3 अप्रैल को जारी फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के सर्वे के मुताबिक 2022-23 में भारत की वार्षिक औसत GDP विकास दर 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है। इस इकोनॉमिक आउटलुक सर्वे में निम्नतम 6 फीसदी और अधिकतम 7.8 फीसदी ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है। इस सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की वार्षिक औसत विकास दर 3.3 फीसदी के आसपास रह सकती है। जबकि इसी अवधि में इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की वार्षिक औसत विकास दर क्रमश: 5.9 फीसदी और 8.5 फीसदी रह सकती है।
फिक्की के इस सर्वे के मुताबिक रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष और कोविड-19 महामारी के चलते जोखिम बना हुआ है और यह ग्लोबल रिकवरी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इस सर्वे में यह भी कहा गया है कि कमोडिटी की कीमतों में बढ़त से वर्तमान संकट आगे और बढ़ सकता है। और 2021-22 की चौथी तिमाही में इंडेक्स आधारित महंगाई 12.6 फीसदी के आसपास रह सकती है। इस सर्वे में देश के तमाम बड़े इकोनॉमिस्ट इंडस्ट्री लीडर बैकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़े लोगों की राय ली गई है।
आयुष्मान भारत और राज्य अटल आयुष्मान योजना में गोल्डन कार्ड धारक मरीजों के इलाज के लिए बायोमैट्रिक और रेफरल व्यवस्था को बहाल किया गया। अब अस्पतालों में भर्ती होने वाले गोल्डन कार्ड धारक मरीज की बायोमैट्रिक की जाएगी। साथ ही निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पतालों से रेफर की व्यवस्था रहेगी। कोविड महामारी के दौरान राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने गोल्डन कार्ड धारक मरीजों को इलाज कराने में बायोमैट्रिक और रेफर करने की व्यवस्था में छूट दी थी। कोरोना संक्रमण थमने के बाद प्राधिकरण ने बायोमैट्रिक और रेफरल की व्यवस्था को फिर से बहाल कर दिया है।
अब योजना में सूचीबद्ध 240 सरकारी और निजी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड धारक मरीजों को भर्ती करने से बायोमैट्रिक लगानी जरूरी होगी। इससे यह पता लग जाएगा कि जिस पात्र व्यक्ति का गोल्डन कार्ड बना है, उसी व्यक्ति का इलाज किया जा रहा है। योजना में यह भी व्यवस्था है कि गोल्डन कार्ड धारक मरीज को निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पताल से रेफर किया जाएगा।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष डीके कोटिया का कहना है कि आयुष्मान योजना में पारदर्शिता के लिए बायोमैट्रिक और रेफरल की व्यवस्था है। कोविड महामारी के दौरान अस्पतालों में भीड़ को कम करने के लिए बायोमैट्रिक और रेफरल व्यवस्था में छूट दी गई थी। अब कोरोना संक्रमण थम गया है। जिससे दोनों व्यवस्था को फिर से बहाल कर दिया गया है।
योजना में सूचीबद्ध होने के लिए अस्पतालों की नहीं चलेगी मनमर्जी
आयुष्मान योजना में पसंदीदा स्पेशयलिटी की सेवाएं देने के लिए निजी अस्पतालों की मनमर्जी नहीं चलेगी। वर्तमान में प्रदेश के 240 अस्पताल योजना में सूचीबद्ध हैं। जिसमें 134 निजी अस्पताल शामिल हैं लेकिन कई बड़े अस्पतालों ने योजना में एक या दो स्पेशयलिटी की सेवाओं के लिए सूचीबद्ध किया है।
जबकि अस्पताल में अन्य कई स्पेशयलिटी संचालित हो रही है। लेकिन अब राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से ऐसे अस्पतालों को योजना से बाहर किया जा रहा है। योजना में सूचीबद्ध होने वाले अस्पतालों को सभी उपलब्ध स्पेशयलिटी गोल्डन कार्ड धारक मरीजों को उपलब्ध करानी होगी।
7th Pay Commission Update: केंद्र सरकार एक बार फिर कर्मचारियों को खुश कर सकती है. सरकार ने कर्मचारियों के डीए में 3% की बढ़ोतरी कर दी है. अब इसके साथ ही सरकार जल्दी ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) बढ़ाने की घोषणा कर सकती है. आइए जानते हैं इस बढ़ोतरी के बाद कितनी होगी सैलरी.
7th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों को एक बार फिर खुशखबरी मिल सकती है. सरकार डीए के बाद अब एक और भत्ते को बढ़ाने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा हुआ तो कर्मचारियों की सैलरी में एक बार फिर से बढ़ोतरी होगी. जानकारी के मुताबिक डीए बढ़ोतरी के बाद अब HRA बढ़ोतरी का ऐलान भी हो सकता है. दरअसल, डीए बढ़ने के साथ ही एचआरए में भी संशोधन का अनुमान है.
34% हुआ कर्मचारियों का डीए
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबे इंतजार के बाद, महंगाई भत्ते में 3% की बढ़ोतरी का ऐलान हो गया है. मार्च की सैलरी के साथ कर्मचारियों को बढ़े हुए डीए का फायदा भी मिल गया है. इसके साथ ही अब एचआरए में भी जल्दी हो बढ़ोतरी हो सकती है.
एचआरए में वृद्धि की उम्मीद
डीए बढ़ने के बाद एचआरए में भी बढ़ोतरी की उम्मीद बढ़ गई है. इससे पहले एचआरए में पिछले साल जुलाई में बढ़ोतरी हुई थी. तब डीए को भी बढ़ाकर 28 फीसदी किया गया था. अब जब डीए बढ़ाकर 34 फीसदी कर दिया गया है एचआरए में भी संशोधन हो सकता है.
कैसे तय होता है एचआरए
अब देखते हैं कि सरकारी कर्मचारियों के लिए एचआरए कैसे तय होता है. आपको बता दें कि जिस शहर की आबादी 50 लाख से ज्यादा होती है वह ‘X’ कैटेगरी के तहत आते हैं. वहीं जिसकी आबादी 5 लाख से ज्यादा होती है वे ‘Y’ कैटेगरी में आते हैं. और 5 लाख से कम आबादी वाले शहर ‘Z’ कैटेगरी के तहत आते हैं. तीनों कैटेगरी के लिए मिनिमम HRA 5400, 3600 और 1800 रुपए होगा.
कितना बढ़ सकता है एचआरए
इस हिसाब से कर्मचारी का एचआरए उस शहर की श्रेणी से निर्धारित होता है जहां वे काम करते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, X श्रेणी के शहरों में रहने या काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों के एचआरए (HRA) में डीए की तरह ही 3 फीसदी तक की वृद्धि संभावित है.
फिलहाल इन शहरों के कर्मचारियों को मूल वेतन का 27 फीसदी एचआरए मिलता है. वहीं, Y श्रेणी के शहरों के लिए एचआरए में 2 फीसदी बढ़ोतरी संभव है. फिलहाल इन कर्मचारियों को 18-20 फीसदी एचआरए मिलता है. वहीं, Z श्रेणी के शहरों के लिए 1 फीसदी एचआरए बढ़ाया जा सकता है. इन्हें अभी 9-10 फीसदी की दर से एचआरए दिया जाता है.
आपके घर में किसी की आयु 60 साल से ज्यादा है तो फिर आपकी मौज आने जा रही है। अब घर बैठे बुजुर्गों को सरकार हर महीना पेंशन के तौर पर 3,000 रुपये देगी, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें रखी गईं हैं। मोदी सरकार की इस योजना का लाभ उन सारे किसानों को मिल सकता है, जो पीएम किसान सम्मान निधि का फायाद ले रहे हैं।
वहीं, पीएम किसान सम्मान निधि योजना से करीब 12 करोड़ से ज्यादा किसानों को किस्त मिल रही है पीएम किसान के लाभार्थियों को केंद्र सरकार किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम किसान मानधन योजना का फायदा दे रही है। मानधन योजना के लिए कोई दस्तावेज नहीं देना होगा। वहीं इससे जुड़कर आप जेब से बिना खर्च किए 36000 सलाना पा सकते हैं।
हर साल होगी मोटी कमाई पीएम किसान मानधन योजना के तहत लघु सीमांत किसानों को हर महीने पेंशन देने की योजना है। इसमें 60 वर्ष की उम्र के बाद हर महीने 3000 रुपये यानी 36000 रुपये सालाना पेंशन दी जाती है। कोई किसान पीएम-किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहा है तो उसे पीएम किसान मानधन योजना के लिए कोई दस्तावेज नहीं देना होगा पीएम-किसान स्कीम से प्राप्त लाभ में से सीधे ही अंशदान करने को चुनने की छूट है। इस तरह किसान को सीधे अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना होगा। 6000 रुपये में से उसका प्रीमियम भी कट जाएगा। जेब से बिना खर्च किए किसान को 36000 सालाना भी मिलेगा और अलग से कुछ किस्त भी।
किसान मानधन योजना के तहत 18-40 साल तक की आयु वाला कोई भी किसान इसमें पंजीकरण करा सकता है। हालांकि, वहीं किसान इस योजना का फायदा उठा सकते हैं, जिनके पास अधिकतम 2 हेक्टेयर तक ही खेती योग्य जमीन है।
इन्हें योजना के तहत कम से कम 20 साल और अधिकतम 40 साल तक 55 रुपये से 200 रुपये तक मासिक अंशदान करना होगा। अगर 18 साल की उम्र में जुड़ते हैं तो मासिक अंशदान 55 रुपये महीने होगा। अगर 30 साल की उम्र में योजना से जुड़ते हैं तो 110 रुपये हर महीने अंशदान करना होगा।
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