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Beauty Care Tips: आप भी है रूखी त्वचा से परेशान तो आजमाए ये घरेलू उपाये…

कई बार बदलते मौसम के कारण रूखी त्वचा की समस्या का सामना करना पड़ता है. अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो ये फट सकती है या संक्रमित हो सकती है. रूखी त्वचा को मॉइस्चराइज रखना बहुत जरूरी है. बहुत से लोग त्वचा को मॉइस्चराइज करने के लिए कई तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का भी इस्तेमाल करते हैं. हालांकि ये लंबे समय में त्वचा को काफी नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में हम घरेलू नुस्खे भी आजमा सकते हैं. ये हमारी त्वचा को न केवल गहराई से पोषण देने का काम करेंगे बल्कि इससे आपके त्वचा ग्लोइंग और मुलायम भी बनी रहेगी.
सूरजमुखी के बीज का तेल
सूरजमुखी के बीज के तेल का इस्तेमाल आप त्वचा को मॉइस्चराइज करने के लिए कर सकते हैं. ये त्वचा को हाइड्रेट और मॉइस्चराइज करने का काम करता है.
नारियल का तेल
रूखी त्वचा के इलाज के लिए नारियल का तेल बहुत ही प्रभावी है. ये त्वचा को हाइड्रेट रखता है. नारियल के तेल में सैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं. ये तेल त्वचा को मॉइस्चराइज करने का काम करता है.
डाइट में दूध करें शामिल
अपनी डाइट में दूध शामिल करें. ये रूखी त्वचा से छुटकारा दिलाने में मदद करता है. इसमें फॉस्फोलिपिड नामक फैट होता है. ये त्वचा के लिए फायदेमंद है.
शहद
शहद में कई गुण होते हैं जो त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं. ये त्वचा संबंधित समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं. शहद मॉइस्चराइजिंग, हीलिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. ये रूखी त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद है.
पेट्रोलियम जेली
कई बार बढ़ती उम्र के कारण भी त्वचा रूखी हो जाती है. ऐसे में आप पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये त्वचा को मॉइस्चराइज करने का काम करती है.
एलोवेरा
एलोवेरा रूखी त्वचा से राहत पाने में काफी मदद करता है. आप एलोवेरा जेल को अपनी त्वचा पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें. ऐसा करने से आपकी त्वचा पर निखार आएगा. ये त्वचा को गहराई से नमी प्रदान करने का काम करता है.
बादाम तेल
बादाम का तेल भी रूखी त्वचा के लिए बहुत उपयोगी है. आप बादाम के तेल से त्वचा की मसाज कर सकते हैं. आप शहद में बादाम का तेल मिलाकर भी त्वचा की मसाज कर सकते हैं. इसे 10 मिनट तक लगा रहने दें. इसके बाद तौलिए से पोंछ लें. ये त्वचा पर निखार लाने का काम करता है.

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Health Tips: एक्सरसाइज करने में आ रही है परेशानी तो करे ये 5 उपाये…

यदि आप एक्सरसाइज से हमेशा बचते रहे हैं तो आपको एक वर्कआउट रूटीन की शुरुआत करने में परेशानी हो सकती है। हालांकि एक बार इसकी आदत डाल लेने से अच्छी सेहत का रास्ता खुल जाता है। यह आदत आपके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। आइए जानते हैं डेली एक्सरसाइज के फायदे और वो 5 टिप्स जिनके जरिए आप वर्कआउट को आसानी से अपनी जिंदगी का हिस्सा बना सकते हैं।
डेली एक्सरसाइज के बड़े फायदे
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, डेली एक्सरसाइज आपकी बेहतर हार्ट हेल्थ के लिए जरूरी है। इससे आपको दिल की बीमारियों का खतरा कम रहता है।
रोजाना व्यायाम करने से नॉर्मल वजन मेंटेन रहता है। ध्यान रहे कि मोटापा अधिकतर बीमारियों की जड़ है।
एक्सरसाइज आपके शरीर में ब्लड ग्लूकोज और इंसुलिन की मात्रा सही रखने में मदद करती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम होता है।
एक्सरसाइज से शरीर लचीला होता है। आपकी मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं।
डेली एक्सरसाइज चिंता को दूर भगाने में भी कारगर है। इससे आपके मन को शांति मिलती है। साथ ही मूड बेहतर करने वाले केमिकल रिलीज होते हैं, जो आपको खुश और आशावादी रखते हैं।
वर्कआउट करने से हमारी स्लीप साइकिल सुधरती है।
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होने के कारण हमारी उम्र लंबी हो सकती है।
एक्सरसाइज की आदत डालने के लिए 5 टिप्स
1. सही वर्कआउट रूटीन का चयन करें
शुरुआत में अपने शरीर को कुछ भी करने के लिए प्रेशर में न डालें। आपको जो भी एक्सरसाइज अच्छी लगती है वो करें। ऐसा नहीं है कि इसके लिए जिम जाना ही जरूरी है। आप घर पर योगा जैसी एक्सरसाइज भी कर सकते हैं। हमेशा वो एक्सरसाइज चुने जिसे करने में आप कंफर्टेबल हों और आपको मजा आए। तभी आप लंबे समय के लिए उसे रोज कर सकेंगे।
2. शुरुआत कम एक्सरसाइज से करें
कोई भी आदत बनाने के लिए 3 से 4 हफ्तों का समय लगता है। इसलिए पहले ही दिन एक घंटा एक्सरसाइज करेंगे तो दूसरे दिन से मन में इसे न करने के बहाने आने लगेंगे। वर्कआउट रूटीन की शुरुआत 5-10 मिनट की एक्सरसाइज से करें। अपने शरीर को इस आदत में ढलने का समय दें। धीरे-धीरे हर हफ्ते इस समय को बढ़ा सकते हैं।
3. छोटे लक्ष्य निर्धारित करें
एक बड़े लक्ष्य को पाने के लिए उसे छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटना जरूरी है। आप एक महीने में 30 किलो वजन नहीं घटा सकते। रूटीन के हिसाब से असलियत में जितना वजन घटा सकते हैं, उतने पर फोकस करें। छोटे लक्ष्य को पाकर ही आपको आगे के लिए प्रेरणा मिलेगी।
4. सिर्फ वजन पर ध्यान न दें
आपका उद्देश्य केवल वजन कम करना नहीं बल्कि खुद को सेहतमंद बनाना होना चाहिए। इसलिए शुरुआत में अपने आपको वजन घटाने के लिए फोर्स न करें। बेहतर मानसिक स्वास्थ्य, मसल गेन जैसी चीजों पर भी ध्यान दें।
5. एक्सरसाइज स्किप भी करें
अपने वर्कआउट रूटीन को हफ्ते के सात दिन फॉलो न करें। इससे आपका शरीर और दिमाग थक सकते हैं। हफ्ते में एक या दो दिन का रेस्ट लें और दोबारा उसी मोटिवेशन के साथ एक्सरसाइज शुरू करें। इसके अलावा यदि कभी आपकी तबीयत खराब होती है या कोई इमरजेंसी आती है तो गिल्टी महसूस न करें। दूसरे दिन 5 मिनट ज्यादा एक्सरसाइज करके इस आदत को बरकरार रखें।
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Health Tips: क्या आपको भी ज्यादा खाने के बाद आती है नींद, तो जाने इसे ठीक करने के उपाये…

ज्यादा खा लेने के बाद यदि आपको बहुत नींद आती है, तो आप अकेले नहीं है। इस स्थिति को फूड कोमा कहते हैं और यह होना सामान्य है। चिकित्सीय भाषा में इसे पोस्टप्रांडियल सोमनोलेंस भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके बारे में सब कुछ।
क्या है फूड कोमा?
फूड कोमा में इंसान को बड़ा भोजन करने के बाद नींद और थकान का अनुभव होता है। ज्यादातर लोगों को दोपहर के खाने के बाद इसके लक्षण आते हैं। फूड कोमा के कॉमन लक्षण हैं..
ऊंघना
थकान
आलस आना
एनर्जी लेवल कम होना
फोकस न कर पाना
वैसे तो इस स्थिति में कोमा शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे गंभीर कोमा नहीं समझा जा सकता। इसमें इंसान अपना होश नहीं खोता है।
फूड कोमा की वजह
फूड कोमा पर अब भी ज्यादा रिसर्च नहीं की गई है। हालांकि इसकी वजहों को लेकर कई थ्योरीज चर्चा में रहती हैं।
ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव: ऐसा माना जाता रहा है कि पेट में ब्लड फ्लो बढ़ने से दिमाग में ब्लड कम पहुंचता है, जिससे फूड कोमा हो सकता है। पर इस थ्योरी को वैज्ञानिकों ने चैलेंज किया है। उनका कहना है कि यदि दिमाग भारी एक्सरसाइज के वक्त पूरे शरीर में एक समान ब्लड फ्लो मेंटेन कर सकता है, तो खाने की प्रक्रिया में ऐसा कोई बदलाव होना मुमकिन नहीं है।ज्यादा भोजन करने से फूड कोमा: ज्यादातर लोग भारी-भरकम खाने के बाद ही फूड कोमा की शिकायत करते हैं। कई शोधों में पाया गया है कि जो लोग ओवरईटिंग करते हैं, उन्हें खाने के बाद ज्यादा नींद आती है।
कार्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन की ज्यादा मात्रा: ये न्यूट्रीएंट्स नींद को ट्रिगर करते हैं। उदाहरण के लिए, कार्बोहाइड्रेट ब्लड में अमीनो एसिड ट्रिपटोफिन की मात्रा बढ़ाता है, जिससे स्लीप हॉरमोन सेराटोनिन की मात्रा बढ़ जाती है। प्रोटीन युक्त फूड्स में भी ट्रिपटोफिन ज्यादा होता है। फैट से कोलेसिस्टोकिनिन हॉरमोन की मात्रा बढ़ती है, जिससे नींद आने की भावना का अनुभव हो सकता है।शरीर की नेचुरल रिदम: हमारी बॉडी क्लॉक 24 घंटे की होती है। रिसर्च के अनुसार, रात में सोने के फेज के साथ ही दोपहर में भी सोने का एक छोटा फेज होता है। दोपहर 2 से 4 बजे के बीच के इस फेज में लोगों के वर्क परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ता है और ज्यादा रोड एक्सीडेंट्स होते हैं।
इवोल्यूशन: फूड कोमा नेमाटोड्स (सूत्रकृमि) जैसे छोटे जीव में भी पाया गया है। इसका मतलब, हो सकता है कि इवोल्यूशन के कारण हमें ज्यादा खाने के बाद नींद आती है। हालांकि इस पर ज्यादा रिसर्च की जरूरत है।
फूड कोमा से होने वाले नुकसान
फूड कोमा आमतौर पर खाने के बाद 4 घंटे तक रहता है। इससे होने वाली थकान और नींद कुछ स्थितियों में रिस्की हो सकती है। उदाहरण- गाड़ी चलते समय या भारी मशीनों को संभालते वक्त।खाने के बाद नींद आना डायबिटीज की ओर इशारा कर सकता है। इसलिए हमेशा अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहें।
फूड कोमा से कैसे बचें?
ओवरईटिंग न करके फूड कोमा से बचा जा सकता है।
अपनी डाइट में सभी पोषक तत्वों को शामिल करें। अनहेल्दी खाना फूड कोमा की वजह बन सकता है।
शराब के सेवन से बचें। यह आपकी रात की नींद बिगाड़ सकती है, जिससे आपको दोपहर में नींद आने की परेशानी हो सकती है।खूब पानी पीएं। शरीर को हाइड्रेट रखने से ज्यादा थकान नहीं होती।
रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद पूरी करें।यदि नींद आपके काम में बाधा बन रही है तो आधे घंटे की झपकी लें। इससे आपको फ्रेश महसूस होगा।
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Health Tips: इन फलो के सेवन से बड़ी-बड़ी बीमारिया हो जाती है छूमंतर…

बेहतर स्वास्थ्य के लिए सभी लोगों को आहार में नियमित रूप से ताजे फल और सब्जियों को शामिल करने की सलाह दी जाती है। फल-सब्जियों में मौजूद विटामिन्स और पोषक तत्व कई तरह की बीमारियों के जोखिम को कम करने में कारगर माने जाते हैं। कई फलों में ऐसे गुणों के बारे में पता चलता है जो कैंसर जैसी बीमारियों के खतरे को भी कम कर सकते हैं। अनानास ऐसी ही एक बेहद फायदेमंद फल है, जिसका नियमित सेवन आपको कई तरह के स्वास्थ्य लाभ दे सकता है। अनानास शरीर के लिए तमाम तरह के पोषक तत्वों जैसे विटामिन-सी, विटामिन-ए, कैल्शियम, आयरन आदि की भी पूर्ति करने में सहायक है, जिससे आपका शरीर स्वस्थ और रोगमुक्त बना रहता है।
अध्ययनों से पता चलता है कि अनानास में थायमिन,राइबोफ्लेविन,विटामिन बी-6, फोलेट, मैग्नीशियम, मैंगनीज और पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो शरीर को बेहतर ढंग से कार्य करते रहने के लिए अत्यंत आवश्यक है। कई अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि अनानास जैसे पादप खाद्य पदार्थों के सेवन से मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है। आइए अनानास खाने से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानते हैं।
कई तरह के कैंसर से बचाता है
अध्ययनों में अनानास के ऐसे गुणों के बारे में पता चलता है जो कई तरह के कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है।विटामिन-सी के साथ अनानास को एंटीऑक्सिडेंट्स से भी भरपूर माना जाता है, जो शरीर को फ्री-रेडिकल्स से मुकाबले की शक्ति देता है, जोकि कैंसर के विकास को रोकने में सहायक है। अध्ययनों से पता चला है कि अनानास में पाया जाने वाला बीटा-कैरोटीन, पेट के कैंसर के खतरे को कम करने में कारगर है। फलों और सब्जियों के माध्यम से उच्च फाइबर का सेवन कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को भी कम करता है।ब्लड प्रेशर की समस्या से मिलती है सुरक्षा
हाई ब्लड प्रेशर मौजूदा समय की बेहद आम, लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है, इसे हृदय रोगों का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। आहार में पोटैशियम की मात्रा को बढ़ाकर रक्तचाप को कम करने में मदद मिल सकती है। अनानास को पोटैशियम से भरपूर फल के रूप में जाना जाता है। हाई ब्लड प्रेशर पर रोकथाम करके हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अनानास का सेवन करना इसमें लाभकारी हो सकता है।
डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद
अध्ययनों से पता चलता है कि उच्च फाइबर वाले आहार का सेवन डायबिटीज की समस्या को बढ़ने से रोकने में सहायक है। हाई फाइबर वाले आहार, टाइप-2 डायबिटीज वाले व्यक्तियों में ब्लड शुगर, लिपिड और इंसुलिन के स्तर को सुधारने में भी सहायक हैं। एक मध्यम आकार का अनानास लगभग 13 ग्राम फाइबर प्रदान करता है। पेट की समस्याओं को ठीक रखने और बेहतर पाचन सुनिश्चित करने में भी अनानास का सेवन फायदेमंद माना जाता है।
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