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ओमिक्रोन की चिंताओं के बीच रेपो रेट में बदलाव के आसार नहीं,रिजर्व बैंक की एमपीसी बैठक फैसलों की जानकारी आज

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देश में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के बढ़ते संक्रमण की वजह से बनी चिंताओं के बीच नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक सोमवार से शुरू होगी. एमपीसी की यह बैठक 6-8 दिसंबर तक चलेगी.

संभावना यह जाहिर की जा रही है कि रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरों के मोर्चे पर रेपो रेट में बदलाव के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं.विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक की एमपीसी की इस हफ्ते होने वाली बैठक में ब्याज दरों कोई बदलाव होने की संभावना नहीं दिख रही है. इसकी वजह ओमिक्रोन के कारण दुनियाभर के बाजारों में अचानक फैली अनिश्चतता है. ऐसी स्थिति में एमपीसी रेपो रेट में बदलाव के लिए थोड़ा इंतजार करने का रुख अपनी सकती है.

बता दें कि रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुआई वाली एमपीसी की बैठक आज से शुरू होगी, जो 8 दिसंबर बुधवार तक चलेगी. इसमें लिए जाने वाले फैसलों की जानकारी 8 दिसंबर को दी जाएगी. केंद्रीय बैंक ने पिछले अक्टूबर में भी रेपो रेट को बरकरार रखा था. एसबीआई की एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक, एमपीसी की बैठक में रिवर्स रेपो दर में वृद्धि का फैसला होने की चर्चा अभी अपरिपक्व है. इसके अलावा रिवर्स रेपो दर बढ़ाने जैसा गैर-परंपरागत कदम केंद्रीय बैंक सिर्फ एमपीसी में ही नहीं लेना चाहेगा.

कोटक इकनॉमिक रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस के नए वेरिएंट पर उपजी अनिश्चितता के बीच रिजर्व बैंक रेपो रेट में बदलाव का फैसला करने से पहले शायद स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करेगा. हालांकि, इसने फरवरी में होने वाली अगली मौद्रिक समीक्षा में रिवर्स रेपो दर में वृद्धि का अपना अनुमान बरकरार रखा है.संपत्ति सलाहकार फर्म एनारॉक ने भी कहा है कि आरबीआई रिवर्स रेपो दर में वृद्धि का फैसला मौजूदा हालात में शायद न करे.

एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि ऐसी स्थिति में घर खरीदारों को सस्ती दरों पर आवास ऋण मिलना कुछ और समय तक जारी रहेगा. अगर रिजर्व बैंक बुधवार को नीतिगत ब्याज दरें अपरिवर्तित रखता है, तो यह लगातार नौंवां मौका होगा, जब दरों में कोई बदलाव नहीं होगा. रिजर्व बैंक ने आखिरी बार दरों में बदलाव 22 मई, 2020 को किया था.

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व्यापारियों के संगठन CAIT ने कपड़ा और फुटवियर पर 12 पर्सेंट GST का किया विरोध

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उल्टे कर ढांचे को हटाने / ठीक करने के लिए जीएसटी काउंसिल के निर्णय को लागू करते हुए केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना संख्या 14/2021 दिनांक 18.11.201 को लागू कर समस्त प्रकार के कपडे एवं फुटवियर पर जीएससटी की दर 5% से बढ़ाकर 12% कर दी है जो बेहद अनुचित एवं तर्कहीन है और सरकार द्वारा परिकल्पित उल्टे शुल्क को हटाने के मूल उद्देश्य को पूरा नहीं करता है. कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने यह कहते हुए अफसोस जाहिर किया की जीएसटी कर ढांचे को सरल और युक्तिसंगत बनाने के बजाय, जीएसटी परिषद ने इसे बेहद जटिल जीएसटी कानून में तब्दील कर दिया है. CAIT ने कहा की तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बताये गए जीएसटी ढांचे के विपरीत बना दिया है.

CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि सवाल यह है कि क्या उल्टा कर ( इनवर्टेड ड्यूटी ) ढांचा पूरी तरह से सही है? सूती कपड़ा उद्योग में कोई उलटा कर ढांचा नहीं था, फिर कपड़े और अन्य सूती वस्त्र सामान को 12% के दायरे में क्यों लाया गया. यहां तक कि मानव निर्मित कपड़ा उद्योग में भी, वस्त्र, साड़ी और सभी प्रकार के मेड अप के निर्माण के स्तर पर कोई उल्टा कर मुद्दा ही नहीं था।

कपड़ा उद्योग के चरणों को समझे बिना इस तरह का कठोर निर्णय एक प्रतिघाटी का कदम होगा. कपड़ा और जूते जैसी बुनियादी वस्तुओं पर जीएसटी की दर को 5% से बढ़ाकर 12% करने की केंद्र सरकार की अधिसूचना का दिल्ली सहित पूरे देश में व्यापारियों द्वारा विरोध हो रहा है और CAIT ने इस तरह की मनमानी के खिलाफ देश भर में एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है.इस आंदोलन का नेतृत्व CAIT के अंतर्गत व्यापार के दो महत्वपूर्ण व्यापार एसोसिएशन दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केंटाइल एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल एसोसिएशन  द्वारा किया जाएगा. इसमें टेक्सटाइल और फुटवियर के अलावा सभी तरह के व्यापार के व्यापारिक संगठन, उनसे जुड़े कर्मचारी, कारीगर भी शामिल होंगे।

इस फैसले को बताया देशहित के खिलाफ

CAIT के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल एवं राष्ट्रीय मंत्री सुमित अग्रवाल ने कहा की रोटी, कपड़ा और मकान जीवन की मूलभूत वस्तुएं है. रोटी पहले ही बहुत महंगी हो गई, मकान खरीदने की स्थिति आम आदमी की है नहीं और कपडा जो सुलभ था उसको भी जीएसटी काउंसिल ने महंगा कर दिया है. आखिर देश के आम आदमी के साथ यह किस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है. इस मामले में केवल केंद्र सरकार ही नहीं बल्कि राज्य सरकारें भी पूर्ण रूप से दोषी है

क्योंकि जीएसटी काउंसिल में यह निर्णय सर्वसम्मति से हुए हैं. उन्होंने मांग की है की कपडा एवं फुटवियर पर जीएसटी के बढ़ी दर को तुरंत वापिस लिए जाये. उन्होंने कहा की कोविड के कारण व्यापार पहले ही तबाह हो चुका है और अब जब इस वर्ष से व्यापार पटरी पर आना शुरू हुआ था, ऐसे में जीएसटी की दर में वृद्धि कर व्यापार के ताबूत में कील ठोकने का काम किया गया है.

गोल्ड जूलरी पर जीएसटी 5 फीसदी करने की सिफारिश

CAIT के राष्ट्रीय मंत्री एवं आल इंडिया जूलरी एवं गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय संयोजक पंकज अरोरा ने कहा की सूत्रों के अनुसार ज्ञात हुआ है की जीएसटी की फिटमेंट कमेटी ने सोने की जूलरी पर जीएसटी की दर 3 % से बढ़ाकर 5 % करने की सिफारिश की है जिससे देश में गोल्ड जूलरी का व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा और सोने की तस्करी भी बढ़ने की भी संभावना है.

फिटमेंट कमेटी ने वर्तमान दर को इस तरह बढ़ाने का दिया सुझाव

CAIT के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर परवानी एवं राष्ट्रीय मंत्री संजय पटवारी ने कहा की फिटमेंट कमेटी ने जीएसटी में वर्तमान कर दर 5 % को 7 %, 12 % को 14 % एवं 18 % को 20 % करने की सिफारिश की है. कर दर में प्रस्तावित यह वृद्धि बेहद तर्कहीन एवं औचित्यहीन है और साफ तौर पर फिटमेंट कमेटी की मनमानी है. कपडा एवं फुटवियर पर वृद्धि के मामले में देश के किसी भी व्यापारी संगठन से कोई सलाह मशवरा नहीं किया गया.

जिस तरह से लगातार जीएसटी के स्वरुप को विकृत किया जा रहा है और “एक देश -एक कर” का मजाक उड़ाया जा रहा है वह बेहद निंदनीय है. उन्होंने कहा की इस वृद्धि के खिलाफ देश भर के व्यापारी लामबंद हो गए हैं और एक वृहद आंदोलन की तैयारी के लिए आगामी 28 नवम्बर को CAIT ने देश के सभी राज्यों के कपड़े एवं फुटवियर व्यापारियों एवं सभी राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं की एक वीडियो के जरिये मीटिंग बुलाई है जिसमें आंदोलन की रणनीति को तय किया जाएगा.

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का उड़ रहा मजाक

भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा की जीएसटी लागू करने से पूर्व तत्कालीन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने अपने आवास पर CAIT को जिस जीएसटी के बारे में बताया था , उस जीएसटी की धज्जियां उड़ा दी गई हैं और उसके स्थान पर एक बेहद जटिल जीएसटी कर प्रणाली को लागू कर दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा एक देश -एक कर की घोषणा का खुल कर मजाक उड़ाया जा रहा है. जीएसटी की वर्तमान कर व्यवस्था ने व्यापारियों को मुंशी बना दिया है. अधिकारी निरंकुश हो गए हैं और या तो जिम्मेदार नेताओं की कमान ढीली हो गई है या फिर वो भी व्यापारियों को प्रताड़ित करने में शामिल है. इस स्थिति को देश भर के व्यापारी अब और अधिक बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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म्यूचुअल फंड के इस नियम से बदल जाएगी आपकी किस्मत, बन जाएंगे सीधे करोड़पति, जानें कैसे?

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मार्केट एक्सपर्ट कहते हैं कि मृदुल को फौरन एसआईपी शुरू कर देनी चाहिए और हर साल जैसे-जैसे उसके वेतन में इजाफा होगा, उसी अनुपात में उसे अपनी एसआईपी को भी बढ़ाना होगा. एसआईपी में सालाना इजाफे के साथ मृदुल 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न हासिल कर सकता है. मृदुल को अपने निवेश पर चक्रवृद्धि ब्याज  हासिल करने के लिए म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में विस्तार करना होगा।

म्युचअल फण्ड : मृदुल गर्ग 25 साल का नौजवान है और उसने हाल ही में एक मल्टी नेशनल कंपनी ज्वाइन की है. उसका वेतन 35 हजार रुपये महीना है. मृदुल अपना पेशेवर जीवन शुरू करने के साथ ही रिटायरमेंट प्लान के लिए विचार करना शुरू कर दिया है. मृदुल की योजना है कि जब वह 45 साल का होगा, उसे घर लेने, बच्चों की अच्छी शिक्षा और अच्छे जीवन के लिए कम से कम 5 करोड़ रुपये की जरूरत होगी.

मृदुल 20 साल की नौकरी में 5 करोड़ का फंड इकट्ठा करना चाहता है. हालांकि उसने पेशेवर दुनिया में हाल ही में कदम रखा है और निवेश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए वह रिस्क भी नहीं लेना चाहता. मृदुल सीधे शेयर बाजार में निवेश करने से बचना चाहता है.

20 साल में बनें करोड़पति
पर्सनल फाइनेंस प्लानर कहते हैं कि मृदुल अभी नौजवान है और 20 साल में 5 करोड़ का फंड इकट्ठा करना चाहता है, लेकिन शेयर मार्केट के रिस्क से भी वह बचना चाहता है, इसलिए उसे म्युचूअल फंड में निवेश करना चाहिए.इक्विटी म्यूचुअल फंड मृदुल गर्ग के लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. 20 साल के म्यूचुअल फंड निवेश में मृदुल लगभग 15 प्रतिशत के रिटर्न की उम्मीद कर सकता है.

मृदुल गर्ग को सालाना एसआईपी स्टेप-अप का इस्तेमाल करके अपने मासिक एसआईपी में इजाफा करते रहना होगा. मार्केट एक्सपर्ट कहते हैं कि मृदुल को फौरन एसआईपी शुरू कर देनी चाहिए और हर साल जैसे-जैसे उसके वेतन में इजाफा होगा, उसी अनुपात में उसे अपनी एसआईपी को भी बढ़ाना होगा. एसआईपी में सालाना इजाफे के साथ मृदुल 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न हासिल कर सकता है. मृदुल को अपने निवेश पर चक्रवृद्धि ब्याज हासिल करने के लिए म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में विस्तार करना होगा.

15 X 15 X 15 का फार्मूला
मुदुल को अलर 20 सालों में लगभग 5 करोड़ रुपये का फंड इकट्ठा करना है तो उसे 15 X 15 X 15 का फार्मूला अपनाना होगा. म्यूचुअल फंड में 15 X 15 X 15 का फार्मूला बड़े फाइनेंशियल टारगेट को पूरा करने में मदद करता है.

मृदुल को 15 प्रतिशत रिटर्न के लिए 15 साल तक हर महीने 15,000 रुपये निवेश करने होंगे. इस तरह वह लगभग 5 करोड़ रुपये का फंड  इकट्ठा कर सकता है.

म्युचअल फण्ड रिटर्न कैलक्युलेटर 
अब 5 करोड़ रुपये का फंड कैसे इकट्ठा होगा और यह फार्मूला कैसे काम करता है, इसे ऐसे समझा जा सकता है- 15 प्रतिशत के सालान रिटर्न की उम्मीद करते हुए मृदुल को हर महीने 15 हजार रुपये निवेश करने होंगे. और उसे 20 साल तक यह पैसा निवेश करना होगा. इस तरह उसके पास करीब साढ़े 5 करोड़ रुपये का फंड इकट्ठा हो सकता है।

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इस सरकारी स्कीम में रोजाना 2 रुपए जमा करने पर मिलेगी 36000 हजार पेंशन, जानें कैसे

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आज हर कोई अपने रिटायरमेंट को लेकर परेशान है। लोग अपनी नौकरी की शुरुआत से सेवानिवृत्ति योजनाओं के बारे में सोचने लगते हैं, ताकि बुढ़ापे में किसी पर निर्भर न रहना पड़े। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत पेंशन की सुविधा प्रदान कर रही है। इस स्कीम में

आज हर कोई अपने रिटायरमेंट को लेकर परेशान है। लोग अपनी नौकरी की शुरुआत से सेवानिवृत्ति योजनाओं के बारे में सोचने लगते हैं, ताकि बुढ़ापे में किसी पर निर्भर न रहना पड़े। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत पेंशन की सुविधा प्रदान कर रही है। इस स्कीम में हर दिन 2 रुपए से कम निवेश कर सालाना 36 हजार रुपए पा सकते हैं। आइए जानते हैं इस योजना के बारे में।

कौन हैं इस योजना के पात्र : इस योजना में 18 से 40 वर्ष की आयु का व्यक्ति शामिल हो सकता है। लाभार्थी की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम होनी चाहिए। वह ईपीएफओ और एनपीएस के तहत कवर नहीं होना चाहिए। आवेदक के पास बैंक खाता होना जरूरी है। इस स्कीम में आवेदन करने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है।

कितना देना होगा प्रीमियम : इस योजना में आयु के हिसाब से प्रीमियम देना होता है। अगर कोई 18 साल की उम्र में इस योजना से जुड़ता है। उसे प्रति महीने 55 रुपए जमा करने होंगे। इसका मतलब है कि लाभार्थी को निवेश के लिए प्रति दिन 2 रुपए से कम का भुगतान करना होगा। इस तरह 25 साल वालों को यह राशि 80 रुपए और 40 वर्ष की आयु वालों को 200 रुपए का योगदान देना होगा। यह रकम व्यक्ति को 60 वर्ष के होने तक जमा करनी होगी।

कैसे करें अप्लाई

1. सबसे पहले प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना की वेबसाइट https://maandhan.in/ पर जाएं।

2. होम पेज पर हियर टू अप्लाई नाउ लिंक पर क्लिक करें।

3. अब सेल्फ एनरोलमेंट पर क्लिक करें।

4. अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और Next पर क्लिक करें।

5. आवेदक अपना नाम, ईमेल आईडी आदि मांगी जानकारी दर्ज करें।

6. कैप्चा कोड टाइप करें और मोबाइल पर आए ओटीपी को दर्ज कर सबमिट करें।

7. आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और फॉर्म जमा करने के बाद प्रिंट आउट निकाल लें।

कर सालाना 36 हजार रुपए पा सकते हैं। आइए जानते हैं इस योजना के बारे में।

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