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युद्ध का आज 12वां दिन : रूस ने यूक्रेन के खार्किव शहर में रिहाइशी इमारतों को बनाया निशाना,आम लोगों की जा रही है,जान…

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का आज 12वां दिन है। 24 फरवरी को शुरू हुई इस जंग में अब यूक्रेन के आम लोगों की जान भी जा रही है। इसके चलते इन 12 दिनों में सदी का सबसे बड़ा पलायन भी दिखा।इधर, रूस ने यूक्रेन के खार्किव शहर में रिहाइशी इमारतों को निशाना बनाया है। हालांकि, लोगों को पहले ही बंकरों समेत सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी जा चुकी थी, लेकिन अब भी वहां कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। इधर, यूक्रेन ने कई रूसी टैंकों को तबाह करने का दावा किया है। युद्ध की इस त्रासदी को आप इस तस्वीर में देख सकते हैं।
मैं कीव के बाहरी इलाके में इर्पिन नदी के पुल के पास मौजूद थी। यह ब्रिज यूक्रेन ने उड़ा दिया था, ताकि रूसी सेना को आगे बढ़ने से रोका जा सके। रविवार को शहर के कई नागरिक इस टूटे पुल को पार करके सुरक्षित जगहों पर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। इनमें एक परिवार भी था, जिसमें एक महिला, उसके दो बच्चे और एक पुरुष था। ये लोग अपने बैगेज के साथ आगे बढ़े ही थे, तभी वहां जोरदार धमाका हुआ। कॉन्क्रीट के बड़े ब्लॉक्स हवा में उछल गए। चारों तरफ धूल का गुबार उठा। जब धूल छंटी, तो लोग भागते नजर आए, लेकिन वह परिवार कहीं दिखाई नहीं दिया। मां और बच्चे के शव सड़क पर गिरे हुए थे। पुरुष गंभीर रूप से घायल था। यूक्रेन के सैनिक उसे बचाने की कोशिश कर रहे थे।
जेलेंस्की की अपील पर अमेरिका और NATO ने रविवार को यूक्रेन को 17 हजार एंटी टैंक मिसाइलें और दूसरे हथियारों की खेप भेजी है।रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यूक्रेन की मदद करने वाले देशों को धमकी दी है कि ऐसा करके वे रूस के साथ जंग को दावत दे रहे हैं।रूसी सेनाओं ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर दो तरफ से हमला बोल दिया है। पूर्व की तरफ से रूसी सेनाएं कीव में दाखिल होने के लिए आगे बढ़ रही हैं। वहीं, पश्चिम की तरफ से रूस के सैनिक आम लोगों को निशाना बना रहे हैं।यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की ने रविवार को कहा कि रूस ने यूक्रेन की डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़े संस्थानों पर हमले का ऐलान किया है। इनमें से अधिकतर शहरों के बीच हैं, जहां चारों तरफ आम नागरिक रहते हैं।
ऐसे में रूसी हमला सीधे तौर पर नागरिकों का मर्डर है।जेलेंस्की ने रूसी हमले झेल रहे खार्किव, चेर्निहाइव, मारियुपोल, खेरसॉन, होस्टोमेल और वोल्नोवाखा शहरों को सोवियत परंपरा के अनुसार हीरो सिटी की उपाधि दी है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ के 12 शहरों को यह खिताब दिया गया था।रूस और यूक्रेन के बीच पोलैंड में शांति समझौते पर तीसरे दौर की बातचीत हो सकती है।पुतिन की सेना 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला करती है और महज 12 घंटे बाद यूक्रेन में घुसकर चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट पर कब्जा कर लेती है।
आपने सुना ही होगा, देख भी लिया होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि चेर्नोबिल हादसे के बाद उस प्लांट को ढंका कैसे गया था?रूस ने यूक्रेन के पूर्वी शहरों को बमों से पाट दिया है। प्रेसिडेंट जेलेंस्की आम लोगों से बंदूकें उठाने की अपील कर रहे हैं। अमेरिकी एक्सपर्ट कहते हैं कि जेलेंस्की को फिनलैंड जैसे छोटे से देश से सीखना चाहिए था, जिसने 80 साल पहले आम नागरिकों के दम पर तीन महीने तक सोवियत आर्मी से टक्कर ली थी। यूक्रेन की तैयारी की यह खास खबर यहां पढ़े..जंग के बीच पुतिन ने परमाणु हमले की भी धमकी दी है। ऐसे में दो शब्द बेहद चर्चा में हैं।
पहला- न्यूक्लियर बम और दूसरा न्यूक्लियर ट्रायड। रूस के लिए इसके क्या मायने हैं? आइए भारत-पाकिस्तान के उदाहरण से समझते हैं कि न्यूक्लियर ट्रायड क्या होता है?यूक्रेन के उत्तर पूर्व में स्थित शहर सुमी से आ रही हैं, जहां करीब 800 इंडियन स्टूडेंट्स फंसे हैं। उनके पास न खाना बचा है और न पानी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि रूसी हमले की आशंका के बावजूद क्या यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने में देरी की गई? भारत की तैयारी पर इंडेप्थ रिपोर्ट यहां पढ़े..
यूक्रेन पर हमले के बाद रूस पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने कई पाबंदियां लगा दी हैं।
रूस पर पाबंदी से भारत को T-90 टैंक और चक्र-3 परमाणु पनडुब्बी से लेकर S-400 एयर डिफेंस सिस्टम मिलने में मुश्किल होगी। देखा जाए तो इससे सबसे ज्यादा खुशी चीन और पाकिस्तान को होगी। वजह जानने के लिए यह खबर पढ़िए..मैप से समझिए यूक्रेन में कहां तक पहुंची रूसी सेना24 फरवरी से जारी इस जंग में रूसी सेना अब तक यूक्रेन की राजधानी कीव पर तो काबिज नहीं हो पाई है, लेकिन उसने यूक्रेन के सीमावर्ती इलाकों पर कब्जा कर लिया है। रूस किन शहरों से होकर कीव को घेर रहा है, इसे नीचे दिए मैप से समझिए..
युद्ध में किसी ने बच्चे खोए, तो किसी के सिर से उठा पिता का साया
रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग ने आम लोगों की जिंदगी दुश्वार कर दी है। पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग या बच्चे.. कोई भी मिसाइलों के हमलों और सेना की गोलीबारी के बीच महफूज नहीं है।

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कर्मचारियों को बड़ा तोहफा : लंबे समय से मांग के बाद अब मिलेगी,सरकारी कर्मचारी को पुरानी पेंशन स्कीम का फायदा..

सरकार ने होली से पहले कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है. कर्मचारियों को अब फिर से पुरानी पेंशन स्कीम का फायदा मिलेगा. सरकारी कर्मचारी लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे. नई स्कीम में कर्मचारियों को बहुत कम फायदे मिलते थे.
सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. होली से पहले सरकार ने कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है. सरकार ने पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर बड़ा एलान किया है. सरकार ने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की घोषणा है.
सरकार ने किया ऐलान
दरअसल, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने बजट पेश करने के दौरान राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की घोषणा है. इसके अलावा सीएम ने न्याय एवं आर्थिक सुरक्षा दिलाने राजीव गांधी ग्रामीण कृषि भूमिहीन मजदूर न्याय योजना में आगामी वर्ष से वार्षिक सहायता राशि 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 7 रुपये करने की घोषणा की है.
सीएम ने इस बजट में कई बड़े ऐलान किए. मुख्यमंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा कि गौठानों को महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित किया जायेगा. इन औद्योगिक पार्कों में इंफ्रास्ट्रक्चर एवं बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु 600 करोड़ का बजट प्रावधान है.
केंद्र सरकार भी कर सकती है ऐलान
इसी के साथ केंद्र सरकार भी जल्दी ही पुरानी पेंशन योजना को लागू करने कई घोषणा कर सकती है. केंद्रीय कर्मचारियों को जल्द ही पुरानी पेंशन योजना का फायदा मिल सकता है. कर्मचारियों ने लंबे समय से सरकार के सामने यह डिमांड रखी है.
केंद्र सरकार कर्मचारियों की डिमांड पर अब विचार कर रही है. केंद्र ने इसके लिए (ओल्ड पेंशन स्कीम) कानून मंत्रालय से राय भी मांगी है. अब मंत्रालय से जवाब मिलने का इंतजार है.
पुरानी पेंशन योजना देने पर मंथन
दरअसल, केंद्र सरकार कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना देने पर मंथन कर रही है. जिस सरकारी कर्मचारियों की भर्ती के लिए विज्ञापन 31 दिसंबर 2003 को या उससे पहले जारी किए गए थे, उन्हें ये फायदा मिलेगा. कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, इस मुद्दे पर फैसला कानून मंत्रालय के जवाब आने के बाद होगा.
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होली गिफ्ट : कर्मचारियों को मिल सकती है होली से पहली ये बड़ी गिफ्ट,आज होगी बड़ी घोषणा..

ट्रस्टी की इस बैठक में ब्याज दर पर जो फैसला लिया जाएगा उसे मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाता है।EPFO: यदि आप भी नौकरी पेशा हैं और आपकी कंपनी कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) का पैसा काटती है, तो आपको जल्द ही होली पर आपको तोहफा मिल सकता है। दरअसल आज से EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक गुवाहाटी में शुरू हुई है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा पेंशन की न्यूनतम राशि को बढ़ाना और पीएफ पर मिलने वाले ब्याज की दरों पर फैसला लेना है।
इसमें 2021-22 के लिए प्रॉविडेंट फंड डिपॉजिट्स पर ब्याज दर को फाइनल किया जाएगा। ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2020-21 और इससे पिछले वित्त वर्ष में 8.5 फीसदी ब्याज दिया था।ट्रस्टी की इस बैठक में ब्याज दर पर जो फैसला लिया जाएगा उसे मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाता है। मार्च, 2020 में ईपीएफओ ने पीएफ जमा पर ब्याज दर को घटाकर 2019-20 के लिए 8.5 प्रतिशत कर दिया था जो इसका सात साल का न्यूनतम स्तर है।
2018-19 में ब्याज— 8.65 प्रतिशत
2017-18 में ब्याज— 8.65 प्रतिशत
2016-17 में ब्याज— 8.65 प्रतिशत
2015-16 में ब्याज— 8.80 प्रतिशत
2014-15 में ब्याज— 8.75 प्रतिशत
2013-14 में ब्याज— 8.75 प्रतिशत
घटेंगी, बढ़ेंगी या स्थिर रहेंगी ब्याज दरें?
प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रस्टी बोर्ड के कुछ मेंबर पीएफ पर ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में है। लेकिन मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए सीबीटी चालू वित्त वर्ष में ब्याज दरों में कमी या इसे स्थिर रखने का फैसला रख सकता है। सूत्रों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई है। इससे कमाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए पीएफ की ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सकता है। लेकिन इसमें कटौती की भी संभावना है।
100 करोड़ के फंड का कोई दावेदार नहीं
हाल ही मीडिया में खबर आई थी कि ईपीएफओ के पास पड़ी बिना दावे वाली राशि से 100 करोड़ रुपये वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष में ट्रांसफर करने के लिए भी प्रस्ताव पेश किया जाएगा। वित्त मंत्रालय की ओर से 2015 में जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, ईपीएफ, पीपीएफ और अन्य बचत योजनाओं में पड़ी बिना दावों की रकम को सात साल बाद वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष में ट्रांसफर कर दिया जाए।
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यहाँ बढ़ी पेट्रोल 50 रुपये और डीजल 75 रुपये, IOC Lanka एक साथ की कीमत में इज़ाफा,पहुची आसमान पर..

बढ़े हुए दाम शुक्रवार से प्रभाव में आएंगे। एक महीने में यह तीसरी बार है जब कंपनी ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच चुकी हैं।
क्रूड 140 डॉलर का स्तर छू रहा है। ऐसे में भारत में हर कोई महंगे पेट्रोल डीजल के अंदेशे के बीच जी रहा है। लेकिन भारत के पड़ोसी देश श्री लंका में महंगाई का भीषण विस्फोट हुआ है। यहां एक बार में पेट्रोल 50 रुपये महंगा हो गया है।
वहीं डीजल की कीमतें भी 75 रुपये बढ़ा दी गई हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की श्रीलंका स्थित अनुषंगी ने श्रीलंकाई रुपये के बहुत अधिक अवमूल्यन के कारण पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ा दी हैं।
बढ़े हुए दाम शुक्रवार से प्रभाव में आएंगे। एक महीने में यह तीसरी बार है जब कंपनी ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं।
254 रुपये का हुआ पेट्रोल
लंका इंडियन ऑयल कंपनी (एलआईओसी) ने कहा कि डीजल की खुदरा कीमत 75 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की 50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई है। अब यहां पेट्रोल के दाम 254 रुपये प्रति लीटर और डीजल के 214 रुपये प्रति लीटर है।
एलआईओसी के प्रबंध निदेशक मनोज गुप्ता ने कहा, ‘‘सात दिन के भीतर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपये में 57 रुपये की गिरावट आई है। तेल और गैसोलिन उत्पादों की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध लगा रहे हैं इसके कारण भी तेल और गैस के दाम बढ़ रहे हैं।’’
भारी घाटे में कंपनियां
एलआईओसी को श्रीलंका सरकार से कोई सब्सिडी नहीं मिलती है। गुप्ता ने कहा, ‘‘तेल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंची कीमतों के कारण हमें अभी बहुत घाटा उठाना पड़ रहा है, ऐसे में कीमतें बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। दाम बढ़ाने के बावजूद भारी घाटा वहन करना होगा।
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