व्यापर
आईआरसीटीसी ने लॉन्च की ऑनलाइन बस बुकिंग सेवा
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने अपनी ऑनलाइन बस बुकिंग सर्विस (Online Bus Booking Service) लॉन्च कर दी है। आईआरसीटीसी की यह सेवा 29 जनवरी से शुरू हो गई है। कंपनी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि रेलवे मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के नेतृत्व में आईआरसीटीसी धीरे-धीरे स्वयं को देश के पहले सरकारी ‘वन स्टॉप शॉप ट्रैवल पोर्टल के रूप में विकसित करने की ओर बढ़ रही है।
आईआरसीटीसी ने आगे कहा, ‘ग्राहकों को अधिक समग्र यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए हालिया डेवलपमेंट में, IRCTC ने, जो पहले से ही ऑनलाइन रेल और फ्लाइट टिकट बुकिंग के व्यवसाय में है, अपनी ऑनलाइन बस बुकिंग सेवाओं की शुरुआत की है, जो 29 जनवरी 2021 को लाइव हुई है।’
आईआरसीटीसी की ऑनलाइन बस बुकिंग सेवा का लाभ https://www.bus.irctc.co.in/home वेबसाइट पर जाकर लिया जा सकता है। कंपनी के मोबाइल एप पर यह सेवा मार्च के पहले सप्ताह में उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके बाद लोग मोबाइल एप के माध्यम से भी बस टिकट बुक करा सकेंगे।
कंपनी के बयान के अनुसार, IRCTC ने ग्राहकों को ऑनलाइन बस बुकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए 22 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करते हुए 50,000 से अधिक राज्य सड़क परिवहन के साथ-साथ निजी बस ऑपरेटरों के साथ करार किया है।
ऑनलाइन बस बुकिंग की इस नई सुविधा के जरिए ग्राहक विभिन्न प्रकार की बसों को देख सकते हैं और मार्ग, सुविधाओं, समीक्षाओं, रेटिंग्स व बस की तस्वीरों को देखते हुए अपने लिए उपयुक्त बस का चयन कर सकते हैं। इसके साथ ही ग्राहक अपने पिक-अप और ड्रॉप पॉइंट व टाइमिंग का चयन कर सकते हैं। इसके बाद ग्राहक मौजूदा बैंक और ई-वॉलेट डिस्काउंट के साथ उचित मूल्य पर अपनी यात्रा बुक कर सकते हैं।


देश - दुनिया
SBI ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में निवेश के बताए 6 बड़े फायदे, 16 जुलाई तक है मौका

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना 16 जुलाई 2021 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुली है. भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, इस सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना 2021-22 – सीरीज IV की कीमत 4,807 रुपए प्रति ग्राम है. भारत सरकार के परामर्श से रिजर्व बैंक ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल तरीके से भुगतान करने वाले निवेशकों को 50 रुपए प्रति ग्राम की छूट देगा. RBI के अनुसार, ऐसे निवेशकों के लिए निर्गम मूल्य 4,757 रुपए प्रति ग्राम सोना होगा.
हालांकि, भारत सरकार द्वारा समर्थित गोल्ड इन्वेस्टमेंट स्कीम में सोने में निवेश करने वालों की रुचि बढ़ाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने छह सुनहरे कारणों को सूचीबद्ध किया है जो एक निवेशक के लिए इस योजना में निवेश करने के लिए पर्याप्त हैं.
एसबीआई अपने ग्राहकों को इस गोल्ड बॉन्ड स्कीम के फायदे के बारे में बताने के लिए SBI ने ट्वीट किया है. SBI ने ट्वीट में कहा, सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं? सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने के 6 सुनहरे कारण यहां दिए गए हैं. एसबीआई ग्राहक इन बॉन्ड में ई-सर्विस के तहत http://onlinesbi.com पर निवेश कर सकते हैं.
आपको सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2021-22 सीरीज चार में निवेश क्यों करना चाहिए, इस पर एसबीआई ने 6 सुनहरे कारणों को सूचीबद्ध किया है.
>> एश्योर्ड रिटर्न नेचर- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के निवेशकों को हर साल 2.5 फीसदी की सालाना दर से ब्याज मिलेगा. यह ब्याज छमाही आधार पर मिलेगा.
>> कैपिटल गेन टैक्स से छूट: रिडम्पशन पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा.
>> लोन सुविधा: लोन के लिए कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.
>> स्टोरेज की कोई समस्या नहीं: सुरक्षित, फिजिकल गोल्ड की तरह स्टोरेज की कोई परेशानी नहीं है.
>> लिक्विडिटी: एक्सचेंजों पर ट्रेड कर सकते हैं.
>> जीएसटी, मेकिंग चार्जेज से मुक्ति: फिजिकल गोल्ड के विपरीत कोई जीएसटी और मेकिंग चार्ज नहीं लगता है.
एसबीआई यह बताने की कोशिश कर रहा है कि केवल रिटर्न पर नजर रखते हुए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना में निवेश नहीं करना चाहिए. भारत सरकार समर्थित इस गोल्ड इन्वेस्टमेंट स्कीम में निवेश करते समय अन्य बचतों पर ध्यान देना चाहिए.
देश - दुनिया
ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को अपनाने जा रहे SBI, HDFC, ICICI समेत ये 15 बैंक, नई तकनीक से ऐसे मिलेगा फायदा

टेक्नोलॉजी अडवांसमेंट की दिशा में आगे बढ़ते हुए देश के 15 बैंकों ने मिलकर ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को अपनाने का फैसला किया है. यह वहीं टेक्नोलॉजी है जिस पर बिटक्वॉइन, इथीरियम, डोजिक्वॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी आधारित है. दरअसल SBI, HDFC, ICICI, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक समेत देश के 15 प्रमुख बैंकों ने मिलकर एक नई कंपनी बनाई है जिसका नाम इंडियन बैंक्स ब्लॉकचेन इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (IBBIC) रखा गया है.
माना जा रहा है कि इस टेक्नोलॉजी की मदद से MSMEs सेक्टर का कायाकल्प होगा साथ ही फ्रॉड की संभावना शून्य हो जाएगी. IBBIC मूल रूप से लेटर ऑफ क्रेडिट (Letters of Credit (LCs), जीएसटी इनवॉयस, ई-वे बिल संबंधी समस्याओं को टेक्नोलॉजी के माध्यम से हल करेगी. इसके कारण पेपर वर्क काफी कम हो जाएगा साथ ही ट्रांजैक्शन प्रोसेस में समय भी कम लगेगा. इसके अलावा हर तरह का ट्रांजैक्शन ऑन रिकॉर्ड और सिक्यॉर्ड होगा.
बिजनेस के लिए LC बहुत महत्वपूर्ण
LC या Letters of Credit बिजनेस के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. यह किसी बैंक द्वारा जारी किया जाता है. जब कोई बैंक एलसी जारी करता है तो वह जारी करने वाले एंटिटी को वादा करता है तो बायर उसके पैसे का भुगतान समय से कर देगा. अगर बायर ऐसा करने में अक्षम होता है तो बैंक LC पाने वाले एंटिटी को बकाया का भुगतान करता है. आसान शब्दों में इसे बैंक गारंटी कह सकते हैं. खासकर इंपोर्ट और एक्सपोर्ट के मामलों में एलसी की ज्यादा जरूरत होती है.
पेमेंट के लिए इनवॉयस को टोकन में कंवर्ट कर दिया जाएगा
अगर Letters of Credit को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी आधारित टोकन के रूप में जारी किया जाता है तो प्रॉसेस में लगने वाला समय घट जाएगा. इसके अलावा ह्यूमन एरर की गुंजाइश नहीं रहेगी साथ ही फ्रॉड की संभावना भी नहीं रहेगी. इस टेक्नोलॉजी की मदद से बेसिक इनवॉइस को टोकन के रूप में कंवर्ट कर दिया जाएगा. इसी टोकन का इस्तेमाल पेमेंट के लिए किया जाएगा.
एक साल के भीतर काम करने लगेगा यह सिस्टम
बिजनेस इनसाइडर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिस्टम अगले एक साल के भीतर काम करने लगेगा. साथ ही नई कंपनी में सभी 15 बैंकों की 6.66 फीसदी की समान हिस्सेदारी होगी. अगर कोई नया बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन इसके साथ जुड़ना चाहता है तो वह किसी भी समय जुड़ सकता है.
ये हैं 15 सदस्यीय बैंक
15 सदस्यीय बैंकों में 4 सरकारी और 11 प्राइवेट सेक्टर के बैंक हैं. चार सरकारी बैंक, एसबीआई, कैनरा बैंक, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा हैं. इसके अलावा प्राइवेट बैंकों में HDFC Bank, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank, Axis Bank, IndusInd Bank, Yes Bank, RBL Bank, IDFC Bank, South Indian Bank, and Federal Bank शामिल हैं. इसके अलावा एक इंटरनेशनल बैंक Standard Chartered भी इस क्लब में शामिल है.
इंफोसिस का आईटी सपोर्ट
यह सिस्टम इंफोसिस के ब्लॉकचेन आधारित प्लैटफॉर्म Finacle Connect पर डिजाइन्ड होगा. पायलट के तौर पर एसबीआई और एक्सिस बैंक ने इंडिविजुअल स्तर पर इसका प्रयोग किया है.
व्यापर
जानिए क्या होता है मृत्यु के बाद आपके लोन का….किसे चुकाने पड़ते है बचे हुए पैसे

जब भी पैसों की जरूरत पड़ती है तो बैंक ग्राहक बैंक से लोन ले लेते हैं और किश्तों में उसका भुगतान करते रहते हैं. लेकिन, दुर्भाग्यवश कई बार लोन लेने वाले शख्स की मृत्यु हो जाती है और लोन का काफी पैसा बाकी रह जाता है. कभी आपने सोचा है कि इस परिस्थिति में बैंक का बकाया पैसे कौन चुकाता है या क्या उत्तराधिकारी को बाकी लोन चुकाना पड़ता है या फिर इसका कुछ और नियम होता है?
अगर आप भी इस सवाल का हल जानना चाहते हैं तो हम आपको बताते हैं कि इस स्थिति में लोन का भुगतान कैसे किया जाता है और किस व्यक्ति पर इस लोन को चुकाने की जिम्मेदारी होती है. जानते हैं मृत्यु के बाद लोन से जुड़े नियम क्या हैं और किस तरह इसका भुगतान किया जा सकता है…
क्या हैं नियम?
मृत्यु के बाद लोन के भुगतान को लेकर हर लोन के लिए अलग नियम है. यह नियम होम लोन में अलग होते हैं तो पर्सनल लोन के लिए अलग तरह से कार्रवाई की जाती है. इसलिए आपको हर लोन के हिसाब से समझना होगा कि लोन वाले शख्स की मृत्यु के बाद लोन का भुगतान कौन करता है?
होम लोन
दरअसल, जब भी होम लोन लिया जाता है तो लोन के एवज में घर के कागज गिरवी रखे जाते हैं यानी घर गिरवी रखा जाता है. होम लोन की स्थिति में जब उधार लेने वाले शख्स की मृत्यु हो जाती है तो को-बोरोवर पर इसकी जिम्मेदारी होती है. या फिर व्यक्ति के उत्तराधिकारी पर लोन जमा करने की जिम्मेदारी होती है, अगर वो लोन का भुगतान कर सकते हैं तो ही उन्हें जिम्मेदारी दी जाती है.
इसके अलावा उन्हें ऑप्शन दिया जाता है कि वो संपत्ति बेचकर लोन का भुगतान करें. अगर ऐसे भी नहीं होता है तो बैंक लोन के एवज में रखी गई संपत्ति को नीलाम कर देता है और इससे लोन की बकाया राशि वसूल लेता है. इसके अलावा कई बैंक एक नया ऑप्शन काम में लेने लगे हैं. दरअसल, बैंक की ओर से लोन लेने वक्त ही एक इंश्योरेंस करवा दिया जाता है और अगर व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो बैंक इंश्योरेंस के माध्यम से इसे वसूल लेता है. इसलिए जब भी आप लोन लेते हैं तो आप बैंक से इस इंश्योरेंस के बारे में पूछ सकते हैं.
पर्सनल लोन
पर्सनल लोन सिक्योर्ड लोन नहीं होते हैं. ऐसे में पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड लोन की स्थिति में मृत्यु हो जाने के बाद बैंक किसी दूसरे व्यक्ति से पैसे नहीं वसूल सकते हैं. साथ ही उत्तराधिकारी की भी पर्सनल लोन को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं होती है. ऐसे में व्यक्ति की मृत्यु के साथ ही लोन भी खत्म हो जाता है.
वाहन लोन
व्हीकल लोन एक तरह से सिक्योर्ड लोन होता है. इस स्थिति में अगर व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो बैंक घर वालों को लोन का भुगतान करने के लिए कहता है. अगर वो लोन का भुगतान नहीं करता है तो बैंक व्हीकल को बेचकर लोन का पैसा वसूल कर लेते हैं.
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