छत्तीसगढ़
CG News: BSF के जवान ने खुद को मारी मारकर की आत्महत्या…

छत्तीसगढ़ के कांकेर में गुरुवार सुबह BSF के एक जवान ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। जवान पश्चिम बंगाल का रहने वाला था। उसने खुदकुशी क्यों की है, इसका कारण अभी तक सामने नहीं आ सका है। कांकेर SP शलभ कुमार सिन्हा ने घटना की पुष्टि की है।
जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल निवासी उज्जवल नंदी BSF की 30वीं बटालियन में पदस्थ था। उसकी ड्यूटी कोयलीबेड़ा के कामटेडा कैंप में लगी थी। सुबह करीब 6 बजे सभी जवान बैरक से बाहर थे। इसी दौरान उन्हें गोली चलने की आवाज सुनाई दी। जवान भाग कर मौके पर पहुंचे तो उज्जवल नंदी का शव पड़ा था।
बताया जा रहा है कि जवान उज्जवल का शव औंधे मुंह जमीन पर पड़ा था। उज्जवल नंदी ने अपनी सर्विस राइफल से सिर में खुद को गोली मारी थी। इसके बाद जवानों ने इसकी सूचना अफसरों को दी। वहीं कोयलीबेड़ा थाना पुलिस को भी सूचित किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जवान के परिवार से भी संपर्क किया गया है। पुलिस खुदकुशी का कारण जानने का प्रयास कर रही है।

छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर प्रदेशवासियों को दी,हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 16 मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर बुद्ध पूर्णिमा के अवसर सहित प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।
अपने शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा है कि महात्मा बुद्ध ने लोगों को अहिंसा,समानता और विश्व बंधुत्व का संदेश दिया। उनकी शिक्षा को विदेशों में भी लागों ने अपनाया और लाखों अनुयायी उनके दिखाये मार्ग पर चल कर देश-दुनिया को शांति का संदेश दे रहे हैं। बघेल ने कहा कि गौतम बुद्ध के उपदेश हर परिस्थिति और काल में प्रासंगिक हैं।
उनकी दी गई शिक्षा हमें संयम से आगे बढ़ने का संदेश देती है। महात्मा बुद्ध के विचार और जीवन मूल्य एक बेहतर समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए हमेशा मार्गदर्शक रहेंगे।
छत्तीसगढ़
बंद हुआ गेहूं का सप्लाई, जाने आगे क्या होगी देश की स्थिति..
नई दिल्ली: रोटी, ब्रेड, पास्ता, पिज्जा, बर्गर… जैसी खाने की कई चीजें गेहूं से बनती है. गेहूं दुनिया के लोगों की खाने की थाली में कोई न कोई रूप में मौजूद रहता ही रहता है. लेकिन गेहूं की उपज दुनिया के हर हिस्से में नहीं होती है. इसलिए गेहूं की सप्लाई का बैलेंस कायम रखने के लिए इसका आयात-निर्यात होता रहता है. लेकिन पिछले ढाई महीनों से चल रहे रूस-यूक्रेन की लड़ाई ने गेहूं के सप्लाई चेन को डगमगा दिया है. यूक्रेन और रूस दोनों ही दुनिया के बड़े गेहूं उत्पादक देश हैं और दोनों ही युद्ध की विभीषिका झेल रहे हैं.
रूस ने ब्लैक सी में यूक्रेन के बंदरगाहों की नाकेबंदी और घेराबंदी कर रखी है. लिहाजा यहां से कई हफ्तों से यूरोप को गेहूं की सप्लाई नहीं हो पा रही है. इससे विश्व बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ने लगी है. ऐसी ही परिस्थिति में गेहूं का एक और बड़ा उत्पादक देश भारत ने भी गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दिया है. इससे पहले से ही डवांडोल स्थिति के और भी चरमराने का अंदेशा पैदा हो गया है. रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक देश है. यूक्रेन और रूस मिलकर दुनिया के एक चौथाई गेहूं का निर्यात करते हैं और यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के करोड़ों लोगों का पेट भरते हैं. इन दोनों देशों से सूरजमुखी का बीज, बार्ली और मक्के की सप्लाई भी दुनिया को होती है.
अब इसे राष्ट्रपति पुतिन की प्लानिंग कहें या संयोग लेकिन रूस ने यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने से पहले ही साल 2021 में गेहूं के निर्यात को सीमित कर दिया है. रूस ने गेहूं के निर्यात को कम करने के लिए निर्यात टैक्स लगा दिया है. रूस का तर्क है कि घरेलू बाजार में खाद्यान्न कीमतों पर नियंत्रण के लिए उसने ऐसा कदम उठाया है. रूस के इस कदम से दुनिया के खाद्य बाजार में गेहूं की किल्लत पहले से ही चली आ रही थी. बता दें कि कृषि से संबंधित उत्पादों का बाजार वैश्विक हैं, इसलिए गेहूं की आपूर्ति में कोई भी कमी ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और अमेरिका सहित दुनिया के अन्य हिस्सों में पैदा होने वाले गेहूं की मांग और दाम को बढ़ा सकती है. रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू होने से पहले ही दुनिया कोरोना के मार से जूझ रही थी. समु्द्री मार्ग कई महीनों से बंद थे. गेहूं की खरीद बिक्री या तो कम हो रही थी या फिर हो ही नहीं रही थी. इसकी वजह से दुनिया में खाद्यान्नों की कीमतें पहले से ही बढ़ रही थीं
. गेहूं की कीमतें भी इससे बच नहीं पाई थी. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार अप्रैल 2020 से दिसंबर 2021 के बीच गेहूं की कीमतें 80 फीसदी बढ़ चुकी थी. इन विपरित परिस्थितियों के बीच फरवरी में पुतिन 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी. इसका नतीजा ये रहा कि रूसी बमबारी के बीच यूक्रेन के बंदरगाह ठप हो गए, निर्यात रुक गया. यूक्रेन से गेहूं का निर्यात रुकने से यूरोपियन यूनियन देशों को खासी परेशानी हुई है. बता दें कि ओडेशा और मारियुपोल जैसे बंदरगाह ब्लैक सी के तट पर ही स्थित हैं. रूसी बमबारी की वजह से यहां से निर्यात लगभग ठप है. यहां से पिछले तीन महीनों में 20 मिलियन टन गेहूं का निर्यात होना था. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है. अब EU यूक्रेन से गेहूं निर्यात के लिए समुद्री रूट के अलावा अन्य विकल्पों जैसे रेल, रोड और नदी का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है.
ओडेशा पोर्ट पहुंचे यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष माइकल ने कहा कि यहां पर गेहूं, मकई और दूसरे अनाज से भरे हैं. इस पोर्ट को तुरंत खोले जाने की जरूरत है. यूरोपियन निवेश बैंक के प्रमुख का कहना है कि यूक्रेन के पास 8 बिलियन यूरो का गेहूं है लेकिन युद्ध की वजह से वो इसे निर्यात नहीं कर सकता है. यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी कहा है कि अगर यूक्रेन के बंदरगाह नहीं खोले गए तो अफ्रीका, यूरोप और एशिया के कई देशों को खाद्यान्न संकट का सामना करना पड़ सकता है. वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने कहा है कि 24 फरवरी को यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद गेहूं की निर्यात कीमतें 22 फीसदी बढ़ गई हैं, जबकि मक्के की कीमत 20 फीसदी बढ़ी है.
संकट की इस घड़ी में दुनिया की नजर भारत के स्टोरेज पर है. दुनिया भर में फैलते जा रहे इस खाद्य संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र की संस्था वर्ल्ड फूड प्रोग्राम भारत से गेहूं खरीदने पर विचार कर रहा है. वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के अनुसार भारत से इस बारे में बात चल रही है. वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के मुख्य अर्थशास्त्री आरिफ हुसैन ने कहा कि भारत सरकार से इस बारे में बात चल रही है. बता दें कि एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2020-21 में भारत में 109.59 मिलियन टन गेहूं की पैदावार हुई थी. हालांकि दुनिया भर में गेहूं की बढ़ती कीमतें, घरेलू बाजार में खाद्यान्न की बढ़ती कीमतें और मुद्रा स्फीति से निपटने के लिए शनिवार को ही भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है. अब देखना होगा कि वर्ल्ड फूड प्रोग्राम इस रोक के बीच भारत से गेहूं खरीदने का रास्ता कैसे निकालता है. हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी जब जर्मनी की यात्रा पर गए थे तब उन्होंने कहा था कि आज भारत का किसान दुनिया का पेट भरने के लिए तैयार है. पीएम मोदी ने कहा था कि जब विश्व गेहूं की कमी से जूझ रहा है.
उस समय हमारे देश का मेहनती किसान दुनिया का पेट भरने के लिए आगे आ रहा है. हालांकि घरेलू मजबूरियों की वजह से भारत ने फिलहाल गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है. कुछ ही महीने पहले भारत ने खाद्यान्न संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान को गेहूं सप्लाई करने का निर्णय लिया है. भारत सरकार अफगानिस्तान को 50 हजार टन गेहूं पाकिस्तान के जरिए भेज रहा है.
छत्तीसगढ़
खुशखबरी: CM बघेल ने मनरेगा के तहत मानदेय बढाने का किया बड़ा ऐलान…

छत्तीसगढ़ के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के रोजगार सहायकों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने उनका मानदेय बढ़ाने का निर्णय लिया है। सीएम भूपेश बघेल ने ऐलान किया है कि रोजगार सहायकों के मानदेय 5000 से 6000 रुपये को कलेक्टर दर 9540 रुपये किया जाएगा। रोजगार सहायकों की सेवा शर्तों से संबंधित मांगों पर निर्णय राज्य स्तरीय गठित समिति के प्रतिवेदन मिलने पर लिया जाएगा। सीएम के इस आदेश के बाद 15 हजार से ज्यादा रोजगार सहायकों को फायदा मिलेगा।
बता दें कि प्रदेशभर में मनरेगा कर्मचारी नियमितीकरण एवं रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारण करने तथा मनरेगा कर्मियों पर सिविल सेवा नियम 1966 के साथ पंचायत कर्मी नियमावली लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। मनरेगा कर्मियों ने दंतेवाड़ा से एक दांडी मार्च भी निकाला था, जिसे तिरंगा यात्रा का नाम दिया गया था। तिरंगा यात्रा में करीब 5 हजार रोजगार सहायक शामिल हुए थे। रोजगार सहायक ने दावा किया था कि यह छत्तीसगढ़ का पहला आंदोलन है, जिसमें कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 400 किलोमीटर तक लंबी दांडी यात्रा निकाली है।
सीएमओ कार्यालय ने ट्वीट कर दी जानकारी
सीएमओ कार्यालय ने ट्वीट कर कहा कि सीएम भूपेश बघेल ने मनरेगा के रोजगार सहायकों के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की। अब कलेक्टर दर पर मानदेय मिलेगा। सेवा शर्तों की मांग पर राज्य स्तरीय समिति से प्रतिवेदन मिलने के बाद फैसला लिया जाएगा। रोजगार सहायकों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखी थी, जिसके बाद यह घोषणा की गई है। रोजगार सहायक अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर 4 अप्रैल से हड़ताल कर रहे हैं। आंदोलन में छत्तीसगढ़ के 15 हजार रोजगार कर्मचारी शामिल हैं। आंदोलन के जरिए रोजगार सहायक सरकार पर दबाव बना रहे थे।
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