छत्तीसगढ़
गांधी जयंती विशेष : ‘ एक गांव ऐसा, गांधी के सपनों के जैसा…
रायपुर, 01 अक्टूबर 2020 / दो साल पहले की ही बात है। इस गाँव की तस्वीर ऐसी न थीं। अपने गाँव से विवाह के बाद आई टुकेश्वरी एमए पास है तो क्या हुआ ? उसके पास कोई काम न था। गाँव वालों के अपने खेत तो थे, लेकिन इन खेतों में हरियाली सिर्फ बारिश के दिनों में ही नजर आती थीं। फसल बोते थे लेकिन दाम सहीं नहीं मिलने से कर्ज में लदे थे। गाँव का गणेश, रामाधार हो या सेन काका.. सभी अपने गांव को खुशहाल देखना चाहते थे। दुलारी के पति सालों पहले स्वर्ग सिधार गए थे, घर पर बच्चों की जिम्मेदारी उस पर तो थी ही लेकिन हाथों में कोई काम नहीं होने की चिंता उसे हर घड़ी सताया करती थी। चरवाहा मंगतू यादव… गाय तो चराता था लेकिन सैकडों गाय को चराने के बाद भी उसे थोड़ा आराम और सभी पशु मालिकों से कुछ रुपया मिल जाए इसकी भी गारण्टी न थी। गाय का गोबर तो बस गोबर ही था, जहाँ तहां पड़ा हो तो वहीं सूखकर मिट्टी में मिल जाता था, हां कुछ लोग कभी कंडे तो कुछ लोग खाद बना जरूर लिया करते थे मगर गोबर को अधिक उपजाऊ खाद और अधिक पैसे का सपना कभी देखा ही नहीं था। कमोवेश गांव में दुर्गेश्वरी बाई, गीता, जानकी, सावित्री, अनिता, लक्ष्मी यादव सहित अनगिनत महिलाएं थीं जिनका दिन बस घर की चहारदीवारी में ही कट जाती थीं या फिर किसी-किसी के खेत-खलिहानों में मजदूरी करते बीत जाती थी। भले हीं यह गांव राजधानी से कुछ किलोमीटर में है तो क्या हुआ? एक से डेढ़ बरस पहले तक इस गांव की कोई विशेष पहचान न थी। अब तो यह गांव किसी पहचान का मोहताज नहीं है। घर-घर की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की राह में हैं। राजीव गांधी किसान न्याय योजना से फसल का दाम मिलने से किसानों में खुशी और खेतों में हरियाली है। किसी के गाय-बैलें यूं ही नहीं भटकते। गोबर की भी कीमत है। चरवाहों को पशु मालिकों से कुछ मिले न मिले, उनके खाते में गोबर से रुपए मिलने की गारण्टी है। गांव में पक्की गलियां, सुंदर बगीचा, स्वच्छ तालाब भी है। सच्चाई को बयां करती यह कहानी है रायपुर जिले के आरंग विकासखण्ड के ग्राम बनचरौदा की।
राजधानी से कुछ किलोमीटर दूर ग्राम बनचरौदा विकास की उस राह पर अग्रसर है जो कभी महात्मा गांधी जी का सपना हुआ करता था। गांधी जी का कहना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। उन्होंने परिकल्पना की थी कि ग्रामीण विकास की तमाम आवश्यकताओं की पूर्ति करके ग्राम स्वराज्य, पंचायतराज, ग्रामोद्योग, महिलाओं की शिक्षा, गांव की सफाई व गांव का आरोग्य व समग्र विकास के माध्यम से एक स्वावलंबी व सशक्त देश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। उन्होंने अपने सपनों के भारत में गांव के विकास को प्रमुखता प्रदान करके उससे देश की उन्नति निर्धारित होने की बात कही थी। बनचरौदा गांधी जी की परिकल्पनाओं पर खरा उतरने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा प्रदेश में नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी के विकास को बढ़ावा देने के साथ ही गांधीजी के गांव को सशक्त बनाने का सपना सच होता हुआ आगे बढ़ रहा है। ग्राम बनचरौदा इस पायदान में आगे निकल चुका है। गांव में लगभग 20 स्व-सहायता महिला समूह है जिससे 217 महिलाएं बतौर सदस्य जुड़ी है। गांव को सशक्त बनाने में इन महिला स्व-सहायता समूह के सदस्यों और सरपंच श्री के के साहू भी का बड़ा योगदान है। असल में यहीं नारी शक्ति है जो जागरूक है और गांव के विकास की इबारत लिखने में बखूबी अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहीं है।
अब अपने बच्चे को इंग्लिश मीडियम में पढ़ा रहीं टुकेश्वरी
अन्नपूर्णा स्व-सहायता महिला समूह से जुड़ी श्रीमती टुकेश्वरी एमएम पास है। अभी सब्जी-बाड़ी का काम सम्हाल रहीं है। पहले बेरोजगार रहने से कोई आमदनी नहीं थी। श्रीमती टुकेश्वरी ने बताया कि मनरेगा के माध्यम से ढाई एकड़ खेत में सब्जियों का उत्पादन करते हैं। इसकी आमदनी से घर का अतिरिक्त खर्चा निकल जाता है। उसने बताया कि अपनी आमदनी के रुपए से एक बच्चे को इंग्लिश मीडियम स्कूल में भरती करा पढ़ाई करा रहीं है। गांव की ही श्रीमती अनिता, सावित्री ध्रुव, जानकी साहू सहित अनेक महिलाएं है जो पहले अपनी आमदनी के लिए मजदूरी पर निर्भर थी। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक काम करने पर ही कुछ रुपए कमा पाती थी। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद बाड़ी के माध्यम से अपने-अपने घरों के लिए सब्जियां भी उगा पाती है और इसे बेचकर आमदनी भी प्राप्त कर रहीं है।
गोबर के दीये से ढ़ाई लाख, गमले से डेढ़ लाख रुपए कमाए और सवा लाख रुपए की खाद भी बेची
गांव में गोठान बनाया गया है। यहां गौ-उत्पाद से निर्मित सजावटी सामान और कलाकृतियों को भी अच्छी प्रसिद्धि हासिल हो रहीं है। पिछले साल ढाई लाख रुपए से अधिक के दीयें और डेढ़ लाख रुपए से अधिक के बायों गमले भी बेच चुकी है। इस गोठान में धनलक्ष्मी स्व-सहायता समूह वर्मी कम्पोस्ट बनाने के साथ उसका विक्रय कर रहीं है। इस समूह की श्रीमती गीता साहू बताती है कि वर्तमान में गोधन न्याय योजना से खरीदे गए गोबर को जैविक खाद बनाने का काम चल रहा है। एक माह के भीतर यह खाद तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि 162 क्विंटल खाद बेच चुके हैं और जल्दी ही स्टाक में बचे खाद की भी बिक्री की जाएगी। खाद विक्रय से एक लाख रुपए से अधिक की आमदनी हुई है। गोठान में एक दिन में 20 से 30 क्विंटल के बीच गोबर निकलता है। सभी को खाद बनाने के लिए उपयोग किया जा रहा है। भावना स्व-सहायता समूह की साधना वर्मा ने बताया कि उनका समूह साबुन और अगरबत्ती का निर्माण करता है। बिहान साबुन में तुलसी, लेमन, गुलाब और चारकोल वेरायटी बाजार में बनाकर बेचती है। साधना और पूर्णिमा ने बताया कि वह दसवीं पास है और अब चाहती है कि कुटीर उद्योग की सहायता से आत्मनिर्भर की राह में आगे बढ़े।
महकने लगी है रजनीगंधा की सुगंध, आमदनी भी होगी
महालक्ष्मी स्व-सहायता समूह की महिलाएं उद्यानिकी विभाग की मदद से फूलों की खेती से भी अपनी किसमत आजमा रहीं है। समूह की दिनेश्वरी ठाकुर ने बताया कि रजनीगंधा फूलों की खेती की जा रही है। फूल खिलकर महकने लगे हैं। आने वाले दिनों में इसकी खेती समूह की सदस्यों को रोजगार से जोड़ने के साथ आमदनी से भी जोड़ देगी। पिछले साल बाड़ी में सब्जियों के साथ गेंदा फूल की खेती की गई थी, जिसे 70 रुपए प्रतिकिलो तक बेचा गया था। इससे भी गांव वालों की आमदनी हुई थी।
गोधन न्याय योजना से बढ़ रहीं चरवाहें सहित गौ-पालकों की आमदनी
गांव में पशुओं को चराने की जिम्मेदारी निभाने वाले चरवाहा श्री मंगतू राम यादव, हिरऊ यादव ने बताया कि पहले पशुओं को आसपास के जंगल में चराने के लिए ले जाना पड़ता था। कोई निश्चित ठिकाना नहीं होने से पशु पानी और चारे के लिए भटकते थे। इसलिए गोबर भी एकत्रित करना मुश्किल था। अब गोठान के माध्यम से पानी, छायादार शेड और चबूतरा मिल गया है। गोधन न्याय योजना से गोबर की खरीदी होने से वह अपने परिवार समेत गोबर को एकत्रित कर वह प्रतिदिन दो से चार क्विंटल गोबर बेच पाता है। उसने बताया कि अब गोबर और पशुओं की अहमियत बढ़ गई है। गांव का 60 वर्षीय भरत राम सेन ने बताया कि उनके पास भी 6 गायें हैं और वह भी गोबर एकत्र कर बेचता है।
अपने पतियों को भी रोजगार दे रहीं है ये महिलाएं
बनचरौदा ग्राम की अनेक महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने बेरोजगार पतियों को भी रोजगार दे रहीं है। बाड़ी में सब्जी उत्पादन कर उसे बाजार तक ले जाने और बेचने में महिलाओं के पति सहयोग देते है। समूह द्वारा उन्हें वाहन के पेट्रोल और चाय नाश्तें के लिए रुपए भी देती है। पुरूष सदस्यों को दी जाने वाली सामग्रियों का ये पूरा हिसाब-किताब रखती है। इसी तरह साबुन, अगरबत्ती, गौ-उत्पाद, मछली आदि की बिक्री में पुरूषों की भागीदारी रहती है।


छत्तीसगढ़
1 जुलाई से सस्ते होंगे कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम, 198 रुपए की कमी आई…
1 जुलाई यानी आज से दिल्ली में कॉमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलो) की कीमतों में 198 रुपए की कमी आई है। 19 किलो के कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत अब 2,021 रुपए होगी। पहले यह 2,219 रुपए थी। इससे पहले, 1 जून को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में 135 रुपए की कटौती की गई थी।
छत्तीसगढ़
1 जुलाई से होंगे बड़े बदलाव, बढ़ जायेगा आपकी जेब का खर्चा, जाने कौन से है वो बदलाव..
एक जुलाई यानी आज से देशभर में कई बदलाव हुए हैं। इनका सीधा असर आपकी जेब और जिंदगी पर पड़ेगा। इसलिए जरूरी है कि नियमों की जानकारी पहले ही आपको हो। आज से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सस्ता हो गया है। वहीं आधार-पैन लिंक करने के लिए 1000 रुपए चार्ज देना होगा। हम आपको ऐसे 7 बदलावों के बारे में बता रहे हैं…
1. कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सस्ता
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई है। दिल्ली में 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2219 रुपए से घटकर 2021 रुपए हो गई है। इसी तरह कोलकाता में 2322 रुपए के मुकाबले अब यह सिलेंडर 2140 रुपए में मिलेगा। मुंबई में कीमत 2171.50 रुपए से घटकर 1981 रुपए और चेन्नई में 2373 से घटकर 2186 रुपए हो गई है।
इस हिसाब से दिल्ली में गैस सिलेंडर की दरों में 198 रुपए, कोलकाता में 182 रुपए, मुंबई में 190.50 रुपए और चेन्नई में 187 रुपए की कमी आई है। पिछले महीने जून में कॉमर्शियल सिलेंडर की दरों में 135 रुपए की कमी की गई थी। हालांकि तेल कंपनियों की तरफ से घरेलू गैस सिलेंडर में किसी तरह की राहत नहीं दी गई। दिल्ली में 14.2 किलो वाले गैस सिलेंडर की कीमत 1003 रुपए है।
2. आधार-पैन लिंक करने के लिए अब 1000 रुपए चार्ज
आज यानी 1 जुलाई से पैन को आधार से लिंक कराने के लिए आपको 1,000 रुपए देने होंगे। 30 जून तक ये काम 500 रुपए में हो जाता था। अब आपको 500 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे।
3. क्रिप्टोकरेंसी के लिए किए गए लेन-देन पर TDS
अब से अगर क्रिप्टोकरेंसी के लिए किया गया लेन-देन एक साल में 10,000 रुपए से ज्यादा है तो उस पर 1% का चार्ज किया जाएगा। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के लिए टीडीएस के डिस्क्लोजर मानदंडों की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके दायरे में सभी NFT या डिजिटल करेंसी आएंगी।
4. बिना केवाईसी वाले डीमैट अकाउंट हो जाएंगे डीएक्टिवेट
डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट के लिए केवाईसी (KYC) कराने की आखिरी तारीख 30 जून 2022 थी। ऐसे में अगर आपने अकाउंट की KYC नहीं कराई है तो ये डीएक्टिवेट हो जाएंगे। इससे आप स्टॉक मार्केट में ट्रेड नहीं कर पाएंगे। अगर कोई व्यक्ति किसी कंपनी का शेयर खरीद भी लेता है तो ये शेयर्स अकाउंट तक ट्रांसफर नहीं हो सकेंगे।
5. मोटर साइकिल खरीदना महंगा
दोपहिया वाहन 1 जुलाई से महंगे हो जाएंगे। हीरो मोटोकॉर्प ने अपने ब्रांड्स की कीमतों को 3 हजार रुपए तक बढ़ाने का फैसला किया है। हीरो मोटकॉर्प ने बढ़ती महंगाई और रॉ मटेरियल की कीमतों में तेजी के चलते दाम बढ़ाए हैं।
6. तोहफे पर देना होगा 10% TDS
व्यवसायों से मिलने वाले तोहफे पर 10% के हिसाब से टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) देना पड़ेगा। ये टैक्स डॉक्टरों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पर लगेगा। हालांकि, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर टैक्स तभी लगेगा, जब वे किसी कंपनी से मार्केटिंग के लिए मिले सामान अपने पास रखते हैं। अगर वे इसे लौटा देते हैं तो TDS नहीं लगेगा।
7. देना होगा ज्यादा टोल
दिल्ली- देहरादून हाईवे (NH 58) पर 1 जुलाई (गुरुवार रात 12 बजे से) टोल दरें बढ़ा दी गईं हैं। लॉकडाउन में टोल दर नहीं बढ़ाई गई थी। एक जुलाई से यहां से गुजरने वालों को 5 रुपए से लेकर 80 रुपए तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। नई दरें जानने के लिए यहां क्लिक करें
छत्तीसगढ़
PM Kisan Yojana के तहत किसानो के फसे पैसे आ सकते है वापस इन तरीको से…
PM Kisan Yojana: देश में जितनी भी लाभकारी और कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं, उनमें से कुछ को राज्य तो कुछ को केंद्र सरकार चलाती है। राज्य सरकार के अलावा केंद्र सरकार भी देश के जरूरतमंद लोगों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती है। इसी में से एक योजना है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, जिसे केंद्र सरकार द्वारा चलाया जाता है। इस योजना के तहत किसानों की आर्थिक मदद की जाती है। योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6 हजार रुपये दिए जाते हैं, जिन्हें 2-2 हजार रुपये की तीन किस्तों में पात्र किसानों के बैंक खाते में भेजा जाता है। बीते दिनों किसानों के खाते में 11वीं किस्त भेजी गई, लेकिन अब भी कई किसान ऐसे हैं जिनके खाते में ये किस्त नहीं पहुंची। अगर आप भी इस लिस्ट में हैं, तो चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे आपको ये लाभ अभी भी मिल सकता है। आप अगली स्लाइड्स में इसके बारे में जान सकते हैं…
भेजे गए थे इतने पैसे
दरअसल, 31 मई को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा देश के लगभग 10 करोड़ किसानों के बैंक खातों में लगभग 21 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा भेजे गए थे।
कैसे ले सकते हैं मदद?
अगर आप पात्र किसान हैं और अब तक आपको किस्त के पैसे नहीं मिले हैं, तो ऐसे में अभी किस्त पाने का मौका है। आपको सरकार की तरफ से जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर्स पर अपनी समस्या बतानी है, और वहां से आपकी उचित मदद की जाती है।
रजिस्टर्ड किसान यहां कर सकते हैं संपर्क
कुछ लाभार्थी किसान ऐसे भी हैं, जिनका नाम पिछली सूची में था। लेकिन नई सूची में नहीं है यानी इनको पिछली बार पैसा मिला, लेकिन इस बार नहीं मिला। ऐसी स्थिति में आप पीएम किसान योजना के हेल्पलाइन नंबर 011-24300606 पर कॉल करके मदद ले सकते हैं। यहां से आपको पता चल सकता है कि आपकी किश्त किस वजह से अटकी है।
ये हैं हेल्पलाइन नंबर्स:-
हेल्पलाइन नंबर 155261 पर कॉल कर सकते हैं
टोल फ्री नंबर 011-24300606 पर संपर्क कर सकते हैं
टोल फ्री नंबर 18001155266
ईमेल आईडी pmkisan-ict@gov.in पर ईमेल कर सकते हैं।
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