18 माह की बच्ची के बाल आइंस्टीन-बोरिस जॉनसन जैसे, इतने सुनहरे लंबे बाल की कंघी नही होती देखे विडियो…

ब्रिटेन में एक छोटी सी बच्ची की तुलना अलबर्ट आइंस्टीन और बोरिस जॉनसन से की जा रही है। हैरत की बात यह है कि वह बच्ची दिमाग से बहुत तेज होने की वजह से नहीं बल्कि अपने सिर के बालों के कारण सुर्खियों में आई है। महज डेढ़ साल की छोटी उम्र में लाइला डेविस के सिर के बाल घने, सुनहरे सफेद हैं जिनमें कंघा तक नहीं किया जा सकता है। बता दें कि लाइला अपने जन्म से ही अनकॉम्बेबल हेयर सिंड्रोम से पीड़ित है।
वह दुनिया के करीब उन 100 लोगों में से एक है, जिनके बाल असामान्य रूप से बढ़ते हैं और खोपड़ी में अनियंत्रित तरीके से उनकी ग्रोथ होती है और वे हमेशा खड़े ही रहते हैं। लाइला डेविस अपने परिवार के साथ ग्रेट ब्लेकनहम में रहती है। उसके पिता केविन और मां चारलोट्टी हैं जिन्होंने हाल ही में अपनी बेटी का औपचारिक इलाज कराया है।
क्या है अनकॉम्बेबल हेयर सिंड्रोम
अनकॉम्बेबल हेयर सिंड्रोम की पहली बार पहचान 1973 में की गई थी। अमेरिका के जेनेटिक एंड रेयर डिजीज इन्फॉर्मेशन सेंटर (GARD) के मुताबिक यह एक दुर्लभ डिसऑर्डर है जो इंसान की खोपड़ी पर उगने वाले बालों से संबंधित है। आमतौर पर इस तरह के बालों को स्ट्रा-कलर्ड हेयर या फिर सिल्वरी-ब्लोंड कहा जाता है। इनमें कंघा निकालना बहुत मुश्किल होता है। इस तरह के सिंड्रोम की वजह जेनेटिक बदलाव है जो कि PADI3, TGM3, और TCHH जीन में परिवर्तन से होता है।
बता दें कि इस बीमारी का अभी दुनिया में कहीं भी कोई इलाज नहीं है। इस बीमारी में बच्चे के सिर पर शुरुआत में स्ट्रॉबेरी के रंग का चकत्ता दिखने लगता है। उसके बाद बाल सीधे बाहर की ओर बढ़ने लगते हैं और हमेशा खड़े ही दिखाई पड़ते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 5 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भी ऐसे सिंड्रोम से पीड़ित बच्ची सुर्खियों में आई थी। शिलाह यिन नाम की इस बच्ची के सिर के बाल सुनहरे, घने और इतने ज्यादा उलझे रहते थे कि उसके माता पिता को घंटों मशक्कत करनी पड़ती थी। उस समय इस बच्ची की उम्र महज 7 साल थी।
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Sukanya Samriddhi Yojana : बदल गए सुकन्या समृद्धि योजना के ये 5 नियन,जानिए बदलाव

सुकन्या समृद्धि में एक परिवार में दो बेटियों के लिए ही खाता खुलवा सकते हैं. अभी तक यही नियम था. लेकिन इसमें बड़ा बदलाव किया गया है. एक बेटी के बाद दो जुड़वा बेटी हो जाती है तो उन सभी के लिए खाता खुल सकता है.बेटियों के लिए चलाई जाने वाली सुकन्या समृद्धि योजना में कुछ बदलाव किए गए हैं. इन बदलावों का असर खाताधारकों पर दिखेगा. इसलिए, इन सभी बदलावों को जान लेना चाहिए. पुराने खाताधारक के साथ जो लो नया खाता खोलना चाहते हैं, उनके लिए इसे जानना जरूरी हो जाता है. एक बड़ा बदलाव डिफॉल्ट खाते को लेकर किया गया है. पहले सुकन्या समृद्धि का कोई खाता अगर डिफॉल्ट हो जाता था, तो सरकार उस पर पूरा ब्याज नहीं देती थी. अब यह नियम बदल दिया गया है और खाते में जो राशि जमा रहेगी, उस पर पूरा ब्याज मिलेगा. यानी कि सुकन्या समृद्धि का खाता डिफॉल्ट होने के बावजूद खाते की ब्याज दर में बदलाव नहीं होगा. इसका फायदा ग्राहक को खाते पर दिखेगा और पूरा ब्याज मिलेगा.डिफॉल्ट खाते का नया नियम यह हो गया है कि पहले उस पर 4 परसेंट का ब्याज मिलता था. लेकिन अब डिफॉल्ट होने के बाद भी मौजूदा रेट यानी कि 7.6 फीसद की दर से ब्याज मिलता रहेगा. इस तरह ग्राहकों को डिफॉल्ट खाते पर भी अब पूरा ब्याज मिलेगा, उसमें कोई कटौती नहीं की जाएगी. दूसरा बड़ा बदलाव खाता ऑपरेट करने को लेकर है. पहले नियम था कि बच्ची जब 10 साल की हो जाती थी तब वह खुद अपना सुकन्या खाता ऑपरेट कर सकती थी. अब इस उम्र को बढ़ाकर 18 साल कर दिया है. 18 साल होने तक बीटिया के खाते को उसके अभिभावक ऑपरेट कर सकते हैं.
तीन बेटियों के लिए खाता, खुलवा सकते हैं
सुकन्या समृद्धि में एक परिवार में दो बेटियों के लिए ही खाता खुलवा सकते हैं. अभी तक यही नियम था. लेकिन इसमें बड़ा बदलाव किया गया है. एक बेटी के बाद दो जुड़वा बेटी हो जाती है तो उन सभी के लिए खाता खुल सकता है. यानी एक पहले और बाद में दो जुड़वा के नाम एक परिवार में तीन खाते खुलवाए जा सकते हैं. अगर शुरू में ही किसी को जुड़वा बेटी हो और बाद में एक और बेटी हो जाए, तो तीनों बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि खाता नहीं खुलवा सकते. नए नियम के मुताबिक बाद में हुई बेटी का अकाउंट सुकन्या समृद्धि योजना में नहीं खुलवा सकते हैं.
आसानी से ट्रांसफर हो सकेगा खाते का पैसा
सुकन्या समृद्धि के खाते को बच्ची के माता-पिता या अभिभावक अब देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में ट्रांसफ कर सकेंगे. एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे पोस्ट ऑफिस में इस खाते को आसानी से ट्रांसफर किया जा सकेगा. इससे माता-पिता या अभिभावक को सुविधा होगी जो ट्रांसफर या पोस्टिंग के चलते एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं. पोस्ट ऑफिस में सुकन्या समृद्धि योजना का खाता खुला है तो उसमें खाताधारक का नाम आसानी से बदलवाया जा सकता है. बेटी का नाम अपडेट करने के लिए कुछ कागजात जमा कराने होंगे।
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खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट,जानें कितना रुपये गिरे दाम

Edible Oil Price: बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। विदेशी बाजारों में खाने के तेलों के भाव टूटने के चलते देश भर में खाने का तेल सस्ता हुआ है। शुक्रवार को सरकार ने सीपीओ के आयात शुल्क मूल्य में 100 रुपये क्विंटल की कमी की। विदेशी बाजारों में खाद्य तेलों के भाव टूटने के बीच देशभर के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई।
वहीं मूंगफली और कच्चे पामतेल (सीपीओ) के भाव में सुधार देखने को मिला। बाकी तेल-तिलहनों के भाव अपरिवर्तित रहे। बाजार सूत्रों ने बताया कि विदेशों में खाद्य तेलों का बाजार काफी टूटा है जो गिरावट का मुख्य कारण है। इस गिरावट की वजह से देश में आयातकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि उन्होंने जिस भाव पर सौदे खरीदे थे अब उसे कम भाव पर बेचना पड़ रहा है।उन्होंने जिस सीपीओ का आयात 2,040 डॉलर प्रति टन के भाव पर किया था उसकी अगस्त खेप का मौजूदा भाव घटकर लगभग 1,000 डॉलर प्रति टन रह गया है। यानी थोक में सीपीओ (सारे खर्च व शुल्क सहित) 86.50 रुपये किलो होगा।
उल्लेखनीय है कि लाखों टन सीपीओ तेल आयात होने की प्रक्रिया में हैं। दूसरी ओर सरसों का इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य लगभग 5,050 रुपये क्विंटल था, जो अगली बिजाई के समय 200-300 रुपये क्विंटल के बीच बढ़ने का अनुमान है। उस हिसाब से सरसों तेल का थोक भाव आगामी फसल के बाद लगभग 125-130 रुपये किलो रहने का अनुमान है। अब जब बाजार में सीपीओ तेल लगभग 86.50 रुपये किलो होगा तो 125-130 रुपये में सरसों की खपत कहां होगी सूत्रों ने कहा कि तेल-तिलहन में आत्मनिर्भर होने के बजाय देश आयात पर ही निर्भर होता दिख रहा है। देश के प्रमुख तेल-तिलहन संगठनों को सरकार से खाद्य तेलों का शुल्क-मुक्त आयात करने की मांग करने के बजाय उचित सलाह देकर तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने और आत्मनिर्भरता पाने की ओर प्रेरित करना चाहिये। उनकी यह जिम्मेदारी भी बनती है कि वे समय समय पर सरकार को बतायें कि कौन सा फैसला देश के तिलहन उत्पादकों के हित में है और कौन उसके नुकसान में है।
खाने के तेल के दाम, इन वजहों से गिर रहे हैं
शुक्रवार को सरकार ने सीपीओ के आयात शुल्क मूल्य में 100 रुपये क्विंटल की कमी की जबकि सोयाबीन डीगम का आयात शुल्क मूल्य 50 रुपये प्रति क्विंटल और पामोलीन तेल का आयात शुल्क मूल्य 200 रुपये प्रति क्विंटल कम किया है। सूत्रों ने कहा कि एक तरफ आयात शुल्क मूल्य घटाया जा रहा है, वहीं विदेशों में तेल-तिलहन का बाजार टूट रहा है। सूत्रों ने कहा कि यह सारी स्थितियां देश को पूरी तरह आयात पर निर्भरता की ओर ले जा सकती हैं। सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन में आई गिरावट के कारण पामोलीन तेल के भाव भी टूट गये। सीपीओ के कारोबार में सिर्फ भाव ही है कोई सौदे नहीं हो रहे क्योंकि आयातकों के खरीद भाव के मुकाबले दाम आधे से भी कम चल रहे हैं।उन्होंने कहा कि नमकीन बनाने वाली कंपनियों और गुजरात में बिनौला कारोबार के लगभग समाप्त होने के बाद मूंगफली की मांग है जिससे मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में समीक्षाधीन सप्ताह में सुधार आया। विदेशों में भाव टूटने से सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। बिनौला तेल का भाव पिछले सप्ताहांत के स्तर पर पूर्ववत रहा। हालांकि, इसमें कारोबार लगभग समाप्त हो गया है।
सूत्रों ने कहा कि आयातक और तेल उद्योग पहले से भारी नुकसान के रास्ते पर हैं। ऐसे में सरकार को अपना हर कदम फूंक-फूंक के उठाना होगा। पिछले दिनों सरकार के निर्देश और खुदरा तेल कारोबारियों के आश्वासन के बावजूद अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कितनी कमी हुई है? इस बारे में सरकार को कोई ठोस कदम उठाना चाहिये क्योंकि वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को अभी नहीं मिल पा रहा है।
सरसों दाने का भाव 125 रुपये गिरा
सूत्रों ने बताया कि पिछले सप्ताहांत के मुकाबले बीते सप्ताह सरसों दाने का भाव 125 रुपये की गिरावट के साथ 7,170-7,220 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों दादरी तेल समीक्षाधीन सप्ताहांत में 250 रुपये की गिरावट के साथ 14,400 रुपये क्विंटल पर बंद हुआ। वहीं सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी तेल की कीमतें भी क्रमश: 35-35 रुपये घटकर क्रमश: 2,280-2,360 रुपये और 2,320-2,425 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुईं।सूत्रों ने कहा कि वैश्विक बाजरों में आई भारी गिरावट के मद्देनजर समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और लूज के थोक भाव क्रमश: 75 रुपये और 25 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 6,275-6,325 रुपये और 6,025-6,075 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
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Solar Cooking Stove: अब गैस के टेंशन से हो जाइये फ्री, आ गई है ये सोलर चूल्हा, मिल सकती है सब्सिडी, जल्द देखे इसकी कीमत…

Solar Cooking Stove: आज के समय में अगर हमें खाना बनाना है, तो गैस का बटन ऑन करना है और फिर आप अपना पसंदीदा खाना बनाकर खा सकते हैं। वहीं, बाजार में कई तरह की इलेक्ट्रॉनिक चीजें जैसे- ओवन, इंडक्शन चूल्हा आदि मौजूद हैं। लेकिन लोगों की निर्भरता ज्यादा गैस के चूल्हे पर ही है। हालांकि, उस समय को नहीं भूला जा सकता, जब लोग लकड़ियों के चूल्हे पर खाना बनाते थे। पर अब गैस के चूल्हे से सब आसान सा हो गया है, लेकिन एक दिक्कत है गैस सिलेंडर को बार-बार भरवाने की। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि गैस सिलेंडर के बढ़ते दाम भी लोगों को खासा परेशान करते हैं। अगर आप भी इन सब दिक्कतों के कारण परेशान हैं, तो हम आपको सोलर चूल्हे के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आप गैस के सिलेंडर को पूरी तरह भूल सकते हैं। तो चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं। आप अगली स्लाइड्स में इसके बारे में जान सकते हैं…
चूल्हे के बारे में जान लीजिए
बात अगर इस सोलर चूल्हे की करें, तो सरकार की तरफ से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने इस सोलर चूल्हे को लॉन्च किया है, जो सौर ऊर्जा से चलेगा यानी इसके लिए गैस नहीं बल्कि सूरज की किरणें चाहिए जिससे ये चार्ज होगा। दरअसल, इस चूल्हे का नाम ‘नूतन चूल्हा’ रखा गया है और सबसे खास बात ये कि ये रिचार्जेबल है। अपने दिल्ली स्थित आवास पर ऑयल मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने इसे लॉन्च किया था, और इस दौरान इसी चूल्हे पर तीन टाइम का खाना पकाया और परोसा भी गया। इस चूल्हे की लाइफ 10 साल बताई गई है।
ये है काम करने का तरीका
आपको इस सोलर चूल्हे को अपने किचन में रखना है। ये चूल्हा एक केबल तार के जरिए सोलर प्लेट से जुड़ा हुआ है और ये सोलर प्लेट छत पर रखी जाती है। फिर इस सोलर प्लेट से ऊर्जा पैदा होती है और केबल के जरिए चूल्हे तक पहुंचती है। इसके बाद आप इस पर खाना बना सकते हैं। कीमत कितनी है? इस सोलर चूल्हे की टेस्टिंग पूरी हो गई है और अब इसकी कमर्शियल लॉन्चिंग है। वहीं, इसकी कीमत 18 से 30 हजार रुपये के आसपास होगी। हालांकि, सरकार इस पर सब्सिडी देकर इनकी कीमतें कम कर सकती है। जब 2-3 लाख चूल्हें बेचें जाएंगे, तो सरकार इस पर सब्सिडी देगी, जिसके बाद इसकी कीमत 10 से 12 हजार रुपये तक हो सकती है।
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