देश - दुनिया
यहाँ चिता की राख से खेली जाती है होली…
चिता की राख से होली खेलने की यह परपंरा अनोखी और अद्भुत है। यह अद्भुत परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। यह होली कहीं और नहीं भगवान शिव की नगरी वाराणसी के मणिकर्णिका घाट में खेली जाती है। भ्रस्म होली खेलने से पहले भगवान भूतनाथ का भव्य श्रृंगार किया जाता है। यह शहर दुनियाभर को अनोखी सीख देने में माहिर है। वाराणसी में लोग चिता शव और मृत्यु में भी जश्न मनाते हैं। यहां रंगों के बजाय भस्म की होली खेली जाती है। मणिकर्णिका घाट को दुनिया का इकलौता महाश्मशान होने का गौरव हासिल है। जहां चौबीसो घंटा चिता जलदी रहती है। यहां साधु-संत भ्रस्म की होली खेलते व झूमते दिखाई देते हैं। चारों तरफ हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देती है।
बाबा काशी विश्वनाथ ने अपना गौना कराने के बाद दूसरे दिन यहां के महाश्मशान में अपने गणों के साथ होली खेली थी। इसी मान्यता के अनुसार काशी में हर साल महाश्मशान में होली खेलने की परंपरा निभाई जाती है।
विद्वानों की मानें तो यहां सैकड़ों वर्षों से भ्रस्म होली खेली जा रही है। इसे देखने के लिए देश-विदेश से हर साल बड़ी संख्या में लोग आते हैं। विदेशियों के बीच इसका खास महत्व है। आपको बता दें कि, यह परंपरा बहुत ही पुरानी है। इस दिन लोग मणिकर्णिका घाट पर चिताओं के भस्म से होली खेलते है। भेदभाव, छुआ-छूत, पवित्र-अपवित्र से परे होकर लोग एक दूसरे पर भस्म को बड़े ही प्रेम से फेकते हैं और हवा में सिर्फ भस्म ही उड़ता है। यह एक ऐसा नजारा होता है जिसे देखकर शायद कोई भी वास्तविक जीवन से दूर होकर महादेव के इस मणिकर्णिका घाट पर खो जाये।
मणिकर्णिका को लेकर मान्यता
मणिकर्णिका को लेकर एक अद्भूत और अविस्मरणीय इतिहास है। इसका अतीत जितना पुराना है उतना ही विस्मयकारी भी है। मणिकर्णिका घाट वाराणसी में गंगानदी के तट पर स्थित एक प्रसिद्ध घाट है। मान्यता के अनुसार माता पार्वती का कर्ण फूल यहां एक कुंड में गिर गया था। जिसे भगवान शिव ने ढूढ़ा था। इसी के बाद से इस स्थान का नाम मणिकर्णिका पड़ गया। वहीं इस जगह को लेकर एक और दूसरी मान्यता भी है, जिसके अनुसार भगवान शंकर द्वारा माता पार्वती के पार्थीव शरीर का अग्नि संस्कार किया गया, जिस कारण इसे महाश्मसान भी कहते हैं।

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बड़ी खबर: PM मोदी लाल किले से 21 अप्रैल को पूरे देश को करेंगे संबोधित… पढ़े पूरी खबर…

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को सिख गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व के अवसर पर लाल किले से देश को संबोधित करेंगे. यह जानकारी सोमवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने दी. इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी सिख गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व पर एक विशेष सिक्का और डाक टिकट भी जारी करेंगे. मंत्रालय ने कहा कि इस मौके पर 400 रागी (सिख संगीतकार) ‘शबद कीर्तन’ का गायन करेंगे. इस कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से किया जाएगा.
मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और देश व दुनिया की कई नामचीन हस्तियां शामिल होंगी. सिख गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व के मौके पर इस कार्यक्रम का आयोजन ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत किया जा रहा है. पिछले साल भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौवें सिख गुरु तेग बहादुर के प्रकाश पर्व (जन्म उत्सव) पर दिल्ली स्थित शीशगंज गुरुद्वारा पहुंचे और माथा टेककर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थींं.मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा था, आज गुरुद्वारा शीशगंज साहिब में मैंने प्रार्थना की. श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, आदर्शों और सर्वोच्च बलिदान को हम कभी नहीं भूल सकते. मोदी ने अपनी कुछ तस्वीरें भी ट्वीट की थीं. प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, मोदी जिस समय गुरुद्वारा गए, उस समय सड़कों पर किसी तरह का पुलिस बंदोबस्त नहीं किया गया था और आम लोगों की सुविधा को देखते हुए ना ही अवरोधक लगाए गए थे.
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले से ही गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व को धूमधाम के साथ मनाने का फैसला किया था. इस सिलसिले में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति की पिछले दिनों एक बैठक भी हुई थी. इस बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाशोत्सव का अवसर एक राष्ट्रीय कर्तव्य है. इससे पहले, मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा था, श्री गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर मैं उन्हें नमन करता हूं. पिछड़ों की सेवा करने के प्रयासों और अपने साहस के लिए दुनिया भर में उनका सम्मान है. उन्होंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ झुकने से इंकार कर दिया था. उनका सर्वोच्च बलिदान कई लोगों को मजबूती और प्रेरणा देता है.
देश - दुनिया
बैंक खुलने का समय बदला अब से 10 बजे नहीं बल्कि सुबह 9 बजे से खुलेंगे।आइये जानिए क्या रहेगी टाइमिंग
आज से बैंक 10 बजे नहीं बल्कि सुबह 9 बजे से खुलेंगे। RBI ने 18 अप्रैल 2022 से बैंकों के खुलने के समय में बदलाव किया है। इससे ग्राहकों को अपना काम कराने के लिए एक घंटा अतिरिक्त समय मिलेगा। हालांकि, बैंकों के बंद होने के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मतलब बैंक पहले के टाइम से ही बंद होंगे।
रेगुलेटेड मार्केट वाले बाजार कारोबार का समय भी बदला
RBI के रेगुलेटेड मार्केट वाले बाजार कारोबार के समय में भी बदलाव किया गया है। यानी आज से विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स, रुपया ब्याज दर डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स में रेपो सहित विदेशी मुद्रा (FCY)/ भारतीय रुपया (INR) ट्रेड्स जैसे RBI विनियमित बाजारों में ट्रेडिंग अपने पूर्व-कोविड समय यानी सुबह 10 बजे के बजाय 9 बजे सुबह से शुरू होंगे। यह कारोबार दोपहर के 3:30 बजे तक चलेगा। इसके पहले कारोबार सुबह 10:00 बजे से दोपहर के 4:00 बजे तक चलता था।
कोरोना के कारण घटाया था समय
कोरोना वायरस महामारी के चलते RBI ने बैंकिंग कार्य समय को कम कर दिया था। इसके पीछे उद्देश्य था कि बैंक में एक ही दिन में ज्यादा लोगों की भीड़ ना हो और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके। लेकिन, इसे अब फिर से सामान्य कर दिया गया है। देश में SBI समेत 7 सरकारी बैंक हैं। इनके अलावा देश में 20 से ज्यादा प्राइवेट बैंक हैं। इन सभी बैंकों पर नया नियम लागू होगा।
कार्ड लैस एटीएम से ट्रांजेक्शन की सुविधा जल्द
RBI ग्राहकों को जल्द ही यूपीआई का इस्तेमाल कर बैंकों और उनके एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा देने जा रहा है। RBI कार्डलेस यानी बिना कार्ड के इस्तेमाल वाले ट्रांजकैशन को बढ़ाने के लिए ऐसा करने जा रहा है। ऐसा करने के लिए यूपीआई के जरिए सभी बैंकों और उनके एटीएम से पैसे निकासी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
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बड़ी खबर: द.अफ्रीका में बाढ़ ने मचाया कोहराम, 400 लोगो की हुई मौत, 40 हजार लोग घर से हुये बेघर…

कोरोना जैसी आपदा से दक्षिण अफ्रीका उभरना शुरू ही हुआ था कि यहां एक और तबाही शुरू हो गई है। अब दक्षिण अफ्रीका बाढ़ की चपेट में है। क्वाजुलु-नताल प्रांत व डरबन में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 443 हो गई है। करीब चार हजार घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। 40 हजार लोग बेघर हैं और 13,500 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, इसके अलावा 58 अस्पतालों को भी नुकसान पहुंचा है। कंपनी नेटकेयर 911 के शॉन हर्बस्ट ने बताया, दुख की बात है कि अभी भी घरों से शव बरामद किए जा रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में शव ज्यादा मिल रहे हैं।
बुनियादी ढांचे को हुआ बहुत नुकसान
बाढ़ ने दक्षिण अफ्रीका के कई शहरों के बुनियादी ढांचे को बहुत नुकसान पहुंचाया है। भारी बारिश के कारण यहां सड़कों, स्कूलों, बिजली, सरकारी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। मौसम सेवा के मुताबिक, आने वाले दिनों में प्रांत के कई हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। वहीं डरबन इमरजेंसी मेडिकल सर्विस की ओर से कहा गया है कि पहली बार बाढ़ आने के बाद जीवित बचे लोगों के मिलने की उम्मीद कम है। अब सिर्फ मानवीय सहायता पर ध्यान दिया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ के कारण अब तक 63 लोग लापता हैं।
चार हजार लोगों को राहत कार्य में उतारा गया
दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े शहर डरबन में बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया है। यहां भी स्कूल, सड़कें, घरों को बहुत नुकसान हुआ है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में चार हजार लोगों को राहत कार्य में लगाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में इससे ज्यादा भयानक बाढ़ नहीं देखी है
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