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नींबू की कीमत में आई गिरावट,120 रुपए दर्जन नहीं, बल्कि मिल रहे हैं सिर्फ 30 रुपए में…

नींबू का रेट घट गया है.अब आपको एक दर्जन के लिए 120 रुपए नहीं बल्कि सिर्फ 30 रुपए देने होंगे. दिल्ली आजादपुर मंडी के साथ-साथ बिहार, यूपी और महाराष्ट्र में भी नींबू का रेट घट गया है.
खुदरा बाजार में 10 रुपए में 4 नींबू बिक रहा है. आप 40-50 रुपए से लेकर 80 रुपए प्रति किलो नींबू खरीद सकते हैं.अब नींबू की चोरी नहीं होगी. जी हां, नींबू का रेट घट गया है. दिल्ली आजादपुर मंडी में शुक्रवार को नींबू 40-50 रुपये प्रति किलो बिका. वहीं बिहार, यूपी, महाराष्ट्र में भी नींबू का रेट घट गया है. दिल्ली खुदरा बाजार में 30 रुपए दर्जन नींबू लोगों ने खरीदे.
एक महीने पहले बाजारों में नींबू 400 रुपए किलो तक बिका है. एक महीने के अंदर ही नींबू की दरों में 60% गिरावट आयी. विक्रेताओं के मुताबिक ज्यादा पैदावार और मंडियों में ज्यादा नींबू आने के कारण कीमत घटा है. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात नींबू की आमद बढ़ी है. ठीक एक महीने पहले 6-8 गाड़ियां ही नींबू लेकर आती थीं. वहीं अब 16 गाड़ियों से नींबू आ रहा है.
जानें कितना है नींबू के दाम :
एक महीने पहले नींबू की कीमत में इस कदर इजाफा था कि लोग इसे ठेले पर से चोरी कर लेते थे. लोग कहने लगे थे कि सोने के भाव नींबू बिक रहा है. तेलंगाना के एक मंडी से निकली गाड़ी में से नींबू से भरी दो टोकरी गायब हो गई थी. वहीं देश के कई जगहों से चोरी की खबर ने लोगों को चौंकाया भी था. हालांकि अब नींबू की कीमतों के घट जाने से लोगों में राहत है. लोग इसे गर्मी में राहत से भरी खबर कह रहे हैं. बता दें कि गुजरात में आए तूफान और आंध्रप्रदेश में बे मौसम बारिश से नींबू के उत्पादन पर असर पड़ा था. वहीं डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी भी नींबू के महंगे होने का कारण बनी थी.
देश में नींबू का उत्पादन करीब 35 लाख टन
क्या आपको पता है कि अपने देश में नींबू का उत्पादन करीब 35 लाख टन होता है. हर साल सवा तीन लाख हेक्टेयर में इसकी खेती की जाती है. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु जैसी जगहों पर इसकी पैदावार काफी अधिक होती है. साल में तीन बार इसके फल लगते हैं. इस कारण कभी पैदावार में कमी होती है तो नींबू के दामों में इजाफा हो जाता है. पैदावार सामान्य होते ही कीमत भी सामान्य हो जाती है. जानकारों के मुताबिक नींबू की खेती में पानी ज्यादा चाहिए होता है. इससे नींबू में रस बढ़ता है. लेकिन अधिक बारिश के कारण फल सड़ भी जाते हैं.

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स्टील की कीमतों मे आई भारी गिरावट, जाने क्या है बड़ी वजह..
आयरन ओर पर निर्यात शुल्क लगाने के बाद आने वाले दिनों में स्टील की कीमतों में जबरदस्त गिरावट की संभावना जताई जा रही है।केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में स्टील के 11 विभिन्न उत्पाद और आयरन ओर पर निर्यात शुल्क लगाने के बाद आने वाले दिनों में स्टील की कीमतों में जबरदस्त गिरावट की संभावना जताई जा रही है। दो महीने पहले की स्थिति पर गौर करें तो स्टील की कीमतें प्रति टन 80 हजार रुपये तक पहुंच चुकी थी,
जो कि वर्तमान में 68 से 70 हजार रुपये प्रति टन हैं। स्टील बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल पैलेट ओर पर 45 फीसद और आयरन ओर पर 50 फीसद निर्यात शुल्क लगाने के निर्णय के बाद स्टील की कीमतें आने वाले दो महीने के भीतर 10 से 15 हजार रुपये प्रति टन गिर सकती है।
ऐसा इसलिए क्योंकि शून्य से सीधे 45 फीसद निर्यात शुल्क के बाद पैलेट ओर का विदेशों में निर्यात हतोत्साहित होगा। इससे स्थानीय बाजारों में पैलेट ओर की कीमतें घटेगी। उद्योगपतियों के मुताबिक स्टील बनाने की प्रक्रिया में अब पैलेट ओर का काफी उपयोग किया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में ब्रांडेड बड़ी स्टील कंपनियों द्वारा पैलेट ओर बनाने के बाद राजधानी सहित अन्य जिलों से बड़ी मात्रा में इसका निर्यात विदेशों में किया जाता था। इसका लाभ स्थानीय उद्योगों को नहीं मिल पाता था।
केंद्र सरकार का यह फैसला 22 मई से लागू हो जाएगा। अब पैलेट ओर का स्टाक बढ़ने के बाद देश के भीतर और राज्य में कीमतें घटेगी। इससे स्टील उत्पादन प्रक्रिया में उद्योगपतियों को कम खर्चा आएगा साथ ही बाजारों में कीमतें भी घटेगी।
बीते वर्ष चार मिलियन टन निर्यात
छत्तीसढ़ स्पंज आयरन मैन्यफेक्चरिंग के मुताबिक बीते वर्ष प्रदेश से चार मिलियन टन पैलेट ओर यूरोप और एशिया के कई देशों में निर्यात किए गए। वर्तमान में पैलेट ओर की कीमतें प्रति टन नौ से 10 हजार रुपये प्रति टन हैं, जो कि इस फैसले के बाद छह से सात हजार रुपये प्रति टन पहुंच सकती है। देश से हर साल 12 मिलियन टन पैलेट ओर के विदेशों में निर्यात किया जाता है। इसमें छत्तीसगढ़ का योगदान 33 से 34 फीसद रहा है। एनएमडीसी के आयरन ओर की कीमतें वर्तमान में 10 हजार और ओड़िशा के खदानों का आयरन ओर सात हजार रुपये प्रति टन है।
विदेशी निर्यात पर औद्योगिक संगठनों ने किया था विरोध
स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता में ना रखते हुए विदेशों को पैलेट ओर निर्यात किए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ रोलिंग मिल एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन एसोसिएशन और मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने विरोध किया था। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार से मांग की गई थी कि बड़ी स्टील कंपनियों को पहले स्थानीय उद्योगों को सस्ते दर पर पैलेट ओर उपलब्ध कराया जाना चाहिए, क्योंकि स्थानीय खदानों से आयरन ओर निकालकर पैलेट ओर बनाने के बाद इसे विदेशों में भेजा जा रहा है, जबकि स्टील बनाने के लिए स्थानीय उद्योगों को लगातार कच्चे माल की उपलब्धता से जूझना पड़ रहा है। इस मामले में केंद्र सरकार के इस्पात मंत्री और सचिव से मुलाकात करते हुए परेशानियों से अवगत कराया गया था। दिल्ली में भी उद्योगपतियों ने इस मुद्दे को उठाया था।
छत्तीसगढ़ रोलिंग मिल एसोसिएशन अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा, पैलेट ओर और आयरन ओर में निर्यात शुल्क के फैसले से स्थानीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें घटेगी। इससे स्टील का उत्पादन लागत कम होगा और बाजार में भी स्टील की कीमतें घटेगी। आने वाले दो महीनों के भीतर बड़ा असर देखा जा सकता है। पैलेट ओर में निर्यात शुल्क का निर्णय स्टील मार्केट के लिए बेहतर फैसला है।
छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन मैन्युफेक्चरिंग एसोसिएशन अध्यक्ष अनिल नचरानी ने कहा, केंद्र सरकार से लंबे समय से मांग की जा रही थी कि पैलेट ओर पर निर्यात शुल्क लगाया जाए। 45 फीसद निर्यात शुल्क का फैसला स्वागतयोग्य है। इससे स्टील की कीमतें आने वाले दिनों में 10 हजार रुपए प्रति टन से अधिक कम हो सकती है। बाजारों में मांग बढ़ेगी साथ ही ग्राहकों को भी राहत मिलेगी।
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बिना e-KYC के नई मिलेगा पीएम किसान योजना की 11वीं किस्त,जानिए इसके प्रोसेस

PM Kisan Scheme: पीएम किसान योजना के तहत किसानों को 11वीं किस्त की रकम मिलने वाली है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया है कि किसान सम्मान निधि की 11वीं किस्त 31 मई को फिर से प्रधानमंत्री जी देने वाले हैं. लेकिन 11वीं किस्त के लिए किसानों को e-KYC पूरा करना होगा. केंद्र सरकार का ऐलान केंद्र सरकार ने अब योजना का लाभ पाने के लिए अनिवार्य eKYC की डेडलाइन बढ़ा दी है.
इससे पहले इसकी लास्ट डेट 22 मई 2022 थी. पीएम किसान पोर्टल पर इसकी जानकारी दी गई है. जानकारी के अनुसार अब 31 मई, 2022 तक eKYC पूरी की जा सकती है. 22 मई से पहले इसकी इसकी डेडलाइन 31 मार्च, 2022 थी.e-KYC के बिना नहीं मिलेगा पैसा आपको बता दें कि बिना e-KYC के आपकी किस्त अटक सकती है.
जल्दी ही पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 11वीं किस्त भी जारी कर दी जाएगी. पीएम किसान पोर्टल पर बताया गया है कि आधार आधारित OTP प्रमाणीकरण के लिए किसानों को Kisan Corner में e-KYC विकल्प पर क्लिक करना होगा. बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए निकटतम CSC सेंटर पर जाना होगा. ये काम घर बैठे अपने मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप से भी कर सकते हैं.
जानिए इसके प्रोसेस
1. आधार आधारित ओटीपी प्रमाणीकरण के लिए किसान कॉर्नर में ‘ईकेवाईसी’ विकल्प पर क्लिक करें 2. बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए निकटतम सीएससी केंद्रों से संपर्क करें. 3. आप इसे घर बैठे ही अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर की मदद से इसे पूरा कर सकते हैं. 4. इसके लिए सबसे पहले आप https://pmkisan.gov.in/ पोर्टल पर जाएं. 5. दाएं हाथ पर आपको इस तरह के टैब्स मिलेंगे. सबसे ऊपर e-KYC लिखा मिलेगा. इस पर क्लिक करें.
जानिए इसके प्रोसेस
1. आधार आधारित ओटीपी प्रमाणीकरण के लिए किसान कॉर्नर में ‘ईकेवाईसी’ विकल्प पर क्लिक करें 2. बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए निकटतम सीएससी केंद्रों से संपर्क करें. 3. आप इसे घर बैठे ही अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर की मदद से इसे पूरा कर सकते हैं. 4. इसके लिए सबसे पहले आप https://pmkisan.gov.in/ पोर्टल पर जाएं. 5. दाएं हाथ पर आपको इस तरह के टैब्स मिलेंगे. सबसे ऊपर e-KYC लिखा मिलेगा. इस पर क्लिक करें.
ऐसे चेक करें लिस्ट में अपना नाम 1. इसके लिए सबसे पहले आप पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in पर जाएं. 2. अब इसके होमपेज पर आपको Farmers Corner का ऑप्शन दिखेगा. 3. Farmers Corner सेक्शन के भीतर Beneficiaries List के ऑप्शन पर क्लिक करें. 4.अब आप ड्रॉप डाउन लिस्ट से राज्य, जिला, उप जिला, ब्लॉक और गांव को सेलेक्ट करें. 5. इसके बाद आप ‘Get Report’ पर क्लिक करें. 6. इसके बाद लाभार्थियों की पूरी लिस्ट सामने आ जाएगी, जिसमें आप अपना नाम चेक कर सकते हैं.
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तेल की कीमत में मिल सकती है बड़ी राहत,पढ़िये ख़बर…

भारत में आम लोगों को महंगाई से आने वाले दिनों में कुछ राहत मिल सकती है. रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचे खाने वाले तेलों के दाम में कमी आने की संभावना है. पॉम ऑयल के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक इंडोनेशिया ने निर्यात पर लगी रोक को हटाने का निर्णय लिया है. इसी कारण भारत में खाने वाले तेल के मोर्चे पर लोगों को राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है. इंडोनेशिया ने पॉम ऑयल पर लगी रोक को हटाने का गुरुवार को ऐलान किया. यह प्रतिबंध सोमवार से हटने वाला है. भारत अभी इंडोनेशिया से पॉम ऑयल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है. भारत इंडोनेशिया से सालाना करीब 80 लाख टन पॉम ऑयल खरीदता है. भारतीय बाजार में खाद्य तेलों के कुल उपभोग में पॉम ऑयल का हिस्सा करीब 40 फीसदी है. दूसरी ओर इंडोनेशिया हर साल करीब 480 लाख टन पॉम ऑयल का उत्पादन करता है.
यह टोटल ग्लोबल प्रॉडक्शन 750 लाख टन के आधे से भी ज्यादा है. पॉम ऑयल इंडोनेशिया के लिए रेवेन्यू का सबसे बड़ा स्रोत है. इंडोनेशिया के कॉमर्स मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि पॉम ऑयल के निर्यात पर रोक लगाने के बाद अब उनके देश में इसे स्टोर करने की क्षमता समाप्त हो चुकी है. इसी कारण निर्यात पर रोक को हटाने का फैसला लेना पड़ा है. उन्होंने बताया कि निर्यात पर रोक का फैसला बदलने के पीछे यही मुख्य वजह है. इंडोनेशिया ने पॉम ऑयल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने का ऐलान 28 अप्रैल को किया था. अब एक महीने के भीतर फैसले को बदल दिया गया है.
इंडोनेशिया के कॉमर्स मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि पॉम ऑयल के निर्यात पर रोक लगाने के बाद अब उनके देश में इसे स्टोर करने की क्षमता समाप्त हो चुकी है. इसी कारण निर्यात पर रोक को हटाने का फैसला लेना पड़ा है. उन्होंने बताया कि निर्यात पर रोक का फैसला बदलने के पीछे यही मुख्य वजह है. इंडोनेशिया ने पॉम ऑयल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने का ऐलान 28 अप्रैल को किया था. अब एक महीने के भीतर फैसले को बदल दिया गया है.फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेंशंस के डाइरेक्टर जनरल अजय शाही ने इस बारे में कहा, ‘इंडोनेशिया में पॉम ऑयल की घरेलू खपत उनके उत्पादन की तुलना में बहुत कम है.
इस कारण उम्मीद तो थी कि एक्सपोर्ट पर रोक के फैसले को बदला जाएगा, हालांकि किसी ने इतनी जल्दी बदलने की उम्मीद नहीं की थी. इंडोनेशिया के इस फैसले से कीमतों में कमी आएगी और तेजी से चढ़े फूड इंफ्लेशन में कुछ कमी आएगी.’ भारत अभी कई सालों की सबसे ज्यादा महंगाई से जूझ रहा है. पिछले महीने भारत में खुदरा महंगाई मई 2014 के बाद के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई.
इसी तरह थोक महंगाई नवंबर 1998 के बाद की सबसे ज्यादा है. अप्रैल महीने में रिकॉर्ड महंगाई के लिए फूड एंड फ्यूल इंफ्लेशन जिम्मेदार रहे. फूड इंफ्लेशन की बात करें तो यह मार्च के 7.68 फीसदी की तुलना में उछलकर अप्रैल में 8.38 फीसदी पर पहुंच गई. अब अगर खाने के तेलों के दाम कम होते हैं, तो इस मोर्चे पर राहत मिलेगी. इंडोनेशिया की रोक के लंबा खिंचने पर भारत में खाने के तेलों के भाव डबल हो जाने का खतरा था.
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