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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को जल्द मिलेगा पेंशन, मोदी सरकार कर रही है विचार

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सरकार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को पेंशन योजना के दायरे में शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने संसद की एक समिति को यह जानकारी दी. मूल रूप से यह पेंशन योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पेंशन देने के लिए बनाई गई थी लेकिन अब इसके दायरे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को भी शामिल करने की सरकार की योजना है.

संसद में हाल ही में पेश लोक लेखा समिति की एक रिपोर्ट में मंत्रालय के हवाले से कहा गया है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पेंशन देने के लिए एक योजना शुरू की जाएगी जो मूल रूप से भवन निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों के लिए है. लेकिन हम इसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायकों को भी शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं. इस संबंध में हमने हाल ही में एक फाइल वित्त विभाग को भेजी है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायकों के लिए दो प्रकार की बीमा योजनाएं शुरू की गई है. इसमें एक जीवन बीमा और दूसरा दुर्घटना बीमा है. इसके सम्पूर्ण प्रीमियम का भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है.

गौरतलब है कि तत्कालीन केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी की ओर से जुलाई 2019 में दी गई एक जानकारी में बताया गया था कि देश के सभी राज्यों में जून 2019 तक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के कुल 13,99,697 पद स्वीकृत थे. इसके सापेक्ष 13,02,617 पदों पर कार्यकर्ता तैनात हैं. केंद्र की प्रस्तावित पेंशन योजना से बड़े पैमाने पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को फायदा होगा.

25 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों में क्रेच का निर्माण किया जाना है

आंगनवाड़ी केंद्रों में शिशु गृहों (क्रेच) के निर्माण के बारे में समिति के सवाल के जवाब में मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने बताया कि शहरी क्षेत्र में 25 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों में क्रेच का निर्माण किया जाना है लेकिन इस संबंध में हमने ज्यादा सफलता प्राप्त नहीं की है. अपने मानदंडों के अनुरूप 5 प्रतिशत आंगनवाड़ी केंद्रों को क्रेच के रूप में विकसित करने की कोशिश भी की थी लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली.

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क्वारेंटाइन छोड़कर परिवार वालों से मिलने भागा IAS अधिकारी, केस हुआ दर्ज

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कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से पूरे देश में 14 अप्रैल तक लॉक डाउन है और कर्फ्यू लगा हुआ है। सड़क पर निकलने की मनाही है और नियम नहीं मानने वालों को पुलिस सबक सिखा रही है। इस बीच केरल के एक आईएएस अधिकारी, जिन्हें क्वारेंटाइन यानी संगरोध में रखा गया था, वह बिना राज्य सरकार को सूचना दिए भागकर कानपुर पहुंच गए हैं। उनकी यह हरकत लोगों के लिए परेशानी और बीमारी का सबब बन सकती है क्योंकि वह हाल ही में सिंगापुर की यात्रा से लौटे थे।

इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद केरल पुलिस ने कोल्लम के उप-जिलाधिकारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने तेजी से फैलने वाले कोरोनावायरस महामारी के कारण आवश्यक घरेलू संगरोध में लोगों के लिए निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया है। बताते चलें कि 2016 बैच के आईएएस अधिकारी को संगरोध के तहत घर में रखा गया था। मगर, उन्होंने इसके बजाय संगरोध कोड का

उल्लंघन किया और राज्य सरकार को सूचित किए बिना वह उत्तर प्रदेश के कानपुर में अपने घर भाग गए। कोल्लम पुलिस के अनुसार, उप-जिलाधिकारी अनुपम मिश्रा छुट्टी मनाने के लिए सिंगापुर गए थे और हाल ही में वहां से अपने घर से लौटे थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने उन्हें 14 दिनों के लिए उन्हें अपने आधिकारिक निवास में संगरोध में रहने का निर्देश दिया। यह निर्देश 19 मार्च को जारी किया गया था। हालांकि, संगरोध कोड का पालन करने के बजाय, IAS अधिकारी कानपुर में अपने घर भाग गए।

कोल्लम के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि जब वह हमारी कॉल का जवाब नहीं दे रहे थे, तो पुलिस ने उनकी सिम की लोकेशन कानपुर में होने का सत्यापन किया। अनुपम मिश्रा ने स्वीकार किया कि वह 23 मार्च की आधी रात को लॉक डाउन होने से पहले केरल से कानपुर में अपने घर के लिए रवाना हो गए थे। अब तक केरल ने उन लोगों के खिलाफ 12 मामले दर्ज किए हैं, जिन्हें उनके घर में संगरोध में रखा गया था और जो संगरोध कोड का उल्लंघन कर रहे थे।

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देश-दुनिया

जाने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने के क्या है फायदे

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सूर्य उपासना का प्रमुख पर्व छठ महोत्सव के तीसरे दिन अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। वैसे ज्यादातर भक्त उदित होते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, लेकिन मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले सूर्य छठ महोत्सव के अवसर पर तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके लिए बड़ी संख्या में व्रती समुद्र, पवित्र नदियों और सरोवरों के किनारे पर इकट्ठा होकर सूर्य को अर्घ्य देंगे। इस बार लॉकडाउन के होने से यह परंपरा घर से निभाई जाएगी। अस्त होते सूर्य का अर्घ्य सोमवार 30 मार्च को दिया जाएगा।

संध्या में सूर्य देव रहते हैं पत्नी प्रत्यूषा के साथ

अस्त होते सूर्य को अर्घ्य इसलिए भी दिया जाता है , क्योंकि इस समय सूर्यदेव अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। इस कारण सूर्य को संध्या का अर्घ्य देने वालों को सूर्यदेव के साथ उनकी पत्नी प्रत्यूषा का भी आर्शीवाद प्राप्त होता है। धर्म शास्त्रों में दिन में तीनों समय सुबह, दोपहर और शाम को सूर्य को अर्घ्य देने का प्रावधान है और इन तीनों समय सूर्य को अर्घ्य देने के अलग-अलग फायदे मिलते हैं। सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। दोपहर के समय सूर्य की आराधना करने से यश और कीर्ति में वृद्धि होती है। संध्याकाल में सूर्य को अर्ध्य देने से तुरंत लाभ मिलता है।

अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने से होते हैं यह फायदे

सूर्य देव की आराधना सुबह के समय करने का ज्यादा विधान है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने से भी बड़ा फायदा होता है। मान्यता है कि जो लोग डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं उनको सरकारी कामकाज में सफलता मिलती है। अदालती कामकाज में जो लोग बेवजह उलझ गए हों उनको अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने से लाभ होता है। पिछले दिनों से अटके हुए सरकारी कामकाज भी डूबते सूर्य को अर्घ्य देने से हो जाते हैं। यदि कोई छात्र बारम्बार किसी परीक्षा में असफल हो रहा है तो अस्त होते सूर्य को जल चढ़ाने से उसको भी लाभ होता है। यदि किसी व्यक्ति को आंखों और पेट की समस्या परेशान कर रही हो तो उसको भी अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इन शारीरिक समस्याओं से निजात मिलेगी।

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फिर से Ramayana के टेलीकास्ट पर दीपिका ने कही ये बात

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Ramayana ने फिर से टीवी पर वापसी की है, इतने सालों बात अब एक बार फिर से Lockdown के हालात में शुरू किया गया है। जहां इस सीरियल को लेकर जहां 90 के दशक के लोगों में काफी उत्साह नजर आया वहीं युवा पीढ़ी के लिए भी एक अनोखा अनुभव रहा। अब तक अपने माता-पिता से इसके बारे में सुनते आ रहे बच्चों ने पहली बार इस सीरियल को टीवी पर देखा। इस प्रसारण से इसमें अहम भूमिकाएं निभाने वाले कलाकार चर्चा में आ गए हैं। इनमें से एक हैं Dipika Chikhlia जिन्होंने इस सीरियल में सीता की भूमिका निभाई थी।

सीरियल फिर से टेलीकास्ट होने की खबर पर दीपिका ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बातचीत में कहा ” मुझे एक दिन पहले ही इसकी जानकारी मिली और इसे देखना काफी मजेदार था क्योंकि जब इसकी शूटिंग कर रहे थे तब हम इसे देख नहीं सके थे।”

जब दीपिका से यंगस्टर्स को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा ”मैं लोगों का रिएक्शन देखना चाहती हूं कि पहले एपिसोड के बाद वो कैसे रिएक्ट करते हैं। यह 30 साल पहले शूट हुआ था और अब देखना है आज की जनरेशन इसे लेकर क्या कहती है।”

दीपिका से पूछा गया कि क्या वो अपने परिवार के साथ इसे देखेंगी तो उन्होंने कहा ”वो सभी इसके लिए काफी उत्साहित हैं।” जब उनसे पूछा गया कि यह आज के वक्त में बना होता तो क्या इतना सफल होता! इस पर दीपिका ने कहा कि रामायण हमेशा काम करती है, यह रिश्तों की कहानी है, इसका हमारी जड़ों से गहरा नाता है।

दीपिका ने आज के वक्त में धार्मिक सीरियल्स के सफल ना होने पर कहा कि यंगस्टर्स इससे खुद को जोड़ नहीं पाते। वहीं रामायण को लेकर कहा कि इससे वो लोग रिश्तों के बारे में सीख सकते हैं।

दीपिका से जब पूछा गया कि लॉकडाउन में इसे फिर से प्रसारित करना यंगस्टर्स को कनेक्ट करेगा तो दीपिका ने कहा ”बिलकुल, मेरी बेटियां बताती हैं कि उनके दोस्त घरों में रहते हैं और अपने परिवारों से जुड़ रहे हैं।” उनसे पूछा गया कि इतने साल बाद आज के सीरियल्स में किस चीज की कमी नजर आती है तो दीपिका ने कहा ” सरलता की कमी है और यह आपकी आत्मा से नहीं जुड़ते।”

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