झारखंड
विवाह में हो रही है देरी,तो करें ये टोटके,मिलेगी मनचाहा जीवनसाथी

चैत्र माह की शुरुआत हो गई है। इस महीने नाकरण, मुंडन, विवाह आदि धार्मिक कार्यों के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं। इस माह कई घरों में शहनाइयां बजेंगी। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जिनकी विवाह की उम्र हो गई है इसके बावजूद भी उन्हें उचित वर या वधु नहीं मिल रहा है। लाख कोशिशों के बाद भी विवाह में कोई न कोई रुकावट आ रही है। या फिर विवाह दोष के कारण शादी होते-होते टूट जा रही है। ऐसे में आप चाहें तो कुछ ज्योतिष उपाय अपना सकते हैं। मान्यता है कि ज्योतिष उपाय के जरिए विवाह में आ रही रुकावटों को दूर किया जा सकता है। साथ ही इन उपायों को करने से मनचाहा जीवन साथी भी मिलता है। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में…
जल्दी विवाह के करें ये टोटके
लड़का या लड़की जिसके भी विवाह में देरी हो रही है, उसे शीघ्र विवाह के लिए भगवान शिव के मंदिर में जाना चाहिए और माता पार्वती के साथ शिवजी की भी पूजा करनी चाहिए। इससे आपको लाभ मिलेगा।घर में जब किसी की शादी हो रही हो तब दूल्हे का सेहरा लेकर कुंवारे लड़के के सिर पर रखने से उसकी भी शादी जल्दी होती है।
इसके अलावा कन्या को दुल्हन से सिर टकराना चाहिए। ऐसा करने से जल्द ही विवाह के लिए रिश्ते आने लगते हैं।इसके अलावा विवाह संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए छह मुखी रुद्राक्ष को धारण कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे जल्दी भी लाभ मिलता है।यदि किसी लड़की की शादी में बाधाएं आ रही हैं, तो उसे रात में तांबे के पात्र में जल भरकर भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखना चाहिए। सुबह ब्राह्ममुहूर्त में चुपचाप उस पात्र को लेकर खुले आकाश में चले जाएं।
इस पात्र में रखे जल से मांग भरें और पात्र को वापस भगवान के सामने रख दें। मान्यता है कि एक महीने तक ऐसा करने से विवाह के योग मजबूत हो जाते हैं।कहा जाता है कि विवाह योग्य लड़कियों को पीले रंग के कपड़े ज्यादा से ज्यादा पहनना चाहिए। इसके अलावा काले और गहरे नीले कपड़े पहनने से बचना चाहिए।
शादी योग्य लड़के हर मंगलवार हनुमान मंदिर में जाकर उनकी पूजा करनी चाहिए और उसके बाद उनके माथे से थोड़ा सिंदूर लेकर उसे राम-सीता के चरणों में अर्पित करनी चाहिए।
मान्यता है कि 21 मंगलवार तक ऐसा करने से शादी की राह में आ रही मुश्किल हट जाएगी।विवाह योग्य लड़के-लड़कियों को ध्यान रखना चाहिए कि उनका कमरा घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में न हो।
ऐसा करना उनकी शादी में सबसे बड़ी रुकावट डालता है। इसके अलावा दक्षिण दिशा में पैर करके सोना भी शादी में देरी कराता है। इसलिए सोते समय दिशा का विशेष ध्यान रखें।

झारखंड
सरेंडर के पीछे उसकी बेटी प्रेरणा: 10 लाख के इनामी माओवादी किया आत्मसमर्पण,सुरेश के खिलाफ थे 67 नक्सल कांड…
भाकपा माओवादियों के सेंट्रल कमिटी मेंबर मिसिर बेसरा के खास सहयोगी सुरेश सिंह मुंडा और लोदरो लोहरा ने झारखंड पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया। जोनल कमांडर सुरेश पर 10 दस लाख, जबकि लोदरो पर दो लाख का इनाम झारखंड पुलिस ने रखा था।
झारखंड के अभियान आईजी अमोल वी होमकर ने कहा कि भाकपा माओवादियों के खिलाफ संयुक्त अभियान चल रहा है। पुलिस माओवादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरेंडर पॉलिसी के तहत काम कर रही है, वहीं सरेंडर नहीं करने वाले के खिलाफ सख्त अभियान भी चलाया जा रहा है।
होमकर ने बताया कि केंद्रीय कमिटी सदस्य मिसिर बेसरा के सबसे खास सहयोगियों में सुरेश और लोदरो की गिनती होती थी। माओवादी जीवन कंडुलना के सरेंडर के बाद सुरेश और लोदरो को कोल्हान इलाके से पौड़ाहाट भेजा गया था, लेकिन संगठन में बढ़ती दबिश और प्रताड़ना से तंग आकर दोनों ने सरेंडर कर दिया।
सुरेश के खिलाफ 67 व लोदरो के खिलाफ 54 नक्सल कांड अलग अलग जिलों में दर्ज हैं। रांची के जोनल आईजी कार्यालय में माओवादियों द्वारा आत्मसमर्पण किए जाने के दौरान सीआरपीएफ आईजी राजीव सिंह, अभियान आईजी अमोल वी होमकर, आईजी पंकज कंबोज, डीआईजी अनूप बिरथरे और चाईबासा एसपी अजय लिंडा मौजूद थे।
बेटी ने पिता को सरेंडर के लिए किया था प्रेरित
माओवादी जोनल कमांडर की सरेंडर के पीछे उसकी बेटी प्रेरणा बनी। जानकारी के मुताबिक, साल 1997-98 में कुंदन पाहन का दस्ता सुरेश को अपने साथ उठा ले गया था। तब सुरेश की उम्र महज छह साल थी। बाल दस्ते में काम करते हुए चांडिल-बुंडू जोन के गांव में जनमिलिशिया में सुरेश को शामिल कर लिया गया। 2002 में उसे नाबालिग उम्र में ही एरिया कमांडर बना दिया गया। 2004 में सुरेश गिरफ्तार हो गया।
जेल में ही सुरेश ने मैट्रिक की परीक्षा पास की और संगठन से अलग होना चाहा, लेकिन तब बुंडू स्थित उसके गांव का ही दबंग बुद्धू दास ने उसे मारने की योजना बनायी। इसके बाद वह दोबारा माओवादी नकुल यादव और दिनेश उर्फ चश्मा से मिला और माओवादी संगठन में शामिल हो गया। साल 2012 में सुरेश को पौड़ाहाट सबजोनल कमांडर बनाकर संगठन ने उसे एसएलआर हथियार दिया।
2015 में प्रमोशन देकर आनंदपुर एरिया का जोनल कमांडर बनाया गया। सुरेश के मुताबिक, बीते कुछ साल पूर्व उसकी पत्नी की मौत हो गई। इकलौती बेटी उसके एक संबंधी के यहां रहती थी।
कई बार बेटी से मुलाकात की इच्छा होती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सुरेश ने बताया कि बेटी ने कई बार पत्र लिखकर संगठन छोड़ने का संदेश भिजवाया। इसलिए उसने मुख्यधारा में आने का फैसला लिया। इसके बाद 21 दिसंबर 2021 को किसी तरह लोदरो के साथ जंगल से निकल गया।
पुलिस के लिए काम करता था लोदरो फिर बना माओवादी
लोदरो लोहरा ने बताया कि साल 2009 तक अड़की इलाके की पुलिस के साथ उसका बेहतर संबंध था। गांव में उसके पास ट्रैक्टर था। ऐसे में पुलिस को वह मदद पहुंचाता था। इसी दौरान मेहनत उर्फ मोछू का दस्ता गांव में आया था।
माओवादियों ने उसे पुलिस की मुखबीरी नहीं करने की हिदायत दी। बाद में पुलिस गांव के लोगों पर माओवादियों के साथ सांठगांठ का आरोप लगाने लगी। ऐसे में वह मजबूरन 2010 में भाकपा माओवादी दस्ते में शामिल हो गया।
2011 में उसे पौड़ाहाट भेजा गया था। 2013 से वह संगठन में एरिया कमांडर की जिम्मेदारी निभा रहा था।
झारखंड
अजब प्यार की गजब कहानी : मुंशी का दिल आया एक बच्ची की माँ से,भगाकर ले गया गुजरात…

जी हां, ये है अजब प्यार की गजब कहानी. ईंट-भट्ठा मुंशी का दिल वहां काम करनेवाली एक महिला मजदूर पर आ गया. महिला मजदूर दो साल के एक बच्चे की मां है. उसने महिला से करीबी बढ़ाई और शादी कर अपनी दुनिया बसाने को राजी कर लिया. दोनों भागकर गुजरात चले गए. यह तय कर कि वहीं शादी करेंगे और आगे की जिंदगी खुशहाली से गुजर-बसर करेंगे. लेकिन प्रेम कहानी में अब नया मोड़ आ गया है. महिला के परिजन पुलिस की शरण में हैं और वे मुंशी की ज्यादती का हवाला देकर उसके चंगुल से छुड़ाने की गुहार लगा रहे हैं. मामला पूर्वी सिंंहभूम जिले के बोड़ाम थाना इलाके का है.
बताया जा रहा है दुंदु रुखसान गांव की एक बच्चे की मां को ईंट भट्टे के मुंशी ने पैसे और शादी का झांसा देकर गुजरात भगा ले गया. अब पांच माह बाद उसके साथ मारपीट किए जाने की जानकारी महिला ने अपने माता- पिता को दी है. इसके बाद माता- पिता ने एसएसपी से भेंट कर मुंशी के चंगुल से बेटी को छुड़ाने की गुहार लगाई है. महिला के माता-पिता ने बताया कि बेटी आशा लता सहिस का विवाह दुन्दु रुकसाना के रहने वाले खिरोध सहिस के साथ सात वर्ष पूर्व हुआ था. दोनों का एक बेटा भी है. पति- पत्नी अलग-अलग ईंट भट्टा में काम कर परिवार का भरण-पाेषण कर रहे थे.
इसी क्रम में ईंट भट्टा के मुंशी ने पैसे के लालच देकर आशालता को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया. इसके बाद 10 सितंबर को दो वर्षीय बच्चे को घर में छोड़कर ईंट भट्ठा गई आशा लता को मुंशी भगाकर गुजरात ले गया. इसकी जानकारी परिवार वालों को होने पर 12 सितंबर को बोड़ाम थाना में गुमशुदा की शिकायत दर्ज कराई गई लेकिन पुलिस उसे खोज नहीं पाई.
कुछ दिन पूर्व आशा लता ने अपने माता-पिता को फोन कर कहा कि वह गुजरात के अहमदाबाद में है और उसके साथ प्रेमी मुंशी मारपीट करता है. वे उसे यहां से छुड़ाकर ले जाएं. यह जानकारी माता-पिता ने जेएमएम के लोगों को दी. जिसके बाद उनके सहयोग से बुधवार को परिजन एसएसपी से भेंट कर बेटी को मुंशी के चंगुल से छुड़ा लाने की गुहार लगाई है.
झारखंड
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