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छतीसगढ़

मार्च तिमाही में 70 हजार से ज्यादा मकानों की बिक्री’ बिक्री चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई..

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जीडीपी का गिरना, मोदी सरकार की कौन सी कमियों को दर्शाता है? - Quora

 

देश के हाउसिंग मार्केट में अभूतपूर्व तेजी देखी जा रही है। बीती मार्च तिमाही में 70 हजार से ज्यादा मकानों की बिक्री हुई। यह दिसंबर तिमाही में हुई बिक्री के मुकाबले करीब 13% ज्यादा, जबकि बीते साल मार्च तिमाही की तुलना में लगभग 40% अधिक है। सबसे अच्छी ग्रोथ लग्जरी मकानों के सेगमेंट में देखी जा रही है, जहां बिक्री चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।

अमेरिकी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट फर्म सीबीआरई ग्रुप की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल की पहली तिमाही में किफायती मकानों की बिक्री इससे पहले वाली तिमाही के मुताबिक ही 27% बढ़ी है। लेकिन बीती तिमाही महंगे मकानों की बिक्री में 23% बढ़ोतरी हुई, जबकि दिसंबर तिमाही में इस सेगमेंट ने 16% ग्रोथ देखी थी। दिलचस्प है कि मार्च तिमाही में मझोले आकार (40-80 लाख रुपए कीमत) के मकानों की बिक्री में 41% गिरावट आई है।

 

आगामी तिमाहियों में बढ़ेगी बिक्री और नई लॉन्चिंग
मार्च तिमाही में जोरदार ग्रोथ दिखाने वाला हाउसिंग मार्केट साल की बाकी तिमाहियों में भी जोरदार ग्रोथ दिखाएगा। सीबीआरई के सीएमडी अंशुमान मैगजीन ने कहा कि रेसिडेंशियल सेक्टर 2022 में पूरा साल जोरदार ग्रोथ दिखाएगा। आगामी तिमाहियों में न केवल नई लॉन्चिंग बढ़ेगी, बल्कि बिक्री में इजाफा होगा। अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने के बीच हाउसिंग सेक्टर को सरकारी सपोर्ट जारी रहना इसकी वजह है।’

इस साल बिक्री के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगी लग्जरी मकानों की बिक्री
सोदबीज इंटरनेशनल रियल्टी और सीआरई मैट्रिक्स की एक संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल भारत में लग्जरी मकानों की बिक्री अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 के दौरान मुंबई में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत वाले अपार्टमेंट और पुणे में 5 करोड़ से ज्यादा दाम वाले अपार्टमेंट की बिक्री बीते चार साल में सबसे ज्यादा हुई।

 

सीआरई मैट्रिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल मुंबई में 20,255 करोड़ रुपए के 1,214 लग्जरी मकान बिके। इसके मुकाबले 2018 के दौरान देश की आर्थिक राजधानी में 9,872 करोड़ रुपए के 598 लग्जरी मकानों की बिक्री हुई थी। इसी तरह पुणे में बीते साल 1,407 रुपए के 208 लग्जरी मकानों की बिक्री हुई। इसके मुकाबले चार साल पहले इस शहर में 832 करोड़ के 127 लग्जरी मकान बिके थे।

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छतीसगढ़

today Weather update : असम इलाके मे बाढ़ की सम्भावना, बाढ़ से 7 की मौत, एवं भारी बारिश का अलर्ट जारी..

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बिहार, असम और उत्तर प्रदेश में बाढ़ से 65 की मौत, केरल में 24 घंटे में 20 सेमी बारिश की चेतावनी | 67 dead as IMD sounds red alert in flood affected

 

असम में बाढ़ के चलते हालात खराब हो गए हैं। राज्य के कछार, चराईदेव, दरांग, धेमाजी, डिब्रूगढ़ और दीमा हसाओ सहित 24 जिलों में अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ और लैंडस्लाइड से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम विभाग ने केरल के 4 जिलों में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (ASDMA) के अनुसार, बारिश के बाद हुई लैंडस्लाइड के बाद पहाड़ी जिला दीमा हसाओ राज्य के बाकी हिस्सों से कट गया है। कम्युनिकेशन पूरी तरह बंद है। हाफलोंग की ओर जाने वाली सभी सड़कें और रेलवे लाइन 15 मई से बंद हैं।

बारिश से हुआ लाखों का नुकसान
लगातार बारिश के कारण कई जिलों में सड़कें, पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। फसलों तबाह हो गई हैं। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कछार जिले में बाढ़ से दो मौतें हो गई हैं, जबकि दीमा हसाओ में लैंडस्लाइड के कारण तीन मौतें हुई हैं।

 

बाढ़ से अब तक 652 गांव प्रभावित
बाढ़ से 20 जिलों के 46 राजस्व मंडलों के कुल 652 गांव अब तक प्रभावित हुए हैं। लोगों को राहत देने के लिए सात जिलों में करीब 55 राहत शिविर खोले गए हैं, जिसमें 32 हजार 959 लोगों को आश्रय दिया गया है। NDRF, सेना, SDRF के जवान बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत अभियान में जुटे हैं।

 

केरल में भारी बारिश, 4 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने केरल में भारी बारिश की चेतावनी दी है और मलप्पुरम, कोझीकोड, कन्नूर और कासरगोड जिलों सहित चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अन्य सभी जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने के लिए कहा गया है। इसके अलावा कई इलाकों में बाढ़ का अलर्ट भी जारी किया गया है।

 

भारी बारिश से नदियां उफान पर
कोट्टायम में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया, नदियां उफान पर आ गईं, बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं और फसल की पैदावार नष्ट हो गई। इस बीच, केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने मानसून की तैयारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों को सभी जिलों में एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

 

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छतीसगढ़

गर्मियों मे आग लगने की सम्भावना ज्यादा रहती है, जाने क्यों, एवं बरते सावधानिया..

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पिछले कुछ दिनों से दिल्‍ली-NCR सहित देश के कई जगहों पर आग लगने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। दिल्ली के मुंडका में भीषण आग लगने से 27 लोगों की मौत हो गई और 12 लोग घायल हुए। दिल्ली के अलावा कई राज्यों से घर, हॉस्पिटल, ऑफिस, हाईराइज बिल्डिंग्स, मॉल्स और यहां तक की झुग्गियों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। यूं तो आग लगने की घटनाएं किसी भी मौसम में हो सकती हैं, लेकिन गर्मियों में आग लगने की घटनाएं काफी बढ़ जाती हैं।

इसी वजह से भोपाल नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर, कमलेन्द्र सिंह परिहार बता रहे हैं कि कैसे सावधानी बरतकर आग लगने की घटनाओं को टाला जा सकता है।

आग लगने से बचने के उपाय…

गर्मियों में क्यों बढ़ जाती है आग लगने की घटनाएं?

गर्मियों में आग लगने के पीछे सबसे बड़ी वजह है AC, पंखे, कूलर और इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट्स को लगातार कई घंटों तक चलना। इससे मशीनों पर लोड बढ़ जाता है और स्पार्किंग, शॉर्ट सर्किट होने के कारण आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर मामलों में यही वजह सामने आती है

अगर मकान और बिजली की फिटिंग पुरानी है तो तो पहले उसे चेक कराएं।
पुराने तारों पर एसी-कूलर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, ओवन आदि का भार न बढ़ाएं।
पुरानी वायरिंग को बदल दें। इसमें कट न हो, इसका भी ध्यान रखें।
एसी, कूलर और पंखों की समय पर सर्विसिंग कराएं।
एक साथ एसी, वॉशिंग मशीन, फ्रिज जैसे इलेक्ट्रिक उपकरणों को न चलाएं।
बाहर जाते समय मकान की लाइट और पंखें बंद करना न भूलें।
एसी को 24 घंटे लगातार न चलाएं, बीच-बीच में कुछ घंटों का आराम भी दें।
देर तक मोबाइल और लैपटॉप को चार्जर पर लगाकर न छोड़ें।

इन जगहों पर वॉटर टैंक में हर समय पानी रहना चाहिए।
फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर अच्छी कंडीशन में होने चाहिए।
फायर सेफ्टी यंत्रों में गैस है या नहीं, इसकी समय-समय पर पड़ताल होनी चाहिए।
फायर एग्जिट गेट ठीक है या नहीं, समय-समय पर इसकी भी जांच करते रहें।
स्प्रिंक्‍लर्स ठीक से चलने चाहिए।
सुरक्षाकर्मियों के अलावा दूसरे लोगों को भी फायर सेफ्टी के इंतजामों की पर्याप्त जानकारी होनी चाहि

अपने घरों को इस तरह सुरक्षित रखें

घरों में आग ज्यादातर दो कारणों से लगती है। एक वायरिंग यानी तारों में शॉर्ट सर्किट और दूसरा सिलेंडर लीक होने की वजह से। घरों में भी आग लगने की ज्यादातर घटनाएं या तो परिवार की लापरवाही के चलते होती हैं या फिर जानकारी की कमी के कारण। कई लोग बिना सोचे-समझे मकान के बिजली सिस्‍टम पर लोड बढ़ाते जाते हैं, जिसकी वजह से स्पार्क या शॉर्ट सर्किट हो जाता है। इसके अलावा कई घरों में गैस पर खाना बनाने के बाद सिलेंडर का स्विच भी ऑफ नहीं किया जाता है।

 

फैक्ट्री और ऑफिस को इस तरह सुरक्षित रखें

सार्वजनिक जगहों पर ज्यादा संख्‍या में लोग रहते हैं। मसलन फैक्ट्री, कंपनी, हॉस्पिटल, स्‍कूल, ऑफिस, ऊंची बिल्डिंग्स। अगर इन जगहों पर आग लगती है तो बड़े नुकसान की आशंका रहती है। इन जगहों पर फायर सेफ्टी के इंतजाम होने चाहिए।

झुग्गियों में ऐसे करें आग से बचाव

जब भी किसी एक झुग्‍गी-झोपड़ी में आग लगती है तो वहां मौजूद पूरी झुग्गियां राख हो जाती हैं। इसकी वजह है कि झुग्गियों में लगभग सभी सामान ज्वलनशील होते हैं और एक दूसरे से जुड़े होते हैं। यहां बिजली के नंगे तार भी लटक रहे होते हैं। बेहद छोटी सी जगह पर गैस या चूल्हे पर खाना बन रहा होता है। वेंटिलेशन की व्यवस्था भी नहीं होती है। यहां रहने वाले लोग भी आग से सुरक्षा के प्रति जागरूक नहीं होते। ऐसे में अक्सर यहां आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं।

ग्रामीण इन बातों का रखें ध्यान

बीड़ी, सिगरेट या हुक्के का इस्तेमाल कर अच्छे से बुझाकर ही फेंके।
खेत में कटी हुई फसल का ढेर बनाएं तो उसे बिजली के तारों से दूर रखें।
खरपतवार तब तक न जलाएं, जब तक आसपास सूखी फसल खड़ी हो।
खलिहान और फूस के मकान रेलवे लाइन से कम से कम 100 फीट की दूरी पर हों।
बिजली के तारों के नीचे खलिहान न लगाएं और न ही फूस के छप्पर बनाएं।
पुआल और गोबर के कंडों का ढेर रहने की जगह से 100 फीट की दूरी पर लगाएं।
लालटेन-ढिबरी को बुझाने के बाद ठंडा हो जाने पर ही उनमें मिट्टी का तेल डालें।
चूल्हे की जलती हुई बची लकड़ी को पानी से बुझाकर अलग रखें।
शादी समारोह या त्योहारों में खलिहान के आसपास आतिशबाजी न चलाएं।
लैंप, लालटेन या ढिबरी को सुरक्षित स्थान पर ही टांगे और छप्पर से दूर रखें।

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छतीसगढ़

गेहूं के दामो मे हुई बढ़ोतरी, 60% तक बढ़े गेहू के दाम, गेहूं की पैदावर में कमी..

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देश में के संकट को देखते हुए भारत ने इसके एक्सपोर्ट यानी निर्यात पर बैन लगा दिया है। दरअसल, इस बार जल्दी हीटवेव आने से गेहूं की पैदावर में कमी हुई है। अनुमान से कम उत्पादन की वजह से गेहूं और आटे की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अब सरकार ने बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए यह कदम उठाया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत के गेहूं एक्सपोर्ट पर बैन का दुनिया के बाजार में असर दिखना शुरू हो गया है। इस साल में अब तक गेहूं के दाम में 60% तक की बढ़ोतरी हो गई है। वहीं, G-7 देशों ने भारत के कदम का विरोध किया है। इन देशों का कहना है कि इससे दुनियाभर में खाद्य संकट गहरा सकता है।

दरअसल, भारत के कदम का दुनियाभर में असर दिखना शुरू हो गया है। ब्रेड से लेकर नूडल्स तक के दाम बढ़ गए हैं। बढ़ते दामों की वजह से आने वाले वक्त में कई देशों में गेहूं से बनी खाद्य वस्तुओं के लाले पड़ सकते हैं।

ऐसे में आइए जानते हैं कि भारत ने आखिर गेहूं के एक्सपोर्ट पर बैन क्यों लगाया? क्यों जी-7 देश भारत के इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं? बैन से भारत के घरेलू बाजार पर क्या असर होगा? क्या एक्सपोर्ट पर बैन से दुनिया के कई देश भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे?

भारत ने आखिर गेहूं के एक्सपोर्ट पर क्यों लगाया बैन?

भारत ने बीते शुक्रवार को गेहूं के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया है, यानी अब भारत विदेशों में गेहूं को नहीं बेचेगा। सरकार ने इसके लिए भारत और पड़ोसी देशों में फूड सिक्योरिटी का हवाला दिया गया है। दरअसल, सरकार ने देश में गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए यह कदम उठाया है।

सरकार ने कहा है कि अब सिर्फ उसी निर्यात को मंजूरी मिलेगी जिसे पहले ही लेटर ऑफ क्रेडिट जारी हो चुका है। वहीं उन देशों को भी इसकी सप्लाई की जा सकेगी, जिन्होंने भोजन सुरक्षा की जरूरत को पूरा करने के लिए सप्लाई की अपील की है।

एक्सपर्ट्स का कहना हैं कि महंगाई के आंकड़े ने सरकार को निर्यात पर बैन लगाने के लिए मजबूर किया है। खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने से भारत में रिटेल महंगाई की सालाना दर अप्रैल में 8 सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

कॉमर्स सेक्रेट्री बीवीआर सुब्रम्ण्यम कहते हैं कि दुनिया में गेहूं की बढ़ती मांग और आने वाले वक्त में होने वाली संभावित कमी को देखते हुए लोग अनाज का भंडारण कर सकते हैं। ऐसा ना हो इसलिए हमने निर्यात पर रोक लगाई है।

गेहूं की पैदावार में कमी हुई

इस बार गेहूं की पैदावार में कमी का सबसे बड़ा कारण मौसम है। मार्च से हीटवेव स्टार्ट हो गई, जबकि मार्च में गेहूं के लिए 30 डिग्री से ज्यादा टेम्परेचर नहीं होना चाहिए। इसी समय गेहूं में स्टार्च, प्रोटीन और अन्य ड्राई मैटर्स जमा होते हैं।

ऐसे में कम तापमान गेहूं के दानों का वजन बढ़ाने में मदद करता है। इस बार मार्च में कई बार तापमान 40 डिग्री को पार कर गया। इससे गेहूं समय से पहले ही पक गया और दाने हल्के हो गए। इसका असर यह हुआ कि गेहूं की पैदावार 25% तक घट गई। पैदावार कम होने से भारत में गेहूं की कीमत पहले ही अपने उच्चतम स्तर पर चली गई हैं। ऐसे में आटे की कीमतों में तेजी आना लाजिमी है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार केंद्र ने गेहूं का उत्पादन 11.13 करोड़ टन रहने की उम्मीद जताई थी। यब अब तक का सर्वाधिक है, लेकिन बेमौसम मार की वजह से उत्पादन घटकर 10 करोड़ टन से भी कम रह सकता है।

सरकारी एजेंसियों की गेहूं खरीद इस साल घटकर 1.8 करोड़ टन पर आ गई है। यह बीते 15 सालों में सबसे कम है। 2021-22 में कुल 4.33 करोड़ टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी। भारत के बाजारों में गेहूं की कीमत 25 हजार रुपए प्रति टन है, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 20,150 रूपए प्रति टन ही है।

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा ने भास्कर को बताया कि बैन के बाद भारत के घरेलू बाजार पर इसका असर दिखना शुरू हो गया है। इंडियन मार्केट में गेहूं की कीमत में 10% की कमी आई है। उम्मीद है कि गेहूं से बनने वाले खाने-पीने की चीजों के दामों में कमी आ सकती है। सरकार को लंबे समय तक बैन लगाए रखना चाहिए।

भारत के गेहूं पर बैन से दुनिया के बाजार में क्या फर्क पड़ेगा?

भारत गेहूं एक्सपोर्ट करने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है। घरेलू बाजार में गेहूं से बनने सामानों की कीमतों में हुई वृद्धि की वजह से केंद्र ने गेहूं के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया है। हालांकि, लेटर ऑफ क्रेडिट के साथ मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट के लिए गेहूं का एक्सपोर्ट होता रहेगा। यानी 13 मई से पहले के जिन ऑर्डर के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट जारी हो चुका है, उन्हें एक्सपोर्ट किया जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में गेहूं की कीमतों में इस साल की शुरुआत से अब तक ही 60% तक की बढ़ोतरी हो चुकी हैं। अब भारत के प्रतिबंध से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों में और बढ़ोतरी होगी। इसका असर दिखना भी शुरू हो गया है। दुनिया के मार्केट में ब्रेड, केक से लेकर नूडल्स और पास्ता तक- हर चीज की कीमत में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

यूक्रेन और रूस दुनिया भर में पैदा होने वाले गेहूं के उत्पादन का एक तिहाई उगाते हैं, लेकिन जारी युद्ध का असर उत्पादन और सप्लाई पर पड़ा है। एक्सपोर्ट ठप हो चुका है। अब भारत के बैन से उन देशों पर ज्यादा असर पड़ेगा जो पहले से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

भारत श्रीलंका को लगातार खाद्य पदार्थ की सप्लाई कर रहा है। वहीं, ग्लोबल फूड क्राइसिस की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के 53 देशों को तत्काल खाद्य मदद की जरूरत है। बैन से सबसे ज्यादा कांगो, अफगानिस्तान, इथियोपिया, सीरिया, सूडान, पाकिस्तान जैसे देशों पर असर पड़ेगा।

भारत के कदम का G-7 देशों ने विरोध किया, लेकिन बचाव में चीन आया

भारत के कदम का G-7 देशों ने विरोध किया है। जर्मनी के कृषि मंत्री केम ओजडेमिर का कहना है कि इससे दुनियाभर में खाद्य संकट पैदा होगा। G-7 देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, UK और अमेरिका शामिल है। G-7 देशों के एग्रीकल्चर मिनिस्टर्स भारत से गेहूं एक्सपोर्ट पर बैन नहीं लगाने की मांग कह रहे हैं।

वहीं, G-7 देशों के विरोध पर चीन ने भारत का बचाव किया है। चीन ने कहा है कि भारत जैसे विकासशील देशों को दोष देने से ग्लोबल फूड शॉर्टेज का समाधान नहीं होगा। चीन का कहना है कि G-7 के एग्रीकल्चर मिनिस्टर्स भारत से गेहूं एक्सपोर्ट पर बैन नहीं लगाने को कह रहे हैं। क्यों G-7 अपने एक्सपोर्ट में इजाफा कर फूड मार्केट की सप्लाई को स्थिर करने के लिए कदम नहीं उठाता है।

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा कहते हैं, भारत को पूरा अधिकार है कि वो पहले अपनी जरूरतों को पूरा करे। G-7 देशों को कोई अधिकार नहीं है कि वो भारत के कदम पर सवाल उठाए। G-7 देशों को इतनी ही चिंता है तो ये देश बायो फ्यूल में इस्तेमाल होने वाले अनाजों में 50% की कमी क्यों नहीं कर देते हैं। इससे दुनिया का खाद्य संकट खत्म हो सकता है। G-7 देश 90 मिलियन टन फूड बायो फ्यूल में खर्च करते हैं।

रूस-यूक्रेन जंग से भी गहराया इंटरनेशनल मार्केट में गेहूं का संकट

दुनिया में गेहूं का एक्सोपोर्ट करने वाले टॉप 5 देशों में रूस, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस और यूक्रेन हैं। इसमें से 30% एक्सपोर्ट रूस और यूक्रेन से होता है। रूस-यूक्रेन युद्ध से ना सिर्फ गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ा बल्कि एक्सपोर्ट पूरी तरह से बंद हो गया।

यूक्रेन के पोर्ट पर रूसी सेना की घेराबंदी है और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही अनाजों के स्टोर युद्ध में तबाह हो गए हैं।

रूस का आधा गेहूं मिस्र, तुर्की और बांग्लादेश खरीदते हैं। वहीं, यूक्रेन का गेहूं मिस्र, इंडोनेशिया, फिलीपींस, तुर्की और ट्यूनीशिया में जाता था। अब इन दोनों देशों से सप्लाई बंद है। ऐसे में भारत के गेहूं की मांग दुनिया में बढ़ गई है। नतीजा ये हुआ कि गेहूं का एक्सपोर्ट भी इस बार रिकॉर्ड स्तर पर हुआ।

पिछले 3 सालों में गेहूं के एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत ने पिछले साल के मुकाबले अपने गेहूं के एक्सपोर्ट में 215% तक की बढ़ोतरी की। अब जिस तरह से भारत ने अपने घरेलू खर्च की आपूर्ति के लिए एक्सपोर्ट पर बैन लगाए हैं उससे इंटरनेशनल मार्केट पर बड़ा असर पड़ेगा।

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