देश - दुनिया
मनी लॉन्ड्रिंग केस: एनसीपी नेता एकनाथ खडसे को राहत, कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई अंतरिम रोक

ईडी ने आरोप लगाया है कि चौधरी और खडसे ने पुणे के पास भोसारी में 3.75 करोड़ रुपये में सरकारी जमीन खरीदी थी जबकि उसकी असल कीमत 31.01 करोड़ रुपये थी। अभियोजन का कहना है कि एकनाथ खडसे ने इस सौदे के लिए राजस्व मंत्री के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में एनसीपी नेता एकनाथ खडसे को राहत मिली है। कोर्ट ने गिरफ्तारी पर एक सप्ताह के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी है। 2016 के पुणे जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष अदालत ने उन्हें समन जारी करके अपने समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। न्यायाधीश एन डब्ल्यू साम्ब्रे की एकल पीठ ने खडसे को निर्देश दिया कि वह नियमित जमानत के लिए विशेष पीएमएलए (धनशोधन रोकथाम कानून) अदालत के पास जाए। अदालत ने खडसे की अग्रिम जमानत याचिका पर यह फैसला सुनाया। खडसे के वकील शिरीष गुप्ते ने दलील दी कि मामले में एक आरोप पत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है और जांच के दौरान उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया।इस महीने की शुरुआत में विशेष अदालत ने खडसे को समन जारी करके अपने समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। उसने मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल आरोप पत्र का संज्ञान लेने के बाद यह समन जारी किया था। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने गुरुवार को तर्क दिया कि खडसे को नियमित जमानत के लिए विशेष अदालत के पास जाना होगा।न्यायिक हिरासत में हैं खडसे का दामाद-
न्यायाधीश साम्ब्रे ने कहा, ‘याचिकाकर्ता नियमित जमानत या अग्रिम जमानत के लिए आज से एक सप्ताह के भीतर विशेष अदालत में याचिका दायर करे। विशेष अदालत याचिकाकर्ता को एक सप्ताह तक हिरासत में नहीं लेगी और जमानत याचिका पर शीघ्र सुनवाई करेगी।’ खडसे से अलावा उनकी पत्नी मंदाकिनी और दामाद गिरीश चौधरी के नाम भी आरोपपत्र में शामिल किए हैं।चौधरी को कुछ महीने पहले इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और अब वह न्यायिक हिरासत में है।जमीन खरीदने में धोखाड़ी का मामला
ईडी ने आरोप लगाया है कि चौधरी और खडसे ने पुणे के पास भोसारी में 3.75 करोड़ रुपये में सरकारी जमीन खरीदी थी जबकि उसकी असल कीमत 31.01 करोड़ रुपये थी। अभियोजन का कहना है कि एकनाथ खडसे ने इस सौदे के लिए राजस्व मंत्री के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया। खडसे ने इस विवाद के बाद जून 2016 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली तत्कालीन राज्य सरकार में राजस्व मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अक्तूबर 2020 में भाजपा छोड़ दी थी और वह एनसीपी में शामिल हो गए थे।


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अमेरिकी डॉक्टरों को मिली बड़ी सफलता,मानव शरीर में सुअर की किडनी का सफल ट्रांसप्लांट

वैज्ञानिकों को मानव शरीर में सुअर की किडनी ट्रांसप्लांस करने में बड़ी सफलता मिली है। तमाम परीक्षणों के बाद अब डॉक्टरों ने बताया कि कि मानव शरीर में सुअर की किडनी सुचारू रूप से काम कर रही है और ट्रांसप्लांट पूरी तरह से सफल रहा है। यह बड़ी सफलता अमेरिकी डॉक्टरर्स को मिली है, जिससे अब मानव शरीर में ट्रांसप्लांट करने के लिए मानव अंगों की कमी को दूर किया जा सकता है। ऐसा पहली बार संभव हुआ है जब मानव शरीर शरीर में किसी दूसरे प्राणी की किडनी का सफल प्रत्यारोपण किया गया है। हालांकि इससे पहले भी ऐसे कई प्रयोग किए गए हैं लेकिन शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र बाहरी अंगों को स्वीकार नहीं करता है और ट्रांसप्लांट सफल नहीं हो पाता है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब सुअर की किडनी को मानव शरीर में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है और शरीर ने भी सफलतापूर्णक ग्रहण कर लिया है।
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मुंबई की 60 मंजिला इमारत में लगी आग, दहशत में शख्स ने 19वीं मंजिल से लगाई छलांग, मौत

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की एक 60 मंजिला इमारत में शुक्रवार को आग लग गई। कर्री रोड पर स्थित अविघ्न पार्क इमारत में लगी आग को बुझाने के लिए दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे हैं। इस बीच एक शख्स की 19वीं मंजिल से कूदने से मौत होने की भी खबर है। कहा जा रहा है कि आग लगने से दहशत में आए शख्स ने 19वीं मंजिल से छलांग दी, जिसमें उसकी मौत हो गई। 30 वर्षीय युवक को तत्काल केईएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा एक अन्य घायल शख्स को अस्पताल में इलाज के लिए एडमिट कराया गया है।
आग के डर से रेलिंग पकड़कर लटका था सुरक्षागार्ड, गिरने पर मौत
फायर ब्रिगेड के एक अधिकारी ने बताया कि मृतक अरुण तिवारी बिल्डिंग में ही सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात थे। इमारत की 19वीं मंजिल में आग लगी तो वह भागकर वहीं पहुंच गया। कुछ देर में उसे अंदाजा हुआ कि वह फंस गया है और फिर खुद को आग से बचाने के लिए वह बालकनी पर लटक गया था। लेकिन कुछ देर में रेलिंग पर उसकी पकड़ ढीली हो गई और वह नीचे गिर गया। जमीन पर गिरते ही तिवारी को केईएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शहर की मेयर किशोरी पेडनेकर ने बताया कि अब भी दो लोग इमारत में फंसे हुए हैं, जबकि अन्य लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। रिपोर्टर्स से बात करते हुए म्युनिसिपल कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है और फिलहाल कूलिंग ऑपरेशन चल रहा है। आग लगने की यह घटना कैसे हुई, इसकी जांच के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा।
दोपहर 12 बजे के करीब लगी थी आग, वजह का पता नहीं
बचावकर्मियों की ओर से लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुंबई पुलिस और फायर ब्रिगेड की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यह आग दोपहर के 12 बजे के करीब लगी थी। इसे बुझाने के लिए एक दर्जन से ज्यादा फायर टेंडर्स, 5 जम्बो टैंकर मौके पर पहुंचे थे। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

देश - दुनिया
अब छुट्टी के दौरान हमले में सैनिकों की मौत को ऑन ड्यूटी माना जाएगा, मोदी सरकार का बड़ा फैसला

एक स्पष्टीकरण जारी किया है। अवकाश के दौरान सैनिकों पर हमले को लेकर रक्षा मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी किया यदि छुट्टी पर गए किसी सैनिक पर चरमपंथी या असामाजिक तत्वों द्वारा हमला होता है और उसमें उसकी मृत्यु हो जाती है, तो ऐसे मामलों को ड्यूटी के दौरान हुई मृत्यु माना जाएगा।
उसके परिजन उसी प्रकार के मुआवजे के हकदार होंगे जो ड्यूटी करने के दौरान मृत्यु होने पर दिए जाते हैं।हाल में जारी आदेश में कहा गया है कि इसमें अभी तक कई मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। यदि कोई सैनिक छुट्टी पर अपने घर आया हुआ है या कहीं और भी गया हुआ है। इस दौरान चरमपंथी या असामाजिक तत्वों द्वारा उसे हमले में मार दिया जाता है तो उसे ड्यूटी पर तैनात माना जाएगा। उसके परिजन उसी प्रकार के मुआवजे के हकदार होंगे जो ड्यूटी करने के दौरान मृत्यु होने पर दिए जाते हैं।आदेश में कहा गया है कि छुट्टी से तात्पर्य उन सभी प्रकार की छुट्टियों से है जो सरकार की तरफ से सैन्यकर्मियों को प्रदान की जाती हैं। दरअसल, पिछले कुछ समय के दौरान सैन्यकर्मियों पर हमले बढ़े हैं। खासकर जब वह अवकाश पर थे। हालांकि, ऐसी घटनाएं कश्मीर में ज्यादा हुई हैं। लेकिन सरकार की तरफ से इस मामले में स्पष्टीकरण जारी कर सैन्यकर्मियों को राहत प्रदान की गई है।
मंत्रालय ने यह तर्क दिया
तर्क दिया गया है कि यदि सैन्यकर्मी पर अवकाश के दौरान चरमपंथियों या असामाजिक तत्वों का हमला होता है तो इसकी वजह यही हो सकती है कि उसके सैन्यकर्मी होने के कारण उस पर हमला किया गया। जिसमें उसकी जान चली गई। इसलिए वह इस लाभ का हकदार है।
निजी दुश्मनी में मृत्यु पर लाभ नहीं
हालांकि, छुट्टी के दौरान सैनिक की निजी दुश्मनी की वजह से उस पर कोई हमला होता है और उसमें उसकी मृत्यु हो जाती है तो इसे ड्यूटी के दौरान हुई मौत नहीं माना जाएगा। ऐसे मामले में ड्यूटी के दौरान हुई मृत्यु के तहत मुआवजा नहीं मिलेगा।

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