जरा हटके खबर
अजब गजब: दुनिया का एक ऐसा शहर जहां इलेक्ट्रोनिक समान जैसे-टीवी, मोबाईल, स्मार्टफ़ोन, यहाँ तक की खिलौने पर है बैन, जाने क्यों ? पढ़े पूरी खबर…

आज का समय डिजिटल हो चुका है. हर एक काम के लिए लोग डिजिटल मीडिया पर निर्भर करने लगे हैं. टीवी रेडियो तो छोड़िये, आज के समय में इंसान के लिए सबसे जरुरी हो गया है स्मार्टफोन. इसके बिना एक मिनट भी काटना मुश्किल सा लगता है. ऐसे में अगर हम आपको बताएं कि दुनिया में एक ऐसा शहर है, जहां आप ना टीवी देख सकते हैं ना मोबाइल का इस्तेमाल कर सकते हैं तो? आपको लगेगा कि ये पक्का नॉर्थ कोरिया होगा, जहां के तानाशाह ने ऐसा फरमान सुनाया होगा. लेकिन आपको बता दें कि आप गलत हैं.
जिस शहर की हम बात कर रहे हैं, वो अमेरिका में मौजूद है.जी हां, अमेरिका के इस शहर में मोबाइल, टीवी और रेडियो तक बैन है. यहां इनका प्रयोग कोई नहीं कर सकता. अगर ऐसा करता कोई पकड़ा जाता है, तो उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है. लेकिन आप सोच रहे होंगे कि आखिर अमेरिका के इस शर में ऐसा क्यों हैं? जिस शहर की हम बात कर रहे हैं, वो है ग्रीन बैंक. अमेरिका के पश्चिम वर्जीनिया के पोकाहॉन्ट्स में ये शहर पड़ता है. यहां करीब 150 लोग रहते हैं. लेकिन किसी के पास टीवी और मोबाइल नहीं है. इसका ख़ास कारण है.एक टेलिस्कोप बना वजह
ग्रीन बैंक सिटी में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान रखना मना है. दरअसल, इस शहर में दुनिया का सबसे बड़ा स्टीयरेबल रेडियो टेलिस्कोप मौजूद है. इसे ग्रीन बैंक टेलिस्कोप के नाम से भी जाना जाता है. ये टेलिस्कोप काफी बड़ा है और परिवहन योग्य है. यानी इसे एक से दूसरे जगह तक ले जाया जा सकता है. जिस टेलिस्कोप की हम बात कर रहे हैं, वो इतना बड़ा है कि उसकी डिश में एक बड़ा सा फुटबॉल मैदान समा जाए. ये टेलिस्कोप 485 फ़ीट लंबा और 76 सौ मीट्रिक टन का है.इसलिए लगा है बैन
इस विशाल टेलिस्कोप को जहां लगाया गया है, वहां अमेरिका के राष्ट्रीय रेडियो खगोल विज्ञान की वेधशाला है. इसकी स्थापना 1958 में की गई थी. यहां से वैज्ञानिक उन तरंगों को स्टडी करते हैं जो अंतरिक्ष से पृथ्वी पर आती है. वैसे इस एरिया में कई टेलिस्कोप हैं जो ग्रेविटी से लेकर ब्लैक होल्स को स्टडी करते हैं. विशाल टेलिस्कोप के बारे में एक जरुरी फैक्ट ये है कि ये इतना बड़ा है कि अंतरिक्ष में 13 अरब लाइट ईयर दूर के सिग्नल को भी कैच कर लेता है. यहां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर बैन है. यहां टीवी, रेडियो, मोबाइल से लेकर आईपैड, वायरलेस हेडफोन, रिमोट कंट्रोल खिलौने और माइक्रोवेव भी बैन है. इसकी ख़ास वजह है. दरअसल, इन इलेक्टॉनिक उपकरणों से निकलने वाले वेव्स से अंतरिक्ष से आती तरंगों पर प्रभाव पड़ेगा और वैज्ञानिक इसे सटीकता से नहीं पकड़ पाएंगे. इसकी वजह से दूसरे इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स यहां बैन हैं.

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दुनिया की एक ऐसी झील जहां दफन है करोडो साल पुराना खजाना, जिसे निकालने की कोशिश करने से हो जाती है मौत…

आज तक आप सभी ने कई झीलों के बारे में सुना होगा लेकिन आज हम आपको जिस झील के बारे में बताने जा रहे हैं उसके बारे में जानने के बाद आपके होश उड़ जाएंगे। जी दरअसल आज हम जिस झील के बारे में बताने जा रहे हैं उसमे लाखों-करोड़ों का नहीं बल्कि अरबों रुपये का खजाना छिपा हुआ है। सुनकर आपको यकीन तो नहीं हो रहा होगा लेकिन यह सच है। जी दरअसल यह खजाना हिमाचल प्रदेश की एक झील में छिपा है। बताया जाता है ये झील मण्डी से करीब 60 किलोमीटर की दूर रोहांडा के घने जंगलों में स्थित है। जी हाँ और कमरुनाग के नाम से मशहूर इस झील में अरबों का खजाना छिपा हुआ है। केवल यही नहीं बल्कि इतना खजाना होने के बावजूद इस खजाने को किसी ने निकालने की हिम्मत नहीं की। अब आप पूछेंगे क्यों?
तो हम आपको बता दें कि इस झील के किनारे एक प्रसिद्ध मंदिर भी है। जी हाँ और इसी मंदिर के पास स्थित है कमरुनाग झील। जी दरअसल ऐसा कहा जाता है कि जो भी भक्त मंदिर में दर्शन करने आते हैं, वो इस झील में सोने-चांदी के गहने और रुपये-पैसे डालता है। इस झील में सोने-चांदी के गहनों और रुपये पैसे डालने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। जी हाँ और इसी परंपरा के आधार पर यह माना जाता है कि इस झील में अरबों का खजाना छिपा हुआ है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस झील में पड़ा खजाना देवताओं का है। जी हाँ और इसी मान्यता के मुताबिक इस झील की सुरक्षा में एक नाग लगा हुआ है। जो किसी को झील से खजाना नहीं निकालने देता।
कहते है कि जो भी इस खजाने को निकालने की कोशिश करता है नाग उसे पलभर में खत्म कर देता है। जी हाँ और इसी वजह से आज तक इस झील से किसी ने खजाना निकालने की कोशिश नहीं की। आपको बता दें कि इस झील में छिपे खजाने के बारे में ऐसा मान्यता है कि यह झील सीधे पाताल तक जाती है और इसीलिए कोई भी उस झील में उतरने की हिम्मत नहीं करता। कहा जाता है कि लोग यहां आकर मन्नत मांगते हैं और भगवान जब उनकी सभी इच्छाएं पूरी कर देते हैं तो वो दोबारा आकर यहां सोने-चांदी के आभूषण चढ़ाते हैं।
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OMG डॉक्टरो ने इस लड़की का कान निकालकर लगाया 3D कान, देख आप भी हो जायेंगे हैरान…

अमेरिका में मेडिकल साइंस ने एक नया कारनामा कर दिखाया है। जहां एक लड़की को 3D प्रिंटिंग के जरिए डॉक्टरों ने नया कान दिया है। लड़की का दाहिना कान टेढ़ा-मेढ़ा था। डॉक्टरों ने उसे निकालकर नया कान लगा दिया है। 3D प्रिंटिंग से कान प्रिंट कर लगाने का यह दुनिया का पहला मामला है।
डॉक्टरों ने यह सर्जरी मार्च में की थी। अब लड़की का कान उसके शरीर के साथ काम करने लगा है। जिसके बाद इस चमत्कार की घोषणा की गई है।
लड़की के सेल से कान प्रिंट कर उसी को लगाया
दुनिया भर में इससे पहले भी आर्टिफिशियल या किसी और के कान किसी दूसरे में लगाए जाते रहे हैं। लेकिन कान की 3D प्रिंटिंग का यह पहला मामला है। खास बात यह है कि कान के लिए सेल लड़की की बॉडी से ही लिए गए थे। ऐसे में शरीर के लिए कान को स्वीकार कर पाना ज्यादा आसान होता है। क्योंकि कई बार डोनर के कान को शरीर अपना नहीं पाता है।
बचपन से ही खराब था, अब मिला जादुई कान
अमेरिका की रहने वाली 20 साल की लड़की का कान बचपन से ही टेढ़ा-मेढ़ा था। कान से उसे कुछ सुनाई भी नहीं देता था। ऐसे में लड़की के घरवालों ने डॉक्टर से सम्पर्क किया।
न्यूयार्क की 3डीबायो थेराप्यूटिक्स नाम की कंपनी ने यह सफल ऑपरेशन किया है। लड़की का नया कान अभी सामान्य के मुकाबले थोड़ा छोटा है। लेकिन यह धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है और शरीर के साथ सामंजस्य बिठा रहा है।
यह है 3D बॉडी पार्ट का कॉन्सेप्ट
3D प्रिंटिंग अब एक सामान्य हो चुकी तकनीक है। जिसके सहारे किसी भी चीज की हूबहू नकल तैयार कर ली जाती है। ठीक वैसे जैसे 2D में पेज की प्रिंटिंग होती है। अब तक 3D प्रिंटिंग से मेटल और प्लास्टिक की चीजें ही तैयार की जाती रही हैं। लेकिन अब डॉक्टरों ने इससे मानव अंग प्रिंट करना शुरू कर दिया है। अगर यह तकनीक सफल रहती है तो आने वाले समय में दिव्यांगों को इससे काफी फायदा होगा। इस तकनीक में शरीर से कोशिका लेकर नया अंग बनाया जाता है।
कंपनी ने गुप्त रखी है तकनीक
3D प्रिंटेड कान लगाने वाली कंपनी ने अभी अपनी तकनीक को सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि कंपनी की ओर से यह भी बताया गया है कि उसने सभी मानदंडों का पालन किया है।
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अजीबो गरीब परंपरा: पूजा करने आये श्रद्धालुओं के सिर पर ही फोड़ देते है नारियल, जाने क्यों? यह की परंपरा देख आप हो जायंगे हैरान…

भारत त्योहारों का देश है. यहां हर धर्म, समुदाय के लोगों की अपनी मान्यताएं हैं और उनसे जुड़े अलग त्योहार हैं. हर त्योहार अपने में बेहद खास है और उनसे जुड़े रीति-रिवाज भी अनोखे होते हैं. मगर कई त्योहार ऐसे भी जिनकी मान्यताएं काफी हैरान करने वाली हैं क्योंकि इनमें इंसानों को कष्ट का सामना करना पड़ता है. ऐसा ही एक त्योहार तमिलनाडु में मनाया जाता है जिसमें लोगों के सिर पर ही नारियल फोड़ दिया जाता है.
मॉनसून के दौरान तमिलनाडु में आदि पेरुक्कू नाम का त्योहार मनाया जाता है जो पानी को समर्पित त्योहार है. लोग प्रकृति की पूजा करने के लिए ये त्योहार मनाते हैं. प्रत्येक तमिल परिवार अपने कल्याण, शांति और समृद्धि के लिए ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए ये त्योहार मनाता है. इस त्योहार से जुड़ी कई मान्यताएं हैं मगर इनमें से सबसे विचित्र है श्रद्धालुओं के सिर पर नारियल फोड़ने का खेल.
मंदिर में सिर पर फोड़ा जाता है नारियल
सिर पर नारियल फोड़ने का अर्थ है कि अपने अतीत की बेड़ियों को तोड़कर खुद को भगवान को समर्पित कर देना. वैसे तो ये श्रद्धालु पर निर्भर करता है कि वो इस मान्यता का पालन करना चाहते हैं या नहीं मगर हर साल तमिलनाडु के करूर स्थित महालक्षमी मंदिर में हजारों की भीड़ इस मान्यता का पालन करने के लिए तैयार रहती है. इस रिवाज के अनुसार लाइन में बैठे श्रद्धालुओं के सिर को एक पुरोहित पकड़ते हैं और दूसरे उसके सिर पर ही नारियल फोड़ देते हैं. इसके बाद कई श्रद्धालुओं के सिर पर चोट भी लग जाती है जिस वजह से उन्हें डॉक्टर के पास जाना पड़ता है और कुछ को तो टांके भी लग जाते हैं. मगर कई लोग डॉक्टर के पास जाना पसंद नहीं करते क्योंकि उनको लगता है कि फिर उन्हें भगवान का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होगा. मंदिर में ही कई सहायक मौजूद रहते हैं जो लोगों की चोट पर हल्दी लगा देते हैं या फिर विभूति लगा देते हैं जिससे घाव भर जाता है.
मान्यता के पीछे क्या है कारण?
अब सवाल ये उठता है कि ऐसी मान्यता के पीछे क्या कारण है. दो कहानियां इस रिवाज के लिए प्रचलित हैं. एक काफी पुरानी कहानी के अनुसार हजारों सालों पहले इस जगह पर श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते थे. मगर उनकी पूजा से भी भगवान उनके सामने प्रकट नहीं होते थे. तब उन्होंने ध्यान दिया कि नारियल पर भी तीन आंखें हैं जैसे भगवान शिव की होती हैं. ऐसे में उन्होंने भगवान को खुश करने के लिए अपने सिर पर ही नारियल तोड़कर उनकी आराधना करना शुरू की. भगवान उनके तप से प्रसन्न हुए और तब उन्होंने प्रकट होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया.
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