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विस्फोटक से भी ज्यादा घातक है उर्वरक, जानिए कैसे ?

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सिंथेटिक उर्वरक अमोनियम नाइट्रेट के कारण पिछले महीने बेरूत में हुए जबरदस्त धमाके ने 190 लोगों की जान ले ली। इसी तरह 2015 में चीन के तियानजिन, 2001 में फ्रांस के टूलॉज और 1947 में टेक्सास में भीषण हादसे हुए। उर्वरक के रूप में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ कितने विनाशकारी हो सकते हैं, इन घटनाओं ने बताया। इस सबके बावजूद अमोनियम नाइट्रेट की घातक क्षमता से कहीं ज्यादा खतरनाक है उर्वरकों के रूप में इनका इस्तेमाल।

एक ओर जहां इनके प्रयोग से मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट होते हैं तो दूसरी ओर उर्वरकों के रूप में व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले अमोनियम सल्फेट, सोडियम नाइट्रेट और पोटेशियम नाइट्रेट जलवायु परिवर्तन में बड़ी भूमिका अदा करते हैं। फसलों पर डालने के बाद ये उर्वरक नाइट्रस ऑक्साइड के रूप में तब्दील हो जाते हैं। नाइट्रस ऑक्साइड में मीथेन और कार्बनडाइ ऑक्साइड से 265 गुना अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है। नॉर्वे इंस्टीट्यूट फॉर एयर रिसर्च के वैज्ञानिक रोना थॉम्प्सन के मुताबिक विश्व में नाइट्रस ऑक्साइड के कारण कार्बन उत्सर्जन का स्तर काफी बढ़ गया है। दरअसल मुश्किल ये है कि कई देशों में किसान उर्वरकों में इस्तेमाल होने वाले विषैले पदार्थों के बारे में नहीं जानते। दुनिया में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई संगठन अब किसानों को उर्वरकों के कम उपयोग की सलाह दे रहे हैं। अमरीका और यूरोप में किसानों ने उर्वरकों की मात्रा घटाकर पैदावार को बढ़ाया है। इसके चलते इन देशों में पिछले कुछ वर्षों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी कमी आई है।

भारत में हरित क्रांति से आई उर्वरकों के इस्तेमाल में तेजी
भारत में ज्यादातर किसान उर्वरकों पर निर्भर हैं। देश में हरित क्रांति के बाद रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में तेजी आई। खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक पिछले 10 वर्ष में प्रतिवर्ष 5 करोड़ टन उर्वरक का इस्तेमाल हो रहा है। लहलहाती खेती के नीचे उर्वरकों के दुष्परिणाम दब गए। इतना ही नहीं उर्वरकों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इसे आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में शामिल कर लिया गया। लेकिन 1985 में उर्वरक नियंत्रण आदेश के बाद इसकी मात्रा के निर्धारण की आवश्यकता महसूस की गई। मिट्टी की सेहत को ध्यान में रखते हुए 2014-15 में सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की गई, जो किसानों को उनकी मिट्टी के पोषक तत्वों की जानकारी देता है और उसी अनुपात में उर्वरक प्रयोग करने की सलाह।

 

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IND vs ENG पहले वनडे मैच में बने कई रिकॉर्ड, रोहित से लेकर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी ने रिकॉर्ड बुक में दर्ज कराया अपना नाम…

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इंग्लैंड के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला भारत ने 10 विकेट से जीत लिया। इस जीत के साथ भारत ने सीरीज में 1-0 की बढ़त बनाई और कई रिकॉर्ड बनाए हैं। भारत के कई खिलाड़ियों ने भी खास रिकॉर्ड अपने नाम किए। कप्तान रोहित शर्मा से लेकर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी ने रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया। यहां हम इन सभी रिकॉर्ड के बारे में बता रहे हैं।

इंग्लैंड की टीम इस मैच में 110 रन के स्कोर पर आउट हुई। वनडे में यह इंग्लैंड का भारत के खिलाफ सबसे छोटा स्कोर था।  इससे पहले वनडे में भारत के खिलाफ इंग्लैंड का सबसे छोटा स्कोर 125 रन था। 15 अक्टूबर 2006 को जयपुर में इंग्लैंड की टीम ने यह स्कोर बनाया था।
भारत के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने इस मैच में 19 रन देकर छह विकेट लिए और एक साथ कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। बुमराह इंग्लैंड की धरती पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले भारतीय तेज गेंदबाज बन गए। उन्होंने इस मामले में आशीष नेहरा का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 23 रन देकर छह विकेट लिए थे।

बुमराह भारत के लिए वनडे में सबसे बेहतरीन गेंदबाजी करने के मामले में तीसरे नंबर पर हैं। उनसे ऊपर स्टुअर्ट बिन्नी और अनिल कुंबले का नाम है। बिन्नी ने चार रन देकर छह विकेट और कुंबले ने 12 रन देकर छह विकेट लिए थे। हालांकि, बुमराह ने आशीष नेहरा के अलावा कुलदीप यादव को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 25 रन देकर छह विकेट लिए थे।

वनडे में इंग्लैंड की धरती पर किसी मैच में सबसे अच्छी गेंदबाजी करने के मामले में जसप्रीत बुमराह चौथे नंबर पर हैं। इस मामले में पाकिस्तान के वकार यूनिस पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने 2001 में 36 रन देकर सात विकेट लिए थे। वहीं, विन्सटन डेविस ने 51 रन देकर सात विकेट और गैरी गिलमर ने 14 रन देकर छह विकेट लिए थे।

क्इस्सव मैच में भारतीय तेज गेंदबाजों ने सभी 10 विकेट लिए। वनडे क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका था, जब पहले गेंदबाजी करते हुए सभी 10 विकेट भारतीय तेज गेंदबाजों ने लिए हैं। वहीं, 1983 विश्व कप फाइनल के बाद यह पहला मौका था, जब इंग्लैंड की धरती पर किसी वनडे मैच में सभी 10 विकेट भारत के तेज गेंदबाजों के नाम रहे।

वनडे क्रिकेट के इतिहास में यह छठा मौका था, जब सभी 10 विकेट भारत के तेज गेंदबाजों ने लिए। इससे पहले 2014 में बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर के मैदान पर ऐसा हुआ था। वहीं, पहली बार 1983 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय तेज गेंदबाजों ने यह कारनामा किया था।
रोहित शर्मा और शिखर धवन ने इस मैच में 114 रन की नाबाद साझेदारी की। इन दोनों ने वनडे क्रिकेट में 18विं बार शतकीय साझेदारी की। इस मामले में यह जोड़ी रोहित और विराट की जोड़ी की बराबरी पर आ गई है। अब इनसे ऊपर दिलशान और संगकारा का नाम है, जिन्होंने 20 शतकीय साझेदारियां की थी। सचिन और गैंगुली ने सबसे ज्यादा 26 शतकीय साझेदारियां की हैं।
इस मैच में रोहित शर्मा ने पांच बेहतरीन छक्के लगाए और वनडे क्रिकेट में 250 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय बन गए। वनडे में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के मामले में उनसे ऊपर सनथ जयसूर्या (270 छक्के) क्रिस गेल (331 छक्के) और शाहिद अफरीदी (351 छक्के) का नाम है।
गेंद शेष रहते हुए विपक्षी टीम की जमीन पर यह वनडे में भारत की सबसे बड़ी जीत थी। भारत ने 188 गेंद रहते यह मैच जीत लिया। इससे पहले 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचूरियन में भारत 177 गेंद रहते जीता था।

इस मैच में भारत ने इंग्लैंड को पहली बार वनडे क्रिकेट में 10 विकेट से हराया। इससे पहले टीम इंडिया ने दो बार इंग्लैंड को नौ विकेट से हराया था। 2014 में एजबेस्टन के मैदान पर भारत नौ विकेट से जीता था और 1986 में ओवल के मैदान पर भी नौ विकेट से जीत हासिल की थी।
इस मैच में रोहित शर्मा और शिखर धवन की जोड़ी ने वनडे में अपने पांच हजार रन पूरे किए। सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर के बाद यह दूसरी जोड़ी है, जिसने वनडे में पांच हजार रन बनाए हैं। शिखर और रोहित की जोड़ी चौथी सलामी जोड़ी है, जिसने वनडे में पांच हजार से ज्यादा रन बनाए हैं। इस मामले में सचिन और गांगुली (6609 रन) पहले, गिलक्रिस्ट और हेडन (5372 रन) दूसरे और हायेंस-ग्रींडगे (5150 रन) तीसरे स्थान पर हैं।

मोहम्मद शमी ने इस मैच में वनडे क्रिकेट में अपने 150 विकेट पूरे किए। उन्होंने 4071 गेंद में अपने 150वनडे विकटे पूरे कर लिए हैं। सबसे कम गेंद में 150 विकेट लेने के मामले में वो पांचवें स्थान पर हैं। इस मामले में मिशेल स्टार्क पहले स्थान पर हैं, जिन्होंने 3857 गेंदों में यह कारनामा किया था।

शमी ने सिर्फ 80 वनडे मैचों में 150 विकेट हासिल किए हैं। उन्होंने अजीत अगरकर को पीछे छोड़ा है और सबसे कम मैचों में 150 विकेट लेने वाले भारतीय बन गए हैं। अगरकर ने 97 मैचों में 150 विकेट लिए थे। शमी सबसे कम मैचों में 150 विकेट लेने के मामले में ओवरऑल तीसरे स्थान पर हैं। मिशेल स्टार्क इस मामले में भी नंबर एक हैं। उन्होंने 77 वनडे और शकलैन मुश्ताक ने 78 वनडे में यह उपलब्धि हासिल की थी।

जसप्रीत बुमराह ने शुरुआती 10 ओवर में ही चार विकेट हासिल कर लिए थे और ऐसा करने वाले तीसरे भारतीय बने। उनसे पहले जवागल श्रीनाथ ने 2003 में श्रीलंका के खिलाफ ऐसा किया था, जबकि भुवनेश्वर कुमार ने भी 2013 में श्रीलंका के खिलाफ ही ऐसा किया था।

इंग्लैंड ने इस मैच में सिर्फ 26 के स्कोर पर अपने पांच विकेट गंवा दिए थे। भारत के खिलाफ यह सबसे छोटा स्कोर था, जिसमें किसी टीम ने अपने आधे विकेट गंवाए। इससे पहले 1997 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ 29 रन पर पांच विकेट गंवा दिए थे।

इंग्लैंड के वनडे क्रिकेट के इतिहास में यह दूसरा मौका था, जब शुरुआती चार में से तीन बल्लेबाज शून्य के स्कोर पर आउट हुए। इससे पहले 2018 में एडिलेड के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐसा हुआ था। खास बात यह है कि उस मैच में जेसन रॉय, जॉनी बेयरस्टो और जो रूट शून्य के स्कोर पर आउट हुए थे और इस मैच में भी जेसन रॉय, जो रूट और बेन स्टोक्स शून्य के स्कोर पर आउट हुए।

रोहित और धवन की जोड़ी तीसरी ऐसी जोड़ी बनी, जिसने एक ही मैदान पर चार बार शतकीय साझेदारी की है। धवन और रोहित द ओवल के मैदान पर चार बार शतकीय साझेदारी कर चुके हैं। वहीं, फखर जमान और इमाम उल हक बुलावायो के मैदान पर चार शतकीय साझेदारी कर चुके हैं। हैमिल्टन मसाकाद्जा और ब्रेंडन टेलर ने भी बुलावायो में चार बार शतकीय साझेदारी की है।

भारत ने वनडे क्रिकेट में सातवीं बार 10 विकेट के अंतर से जीत हासिल की। इससे पहले 2016 में भारत ने जिम्मबाब्वे को 10 विकेट से हराया था। पहली बार भारत ने 1975 में पूर्वी अफ्रीका को 10 विकेट से हराया था। इस मैच में इंग्लैंड की टीम पहली बार अपने घर में 10 विकेट से कोई वनडे मैच हारी। वहीं, 2011 के बाद इंग्लैंड पहली बार वनडे में 10 विकेट से हारा है।

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बड़ी खबर: GOOGLE इस साल कम कर्मचारियों की करेगी भर्ती, Sunder Pinchai ने इमेल के जरिये किया खुलसा, पढ़े पूरी खबर…

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दुनिया में आर्थिक मंदी आने का डर अब गूगल को भी सताने लगा है. गूगल की पैरेंट कंपनी अल्‍फाबेट इंक ने अब वर्ष 2022 के बाकी बचे दिनों में कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को धीमा करने का फैसला किया है. गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने मंगलवार को कंपनी के कर्मचारियों को भेजे एक ई-मेल में इस फैसले की जानकारी दी है. हालांकि, पिचाई ने कहा है कि कंपनी आवश्‍यक सेवाओं के लिए भर्तियां जारी रखेगी.

लाइव मिंट डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुंदर पिचाई ने ईमेल में कहा है कि साल 2022 और 2023 में कंपनी का फोकस सिर्फ इंजीनियरिंग, तकनीकी विशेषज्ञ और महत्वपूर्ण पदों पर कर्मचारियों की भर्ती करने पर है. 2022 के पहले भाग में कंपनी ने कर्मचारियों की भर्ती का कोटा पूरा कर लिया है. आगे हमें और अधिक उद्यमशील होने की जरूरत और सही फोकस से सामान्‍य दिनों की बजाय सफलता के लिए अब ज्‍यादा प्रयास करने की जरूरत है.

आर्थिक अस्थिरता से गूगल भी अछूती नहीं
सुंदर पिचाई ने ईमेल में लिखा है कि, “अन्‍य कंपनियों की तरह हम भी आर्थिक प्रतिकूलताओं से अछूते नहीं हैं. अनिश्चित वैश्विक आर्थिक परिदृश्‍य की हम अनदेखी नहीं कर सकते. हमने हमेशा ऐसी चुनौतियों को बाधाओं के रूप में नहीं बल्कि इनको अवसर के रूप में देखा है. वर्तमान परिस्थितियों को भी हम अवसर में बदलेंगे.”

इन क्षेत्रों में होगी भर्ती
पिचाई ने कहा कि 2022 और 2023 में कंपनी का फोकस इंजीनियरिंग, टेक्निकल और अन्‍य जरूरी सेवाओं में ही कर्मचारियों की भर्ती करने पर रहेगा. पिचाई ने ईमेल में लिखा है कि दूसरी तिमाही में ही हम गूगल में 10,000 कर्मचारी जोड़ चुके हैं. तीसरी तिमाही में भी हमारा इरादा कर्मचारियों की भर्ती करने का है और इसका पता हमारे कॉलेज रिक्रूइटिंग कैलेंडर से चलता है. पिचाई ने कहा कि इस साल का भर्तियों का लक्ष्‍य हमने लगभग पूरा कर लिया है, इसलिए हम इस साल के बाकी बचे दिनों के लिए भर्ती प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं.

सुंदर पिचाई की इस ईमेल से साफ है कि गूगल को भी अब आने वाले दिनों में आर्थिक मंदी आती दिखाई दे रही है. इसलिए अब कंपनी ने उन डिपार्टमेंट्स के लिए ही कर्मचारी रखने का फैसला किया है जिनमें कर्मचारियों की पूरी संख्‍या के बिना काम नहीं चल सकता.

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यात्रीगण कृपया ध्यान दे: SECR ने मासिक सीजन टिकट की सुविधा फिर से शुरू की, जल्द देखे पूरी लिस्ट…

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रायपुर. लंबी दूरी की कई ट्रेनों को लगातार रद्द कर यात्रियों की परेशानी बढ़ाने वाले भारतीय रेल ने थोड़ी राहत दी है. इंडियन रेलवे ने यात्रियो की मांग एवं सुविधा को देखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा मासिक सीजन टिकट की सुविधा फिर से शुरू कर दी है. ऐसे टिकट धारकों को लम्बी दूरी की 23 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के अनारक्षित कोच में यात्रा करने की सुविधा प्रदान की जा रही है. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा मासिक सीजन टिकट की सुविधा तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है.

रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक तय ट्रेनों में मासिक सीजन टिकट धारक निर्धारित खण्ड पर अनारक्षित कोच में यात्रा कर सकते हैं. बिलासपुर, रायपुर व गोंदिया खंड के बीच 23 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में ये सुविधा दी जा रही है. कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन लगाया गया था. तब से मंथली टिकट की सुविधा बंद थी. करीब 2 साल तक ये सुविधा बंद रही. अब फिर से यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने ये सुविधा शुरू की है. इससे रोजना रेल से यात्रा करने वाले यात्रियों के समय के साथ ही पैसों की भी बचत होगी.

इन ट्रेनों में मिलेगी सुविधा
रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक रायपुर, बिलासपुर मंडल में अमरकंटक एक्सप्रेस, लिंक एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, हावाड़ा-आहमदाबाद एक्सप्रेस में ये सुविधा शुरू कर दी गई है. इसके अलावा नागपुर, रायपुर मंडल में गोंदिया-मुंबई एक्सप्रेस, तिरुपति-बिलासपुर एक्सप्रेस, साउथ बिहार एक्सप्रेस, नवतनवा एक्सप्रेस, कानपुर-दुर्ग एक्सप्रेस, दुर्ग-निजामुद्दिन एक्सप्रेस, बिलासपुर-नागपुर एक्सप्रेस, कोल्हापुर गाेंदिया एक्सप्रेस, रायगढ़-निजामुद्दीन गोंडवाना एक्सप्रेस में तय दूरी तक मंथली टिकट की सुविधा दी गई है. इसके अनारक्षित कोच के लिए यात्रियों को ये सुविधा मिलेगी. बता दें कि पिछले करीब तीन महीने से एसईसीआर सेक्शन की 30 से अधिक ट्रेनों को रेलवे ने रद्द कर दिया है. इसके चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस परेशानी के बीच रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत दी है.

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