यूपी
यूपी में छह महीने के लिए हड़ताल पर प्रतिबंध, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

योगी सरकार के इस फैसले के बाद लोक सेवाएं, प्राधिकरण, निगम समेत सभी सरकार विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों की ओर से समय-समय पर होने वाली हड़ताल पर रोक लगा दी गई थी. अधिनयिम 1966 के तहत यूपी सरकार की ओर से लागू किए गए एस्मा एक्ट को राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाता है. एम्सा एक्ट प्रदर्शन और हड़ताल करने वालों के लिए बनाया है
एम्सा एक्ट प्रदर्शन और हड़ताल करने वालों के लिए बनाया है.इसके लागू होने के बाद प्रदेश में कहीं भी प्रदर्शन या हड़ताल पूरी तरह बैन कर दिए जाते हैं. इस एक्ट को पिछले साल यूपी सरकार ने लागू किया था, जिसे नवंबर पिछले साल ही नवंबर में छह महीने के लिए आगे बढ़ाया गया था. एस्मा एक्ट लगने के बाद भी अगर कोई कर्मचारी हड़ताल या प्रदर्शन करते पाया जाता है तो हड़ताल करने वालों को एक्ट का उल्लंघन के आरोप सरकार की ओर से बिना वारंट के गिरफ्तार करके कानूनी कार्रवाई की जाती है.

यूपी
बाराबंकी में पानी गर्म करने को लेकर पत्नी के साथ हुआ झगड़ा, शादी के 16 साल बाद पति ने दिया तलाक; केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में अजीबोगरीब मामला सामने आया है. जहां पर पानी गर्म करने को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद पैदा हो गया. इस दौरान पति ने अपनी पत्नी को तीन बार तलाक-तलाक बोलकर तलाक दे दिया. बताया जा रहा है कि दोनों के ही निकाह को 16 साल हो गए है. इसके अलावा उनके 5 बच्चे भी है. हालांकि परिजनों ने तीन तलाक को लेकर भी समझाया कि यह गैर कानूनी हैं, वहीं, तीन तलाक के खिलाफ बने कानून के बावजूद भी यह मामले रुकने का नाम नहीं ले रहें हैं. फिलहाल पुलिस ने पीड़ित पत्नी की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली है.
दरअसल, ये मामला बाराबंकी जिले में जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के सदरुद्दीनपुर गांव का है. पुलिस अधिकारी के मुताबिक पति और पत्नि के बीच किसी मामूली सी बात को लेकर झगड़ा हो गया. जिसमें एक शख्स ने अपनी पत्नी को निकाह के 16 साल बाद मामूली बात पर तीन तलाक दे दिया. वहीं, पीड़िता अपने भाई के साथ शिकायत लेकर थाने में पहुंची. जिसके बाद पीड़िता ने अपनी आपबीती पुलिस अधिकारियों के सुनाई और पति पर तलाक देकर रिश्ता तोड़ने का आरोप लगाया है. फिलहाल पुलिस में पीड़िता की तहरीर के आधार पर मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है.
यूपी
सपा नेता राजीव राय बोले- 16 घंटे तक परिवार को बनाया बंधक, IT रेड में मिला 17 हजार कैश,पूरे मोबाइल का डाटा खंगाला

सपा के राष्ट्रीय सचिव राजीव राय ने कहा कि आज से पहले मुझे कोई नोटिस नहीं मिला था. ना ही कोई पूछताछ हुई थी. मेरा हर साल इनकम टैक्स फाइल होता है, कभी कुछ मिला है न ही बड़ी रकम मिली. उन्होंने कहा कि विभाग की टीम मेरा फोन, जीमेल की आईडी-पासवर्ड, पासबुक ले गई है. बता दें कि शनिवार को आयकर विभाग की टीम ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मैनपुरी और मऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबियों और सपा नेताओं के घर और कार्यालयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। आयकर विभाग की टीम ने मऊ में सपा के राष्ट्रीय सचिव और प्रवक्ता राजीव राय के घर 16 घंटे तक छानबीन की, लेकिन टीम को उनके घर से महज 17 हजार रुपये ही मिले।
सपा नेता राजीव राय ने आरोप लगाते हुए कहा कि, पूरे परिवार सहित रिश्तेदारों को बंधक बनाकर रखा गया. रेड के दौरान 17 हजार कैश और पूरे मोबाइल का डाटा खंगाला गया. उन्होंने कहा कि हम रेड से डरने और घबराने वाला नहीं है. राय ने कहा, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ बुलाया है. छापेमारी से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि दीया बुझने से पहले फड़फड़ाता है।
इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों के जाने के बाद सपा नेता राजीव राय लगभग 16 घंटे बाद अपने घर से बाहर निकले. उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि मैं भावुक और अभिभूत हूं, क्योंकि आप सभी इस संकट की घड़ी में सुबह से हुए हैं. राजीव राय ने कहा कि न तो मुझ पर कोई आपराधिक रिकॉर्ड था न आगे होगा. कार्रवाई के बाद राजीव राय ने कहा कि जो काम दो घंटे में हो जाता है, उसके लिए 16 घंटे लिए गए. इतना ही नहीं मेरे मां-बाप परिवार और रिश्तेदारों को सुबह से बंधक बनाकर रखा गया।
मेरी चार से पांच जगहों पर छापे पड़े हैं.सपा के राष्ट्रीय सचिव राजीव राय ने कहा कि आज से पहले मुझे कोई नोटिस नहीं मिला था. ना ही कोई पूछताछ हुई थी. मेरा हर साल इनकम टैक्स फाइल होता है, कभी कुछ मिला है न ही बड़ी रकम मिली. उन्होंने कहा कि विभाग की टीम मेरा फोन, जीमेल की आईडी-पासवर्ड, पासबुक ले गई है. बता दें कि शनिवार को आयकर विभाग की टीम ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मैनपुरी और मऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबियों और सपा नेताओं के घर और कार्यालयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी।
यूपी
लखीमपुर: SIT ने किया खुलासा, साजिश के तहत हुई किसानों की हत्या, आरोपियों के खिलाफ बढ़ाई गई धाराएं

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुई हिंसा के मामले में एसआईटी ने बड़ा खुलासा किया है. एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट के मुताबिक, लखीमपुर हिंसा सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी, ये कोई दुर्घटना नहीं थी. ये हत्या की सोची-समझी साजिश से जुड़ा मामला है. बता दें कि अब लखीमपुर हिंसा केस में दुर्घटना की धारा हटाकर अन्य धाराएं लगाई गई हैं. आईपीसी की धाराएं 120बी, 307, 34 और 326 बढ़ाई गई हैं. 3 अक्टूबर को लखीमपुर के तिकुनिया में हिंसा में 8 लोगों की मौत हुई थी.
लखीमपुर हिंसा पर गृह राज्य मंत्री ने किया था ये दावा
जान लें कि लखीमपुर हिंसा में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र आरोपी हैं, वो इस वक्त जेल में बंद हैं. पुलिस ने पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. वहीं दूसरी तरफ अजय मिश्र टेनी ने दावा किया था कि उनका बेटा आशीष मिश्र वारदात के वक्त मौके पर मौजूद नहीं था. घटनास्थल से दूर था.
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