छत्तीसगढ़
अब होगी कमजोर छात्रों की पहचान ,पहली से 12वीं तक सभी कक्षाओं की छमाही परीक्षाएं दिसंबर में ऑफ लाइन

कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले साल स्कूल बंद रहे। इस दौरान 10वीं-12वीं बोर्ड को छोड़कर बाकी कक्षाओं की वार्षिक तो दूर छमाही परीक्षा तक नहीं हुई। परीक्षाएं नहीं होने से कक्षा पहली से आठवीं और नवमीं-ग्यारहवीं के छात्रों का मूल्यांकन नहीं हो सका। अब पूरे एक सत्र के बाद शिक्षा विभाग ने पहली से बारहवीं कक्षा तक सभी कक्षाओं की परीक्षाएं लेने की तैयारी की है।दिसंबर में परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा।
सभी परीक्षा ऑफ लाइन
सभी पर्चे ऑफ लाइन होंगे, यानी बच्चों को स्कूल में परीक्षा देना होगा। परीक्षा के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद एससीईआरटी के माध्यम से पर्चे सेट किए जाएंगे। अभी तक जो प्लानिंग है, उसके अनुसार प्रश्नपत्र ब्लैकबोर्ड में लिखे जाएंगे।बच्चों को ब्लैकबोर्ड में प्रश्न देखकर आंसर लिखना होगा। शिक्षा विभाग के अफसरों के अनुसार सितंबर में तिमाही परीक्षा का आयोजन किया जाना था, लेकिन परीक्षाएं कुछ स्कूलों में ही ली गईं।
स्कूल चूंकि लंबे समय तक बंद थे, इसलिए तिमाही परीक्षा को लेकर न शिक्षकों ने और न ही छात्रों ने गंभीरता दिखाई। लेकिन अब स्थिति अलग है। अगस्त से स्कूल खुल गए हैं।सरकारी स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाई हो रही है। छात्रों की उपस्थिति भी अच्छी है, इसलिए अब ऑफलाइन परीक्षा होने से परेशानी नहीं होगी। अफसरों का कहना है कि छमाही दिसंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में आयोजित की जा सकती है। इसके लिए स्कूलों को पहले ही सूचना दी गई है।
उसी के अनुसार स्कूलों में पढ़ाई करायी जा रही है।दिसंबर तक लगभग पूरा कोर्स करवा लिया जाएगा। ऑफलाइन एग्जाम के आधार पर पता चलेगा कि बच्चों का स्तर कैसा है। वे किन-किन विषयों में कमजोर है। नवमीं व ग्यारहवीं में फेल होने वाले छात्रों की संख्या अधिक रहती है। इसलिए इन कक्षा के छात्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
परीक्षा 2019 में हुई थी सरकारी स्कूलों में छमाही
सरकारी स्कूलों में छमाही परीक्षा 2019 में हुई थी। कोरोना संक्रमण की वजह से 2020 में स्कूल बंद रहे। इसलिए ये शिक्षा सत्र ऐसे ही गुजर गया। न ऑफलाइन पढ़ाई हुई और न ही परीक्षा। काेरोना का संक्रमण कम होने पर अगस्त से स्कूल खुल चुके हैं। इसलिए छमाही परीक्षा के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई का स्तर जांचा जाएगा।
अब होगी कमजोर छात्रों की पहचान
अफसरों का कहना है कि छमाही परीक्षा के नतीजों से पता चलेगा कि कितने बच्चे होशियार हैं, कितने ठीक-ठाक और कितने छात्रों का स्तर कमजोर है। कमजोर बच्चों की पहचान होने के बाद उन पर स्कूल विशेष ध्यान देंगे। जरूरत के अनुसार इनके लिए स्पेशल कक्षाएं भी लगाई जा सकती है। इस परीक्षा के आधार पर आगामी बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों का मूल्यांकन भी हो जाएगा। इसके लिए भी अलग से टेस्ट सीरीज शुरू की जाएगी।
20 हजार छात्र बढ़े सरकारी स्कूलों में :
जिले के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या इस बार 2.41 लाख है। पिछली बार 2.21 लाख छात्र थे। इस तरह से सरकारी स्कूलों में इस बार 20 हजार छात्र बढ़े हैं। कई वर्षों के बाद सरकारी स्कूलों में छात्रों की इतनी संख्या बढ़ी है। कुछ वर्ष पहले तक सरकारी स्कूलों से छात्र कम हो रहे थे। लेकिन इस बार प्राइमरी में 94856, मिडिल में 67022, हाई में 7608 और हायर सेकेंडरी में 71563 छात्र हैं।


छत्तीसगढ़
25 अक्टूबर को प्रदेश के लगभग 7 हजार से अधिक प्राइवेट स्कूल बंद रहेंगे , लाखों बच्चो की पढ़ाई प्रभावित

छत्तीसगढ़ के सभी प्राइवेट स्कूल 25 अक्टूबर को बंद रहेंगे:-
छत्तीसगढ़ के सभी प्राइवेट स्कूल 25 अक्टूबर को बंद रहेंगे। इसे लेकर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने एलान किया है कि सोमवार को प्रदेश स्तर पर हड़ताल और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। रायपुर के बूढ़ापारा के धरना स्थल पर जमा होकर स्कूल एसोसिएशन के लोग सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करेंगे। एसोसिएशन के इस फैसले की वजह से प्रदेश के लगभग 7 हजार से अधिक स्कूल बंद रहेंगे।
इन सभी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 16 लाख बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि सरकार लगातार हमारी मांगों की अनदेखी कर रही है। कई स्तर पर स्कूल के लोगों ने अपनी समस्याओं को सरकार के सामने रखा मगर हमारी एक नहीं सुनी गई। अब प्रदेश के संगठन ने ये फैसला लिया है। 25 अक्टूबर को सभी स्कूलों में ताले लगे होंगे। टीचिंग स्टाफ, नॉन टीचिंग स्टाफ सभी हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल का प्रमुख कारण RTE, राइट टू एजुकेशन के तहत प्राइवेट स्कूलों को मिलने वाला पैसा है। पिछले कई महीने से करीब 106 करोड़ रुपए सभी स्कूलों के बकाया है, जो सरकार ने अब तक नहीं दिए हैं।
स्कूल संचालकों की मांग :-
- 2020-2021 की RTE की प्रतिपूर्ति राशि अशासकीय विद्यालयों को अविलंब प्रदान की जाए ।
- 16 महीनो तक स्कूल बसों का संचालन बंद रहा, अत: अप्रैल 2020 से जुलाई 2021 (16 महीने) प्रदेश की सभी स्कूल बसों का रोड टैक्स माफ किया जाए।
- नवीन मान्यता, मान्यता नवीनीकरण पर स्कूल शिक्षा विभाग अड़ियल रवैया अपनाए हुए हैं। पूरे प्रदेश में मान्यता की प्रक्रिया 2 से 3 वर्ष विलंब से चल रही है।
- कोरोना संक्रमण के दौरान प्रदेश के सभी अशासकीय विद्यालयों का स्कूल शिक्षा विभाग ने निरीक्षण किया था, अलग-अलग जिलों में कमियां बता कर अशासकीय विद्यालयों को परेशान किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़
अब मोबाइल पर दिखेगा स्टोर में ,कितना स्टॉक है ! स्टॉक कम होगा वहां वैक्सीन भेज दी जाएगी
अब मोबाइल पर दिखेगा स्टोर में कितना स्टॉक है स्टॉक कम होगा वहां वैक्सीन भेज दी जाएगी
राजधानी रायपुर समेत जिले में कोरोना सहित सभी तरह के टीकों की सप्लाई और स्टाक की आनलाइन एंट्री की जाएगी। इसके लिए सभी जगहों पर वैक्सीन के स्टॉक का हिसाब रखने वाले कोल्ड चेन प्वाइंट हैंडलर को मोबाइल सेट दिए गए हैं।
अब उनके मोबाइल पर दिखेगा कि किस स्टोर में कितना स्टॉक है। जहां स्टॉक कम होगा वहां वैक्सीन भेज दी जाएगी। इससे सेंटरों में भेजने में दिक्कत नहीं होगी।
रायपुर जिले में 14 कोल्ड चेन प्वाइंट हैं, जिसके जरिए सभी टीका केंद्रों, प्राथमिक और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में टीके का वितरण किया जाता है। कोल्ड चेन प्वाइंट यानी छोटे स्टोर में टीका खत्म होने पर वहां से जिन सेंटरों में वैक्सीन सप्लाई की जाती है वहां टीकाकरण प्रभावित होता है। इसलिए इस तरह की व्यवस्था बनाई गई है। 14 कोल्ड चेन प्वाइंट आपस में भी एक दूसरे का स्टाक देख सकेंगे ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी जगह से टीके मंगवाए जा सकें। इसके जरिए मोबाइल एप में सभी तरह के टीकों की एंट्री होगी।

छत्तीसगढ़
बंदर के डर से भाग रही थी 5 साल की बच्ची, कुएं में जा गिरी बच्ची की मौत
बंदर के डर से भाग रही थी 5 साल की बच्ची, कुएं में जा गिरी बच्ची की मौत
गली में खेल रही 5 साल की बच्ची बंदर के डर से भागते हुए कुएं में जा गिरी और पानी में डूबने से उसकी मौत हो गई। पलारी पुलिस ने बताया ग्राम टीपावन निवासी 5 साल की लविशा मानिकपुरी पिता दिनेश मानिकपुरी अपने घर के सामने शाम 5 बजे खेल रही थी, तभी घर के आसपास बहुत सारे बंदर आ गए।
बच्ची अकेली थी और बंदर से डर गई और घर की तरफ भागते हुए कुएं में गिर गई, जिससे पानी में डूबने से उसकी मौत हो गई। बच्ची जब बहुत देर तक घर नहीं लौटी तो उसके आसपास तलाश किया गया।
तभी पास के कुएं में काटा डालकर देखा तो बच्ची कुएं में डूबी हुई थी, जिसे घर वालों ने पलारी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।थाना प्रभारी प्रमोद सिंह ने बताया कि पिता की रिपोर्ट पर मर्ग कायम कर पंचनामा और पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। घटना की विवेचना की जा रही है। पीएम रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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