनों में और एक घी का दिया भी अखंड दीप के रूप में प्रज्वलित करें
  • पंद्रह दिये तेल के तैयार क़र लें पूजन की पूर्णता से पूर्व इन दीयों को प्रज्वलित कर और इनकी पूजा करें और फिर इन दीयों को दरवाजे पर  रख दें
  • भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा के बाद कुबेर जी की पूजा भी अवश्य करें।
  • इसके बाद अपने गहनों ,पैसों और बहीखातों की भी पूजा करते हैं। जिससे आपकी संपन्नता लगातार बढ़ती रहे।
  • इस दिन घर के सभी कोनो की सफाई करके दिए का प्रकाश करें ,
सबसे पहले खुद पर सिंचन करें पवित्र हों फिर सामग्री पर जल छिड़कें,फिर गौरी गणेश कलश नवग्रह षोडशमातृका लक्ष्मी कुबेर सरस्वती काली का आवाहन करें फिर सभी को आसन फिर स्नान पंचामृत से स्न्नान फिर साफ़ जल से स्नान करावें सभी आवाहित देवताओ को मौली तथा यज्ञोपवीत आदि चढ़ावेंदीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें और माता महालक्ष्मी की स्तुति करें। इसके साथ देवी सरस्वती, मां काली, भगवान विष्णु और कुबेर देव की भी विधि विधान से पूजा करें। महालक्ष्मी पूजन के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरण की पूजा करें। इस दिन रात्रि में श्री सूक्त लक्ष्मी स्तोत्र ,कनक धारा स्तोत्र का पाठ करें या रात्रि जागरण कर ॐ ह्रीं महालक्ष्म्यै नमः इस मंत्र का रात्रि भर रुद्राक्ष अथवा कमल गट्टे की माला से जाप करें ,सुबह सूर्योदय से पूर्व अलक्ष्मी का विसर्जन करना चाहिए इसके लिए नया झाड़ू और सूपा लें घर की सफाई क़र सूर्योदय से पूर्व कचरा सूप में रख कर बाहर विसर्जित करें और पुनः स्नान क़र सभी आवाहित देवताओं का पूजन करें और सूर्योदय के बाद हवन करें ब्राम्हणों को गरीबों को यथा शक्ति दान करें,महालक्ष्मी पूजन पूरे परिवार को एकत्रित होकर करना चाहिए।
दीपावली में क्या जरूर करें ?
1.  कार्तिक अमावस्या यानि दीपावली के दिन प्रात:काल शरीर पर तेल की मालिश के बाद स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से धन की हानि नहीं होती है।
2.  दीपावली के दिन वृद्धजन और बच्चों को छोड़कर् अन्य व्यक्तियों को भोजन नहीं करना चाहिए। शाम को महालक्ष्मी पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
3.  दीपावली पर पूर्वजों का पूजन करें और धूप व भोग अर्पित करें। प्रदोष काल के समय हाथ में उल्का धारण कर पितरों को मार्ग दिखाएं। यहां उल्का से तात्पर्य है कि दीपक जलाकर या अन्य माध्यम से अग्नि की रोशनी में पितरों को मार्ग दिखायें। ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
4. दीपावली से पहले मध्य रात्रि को स्त्री-पुरुषों को गीत, भजन और घर में उत्सव मनाना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में व्याप्त दरिद्रता दूर होती है।
दीपावली को लेकर पौराणिक कथाएं क्या हैं ?
1.  कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान श्री राम चंद्र जी चौदह वर्ष का वनवास काटकर और लंकापति रावण का वध करके आयोध्या लौटे थे। इस दिन भगवान श्री राम चंद्र जी के अयोध्या आगमन की खुशी पर लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से दिवाली की शुरुआत हुई।
2.  एक अन्य कथा के अनुसार नरकासुर नामक राक्षस ने अपनी असुर शक्तियों से देवता और साधु-संतों को परेशान कर दिया था। इस राक्षस ने साधु-संतों की 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था। नरकासुर के बढ़ते अत्याचारों से परेशान देवता और साधु-संतों ने भगवान श्री कृष्ण से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवता व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई, साथ ही 16 हजार स्त्रियों को कैद से मुक्त कराया। इसी खुशी में दूसरे दिन यानि कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीये जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी और दीपावली का त्यौहार मनाया जाने लगा।
 
इसके अलावा दीपावली को लेकर और भी पौराणिक कथाएं सुनने को मिलती है,,,,,,
 
1.  धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने राजा बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया था और इंद्र ने स्वर्ग को सुरक्षित पाकर खुशी से दीपावली मनाई थी।
2.  इसी दिन समुंद्र मंथन के दौरान क्षीरसागर से लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं और उन्होंने भगवान विष्णु को पति के रूप में स्वीकार किया था।
दीपावली का ज्योतिषीय महत्त्व 
दीपावली के आसपास सूर्य और चंद्रमा तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में स्थित होते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य और चंद्रमा की यह स्थिति शुभ और उत्तम फल देने वाली होती है। तुला एक संतुलित भाव रखने वाली राशि है। यह राशि न्याय और अपक्षपात का प्रतिनिधित्व करती है। तुला राशि के स्वामी शुक्र जो कि स्वयं सौहार्द, भाईचारे, आपसी सद्भाव और सम्मान के कारक हैं। इन गुणों की वजह से सूर्य और चंद्रमा दोनों का तुला राशि में स्थित होना एक सुखद व शुभ संयोग होता है।
दीपावली की रात लक्ष्मी-गणेश की पूजा के बाद पूजन में इस्तेमाल हुए मुख्य दीपक से घर पर ही काजल बनाने की परंपरा है.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार काला टिका या फिर काजल के इस्तेमाल को हमेशा बुरी शक्तियों या कहें नेगेटिव वाइव्स से बचाने के लिए लगाया जाता रहा है. ऐसा माना जाता है कि दिवाली की रात भी पूजा के दीपक से बनाया हुआ काजल लगाने से बुरी नज़र नहीं लगती और घर की सुख समृ्द्धि कोई रुकावट पैदा नहीं होती. इसीलिए तिजोरी, घर का चूल्हा, दरवाज़ों आदि पर भी काला टीका लगाया जाता है. 
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जूनियर इंजीनियर के पदों पर भर्तियां,ऐसे करें फटाफट आवेदन…

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RSMSSB JE Recruitment 2022 Notification: राजस्थान अधीनस्थ और मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड ने जूनियर इंजीनियर (JE) के पदों पर भर्तियां निकाली हैं. चयन बोर्ड ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

योग्य उम्मीदवार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rsmssb.rajasthan.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदकों का चयन ऑनलाइन परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. यह परीक्षा 10 सितंबर 2022 को आयोजित की जाएगी. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 189 पदों पर कैंडिडेट्स का चयन किया जाएगा ।

भर्ती तारीखें

ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तारीख- 07-06-2022
ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तारीख- 06-07-2022
आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख- 06-07-2022
ऑनलाइन परीक्षा की तारीख- 10-09-2022

उम्र सीमा 

जूनियर इंजीनियर के पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा कैंडिडेट्स को हिंदी और संस्कृत का ज्ञान होना चाहिए. उम्र सीमा की बात करें, तो आवेदकों की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 40 साल होनी चाहिए. इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप नोटिफिकेशन देख सकते हैं.

ऐसे करें आवेदन 

जेई के इन पदों पर आवेदन करने के लिए योग्य उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट rsmssb.rajasthan.gov.in पर जाना होगा. वेबसाइट पर आपको इस भर्ती का नोटिफिकेशन मिल जाएगा, जिसे डाउनलोड करके अच्छी तरह पढ़ लें. इसमें भर्ती से जुड़ी विस्तृत जानकारी मिल जाएगी. इसमें दिए गए स्टेप्स को अपनाकर आवेदन फॉर्म भर सकते हैं. आवेदन करते वक्त सावधानी बरतें और अपनी डिटेल को कई बार चेक करने के बाद ही सबमिट करें. आवेदन फॉर्म में गलती होने पर यह निरस्त किया जा सकता है.

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देश - दुनिया

असम में फिर भारी वर्षा, चार श्रमिकों की हुई दर्दनाक मौत….

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पश्चिमी गुवाहाटी के डीसीपी नबनीत महंत ने बताया कि घटना स्थल पर चार श्रमिक रहते थे। वे मलबे में फंस गए थे। चारों मृतकों के शव निकाल लिए गए हैं।

असम में एक बार फिर भारी वर्षा व भूस्खलन की खबर आई है। गुवाहाटी में भारी वर्षा के कारण सड़कों पर जलजमाव हो गया। इससे लोगों को आने जाने में परेशानी हो रही है। मंगलवार को गुवाहाटी के बोरागांव के निकट निजरपार इलाके में भूस्खलन से एक मकान ढह गया। इसके मलबे में दबने से चार श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई।

पश्चिमी गुवाहाटी के डीसीपी नबनीत महंत ने बताया कि घटना स्थल पर चार श्रमिक रहते थे। वे मलबे में फंस गए थे। चारों मृतकों के शव निकाल लिए गए हैं। राजधानी गुवाहाटी में भारी वर्षा के कारण सड़कों पर जलजमाव हो गया है। इसके कारण लोगों को आवाजाही में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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लोअर डिवीजन क्लर्क, स्टेनोग्राफर, टेक्नीशियन, लाइब्रेरियन सहित विभिन्न पदों पर भर्ती,जानें भर्ती डिटेल

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BECIL Recruitment 2022 : ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) ने एम्स बिलासपुर के लिए जूनियर लेवल के पदों पर भर्ती निकाली है. इसके तहत लोअर डिवीजन क्लर्क, स्टेनोग्राफर, टेक्नीशियन, लाइब्रेरियन जैसे पदों पर भर्ती होगी.

एम्स बिलासपुर में कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर हो रही इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन बीईसीआईएल की वेबसाइट becil.com पर जाकर करना है. इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 28 जून 2022 है. बीईसीआईएल की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, कुल 123 वैकेंसी है.

बीईसीआईएल भर्ती 2022 वैकेंसी डिटेल

लोअर डिवीजन क्लर्क : 18
लाइब्रेरियन ग्रेड-III : 01
स्टेनोग्राफर : 05
जूनियर वार्डन : 03
स्टोर कीपर : 08
जेई (इलेक्ट्रिकल) : 02
जेई (एयर कंडीशनिंग और रेफ्रीजरेशन) : 01
कनिष्ठ हिंदी अनुवादक : 01
योग प्रशिक्षक (01-पुरुष और 01-महिला) : 02
एमएसएसओ जीआर-द्वितीय : 03
फार्मासिस्ट : 03
प्रोग्रामर : 03
जूनियर फिजियोथेरेपिस्ट : 01
सहायक आहार विशेषज्ञ : 02
एमआरटी : 10
डेंटल टेक्नीशियन (मैकेनिक) : 04
जूनियर ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट : 02
मोर्चरी अटैंडेंट : 02
सांख्यिकीय सहायक : 01
तकनीशियन (ओटी) : 12
ऑप्टोमेट्रिस्ट : 01
तकनीशियन (रेडियोलॉजी) : 06
तकनीशियन (प्रयोगशाला) : 23
तकनीशियन (रेडियोथेरेपी) : 02
परफ्यूज़निस्ट : 02
तकनीशियन (रेडियोलॉजी) : 02
तकनीशियन (प्रयोगशाला) : 03

आवेदन शुल्क

सामान्य / ओबीसी / भूतपूर्व सैनिक / महिला उम्मीदवार- 750 रुपये
एससी / एसटी / ईडब्ल्यूएस / पीएच श्रेणी- 450 रुपये

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